14 अगस्त 2022 : समाचार विश्लेषण
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A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय संबंध
C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: अर्थव्यवस्था
D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E.सम्पादकीय: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी:
अर्थव्यवस्था:
स्वास्थ्य:
F. प्रीलिम्स तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है G.महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
एयरलाइनों को पीएनआर डेटा क्यों साझा करना होगा?
अर्थव्यवस्था
विषय: अवसंरचना, हवाईअड्डा
मुख्य परीक्षा:यात्री नाम रिकॉर्ड सूचना विनियम, 2022
पृष्ठभूमि विवरण:
- सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में संशोधन एवं वित्त विधेयक, 2017 में प्रस्तावित होने के पांच साल बाद यह अधिनियम प्रस्तुत हुआ है।
- वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा अधिसूचित यात्री नाम रिकॉर्ड सूचना विनियम, 2022 के अनुसार, एयरलाइनों को भारत में आने और जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का विवरण सीमा शुल्क विभाग को अनिवार्य रूप से साझा करना होगा।
- इन विनियमों का उद्देश्य सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सोने, नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी से संबंधित अपराधों को रोकना और उन पर मुकदमा चलाना है।
यात्री जानकारी को एकत्र करने की पूर्व की प्रक्रिया:
- गृह मंत्रालय द्वारा विदेशी अधिनियम, 1946 में 2008 में किए गए संशोधन के बाद ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एडवांस पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (APIS) के तहत यात्रियों का विवरण एकत्र किया जाता था।
- इसके माध्यम से विदेशियों के डेटा के संग्रह की अनुमति थी, न कि देश में और बाहर यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के डेटा की।
- APIS एक एयरलाइन के प्रस्थान नियंत्रण प्रणाली का हिस्सा है और जब यात्री हवाई अड्डों पर चेक-इन करते हैं तो यह डेटा कैप्चर करता है। तत्पश्चात उड़ान के प्रस्थान से 15 मिनट पहले विवरण को गंतव्य देश में स्थानांतरित करता है।
- हालांकि, PNR जानकारी एयरलाइन की आरक्षण प्रणाली द्वारा उस समय एकत्रित की जाती है जब कोई यात्री टिकट खरीदता है। यह जोखिम प्रबंधन के लिए समृद्ध डेटा प्रदान करता है, जिसे प्रस्थान से 24 से 48 घंटे पहले साझा किया जा सकता है जिससे खुफिया एजेंसियों को जोखिम विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
डेटा स्थानांतरित करने के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया:
- “जोखिम विश्लेषण” हेतु यात्री जानकारी को एकत्र करने के लिए CBIC द्वारा एक डेटाबेस, राष्ट्रीय सीमा शुल्क लक्ष्य यात्री केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- एयरलाइंस को अपने आरक्षण प्रणाली से इस डेटाबेस में “यात्री नाम रिकॉर्ड (PNR) जानकारी” को स्थानांतरित करना होगा।
- जानकारी में PNR, आरक्षण की तारीख, यात्रा की तारीख, क्रेडिट कार्ड नंबर, सीट की जानकारी आदि जैसे विवरण शामिल होंगे।
- डेटा अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों या भारत के सरकारी विभागों या किसी अन्य देश द्वारा भी मांगा जा सकता है।
- प्रस्थान से कम से कम 24 घंटे पहले यह डेटा साझा करना होगा।
- गैर-अनुपालन की स्थिति में एयरलाइंस पर ₹ 25,000 से ₹ 50,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रस्तावित विनियमों के प्रति एयरलाइन कंपनियों की प्रतिक्रियाएं:
- इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने इस कानूनी प्रक्रिया का स्वागत किया है।
- IATA विश्व स्तर पर 290 एयरलाइनों का एक व्यापार संघ है।
- एयरलाइंस का विचार यह है कि सरकार को परामर्श करना चाहिए साथ ही विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करना चाहिए और क्रियान्वयन के लिए एक व्यवहार्य समय सीमा प्रदान करनी चाहिए।
