06 मई 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: सामाजिक न्याय/अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतरराष्ट्रीय संबंध:
अर्थव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
सामाजिक न्याय/अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
कोविड-19 अब आपातकाल नहीं है
विषय: स्वास्थ्य सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे; महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान
मुख्य परीक्षा: कोविड-19 को “वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित करने के निहितार्थ
संदर्भ:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घोषणा की है कि कोविड-19 अब “वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल” नहीं है।
भूमिका:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 अब अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं है। इसने आगे कहा कि अब संक्रमण के दीर्घकालिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी के कारण कम से कम सात मिलियन मौतों कि पुष्टि की है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार कोविड-19 को जनवरी 2020 में एक महामारी के रूप में घोषित करने से पहले अंतर्राष्ट्रीय चिंता (PHEIC) का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
- इसने लोगों को नए वायरस से बचाने के लिए समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया था।
अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल क्या है?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह “एक असाधारण घटना” है जो “रोग के अंतर्राष्ट्रीय प्रसार के माध्यम से अन्य देशों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम” की स्थिति उत्पन्न करता है और इसके लिए “संभावित रूप से एक समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है।” पिछले आपात स्थितियों में इबोला, जीका और H1N1 शामिल हैं।
- हाल ही में, मंकीपॉक्स के प्रकोप को WHO द्वारा अंतर्राष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है।
- किसी घटना को आपातकाल के रूप में घोषित करने की जिम्मेदारी WHO के महानिदेशक के पास होती है और इसके लिए सदस्यों की एक समिति की बैठक बुलाने की आवश्यकता होती है।
- अंतर्राष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को संभालने के लिए WHO के दिशानिर्देशों का पालन करने हेतु राष्ट्रों से एक सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।
- इसके बाद, प्रत्येक देश अपने स्वयं के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करता है, जो कानूनी महत्व रखता है। ये घोषणाएँ देशों को संसाधनों को आवंटित करने और स्थिति से निपटने के लिए नियमों को निलंबित करने में सक्षम बनाती हैं।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतरराष्ट्रीय संबंध:
G-20, SCO शिखर सम्मेलन से परे भारत के लिए क्षितिज
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार
मुख्य परीक्षा: G20 और SCO के अध्यक्ष के रूप में वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका
संदर्भ:
- इस आलेख में उन चुनौतियों पर चर्चा की गई है जिनका भारत G-20 की अध्यक्षता और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेतृत्व के दौरान सामना करता है।
भूमिका:
- G-20 की अध्यक्षता और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का नेतृत्व करने के बावजूद भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- बिगड़ती वैश्विक स्थिति को देखते हुए, एक जोखिम है कि G20 अध्यक्ष के रूप में भारत की प्राथमिकताएं, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास कार्यक्रम और बहुपक्षीय संस्था सुधार, बिगड़ते भू-राजनीतिक माहौल और आसन्न संघर्ष की संभावना से प्रभावित हो सकते हैं।
- भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह सावधानीपूर्वक समुचित दृष्टिकोण के साथ G-20, SCO और ग्लोबल साउथ की प्रतिस्पर्धी मांगों के साथ तालमेल बैठाए।
चिंताएँ:
- क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन/रूस के नेतृत्व वाले विरोधी खेमे के बीच विश्वास की कमी, भारत जैसे देशों के लिए सीमित विकल्प छोड़ती है जिसने किसी भी पक्ष के प्रति निष्ठा नहीं जताई है।
