21 जून 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: शासन:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
अर्थव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
कोल इंडिया और CCI के बीच क्या विवाद है?
शासन:
विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू।
प्रारंभिक परीक्षा: प्रतिस्पर्धा अधिनियम, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) से संबंधित जानकारी।
मुख्य परीक्षा: कोल इंडिया लिमिटेड बनाम भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग केस और सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बारे में विवरण।
प्रसंग:
- 15 जून 2023 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को प्रतिस्पर्धा अधिनियम के दायरे से बाहर करने के लिए “कोई आधार नहीं” है।
मामले की पृष्ठभूमि:
- मार्च 2017 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) पर गैर-कोकिंग कोयले की आपूर्ति के लिए बिजली उत्पादकों के साथ ईंधन आपूर्ति समझौते (FSAs) के दौरान अनुचित या भेदभावपूर्ण नियम और शर्तें लगाने के लिए 591.01 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
- CCI ने कोल इंडिया पर उच्च कीमतों पर कम गुणवत्ता वाले आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति करने और उनके अनुबंधों में गैर-पारदर्शी नियम और शर्तें लगाने का आरोप लगाया था।
- CCI ने आगे आरोप लगाया था कि कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों ने बाजार की ताकतों से स्वतंत्र रूप से अपना संचालन किया और देश में गैर-कोकिंग कोयले के उत्पादन और आपूर्ति के संबंध में बाजार पर प्रभुत्व का फ़ायदा उठाया।
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कोल इंडिया लिमिटेड (CIL):
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कोल इंडिया का रुख:
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने तर्क दिया कि उसने “सार्वजनिक हित के सिद्धांतों” के अनुरूप काम किया और प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का समान वितरण भी सुनिश्चित किया था।
- उपर्युक्त उद्देश्य के साथ, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को राष्ट्रीयकरण अधिनियम, 1973 या कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 के तहत “एकाधिकार” के रूप में दर्जा दिया गया था।
- CIL ने स्वीकार किया कि हो सकता है कि उसने विभेदक मूल्य निर्धारण तंत्र का सहारा लिया हो। हालांकि, इस तरह के तंत्र को अपनाने का मुख्य उद्देश्य कैप्टिव कोयला उत्पादन को प्रोत्साहित करना था।
- विभेदक मूल्य निर्धारण, बाजार के सिद्धांतों के साथ असंगत होने के बावजूद, वृहद् संचालन पारिस्थितिकी तंत्र की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने और विभिन्न कल्याणकारी उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
- CIL ने यह भी कहा कि उसने विभेदक मूल्य निर्धारण तंत्र का सहारा इसलिए लिया क्योंकि कोयले की आपूर्ति के मुद्दे का बड़ी राष्ट्रीय नीतियों पर असर पड़ता है, उदाहरण के लिए, सरकार आवंटन में वृद्धि की मदद से पिछड़े क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दे सकती है।
- CIL ने आगे यह कहकर तर्क दिया कि वह वाणिज्यिक क्षेत्र में काम नहीं करता है और इस तथ्य को उजागर किया कि उसकी 462 खानों में से लगभग 345 को 2012-13 में 9,878 करोड़ रुपये की संचयी हानि हुई थी।
CCI की प्रतिक्रिया:
- CCI ने राघवन समिति (2020) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तर्क के दायरे को व्यापक बनाने की कोशिश की, जिसमें कहा गया था कि “राज्य का एकाधिकार राष्ट्र के सर्वोत्तम हितों के अनुकूल नहीं है। इसलिए राज्य एकाधिकार को अक्षमता की स्थिति में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और बजाय इसके प्रतिस्पर्धा के बीच काम करना चाहिए”।