- उन्होंने यह भी मांग की कि अपर्याप्त डेटा या नकली विवरण के लिए एयरलाइनों पर दंड नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि वे केवल सूचना दे रहे हैं।
डेटा साझाकरण संबंधित गोपनीयता संबंधी चिंताएं:
- CBIC ने आश्वासन दिया कि डेटा एक्सचेंज का प्रारूप अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO), विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) और IATA द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित एक मानक इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रारूप है।
- डेटा को अधिकतम पांच साल की अवधि के लिए संग्रहित किया जाएगा जिसके बाद इसे डीपर्सनलाइजेशन या अनामिकता द्वारा निपटाया जाएगा।
- हालांकि, निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए चिन्हित मामले/खतरे/जोखिम के संबंध में उपयोग किए जाने पर इसे फिर से वैयक्तिकृत/प्रकट किया जा सकता है।
CBIC को होने वाले डेटा ट्रांसफर से संबंधित अन्य मुद्दे:
- ऐसी आशंका है कि कुछ यात्रियों को चिन्हित करने के बजाय सभी का डेटा एकत्र करना एक अनिर्धारित जोखिम विश्लेषण हेतु चिंताजनक है।
- अज्ञात डेटा दो आधारों पर चिंताजनक है:
- सबसे पहले, यह अनामीकृत करने की प्रक्रिया के प्रकार पर सवाल उठाता है क्योंकि अनामीकृत किए जाने के बाद भी डाटा आसानी से पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
- दूसरा, अनामिकता को हटाते हुए डाटा पुनः प्राप्त करने की अनुमति के लिए एक उच्च अवरोध की आवश्यकता है, और केवल बहुत गंभीर आधार पर ही किया जाना चाहिए।
- साथ ही, डेटा सुरक्षा कानून का अभाव डेटा सुरक्षा पहलुओं के संदर्भ में चिंताओं को और बढ़ाते है।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
श्रीलंका ने चीनी पोत युआन वांग 5 को हंबनटोटा बंदरगाह पर आने की मंजूरी दे दी
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
विषय: भारत और इसके पड़ोसी संबंध
मुख्य परीक्षा:श्रीलंका में भारत और चीन के भू-रणनीतिक हित।
संदर्भ: श्रीलंका ने दक्षिण हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी अंतरिक्ष और उपग्रह ट्रैकिंग पोत युआन वांग 5 के आगमन को मंजूरी दे दी।
विवरण:
- श्रीलंका की राजनयिक स्थिति अत्यंत ही दुविधापूर्ण अवस्था में थी क्योंकि उसे प्रतिस्पर्धी भू-सामरिक हितों वाले अपने दो करीबी सहयोगियों के संबंध में निर्णय लेना था।
- हालांकि श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी जहाज के आने की मंजूरी दे दी थी। यह एक सप्ताह का पड़ाव होगा जैसा कि पहले प्रस्तावित था।
- यह आगमन श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय की शर्तों पर आधारित है कि चीनी पोत की स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) को श्रीलंका के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर चालू रखा जाना चाहिए और श्रीलंकाई जल क्षेत्र में कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं किया जाना चाहिए। .
- भारत ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ इस मामले को उठाया और विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक टिप्पणी की। भारत ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाले किसी भी घटनाक्रम की सावधानीपूर्वक निगरानी की जाती है।
- चीन ने भारत की चिंता पर आपत्ति जताई है और भारत पर चीन और श्रीलंका के संबंधों को बिगाड़ने का आरोप लगाया है।
सारांश:
- हंबनटोटा बंदरगाह में चीन और भारत की रुचि श्रीलंका के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण रही है, जो कि सप्ताह भर के विचार-विमर्श से स्पष्ट हो गया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः चीनी पोत को मंजूरी मिल गई।
संपादकीय-द हिन्दू
सम्पादकीय:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 से संबंधित:
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी:
क्या तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के मानदंडों का उल्लंघन किया गया है?
