04 सितंबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

कृषि

  1. नैनो यूरिया

भारतीय अर्थव्यवस्था

  1. ऋण ऐप घोटाले

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

अर्थव्यवस्था:

  1. राज्यों में मुद्रास्फीति की दर अलग-अलग होने के कारण

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. वोस्तोक-22 में भारत नौसैनिक अभ्यास में क्यों शामिल नहीं हो रहा है?

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)
  2. LCA-Mk2

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

कृषि:

नैनो यूरिया

विषय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक का विकास।

मुख्य परीक्षा: दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया का महत्व

संदर्भ: अधूरे परीक्षणों के बावजूद नैनो यूरिया की मंजूरी में तेजी आई है।

भूमिका:

  • नैनो यूरिया का विकास भारतीय किसान उर्वरक सहकारी (इफको) लिमिटेड द्वारा किया गया है।
  • यह भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एकमात्र नैनो उर्वरक है और उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में शामिल है।
  • इसके विज्ञापन में इसे पैकेज्ड यूरिया पर किसान की निर्भरता को कम करने के समाधान के रूप में दिखाया गया है।
  • अधूरे परीक्षण के बावजूद व्यावसायिक अनुप्रयोग के लिए इसका तेजी से उपयोग किया गया है।
  • एक नए उर्वरक को मंजूरी देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन के तीन सत्र किए जाते हैं, लेकिन नैनो यूरिया के मामले में इसे घटाकर दो कर दिया गया।

नैनो यूरिया बनाम पारंपरिक यूरिया:

  • नैनो यूरिया पेटेंट की गई और स्वदेशी रूप से निर्मित तरल पदार्थ है जिसमें यूरिया के नैनोकण होते हैं।
  • इस तरल पदार्थ की आधा लीटर की बोतल 45 किलो दानेदार यूरिया का कार्य कर सकती है और यह पारंपरिक यूरिया की तुलना में सस्ता है।
  • दानेदार यूरिया का उपयोग पारंपरिक रूप से गेहूं, चावल और सरसों जैसी फसलों की खेती में किया जाता है।
  • पारंपरिक यूरिया के एक बैग के स्थान पर नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि इसमें 40,000 ppm नाइट्रोजन होता है, जो पारंपरिक यूरिया के एक बैग (45 किलो) द्वारा प्रदान किए जाने वाले नाइट्रोजन पोषक तत्व के बराबर होता है।
  • इसका उपयोग दो चरणों में किया जाता है- पहले पैकेट का उपयोग बुवाई के शुरुआती चरण के दौरान किया जाता है। दूसरे पैकेट का उपयोग तब किया जाता है जब अंकुरित होने के बाद पौधे में पत्ते निकल जाते है, और पौधे का विकास प्रजनन चरण के करीब पहुंच जाता है।
  • नैनो यूरिया के आ जाने के बावजूद, प्रारंभिक चरण के दौरान फसल के विकास हेतु बेसल नाइट्रोजन के रूप में पारंपरिक यूरिया अभी भी आवश्यक है।
  • नैनो यूरिया पौधे के विकास के प्रजनन चरण में उपयोगी हो सकता है।
  • पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करने में पारंपरिक यूरिया 30-50 प्रतिशत तक प्रभावी है, जबकि नैनो यूरिया तरल की प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक है।
  • नैनो तकनीक का उपयोग कर नैनो यूरिया में अल्ट्रा-सूक्ष्म कणों को डिजाइन किया जाता है जो उच्च सतह-द्रव्यमान अनुपात (surface-mass ratios) प्रदान करते हैं और पौधों में पोषक तत्वों के नियंत्रित वितरण में सहायक होते हैं।
  • अल्ट्रा-सूक्ष्म आकार और सतह के गुणों के कारण, नैनो यूरिया पत्तियों पर छिड़काव किए जाने पर तरल पौधों द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित हो जाता है।

महत्त्व:

