17 सितंबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. SCO की बैठक में मोदी और शरीफ के बीच ट्रांजिट व्यापार पहुंच को लेकर तकरार

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

भारतीय समाज:

  1. प्रजनन दर में कमी

भारतीय इतिहास:

  1. पेरियार ई.वी. रामासामी

शासन:

  1. तमिलनाडु सरकार की नाश्ता योजना

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. महाराजा हरि सिंह:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. श्रीलंका भारत के साथ एफटीए को पुनः शुरू और उन्नत करने के लिए तैयार: रानिल
  2. भारतीय वायुसेना द्वारा मिश्रित बायोडीजल पर AN-32 की उड़ान जो 200 घंटे के लिए होगी को उड़ाएगा
  3. सड़क हादसों में हर दिन 3 लोगों की मृत्यु

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

SCO की बैठक में मोदी और शरीफ के बीच ट्रांजिट व्यापार पहुंच को लेकर तकरार

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

प्रारंभिक परीक्षा:शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में

मुख्य परीक्षा: SCO का महत्व और समरकंद में SCO की बैठक के निहितार्थ।

प्रसंग

  • उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का शिखर सम्मेलन।

बैठक की मुख्य बातें

  • बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री (PM) ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भूमि द्वारा पारगमन व्यापार पहुंच प्रदान नहीं करने का उदाहरण देते हुए, कहा कि “बेहतर क्षेत्रीय संपर्क तभी संभव है जब सदस्य एक-दूसरे को पूर्ण पारगमन अधिकार प्रदान करें।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में यूरेशियाई क्षेत्र में बेहतर सहयोग के महत्व को भी दोहराया।
  • उन्होंने कोविड-19 महामारी और यूक्रेन संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा और खाद्य संकट को भी रेखांकित किया।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने विनिर्माण पर उन पहलों के बारे में बात की, जिसे भारत 2023 के मध्य में SCO शिखर सम्मेलन की मेजबानी और अध्यक्षता में शुरू करने की योजना बना रहा है।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा कि “युद्ध का युग” समाप्त हो गया है, जो पहली बार सार्वजनिक रूप से यूक्रेन में रूसी आक्रमण पर भारत की बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है।
    • भारतीय प्रधानमंत्री ने रूसी नेता से यह भी कहा कि लोकतंत्र, कूटनीति और संवाद ऐसे उपाय हैं जो विश्व के लिए अच्छी हैं।
    • रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस यूक्रेन में युद्ध पर भारत की “चिंताओं” को समझता है।
    • रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच वीजा मुक्त यात्रा समझौते की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
    • भारतीय नेताओं और अधिकारियों ने तुर्की के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी भाग लिया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और बेहतर करने के उपायों पर भी चर्चा की।

SCO का महत्त्व

  • SCO के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि “विश्वसनीय, लचीला और विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में SCO की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।”
  • प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि SCO सदस्य देशों का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% और दुनिया की आबादी में 40% की हिस्सेदारी है।
  • प्रधानमंत्री के अनुसार, SCO ने “खाद्य सुरक्षा” सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई क्योंकि विश्व स्तर पर अधिकांश अनाज निर्यातक देश SCO के सदस्य देश हैं।
    • प्रधानमंत्री ने मौजूदा खाद्य असुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में “बाजरा की खेती और खपत” का समर्थन किया।

भारत और पाकिस्तान के बीच पारगमन मुद्दे

  • हाल के वर्षों में, पाकिस्तान की भारत और अफगानिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के बीच सीमित भूमि आधारित पहुंच है। यह देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विकास में बाधा उत्पन्न करता है।
  • इसके अलावा, पाकिस्तान ने भारत से अफगानिस्तान को पहुँचने वाले मानवीय सहायता की आवाजाही को भी सीमित कर दिया है।
  • हाल ही में, पाकिस्तान द्वारा पारगमन पहुंच प्रदान करने में देरी के कारण भारत की अफगानिस्तान में 50,000 टन गेहूं भेजने की योजना में देरी हुई है।
  • इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए, भारत ने मध्य एशिया और रूस तक भूमि मार्ग के लिए पाकिस्तान के विकल्प के रूप में ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में स्वयं को शामिल किया है।
  • पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री ने पारगमन के मुद्दों पर भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा उठाई गई चिंताओं के जवाब में कहा कि इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी के लिए एक संरचित SCO दृष्टिकोण की आवश्यकता है और यदि कनेक्टिविटी है, तो पारगमन अधिकार स्वचालित रूप से शुरू हो जाएंगे।