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
प्रारंभिक परीक्षा: तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2019
मुख्य परीक्षा: CAG की ऑडिट रिपोर्ट में बताई गई चिंताएं
संदर्भ:
- भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने संसद में ‘2015-20 से तटीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण’ पर की गई ऑडिट टिप्पणियों के आधार पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में केंद्र और राज्यों द्वारा अपनाई जा रही संरक्षण प्रक्रिया की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करती है।
- CAG के पास सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित कार्यक्रमों के ‘प्रदर्शन ऑडिट’ करने का संवैधानिक अधिकार है।
पृष्ठभूमि:
- भारत के तटों पर गतिविधियों को विनियमित करने के लिए केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत अधिकार प्राप्त है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना (CRZ) 2019 प्रस्तुत किया था।
- इसके तहत तटीय क्षेत्र को नियमन हेतु अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इस ढाँचे में एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम (ICZMP) के समग्र उद्देश्य के साथ CRZ के क्रियान्वयन हेतु एक संस्थागत तंत्र की परिकल्पना की गई है।
ऑडिट रिपोर्ट में की गई टिप्पणियां:
- CAG द्वारा किए गए “पूर्व-ऑडिट अध्ययन” में तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तटीय विनियमन क्षेत्र का उल्लंघन पाया गया। इसमें अवैध निर्माण गतिविधियां, स्थानीय निकायों, उद्योगों और जलीय कृषि फार्मों से संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में अपशिष्ट निर्वहन शामिल हैं। इस संदर्भ में सीएजी ने विस्तृत जांच की।
- CRZ नीति के क्रियान्वयन हेतु शीर्ष संस्था के रूप में परिकल्पित राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (NCZMA) पर्यावरण मंत्रालय द्वारा एक स्थायी निकाय के रूप में अधिसूचित न होने के कारण एक तदर्थ निकाय के रूप में कार्य कर रहा है। प्रत्येक कुछ वर्षों में इसका पुनर्गठन किया जा रहा है। इससे इसके कामकाज और इसकी प्रभावशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
- विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियाँ – कुछ परियोजना विचार-विमर्श के दौरान एक बुनियादी ढांचा परियोजना की व्यवहार्यता और इसके पर्यावरणीय परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए नामित वैज्ञानिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ नौकरशाहों की समिति अनुपस्थित पाई गई जो नीति दिशानिर्देशों के स्पष्ट उल्लंघन को दर्शाता है। इसके अलावा कुछ मामलों में, विचार-विमर्श में भाग लेने वाले EAC के सदस्य कुल संख्या के आधे से भी कम थे।
- कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में, राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्गठन नहीं किया गया था और गोवा, ओडिशा व पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पुनर्गठन में देरी हुई थी। यह स्पष्ट रूप से CRZ नीति प्रावधान का उल्लंघन है जो यह कहता है कि प्रत्येक तटीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण है।