  • सभी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 2019 से 21 राज्यों में 94 फसलों पर सभी मौसमों में फील्ड परीक्षण किए गए।
  • नैनो यूरिया तरल बेहतर पोषण गुणवत्ता के साथ फसलों के उत्पादन में वृद्धि करेगा।
  • पारंपरिक पद्धति की तुलना में नैनो यूरिया का उपयोग करने वाले क्षेत्रों में औसत पैदावार में 7% की वृद्धि हुई।
  • दानेदार यूरिया के अत्यधिक अनुप्रयोग को कम करके जो जलवायु परिवर्तन की समस्याओं के साथ मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, नैनो यूरिया तरल दानेदार यूरिया के कारण होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम कर सकता है ।
  • इससे लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग की लागत में काफी कमी आएगी।
  • 2019-20 में 33.6 मिलियन टन की वार्षिक खपत के साथ भारत में खपत होने वाले कुल नाइट्रोजन उर्वरकों में यूरिया की हिस्सेदारी 82% है।
  • केंद्र सरकार के दावे के अनुसार, 2025 तक, भारत घरेलू यूरिया उत्पादन के साथ-साथ नैनो यूरिया के उत्पादन में “आत्मनिर्भर” होगा और अब 90 लाख टन वार्षिक आयात की आवश्यकता नहीं होगी। इससे करीब 40,000 करोड़ के सरकारी राजस्व की बचत होगी।

सारांश:

  • सब्सिडी लागत को कम करने के अलावा नैनो यूरिया का उद्देश्य देश में पारंपरिक यूरिया के असंतुलित और अंधाधुंध उपयोग को कम करना, फसल उत्पादकता बढ़ाना और मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण को कम करना है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित

अर्थव्यवस्था

ऋण ऐप घोटाले

विषय: बैंकिंग क्षेत्र और NBFCs।

मुख्य परीक्षा: भारत में डिजिटल ऋण

संदर्भ: हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने ऋण ऐप मामलों में कई फिनटेक फर्मों की जाँच की।

भूमिका:

  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सूक्ष्म ऋण ऐप मामले के संबंध में चीन स्थित संदिग्धों द्वारा नियंत्रित या संचालित विभिन्न फिनटेक संस्थाओं की तलाशी ली।
  • इसने मोबाइल ऐप के माध्यम से सूक्ष्म ऋण लेने वालों से जबरन वसूली और उत्पीड़न में कथित संलिप्तता की शिकायत के आधार पर मोबाइल ऐप चलाने वाली इन संस्थाओं के मर्चेंट आईडी और बैंक खातों में रखे ₹17 करोड़ को भी जब्त कर लिया है।

सूक्ष्म ऋण ऐप केस:

  • विभिन्न फिनटेक कंपनियां सात से 30 दिनों तक की अवधि के लिए तत्काल व्यक्तिगत ऋण प्रदान कर रही थीं।
  • देशभर से लोन एप घोटाले के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में पीड़ितों द्वारा आत्महत्या भी की गई।
  • कोविड महामारी के दौरान जब कई लोगों की आजीविका चली गई और उन्हें अपने दिन-प्रतिदिन के खर्चों को पूरा करने के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी, ऐसे समय में ऋण ऐप की लोकप्रियता बढ़ी ।
  • हालांकि,महीने के अंत में अतिरिक्त धन की तलाश करने वाले कॉरपोरेट कर्मचारियों या वर्चुअल करेंसी खरीदने के लिए धन की जरूरत वाले युवाओं में सूक्ष्म ऋण की मांग बढ़ी।
  • इन ऐप्स को डाउनलोड करने के बाद लोन कंपनियों को फोन का पूरा डेटा मिल गया।
  • विशेष रूप से ब्याज दरों के संबंध में नियमों और शर्तों के गलत विवरण का परिणाम यह हुआ कि लोगों ने प्रति माह 66% ब्याज का भुगतान किया।
  • डिफॉल्ट की स्थिति में, रिकवरी एजेंट जिनके पास फोन बुक तक पहुंच थी, ने दबाव बनाने के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन करके कहा कि उन्हें ऋण गारंटर के रूप में नामित किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उधारकर्ता भुगतान करें।
  • एजेंटों ने उधारकर्ता की छवि को ख़राब करने के लिए नग्न तस्वीरों या अश्लील क्लिप का भी इस्तेमाल किया और फिर इसे पीड़ित के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भेज दिया।

