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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित राजव्यवस्था
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
F. प्रीलिम्स तथ्य
G. महत्वपूर्ण तथ्य आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न |
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
भारतीय धर्मनिरपेक्षता
राजव्यवस्था
विषय: भारतीय संविधान – भारतीय संविधान की विशेषताएं
मुख्य परीक्षा: भारतीय धर्मनिरपेक्षता और यूरोपीय धर्मनिरपेक्षता
संदर्भ: विशेषज्ञों द्वारा भारत के संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता का विश्लेषण यूरोपीय धर्मनिरपेक्षता के साथ समानताएं बनाते हुए किया जाता है।
धर्मनिरपेक्षता की तीन प्रतिबद्धताएँ
- धार्मिक विश्वास और आचरण की स्वतंत्रता: व्यक्ति धार्मिक विश्वास और आचरण की स्वतंत्रता के हकदार हैं।
- संवैधानिक सिद्धांत: संविधान में अंतर्निहित सिद्धांत, समानता, बोलने की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता जैसे धार्मिक संदर्भों से रहित हैं।
- मेटा-प्रतिबद्धता: धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता और संवैधानिक सिद्धांतों के बीच टकराव की स्थिति में, संवैधानिक सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गांधीजी की धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा
- धर्मनिरपेक्षता पर गांधी के दृष्टिकोण को यूरोप में धार्मिक बहुसंख्यकवाद से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान के रूप में देखा गया है।
- उन्होंने राष्ट्रवाद को साम्राज्यवाद-विरोध के पर्याय के रूप में देखा और राष्ट्रवाद के एक समावेशी स्वरुप को बढ़ावा दिया जिसमें यूरोपीय मॉडल को खारिज किया गया।
धर्मनिरपेक्षीकरण बनाम धर्मनिरपेक्षता
- धर्मनिरपेक्षीकरण (धार्मिक सिद्धांतों में विश्वास की हानि वाली सामाजिक प्रक्रिया) तथा धर्मनिरपेक्षता (एक राजनीतिक सिद्धांत जिसमें धर्म को राजनीतिक प्रभाव से अलग करने पर जोर दिया जाता है) के बीच अंतर किया जाता है।
- धर्मनिरपेक्षता सामाजिक परिवर्तन के बारे में नहीं है बल्कि इसका संबंध धार्मिक प्रथाओं को राजनीति के प्रत्यक्ष दायरे से बाहर रखने से है।
“भारतीय” धर्मनिरपेक्षता की अस्वीकृति
- विशेषज्ञ सभी धर्मों की स्वीकार्यता के रूप में “भारतीय” धर्मनिरपेक्षता की आम तौर पर स्वीकृत धारणा को चुनौती देते हैं।
- उनका तर्क है कि जिसे अक्सर धर्मनिरपेक्षता कहा जाता है वह वास्तव में बहुलवाद है, जो इन शब्दों की सूक्ष्म समझ की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
मुद्दे
- भारतीय संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा में स्पष्टता का अभाव।
- “भारतीय” धर्मनिरपेक्षता के विचार के बारे में गलत धारणाएँ।
- धार्मिक विश्वासों और संवैधानिक सिद्धांतों के बीच संभावित टकराव।
भावी कदम:
- धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को स्पष्ट करने के लिए शैक्षिक पहल को बढ़ावा देना।
- भारतीय संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या पर खुली चर्चा और बहस को बढ़ावा देना।
- विद्वानों को इस विषय पर विविध दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना।
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सारांश: भारत में धर्मनिरपेक्षता पर उपरोक्त अंतर्दृष्टि एक विचारोत्तेजक विश्लेषण प्रदान करती है, जो प्रचलित धारणाओं को चुनौती देती है और एक राजनीतिक सिद्धांत के रूप में धर्मनिरपेक्षता को समझने के महत्व पर जोर देती है। |
संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित
रोगाणुरोधी प्रतिरोध
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