- प्रत्येक जिले जिसमें तटीय क्षेत्र है, और जहां CRZ अधिसूचना लागू है, के लिए अनिवार्य जिला स्तरीय समितियां (DLC) आंध्र प्रदेश में स्थापित नहीं की गई थी और इन महत्वपूर्ण संस्थानों में तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थानीय पारंपरिक समुदायों की भागीदारी का अभाव था।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार करने में गंभीर समस्याएँ थीं। कुछ मामलों में गैर-मान्यता प्राप्त सलाहकार EIA तैयार कर रहे थे। पुराने डेटा का उपयोग और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन करने और परियोजना क्षेत्र जो आपदाओं के लिए प्रवण था, का मूल्यांकन करने में विफलता इन रिपोर्टों की प्रभावकारिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- EIA रिपोर्ट में व्यक्त किए गए गंभीर चिंताओं के बावजूद कुछ परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही थी।
- रिपोर्ट में राज्यों के अपने अधिकार क्षेत्र में संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए रणनीति बनाने में विफलता को रेखांकित किया गया है। यह तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा घोषित अवरुद्ध कार्यक्रमों और पहलों की ओर इशारा करता है।
आगे क्या?:
- सीएजी द्वारा प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट संसद की संबंधित स्थायी समिति के समक्ष रखी जाएगी। पर्यावरण मंत्रालय को सीएजी द्वारा बताई गई कमियों को दूर करने प्रयास करना चाहिए।
सारांश:
- तटीय विनियमन क्षेत्र नीति, जो महत्वपूर्ण और संवेदनशील तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है, का कमजोर क्रियान्वयन चिंता का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित
अर्थव्यवस्था
डिजिटल उधार
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
मुख्य परीक्षा: भारत में डिजिटल उधार से जुड़े महत्व और चिंताएं
संदर्भ:
- हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल ऋण खंड को विनियमित करने के लिए एक रूपरेखा लेकर आया है।
डिजिटल उधार:
- डिजिटल लेंडिंग में वेब प्लेटफॉर्म या मोबाइल ऐप के माध्यम से उधार देना, प्रमाणीकरण और क्रेडिट मूल्यांकन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना शामिल है।
- डिजिटल लेंडिंग के तहत, लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (LSP) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के साथ साझेदारी में काम करते हैं, जो ग्राहक को पूर्व प्लेटफॉर्म का उपयोग करके क्रेडिट (या लाइन ऑफ़ क्रेडिट) वितरित करते हैं।
डिजिटल उधार खंड का महत्व:
- यह देखते हुए कि डिजिटल उधार में अधिकांश गतिविधियों के लिए स्वचालित तकनीकों का उपयोग होता है, इसमें कम परिचालन लागत का लाभ होता है और यह ऋणों के त्वरित वितरण को सुनिश्चित करने में भी मदद कर सकता है।
- बिना प्रलेखित क्रेडिट हिस्ट्री वाले छोटे उधारकर्ता और इस प्रकार, जिन्हें पारंपरिक वित्तीय संस्थानों द्वारा सेवा प्रदान नहीं की गई होती है, को इस खंड के माध्यम से अपनी अल्पकालिक ऋण आवश्यकताओं के लिए एक क्रेडिट एवेन्यू मिल गया है।
- डिजिटल उधार सेगमेंट, क्रेडिट इकोसिस्टम में ऋण की मांग को पूरा करने में संलग्न बैंकों के वर्चस्व वाली मौजूदा वित्तीय प्रणाली की भूमिका को परिपूर्ण करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल उधार सेगमेंट की चिंताएं:
- भारतीय एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध उधार देने वाले ऐप्स की एक बड़ी संख्या अवैध है, क्योंकि वे या तो आरबीआई द्वारा विनियमित नहीं हैं या एनबीएफसी भागीदार हैं जिनकी संपत्ति का आकार ₹1,000 करोड़ से कम है। इस खंड के लिए एक मानकीकृत नियामक मानदंड के अभाव से इस खंड को विनियमित करनाऔर अधिक कठिन हो जाता है।
- ऋण सेवा प्रदाता इस खंड में उच्च प्रतिस्पर्धा के कारण लापरवाह ऋण पद्धतियों का सहारा लेते हुए पाए गए हैं। वे उधारकर्ता की चुकौती क्षमता से परे ऋण उधार देते हुए पाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उच्च ब्याज दरें देखी जाती हैं।
- ऋण देने वाले सेवा प्रदाताओं द्वारा गलत बिक्री, अनुचित व्यापार आचरण, अत्यधिक ब्याज दर शुल्क लगाने और अनैतिक वसूली की गंभीर चिंताएं भी हैं।