चीन स्थित संदिग्ध:

  • प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इन संस्थाओं को चीन में स्थित संदिग्धों द्वारा नियंत्रित या संचालित किया जाता था।
  • उन्होंने भारतीय नागरिकों के जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और उन्हें डमी निदेशक बना दिया।
  • कई मामलों में, पीड़ितों से पैसा लेने के बाद, इसे क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया जाता था और चीन भेज दिया जाता था ।
  • चूंकि फिनटेक कंपनियों को ऋण देने के लिए आरबीआई से नए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं थी, इसलिए उन्होंने बड़े पैमाने पर ऋण देने की गतिविधियों में शामिल होने के लिए पहले से ही निष्क्रिय भारतीय NBFC के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) मार्ग तैयार किया।
  • जांच एजेंसियों ने पाया कि विभिन्न फिनटेक कंपनियां NBFC की मिलीभगत से नियामक प्रणाली को दरकिनार करते हुए ऋण देने में लिप्त थे।

भावी कदम:

  • ईडी ने आरबीआई को पत्र लिखकर डिजिटल ऋण में चीनी ऋण ऐप से जुड़े NBFC के लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी।
  • देय शुल्क और शुल्क, ग्राहक डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के संबंध में 2021 में डिजिटल ऋण पर आरबीआई के कार्य समूह द्वारा की गई सिफारिशों का कार्यान्वयन और इसमें अनियमित उधार गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कानून बनाने की सिफारिश भी शामिल है।
  • गूगल ने भी सख्त दिशा निर्देश पारित किए हैं, जिसमें उसके Play Store पर केवल उन्हीं ऋण ऐप्स को अनुमति दी गई है जो RBI के साथ पंजीकृत हैं।
  • ऐसे संदिग्ध ऋण ऐप्स के खिलाफ जन जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है।
  • RBI यह सुनिश्चित करने के लिए NBFC का डिजिटल पर्यवेक्षण करेगा कि उनमें से कोई भी इन अनधिकृत ऐप के माध्यम से उधार देने में शामिल नहीं है।

सारांश: ईडी ने भारत में कई प्राथमिकी दर्ज की हैं और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 400 से अधिक मोबाइल ऐप और 50 एनबीएफसी के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के साथ, प्रवर्तन और नियामक एजेंसियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे एनबीएफसी से संबंधित प्रावधानों पर फिर से विचार करें ताकि कमियों की पहचान की जा सके और उन्हें दूर किया जा सके।

संपादकीय-द हिन्दू

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंध

अर्थव्यवस्था

राज्यों में मुद्रास्फीति की दर अलग-अलग होने के कारण

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और इससे जुड़े मुद्दे

मुख्य परीक्षा: विभिन्न राज्यों में मुद्रास्फीति भिन्नता

भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति:

  • वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 13.5 प्रतिशत दर की तुलना में बहुत धीमी गति से बढ़ी।
  • हालांकि निजी खपत में थोड़ी वृद्धि हुई लेकिन मुद्रास्फीति विशेष रूप से खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल के महीने में आठ साल के उच्च स्तर 7.79% पर पहुंच गई। हालांकि जुलाई में यह घटकर 6.7 फीसदी पर आ गई।
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार मुद्रास्फीति जनवरी के महीने में केंद्रीय बैंक के 6% के लक्ष्य को पार कर गई और जुलाई 2022 तक औसतन 6.8% पर रही।
  • आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा, गुजरात और तेलंगाना जैसे कई राज्यों में जुलाई में भी महंगाई दर 7% मुद्रास्फीति से ऊपर थी। बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे ग्यारह राज्यों में कीमतों में उछाल देखा गया।
  • जनवरी से जुलाई की अवधि के लिए औसत ग्रामीण मुद्रास्फीति आमतौर पर शहरी से 7.07% अधिक है। यह अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा 8.38% था।
  • मार्च 2022 में शहरी आबादी के लिए मुद्रास्फीति 6% को पार कर गई। 2022 तक इसका औसत 6.47% रहा है। यह अप्रैल में सबसे अधिक 7.09% पर देखी गई।

