A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  1. चॉपिंग ब्लॉक पर फोनॉन: क्या ‘ध्वनि कण’ क्वांटम भी हैं?

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. एक उभरते हुए भारत की अमेरिका के साथ कदमताल:
  2. नव वैश्विक वित्त पोषण समझौता शिखर सम्मेलन:

सामाजिक न्याय:

  1. शरणार्थी नए राष्ट्र के लिए एक संपत्ति:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. पुरातत्वविदों को गुंटूर में मेसोलिथिक-युग की रॉक पेंटिंग मिली है:
  1. आईएनएस कृपाण (INS Kirpan):

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. ‘यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है’:
  2. संयुक्त राष्ट्र ने खुले समुद्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए समझौते को अपनाया:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

चॉपिंग ब्लॉक पर फोनॉन: क्या ‘ध्वनि कण’ क्वांटम भी हैं?

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: आईटी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स और नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता।

प्रारंभिक परीक्षा: क्वांटम कंप्यूटर और क्युबिट्स (qubits) से संबंधित जानकारी।

मुख्य परीक्षा: क्वांटम कंप्यूटिंग पर हाल के अध्ययनों के प्रमुख निष्कर्ष।

प्रसंग:

  • आईबीएम द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक पेपर ने इस तथ्य को साबित किया है कि एक क्वांटम कंप्यूटर वास्तविक जीवन की विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को हल कर सकता है जिन्हें पारंपरिक कंप्यूटर हल नहीं कर सकते हैं।

क्वांटम कंप्यूटर और क्युबिट्स (qubits):

  • क्वांटम कंप्यूटिंग एक तेजी से उभरती हुई तकनीक है जो पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए क्वांटम भौतिकी के नियमों का उपयोग करती है।
  • क्वांटम कंप्यूटर डेटा स्टोर करने और गणना करने के लिए क्वांटम भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी के गुणों का उपयोग करते हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटर क्युबिट्स (qubits) का उपयोग उनकी सूचना की बुनियादी इकाइयों के रूप में करते हैं।
    • “क्यूबिट” एक इलेक्ट्रॉन जैसे कण, कणों के एक संग्रह, या एक कण की तरह व्यवहार करने के लिए इंजीनियर एक क्वांटम प्रणाली के समान हो सकता है।
  • ऐसे कणों की मदद से क्वांटम कंप्यूटर विभिन्न जटिल ऑपरेशन कर सकते हैं जो बड़े ऑब्जेक्ट जैसे पारंपरिक कंप्यूटर के सेमीकंडक्टर नहीं कर सकते।
    • ऐसा इसलिए है क्योंकि कण क्वांटम भौतिकी के नियमों द्वारा निर्देशित होते हैं और इस तरह के नियम क्युबिट्स को एक ही समय में ‘चालू’ और ‘बंद’ मान रखने की अनुमति देते हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग की मूल धारणा यह है की कण की जानकारी उसके कुछ गुणों में “एन्कोडेड” की जा सकती है,और फिर परिष्कृत गणना करने के लिए इन अनूठी क्षमताओं का उपयोग करके इसे संसाधित किया जा सकता है जो आज के सर्वश्रेष्ठ सुपर कंप्यूटरों द्वारा भी नहीं किया जा सकता।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग के विभिन्न अन्य रूप सूचना की अन्य इकाइयों जैसे लीनियर ऑप्टिकल क्वांटम कंप्यूटिंग (LOQC) का उपयोग करते हैं जो “फोटॉन” को क्यूबिट्स के रूप में उपयोग करते हैं।
  • मौजूदा सिद्धांत और मान्यताओं के अनुसार, कोई भी कण जिसे क्वांटम-मैकेनिकल घटना का उपयोग करके नियंत्रित या हेरफेर किया जा सकता है, उसे क्वांटम कंप्यूटिंग में सूचना इकाई के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

क्युबिट्स के रूप में फोटॉन और फोनॉन:

  • फोटोन प्रकाश के कण होते हैं। फोटॉन प्रकाश ऊर्जा के बण्डल (पैकेट) होते हैं, जबकि फोनॉन कंपन ऊर्जा के बण्डल (पैकेट) होते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनों पर प्रसंस्करण और एन्कोडिंग जानकारी के संचालन और फिर इलेक्ट्रॉनों का अलग-अलग तरीकों से परस्पर क्रिया करने के समान, LOQC सूचनाओं को संसाधित करने के लिए फोटॉन के साथ दर्पण, लेंस, स्प्लिटर और वेवप्लेट जैसे ऑप्टिकल टूल का उपयोग करता है।
  • हालाँकि इलेक्ट्रॉनों में विद्युत धाराओं, चुंबकीय क्षेत्र आदि की मदद से हेरफेर किया जा सकता है जबकि फोटोन में दर्पण, लेंस आदि का उपयोग करके हेरफेर किया जा सकता है।
    • हालाँकि फोनॉन में हेरफेर करने के लिए नए उपकरणों का उपयोग करने की आवश्यकता होती है और शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक ध्वनिक बीम-स्प्लिटर का निर्माण किया है।
  • प्रकाशिकी अनुसंधान में बीम-स्प्लिटर बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले उपकरण हैं। एक बीम-स्प्लिटर, जब प्रकाश के पथ (फोटॉनों की धारा) में रखा जाता है, तो यह बीम को दो भागों में विभाजित कर देता है, यानी यह 50% फोटॉन को एक तरफ परावर्तित कर देता है और अन्य 50% को सीधे गुजरने देता है।

ध्वनिक बीम-स्प्लिटर का विकास:

  • शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक ध्वनिक बीम-स्प्लिटर विकसित किया है जो एक छोटा कंघी जैसा उपकरण है जिसमें से 16 धातु की सलाखें निकली हुई हैं।
  • शोधकर्ताओं ने इस ध्वनिक बीम-स्प्लिटर को लिथियम नियोबेट के दो मिमी लंबे चैनल के बीच में रखा।
    • इसके अलावा, चैनल के प्रत्येक छोर में एक अतिचालक क्युबिट था, यानी एक क्यूबिट जिसके सर्किट घटक अतिचालक थे और दोनों अलग-अलग फोनॉन का पता लगा सकते थे।
    • यह सेटअप अति न्यूनतम तापमान पर बनाए रखा गया था।
    • यदि उत्सर्जित फोनॉन को ध्वनि में परिवर्तित किया जाता है, तो उनकी आवृत्ति मनुष्यों के सुनने के लिए बहुत अधिक होगी और इस अध्ययन में प्रत्येक फोनॉन ने लगभग एक क्वाड्रिलियन परमाणुओं के “सामूहिक” कंपन को चित्रित किया।
  • इस अध्ययन के दौरान, शोधकर्ताओं की टीम ने देखा कि ये फोनॉन कॉम्ब के साथ उसी तरह इंटरैक्ट करते हैं जैसे फोटॉन एक ऑप्टिकल बीम-स्प्लिटर के साथ इंटरैक्ट करते हैं।
  • अवलोकन:
    • फोनॉन, जब चैनल के बाईं ओर से उत्सर्जित होता है, तो आधे समय परावर्तित होता है और दूसरे आधे हिस्से में दाईं ओर संचारित होता है।
    • फोनॉन, जब बाएँ और दाएँ पक्षों से एक साथ उत्सर्जित होते हैं, उस स्थिति में दोनों एक ही तरफ समाप्त होते हैं।

अधिक जानकारी के लिए : Atomic Breathing

सारांश:

  • हाल के अध्ययनों और शोधों ने प्रदर्शित किया है कि क्वांटम कंप्यूटिंग में फोनॉन का उपयोग क्यूबिट्स या सूचना की इकाइयों के रूप में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फोनॉन-आधारित कंप्यूटिंग में क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोग्राफी और बिग डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में क्रांति लाने की क्षमता है।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

एक उभरते हुए भारत की अमेरिका के साथ कदमताल:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

प्रारंभिक परीक्षा: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए प्रौद्योगिकी संबंधी समझौते के बारे में।

संदर्भ:

  • प्रधानमंत्री की हाल की अमेरिकी यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और गहरे होने की उम्मीद है।

विवरण:

भारत की वृद्धि:

  • भारत संभवतः 2047 तक 47 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारत जनसांख्यिकीय लाभांश की अवधि से गुजर रहा है और इसके पास श्रमिकों के साथ-साथ उच्च वेतनभोगी कामगारों की एक विशाल श्रम शक्ति है।
  • 2030 तक, भारत की कार्यशील आबादी 1 बिलियन होगी, जो G8 देशों की संयुक्त जनसंख्या से बहुत अधिक है।
  • भारत और अमेरिका घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं क्योंकि वे समान मूल्यों और आकांक्षाओं को साझा करते हैं। ये दोनों देश लोकतंत्र हैं, वे मानवाधिकारों और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था का सम्मान करते हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों में संभावनाएं:

  • चीन और रूस से उत्पन्न होने वाली कई चुनौतियों से जूझ रही आज की दुनिया में भारत और अमेरिका के और करीब आने की संभावना है।
  • अमेरिका को भारत के बाजार की जरूरत है जबकि भारत को वृद्धि और विकास के लिए अमेरिका की तकनीक और पूंजी की जरूरत है।
    • भारत ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर बहुत जोर दिया है और इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। अमेरिका की मदद से भारत डिजिटलिकरण संचालित अर्थव्यवस्था बनने का सपना साकार कर सकता है।
    • अमेरिका के योगदान के बिना सेना का आधुनिकीकरण नहीं हो सकता, संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को हथियारों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए अमेरिका के योगदान की आवश्यकता है।
    • जेक सुलिवन, राष्ट्रपति जो बिडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), एक प्रमुख व्यक्ति हैं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की विदेश नीति को आकार दिया है और भारत-अमेरिका संबंधों को नई गति दी है, का कहना है कि भारत-अमेरिका संबंधों में असीम संभावनाएं हैं।
    • अमेरिका से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मदद से भारत में हरित विकास संभव हो सकता है।
    • इसी तरह, भारत के प्रेषण का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। इसके अलावा, अमेरिका में बड़ी संख्या में भारत का डायस्पोरा निवास करता है जो इसके विकास में अत्यधिक योगदान करते हैं।
  • भारत व्यापक अमेरिकी भू-आर्थिक और भू-रणनीतिक विश्वदृष्टि और चीन की चुनौती के लिए अमेरिका की रणनीति में फिट बैठता है।
    • अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली देश के रूप में अपनी स्थिति को बरकरार रखना चाहता है। चीन की ओर से इसे लगातार चुनौती दी जा रही है। इसलिए, दुनिया भर में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत है।
    • इसी तरह, रूस-चीन गठजोड़ अमेरिका के लिए और अधिक चुनौतियां पेश कर रहा है, जिससे वह अकेले नहीं निपट सकता। इसलिए उसे अपनी आकांक्षाओं में उसका समर्थन करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साथी की जरूरत है।
  • साझा प्रौद्योगिकी का एक विश्वसनीय पारिस्थितिकी तंत्र एवं विविध लचीली आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण तथा दुनिया भर में जलवायु और खाद्य सुरक्षा से लेकर गरीबी तक महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए अमेरिका और भारत मिलकर काम कर रहे हैं।

सारांश:

  • विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका मित्र हैं, सहयोगी नहीं। ऐसे समय में जब दोनों देशों को एक-दूसरे की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, मौजूदा संबंधों को मित्रों के स्थान पर सहयोगी के रूप में विकसित करने के लिए आपसी प्रयासों की आवश्यकता है।

नव वैश्विक वित्त पोषण समझौता शिखर सम्मेलन:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

प्रारंभिक परीक्षा: नया वैश्विक वित्तपोषण समझौता क्या है।

मुख्य परीक्षा: वैश्विक वित्तपोषण समझौता का विवरण और उद्देश्य और वैश्विक दक्षिण के लिए इसका महत्व।

प्रसंग:

  • नया वैश्विक वित्त पोषण समझौता शिखर सम्मेलन पेरिस में हो रहा है।

विवरण:

नया वैश्विक वित्तपोषण समझौता क्या है:

  • शिखर सम्मेलन का उद्देश्य असमानताओं और जलवायु परिवर्तन से लड़ने और जैव विविधता की रक्षा जैसी 21वीं सदी की आम चुनौतियों के अनुकूल एक नई वित्तीय प्रणाली की नींव रखना है। शिखर सम्मेलन फ्रांस और भारत द्वारा सह-आयोजित किया जाता है।
  • दूसरे शब्दों में, इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और असमानता के खिलाफ लड़ाई की चुनौतियों से समवर्ती रूप से निपटना है।
  • इस शिखर सम्मेलन के लिए चार प्रमुख उद्देश्यों की घोषणा की गई है और चार कार्यकारी समूहों द्वारा इसका पालन किया जाएगा:
    • अल्पकालिक कठिनाइयों का सामना कर रहे देशों, विशेष रूप से सबसे अधिक ऋणी देशों के लिए राजकोषीय स्थिति को बहाल करना।
    • कम आय वाले देशों में निजी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना।
    • उभरते और विकासशील देशों में ऊर्जा परिवर्तन के लिए हरित बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रोत्साहित करना।
    • जलवायु परिवर्तन की चपेट में आने वाले देशों के लिए अभिनव वित्तपोषण जुटाना।

वैश्विक दक्षिण के साथ एकजुटता को मजबूत करना:

  • शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण में देशों के साथ वित्तीय एकजुटता बढ़ाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसके मुख्य उद्देश्यों में वित्तीय स्थान बनाना, निजी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना, हरित बुनियादी ढांचे के निवेश को बढ़ावा देना और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील देशों के लिए नवीन वित्तपोषण सृजित करना शामिल है।
  • यह शिखर सम्मेलन पूरे वर्ष निर्धारित कई अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे G20, SDG शिखर सम्मेलन और COP28 में से एक है। इन आयोजनों को मूर्त, प्रभावशाली परिणामों की उपलब्धि को संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

वैश्विक दक्षिण और वैश्विक उत्तर के बीच अंतर:

  • ‘वैश्विक उत्तर’ अमेरिका, कनाडा, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों को संदर्भित करता है, जबकि ‘वैश्विक दक्षिण’ में एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देश शामिल हैं।
  • दक्षिण देशों के बीच समानता यह है कि ज्यादातर का उपनिवेशीकरण का इतिहास रहा है, मुख्यतः यूरोपीय शक्तियों के अधीन।
  • ये वे देश हैं जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों से ऐतिहासिक रूप से बहिष्कृत हैं – जैसे कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता से।
  • चूँकि, संयुक्त राष्ट्र और IMF जैसे निकाय प्रमुख निर्णय निर्माण शामिल हैं जो राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज के मामले में दुनिया को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन देशों द्वारा बहिष्करण को उनकी धीमी वृद्धि में योगदान के रूप में देखा जाता है।

सारांश:

  • विश्व बैंक के सुधारों पर चर्चा, भारत की G20 अध्यक्षता, संयुक्त राष्ट्र के SDG शिखर सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन और COP28 के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर एक नई वैश्विक वित्तीय संधि के लिए एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण पर भी बहुत जरूरी ध्यान केंद्रित करता है जहां से वैश्विक विकास की बड़ी मात्रा में उम्मीद की जा रही है।

शरणार्थी नए राष्ट्र के लिए एक संपत्ति:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

सामाजिक न्याय:

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रारंभिक परीक्षा: नॉन-रिफाउलमेंट (गैर-वापसी) का सिद्धांत क्या है।

मुख्य परीक्षा: शरणार्थी संकट से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों के संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है।

संदर्भ:

  • 20 जून,अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

विवरण:

दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या क्यों बढ़ रही है:

  • म्यांमार, सूडान और युद्धग्रस्त यूक्रेन जैसे देशों में चल रहे संकट के कारण दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • ये शरणार्थी आवास और जीवित रहने के लिए एक शांतिपूर्ण जगह की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पलायन कर रहे हैं।
  • भारत में लगभग 2,50,000 शरणार्थी हैं और उनमें से आधी महिलाएं और बच्चे हैं।
  • जातीय नरसंहार दुनिया भर में शरणार्थी संकटों में वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • युद्ध अपराध शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि का एक अन्य कारण है।

शरणार्थी द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ:

  • इनमें से अधिकांश देश इन शरणार्थियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं क्योंकि वे उन्हें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं।
  • उन्हें कानूनी मान्यता, सरकार समर्थित दस्तावेजों और अपने अस्तित्व के लिए खतरे जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • उन्हें विभिन्न सामाजिक लाभों से वंचित रखा जाता है जैसे स्कूल, अस्पताल की सुविधा और आजीविका के अवसर।
  • इसके अलावा, उन्हें मूल आबादी से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनका मानना है कि शरणार्थियों उनके लिए निर्मित अवसरों पर कब्ज़ा कर लेंगे।