- अमेरिका और उसके सहयोगी यूक्रेन को उन्नत हथियार और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं, जबकि रूस भी गुप्त रूप से अपने सहयोगियों से उपकरण प्राप्त कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच हथियारों की इस होड़ से विनाशकारी संघर्ष का खतरा पैदा हो गया है।
- भारत चीन-भारत सीमा पर चीन से खतरे का सामना कर रहा है, जो पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन भी कर रहा है, और पूरे एशिया में कूटनीतिक-सह-रणनीतिक हमले कर रहा है।
- चीन भारत के साथ संघर्ष के दायरे को विस्तृत करने का प्रयास कर रहा है तथा भारत की अमेरिका और पश्चिमी गुट से बढ़ती निकटता, क्वाड में इसकी भागीदारी और समुद्री निगरानी अभ्यास को लक्षित कर रहा है।
- चीन विस्तारित पड़ोस में, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में भारत के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहा है, जहां वह अपनी पहल से भारत और अन्य देशों को दरकिनार कर रहा है।
- भारत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित अपने निकटवर्ती पड़ोसी देशों से भी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
- रूस के साथ भारत के संबंध अनिश्चित हैं, विशेष रूप से अमेरिका के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग और रूस-चीन संबंधों में तनाव के कारण।
- रूस के साथ अन्य समझौतों के बीच, त्रिपक्षीय रूस-भारत-चीन मंच और ब्रिक्स गतिविधियों के स्तर में भी बड़ी गिरावट आई है।
भावी कदम:
- भारत को एक संभावित वैश्विक शक्ति के रूप में पहचाने जाने और कम से कम नुकसान के साथ कोविड-19 महामारी और आर्थिक संकट से सफलतापूर्वक उभरने के बावजूद, अभी भी ऐसी महत्वपूर्ण बाधाएं हैं जिन्हें अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने से पहले दूर करने की आवश्यकता है।
- भारत को अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता है।
- जहाँ भारत की वैश्विक राजनीति में एक बड़ी भूमिका निभाने की तीव्र इच्छा है, वहीं इसे अपने घरेलू मुद्दों का भी समाधान करने तथा अपने आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- यह संतुलन यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत एक स्थिर और समृद्ध राष्ट्र बना रहे, जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में सार्थक योगदान देने में सक्षम हो।
- भारत चीन के शत्रुतापूर्ण इरादों से अवगत है और इसलिए भारत को चीन की हाइब्रिड युद्ध, पानी की राजनीति में शामिल होने की क्षमता और बिना लड़े युद्ध जीतने की सन जू की रणनीति को अपनाने की क्षमता को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए।
- ग्लोबल साउथ के एक नेता के रूप में, भारत को दुनिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में एक अनूठी भूमिका निभानी है। भारत यूक्रेन युद्ध में प्रमुख हितधारकों के बीच संवाद और कूटनीति को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी स्थिति का उपयोग कर सकता है तथा दोनों पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का सम्मान करने का आग्रह कर सकता है।
- एक संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनाकर, भारत वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान करते हुए अपने हितों को आगे बढ़ा सकता है।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
अर्थव्यवस्था:
भारत का स्मार्ट बिजली भविष्य
विषय: अवसंरचना
मुख्य परीक्षा: भारत के हरित-ऊर्जा बदलाव की दिशा में स्मार्ट बिजली पहल के निहितार्थ
संदर्भ:
- इस आलेख में भारत की स्मार्ट मीटरिंग पहल की क्षमता और चुनौतियों पर चर्चा की गई है।
भूमिका:
- स्मार्ट मीटरिंग पहल सरकार के नेतृत्व वाला एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पारंपरिक बिजली मीटरों को उन्नत स्मार्ट मीटरों से बदलना है।
- यह कार्यक्रम बड़ी स्मार्ट ग्रिड पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के बिजली के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना और बिजली क्षेत्र की दक्षता में सुधार करना है।