विभिन्न राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति:

  • जम्मू और कश्मीर सहित चौदह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मुद्रास्फीति की दर राष्ट्रीय मुद्रास्फीति औसत से लगभग 7% अधिक थी।
  • 8% से अधिक की मुद्रास्फीति दर वाले राज्य:
    • तेलंगाना – 8.32%
    • पश्चिम बंगाल -8.06%
    • सिक्किम की भी 8% से अधिक मुद्रास्फीति थी
  • अन्य राज्यों की औसत खुदरा मुद्रास्फीति:
    • हरियाणा और महाराष्ट्र 7.7% के आँकड़े पर रहे हैं।
    • अगला मध्य प्रदेश है जिसकी खुदरा मुद्रास्फीति 7.52% है।
    • असम की मुद्रास्फीति दर 7.37% है।
    • उत्तर प्रदेश की मुद्रास्फीति दर 7.27% पर है।
    • सूची में अगला जम्मू-कश्मीर और गुजरात दोनों का औसत 7.2% पर है।
    • इसके बाद आने वाले राजस्थान की औसत खुदरा मुद्रास्फीति 7.1% है।
  • 6% के लक्ष्य से कम खुदरा मूल्य मुद्रास्फीति वाले राज्य:
    • केरल – 4.8%
    • तमिलनाडु – 5.01%
    • पंजाब – 5.35%
    • दिल्ली – 5.56%
    • कर्नाटक -5.84%
    • मेघालय – 3.84%
    • गोवा – 3.66%
    • मणिपुर – 1.07%

विभिन्न राज्यों में भिन्नता के कारण:

  • खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति, राज्यों की मुद्रास्फीति में अंतर का प्रमुख कारक है।
    • जिन राज्यों में प्रमुख फसलों का उत्पादन नहीं होता है, वहाँ अन्य राज्यों की तुलना में अधिक खाद्य मुद्रास्फीति देखी जाती है, क्योंकि परिवहन लागत भी जुड़ जाती है।
    • मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों वाले राज्यों में भी अधिक मुद्रास्फीति देखी जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए CPI में खाद्य को अधिक महत्व दिया जाता है।
  • उपभोग पैटर्न और विभिन्न वस्तुओं की कीमत प्रवृत्तियों में भिन्नता भी राज्यों के बीच भिन्नता का कारण है। उदाहरण के लिए, टमाटर की मुद्रास्फीति जून में 158.4% से गिरकर 44% हो गई, जबकि मछली और मांस की कीमतें जुलाई में चार साल के निचले स्तर 3% पर आ गईं।
  • ईंधन की कीमतों में भी फर्क पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली पेट्रोल मुद्रास्फीति 32 महीने के निचले स्तर 0.3% तक कम हो गई, जबकि (-)2.4% पर, डीजल नवंबर 2019 के बाद पहली बार ऋणात्मक हो गया। हालांकि, जुलाई में 6 महीने के उच्चतम स्तर पर LPG मुद्रास्फीति करीब 23 फीसदी और मिट्टी का तेल 108.8% पर था। कई राज्यों ने ईंधन करों को कम किया, और इसका मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ा।.