सारांश:

  • हाल ही में समरकंद में आयोजित SCO की बैठक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह यूक्रेन में चल रहे युद्ध और कोविड महामारी के साथ-साथ पाकिस्तान में बाढ़, मानवीय संकट, अफगानिस्तान में और पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध जैसे विभिन्न मौजूदा चुनौतियों के समय पर हो रही है।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-1 से संबंधित:

भारतीय समाज:

प्रजनन दर में कमी

विषय: जनसँख्या तथा संबंधित मुद्दे

मुख्य परीक्षा: भारत में प्रजनन दर की कमी के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक निहितार्थ।

प्रसंग: हाल ही में जारी विश्व जनसंख्या संभावना (WPP) रिपोर्ट, प्रजनन दर में वैश्विक गिरावट को दर्शाती है, जो 1990 में 3 थी और घटकर 2021 में 2.3 हो गई है।

भूमिका:

  • पिछले 7 दशकों में औसत वैश्विक प्रजनन में लगातार गिरावट के बावजूद, दुनिया भर में जनसंख्या, संख्या के मामले में लगातार बढ़ रही है।
  • विश्व जनसंख्या संभावना 2022 के अनुसार, प्रजनन आयु वर्ग में प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या में 50% की गिरावट आई है, जो 1951 में प्रति महिला औसतन पांच बच्चे से घटकर 2020 में 2.4 बच्चे हो गई है।

विकास दर में असमानता:

  • अमीर देशों की तुलना में गरीब देश बहुत तेजी से सुधार कर रहे हैं।
  • ब्रिटेन को सन् 1800 में 05 प्रति महिला प्रजनन दर से 1930 में 02 तक आने में 130 साल लगे, जबकि दक्षिण कोरिया को इसे हासिल करने में 1965 से 1985 तक अर्थात 20 साल लगे।
  • उप-सहारा अफ्रीकी देशों के 2050 के बाद जनसंख्या वृद्धि में आधे से अधिक योगदान देने और 2100 तक बढ़ने की संभावना है।
  • अधिकांश उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में प्रजनन दर 2.1 की प्रतिस्थापन दर से कम है, जिसमें दक्षिण कोरिया में प्रति महिला 1.05 बच्चे के साथ प्रजनन दर सबसे कम हैं।

भारत में प्रजनन दर:

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS -5) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 2021 में पहली बार प्रतिस्थापन स्तर से घटकर 2.0 हो गई है, जिसमें केवल 05 वर्षों में 10% की गिरावट आई है।
    • कुल प्रजनन दर से तात्पर्य उन बच्चों की औसत संख्या से है जो किसी महिला के अपने जीवनकाल में पैदा होते है यदि वह वर्तमान आयु-विशिष्ट प्रजनन दर पर बच्चों को जन्म देती है।
  • स्वतंत्रता के समय भारत की प्रजनन दर प्रति महिला 6 थी, सरकार ने 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया था, जिससे 1976 में यह घटाकर 4.9 हो गया था।
  • NFHS-05 के अनुसार, केवल 05 राज्यों में प्रजनन दर प्रतिस्थापन दर से अधिक है: बिहार (3), मेघालय (2.9), उत्तर प्रदेश (2.4), झारखंड (2.3), और मणिपुर (2.2)।
  • भारत में प्रजनन दर सिक्किम तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे कम है।
  • प्रजनन दर में लगातार गिरावट को गर्भनिरोधक के बढ़ते उपयोग, अधिक औसत स्कूली शिक्षा के वर्षों, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और महिलाओं की औसत विवाह आयु में वृद्धि के प्रभाव के रूप में देखा गया है।
  • आधुनिक गर्भनिरोधक पद्धति के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2015-16 के 47.8 प्रतिशत के मुकाबले 2019-21 में 56.5 प्रतिशत है।