विषय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विकास
मुख्य परीक्षा: रोगाणुरोधी प्रतिरोध
सन्दर्भ: रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) का मुद्दा वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है, जो चिकित्सा में हुई प्रगति को कमजोर करता है। एंटीबायोटिक दवाओं का रोग निरोधक उपयोग, जैसा कि ’20 एनएसी-नेट साइट्स इंडिया (20 NAC-NET Sites India) 2021-22 में एंटीबायोटिक उपयोग के प्रथम बहुकेंद्रित बिंदु प्रसार सर्वेक्षण (First Multicentric Point Prevalence Survey)’ में उजागर किया गया है, AMR की बढ़ती दरों को लेकर चिंता पैदा करता है।
एंटीबायोटिक उपयोग सर्वेक्षण से चिंताजनक आँकड़े
- तृतीयक-देखभाल अस्पतालों में अत्यधिक प्रिस्क्रिप्शन: 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के तृतीयक-देखभाल अस्पतालों में 70% से अधिक रोगियों को एंटीबायोटिक्स दिए गए थे।
- AMR की संभावना: मरीज के प्रिसक्रिप्शन में लिखे गए एंटीबायोटिक्स में से 50% से अधिक में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) पैदा करने की क्षमता है।
- निवारक प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिस: 55% रोगियों को प्रोफिलैक्सिस के रूप में एंटीबायोटिक्स प्रिसक्राइब किए गए थे, जबकि केवल 45% को संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दिए गए थे, केवल 6% को विशिष्ट जीवाणु पहचान के आधार पर एंटीबायोटिक्स दिए गए थे।
रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) को समझना
- रोगज़नक़ विकास: AMR तब होता है जब रोगज़नक़ विकसित होते हैं और रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं।
- योगदान देने वाले कारक: अनुचित चिकित्सा प्रैक्टिस तथा चिकित्सा और पशुपालन में रोगाणुरोधकों का दुरुपयोग दवा-प्रतिरोधी रोगजनकों (drug-resistant pathogens) के विकास को बढ़ा देता है।
- वैश्विक प्रभाव: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बैक्टीरियल AMR 2019 में सीधे तौर पर 1.27 मिलियन वैश्विक मौतों का कारण बना और 4.95 मिलियन मौतों में योगदान दिया।
तत्काल उपाय आवश्यक
- तर्कसंगत प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिस: संक्रामक रोग विशेषज्ञ और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत प्रिस्क्रिप्शन की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
- अनावश्यक उपयोग पर अंकुश: जानवरों और पौधों में इसके विकास को बढ़ावा देने के लिए दवाओं के उपयोग पर सख्त नियम आवश्यक हैं।
- अनुसंधान और विकास संकट: एंटीबायोटिक अनुसंधान और विकास पाइपलाइन संकट को स्वीकार करते हुए, नए दवा को विकसित करने के लिए तत्काल उपायों की आवश्यकता है।
- न्यायसंगत पहुंच: AMR के खिलाफ लड़ाई में नई एंटीबायोटिक दवाओं तक अधिक न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
हितधारकों की भूमिका
- सरकारी विनियमन: सरकार रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग को विनियमित करने और AMR को संबोधित करने के लिए नीतियों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- डॉक्टर की जिम्मेदारी: स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों, विशेष रूप से डॉक्टरों को तर्कसंगत प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिस का पालन करना चाहिए।
- मरीज जागरूकता: मरीजों को तत्काल आराम की मांग के परिणामों और निर्धारित उपचार योजनाओं के अनुपालन के महत्व के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।
मुद्दे
- एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक प्रिसक्रिप्शन और दुरुपयोग से AMR होता है।
- AMR के परिणामों के बारे में स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता के बीच जागरूकता की कमी।