इस तरह की भिन्नता का प्रभाव:

  • लगातार उच्च मुद्रास्फीति से उपभोक्ता की व्यय करने की प्रवृत्ति प्रभावित होती है। यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देता है जो शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक मूल्य दबाव का सामना करते हैं।
  • उच्च मुद्रास्फीति और कमजोर ग्रामीण मांगों के कारण निजी उपभोग प्रभावित हुई है।
  • विभिन्न राज्यों में मुद्रास्फीति के प्रेरक कारकों की पहचान करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बेहतर नीतिगत निर्णयों में सहायक होता है और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करता है।.

सारांश:

चूंकि मुद्रास्फीति का दबाव घरेलू बजट को बाधित करता है और उपभोक्ता प्रवृत्ति को प्रभावित करता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि केंद्र और राज्यों को मूल्य वृद्धि का समाधान करने के लिए समन्वय करना चाहिए जो कि वैश्विक प्रतिकूलताओं से नहीं बल्कि स्थानीय कारकों से प्रेरित है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

वोस्तोक-22 में भारत नौसैनिक अभ्यास में क्यों शामिल नहीं हो रहा है?

विषय: भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह।

प्रारंभिक परीक्षा: वोस्तोक-22

मुख्य परीक्षा: वोस्तोक 2022 में भारत की भागीदारी और महत्व।

संदर्भ: श्रीलंका का आर्थिक संकट।

वोस्तोक 2022 के बारे में विवरण:

  • रूस सितंबर 2022 के पहले सप्ताह में वार्षिक सैन्य अभ्यास कर रहा है। यह रूस के पूर्वी क्षेत्र में होगा।
  • यह अभ्यास महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पहला बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
  • इसमें दक्षिण कुरील के पास एक समुद्री क्षेत्र भी शामिल है, जो कि एक विवादित द्वीप है जिस पर रूस और जापान का दावा है।
  • इसमें तेरह देश भाग ले रहे हैं। इनमें आर्मेनिया, अल्जीरिया, अजरबैजान, बेलारूस, चीन, भारत, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, लाओस, मंगोलिया, निकारागुआ, सीरिया और ताजिकिस्तान शामिल हैं।
  • इस सैन्य अभ्यास में लगभग पचास हजार सैनिक होंगे और 60 युद्धपोतों और 140 विमानों सहित सैन्य उपकरणों की पांच हजार इकाइयां अभ्यास में भाग लेंगी।

भारत की भागीदारी:

  • भारतीय सेना की टुकड़ी संयुक्त युद्धाभ्यास का हिस्सा है, जिसमें युद्ध संवाद, गोलाबारी अभ्यास और संयुक्त क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास शामिल होंगे।
  • भारतीय सेना द्वारा केवल 7/8 गोरखा राइफल्स की एक सेना की टुकड़ी भेजी गई है, साथ ही यह भी बताया गया कि भारत वोस्तोक 2022 के समुद्री घटक अभ्यास में भाग नहीं लेगा।
  • इस तरह की कार्रवाई का कारण यह बताया गया है कि भूमि पर होने वाले अभ्यास का पहला भाग साइबेरिया और रूस के सुदूर पूर्वी जिले में आयोजित किया जाएगा जबकि समुद्री अभ्यास जापान के सागर और ओखोटस्क सागर में आयोजित किया जाएगा। यह क्षेत्र दक्षिण कुरील के विवादित द्वीपों के पास हैं। भारत का यह निर्णय जापान की संवेदनशीलता के अनुरूप है।

अमेरिका द्वारा आलोचना:

  • अमेरिका ने रूस के साथ भाग लेने वाले देशों के बारे में चिंता जताई है, क्योंकि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रशासन रूस के खिलाफ अधिक प्रतिबंध लगाने के लिए आम सहमति बनाने की प्रक्रिया में है। वह रूसी तेल निर्यात पर मूल्य सीमा भी निर्धारित करना चाहता है।
  • अमेरिका वोस्तोक-2022 में भारत और अन्य देशों की भागीदारी के विरुद्ध है, क्योंकि यह रूस के प्रति एक विभाजित दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेगा।

