27 अक्टूबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. औद्योगिक निवेश हेतु वित्त मंत्री का आह्वान:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

विश्व इतिहास:

  1. आज के संदर्भ में उपनिवेशवाद और उससे उपजा असंतोष:

सामाजिक न्याय:

  1. मनोरंजन सामग्री तक पहुंच में सुधार:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. जलाल-उद-दीन अकबर:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. GEAC ने एक बार फिर GM सरसों की व्यावसायिक खेती को मंजूरी दी:
  1. इसरो NavIC को बढ़ावा देने हेतु अवस्थिति प्रणाली के उपयोगकर्ता आधार को विस्तृत करें:
  2. पर्यटन के लिए मणिपुर की गुफा से निकाले गए चमगादड़:अध्ययन

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

औद्योगिक निवेश हेतु वित्त मंत्री का आह्वान:

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन, विकास, संवृद्धि और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था में रुझान और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता।

संदर्भ:

  • हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने औधोगिक दिग्गजों से विनिर्माण क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया है।
  • वित्त मंत्री ने उद्योगों की तुलना भगवान हनुमान से करते हुए कहा कि उद्योगों को अपनी ताकत का एहसास नहीं है और उन्हें इस क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

उद्योग घरानों से विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आग्रह करने की आवश्यकता:

  • निजी निवेश को मजबूत करने की दिशा में सितंबर 2019 में सरकार ने घरेलू कंपनियों के लिए कर की दर को 30% से घटाकर 22% कर दिया, बशर्ते उन कंपनियों ने किसी अन्य कर SOP का लाभ उठाना बंद कर दिया हो।
  • इस कदम के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में होने वाला निवेश अपेक्षित दर प्राप्त करने में विफल रहा है।
  • जानकारों के मुताबिक पिछले 10 साल में देश में निजी क्षेत्र का निवेश काफी कमजोर/कम रहा है।
  • विशेषज्ञ अर्थव्यवस्था में मौजूदा आर्थिक मंदी के बारे में भी चेतावनी देते हैं क्योंकि आर्थिक विकास के चालकों के विश्लेषण से पता चलता है,वैश्विक मंदी के कारण निर्यात पक्ष खतरे में है जिसकी वजह से राजकोषीय घाटा कम होने से घरेलू मांग में सहायता करने की सरकार की क्षमता भी सीमित हो जाएगी।
  • इसके अलावा, जैसा कि भारतीय अर्थव्यवस्था K- आकार की रिकवरी के दौर से गुजर रही है,ऐसे में निजी खपत केवल आय पिरामिड के कुछ क्षेत्रों में ही केंद्रित हो गई है।

वर्तमान परिदृश्य:

  • जून में समाप्त तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2011-12 की कीमतों पर सकल अचल पूंजी निर्माण (gross fixed capital formation (GFCF)) 9.6% बढ़कर ₹12.77 लाख करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2020 (पूर्व-महामारी अवधि में) की पहली तिमाही में ₹11.66 लाख करोड़ था।
  • सकल अचल पूंजी निर्माण/ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) भौतिक संपत्ति (निवेश ऋण निपटान-investment minus disposals) में निवल वृद्धि को संदर्भित करता है।
  • GFCF को अचल पूंजी की खपत (मूल्यह्रास) के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता है और GDP की गणना के लिए यह व्यय दृष्टिकोण का एक घटक है।
  • इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में ₹ 35.85 लाख करोड़ की तुलना में वित्त वर्ष 2022 की प्रथम तिमाही में समग्र सकल घरेलू उत्पाद में 2.8% की वृद्धि के साथ ₹36.85 लाख करोड़ थी।
  • वित्त वर्ष 2022- 23 की प्रथम तिमाही में विनिर्माण सकल मूल्य वर्धित (GVA (gross value added) ) 6.5% बढ़कर ₹6,05,104 तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2020 की प्रथम तिमाही में यह ₹5,68,104 था।
  • हालांकि पिछली तिमाही (यानी अप्रैल-जून बनाम जनवरी-मार्च) में विनिर्माण में वृद्धि की तुलना से संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में 10.5% संकुचन का अनुभव किया गया।
  • निजी अंतिम उपभोग व्यय जिसे अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है,जून तिमाही के लिए साल-दर-साल लगभग 26% की वृद्धि हुई, लेकिन अप्रैल-जून 2022 में निजी खर्च पिछली तिमाही में किए गए खर्च से लगभग 2.4% (₹54,000 करोड़) कम था।
  • इसके अतिरिक्त, GFCF,जिसे निजी निवेश के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है, में भी तिमाही दर तिमाही में लगभग 6.8% की कमी आई।
  • गत वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2022-23 (अप्रैल-अगस्त) के पांच महीनों में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि S&P परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Purchasing Managers’ Index (PMI)) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production (IIP)) के अनुसार विनिर्माण की मासिक संख्या अनियमित और छिटपुट रही है।