- इस संकट से निपटने के लिए अपर्याप्त अनुसंधान और विकास प्रयास।
भावी कदम
- रोगाणुरोधी (antimicrobial) उपयोग पर सख्त नियम।
- स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के बीच तर्कसंगत प्रिसक्रिप्शन प्रैक्टिस को बढ़ावा देना।
- पशुपालन और कृषि में एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक उपयोग पर अंकुश लगाना।
- नई एंटीबायोटिक दवाओं के लिए तत्काल अनुसंधान और विकास पहल।
- AMR के परिणामों पर जन जागरूकता अभियान।
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सारांश: चिकित्सा उपचारों की प्रभावकारिता और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध के खतरे का समाधान करना महत्वपूर्ण है। |
प्रीलिम्स तथ्य:
1. लाल सागर संकट और समुद्री डकैती: भारतीय नौसेना ने प्रतिक्रिया दी
सन्दर्भ: भारतीय नौसेना ने अपने समुद्री सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का प्रदर्शन करते हुए उत्तरी अरब सागर में अपहरण के प्रयास को सफलतापूर्वक विफल कर दिया।
परिचालन विवरण
- त्वरित प्रतिक्रिया: भारतीय नौसेना ने भारी मालवाहक लीला नॉरफ़ॉक से आए एक संकटपूर्ण कॉल जिसमें सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा अपहरण के प्रयास की सूचना दी गई थी, का तुरंत जवाब दिया।
- समुद्री कमांडो हस्तक्षेप: मार्कोस ने एक सफल अभियान चलाया, जिससे अपहर्ताओं की अनुपस्थिति की पुष्टि हुई और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
- विमान और युद्धपोत सहायता: समुद्री गश्ती विमान ने एक सशक्त चेतावनी जारी की, और विध्वंसक INS चेन्नई ने जहाज को विद्युत् और प्रणोदन बहाल करने के लिए सहायता प्रदान की।
पिछली अपहरण घटना
- संदर्भ: यह क्षेत्र में अपहरण की दूसरी घटना है, जो समुद्री सुरक्षा के लिए लगातार खतरे को उजागर करती है।
- उन्नत निगरानी उपाय: ऐसी घटनाओं के जवाब में, भारतीय नौसेना ने बल स्तर को बढ़ाते हुए मध्य और उत्तरी अरब सागर में समुद्री निगरानी प्रयासों को बढ़ा दिया है।
लाल सागर संकट के कारण निर्यात पर प्रभाव
- शिपिंग और बीमा लागत: इज़राइल-हमास युद्ध के बाद हुती हमलों से उत्पन्न लाल सागर संकट के कारण भारतीय निर्यात के लिए शिपिंग और बीमा लागत में वृद्धि हुई है।
- सरकार की प्रतिक्रिया: जबकि सरकार निर्यात पर प्रभाव को स्वीकार करती है, वहीं सब्सिडी या प्रोत्साहन जैसे सहयोग तंत्र पर निर्णय लंबित हैं।
2. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
सन्दर्भ: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भारत की राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है। हालाँकि, चिंताएँ पैदा होती हैं क्योंकि अनुमान सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि में संभावित मंदी और उपभोग व्यय में गिरावट का संकेत देते हैं।
जीडीपी वृद्धि अनुमान
- सकारात्मक दृष्टिकोण: NSO को 2023-24 के लिए 7.3% सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले वर्ष में दर्ज 7.2% से थोड़ा अधिक है।
- पहली छमाही का प्रदर्शन: वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में 7.7% की मजबूत जीडीपी वृद्धि देखी गई, जिसने वर्ष के लिए सकारात्मक रुख सुनिश्चित हुआ।
- दूसरी छमाही का अनुमान: अग्रिम अनुमान में दूसरी छमाही में 6.9% से 7% के बीच वृद्धि का सुझाव है।
सकल मूल्य वर्धित (GVA) और नाममात्र जीडीपी
- GVA वृद्धि की उम्मीद: NSO का अनुमान है कि GVA वृद्धि पिछले वर्ष के 7% से घटकर चालू वित्त वर्ष में 6.9% हो जाएगी।
- नाममात्र GDP अनुमान: अनुमानित नाममात्र GDP वृद्धि 8.9% है, जो कि बजट अनुमान 10.5% से काफी कम है।
चिंताएँ और सावधानी