भारत की भागीदारी का महत्व:

इस अभ्यास में शामिल होने का भारत का निर्णय एक चौतरफा संदेश भेजता है:

  • पहला यह रूस के साथ भारत के निरंतर संबंधों को प्रदर्शित कर रहा है, जहां सरकार ने पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और रूस के साथ तेल आयात या अन्य आर्थिक जुड़ाव पर अंकुश नहीं लगाने का फैसला किया है।
  • दूसरा संदेश वर्तमान रूस-यूक्रेन संकट के समय में भारत के संतुलित और गुटनिरपेक्षता का संकेत देता है। यह इस बात को भी दर्शाता है कि भारत यूएस-ईयू गठबंधन के साथ-साथ चीन और रूस के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी समूहों के साथ अपने सभी संबंधों में सहज है। उदाहरण के लिए युद्ध अभ्यास, शंघाई सहयोग संगठन।
  • तीसरा, समुद्री अभ्यास में भाग न लेने का निर्णय लेकर भारत ने विवादित कुरील द्वीपों पर यथास्थिति बनाए रखने पर जोर देते हुए जापान के मामले के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है। इस कदम के जरिए भारत ने अखंडता और क्षेत्रीय संप्रभुता पर भी अपने रुख को दोहराया है। इसके अलावा, यह महत्वपूर्ण भी था क्योंकि भारत एक क्वाड बैठक की मेजबानी करने वाला है, जहां वह रक्षा और व्यापार जैसे मामलों पर जापान और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेगा।
  • अंत में, भारत सरकार का संदेश कि वह चीन के साथ विभिन्न मोर्चों पर जुड़ने के लिए उत्सुक है, भले ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के मुद्दे पर चीन के साथ सैन्य स्तर की बातचीत रुकी हुई हो।

सारांश: भारत ने 2022 वोस्तोक में भाग लेने के संबंध में सोच समझकर कदम उठाया है। एक तरफ, इसने रूस या यूक्रेन के साथ गुटनिरपेक्षता के अपने रुख को दोहराया है, जबकि दूसरी ओर इसने जापान की चिंता को समझते हुए संवेदनशीलता दिखाई है और समुद्री अभ्यास जो विवादित द्वीप पर आयोजित किया जाएगा, से दूर रहने का विकल्प चुना है।

प्रीलिम्स तथ्य:

  1. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य

प्रारंभिक परीक्षा: नालसा

संदर्भ: हाल ही में, भारत के राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ को नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया।

विवरण:

  • जस्टिस यू.यू. ललित को भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में पदोन्नत होने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस पद को संभाला ।
  • NALSA का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए किया गया है।
  • जहाँ CJI मुख्य संरक्षक होता है वहीं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।
  1. LCA-Mk2

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ;

प्रारंभिक परीक्षा: सैन्य तकनीक

संदर्भ: हाल ही में, सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk2 के विकास को मंजूरी दी।

भूमिका:

  • सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने 9000 करोड़ रुपये की कुल विकास लागत से LCA Mk2 के विकास को मंजूरी दी, जिसमें पहले ही खर्च किए जा चुके ₹2500 करोड़ शामिल हैं।
  • LCA-Mk2 को 2024 तक लॉन्च करने की योजना है और 2027 तक इसके उड़ान का परीक्षण पूरा करने का लक्ष्य है।
  • भारतीय वायु सेना (IAF) ने LCA-Mk2 के छह स्क्वाड्रन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

LCA-Mk2:

  • यह 4.5 पीढ़ी का विमान है जिसका उपयोग भारतीय वायुसेना करेगी।
  • इसके माध्यम से मिराज 2000 श्रेणी के विमानों को प्रतिस्थापित किया जाएगा ।
  • इसमें इंजन बड़ा है और यह 6.5 टन पेलोड ले जा सकता है।
  • यह प्रौद्योगिकी पहले से ही हल्के लड़ाकू विमान (LCA) में विकसित की गई है।
  • Mk2 की विशेषताओं में पहली बार ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम सहित बढ़ी हुई रेंज और एंडोरेंस है।
  • इसमें स्कैल्प, क्रिस्टल मेज़ और स्पाइस-2000 वर्ग के भारी स्टैंड-ऑफ हथियारों को भी ले जाने की क्षमता है।
  • Mk2 1,350 मिमी लंबा है, जिसमें कैनर्ड (क्षमता को बढ़ाने के लिए एक उपाय) है और यह 3,500 किलोग्राम LCA की तुलना में 6,500 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है।
  • इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की वैमानिकी विकास एजेंसी द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • इसका निर्माण भारत के सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जा रहा है।
  • LCA-Mk1A को 2024 की शुरुआत तक IAF को दिया जाना है, जिनमें से 83 का अनुबंध HAL के साथ किया गया है।

चित्र स्त्रोत:Airpowerasia

चित्र स्त्रोत:Airpowerasia

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. यह एक वैधानिक निकाय है।
  2. जहाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश मुख्य संरक्षक होते हैं, वहीं भारत के उच्चतम न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।
  3. नालसा (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है।

विकल्प:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है, नालसा, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है, जो प्रकृति में एक समान राष्ट्रव्यापी नेटवर्क तैयार करता है जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को बिना किसी मूल्य के सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करना है। यह प्राधिकरण नवंबर 1995 में अस्तित्व में आया।
  • कथन 2 सही है, भारत के मुख्य न्यायाधीश मुख्य संरक्षक होते हैं। उच्चतम न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश इस प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।
  • कथन 3 गलत है, नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं।

प्रश्न 2. महिला क्रांतिकारियों और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष में उनके योगदान के विवरण के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए।

क्रांतिकारीयोगदान

  1. वीणा दास बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन की हत्या का प्रयास।
  2. लीला नाग ढाका श्री संघ के सदस्य के रूप में भर्ती होने वाली पहली महिला
  3. कल्पना दत्त 1930 के चटगांव शस्त्रागार कांड में शामिल
  4. ननीबाला देवी क्रांतिकारी समूह युगांतर के सक्रिय सदस्य

उपर्युक्त युग्मों में से कौन/कितने सुमेलित है/हैं?

  1. केवल एक युग्म
  2. केवल दो युग्म
  3. केवल तीन युग्म
  4. सभी चारों युग्म

उत्तर: d

व्याख्या:

  • युग्म 1 सुमेलित है, वीणा दास पश्चिम बंगाल की एक भारतीय क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी थीं। वह कोलकाता में महिलाओं के लिए एक अर्ध-क्रांतिकारी संगठन छत्री संघ की सदस्य थीं। 6 फरवरी 1932 को, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह हॉल में बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन की हत्या करने का प्रयास किया।
  • युग्म 2 सुमेलित है, लीला नाग एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की करीबी सहयोगी थीं। वह ढाका विश्वविद्यालय की पहली महिला छात्रा थीं। 1925 में वह ढाका के एक क्रांतिकारी समाज श्री संघ में शामिल हो गईं।
  • युग्म 3 सुमेलित है, कल्पना दत्त एक प्रमुख बंगाली क्रांतिकारी, सूर्य सेन के नेतृत्व में सशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती सदस्यों में से एक थीं। चटगांव शस्त्रागार मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और आजीवन कारावास की सजा हुई। जेल में बंद बंगाल क्रांतिकारियों की रिहाई के लिए देशव्यापी अभियान के बाद, वह 1939 में जेल से बाहर आईं।
  • युग्म 4 सुमेलित है, नलिनी बाला देवी एक भारतीय लेखक और असमिया साहित्य की कवियत्री थीं, जिन्हें राष्ट्रवादी और रहस्यमय कविता के लिए जाना जाता था। वह अपने भतीजे अमरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय के नेतृत्व वाली युगांतर पार्टी में शामिल हो गईं। ननीबाला 1818 के नियमन III के तहत पुलिस द्वारा प्रताड़ित होने वाली पहली और एकमात्र महिला थीं। वह कलकत्ता जेल की पहली महिला कैदी भी थीं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किसे क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित अनुप्रयोगों के रूप में माना जा सकता है?