शरणार्थी का बेहतर प्रबंधन:

  • यह आवश्यक है कि अमीर देश शरणार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करने के लिए मिलकर काम करें। वर्तमान में, कुछ देश दुनिया के अधिकांश शरणार्थियों की जिम्मेदारी लेते हैं। अधिकांश देश – जिनमें दुनिया की कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं – शायद ही किसी शरणार्थी को स्वीकार करते हैं। जैसा कि शरणार्थी सम्मेलन की प्रस्तावना में रेखांकित किया गया है, सभी देशों को जिम्मेदारी साझा करनी चाहिए।
  • धनवान राष्ट्रों को संघर्षग्रस्त देशों में लोगों को प्रदान की जाने वाली सहायता और धन में भी वृद्धि करनी चाहिए। दुनिया भर में मानवतावादी अपील बहुत कम है तथा धन और जरूरतों के बीच का अंतर बढ़ रहा है।
  • “नॉन-रिफाउलमेंट” अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जो किसी देश को शरण चाहने वालों को ऐसे देश में लौटने से रोकता है जहां उन्हें उत्पीड़न या अनिष्ट का खतरा होगा। यह महत्वपूर्ण है कि धनी देश शरण चाहने वालों को खतरनाक स्थितियों में न लौटाकर उनकी रक्षा करें।

सारांश:

  • शरणार्थी संकट को दुनिया भर के देशों के सामूहिक प्रयासों से बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है, इसे मानवीय संकट मानते हुए और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शरणार्थी संकटों को दूर करने के लिए मिलकर काम किया जा सकता है।

प्रीलिम्स तथ्य:

1 पुरातत्वविदों को गुंटूर में मध्य पाषाण-युग के शैल चित्र मिले हैं:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

कला एवं संस्कृति:

विषय: शैल चित्र।

प्रारंभिक परीक्षा: गुंटूर में मध्य पाषाण-युग के शैल चित्र।

विवरण:

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India (ASI)) के पुरातत्वविदों को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के ओरवाकल्लू गांव में एक मध्य पाषण युगीन शैल चित्र मिला है।
  • पुरातत्वविदों ने मंदिरों की स्थापत्य आकृतियों का विश्लेषण करने के लिए निचली नदी कृष्णा घाटी का सर्वेक्षण करते हुए, ओरवाकल्लू में एक पहाड़ी पर प्राकृतिक शैल आश्रयों की दीवारों और छत पर एक नव-प्रागैतिहासिक शैल चित्रकला की पहचान की।
  • रिपोर्ट के अनुसार, इन चित्रों को प्राकृतिक सफेद केओलिन और लाल गेरू रंग का उपयोग करके बनाया गया था।
    • केओलिनाइट एक मुलायम, मिट्टी जैसा और सफेद खनिज है जो फेल्डस्पार जैसे एल्यूमीनियम सिलिकेट खनिजों के रासायनिक अपक्षय के दौरान बनता है।
    • लाल गेरू मिट्टी, रेत और फेरिक ऑक्साइड से बना वर्णक है।
  • ये चित्र उन लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं जो तब इन क्षेत्रों में रहते थे।
  • हाल ही में मिला यह शैल चित्र मध्य पाषाण (लगभग 5000 ईसा पूर्व से) काल से संबंधित है, जिसमें भूमि के एक टुकड़े को जोतते हुए एक व्यक्ति को दर्शाता है जो “अर्ध-बसाहट जीवन पद्धति” को दर्शाता है जिसमें इस समुदाय के सदस्य फसलों की खेती करते थे।
    • एक अन्य चित्र में एक व्यक्ति को एक जंगली बकरी को अपने बाएं हाथ से पकड़ते हुए दिखाया गया है, जबकि इस बकरी को नियंत्रित करने के लिए एक हुक-जैसी वस्तु का उपयोग किया जा रहा है।
    • एक अन्य चित्र में दो जोड़ों को हाथ ऊपर करके खड़ा दिखाया गया है जबकि एक बच्चा उनके पीछे खड़ा है।