- CCI ने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि फरवरी 2007 में कोयला एक “आवश्यक वस्तु” नहीं रह गया था और वर्ष 2017 में राष्ट्रीयकरण अधिनियम को संविधान की नौवीं अनुसूची से भी हटा दिया गया था।
- इसके अलावा CCI ने तर्क दिया कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) वर्ष 2010 में विनिवेश प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई थी, जिसके बाद सरकार की हिस्सेदारी 67% तक कम हो गई थी, एवं बाकी निजी हाथों में चली गई थी।
- CCI ने इस तथ्य को भी इंगित किया कि कोल इंडिया ने अपनी आपूर्ति का 80% बिजली कंपनियों को प्रेषित किया, जो वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को कोयले से उत्पन्न बिजली की आपूर्ति करेंगी, जो अंतिम उपभोक्ता को बिजली की आपूर्ति करेगा।
- CCI ने इस प्रकार तर्क दिया कि कोयले की आपूर्ति, अनुबंध का पालन, कोयले की कीमतों और गुणवत्ता में तर्कसंगतता भी एक सार्वजनिक कल्याण का ही काम है।
- CCI ने यह भी तर्क दिया कि बिजली उत्पादन कंपनियों की लागत में कोयले की हिस्सेदारी लगभग 60 से 70% है और इसलिए अनियमित कीमतों और आपूर्ति का अंतिम उपयोगकर्ताओं या उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियां:
- शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तर्क का “कोई आधार नहीं” है कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम CIL पर लागू नहीं होगा क्योंकि यह राष्ट्रीयकरण अधिनियम के दायरे में आता है।
- अदालत के अनुसार, यदि राज्य के एकाधिकार, सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं और सरकारी कंपनियों को (प्रतिस्पर्धा) अधिनियम का उल्लंघन करने की अनुमति दी जाती है, तो अधिनियम के अनुमति देने वाले मौलिक सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
- अदालत ने आगे कहा कि संस्थाएं सनक में काम नहीं कर सकती हैं और अन्यथा या समान रूप से स्थित संस्थाओं के साथ भेदभाव के साथ गलत व्यवहार नहीं कर सकती हैं।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
सेमीकंडक्टर फैब: अधूरा एजेंडा:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
विषय: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
प्रारंभिक परीक्षा: मूर का नियम
मुख्य परीक्षा: भारत और चीन की सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों की तुलना एवं विश्लेषण।
विवरण:
सेमीकंडक्टर से संबंधित आँकड़े:
- सेमीकंडक्टर स्मार्टफोन से लेकर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) में कनेक्टेड डिवाइस तक लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के छोटे आकार के बिल्डिंग ब्लॉक हैं। वे उपकरणों को कम्प्यूटेशनल शक्ति देने में मदद करते हैं।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग वर्तमान में $500-$600 बिलियन का है और वर्तमान में लगभग $3 ट्रिलियन मूल्य के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को आपूर्ति करता है।
सेमीकंडक्टर नीति: पूर्व के प्रयास
- सर्वप्रथम सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना 2007 में विशेष प्रोत्साहन पैकेज (SIP) के रूप में की गई।
- इस दिशा में दूसरा प्रयास 2012 में पिछली योजना में कुछ संशोधन करके किया गया था।
- सेमीकंडक्टर मूर के नियम के सिद्धांत पर काम करता है, जो कहता है कि यूनिट में ट्रांजिस्टर की संख्या हर 18 महीने के बाद दोगुनी हो जाती है। लेकिन, फ़ैब्स के लघुकरण के लिए तकनीकी ज्ञान और निवेश की आवश्यकता होती है।
सेमीकंडक्टर नीति:
- भारत में सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना की योजना सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना के लिए पात्र आवेदकों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर वेफर फैब्रिकेशन सुविधाओं की स्थापना के लिए बड़े निवेश को आकर्षित करना है।