- स्मार्ट मीटरिंग पहल के तहत, सरकार की 2025 तक देश भर के घरों और व्यवसायों में 250 मिलियन स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है।
- अब तक 55 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
- केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों द्वारा कार्यक्रम को लागू किया जा रहा है।
- भारत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत और कुशल बनने में मदद करने के लिए परिणाम संबद्ध अनुदान-सह-वित्तपोषण के माध्यम से इस पहल को आगे बढ़ा रहा है।
लाभ:
- स्मार्ट मीटर डिजिटल उपकरण हैं जो रियल टाइम में बिजली की खपत के डेटा को माप सकते हैं और यूटिलिटी को प्रसारित कर सकते हैं।
- ये अधिक सटीक बिलिंग, कम चोरी और छेड़छाड़, और बेहतर लोड प्रबंधन सहित पारंपरिक मीटरों की तुलना में कई फायदे प्रदान करते हैं।
- स्मार्ट मीटर ऊर्जा खपत के बारे में सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे बिलिंग में त्रुटियों को खत्म करने में मदद मिल सकती है।
- इससे ऊर्जा चोरी या छेड़छाड़ की घटनाओं का पता लगाया जा सकता है। इन मुद्दों की पहचान और समाधान करके, यह पहल यूटिलिटी के नुकसान को कम करने और बिजली क्षेत्र की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार करने में मदद कर सकती है।
- बिजली की खपत पर रीयल-टाइम डेटा यूटिलिटी को मांग को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। इससे अधिक स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति हो सकती है तथा ब्लैकआउट्स और ब्राउनआउट्स को कम करने में मदद मिल सकती है।
- स्मार्ट मीटर अक्षय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर और पवन ऊर्जा को ग्रिड में अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करने में मदद कर सकते हैं। ऊर्जा खपत और उत्पादन पर रीयल-टाइम डेटा प्रदान करके यूटिलिटी आपूर्ति और मांग को अधिक कुशलता से संतुलित कर सकती हैं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर सकती हैं।
चुनौतियां:
- स्मार्ट मीटर पारंपरिक मीटरों की तुलना में अधिक महंगे हैं, तथा यूटिलिटी के लिए विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंस्टालेशन और रखरखाव की लागत एक बड़ी चुनौती है।
- यूटिलिटी को डेटा संचारित करने के लिए इसमें विश्वसनीय संचार अवसंरचना की आवश्यकता होती है, जैसे कि एक मजबूत और सुरक्षित डेटा नेटवर्क। खराब नेटवर्क कवरेज या सीमित कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में यह एक चुनौती हो सकती है।
- गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी की विश्वसनीयता के बारे में चिंताओं के कारण कुछ उपभोक्ता स्मार्ट मीटर पर स्विच करने के प्रति अनिच्छुक हो सकते हैं।
- स्मार्ट मीटर तकनीकी समस्याओं जैसे खराबी, हैकिंग के प्रयासों और साइबर हमलों का भी सामना कर सकते हैं।
- स्मार्ट मीटर के कार्यान्वयन के लिए यूटिलिटी, नियामकों और उपभोक्ताओं सहित कई हितधारकों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
भावी कदम:
- भारत में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ उत्पादन स्रोतों से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए, स्मार्ट मीटरिंग पहल के लिए आवश्यक है कि उपयोगकर्ताओं की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर केंद्रित सिद्धांत को अपनाया जाए।
- केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के लाभों के बारे में शिक्षित करने और स्मार्ट मीटर ऐप के उपयोग में सुधार लाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना चाहिए।
- एप्लिकेशन विविध सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ होने चाहिए तथा कार्रवाई योग्य सुझाव और जानकारी प्रदान की जानी चाहिए।
- डिस्कॉम के पास एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर्स (AMISP) के साथ कार्यक्रम का सह-स्वामित्व होना चाहिए, विदित हो कि एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर्स (AMISP) परियोजना के जीवनकाल (10 वर्ष) के लिए AMI सिस्टम की स्थापना और संचालन के लिए जिम्मेदार है।
- डिस्कॉम, सिस्टम इंटीग्रेटर्स और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को स्मार्ट मीटर डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए अभिनव और स्केलेबल डेटा समाधान तैयार करने के लिए सहयोग करना चाहिए।