चित्र स्त्रोत: NFHS-5 Report

घटती प्रजनन दर के आर्थिक प्रभाव:

सकारात्मक प्रभाव:

  • कम प्रजनन दर को उन देशों में आर्थिक विकास के कारण और परिणाम दोनों के रूप में देखा जा सकता है जो जनसांख्यिकीय संक्रमण के शुरुआती चरणों में हैं।
  • कम प्रजनन दर के साथ महिलाओं की शिक्षा में सुधार होता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों की प्रजनन दर में कमी होती है।
  • बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास से स्वास्थ्य देखभाल बेहतर होती है, और शिक्षा व प्रजनन दर में गिरावट आती है एवं आय में वृद्धि होती है।
  • कम प्रजनन दर का चक्र आश्रित आयु समूहों की तुलना में कामकाजी उम्र की आबादी को बढ़ाता है जिससे आय और निवेश में वृद्धि होती है।
  • प्रजनन दर में कमी से भूमि, जल और अन्य संसाधनों पर दबाव कम होगा और यह पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा।
  • कम प्रजनन दर का मुद्रास्फीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि श्रम आपूर्ति की कमी के कारण मजदूरी उच्च होगी।

नकारात्मक प्रभाव:

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण के अंतिम चरण में, कामकाजी उम्र की विशाल आबादी वृद्ध हो जाती है जिससे श्रमिकों की उपलब्धता कम हो जाती है।
  • जापान प्रजनन दर में गिरावट के प्रभावों का अनुभव करने वाला पहला देश था। बढ़ते निर्भरता अनुपात से 1990 के दशक से सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि लगभग शून्य रही, और यह बढ़ती सामाजिक सुरक्षा लागतों को पूरा करने के लिए वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है।
  • दक्षिण कोरिया जैसे अन्य एशियाई देश में अब जापान की तुलना में कम प्रजनन दर है।
  • उत्पादकता पर प्रजनन दर में गिरावट के प्रभाव पर भी अत्यधिक विमर्श होता है। यद्यपि विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तर की शिक्षा और तकनीकी प्रगति जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कामकाजी उम्र की कम आबादी की उत्पादकता में वृद्धि कर सकती है।
  • वृद्ध आबादी वैश्विक वृद्धि दरों को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी क्योंकि 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 2100 तक आबादी का लगभग 40% हो जाएगी।
  • उच्च निर्भरता अनुपात के कारण सार्वजनिक वित्त पर दबाव बढ़ेगा।

प्रजनन क्षमता में गिरावट से निपटना:

  • वैश्विक स्तर पर प्रजनन दर में गिरावट को दूर करने के लिए वैज्ञानिक और टिकाऊ नीतियों की आवश्यकता है।
  • श्रम बाजार में अधिक बच्चे वाली कामकाजी महिलाओं और गैर-कामकाजी माताओं को प्रवेश करने के लिए अधिक प्रोत्साहन के साथ श्रम बाजार में सुधार से श्रम भागीदारी और प्रजनन दर में गिरावट दूर हो सकता है।
  • दुनिया भर के देश प्रजनन दर को बढ़ावा देने के लिए अपनी नीतियों के साथ प्रयोग कर रहे हैं।
    • उदाहरण के लिए, जर्मनी जन्म दर को बढ़ावा देने के लिए अधिक पैरेंटल छुट्टी और लाभ दे रहा है। डेनमार्क 40 साल से कम उम्र की महिलाओं के लिए राज्य द्वारा वित्त पोषित IVF प्रदान करता है।

सारांश: प्रतिस्थापन स्तर से कम की प्रजनन दर के परिणामस्वरूप अपेक्षा से कम लाभ होता है। इसलिए, देशों को कम प्रजनन दर के बावजूद निरंतर श्रम आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हालांकि भारत की कामकाजी उम्र की आबादी बढ़ती रहेगी, लेकिन प्रजनन दर में गिरावट पर नजर रखने की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित

आधुनिक भारतीय इतिहास

पेरियार ई.वी. रामासामी

विषय: महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व

मुख्य परीक्षा: सामाजिक सुधार आंदोलन

प्रसंग: 17 सितंबर को पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती को तमिलनाडु राज्य द्वारा सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भूमिका:

  • इरोड वेंकटप्पा रामासामी एक सम्मानित भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता थे जिन्होंने आत्मसम्मान आंदोलन और राजनीतिक दल द्रविड़ कड़गम की शुरुआत की।
  • उन्होंने ब्राह्मणवादी प्रभुत्व, महिलाओं के उत्पीड़न और जाति के प्रसार के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
  • बाद में उन्हें “पेरियार” कहा जाने लगा, जिसका तमिल में अर्थ होता है ‘सम्मानित व्यक्ति’ या ‘बड़ा’। उन्हें लोकप्रिय रूप से तंतई पेरियार के नाम से भी जाना जाता है।
  • 2021 में, तमिलनाडु सरकार ने पेरियार की जयंती को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ के रूप में मनाना शुरू किया।

पेरियार द्वारा प्रतिपादित अवधारणाएँ:

  • पेरियार ने तर्कवाद और आत्म-सम्मान के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया और दक्षिण भारत के लोगों के शोषण और हाशिए पर जाने का विरोध किया तथा उसके आरोपण का विरोध किया जिसे वह इंडो-आर्यन मानते थे।
  • पेरियार को अक्सर उनके विचारों की विद्रोही प्रकृति और जिस शक्ति के साथ उन्होंने काम किया, उसके लिए उन्हें एक आइकॉनोक्लास्ट के रूप में जाना जाता है।
  • उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सी. राजगोपालाचारी द्वारा लाए गए कुला कल्वी थिट्टम (Kula Kalvi Thittam) का कड़ा विरोध किया। कुला कल्वी थिट्टम में स्कूली बच्चों पर शिक्षा का एक तरीका थोपने का प्रस्ताव रखा, जिसमें छात्र के लिए स्कूली पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में अपने परिवार के पेशे को सीखने का प्रावधान था। पेरियार का मानना था कि इससे जाति के आधार पर विभाजन को बढ़ावा मिलेगा।
  • पेरियार की दृष्टि समावेशी विकास और व्यक्तियों की स्वतंत्रता के बारे में थी। उन्होंने तर्कवाद को सोचने के लिए एक ठोस आधार के रूप में प्रस्तुत किया।
  • उन्होंने समाज में जाति की गतिशीलता में बदलाव के लिए ‘सभी जातियों के लिए पुरोहिताई’ की वकालत की।

सारांश: पेरियार द्वारा प्रतिपादित अवधारणाएं ऐसे समय में अनुकरणीय मिसाल हैं, जब ध्रुवीकरण और लोकलुभावनवाद किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र में अनुभूत विचार-विमर्श को सक्षम नहीं बनाते हैं। सामाजिक न्याय के मूल में एक समाज बनाने हेतु चर्चा के लिए खुला स्थान बनाना महत्वपूर्ण है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

शासन

तमिलनाडु सरकार की नाश्ता योजना

विषय: सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप

मुख्य परीक्षा: एकीकृत बाल विकास पर नीतियां

प्रसंग: हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए निःशुल्क नाश्ता योजना की शुरुआत की है।

भूमिका:

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य के चुनिंदा सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के लिए मदुरै में राज्यव्यापी निःशुल्क नाश्ता कार्यक्रम के पहले चरण की शुरुआत की।
  • इस योजना से प्रारंभिक चरण में कुल 33.56 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 1.14 लाख बच्चों को लाभ होगा।
  • इस योजना का लक्ष्य स्कूली बच्चों को प्रतिदिन औसतन 293 कैलोरी और औसतन 9.85 ग्राम प्रोटीन प्रदान करना है।

योजना का महत्व:

  • इस योजना के स्कूली शिक्षा और जन स्वास्थ्य पर दूरगामी परिणाम होंगे।
  • कई अध्ययन में दिन के सबसे महत्वपूर्ण भोजन के रूप में दैनिक नाश्ते के महत्व को स्वीकार किया गया है।
  • नियमित और पौष्टिक नाश्ते का छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनकी ध्यान केंद्रित करने, सीखने और जानकारी को बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे उनके स्कूल के प्रदर्शन, व्यवहार और अनुभूति में सुधार होता है।
  • नियमित नाश्ते में बच्चों में आहार की गुणवत्ता, सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्तता, एनीमिया और ऊंचाई और वजन के मुद्दों का भी ख्याल रखा जाता है।
  • यह सामाजिक और लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है क्योंकि सभी बच्चों को समान भोजन मिलता है और उन्हें एक साथ अवश्य खाना चाहिए और स्कूल में महिला उपस्थिति को बढ़ावा देना चाहिए।
  • केंद्र सरकार के मध्याह्न भोजन दिशा निर्देश प्रति दिन प्रति बच्चा 450-700 कैलोरी और प्रतिदिन 12-20 ग्राम प्रोटीन की मात्रा निर्धारित करते हैं। नई नाश्ता योजना के साथ चल रही मध्याह्न भोजन योजना एक दिन में औसतन 846 कैलोरी और लगभग 28 ग्राम प्रोटीन प्रदान करती है।
  • यह योजना प्रगतिशील द्रविड़ मॉडल के अनुरूप भी है, जिसने मध्याह्न भोजन योजना शुरू की थी, जिसकी परिकल्पना 1920 में ब्रिटिश शासन के तहत जस्टिस पार्टी ने की थी और स्वतंत्रता के बाद लगातार राज्य सरकारों ने इसे बढ़ावा दिया था।
  • भारत की मध्याह्न भोजन योजना के अंतर-पीढ़ीगत लाभों पर एक अध्ययन से पता चलता है कि योजना के लाभार्थी बच्चों में समग्र रूप से बेहतर विकास देखा गया है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 के अनुसार, देश भर के कई राज्यों में स्थिति बदल गयी है और बाल कुपोषण के बिगड़ते स्तर दर्ज किए गए हैं।

भावी कदम:

  • सरकार को योजना के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए चोरी, भोजन की खराब गुणवत्ता, धनराशि स्वीकृत करने में देरी और जाति संबंधी व्यवधानों सहित चूक और नियुक्ति संबंधित त्रुटियों से बचना चाहिए।
  • सामुदायिक निगरानी, सोशल ऑडिट, विकेंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली, लाभार्थियों और मेनू पर जानकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन उपर्युक्त समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है।
  • स्कूलों में निःशुल्क पौष्टिक भोजन का प्रावधान फ्रीबी नहीं माना जाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि कोई भी बच्चा भूखा न रहे।

सारांश: बच्चों की भुखमरी भारत में एक बड़ी समस्या है तथा बच्चों के विकास और उन्नति को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्र निर्माण के लिए निःशुल्क नाश्ता योजना और मध्याह्न भोजन योजना जैसी पहलें बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

प्रीलिम्स तथ्य:

  1. महाराजा हरि सिंह:

विषय: भारतीय इतिहास-महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व

प्रारंभिक परीक्षा: महाराजा हरि सिंह और विलय दस्तावेज के बारे में तथ्य

प्रसंग

  • जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने घोषणा की है कि महाराजा हरि सिंह की जयंती मनाई जाएगी और इस अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अवकाश घोषित किया जाएगा।

