A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित समाचार उपलब्ध नहीं हैं।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  1. केंद्र की सीमा योजना के विरुद्ध प्रस्ताव

स्वास्थ्य

  1. न्यायालय ने पतंजलि को दंडित क्यों किया?

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

  1. गगनयान भारत के लिए क्या बदलाव लाएगा?

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित समाचार उपलब्ध नहीं हैं।

E. संपादकीय:

आज इससे संबंधित समाचार उपलब्ध नहीं हैं।

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. पाकिस्तान जा रहा चीनी ‘परमाणु’ कार्गो जब्त किया गया
  2. शाह ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए छत्रक (अंब्रेला) निकाय की शुरुआत की
  3. IAF ने LAC के पास लैंडिंग स्ट्रिप की ब्लैक-टॉपिंग का काम पूरा किया
  4. गूगल के ऐप को डीलिस्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती
  5. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ हमारे संसाधनों का प्रबंधन

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

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H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

03 March 2024 Hindi CNA
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केंद्र की सीमा योजना के विरुद्ध प्रस्ताव

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

मुख्य परीक्षा: भारत-म्यांमार सीमा मुद्दे।

प्रसंग:

  • भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR) समझौते को खत्म करने के केंद्र के फैसले का विरोध करने वाली मिजोरम और नागालैंड विधानसभाओं द्वारा हाल ही में पारित प्रस्तावों ने इस सीमा के आसपास के जटिल मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है।

मुद्दे:

  • जातीय संरचना और ऐतिहासिक संबंध: सीमावर्ती क्षेत्रों में गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों के साथ एक जटिल जातीय संरचना है। औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा सीमाएँ थोपने से एक ही जातीयता और संस्कृति के लोगों को उनकी सहमति के बिना विभाजित कर दिया गया।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: सीमा पर बाड़ लगाने और FMR को ख़त्म करने का निर्णय स्पष्ट रूप से अवैध प्रवासन, दवाओं, हथियारों तथा गोला-बारूद की तस्करी और चरमपंथियों की सीमा पार आवाजाही जैसे मुद्दों को संबोधित करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालाँकि, सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में इन उपायों की प्रभावशीलता बहस का विषय बनी हुई है।
  • भू-राजनीतिक गतिशीलता: म्यांमार के साथ भारत के संबंधों में कूटनीतिक उतार-चढ़ाव आता रहा है। सीमा पर जातीय मिलिशिया और चरमपंथी समूहों की मौजूदगी भू-राजनीतिक परिदृश्य में जटिलता को बढ़ाती है।

महत्व:

  • सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव: ये प्रस्ताव सदियों पुराने संबंधों के संभावित विघटन और पैतृक भूमि के विभाजन के बारे में सीमावर्ती समुदायों की चिंताओं को दर्शाते हैं। वे सीमा से संबंधित नीतियों के सांस्कृतिक और सामाजिक निहितार्थों पर विचार करने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।
  • राजनीतिक अभिव्यक्ति: प्रस्ताव राज्य विधानसभाओं के लिए केंद्रीय नीतियों के संबंध में अपनी राय और चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करते हैं। वे क्षेत्र के विविध राजनीतिक परिदृश्य और लोगों की भावनाओं को दर्शाते हैं।

समाधान:

परामर्शी दृष्टिकोण: सीमावर्ती राज्यों द्वारा उठाई गई चिंताओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य दोनों के हितधारकों को शामिल करते हुए एक परामर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। प्रभावी सीमा नीतियों को तैयार करने के लिए संवाद और आम सहमति बनाना आवश्यक है।

सुरक्षा के लिए संतुलित दृष्टिकोण: हालाँकि सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है जो सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिशीलता को ध्यान में रखता हो। इसमें सीमा पर बाड़ लगाने के साथ-साथ वैकल्पिक उपाय लागू करना शामिल हो सकता है।

सारांश:

  • केंद्र की सीमा योजना के खिलाफ मिजोरम और नागालैंड विधानसभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव भारत की सीमा नीतियों को आकार देने वाले ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा कारकों की जटिल परस्पर क्रिया को रेखांकित करते हैं।

न्यायालय ने पतंजलि को दंडित क्यों किया?