घरेलू मांग संबंधी रुझान:

  • घरेलू मांग किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि निजी कंपनियों को निवेश करने के लिए तभी प्रोत्साहित किया जाएगा जब वे मुनाफा कमा सकें और यह सम्भावना मांग से आती है।
  • सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIEE) के अनुसार,पिछले 12-18 महीनों में जो देखा गया था, उससे अधिक होने के बावजूद देश में उपभोक्ता भावना सूचकांक अभी भी पूर्व-महामारी के स्तर से नीचे है।
  • हाल ही में RBI की मौद्रिक नीति सम्बन्धी रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि कुल मांग में उछाल बना हुआ है तथा निजी खपत और निवेश मांग में मौजूदा सुधार द्वारा समर्थित है।
  • इसने यह भी संकेत दिया कि पहली तिमाही में मौसमी रूप से समायोजित क्षमता का उपयोग बढ़कर 74.3% हो गया जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।
  • यह उच्च घरेलू बचत इरादों के साथ जुड़ा हुआ है,जो निवेश चक्र को शुरू करने की कुंजी हो सकती है।

सिफारिशें:

  • विशेषज्ञों के अनुसार निजी निवेश के लिए सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय एक पूर्वापेक्षा है।
  • इस संदर्भ में इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने बजट में बुनियादी ढांचे पर आक्रामक तरीके से खर्च करने की सरकार की दृष्टि उत्साहजनक है, लेकिन इस चक्र को बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था।

सरकार ने अपनी मंशा निर्धारित कर ली है, अब ध्यान इस पर होना चाहिए:

  • उत्पादकता बढ़ाने वाले बुनियादी ढांचे में सही परियोजनाओं और निवेश को पहचानना चाहिए।
  • चूंकि बढ़ती मुद्रास्फीति में सार्वजनिक खर्च की पहल को पटरी से उतारने की क्षमता है, इसलिए कृषि उत्पाद को बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए जो खाद्य मुद्रास्फीति को कम करने में मदद करते हैं।

सारांश:

  • ऐसे समय में जब निजी निवेश अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहा है, के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र से विनिर्माण में निवेश करने का आग्रह किया है और निजी निवेश को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचे पर आक्रामक रूप से खर्च करने पर विचार किया है।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज के संदर्भ में उपनिवेशवाद और उससे उपजा असंतोष:

विश्व इतिहास:

विषय: औपनिवेशीकरण और विऔपनिवेशीकरण।

मुख्य परीक्षा: भारत में शिक्षा का विऔपनिवेशीकरण।

संदर्भ:

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री श्री जयशंकर द्वारा हाल ही में “विदेशी हमलों” और “उपनिवेशवाद” पर की गई टिप्पणियों ने विउपनिवेशवाद (उपनिवेशवाद से मुक्ति की प्रक्रिया) पर बहस को फिर से हवा दे दी है।