- भारत में डिस्प्ले फैब की स्थापना की योजना योग्य आवेदकों को डिस्प्ले फैब की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य देश में TFT LCD / AMOLED आधारित डिस्प्ले फैब्रिकेशन सुविधाओं की स्थापना के लिए बड़े निवेश को आकर्षित करना है। यह योजना प्रति फैब 12,000 करोड़ रुपये की सीमा के अधीन परियोजना लागत के 50% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की चुनौतियाँ:
- सेमीकंडक्टर एक पूंजी गहन उद्योग है और इसके फलने-फूलने के लिए भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होती है। भारत के पास धन की सीमित पहुँच है जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
- सेमीकंडक्टर उद्योग का आधार दुर्लभ मृदा खनिज हैं। भारत दुर्लभ मृदा खनिजों का उत्पादन नहीं करता है और यह इसके लिए अन्य देशों पर निर्भर है।
- चिप्स के निर्माण की प्रक्रिया में विभिन्न गैसों और रसायनों की आवश्यकता होती है और इस प्रकार यह पर्यावरण संबंधी चिंताओं का कारण बनता है।
- अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान चिप उद्योग की एक और शर्त है। चिप निर्माताओं के सपने को साकार करने के लिए भारत को बहुत सारे लोगों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
- चिप उद्योग को संचालित करने के लिए भारी मात्रा में साफ पानी की आवश्यकता होती है। भारत जैसे देश में जहां पहले से ही पानी की कमी है, यह एक मुश्किल मामला है।
भावी कदम:
- भारत को इस क्षेत्र में उन्नत ज्ञान रखने वाले देशों के साथ संयुक्त सहयोग विकसित करने की आवश्यकता है। कार्यबल को प्रशिक्षण प्रदान करने से दुनिया में सेमीकंडक्टर हब बनने के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी।
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सारांश:
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यूपीआई भुगतान: उपयोगकर्ताओं के लिए राहत, बैंकों के लिए सिरदर्द:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
अर्थव्यवस्था:
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
प्रारंभिक परीक्षा: यूपीआई के बारे में।
मुख्य परीक्षा: यूपीआई भुगतान और लेनदेन में रुझान और इससे जुड़े विभिन्न मुद्दे।
विवरण:
यूपीआई से संबंधित आंकड़े:
- 2018-19 से पिछले चार वर्षों के दौरान डिजिटल भुगतान की मात्रा में 200% से अधिक की वृद्धि के साथ भारत में डिजिटल लेनदेन में क्रन्तिकारी बदलाव आए हैं।
- वित्त वर्ष 21-22 में 45 बिलियन यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जो पिछले 3 वर्षों में 8 गुना वृद्धि और पिछले 4 वर्षों में 50 गुना वृद्धि दर्शाता है।
चित्र: यूपीआई लेनदेन
स्रोत: The Hindu
- मई 2018 में यूपीआई प्लेटफॉर्म पर करीब 19 करोड़ लेन-देन किए गए थे। यह 2023 में बढ़कर 9415 मिलियन हो गया है।
चित्र: यूपीआई लेनदेन
स्रोत: The Hindu
- 2017-18 में सभी लेन-देन में यूपीआई का हिस्सा सिर्फ 5.9% था जबकि प्रीपेड लेनदेन लगभग 20% था। 2022-23 में यूपीआई लेनदेन सभी सीमाओं को पार कर गया और 73% पर पहुंच गया, जबकि प्रीपेड साधन 6.5% पर पहुंच गए। समय के साथ-साथ भुगतान पद्धति में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी घटती गई।
- यूपीआई भुगतान की प्रक्रिया में फोन पे (Phone pay) की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, जिसके बाद गूगल पे (Google pay) का स्थान आता है।
- यूपीआई लेन-देन में उछाल ज्यादातर मात्रात्मक है न कि मूल्यात्मक। इस प्रकार इसके कारण बैंक कर्मियों का काम बढ़ जाता है, जबकि बैंकों का लाभ उस मात्रा में नहीं बढ़ता।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. जेमकोवैक-ओएम (GEMCOVAC-OM):
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
प्रारंभिक परीक्षा: जेमकोवैक-ओएम और mRNA टीकों से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी।
प्रसंग:
- भारत के औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of India (DCGI) ) द्वारा आपातकालीन उपयोग दिशानिर्देशों के तहत ओमिक्रॉन के खिलाफ भारत के पहले mRNA वैक्सीन (टीके) को मंजूरी दी गई है।
जेमकोवैक-ओएम:
- जेमकोवैक-ओएम कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के लिए देश का पहला स्वदेशी mRNA वैक्सीन (mRNA vaccine) है।
- जेमकोवैक-ओएम को पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित किया गया है।
- जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स को पहले जेमकोवैक-19 के लिए मंजूरी मिली थी, जो कि कोविड-19 के खिलाफ भारत का पहला mRNA वैक्सीन था।
- जेमकोवैक-ओएम एक mRNA-आधारित टीका है, जो SARS-CoV-2 के ओमिक्रॉन वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन को एंटीजन के रूप में उपयोग करता है।
- जेमकोवैक-ओएम वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस के तापमान में स्थिर देखा गया और इसलिए इसे “साधारण” रेफ्रिजरेटर में संग्रहीत किया जा सकता है।
- यह एक ल्योफिलाइज्ड (फ्रीज-ड्राई) वैक्सीन है।
- जेमकोवैक-ओएम वैक्सीन को केवल फार्माजेट, USA द्वारा विकसित नीडल-फ्री ट्रॉपिस इंजेक्शन सिस्टम का उपयोग करके इंट्राडर्मल (आईडी) इंजेक्शन के रूप में दिया जाएगा।
2. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:
कला एवं संस्कृति:
प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और ट्राइफेड से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी।
प्रसंग:
- भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India (TRIFED) ) अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के एक हिस्से के रूप में देश भर के आदिवासी कारीगरों से विशेष रूप से खरीदे गए 34,000 योग मैट की आपूर्ति के लिए आयुष मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है।
विवरण:
- इनके द्वारा उत्पादित प्रत्येक चटाई भारत की जनजातियों की विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है और उनकी संस्कृति, कहानियों, लोककथाओं और कलात्मक विरासत को भी दर्शाती है।
- भारत योग और ध्यान के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के अलावा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक भाग के रूप में भारतीय आदिवासी कारीगरों के कौशल को भी बढ़ावा देगा।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस:
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।
- 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया था।
- यह दिन योग का अभ्यास करने के विभिन्न लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा स्वास्थ्य और कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2023 की थीम: “वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग” है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: International Day of Yoga
महत्वपूर्ण तथ्य:
- चीन ने 26/11 आतंकी हमले के आरोपी साजिद मीर को ब्लैक लिस्ट में डालने के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में रोक दिया:
- चीन ने भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव को रोक दिया है।
- साजिद मीर 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों में शामिल होने के कारण वांछित है और मुंबई आतंकवादी हमलों में उसकी भूमिका के लिए यू.एस. द्वारा उस पर $ 5 मिलियन का इनाम रखा गया है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत “वैश्विक आतंकवादी” के रूप में साजिद मीर को ब्लैकलिस्ट करने के लक्ष्य से प्रस्ताव अमेरिका द्वारा पेश किया गया था और भारत द्वारा सह-नामित किया गया था।
- UNSC की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत एक व्यक्ति को “वैश्विक आतंकवादी” के रूप में नामित करने पर उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी, उसकी यात्राओं पर प्रतिबंध लगाए जाएँगे और हथियार रखने पर प्रतिबंध लगाए जाएँगे।
- जून 2022 में, मीर को पाकिस्तान में एक आतंकवाद-रोधी अदालत द्वारा आतंकवाद-वित्तपोषण मामले में 15 साल से अधिक की जेल हुई थी।
- अतीत में, पाकिस्तान के अधिकारियों ने दावा किया है कि मीर की मृत्यु हो गई थी, लेकिन पश्चिमी देशों ने इस पर विश्वास नहीं किया और उनकी मृत्यु का प्रमाण मांगा।