  1. दवा डिजाइन और विकास
  2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग
  3. साइबर सुरक्षा एवं क्रिप्टोग्राफी
  4. आपूर्ति श्रृंखलाओं एवं लॉजिस्टिक्स में सुधार
  5. वित्तीय डेटा की मॉडलिंग
  6. मौसम पूर्वानुमान

विकल्प:

  1. केवल 1, 2, 3 और 6
  2. केवल 2, 3 और 6
  3. केवल 1, 4 और 5
  4. 1, 2, 3, 4, 5 और 6

उत्तर: d

व्याख्या:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग, कंप्यूटिंग का एक रूप है जिसमें क्वांटम सिद्धांत पर आधारित प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग होता है।
  • क्वांटम सिद्धांत में परमाणु और उप-परमाणु स्तरों पर ऊर्जा और मटेरियल की स्थिति की व्याख्या की जाती है।
  • क्वांटम सिद्धांत का उपयोग यह सुनिश्चित करेगा कि कंप्यूटर अपने बाइनरी कोड से परे काम करे, क्योंकि ये केवल बिट्स में जानकारी को प्रोसेस कर सकते हैं जो 1 या 0 के रूप में होते हैं। इससे प्रोसेस में कंप्यूटर की क्षमता सीमित हो जाती है।
  • उपरोक्त सभी विकल्प क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित अनुप्रयोग हैं।

प्रश्न 4. भारत का पहला ‘नाइट स्काई सैंक्चुअरी’ निम्नलिखित में से किस स्थान पर स्थापित करने की योजना है?

  1. हानले
  2. धर्मशाला
  3. नैनीताल
  4. पुणे

उत्तर: a

व्याख्या:

  • केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने लद्दाख में भारत का पहला नाइट स्काई अभयारण्य स्थापित करने का बीड़ा उठाया है।
  • प्रस्तावित डार्क स्काई रिजर्व लद्दाख के हनले में चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के हिस्से के रूप में स्थित होगा।
  • यह भारत में एस्ट्रो पर्यटन को बढ़ावा देगा और ऑप्टिकल, इन्फ्रारेड और गामा-रे टेलीस्कोप के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक होगा।

प्रश्न 5. राज्य-व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस एक को आप स्वतंत्रता की सर्वाधिक उपयुक्त व्याख्या के रूप में स्वीकार करेंगे?

  1. राजनीतिक शासकों की तानाशाही के विरुद्ध संरक्षण
  2. नियंत्रण का अभाव
  3. इच्छानुसार कुछ भी करने का अवसर
  4. स्वयं को पूर्णतः विकसित करने का अवसर

उत्तर: d

व्याख्या:

  • ‘स्वतंत्रता’ शब्द का अर्थ है व्यक्तियों की गतिविधियों पर प्रतिबंध न लगाना और साथ ही, संविधान में उल्लिखित सीमाओं के भीतर व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्तित्व के विकास के अवसर प्रदान करना। इसलिए स्वतंत्रता की सबसे उपयुक्त परिभाषा स्वयं को पूर्ण रूप से विकसित करने का अवसर प्रदान करना है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

  1. नैनो यूरिया में भारत को कृषि-उर्वरक क्षेत्र” में आत्मनिर्भर बनाने की क्षमता है। स्पष्ट कीजिए (15 अंक, 250 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र III-अर्थशास्त्र)
  2. “रूस के साथ भारत के हालिया जुड़ाव में एक विशिष्ट और स्वतंत्र विदेश नीति को देखा गया है”

विश्लेषण कीजिए (15 अंक, 250 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र II-अंतर्राष्ट्रीय संबंध)