- नीति निर्माताओं और नियामकों को नए खुदरा बाजारों को अनलॉक करने और टैरिफ डिजाइन को सरल बनाने हेतु उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए नियमों को मजबूत करना चाहिए।
- केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने अप्रैल 2023 में एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए सभी स्मार्ट मीटर उपयोगकर्ताओं के लिए समय-परिवर्तनीय टैरिफ को सक्षम करने हेतु बिजली नियमों में संशोधन प्रस्तावित किया।
- नियामकों को टैरिफ डिजाइन में सरलीकरण और नवाचार को भी सक्षम बनाना चाहिए तथा खुदरा बाजार को नए व्यापार मॉडल और प्रोज्यूमर (उत्पादक, उपभोक्ता और भंडारण उपयोगकर्ता) के लिए खोलना चाहिए।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
- परमाणु ऊर्जा में विदेशी निवेश
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विषय: अर्थव्यवस्था
प्रारंभिक परीक्षा: निवेश मॉडल; प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI); भारत का परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962
संदर्भ:
- भारत परमाणु ऊर्जा में विदेशी निवेश पर विचार कर रहा है।
भूमिका:
- कई सरकारी स्रोतों के अनुसार, भारत अपने परमाणु ऊर्जा उद्योग में विदेशी निवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने और स्वच्छ ऊर्जा के लिए घरेलू निजी फर्मों की भागीदारी बढ़ाने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।
- इन उपायों की सिफारिश थिंक-टैंक नीति अयोग द्वारा गठित एक सरकारी समिति द्वारा की गई है।
- समिति ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 और विदेशी निवेश नीतियों में बदलाव की सिफारिश की है ताकि घरेलू और विदेशी दोनों निजी कंपनियां सार्वजनिक कंपनियों द्वारा परमाणु ऊर्जा उत्पादन में योगदान कर सकें।
- समिति ने परमाणु ऊर्जा उत्पादन में तेजी लाने के लिए पुराने कोयला-आधारित संयंत्रों को छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) से प्रतिस्थापित करने की भी सिफारिश की है। गौरतलब है कि भारत के कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का केवल 3% योगदान है।
- फैक्ट्री-बिल्ड और रेडी-टू-शिफ्ट, प्रत्येक SMR 300 मेगावाट (मेगावाट) तक का उत्पादन करता है और इनके लिए पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में कम पूंजी, समय और भूमि की आवश्यकता होती है। इन्हें सुरक्षित रूप से आबादी वाले क्षेत्रों में भी नियोजित किया जा सकता है।
वर्तमान स्थिति:
- भारत की वर्तमान परमाणु ऊर्जा क्षमता 6,780 मेगावाट है और यह 2031 तक 7,000 मेगावाट की क्षमता हासिल करने के लिए 21 और इकाइयों को जोड़ने पर कार्य कर रहा है।
- परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के तहत, केंद्र सरकार परमाणु ऊर्जा स्टेशनों को विकसित और संचालित करने करने में एक केंद्रीय भूमिका निभाती है।
- घरेलू निजी कंपनियों को रिएक्टरों के लिए घटकों की आपूर्ति करके और उन्हें बनाने में मदद करके “जूनियर इक्विटी पार्टनर” के रूप में भाग लेने की अनुमति है।
- भारत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं देता है।
- परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, पूर्व में वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक, जीई-हिटाची, इलेक्ट्रिकाइट डी फ्रांस और रोसाटॉम सहित कई विदेशी कंपनियां प्रौद्योगिकी भागीदारों, आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं के रूप में देश की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भाग लेने में इच्छुक थीं।
- भारत सरकार द्वारा संचालित न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम भारत में केवल दो परमाणु ऊर्जा उत्पादक हैं। थर्मल पावर कंपनी NTPC और ऑयल मार्केटिंग फर्म इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (दोनों सरकार-नियंत्रित) ने परमाणु ऊर्जा के लिए NPCIL के साथ साझेदारी की है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- गैर-संचारी रोग:
- केंद्र सरकार गैर-संचारी रोगों (NCD) के नियंत्रण और रोकथाम के लिए अपने कार्यक्रम को व्यापक और पुनर्नामित कर रही है।
- केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भी उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ओरल, स्तन और सर्वाइकल कैंसर सहित पांच सामान्य गैर-संचारी रोगों के लिए 30 वर्षों से अधिक उम्र वाले लोगों की गणना, जोखिम मूल्यांकन और स्क्रीनिंग के लिए पोर्टल का नाम बदल रहा है।
- राज्यों को मंत्रालय द्वारा किए गए परिवर्तनों का पालन करने के लिए कहा गया है।
- कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों और स्ट्रोक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCDCS) में अब एक नए नाम [गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम- NP-NCD] के तहत सभी प्रकार के गैर-संचारी रोग शामिल होंगे।
- व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा गैर-संचारी रोग सॉफ्टवेयर का नाम बदलकर ‘राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल’ (National NCD Porta) कर दिया जाएगा।
- NPCDCS को देश भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत लागू किया जा रहा है।
- सोने की मांग में गिरावट:
- विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के अनुसार, 2023 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में भारत की सोने की मांग सालाना आधार पर 17 फीसदी गिरकर 112.5 टन हो गई है।
- मूल्य के हिसाब से पहली तिमाही के दौरान भारत में सोने की मांग, 56,220 करोड़ रुपए थी, जो पिछले वर्ष से 9% कम है।
- भारत में 2023 की पहली तिमाही में आभूषण की मांग पिछले वर्ष की तुलना में 17% घटकर 78 टन रह गई है।
- पहली तिमाही के लिए कुल निवेश मांग साल-दर-साल आधार पर 17% कम होकर 34.4 टन हो गई है।
- सोने की उच्च और अस्थिर कीमतों ने भावना (sentiment) को प्रभावित किया है जिसके कारण सोने के आभूषण की मांग में गिरावट आई है। शुभ दिनों की संख्या में कमी के साथ-साथ सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण कई परिवारों ने मूल्य सुधार की प्रत्याशा में सोने की खरीद से परहेज किया है।
- यूरोपीय संघ की कार्बन कर योजना:
- केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय यूरोपीय संघ द्वारा कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) को लागू करने की योजना से निपटने के लिए विभिन्न विकल्पों की खोज कर रहा है।
- यूरोपीय संघ की CBAM योजना में निगरानी तंत्र और कर लगाना शामिल होगा, जो यूरोपीय संघ को भारतीय धातु और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
- भारत कई विकल्पों की जांच कर रहा है, जिसमें प्रतिशोधी टैरिफ उपाय, जो विश्व व्यापार संगठन में एक चुनौती है, और छोटे भारतीय निर्यातकों की मदद करने के उपाय शामिल हैं।
- वाणिज्य विभाग, इस्पात मंत्रालय तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), इस्पात उद्योग और एल्यूमीनियम उद्योग का सहयोग करने के लिए तंत्र निर्माण हेतु मिलकर काम कर रहे हैं।
- सेना द्वारा स्वचालन (ऑटोमेशन) परियोजनाएं:
- भारतीय सेना परिचालन दक्षता और मानव संसाधन प्रबंधन,लॉजिस्टिक्स, इन्वेंट्री प्रबंधन, चिकित्सा सेवाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कई सुरक्षित स्वचालन परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।
- इन परियोजनाओं में से एक प्रोजेक्ट संजय के तहत युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली (BSS) है।
- युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक सभी स्तरों के कमांडरों को एक वास्तविक समय आधारित, एकीकृत निगरानी तस्वीर प्रदान करना है।
- युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली (BSS) विभिन्न सेंसर, उपग्रहों, मानव रहित हवाई वाहन और गश्त की मदद से भारत के विरोधियों की हलचल से संबंधित डेटा को एकीकृत करता है।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) परियोजना का सिस्टम इंटीग्रेटर है और इसने सैकड़ों परीक्षणों के बाद 95% से अधिक की सफलता दर हासिल की है।
- परीक्षणों के दौरान सेना के दो कोर के तहत कुछ निगरानी केंद्र स्थापित किए गए थे, और पूर्ण परियोजना को 2025 के अंत तक लागू किया जाएगा।
- स्पेक्ट्रम के लिए सुरक्षित नेटवर्क इन परियोजनाओं को सक्षम करने के लिए पर्याप्त बैंडविड्थ प्रदान करेगा।