- कार्य योजना पर पाकिस्तान की प्रगति के वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force (FATF)) द्वारा मूल्यांकन में यह मुद्दा एक प्रमुख बाधा बन गया।
- भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India (TRAI)) ने भारतीय दूरसंचार नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट से जोड़ने वाले अंडरसी केबल के लिए नियमों पर सिफारिशें की हैं।
- इससे पहले दूरसंचार विभाग ने ट्राई से यह सिफारिशें मांगी थीं कि क्या अंडरसी केबल (आमतौर पर उच्च-शक्ति वाले वैश्विक कंसोर्टिया द्वारा विकसित) में बिना बड़ी हिस्सेदारी वाली भारतीय कंपनियों को अकेले कार्य करने वाली मंजूरी के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
- ट्राई ने सिफारिश की है कि समुद्र के नीचे के केबलों का संचालन करने वाली सभी भारतीय दूरसंचार कंपनियों को यह प्रमाण प्रस्तुत करना होगा कि उनके पास भारतीय जल में मौजूद अंडरसी केबल के कम से कम कुछ हिस्से का मालिकाना हक़ है।
- ट्राई ने केबल लैंडिंग स्टेशन और “पॉइंट ऑफ़ प्रेसेंस”, जिससे स्टेशन जुड़ा हुआ है, के बीच अंतर करने की भी सिफारिश की है।
- ट्राई ने आगे सिफारिश की कि मौजूदा केबल लैंडिंग स्टेशनों पर “डार्क फाइबर” की अनुमति दी जानी चाहिए, और “स्टब्स”, जो भविष्य के संभावित विस्तार के लिए भारतीय जल में छोटे केबल हैं, को भी अनुमति दी जानी चाहिए।
- इसके अलावा, ट्राई ने सुझाव दिया कि अंडरसी केबल को महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना के रूप में अधिसूचित किया जाए ताकि उन्हें राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा सके।
UNSC की 1267 प्रतिबंध समिति के बारे में अधिक जानकारी के लिए 18 जनवरी 2023 का UPSC परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण का निम्नलिखित लेख देखें।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. जगन्नाथ रथ यात्रा के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कितने सत्य हैं? (स्तर – कठिन)
- यह भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण उत्सव है।
- इसे गुंडिचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है।
- इस उत्सव के लिए रथ के निर्माण के लिए शरुआ और फासी के पेड़ों के लट्ठे की आवश्यकता होती हैं।
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई नहीं
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: जगन्नाथ रथ यात्रा एक वार्षिक रथ उत्सव है जो ओडिशा राज्य के पुरी शहर में आयोजित किया जाता है, जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान कृष्ण का एक रूप माना जाता है।
- कथन 2 सही है: उत्सव को गुंडिचा यात्रा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक भगवान जगन्नाथ की यात्रा का प्रतीक है।
- कथन 3 सही है: जगन्नाथ मंदिर के अधिकारियों को रथ के निर्माण के लिए लकड़ी की 12 प्रजातियों के 1,100 से अधिक बड़े लट्ठों की आवश्यकता होती है और फासी, भौंरा और आसन नाम की तीन प्रजातियों के लट्ठे इन रथों के प्रमुख घटक हैं।
प्रश्न 2. गांधी शांति पुरस्कार के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कितने सत्य हैं? (स्तर – कठिन)
- इसे महात्मा गांधी की 100वीं जयंती के अवसर पर वर्ष 1969 में शुरू किया गया था।
- संस्कृति मंत्रालय द्वारा इसकी घोषणा की गई है।
- यह केवल संस्थानों और संगठनों को दिया जा सकता है, व्यक्तियों को नहीं।
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई नहीं
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर 1995 में भारत सरकार द्वारा गांधी शांति पुरस्कार की स्थापना की गई थी।
- कथन 2 सही है: गांधी शांति पुरस्कार की घोषणा संस्कृति मंत्रालय द्वारा की जाती है।