प्रागैतिहासिक शैल चित्र से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Prehistoric Rock Paintings

भारत में प्रागैतिहासिक काल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:Prehistoric Age in India

2. आईएनएस कृपाण:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

सुरक्षा:

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां और उनके अधिदेश।

प्रारंभिक परीक्षा: आईएनएस कृपाण और भारत-वियतनाम संबंधों से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी।

प्रसंग:

  • भारत ने वियतनाम को उसकी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आईएनएस कृपाण उपहार में दिया।

आईएनएस कृपाण:

  • आईएनएस कृपाण एक स्वदेश निर्मित इन-सर्विस मिसाइल कार्वेट है।
  • आईएनएस कृपाण खुखरी श्रेणी का मिसाइल कार्वेट है जिसे जनवरी 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • आईएनएस कृपाण का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा किया गया था।
  • मिसाइल कार्वेट 91 मीटर लंबा है, इसमें 11 मीटर का एक बीम स्थापित है, यह 25 समुद्री मील से अधिक की गति से चलने में सक्षम है और इसकी विस्थापन क्षमता 1,400 टन के करीब है।
  • आईएनएस कृपाण एक मध्यम दूरी की तोप, 30 एमएम की क्लोज-रेंज गन, चैफ लॉन्चर और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है।
  • आईएनएस कृपाण को तटीय और अपतटीय गश्त, तटीय सुरक्षा, सतही युद्ध, एंटी-पायरेसी, और मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR)) अभियानों जैसी विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाने के लिए तैनात किया जा सकता है।

भारत-वियतनाम संबंध:

  • भारत और वियतनाम ने जून 2022 में आपसी रसद समर्थन पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
  • दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने मौजूदा रक्षा सहयोग के दायरे और पैमाने को बढ़ाने के उद्देश्य से “2030 की ओर भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त विजन स्टेटमेंट” पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • वियतनाम ने सितंबर 2014 में विस्तारित 100 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) के तहत वियतनामी सीमा रक्षक बल के लिए 12 उच्च गति वाली गश्ती नौकाओं की खरीद की है।
  • इसके अलावा, भारत ने 2016 में एक और $500 मिलियन रक्षा LoC का विस्तार किया और इसमें उपकरणों की पहचान करने के लिए चर्चा चल रही है।
  • भारत ने वायु सेना अधिकारी प्रशिक्षण स्कूल में एक भाषा और आईटी लैब की स्थापना के लिए दो सिमुलेटर और एक मौद्रिक अनुदान देने की भी घोषणा की है।
  • दोनों देशों ने 2016 से एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी साझा की है।
  • वियतनाम भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” (Act East policy) और “इंडो-पैसिफिक विजन” में एक महत्वपूर्ण भागीदार देश रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. ‘यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है’:
    • विश्व मौसम विज्ञान संगठन ( World Meteorological Organization (WMO)) और यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है।
    • रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में 2022 में यूरोप के तापमान में 2.3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के कारण यूरोप को अधिक घातक जलवायु परिवर्तन के कारण ट्रिगर हुई हीट वेव के लिए खुद को तैयार करने की आवश्यकता होगी।
      • जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, इटली, पुर्तगाल और यूके जैसे देशों ने 2022 में अपना सबसे गर्म वर्ष रिकॉर्ड किया।
    • यूरोप वर्तमान में चरम मौसम के कारण अपनी ऊर्जा, परिवहन अवसंरचना और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों पर बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है जो जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ गया है।
    • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और ग्लेशियर भी तीव्र गति से पिघल रहे हैं।
    • इसके अलावा, समग्र जलवायु और मौसम के खतरों, मुख्य रूप से हीट वेव के कारण के कारण लगभग 16,365 मौतें हुईं हैं और $2 बिलियन की क्षति हुई, जो बड़े पैमाने पर बाढ़ और तूफान से जुड़ी थी।
  2. संयुक्त राष्ट्र ने खुले समुद्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए समझौते को अपनाया:
  • संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने खुले समुद्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक समझौते और पहली संधि को अपनाया है।
  • समझौते को “राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे जैव विविधता पर संधि” के रूप में जाना जाता है और यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता (UNCLOS) के दायरे में आता है।
  • नवीनतम समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर जल क्षेत्र में जैव विविधता की रक्षा करना है, जिसे खुले समुद्र के रूप में जाना जाता है और जो “समुद्री आनुवंशिक संसाधनों” (MGR) के लाभों को साझा करने के लिए सिद्धांत स्थापित करता है।
  • नई संधि 20 सितंबर को महासभा में विश्व नेताओं की वार्षिक बैठक के दौरान हस्ताक्षर के लिए खोली जाएगी, और यह 60 देशों द्वारा अनुसमर्थित होने के बाद लागू होगी।