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

स्वास्थ्य

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

मुख्य परीक्षा: भ्रामक विज्ञापन अभियानों का मुद्दा।

प्रसंग:

  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में पतंजलि आयुर्वेद को दंडित किए जाने से दवाओं के भ्रामक विज्ञापन अभियानों का मुद्दा सामने आया है, विशेष रूप से उन दवाओं पर जो पुरानी बीमारियों के लिए चमत्कारिक इलाज की पेशकश करने का दावा करते हैं। यह घटनाक्रम सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा, चिकित्सा विज्ञापनों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियमों के महत्व को रेखांकित करता है।

मुद्दे:

  • भ्रामक विज्ञापन प्रथाएँ: पतंजलि के विज्ञापनों पर एलोपैथी को बदनाम करने और अपने उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में अतिरंजित दावे करने का आरोप लगाया गया है। ये भ्रामक अभियान औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954 (DMR&OA) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (CPA) का उल्लंघन करते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं।
  • नियामक ढांचे का उल्लंघन: न्यायालय की चेतावनियों और निर्देशों के बावजूद, पतंजलि ने DMR&OA द्वारा उल्लिखित नियमों की अवहेलना करते हुए, पुरानी बीमारियों के लिए स्थायी इलाज का वादा करने वाले विज्ञापन जारी करना जारी रखा। सख्त प्रवर्तन तंत्र की कमी के कारण इस तरह के उल्लंघन जारी रहते हैं।

महत्व:

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ: औषधीय उत्पादों के भ्रामक विज्ञापन न केवल उपभोक्ताओं को धोखा देते हैं, बल्कि झूठे ‘चमत्कारिक उपचार’ को बढ़ावा देकर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करते हैं। मरीज उचित चिकित्सा देखभाल लेने में देरी कर सकते हैं या अप्रमाणित उपचारों के पक्ष में पारंपरिक उपचार छोड़ सकते हैं, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो सकती है।
  • उपभोक्ता अधिकार: पतंजलि का दंड उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और विज्ञापन प्रथाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डालता है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में शोषण और गलत सूचना को रोकने के लिए कड़े नियामक उपाय आवश्यक हैं।

समाधान:

  • मौजूदा कानूनों का प्रवर्तन: दवाओं पर भ्रामक विज्ञापन अभियानों को रोकने के लिए DMR&OA और CPA जैसे कानूनों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। अधिकारियों को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए और भविष्य में अपराधों को रोकने के लिए उचित दंड लगाना चाहिए।
  • उन्नत निगरानी: नियामक निकायों को अवैध और भ्रामक विज्ञापनों की प्रभावी ढंग से पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना चाहिए। चिकित्सा संघों और उपभोक्ता अधिकार समूहों सहित प्रासंगिक हितधारकों के साथ सहयोग, विज्ञापन प्रथाओं की व्यापक निगरानी की सुविधा प्रदान कर सकता है।

सारांश:

  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पतंजलि को दंडित किया जाना चिकित्सा विज्ञापन में नैतिक मानकों को बनाए रखने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। भ्रामक विज्ञापनों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए नियामक अधिकारियों, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और नीति निर्माताओं के ठोस प्रयास की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी प्रदान की जाए, जिससे वे अपने स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में सूचित निर्णय ले सकें।

गगनयान भारत के लिए क्या बदलाव लाएगा?

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: गगनयान

मुख्य परीक्षा: गगनयान का महत्व

प्रसंग:

  • गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण छलांग को चिन्हित करता है, क्योंकि इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी प्रक्षेपण यान के माध्यम से पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा शुरू किया गया यह मिशन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमताओं और नई सीमाओं को खोजने की उसकी आकांक्षाओं का प्रमाण है।

गगनयान और इसरो के लक्ष्य:

  • प्रदर्शन मिशन: गगनयान एक प्रदर्शन मिशन है जिसका उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक विभिन्न प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करना है। इसका उद्देश्य भविष्य के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करते हुए इन प्रौद्योगिकियों के उत्पादन, योग्यता और उपयोग में भारत की दक्षता को प्रदर्शित करना है।
  • दीर्घकालिक उद्देश्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसरो को 2035 तक एक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय को उतारने का निर्देश अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को उजागर करता है। इन उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति की आवश्यकता है।
  • तकनीकी नवाचार: इसरो के व्यापक लक्ष्यों में तकनीकी नवाचार, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। गगनयान इन उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में कार्य करता है, जो वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है।

चालक दल युक्त उड़ान की तकनीकी महत्वाकांक्षा:

  • सुरक्षा और विश्वसनीयता: अंतरिक्ष की कठोर परिस्थितियों के बीच अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में चालक दल युक्त अंतरिक्ष उड़ान अद्वितीय चुनौतियाँ पेश करती है। मिशन की सफलता के लिए विश्वसनीय जीवन समर्थन प्रणाली, प्रक्षेपण, पुनः प्रवेश और लैंडिंग तंत्र विकसित करना महत्वपूर्ण है।
  • मानव-रेटेड प्रौद्योगिकियाँ: चालक दल युक्त मिशनों के लिए कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए इसरो के पास मानव-रेटेड कई प्रौद्योगिकियाँ हैं। अंतरिक्ष यान और प्रणालियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कठोर परीक्षण और सत्यापन आवश्यक है।
  • परीक्षण प्रक्रियाएँ: चालक दल मिशन से पहले, इसरो अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन और सुरक्षा सुविधाओं को मान्य करने के लिए कई परीक्षण उड़ानें आयोजित करता है। ये परीक्षण उड़ानें प्रक्षेपण, कक्षा में प्रवेश, पुनः प्रवेश और लैंडिंग सहित विभिन्न मिशन परिदृश्यों को सिम्युलेट करती हैं।

गगनयान के घटक:

  • प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM-3): LVM-3 एक तीन चरणों वाला रॉकेट है जो कक्षीय मॉड्यूल को पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम है। यह कुशल प्रणोदन के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से सुसज्जित है।
  • कक्षीय मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को मिलाकर बने कक्षीय मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्री रहते हैं और इसमें जीवन समर्थन और प्रणोदन के लिए आवश्यक प्रणालियाँ होती हैं। इसमें उतरने के लिए पैराशूट और आपात स्थिति के लिए क्रू स्केप प्रणाली शामिल है।
  • चालक दल: गगनयान के चालक दल में भारतीय वायु सेना के कर्मी शामिल हैं जो अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी के लिए कठोर प्रशिक्षण से गुजरते हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें ‘व्योममित्र’ नामक एक गाइनोइड है, जो अंतरिक्ष यान पर स्थितियों की निगरानी के लिए सेंसर से सुसज्जित है।

उपलब्धियाँ और भविष्य की संभावनाएँ:

  • अंतरिक्ष सुधार: न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना अंतरिक्ष सुधारों और व्यावसायीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन पहलों का उद्देश्य अंतरिक्ष गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • भू-राजनीतिक महत्व: गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ाता है और इसे वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करता है। यह अंतरिक्ष अन्वेषण और वैज्ञानिक प्रयासों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के भारत के प्रयासों के अनुरूप है।

सारांश:

  • गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान में इसकी तकनीकी शक्ति और महत्वाकांक्षा को प्रदर्शित करता है। जैसे-जैसे इसरो इस मिशन को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, यह वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में एक दुर्जेय खिलाड़ी के रूप में भारत के उद्भव को रेखांकित कर रहा है, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, राष्ट्रीय विकास और अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।

संपादकीय-द हिन्दू

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प्रीलिम्स तथ्य:

  1. पाकिस्तान जा रहा चीनी ‘परमाणु’ कार्गो जब्त किया गया
  2. प्रसंग:

    • हाल के एक घटनाक्रम में, भारतीय कस्टम ने मुंबई बंदरगाह पर कराची, पाकिस्तान के लिए जा रही एक खेप को रोक लिया, जिससे चीन द्वारा दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के संभावित हस्तांतरण को लेकर चिंता बढ़ गई जो पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में योगदान दे सकती है। यह घटना मौजूदा प्रसार जोखिमों और अंतर्राष्ट्रीय कार्गो गतिविधियों की निगरानी में कड़ी सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

    मुद्दे:

    • दोहरे उपयोग वाले कार्गो की जब्ती: भारतीय कस्टम ने 22 जनवरी को कराची, पाकिस्तान जा रहे GKD, इटली द्वारा निर्मित दो उन्नत कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल (CNC) मशीनों को जब्त कर लिया। इन मशीनों का पाकिस्तान के परमाणु मिसाइल विकास कार्यक्रम में संभावित अनुप्रयोग है, जिससे प्रसार संबंधी चिंताएं पैदा हो रही हैं। .
    • उत्पत्ति और गंतव्य: यह खेप चीन के शेकोऊ बंदरगाह से व्यापारी जहाज CMA CGM अत्तिला के माध्यम से कराची बंदरगाह के लिए भेजी गई थी। कॉसमॉस इंजीनियरिंग, एक फर्म जो पहले से ही भारतीय कस्टम की निगरानी सूची में है, की पहचान प्राप्तकर्त्ता (consignee) के रूप में की गई थी।
    • प्रसार जोखिम: मिसाइल विकास के लिए महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करने में सक्षम इंटरसेप्टेड उपकरण, चीन से पाकिस्तान में प्रौद्योगिकी के अवैध हस्तांतरण पर चिंता उत्पन्न करता है, जो संभावित रूप से अंतर्राष्ट्रीय अप्रसार मानदंडों का उल्लंघन करता है।