भूमिका:

  • “लाखों आम भारतीयों के दृढ़ संकल्प, नवपरिवर्तन और प्रयास” की प्रशंसा करते हुए, श्री जयशंकर ने जोर देकर कहा कि “सदियों तक विदेशी हमलों और उपनिवेशवाद से पीड़ित समाज का वे कायाकल्प कर रहे हैं”।
    • यह निरूपण “सदियों के विदेशी हमलों” और “उपनिवेशवाद” के मध्य एक विभेद की तरह प्रतीत होता था।
  • एक विचारधारा के रूप में, उपनिवेशवाद आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उपनिवेशों के प्रतिक्रियाशील मनोदशाओं से निपटने के लिए एक अंतर्निहित साधन है।

औपनिवेशीकरण और शिक्षा:

  • उपनिवेशवाद और शिक्षा घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए अन्तर्सम्बंधित हैं। ऐतिहासिक रूप से, उपनिवेशों को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत शिक्षा प्रणालियों का उपयोग और दुरुपयोग किया जाता था।
  • बहुसंख्यक राष्ट्रवाद ने अंग्रेजी को विऔपनिवेशीकरण के फलक के रूप में बढ़ावा दिया है।
    • उदाहरण के लिए, ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने अंग्रेजी शिक्षा का इस आधार पर समर्थन किया कि इसमें निचली जातियों के खिलाफ भेदभाव को मिटाने की क्षमता है।
  • अंग्रेजी के ज्ञान ने भारतीयों को वैश्विक बाजार में एक बढ़त प्रदान की है। हालाँकि, भारत के कुछ हिस्सों में अंग्रेजी भाषा अभी भी विशेषाधिकार की प्रतीक है, लेकिन यह एक आवश्यकता और संचार का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।

शिक्षा का विऔपनिवेशीकरण:

  • विऔपनिवेशीकरण उपनिवेशीकरण की प्रथाओं को समाप्त करने की प्रक्रिया है। इसमें शैक्षणिक संस्थानों की संरचना और वृहत समाज के भीतर उनकी भूमिका को प्रतिबिंबित करना शामिल है।
    • शैक्षिक संदर्भ में, इसका अर्थ है उपनिवेशवादी प्रथाओं का मुकाबला करना और उन्हें चुनौती देना जिन्होंने अतीत में शिक्षा को प्रभावित किया है और कहीं न कहीं आज भी मौजूद हैं।
    • ऐतिहासिक रूप से असमान सत्ता संबंधों और उपनिवेशवाद की विरासतों को प्रतिबिंबित करने वाली असमानताओं के जीवंत अनुभवों के परिणामस्वरूप शिक्षा प्रणाली के विउपनिवेशीकरण का आह्वान किया जाता है।
    • अतः शिक्षा का विऔपनिविशिकरण औपनिवेशिक सत्ता संबंधों के ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट समुच्चय और किस प्रकार वे आज भी संरचनाओं, संस्थानों, संबंधों और प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका निभाते हैं, को पहचानने की मांग करता है।
  • उत्तर-औपनिवेशिक विज्ञान और विज्ञान की शिक्षा औपनिवेशिक प्रतीकों और प्रथाओं के साथ गहराई से मिश्रित है। विज्ञान को स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाया जाना चाहिए। यह जनता में इसकी स्वीकृति और समझ में मदद करेगा। यह भारतीय जनता के बीच वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की भावना को समृद्ध करेगा।
    • आधुनिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को पश्चिमी विचारों का हिस्सा बनने के बजाय शिक्षा के भारतीयकरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2022 ( National Education Policy 2022) शिक्षा में रटकर सिखने की प्रवृति को प्रतिस्थापित करता है, जिसे हमारे औपनिवेशिक आकाओं द्वारा ‘क्लर्क’ बनाने के लिए बढ़ावा दिया गया था। प्राचीन समय (औपनिवेशीकरण से पूर्व) में विश्लेषणात्मक कौशल में सुधार के लिए विषयों और मुद्दों के अवधारणात्मक समझ पर जोर दिया जाता था।
    • इसका उद्देश्य नैतिक और बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना और हमें समान और गुणात्मक विकास के अवसर प्रदान करना है जो विशेष सांस्कृतिक संदर्भों के प्रति उत्तरदायी है।
    • नवीन शिक्षा नीति (NEP) भारतीय वैज्ञानिक विचारकों की एक पीढ़ी को खड़ा करने में सक्षम हो सकता है। ये हमें भारतीय वैज्ञानिक विचारों में निहित वैज्ञानिक आधुनिकता के हमारे विचारों को समझने में मदद करेंगे।
    • यह नीति स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के अनुरूप है, जिन्होंने शिक्षा की वकालत पूर्णता की अभिव्यक्ति के रूप में की है, जो सभी मनुष्यों में अंतर्निहित है।