यह भी पढ़ें – UN High Seas Treaty

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. न्यायालय की अवमानना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)

  1. जब एक निजी नागरिक किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​का मामला शुरू करना चाहता है तो इसके लिए महान्यायवादी (AG) की सहमति अनिवार्य है।
  2. न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दो वर्ष की समय सीमा है।
  3. सर्वोच्च न्यायालय के पास महान्यायवादी द्वारा या महान्यायवादी की सहमति से उसके समक्ष लाए गए प्रस्ताव से स्वतंत्र अपने आप अवमानना के मामले शुरू करने की शक्ति है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: जब एक निजी नागरिक किसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​का मामला शुरू करना चाहता है तो इसके लिए महान्यायवादी (AG) की सहमति अनिवार्य है।
    • इस तरह की याचिका दायर करने से पहले महान्यायवादी को यह निर्धारित करने के लिए शिकायत पर हस्ताक्षर करना चाहिए कि क्या याचिका पर अदालत को ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • कथन 2 गलत है: न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक वर्ष की सीमा अवधि है।
    • न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 20 के अनुसार, “कोई भी अदालत उस तारीख से एक वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद, जिस पर कथित तौर पर अवमानना की गई है, या तो अपने स्वयं के प्रस्ताव पर या अन्यथा अवमानना की कोई कार्यवाही शुरू नहीं करेगी।”
  • कथन 3 सही है: संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को महान्यायवादी द्वारा या महान्यायवादी की सहमति से उसके समक्ष लाए गए प्रस्ताव से स्वतंत्र, अपने आप अवमानना ​​मामले शुरू करने का अधिकार देता है।

प्रश्न 2. चंबल नदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा गलत है? (स्तर – कठिन)

  1. यह यमुना नदी की सहायक नदी है।
  2. यह मध्य प्रदेश में विंध्य श्रेणी के दक्षिण ढलान पर, मानपुर, इंदौर के पास, महू शहर के दक्षिण में जानापाव से निकलती है।
  3. यह भारत के तीन राज्यों से होकर बहती है।
  4. बनास, मेज और पारबती चम्बल की बाएँ किनारे की सहायक नदियाँ हैं।

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: चंबल नदी मध्य और उत्तरी भारत में यमुना नदी की एक सहायक नदी है।
  • कथन 2 सही है: चंबल नदी मध्य प्रदेश में विंध्य श्रेणी के दक्षिण ढलान पर, इंदौर के मानपुर के पास, महू शहर के दक्षिण में जानापाव से निकलती है।
  • कथन 3 सही है: चंबल नदी तीन भारतीय राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से होकर बहती है।
  • कथन 4 गलत है: चंबल के मुख्य बायें तट की सहायक नदियों में बायीं ओर बनास और मेज नदियाँ शामिल हैं।
    • पारबती, काली सिंध और शिप्रा नदियाँ चंबल नदी के दाहिने किनारे की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