- संभावित राजकोषीय घाटा: अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि उम्मीद से कम नाममात्र GDP वृद्धि के कारण राजकोषीय घाटा GDP के लक्षित 5.9% को पार कर लगभग 6% तक पहुंच सकता है।
- क्षेत्रीय मंदी: कृषि और सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में GVA वृद्धि में गिरावट की उम्मीद है, जिससे समग्र आर्थिक प्रदर्शन के लिए चुनौतियाँ पैदा होंगी।
- उपभोग और निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE)
- कमज़ोर उपभोग वृद्धि: GDP डेटा से एक चिंताजनक पहलू का पता चलता है, जिसमें उपभोग वृद्धि 4.4% है, जो महामारी वर्ष को छोड़कर, दो दशकों में सबसे धीमी है।
- PFCE शेयर में गिरावट: NSO का अनुमान है कि सकल घरेलू उत्पाद में निजी अंतिम उपभोग व्यय की हिस्सेदारी 2022-23 के 58.5% से घटकर चालू वित्त वर्ष में 56.9% हो जाएगी।
मुद्दे
- सभी क्षेत्रों में सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि में मंदी।
- राजकोषीय घाटा लक्ष्य सीमा से बाहर जाने को लेकर चिंता
- कमजोर उपभोग वृद्धि, आर्थिक सुधार में चुनौतियों का संकेत।
3. PMI
सन्दर्भ: HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार, भारत में सेवा क्षेत्र ने दिसंबर में उल्लेखनीय उछाल दिखाया, जो तीन महीनों में सबसे अधिक वृद्धि है। नवंबर में सूचकांक 56.9 से बढ़कर 59 पर पहुंच गया, जो नए व्यापार और उत्पादन में तेजी को दर्शाता है। यह उछाल भारत के आर्थिक परिदृश्य के एक महत्वपूर्ण घटक, सेवा उद्योग में सकारात्मक गति का संकेत देता है।
सकारात्मक संकेतक
- बढ़ती व्यावसायिक गतिविधि: HSBC इंडिया सर्विसेज PMI दिसंबर में व्यावसायिक गतिविधि में एक मजबूत उछाल को उजागर करता है, जिसमें नए व्यवसाय और आउटपुट दोनों में त्वरित वृद्धि हुई है।
- निरंतर रोजगार वृद्धि: सेवा क्षेत्र में इस चलन का विस्तार देखा गया, क्योंकि लगातार 19वें महीने नई रोजगारों में वृद्धि जारी रही। यह नियुक्ति चलन, हालांकि नवंबर की तुलना में थोड़ी मजबूत है, इसमें अंशकालिक और पूर्णकालिक दोनों पद शामिल हैं।
- निर्यात ऑर्डर: जहां ताजा निर्यात ऑर्डर बढ़े, वहीं जून 2023 के बाद से गति सबसे धीमी थी। विशेष रूप से, मांग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप, पश्चिम एशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से उत्पन्न हुई।
व्यापारिक वातावरण
- आशावाद का स्तर: नवंबर से व्यापार आशावाद के स्तर में सुधार हुआ है, जो आने वाले महीनों में सेवा क्षेत्र के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत देता है।
- इनपुट लागत: इनपुट लागत में वृद्धि की गति 40 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जो 2023 के मध्य से नरमी की प्रवृत्ति को दर्शाती है। हालाँकि, कंपनियों ने ग्राहकों पर लागत का बोझ डालना जारी रखा, आउटपुट शुल्क इनपुट लागत मुद्रास्फीति की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है और दीर्घकालिक औसत से अधिक हो गया है।
त्रैमासिक प्रदर्शन
- त्रैमासिक औसत: दिसंबर में उछाल के बावजूद, अक्टूबर से दिसंबर 2023 तिमाही में जनवरी-मार्च 2023 तिमाही के बाद से सबसे कम तिमाही औसत दर्ज किया गया। इसका कारण अक्टूबर और नवंबर में सूचकांक का कमजोर स्तर है।
- बकाया कारोबार की मात्रा: बकाया कारोबार की मात्रा में नवंबर की तुलना में दिसंबर में मामूली वृद्धि देखी गई, जो चार महीनों में सबसे तेज वृद्धि है।
मुद्दे
- निर्यात ऑर्डर वृद्धि में मंदी, हालांकि जून 2023 के बाद सबसे धीमी गति।
- अक्टूबर से दिसंबर 2023 तिमाही के लिए व्यावसायिक गतिविधि में सबसे कम तिमाही औसत।
4. डीप-टेक स्टार्टअप