- सेना देश भर में कैप्टिव डेटा केंद्र स्थापित कर रही है, जो इस वर्ष तक पूरी तरह से चालू हो जाएंगे।
- BSS को लागू करना, उन्नत सैन्य सूचना एवं निर्णय समर्थन प्रणाली तथा सेना के लिए स्थितिजन्य जागरूकता मॉड्यूल (SAMA) के तहत आता है।
- SAMA को Bisag-n के साथ मिलकर विकसित किया गया है।
- एक अन्य प्रमुख परियोजना सिचुएशनल रिपोर्टिंग ओवर एंटरप्राइज-क्लास जीआईएस प्लेटफॉर्म (ई-सिट्रेप) है जो सेना में सभी परिचालन पत्राचार को संभालेगी।
- कम्प्यूटरीकृत इन्वेंट्री कंट्रोल प्रोजेक्ट (CICP) सेना के भण्डारण, युद्ध-सामग्री, विमानों और वाहनों के प्रबंधन के लिए एक उद्यम संसाधन योजना समाधान है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन सी परियोजनाएँ सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा विकसित की गई हैं? (स्तर-कठिन)
- बीकन
- दंतक
- संपर्क
- वर्तक
- विजयक
विकल्प:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 4 और 5
- केवल 2, 3, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: D
व्याख्या:
- उपरोक्त सभी परियोजनाएं सीमा सड़क संगठन द्वारा विकसित की गई हैं।
- प्रोजेक्ट बीकन को 1960 के दशक में लॉन्च किया गया था। इस परियोजना के तहत वर्तमान में कश्मीर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़क बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव का काम देखा जाता है।
- प्रोजेक्ट हिमांक के साथ प्रोजेक्ट विजयक लद्दाख में महत्वपूर्ण सड़क बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।
- प्रोजेक्ट दंतक भूटान में सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव के लिए भारत के सीमा सड़क संगठन (BRO) और भूटान की शाही सरकार की एक संयुक्त पहल है। यह परियोजना 1961 में शुरू हुई थी और तब से इसके तहत भूटान में 1,500 किमी. से अधिक सड़कों और 168 पुलों का निर्माण किया जा चुका है।
- प्रोजेक्ट संपर्क BRO द्वारा 1975 में शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत जम्मू, कठुआ, डोडा, उधमपुर, राजौरी, रियासी और पुंछ के सीमावर्ती जिले में लगभग 2,600 किमी. रणनीतिक सड़कों के निर्माण, सुधार और रखरखाव का काम देखा जाता है।
- जम्मू और कश्मीर में उझ ब्रिज और बसंतर ब्रिज, जो इस परियोजना के तहत बनाए गए थे, का उद्घाटन 2019 में किया गया था।
- प्रोजेक्ट वर्तक का गठन 1960 में प्रोजेक्ट टस्कर के रूप में किया गया था और बाद में 1963 में इसे प्रोजेक्ट वर्तक का नाम दे दिया गया।
- यह सीमा सड़क संगठन की पहली स्थापित परियोजना है। इसके कार्य को बाद में अरुणाचल प्रदेश और असम के आस-पास के जिलों में सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए विस्तारित किया गया।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद केंद्र को प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक गड़बड़ी से बचाने तथा यह सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के प्रावधानों के अनुसार चले? (स्तर-मध्यम)
- अनुच्छेद 351
- अनुच्छेद 355
- अनुच्छेद 358
- अनुच्छेद 361
उत्तर: B
व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 355 एक ऐसा प्रावधान है जो केंद्र सरकार को किसी भी राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का अधिकार देता है।
- यह प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था को कोई खतरा होने की स्थिति में केंद्र सरकार को किसी राज्य के मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है।
- किसी राज्य को बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति से बचाने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न उपाय कर सकती है, जैसे कि सशस्त्र बलों की तैनाती।
- हालाँकि, यह प्रावधान केंद्र सरकार की शक्तियों पर कुछ प्रतिबंध भी लगाता है। केंद्र सरकार अनुच्छेद 355 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग केवल तभी कर सकती है जब राज्य सरकार ने उससे सहायता का अनुरोध किया हो या यदि राष्ट्रपति, राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त करने पर या अन्यथा संतुष्ट हो कि राज्य की स्थिति को देखते हुए इस तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