प्रश्न 3. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. दिवाला पेशेवरों पर भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान की विनियामक निगरानी है।
  2. कॉर्पोरेट शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया में कॉर्पोरेट ऋणी के प्रतिस्पर्धी को समाधान योजना प्रस्तुत करने की मनाही है।
  3. जब देनदार कंपनी ने कम से कम एक करोड़ रुपये का डिफॉल्ट किया हो तो एक लेनदार प्री-पैकेज्ड शोधन-अक्षमता समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के पास दिवाला पेशेवरों, दिवाला व्यावसायिक एजेंसियों, दिवाला व्यावसायिक संस्थाओं और सूचना उपयोगिताओं पर नियामक निरीक्षण की शक्ति है।
  • कथन 2 गलत है: कॉर्पोरेट देनदार के एक प्रवर्तक के साथ-साथ कॉर्पोरेट देनदार के एक प्रतिस्पर्धी और कॉर्पोरेट देनदार के एक लेनदार को कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में समाधान योजना प्रस्तुत करने की अनुमति है।
    • इरादतन डिफ़ॉल्टर को कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में समाधान योजना प्रस्तुत करने से प्रतिबंधित किया गया है।
  • कथन 3 गलत है: एक प्री-पैक में एक सार्वजनिक बोली प्रक्रिया के बजाय सुरक्षित लेनदारों और मौजूदा मालिकों या बाहरी निवेशकों के बीच सीधे समझौते के माध्यम से संकटग्रस्त कंपनी के ऋण के समाधान की परिकल्पना की जाती है।
    • 10 लाख रुपये के न्यूनतम डिफॉल्ट वाला कॉर्पोरेट कर्जदार प्री-पैकेज्ड शोधन-अक्षमता समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

प्रश्न 4. कॉर्नवॉलिस संहिता के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. इसने स्थायी बंदोबस्त प्रणाली की स्थापना की।
  2. कलेक्टरों को केवल राजस्व प्रशासन की शक्ति दी गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: 1793 की कॉर्नवॉलिस संहिता में ब्रिटिश भारत में नागरिक, पुलिस और न्यायपालिका प्रशासन को नियंत्रित करने के प्रावधान शामिल थे।
    • 1793 की कार्नवालिस संहिता ने स्थायी बंदोबस्त प्रणाली की स्थापना की।
  • कथन 2 सही है: कॉर्नवॉलिस शक्ति का पृथक्करण चाहता था और कॉर्नवॉलिस संहिता ने कलेक्टर से सभी न्यायिक और मजिस्टेरियल शक्तियाँ छीन लीं।
    • इस प्रकार कॉर्नवॉलिस संहिता के अनुसार कलेक्टरों को केवल राजस्व प्रशासन की शक्ति दी गई थी।

प्रश्न 5. आभासी निजी परिपथ (Virtual Private Network) क्या है? PYQ (2011)(स्तर – सरल)

  1. यह किसी संस्था का निजी कंप्यूटर परिपथ है, जिसमें सुदूर बैठे प्रयोक्ता संस्था के परिवेषक (सर्वर) के माध्यम से सूचना प्रेषित कर सकते हैं
  2. यह निजी इंटरनेट पर बना कंप्यूटर परिपथ है, जो प्रयोक्ताओं को अपनी संस्था के परिपथ में प्रवेश करने की सुविधा देता है और प्रेषित की जा रही सूचना को सुरक्षित रखता है
  3. यह एक ऐसा कंप्यूटर परिपथ है, जिसके द्वारा प्रयोक्ता सेवा प्रबंधक (सर्विस प्रोवाइडर) के माध्यम से कंप्यूटिंग संसाधनों के साझे भंडार में प्रवेश पा सकते हैं।
  4. उपर्युक्त (a), (b) तथा (c) कथनों में से कोई भी आभासी निजी परिपथ का सही वर्णन नहीं है।

उत्तर: b

व्याख्या:

  • वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) एक एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित नेटवर्क के अनुरूप होता है जो आपको नेटवर्क संसाधनों का सुरक्षित रूप से उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • VPN उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित तरीके से घर से काम करने की अनुमति देता है ताकि सार्वजनिक इंटरनेटवर्क द्वारा दी गई रॉउटिंग अवसंरचना की मदद से दूरस्थ कॉर्पोरेट सर्वर से कनेक्ट किया जा सके।
  • VPN कर्मचारियों को कार्यालय के बाहर यात्रा करते समय सुरक्षित रूप से अपनी कंपनी के इंट्रानेट तक पहुंचने की अनुमति देते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. नई वैश्विक वित्तीय संधि के लिए शिखर सम्मेलन जैसे सहयोग वैश्विक सम्मेलनों और संगठनों की प्रासंगिकता बनाए रखने में सर्वोपरि हैं। विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय संबंध]

प्रश्न 2. भारत की विकास यात्रा तेज गति वाली रही है लेकिन साथ ही इसमें कमी भी पाई गई है। उपरोक्त कथन के संदर्भ में, भारत की विकास गाथा में मजबूत भारत-अमेरिका संबंधों द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय संबंध]