- कथन 3 गलत है: यह पुरस्कार उन व्यक्तियों, संघों, संस्थाओं या संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने शांति, अहिंसा और मानवीय पीड़ाओं में उत्थान के लिए निःस्वार्थ रूप से काम किया है, विशेष रूप से समाज के निम्न-विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के लिए सामाजिक न्याय और सद्भाव की दिशा में योगदान दिया है।
प्रश्न 3. एक अंतर्जलीय पनडुब्बी “टाइटन” निम्नलिखित में से किस कारण से चर्चा में है? (स्तर – सरल)
- इसे पृथ्वी पर सबसे गहरे बिंदु, चैलेंजर डीप की गहराई का पता लगाने के लिए तैनात किया गया है।
- अंटार्कटिक बर्फ की चादरों पर समुद्र के गर्म होने के प्रभाव को समझने के लिए यह अध्ययन का एक हिस्सा रही है।
- इसे EEZ में गैस हाइड्रेट्स का पता लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया है।
- इसे लोगों को टाइटैनिक के भग्नावशेषों तक ले जाने के लिए लॉन्च किया गया था और अब यह गायब है।
उत्तर: d
व्याख्या:
- टाइटन एक 22-फुट लम्बी कार्बन-फाइबर और टाइटेनियम से बनी एक पनडुब्बी है जिसे एक कनाडाई खोजी जहाज एम.वी. पोलर प्रिंस द्वारा उत्तरी अटलांटिक में टाइटैनिक जहाज़ के भग्नावशेषों के स्थान का अन्वेषण करने के लिए लगभग 13,000 फीट की गहराई में यात्रा करने के लिए विकसित किया गया है।
- हालांकि, जहाज़ के भग्नावशेषों के स्थान का अन्वेषण करने के लिए भेजे जाने के बाद से यह पनडुब्बी लापता है, इसमें पाँच लोग सवार थे।
प्रश्न 4. समाचारों में रहे स्थान और उनके देशों से संबंधित निम्नलिखित युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं? (स्तर – मध्यम)
- चश्मा: पाकिस्तान
- न्यूफ़ाउंडलैंड: कनाडा
- खेरसॉन: यूक्रेन
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई नहीं
उत्तर: c
व्याख्या:
- युग्म 1 सही है: चश्मा पाकिस्तान के पंजाब में मियांवाली जिले में कुंडियन के पास स्थित है।
- पाकिस्तान और चीन ने चश्मा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की एक नई इकाई बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
- युग्म 2 सही है: न्यूफ़ाउंडलैंड कनाडा का एक प्रांत है जो न्यूफ़ाउंडलैंड द्वीप से बना है।
- एक अन्तर्जलीय पनडुब्बी “टाइटन” जो न्यूफ़ाउंडलैंड से समुद्र तल पर टाइटैनिक जहाज़ के भग्नावशेषों के स्थल की यात्रा करने वाली थी, गायब है।
- युग्म 3 सही है: खेरसॉन यूक्रेन का एक बंदरगाह शहर है जो खेरसॉन ओब्लास्ट के प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करता है।
- यूक्रेन में कखोवका बांध हाल ही में टूट गया था जिससे खेरसॉन और खेरसॉन ओब्लास्ट क्षेत्र में निचली नीपर नदी के क्षेत्र में विशाल बाढ़ आ गई है।
प्रश्न 5. यदि किसी पौधे की विशिष्ट जाति को वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI के तहत रखा जाता है, तो इसका क्या तात्पर्य है? PYQ 2020 (स्तर – सरल)
- उस पौधे की खेती करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है।
- ऐसे पौधे की खेती किसी भी परिस्थिति में नहीं हो सकती।
- यह एक आनुवंशिकतः रूपांतरित फ़सली पौधा है।
- ऐसा पौधा आक्रामक होता है और पारितंत्र के लिए हानिकारक होता है।
उत्तर: a
व्याख्या:
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI दुर्लभ या संकटग्रस्त पौधों सहित पौधों की प्रजातियों पर केंद्रित है, और यह अनुसूची उनके संग्रह, खेती या व्यापार पर प्रतिबंध लगाती है।
- ऐसे पौधों की खेती और व्यापार की अनुमति केवल लाइसेंस के तहत या सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन से ही दी जाती है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. “भारत की अर्द्धचालक (सेमी-कंडक्टर) नीति और रणनीति को नया रूप देने की आवश्यकता है” टिप्पणी कीजिए?
(250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-3, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी]
प्रश्न 2. “हालिया UPI डेटा एक समस्या और एक विरोधाभास प्रकट करता है” भारत में वित्तीय लेनदेन पर हाल के अध्ययन के संदर्भ में उपरोक्त कथन पर चर्चा कीजिए?
(150 शब्द, 10 अंक) [जीएस-3, अर्थव्यवस्था]