- तीसरे पक्ष के बेलगाम जुड़ाव और उनके साथ उधारकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी को साझा करना उधारकर्ताओं की डेटा गोपनीयता के संभावित उल्लंघन के बराबर है। यह इस खंड अर्थात सेगमेंट के संबंध में एक प्रमुख चिंता का विषय है।
- व्यवसाय की बहु-पक्षीय प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आरबीआई ने कहा है कि किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को तीसरे पक्ष के साथ साझा करने के लिए उपयोगकर्ता की सहमति अनिवार्य होगी।
नए नियम:
- उधार उन संस्थाओं द्वारा दिया जाना चाहिए जो या तो आरबीआई द्वारा विनियमित हैं या जिन्हें प्रासंगिक कानून के तहत काम करने की अनुमति है। यह उक्त खंड में किसी भी अवैध संस्थाओं के संचालन को सीमित कर देगा।
- सभी ऋण संवितरण और पुनर्भुगतान सीधे उधारकर्ता और संस्था के बैंक खातों के बीच निष्पादित किए जाने होते हैं। यह तीसरे पक्ष की भागीदारी को खत्म करने में सहायक होगा।
- उधारदाताओं को अनिवार्य रूप से सभी शुल्क और प्रशुल्कों के बारे में एक मानकीकृत प्रारूप में उधारकर्ता को सूचित करना होगा और LSP को ग्राहकों की पूर्व सहमति के बिना उसे बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। यह गलत बिक्री, अनुचित व्यापार आचरण, अत्यधिक ब्याज दरों को वसूलने की चिंताओं को दूर करने में मदद करेगा।
- नए नियम में एक समर्पित समाधान ढांचे को अनिवार्य किया गया है जिसके लिए डिजिटल ऋण देने वाली संस्था को एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता होती है। यह आरबीआई की एकीकृत लोकपाल योजना (RB-IOS) के दायरे में आएगा और शिकायत दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर सभी शिकायतों का समाधान करना होगा।
- डिजिटल लेंडिंग ऐप्स द्वारा एकत्र किया गया सभी डेटा “ज़रूरत-आधारित” होना चाहिए और उधारकर्ता की पूर्व और स्पष्ट सहमति से होना चाहिए। उपयोगकर्ताओं को पहले दी गई सहमति को रद्द करने की भी अनुमति है।
सारांश:
डिजिटल उधार खंड के लिए आरबीआई के नए नियम भारत में इस आला सेगमेंट को प्रभावित कर रही कुछ गंभीर समस्याओं को दूर करने में मदद करेंगे।
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
स्वास्थ्य
जूनोटिक रोगों से उत्पन्न खतरे
विषय: स्वास्थ्य से संबंधित विषय।
प्रारंभिक परीक्षा: LayV
मुख्य परीक्षा: जूनोटिक रोगों की चुनौती से निपटना।
संदर्भ:
- हाल ही में, पूर्वी चीन में लैंग्या (LayV) नामक एक नए जूनोटिक वायरस की पहचान की गई है, जो मनुष्यों को संक्रमित करता है।
विवरण:
- लैंग्या वायरस, हेनिपावायरस की एक प्रजाति है और इससे बुखार, थकान, खांसी, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया या कम प्लेटलेट काउंट, और ल्यूकोपेनिया या कम सफेद रक्त कोशिका काउंट की स्थिति आती है। कुछ मामलों में, डॉक्टरों ने खराब लीवर और गुर्दे की स्थिति को भी देखा।
- इस वायरस की उत्पत्ति के अध्ययन से पता चला है कि छछूंदर इस वायरस के आधार हो सकते हैं।
सिफारिशें:
- जबकि विशेषज्ञों ने कहा है कि LayV वायरस को लेकर कोई विशेष चिंता नहीं है, फिर भी निम्नलिखित उपायों की आवश्यकता है।
- निरंतर निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
- जानवरों से मनुष्यों में जाने वाले रोगजनकों के लिए जांच और जीनोम अनुक्रमण पर एक मानक प्रक्रिया भी होनी चाहिए।
- ज़ूनोटिक रोगों के जोखिम को समझने के लिए उभरते हुए वायरस के लिए नियमित रूप से मनुष्यों और जानवरों का परीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
- राष्ट्रों के बीच सूचनाओं के पर्याप्त आदान-प्रदान से दुनिया भर में तेजी से फैलने वाली बीमारी को रोकने में मदद मिलेगी।