प्रश्न 3. दुर्लभ रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-मध्यम)
- सभी दुर्लभ रोग अनुवांशिक होते हैं और इसलिए बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित करते हैं।
- राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) के अनुसार, समूह 1 रोग वे होते हैं जिनके मामले में दीर्घकालिक या आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- दोनों
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: D
व्याख्या:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुर्लभ रोग आजीवन रहने वाला एक रोग या विकार है, जिसकी आवृत्ति प्रति 10,00 लोगों में 1 या उससे कम होती है।
- अधिकांश दुर्लभ रोग मूल रूप से अनुवांशिक होते हैं और इस प्रकार व्यक्ति में जीवन भर मौजूद रहते हैं, भले ही इसके लक्षण तुरंत प्रकट न हों।
- लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (LSD), पोम्पे रोग, सिस्टिक फाइब्रोसिस, पेशीय दुर्विकास, स्पाइना बिफिडा, हीमोफिलिया दुर्लभ रोगों के कुछ उदाहरण हैं।
- दुर्लभ रोगों की राष्ट्रीय नीति के अनुसार दुर्लभ रोगों का वर्गीकरण।
- समूह 1: ऐसे रोग जिनके मामले में एकमुश्त उपचार की आवश्यकता होती है।
- समूह 2: ऐसे रोग जिनके मामले में दीर्घकालिक या आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है।
- समूह 3: ऐसे रोग जिनके लिए निश्चित उपचार उपलब्ध है, लेकिन लाभ, बहुत अधिक लागत और आजीवन उपचार के लिए इष्टतम रोगी चयन करना चुनौतियाँ हैं।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- कांगलीपक का लिखित संविधान लोयुम्बा शिनयेन औपचारिक रूप से पीतांबर चरैरोंगबा के प्रयासों से अस्तित्व में आया था।
- मणिपुर ने चीनी व्यापारियों से बारूद बनाने की कला सीखी।
- प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के समापन पर, मणिपुर एक ब्रिटिश संरक्षित राज्य बन गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: B
व्याख्या:
- कथन 01 गलत है, लोयुम्बा शिनयेन 11वीं-12वीं शताब्दी का लिखित संविधान है, जिसे राजा लोयुम्बा (1074 ईस्वी-1112 ईस्वी) के शासन के दौरान मणिपुर राज्य में विनियमित किया गया था।
- पीतांबर चरैरोंगबा को “एनिंग्थौ निंगथेम चारैरोंगबा” (Eningthou Ningthem Charairongba) के नाम से भी जाना जाता है, जो 1697 से 1709 तक मैतेई राजा और कांगलीपक के शासक थे।
- कथन 02 सही है, मणिपुर के साथ चीनी व्यापार के परिणामस्वरूप रेशम और रेशमकीट की शुरूआत तथा बारूद बनाने जैसे कुछ आर्थिक नवाचार हुए हैं। मणिपुर ने चीनी व्यापारियों से बारूद बनाने की कला सीखी।
- कथन 03 सही है, प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध में, अंग्रेजों ने राजकुमार गंभीर सिंह को मणिपुर के अपने राज्य को वापस पाने में मदद की, जिस पर बर्मी लोगों का कब्जा था। इसके बाद, मणिपुर एक ब्रिटिश संरक्षित क्षेत्र बन गया।
प्रश्न 5. दूरसंचार प्रसारण हेतु प्रयुक्त उपग्रहों को भू-अप्रगामी कक्षा में रखा जाता है। एक उपग्रह ऐसी कक्षा में तब होता है जब: (स्तर-कठिन) (PYQ-CSE-201)
- कक्षा भू-तुल्यकालिक होती है।
- कक्षा वृत्ताकार होती है।
- कक्षा पृथ्वी के भूमध्य रेखा के तल में स्थित होती है।
- कक्षा 22,236 किमी की तुंगता पर होती है।
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 3 और 4
- केवल 2 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: A
व्याख्या: एक भू-अप्रगामी (भूस्थैतिक) कक्षा एक वृत्ताकार भूतुल्यकालिक कक्षा होती है जिसमें उपग्रह औसत समुद्र तल से लगभग 35786 किमी. की ऊँचाई पर स्थित होता है। कक्षा पृथ्वी के भूमध्य रेखा के तल में स्थित होती है। इस तरह की कक्षा में एक वस्तु की परिक्रमा अवधि पृथ्वी की घूर्णन अवधि के बराबर होती है और इस प्रकार वस्तु गतिहीन अवस्था में दिखाई देती है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. G20 के अध्यक्ष और SCO के नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए? (150 शब्द, 10 अंक) (GSII-अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न 2. “स्मार्ट मीटरिंग भारत की बिजली क्रांति के लिए महत्वपूर्ण है” टिप्पणी कीजिए? (150 शब्द, 10 अंक) (GSIII-अर्थव्यवस्था)