महाराजा हरि सिंह

  • हरि सिंह का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू में हुआ था।
  • महाराजा हरि सिंह जम्मू और कश्मीर की रियासत के अंतिम शासक थे।
  • 1925 में अपने चाचा महाराजा प्रताप सिंह की मृत्यु के बाद हरि सिंह जम्मू और कश्मीर के महाराजा बने।
  • 1930 में महाराजा हरि सिंह ने लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
  • 1947 में, महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिससे इस रियासत के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही द्वंद समाप्त हो गई।
  • महाराजा हरि सिंह ने 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के अनुसार विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके अपने क्षेत्र को भारत के प्रभुत्व में शामिल करने की सहमति व्यक्त की।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. श्रीलंका भारत के साथ एफटीए को पुनः शुरू और उन्नत करने के लिए तैयार: रानिल
  • श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका भारत के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को पुनः शुरू करेगा और इसे “व्यापक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी” में उन्नत करेगा।
  • वर्तमान भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता 2000 में लागू हुआ और कई दौर की द्विपक्षीय चर्चाओं के बाद भी, दोनों देशों ने अभी तक इसके उन्नत संस्करण पर समझौता नहीं किया है।
  • व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के दोनों संस्करणों के प्रस्तावों, जिसे बाद में आर्थिक और तकनीकी सहयोग समझौता कहा गया, को लेकर श्रीलंका के भीतर प्रतिरोध शुरू हो गया था, क्योंकि आलोचकों का मानना था कि यह श्रीलंका की रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित करेगा।
  • श्रीलंका के राष्ट्रपति ने आगे कहा कि “श्रीलंका यूरोपीय संघ के साथ क्षेत्रीय सहयोग आर्थिक भागीदारी (RECP) के साथ विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार एकीकरण के लिए आशान्वित है, लेकिन इसकी आधारशिला भारत के साथ व्यापार एकीकरण हासिल करना है”
  • इसके अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि पावर ग्रिड कनेक्शन, अपतटीय पवन ऊर्जा, समपुर में सौर ऊर्जा संयंत्र और जाफना प्रायद्वीप के तीन द्वीपों पर अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाएं बहुत अधिक हैं।
  1. भारतीय वायुसेना द्वारा मिश्रित बायोडीजल पर AN-32 की उड़ान जो 200 घंटे के लिए होगी को उड़ाएगा
  • कार्बन पदचिह्न को कम करने के प्रयासों के तहत, भारतीय वायु सेना (IAF) अगले छह महीनों में 200 उड़ान घंटों के लिए 10% मिश्रित बायोडीजल का प्रयोग करेगी एवं इस 10% मिश्रित बायोडीजल पर संशोधित AN-32 परिवहन विमान उड़ाने की योजना पर विचार चल रहा है।
  • इस विमान ने दिसंबर 2018 में पहली बार एविएशन टर्बाइन ईंधन (ATF) के साथ मिश्रित बायोडीजल पर उड़ान भरी और अब तक जैव ईंधन के 10% मिश्रण के साथ 65 घंटे उड़ान भर चुका है तथा इसका प्रदर्शन बहुत संतोषजनक रहा है
  • 50% जैव ईंधन के उपयोग के लिए इंजन के निर्माता हनीवेल द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद एक डोर्नियर विमान भी जमीनी परीक्षण से गुजर रहा है।
  • विश्व स्तर पर, विमानन उद्योग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है।
  • 2021-22 के लिए IAF की ईंधन खपत 6.2 लाख किलो लीटर से अधिक बताई गई, जो लगभग 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के लिए उत्तरदायी था।
  1. ‘सड़क हादसों में हर दिन 3 लोगों की मृत्यु’

चित्र स्त्रोत: The Hindu

  • दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की दिल्ली रोड क्रैश रिपोर्ट 2021 के अनुसार, पिछले दो वर्षों में दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर दिन औसतन तीन लोगों की मौत हुई है।
  • 2021 में सड़क हादसों में मरने वालों में ज्यादातर पैदल यात्री थे।
  • घातक दुर्घटनाओं की उच्च संख्या के प्रमुख कारणों में से एक विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य प्रमुख मुख्य सड़कों पर ओवरस्पीडिंग है।
  • पुलिस अधिकारियों का सुझाव है कि राज्य स्तर पर दोपहिया सवारों के लिए सड़क सुरक्षा पहल शुरू की जा सकती है, साथ ही महत्वपूर्ण जंक्शनों और मेट्रो स्टेशनों पर फ्री-टू-यूज़ हेलमेट के प्रावधान के साथ-साथ मृत्यु के मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए यूज-एंड-रिटर्न नीति भी लागू की जा सकती है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. समरकंद घोषणापत्र पर हाल ही में किस समूह के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे?