सन्दर्भ: भारत सरकार मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष एक नई डीप टेक नीति पेश करने के लिए तैयार है। मसौदा नीति, जुलाई 2023 में अनावरण की गई और बाद में उद्योग की प्रतिक्रिया के आधार पर परिष्कृत की गई, जिसका उद्देश्य चुनौतियों का समाधान करना और डीप टेक क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देना है।
डीप टेक नीति का अवलोकन
- ड्राफ्ट रिलीज़ और उद्योग प्रतिक्रिया: सरकार ने सार्वजनिक इनपुट की मांग करते हुए जुलाई 2023 में डीप टेक नीति का मसौदा जारी किया। उद्योग हितधारकों की प्रतिक्रिया के बाद, अंतिम संस्करण अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए तैयार है।
- डीप टेक की परिभाषा: एक सटीक परिभाषा के अभाव में, डीप टेक स्टार्ट-अप की विशेषता व्यापक रूप से महत्वपूर्ण संभावित प्रभाव के साथ बौद्धिक संपदा विकास है, जो नई वैज्ञानिक सफलताओं पर आधारित है।
वर्तमान परिदृश्य और चिंताएँ
- डीप टेक स्टार्ट-अप लैंडस्केप: मसौदा नीति स्टार्टअप इंडिया डेटाबेस का संदर्भ देती है, जो मई 2023 तक डीप टेक क्षेत्र में वर्गीकृत 10,298 मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप को दर्शाती है।
- डीप टेक स्टार्ट-अप का प्रतिशत: वर्तमान स्टार्ट-अप में से केवल 10% ही डीप टेक श्रेणी में आते हैं। यह डीप टेक उद्यमों के पोषण और विकास के लिए बढ़े हुए प्रयासों और सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
फोकस क्षेत्र और रणनीतियाँ
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में DSIR की भूमिका: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) से संबद्ध वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR), मध्यम और लघु उद्योगों में प्रौद्योगिकी स्थानांतरित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- बड़े उद्योगों पर CSIR का लक्ष्य: CSIR का लक्ष्य बड़े उद्योगों तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का लक्ष्य है।
- NRDC का स्टार्ट-अप पर जोर: एक अन्य CSIR इकाई, राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास निगम (NRDC) विशेष रूप से डीप टेक क्षेत्र में स्टार्ट-अप को सहयोग और बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
5. VVPAT
सन्दर्भ: निर्वाचन आयोग (EC) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के संबंध में कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं का जवाब दिया है। आयोग ने चिंताओं को खारिज कर दिया, चुनावों में EVM के उपयोग में अपना पूरा विश्वास जताया और कहा कि आगे स्पष्टीकरण की आवश्यकता वाले कोई नए दावे नहीं थे।
निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया
- चिंताओं की अस्वीकृति: निर्वाचन आयोग ने नेताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं को खारिज कर दिया है, इस बात पर जोर दिया है कि ऐसे कोई नए दावे या वैध संदेह नहीं हैं जिनके लिए अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
- EVM में विश्वास: चुनाव निकाय ने चुनावी प्रक्रिया में विश्वास के आधार के रूप में कानूनी ढांचे, स्थापित न्यायशास्त्र, तकनीकी सुरक्षा और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों का हवाला देते हुए EVM के उपयोग में अपने विश्वास की पुष्टि की।
- VVPAT नियमों की शुरुआत: निर्वाचन आयोग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि VVPAT में पेपर पर्चियों को नियंत्रित करने वाले नियम 14 अगस्त 2013 को लाए गए थे।
6. पृथ्वी कार्यक्रम
सन्दर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹4,797 करोड़ के बजट के साथ एक महत्वपूर्ण पहल ‘पृथ्वी’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। यह कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत पांच मौजूदा योजनाओं को समेकित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।.