सारांश
जब जूनोटिक रोगों की चुनौती से निपटने की बात आती है, तो निवारक उपाय उपचारात्मक उपायों की तुलना में असीम रूप से बेहतर होते हैं। निरंतर निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रीलिम्स तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है
महत्वपूर्ण तथ्य:
- भारत, इटली ने कानूनी सहायता संधि पर संवाद किया
- भारत और इटली के बीच एक पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT) पर विचार-विमर्श किया गया।
- यह सुनिश्चित करेगा कि दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों की जांच के लिए औपचारिक प्रक्रिया हो।
- अंतिम समझौता इस चिंता के कारण अटका हुआ है कि भारत में जघन्य अपराधों के लिए अधिकतम सजा “मृत्युदंड” है, जिसे इटली में बहुत पहले समाप्त कर दिया गया था।
- पारस्परिक कानूनी सहायता को एक ऐसी विधि के रूप में परिभाषित किया गया है जिसके द्वारा राष्ट्र एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं ताकि अपराधियों के दमन, रोकथाम, जांच और अभियोजन में कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके।
- यह सुनिश्चित करता है कि अपराधी अन्य देशों के प्रावधानों का दुरुपयोग न करें और कानून की उचित प्रक्रिया को दरकिनार न कर दें।
- भारत ने दुनिया के लगभग 45 देशों के साथ MLAT पर हस्ताक्षर किए हैं।
- भारत का अभी तक आपराधिक मामलों पर इटली के साथ द्विपक्षीय समझौता नहीं है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. पारसी धर्म (Zoroastrianism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- इस धर्म का पवित्र ग्रंथ तोरा (Torah) है।
- अग्नि और जल को पारसी धर्म का शुद्ध प्रतीक माना जाता है।
- दखमा-नाशिनी (Dakhma-nashini) शरीर त्याग हेतु स्वैच्छिक उपवास की एक धार्मिक प्रथा है जिसमें भोजन और तरल पदार्थों के सेवन को धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है।
विकल्प:
- केवल 1 और 2
- केवल 2
- केवल 3
- इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है, इस धर्म का पवित्र ग्रंथ अवेस्ता है।
- कथन 2 सही है, स्वच्छ जल के साथ अग्नि को कर्मकाण्डीय शुद्धता का कारक माना जाता है। अग्नि का उपयोग ईश्वर के साथ संवाद करने के लिए एक माध्यम के रूप में किया जाता है, जिसे वे अहुरा मज़्दा कहते हैं।
- कथन 3 गलत है, दखमा-नाशिनी शवाधान (शरीर को ख़त्म करने) की एक प्रक्रिया है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बासमती चावल लंबे दाने वाला चावल है जिसकी उत्पत्ति भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में हुई है।
- वैश्विक उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- कृषि भूमि से बासमती चावल की उपज, गैर-बासमती किस्मों का लगभग आधा है।
- बासमती जितनी पुरानी होती है, उसका स्वाद और सुगंध उतना ही बेहतर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 2 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है, बासमती लंबे दाने वाला चावल चावल है जिसका उत्पत्ति भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में हुई है।
- कथन 2 सही है, भारत वैश्विक उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बासमती चावल का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है।
- कथन 3 सही है, कृषि भूमि से बासमती चावल की उपज गैर-बासमती किस्मों का लगभग आधा है। इसकी उच्च कीमत का एक कारण यह भी है।
- कथन 4 सही है, बासमती की एक विशिष्ट सुगंध होती है जो गैर-बासमती किस्मों में नहीं होती है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किसे टीटागढ़ षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराया गया था?