    महत्व:

    • सुरक्षा निहितार्थ: यह जब्ती अवैध प्रसार गतिविधियों से उत्पन्न मौजूदा चुनौतियों पर प्रकाश डालती है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यह परमाणु प्रसार में योगदान देने वाली दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के अनधिकृत हस्तांतरण को रोकने के लिए मजबूत उपायों की आवश्यकता पर जोर देता है।
    • कूटनीतिक प्रभाव: इस प्रकृति की घटनाएं भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तनाव उत्पन्न कर सकती हैं, क्योंकि वे अंतर्राष्ट्रीय अप्रसार प्रतिबद्धताओं के अनुपालन और व्यापार प्रथाओं में पारदर्शिता के बारे में प्रश्न उत्पन्न करती हैं।
  3. शाह ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए छत्रक (अंब्रेला) निकाय की शुरुआत की
  4. प्रसंग:

    • केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम लिमिटेड का उद्घाटन किया, जो शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए एक छत्रक (अंब्रेला) संगठन के रूप में कार्यरत है। इस पहल का उद्देश्य UCBs के बीच स्व-नियमन को बढ़ाना और नियामक मानदंडों के अनुपालन को सुविधाजनक बनाना तथा देश भर में उनके विकास और विस्तार को बढ़ावा देना है।

    मुद्दे:

    • नियामक अनुपालन: शहरी सहकारी बैंकों को अक्सर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित नियामक आवश्यकताओं का पालन करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन विनियमों का अनुपालन न करने से बैंकिंग क्षेत्र में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता में बाधा आ सकती है।
    • वित्तीय प्रदर्शन: जबकि UCBs शहरी क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उन्हें संपत्ति की गुणवत्ता, विशेष रूप से गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) से संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ता है। बैंकिंग क्षेत्र में स्थिरता और व्यवहार्यता बनाए रखने के लिए इन वित्तीय चिंताओं को दूर करना महत्वपूर्ण है।

    महत्व:

    • उन्नत स्व-नियमन: राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम लिमिटेड की स्थापना UCBs के बीच स्व-नियमन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस प्रयास का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य उनके संचालन को सुव्यवस्थित करना, शासन मानकों में सुधार करना और नियामक मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।
    • UCBs का विस्तार: UCBs को समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान करके, अंब्रेला संगठन भारत के विभिन्न शहरों में उनके विस्तार को सुविधाजनक बनाना चाहता है। यह अधिक वित्तीय समावेशन और पहुंच में योगदान देगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं सीमित हो सकती हैं।
  5. IAF ने LAC के पास लैंडिंग स्ट्रिप की ब्लैक-टॉपिंग का काम पूरा किया
  6. प्रसंग:

    • भारतीय वायु सेना (IAF) ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित न्योमा में एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (ALG) की ब्लैक-टॉपिंग पूरी कर ली है। इस रणनीतिक बुनियादी अवसंरचना के विकास का उद्देश्य क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाना है, खासकर चीन के साथ सीमा तनाव के मद्देनजर।

    मुद्दे:

    • सामरिक महत्व: न्योमा ALG की LAC से निकटता इसे पूर्वी लद्दाख में भारत की रक्षा स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति बनाती है। हालाँकि, इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण चीन से संभावित खतरों के प्रति इसकी संवेदनशीलता को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
    • बुनियादी अवसंरचना का विकास: जबकि लैंडिंग स्ट्रिप की ब्लैक-टॉपिंग में प्रगति हुई है, वहीं इसे लड़ाकू विमानों के अनुरूप बनाने के लिए रनवे का विस्तार करने के लिए आगे काम चल रहा है। इस क्षेत्र में भारत की हवाई क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस बुनियादी अवसंरचना परियोजना का पूरा होना महत्वपूर्ण है।

    महत्व:

    • उन्नत परिचालन क्षमताएँ: न्योमा ALG के विकास से LAC के पास विमान संचालन के लिए रणनीतिक रूप से स्थित बेस प्रदान करके भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे सुरक्षा बलों की तेजी से तैनाती हो सकेगी और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए प्रतिक्रिया समय में सुधार होगा।
    • खतरों के खिलाफ प्रतिरोध: न्योमा ALG में मजबूत बुनियादी अवसंरचना विरोधियों, विशेष रूप से चीन से संभावित खतरों के खिलाफ निवारक के रूप में कार्य करता है। यह क्षेत्र में अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
  7. गूगल के ऐप को डीलिस्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती
  8. प्रसंग:

    • इन-ऐप खरीदारी के लिए प्लेटफ़ॉर्म शुल्क के विरोध के कारण गूगल के एंड्रॉइड प्ले स्टोर से कुछ भारतीय ऐप्स को हटाने से विवाद खड़ा हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि गूगल द्वारा इस तरह की कार्रवाइयों की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस मुद्दे के समाधान के लिए सरकार और गूगल प्रतिनिधियों के बीच एक निर्धारित बैठक होगी।

    मुद्दे:

    • प्लेटफ़ॉर्म शुल्क: गूगल को ऐप डेवलपर्स को इन-ऐप खरीदारी पर 11-30% तक कमीशन का भुगतान करने की आवश्यकता होती है, जिसके कारण मेट्रीमोनियल, स्ट्रीमिंग और नौकरी खोज क्षेत्रों सहित कुछ भारतीय ऐप्स ने इसका विरोध किया है।
    • भारतीय ऐप्स पर प्रभाव: इन ऐप्स को प्ले स्टोर से हटाने से उनकी दृश्यता, उपयोगकर्ता अधिग्रहण और राजस्व सृजन पर काफी असर पड़ सकता है। कई भारतीय ऐप डिजिटल वस्तुओं के लिए सीधे भुगतान पर निर्भर हैं, और प्लेटफ़ॉर्म शुल्क लगाने से उनके विकास और स्थिरता में बाधा आ सकती है।

    महत्व:

    • स्टार्ट-अप की सुरक्षा: मंत्री वैष्णव भारतीय स्टार्ट-अप को उन प्रथाओं से बचाने के महत्व को रेखांकित करते हैं जो डिजिटल बाजार में उनके नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को बाधित कर सकती हैं।
    • नीति स्पष्टता: अत्यधिक प्लेटफ़ॉर्म शुल्क के खिलाफ भारतीय ऐप डेवलपर्स के हितों की सुरक्षा पर सरकार का रुख डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में नियामक निरीक्षण और नीति प्रवर्तन के लिए एक मिसाल कायम करता है।
  9. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ हमारे संसाधनों का प्रबंधन

प्रसंग:

  • कृत्रिम बुद्दिमत्ता (AI) आज की दुनिया में सर्वव्यापी हो गया है, जो विभिन्न चुनौतियों का समाधान पेश करता है, साथ ही नौकरी विस्थापन और गोपनीयता उल्लंघन के बारे में चिंताएं भी बढ़ाता है। हालाँकि, विशाल मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके बड़े पैमाने की समस्याओं का समाधान करने की AI की क्षमता की व्यापक मान्यता है। भारत में, जहां विकास की गति तेज़ हो रही है, सीमित संसाधनों, विशेषकर पानी का प्रबंधन एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। AI इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने का अवसर प्रस्तुत करता है।

मुद्दे:

  • संसाधन सीमाएँ: भारत को संसाधन सीमाओं का सामना करना पड़ता है, विशेष रूप से जल प्रबंधन में, कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आती है और अन्य में सूखा पड़ता है। नदी जोड़ो परियोजनाओं जैसे पारंपरिक समाधानों को अनिश्चितताओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिससे उनके कार्यान्वयन में बाधा आ रही है।
  • जटिल उद्देश्य: नदी जोड़ जैसी पहल में जटिल उद्देश्य शामिल हैं, जैसे पानी के उपयोग को कम करते हुए कृषि उपज को अधिकतम करना। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इसमें शामिल विभिन्न कारकों और दुविधाओं की व्यापक समझ की आवश्यकता होती है।

महत्व:

  • जल प्रबंधन: भारत के सतत विकास के लिए प्रभावी जल प्रबंधन महत्वपूर्ण है, खासकर जलवायु परिवर्तन और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न के कारण। AI संसाधन आवंटन को अनुकूलित करने और जल उपयोग दक्षता में सुधार करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • अनुकूलन: एआई-आधारित मॉडलिंग बहुउद्देश्यीय अनुकूलन की अनुमति देता है, जहां कृषि उपज को अधिकतम करने और जल संसाधनों के संरक्षण जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ अनुकूलित किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि सर्वोत्तम समग्र परिणाम प्राप्त करने के लिए निर्णय लिए जाएं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

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UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन “दोहरे उपयोग वाली परमाणु प्रौद्योगिकी” की अवधारणा को सबसे अच्छी तरह परिभाषित करता है?

  1. ऐसी प्रौद्योगिकी जिसमें सैन्य और नागरिक दोनों अनुप्रयोग हों।
  2. परमाणु प्रौद्योगिकी का उपयोग विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
  3. अंतरिक्ष अन्वेषण और ऊर्जा उत्पादन के लिए डिज़ाइन की गई प्रौद्योगिकी।
  4. चिकित्सा अनुसंधान और निदान में अनुप्रयोगों लिए परमाणु प्रौद्योगिकी।

उत्तर: a

प्रश्न 2. “भारत और म्यांमार के बीच मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR) समझौते” के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. मुक्त आवाजाही व्यवस्था ने भारत-म्यांमार सीमा के 16 किमी के भीतर के निवासियों को एक विशेष पास के साथ दो सप्ताह तक स्वतंत्र रूप से यात्रा करने की अनुमति दी।
  2. इसे भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” के हिस्से के रूप में 2018 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं:

  1. कथन 1
  2. कथन 2
  3. दोनों
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: c

प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन 1: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदने की गारंटी देती है।

कथन 2: किसानों को कुछ फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा बुआई के मौसम से पहले MSP की घोषणा की जाती है।

कथन 3: MSP के कार्यान्वयन का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें अपनी फसलों के लिए लाभकारी मूल्य प्राप्त हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल कथन 1 सही है।
  2. केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
  3. केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
  4. तीनों कथन सही हैं।

उत्तर: d

प्रश्न 4. “प्रशासन में कमिश्नरी प्रणाली” के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. पुलिस अधीक्षक (SP) जिला मजिस्ट्रेट (DM) को रिपोर्ट करते हैं।
  2. SP का फोकस जांच और कानून-व्यवस्था पर होता है; DM के पास मजिस्ट्रियल शक्तियां होती हैं।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. कथन 1
  2. कथन 2
  3. दोनों
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: d

प्रश्न 5. संविधान दिवस के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन-I: नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।

कथन- II: 26 नवंबर, 1949 को, भारत की संविधान सभा ने भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए डॉ. बी. आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति का गठन किया।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

  1. कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
  2. कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है
  3. कथन-I सही है किन्तु कथन-II गलत है
  4. कथन-I गलत है किन्तु कथन-II सही है

उत्तर: d

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

  1. “अंतरिक्ष अन्वेषण ने निजी संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ परग्रहीय अन्वेषण और दोहन के भविष्य को आकार देने के साथ एक नए युग में प्रवेश किया है।” इसके आलोक में, राष्ट्रीय विकास के लिए अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं का लाभ उठाने में भारत की स्थिति और रणनीति तथा वैश्विक मंच पर इसके कद का मूल्यांकन कीजिए। (“Space exploration has entered a new era with increased participation from private entities and international collaborations shaping the future of extraterrestrial exploration and exploitation.” In light of this, evaluate India’s position and strategy in leveraging its space capabilities for national development and its stature on the global stage.)
  2. 250 शब्द (सामान्य अध्ययन – III, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

  3. सार्वजनिक विश्वास और स्वास्थ्य देखभाल नीतियों पर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए। इन चुनौतियों का शमन करने में नियामक निकायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए और ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के उपाय सुझाइये। (Analyze the impact of misleading advertisements in the healthcare sector on public trust and healthcare policies. Discuss the role of regulatory bodies in mitigating these challenges and suggest measures for strengthening consumer protection against such Advertisements.)

250 शब्द (सामान्य अध्ययन – II, सामाजिक मुद्दे)

(नोट: मुख्य परीक्षा के अंग्रेजी भाषा के प्रश्नों पर क्लिक कर के आप अपने उत्तर BYJU’S की वेव साइट पर अपलोड कर सकते हैं।)