‘पृथ्वी’ कार्यक्रम के उद्देश्य
- दीर्घकालिक अवलोकन: इस कार्यक्रम का लक्ष्य लंबी अवधि में पृथ्वी पर होने वाले परिवर्तनों की निगरानी के लिए वायुमंडल, महासागर, भूमंडल, क्रायोस्फीयर और ठोस पृथ्वी के अवलोकन में सुधार और इसका विस्तार करना है।
- मॉडल विकास: इसका उद्देश्य मौसम, समुद्र की स्थिति और जलवायु खतरों को समझने और पूर्वानुमान करने के लिए मॉडल विकसित करना है।
- पृथ्वी के क्षेत्रों का अन्वेषण: यह कार्यक्रम नई घटनाओं और संसाधनों की खोज के लिए ध्रुवीय और उच्च-समुद्री क्षेत्रों के अन्वेषण पर केंद्रित है।
- प्रौद्योगिकी विकास: ‘पृथ्वी’ का उद्देश्य सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्री संसाधनों के अन्वेषण और सतत दोहन के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
- ज्ञान का रूपांतरण: इसका उद्देश्य पृथ्वी प्रणाली विज्ञान से प्राप्त अंतर्दृष्टि को सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों के लिए सेवाओं में रूपांतरित करना है।
डीप ओशन मिशन (DOM) के साथ एकीकरण
- DOM का महत्व: ‘पृथ्वी’ कार्यक्रम में डीप ओशन मिशन (DOM) शामिल है, जो मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण घटक है। DOM का एक उद्देश्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर तक मानवयुक्त पनडुब्बी तैनात करना है।
- व्यापक सहभागिता: MoES के सचिव एम. रविचंद्रन के अनुसार, पृथ्वी कार्यक्रम व्यापक रूप से सभी प्रमुख गतिविधियों को शामिल करता है, जो इसकी व्यापक प्रकृति को प्रदर्शित करता है।
7. रूस-यूक्रेन युद्ध में नेपाली नागरिक
सन्दर्भ: नेपाल ने मौजूदा संघर्ष में अपने नागरिकों के शामिल होने की चिंताओं के कारण अपने नागरिकों को रूस या यूक्रेन में रोजगार तलाशने से रोककर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रूसी सेना में सेवारत नेपाली नागरिकों और हताहतों की संख्या वाली रिपोर्टों से प्रेरित यह निर्णय, अपने नागरिकों की सुरक्षा और संभावित सुरक्षा मुद्दों के समाधान के लिए नेपाल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रूस और यूक्रेन में रोज़गार पर रोक
- सरकारी कार्रवाई: नेपाल में रोजगार विभाग ने एक नोटिस जारी कर नेपाली नागरिकों के रूस या यूक्रेन में रोजगार तलाशने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- उद्धृत कारण: यह प्रतिबंध उन रिपोर्टों की प्रतिक्रिया है जो दर्शाती हैं कि यूक्रेन में संघर्ष में भाग लेने के लिए नेपाली नागरिकों को रूसी सेना द्वारा भर्ती किया गया है।
- जांच: सरकार सक्रिय रूप से मामले की जांच कर रही है, संघर्ष में नेपाली नागरिकों की कथित संलिप्तता की पुष्टि करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दे रही है।
हताहतों की संख्या और पकड़े जाने की रिपोर्ट
- रूसी सेना में नुकसान: इस नोटिस में रूसी सेना में सेवारत नेपाली नागरिकों के नुकसान पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें कम से कम 10 लोगों के हताहत होने की सूचना है।
- यूक्रेन द्वारा पकडे जाने की घटना: कथित तौर पर यूक्रेन की ओर से चार नेपाली नागरिकों को पकड़ लिया गया है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
यूक्रेनी पक्ष में अपुष्ट नेपाली भागीदारी
- नेपाली लड़ाकों को लेकर अटकलें: कुछ नेपालियों के यूक्रेनी पक्ष में भाड़े के सैनिकों के रूप में लड़ने के बारे में अपुष्ट अटकलें हैं।
- सरकार की स्थिति: सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस पहलू की पुष्टि नहीं की है, जो आगे की जांच या स्पष्टीकरण की आवश्यकता का संकेत देता है।
मुद्दे
- विदेशी सेनाओं द्वारा भर्ती: संघर्ष में शामिल होने के लिए रूसी सेना में नेपाली नागरिकों की भागीदारी भर्ती प्रथाओं और उनके सामने आने वाले संभावित जोखिमों को लेकर चिंताएं बढ़ाती है।
- अपुष्ट नेपाली लड़ाके: यूक्रेनी पक्ष में भाड़े के सैनिकों के रूप में भाग लेने वाले नेपाली नागरिकों के बारे में अटकलें स्थिति में जटिलता जोड़ती हैं, जिसके लिए गहन जांच की आवश्यकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक और जलीय कृषि में दूसरा सबसे बड़ा स्थान रखता है।