- भवानी प्रसाद भट्टाचार्य
- चित्तरंजन दास
- पारुल मुखर्जी
- एस.एम. जोशी
उत्तर: c
व्याख्या:
- पारुल मुखर्जी, पूर्णानंद दास गुप्त, सीता नाथ डे, निहार रंजन रे, श्याम विनोद पाल चौधरी, और अन्य के साथ टीटागढ़ षड्यंत्र मामले में शामिल थी। ये क्रांतिकारी मजदूरों को अंग्रेजों द्वारा गंभीर यातना दिए जाने के कारण उनके खिलाफ लड़ने के लिए विस्फोटक तैयार करते थे ।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- उन्हें ब्रिटिश भारतीय पुलिस ने तामलुक पुलिस स्टेशन के सामने गोली मार दी थी।
- उन्हें स्नेह से गांधी बुढ़ी के नाम से जाना जाता था।
- उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया और नमक क़ानून को तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार हुई।
उपर्युक्त कथनों में निम्नलिखित में से किस व्यक्तित्व का जिक्र है?
- वीणा दास
- कल्पना दत्त
- मातंगिनी हाजरा
- प्रीतिलता वड्डेदार
उत्तर: c
व्याख्या:
- मातंगिनी हाजरा (19 अक्टूबर 1870 – 29 सितंबर 1942 [1]) एक भारतीय क्रांतिकारी थीं, जिन्होंने 29 सितंबर 1942 तक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। विदित हो कि 29 सितंबर 1942 को तामलुक पुलिस स्टेशन (पूर्व में मिदनापुर जिले के) के सामने ब्रिटिश भारतीय पुलिस की गोली से उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्हें स्नेह से गांधी बूढ़ी (बंगाली में ओल्ड लेडी गांधी) के रूप में जाना जाता था।
प्रश्न 5. भारत के संदर्भ में हाल ही में जनसंचार-माध्यमों में अक्सर चर्चित “अप्रत्यक्ष अंतरण” को निम्नलिखित में से कौन-सी एक स्थिति सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करती है?
- कोई भारतीय कंपनी, जिसने किसी विदेशी उद्यम में निवेश किया हो और अपने निवेश पर मिलने वाले लाभ पर उस बाहरी देश को कर अदा करती हो।
- कोई विदेशी कंपनी, जिसने भारत में निवेश किया हो और अपने निवेश से मिलने वाले लाभ पर अपने आधारभूत देश को कर अदा करती हो।
- कोई भारतीय कंपनी, जो किसी बाहरी देश में मूर्त संपत्ति खरीदती है और उनका मूल्य बढ़ने पर उन्हें बेच देती है तथा प्राप्ति को भारत में अंतरित कर देती है।
- कोई विदेशी कंपनी शेयर अंतरित करती है और ऐसे शेयर भारत में स्थित परिसंपत्तियों से अपना वस्तुगत मूल्य व्युत्पन्न करते हैं।
उत्तर: d
व्याख्या:
- अप्रत्यक्ष अंतरण उन स्थितियों को संदर्भित करता है जहां विदेशी संस्थाएं भारत में शेयर या संपत्ति रखती हैं, भारत में अंतर्निहित परिसंपत्तियों के होने वाले प्रत्यक्ष अंतरण के बजाय ऐसी विदेशी संस्थाओं के शेयरों का अंतरण (हस्तांतरण) किया जाता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
- जबरन वसूली प्रथा के प्रसार के कारण डिजिटल ऋण क्षेत्र सुर्खियों में आ गया है। डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े पैमाने पर होने वाले कदाचार को रोकने के लिए आरबीआई के नए डिजिटल ऋण नियमों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -3, अर्थव्यवस्था)
- सीमा शुल्क विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के यात्री नाम रिकॉर्ड की जानकारी मांगने के लाभ और हानि क्या हैं? यह प्रक्रिया किस प्रकार काम करेगी? (10 अंक, 150 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -2, शासन)