  1. सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन
  2. पूर्वी आर्थिक मंच
  3. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो)
  4. शंघाई सहयोग संगठन

उत्तर:

विकल्प d

व्याख्या:

  • शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्र प्रमुखों की परिषद द्वारा समरकंद घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • समरकंद घोषणा में “बातचीत और परामर्श के माध्यम से देशों के बीच मतभेदों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता” की वकालत की गई।

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भूमि, अर्थात भूमि में या उस पर अधिकार, 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है
  2. रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) का उद्देश्य संपत्ति लेनदेन के लिए वही भूमिका निभाना है जो सेबी (SEBI) पूंजी बाजार में प्रतिभूति लेनदेन के लिए करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. दोनों
  4. इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर:

विकल्प b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है, भूमि, अर्थात भूमि में या उस पर अधिकार, भू-पट्टा जिसमें जमींदार और काश्तकार के संबंध शामिल हैं, और किराए का संग्रह; कृषि भूमि का हस्तांतरण; भूमि सुधार और कृषि ऋण; निवहभवन(colonization) 7वीं अनुसूची की राज्य सूची के अंतर्गत आता है।
  • कथन 2 सही है, रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) का उद्देश्य संपत्ति लेनदेन के लिए वही भूमिका निभाना है जैसा सेबी पूंजी बाजार में प्रतिभूति लेनदेन के लिए करता है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित को पूर्व से पश्चिम की ओर व्यवस्थित कीजिए:

  1. अश्गाबात
  2. अस्ताना
  3. बिश्केक
  4. दुशान्बे

विकल्प:

  1. 1-2-3-4
  2. 2-4-1-3
  3. 3-2-4-1
  4. 4-2-1-3

उत्तर:

विकल्प c

व्याख्या:

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं?

  1. ग्रीनहाउस प्रभाव मानवजनित क्रिया प्रेरित घटना है जो पृथ्वी की सतह और वायुमंडल को गर्म करने के लिए उत्तरदायी है।
  2. ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना, सतही औसत तापमान -18 डिग्री सेल्सियस होगा।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. दोनों
  4. इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर:

विकल्प a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है, ग्रीनहाउस प्रभाव एक प्राकृतिक घटना है जो जीवन के लिए पृथ्वी के तापमान को बनाए रखती है।
  • कथन 2 सही है, वर्तमान में, पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस है और ग्रीनहाउस प्रभाव के बिना, पृथ्वी की सतह का औसत तापमान घटकर -18 डिग्री सेल्सियस हो जाएगा।

प्रश्न 5. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः

  1. प्राइवेट अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों को इसे अवश्य अपनाना चाहिए।
  2. चूँकि इसका लक्ष्य स्वास्थ्य की सर्वजनिक व्याप्ति है, अंततोगत्वा भारत के हर नागरिक को इसका हिस्सा हो जाना चाहिए।
  3. यह पूरे देश में निर्बाध रूप से लागू किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर:

विकल्प b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन निजी और सार्वजनिक अस्पतालों द्वारा अपनाने के लिए अनिवार्य न होकर स्वैच्छिक होगा।
  • कथन 2 सही नहीं है, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का उद्देश्य देश के एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का समर्थन करने के लिए आवश्यक आधार विकसित करना है।
    • यह डिजिटल मार्गों के माध्यम से हेल्थकेयर पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न हितधारकों के बीच मौजूदा अंतराल को दूर करेगा।
  • कथन 3 सही है, ABDM स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान में निर्बाध राष्ट्रीय सुवाह्यता सुनिश्चित करता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

  1. देश के सभी स्कूलों में सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाने में मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं की क्या भूमिका रही है? इस योजना में मौजूद कुछ कमियों की भी पहचान कीजिए।

(250 शब्द; 15 अंक) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र II – शासन)

  1. अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से विश्व की सबसे बड़ी उम्मीद के रूप में उभर रहा है। टिप्पणी कीजिए।

(250 शब्द; 15 अंक) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र III – ऊर्जा)