- “सागरपरिक्रमा” पहल मछुआरों और विभिन्न हितधारकों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास करती है।
- देश भर में मछली उत्पादन के क्षेत्र में, महाराष्ट्र सातवें स्थान पर है, जो कुल हिस्सेदारी में लगभग 5% का योगदान देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितना/कितने सही है/हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: c
व्याख्या: भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र- भारत – मछली का तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक उत्पादक और जलीय कृषि में दूसरा सबसे बड़ा। “सागरपरिक्रमा” पहल 75वें आजादी का अमृत महोत्सव को मनाते हुए मछुआरों, मछली किसानों और हितधारकों के साथ एकजुटता का प्रतीक है जो तटीय बेल्ट के साथ एक परिवर्तनकारी समुद्री यात्रा है।
5 मार्च, 2022 को मांडवी, गुजरात से, “क्रांति से शांति” थीम के तहत “सागर परिक्रमा” यात्रा शुरू हुई। महाराष्ट्र- 720 किलोमीटर लंबा समुद्र तट, राष्ट्रीय स्तर पर सातवें स्थान पर है, जो देश के मछली उत्पादन में लगभग 5% का योगदान देता है।
Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्लाज़्मा तरंगें प्रायः पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के भीतर प्रकट होती हैं।
- पृथ्वी के विपरीत, मंगल पर आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है।.
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: d
व्याख्या: प्लाज्मा तरंगें प्रायः पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के भीतर प्रकट होती हैं, मैग्नेटोस्फीयर पृथ्वी के चारों ओर का एक चुंबकीय क्षेत्र है। आम तौर पर, इन तरंगों को विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों में संक्षिप्त उतार-चढ़ाव के रूप में पहचाना जाता है। ये प्लाज्मा तरंगें पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के भीतर आवेशित कणों के ऊर्जाकरण और परिवहन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विशिष्ट तरंगें, जैसे विद्युत चुम्बकीय आयन साइक्लोट्रॉन तरंगें, पृथ्वी के विकिरण बेल्ट के लिए एक क्लींजिंग तंत्र के रूप में कार्य करती हैं, जो हमारे उपग्रहों के लिए एक संभावित खतरा है।
पृथ्वी के विपरीत, मंगल पर आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है। परिणामतः, सूर्य से आने वाली उच्च गति वाली सौर हवा सीधे मंगल ग्रह के वायुमंडल के साथ संपर्क में आती है। प्लाज़्मा तरंगें, जो कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों की एक श्रेणी है, पदार्थ की एक विशिष्ट अवस्था में प्लाज़्मा के माध्यम से यात्रा करती हैं। ब्रह्मांड में 99% से अधिक अवलोकनीय पदार्थ प्लाज्मा के रूप में मौजूद है।
हमारा सूर्य, सौर पवन, अंतरग्रहीय माध्यम, निकट-पृथ्वी क्षेत्र, मैग्नेटोस्फीयर और हमारे वायुमंडल की ऊपरी परत जैसे तत्व मुख्य रूप से प्लाज्मा से बने होते हैं।
Q3. भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यहाँ गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल मगरमच्छों की भारत की सबसे महत्वपूर्ण आबादी में से एक रहती है।
- इस उद्यान की पश्चिमी सीमा के साथ स्थित, गहिरमाथा समुद्र तट ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के सबसे बड़े स्थान के रूप में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: d
व्याख्या: भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान- उड़ीसा में मौजूद 672 वर्ग किलोमीटर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र है। बंगाल की खाड़ी से इसकी निकटता के कारण, इस क्षेत्र की मिट्टी लवणों से समृद्ध है, जो वनस्पति और प्रजातियों को बढ़ावा देती है एवं आमतौर पर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय अंतर्ज्वारीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। यह लुप्तप्राय खारे पानी के मगरमच्छों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल है। यहाँ किंगफिशर पक्षियों की आठ प्रकारों का आवास है जो उद्यान की अद्वितीय जैव विविधता को सामने लाती है। इस अभयारण्य की पूर्वी सीमा के साथ गहिरमाथा समुद्र तट स्थित है, जहां ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की सबसे बड़ी मौजूदगी देखी जाती है।
Q4. ‘पृथ्वी विज्ञान’ पहल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसमें नई परिघटनाओं और संसाधनों की खोज के लिए पृथ्वी के ध्रुवीय और उच्च समुद्री क्षेत्रों का अन्वेषण शामिल है।
- इसका उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल की निरंतर निगरानी को मजबूत करना है।
- यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक व्यापक योजना है और 2021-26 तक के लिए है।
उपर्युक्त कथनों में से कितना/कितने गलत हैं/हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: d
व्याख्या: भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी PRITHVI (पृथ्वी विज्ञान) कार्यक्रम शुरू किया है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक व्यापक योजना है। 4,797 करोड़ रुपये के पर्याप्त बजट के साथ, यह पहल 2021-26 तक चलेगी, जिससे पृथ्वी विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत होगी।
इसमें नई परिघटनाओं और संसाधनों की खोज के लिए पृथ्वी के ध्रुवीय और उच्च समुद्री क्षेत्रों का अन्वेषण शामिल है। इसका उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल की निरंतर निगरानी को मजबूत करना है। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक व्यापक योजना है और 2021-26 तक के लिए है।
Q5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में जैव विविधता में प्रबंधन समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
2. जैव विविधता प्रबंधन समितियों के पास पहुंच और लाभ साझाकरण का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण कार्य हैं, जिसमें इसके अधिकार क्षेत्र के भीतर जैविक संसाधनों की पहुंच पर संग्रह शुल्क लगाने की शक्ति भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: c
व्याख्या:
कथन 1 सही है: नागोया प्रोटोकॉल जैविक विविधता पर कन्वेंशन के उद्देश्यों में से एक के कार्यान्वयन के लिए एक कानूनी ढांचा है, जो आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण है। यह प्रोटोकॉल 2010 में नागोया, जापान में अपनाया गया था। यह अक्टूबर 2014 में लागू हुआ। 2002 के जैविक विविधता अधिनियम के अनुरूप, राज्य के भीतर प्रत्येक स्थानीय निकाय को अपने अधिकार क्षेत्र में एक जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC) स्थापित करना अनिवार्य है। BMC की भूमिका जैविक विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग और दस्तावेज़ीकरण को बढ़ावा देना है। मूलतः, भारत में BMC नागोया प्रोटोकॉल में उल्लिखित उद्देश्यों के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
कथन 2 सही है: जैविक विविधता अधिनियम BMC को अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर जैविक संसाधनों को इकट्ठा करने वालों पर संग्रह शुल्क लगाने के लिए स्वतंत्र अधिकार प्रदान करता है। यह क्षमता BMC को अपने स्वयं के वित्तीय संसाधन उत्पन्न करने में सक्षम बनाती है, जिसका उपयोग अधिनियम में निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
- रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial resistance) एक स्वास्थ्य समस्या है जो चिकित्सा में प्रगति को कम करेगा। इस कथन के आलोक में, इस उभरते संकट से निपटने में स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों और सरकार की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) (सामान्य अध्ययन – III, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
- क्या भारतीय संविधान धर्मनिरपेक्ष है? यदि हाँ, तो यह पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए (250 शब्द, 15 अंक) (सामान्य अध्ययन – II, राजव्यवस्था)
(नोट: मुख्य परीक्षा के अंग्रेजी भाषा के प्रश्नों पर क्लिक कर के आप अपने उत्तर BYJU’S की वेव साइट पर अपलोड कर सकते हैं।)