सारांश:

  • स्वतंत्रता के बाद से, समाज के प्रत्येक क्षेत्र में भारी परिवर्तन हुआ है जो औपनिवेशिक इतिहास की निरंतर विरासत को प्रदर्शित करता है। उपनिवेशवाद और आधुनिकता का कोई भी एकल-आयामी सिद्धांत विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर शिक्षा क्षेत्र में हुए परिवर्तनों की व्याख्या नहीं कर सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सामाजिक न्याय:

मनोरंजन सामग्री तक पहुंच में सुधार:

विषय: कमजोर वर्ग-दिव्यांग

मुख्य परीक्षा: भारत को दिव्यांगजनों के लिए समावेशी और सहभागी बनाने हेतु नीतियां एवं हस्तक्षेप।

संदर्भ:

  • दिव्यांगजनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मनोरंजन सामग्री का अभिकल्पन (डिजाइनिंग)।

भूमिका:

  • दुर्गम भौतिक वातावरण, गतिशीलता एवं परिवहन की कमी, सहायक उपकरणों तथा प्रौद्योगिकियों की अनुपलब्धता, दुर्गम वेबसाइटें (ऐसी वेबसाइटें जिन तक पहुंच नहीं है) और सेवाएं मुख्य धारा की सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में दिव्यांगजनों की समान भागीदारी में बाधा डालती हैं।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांगजन हैं।
  • सुगम्य भारत अभियान (AIC) वर्ष 2015 में एक अवरोध मुक्त तथा अनुकूल वातावरण और सुलभ पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु शुरू किया गया था ताकि अवसर की समानता और एक सक्षम वातावरण प्रदान करके दिव्यांगजनों की सहायता की जा सके।
  • सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) वेबसाइटों, सार्वजनिक दस्तावेजों, टीवी पर मीडिया सामग्री और सांकेतिक भाषा के दुभाषियों (interpreter) के प्रशिक्षण में सुगम्यता को बढ़ावा देता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य सुगम्य वेबसाइटों, सुगम्य सार्वजनिक दस्तावेजों को अपलोड करना और सार्वजनिक टेलीविजन समाचार, मनोरंजन कार्यक्रमों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रिटेशन (सांकेतिक भाषा में व्याख्या) को भी विकसित करना है।

मनोरंजन को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने के लिए उपकरण:

  • ऑडियो विवरण (audio description) और उपशीर्षक (subtitling) दो महत्वपूर्ण उपकरण हैं जो मनोरंजन सामग्री को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने में मदद करते हैं।
  • ऑडियो विवरण (इसे “विवरण” या “वीडियो विवरण” के रूप में भी संदर्भित किया जाता है) को “मीडिया और लाइव प्रस्तुतियों में प्रमुख दृश्य तत्वों के मौखिक चित्रण” के रूप में परिभाषित किया गया है।
    • ऑडियो विवरण का उद्देश्य दृश्य सामग्री से संबंधित जानकारी प्रदान करना है जिसे कार्यक्रम की पूर्ण समझ के लिए आवश्यक माना जाता है।
    • इन मामलों में (दृश्य सामग्री से संबंधित), ऑडियो विवरण प्रदान नहीं करने से नेत्रहीन और दृष्टिबाधित व्यक्ति कार्यक्रम की पूरी समझ हासिल करने से वंचित रह जाएंगे।
  • उपशीर्षक श्रवणबाधित लोगों के लाभ के लिए बोले गए संवाद (spoken dialogue) को स्क्रीन पर लिखित शब्दों में अनुवाद करने की प्रक्रिया है।
    • यह एक प्रकार का दृश्य-श्रव्य अनुवाद (audiovisual translation) है, जिसके अपने नियम और दिशा-निर्देश हैं।

सरकारी नीतियां:

  • समुदायों में उपलब्ध सुविधाओं और सेवाओं तक पहुँचने में सक्षम हुए बिना, दिव्यांगजनों को कभी भी पूरी तरह से मुख्य धारा शामिल नहीं किया जा सकेगा।
  • दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम में इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रावधान किया गया है।
    • अधिनियम की धारा 29 (h) सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने हेतु अनिवार्य करती है कि “श्रवणबाधित व्यक्तियों की सांकेतिक भाषा व्याख्या या उप-शीर्षक के साथ टेलीविजन कार्यक्रमों तक पहुंच हो।”
    • इसके अलावा, धारा 42 (ii) सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने हेतु अनिवार्य करती है कि “दिव्यांगजनों की ऑडियो विवरण, सांकेतिक भाषा व्याख्या और क्लोज कैप्शनिंग (टेलीविजन पर टेक्स्ट प्रदर्शित करना) के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक पहुंच हो।”
  • अक्टूबर 2019 में, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B मंत्रालय) ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को एक पत्र जारी कर बोर्ड से अनुरोध किया था कि वह ऑडियो विवरण को फिल्म के निर्माण और वितरण का हिस्सा बनाने के लिए संबंधित सदस्यों को प्रेरित और राजी करे।
  • सुगम्य भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सुगम्य मानकों के अनुरूप सुलभ और प्रयोग करने योग्य सार्वजनिक दस्तावेजों और वेबसाइटों के अनुपात को बढ़ाने जैसे कई उद्देश्य हैं।
    • सभी सरकारी वेबसाइटों (केंद्र और राज्य सरकारों दोनों) के 50% का (सुगम्यता) एक्सेसिबिलिटी ऑडिट करना और उन्हें पूरी तरह से एक्सेस करने योग्य वेबसाइटों में बदलना।
    • यह सुनिश्चित करना कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए सभी सार्वजनिक दस्तावेजों में से कम से कम 50% एक्सेसिबिलिटी मानकों को पूरा करते हैं।
    • सांकेतिक भाषा के दुभाषियों की संख्या को बढ़ाना।
    • सार्वजनिक टेलीविजन समाचार कार्यक्रमों के दैनिक कैप्शनिंग और सांकेतिक भाषा व्याख्या के अनुपात में वृद्धि करना।
    • राष्ट्रीय मीडिया प्राधिकरणों के परामर्श से कैप्शनिंग और सांकेतिक भाषा व्याख्या पर राष्ट्रीय मानकों को विकसित करना और अपनाना।

समावेशिता की ओर कदम:

  • दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एक गैर-सरकारी संगठन ‘सक्षम’ ने भारत में फिल्मों के ऑडियो विवरण का बीड़ा उठाया है। इसने एक्सएल (XL) सिनेमा नामक एक ऐप विकसित किया है जो ऑडियो वर्णित फिल्मों के ट्रैक को सिंक करता है।
    • ऑडियो वर्णित किसी फिल्म के लिए ऑडियो टिकट खरीदने पर उपयोगकर्ता थिएटर में उसी समय फिल्म का ऑडियो विवरण सुन सकता है जिस समय फिल्म प्रदर्शित की जा रही होती है।
  • भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा दीर्घावधि, अल्पावधि और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से 1250 से अधिक सांकेतिक भाषा के दुभाषियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
  • सुगम्य भारत ऐप, जो एक क्राउडसोर्सिंग मोबाइल एप्लिकेशन है, को 2 मार्च 2021 को लॉन्च किया गया था।
    • इस ऐप को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारिता विभाग (DEPwD) द्वारा विकसित किया गया है।
    • यह सुगम्य भारत अभियान के 3 स्तंभों यानी भौतिक वातावरण, सार्वजनिक परिवहन और सूचना तथा संचार सेवाओं की सुगम्यता और उपयोग में बढ़ोत्तरी एक साधन है।

भावी कदम:

  • कई फिल्म निर्माताओं का मानना है कि भारत में ऑडियो विवरण की मांग बहुत कम है। जब तक उपयोगकर्ताओं का एक महत्वपूर्ण समूह ऑडियो विवरण और उपशीर्षक प्रदान करने के लिए प्लेटफार्मों पर दबाव नहीं डालता, तब तक यह मुद्दा उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे ही रहेगा।
  • फिल्म रिलीज के दौरान फिल्म स्टूडियो को जिन सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है, उनमें दिव्यांगजनों की पहुंच की जिम्मेदारी सबसे नीचे है।
    • स्टूडियो को यह महसूस करना चाहिए कि दिव्यांगजनों के अनुकूल सामग्री बनाना नैतिक, कानूनी और व्यावसायिक रूप से सही कार्य है।
  • नई सामग्री को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने के लिए प्रोडक्शन हाउस के पास अक्सर जानकारी, मानव संसाधन या पर्याप्त समय का अभाव होता है।
    • उपयोगकर्ता संगठनों को फिल्म निर्माताओं को संवेदनशील बनाने और क्षमता निर्माण की पहलों में शामिल होने के लिए लक्षित हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • लिखित कानूनी गारंटी को बेहतर वास्तविक दुनिया के परिणामों में बदलने के लिए नागरिक समाज समूहों को अदालती प्रणाली का अनुसरण करना चाहिए।
  • दिव्यांगजनों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सरकार, फिल्म निर्माताओं, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और मनोरंजन पारिस्थितिकी तंत्र में अन्य लोगों से जवाबदेही की मांग करनी चाहिए।
  • सुगम्यता/पहुंच (accessibility) के संबंध में समाज में परिवर्तनकारी परिवर्तन लाने के लिए जागरूकता पैदा करना और लोगों को संवेदनशील बनाना महत्वपूर्ण है।

सारांश:

  • सूचना तक पहुंच समाज में सभी के लिए अवसर सृजित करती है। भारत में, मनोरंजन सामग्री को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने के लिए विभिन्न साधनों की क्षमता काफी हद तक अप्रयुक्त रही है। वास्तव में समावेशी समाज बनाने के लिए, मनोरंजन उद्योग को अपनी सामग्री और सामग्री के वितरण को अधिक से अधिक दिव्यांगजनों के अनुकूल और सुगम्य बनाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.जलाल-उद-दीन अकबर:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

भारतीय इतिहास:

विषय: भारत का इतिहास।

प्रारंभिक परीक्षा: अकबर से सम्बंधित तथ्य।

संदर्भ:

  • ऐसा माना जाता है कि 27 अक्टूबर, 1605 को मुगल बादशाह अकबर की मृत्यु हो गई थी।

जलाल-उद-दीन अकबर:

  • जलाल-उद-दीन अकबर, जिसे अकबर के नाम से जाना जाता है, का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को उमरकोट के राणा वीरसाल के यहाँ हुआ था जो वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है।
  • वह मुगल सम्राट हुमायूं और हमीदा बानो बेगम के पुत्र थे।
  • अकबर ने सन 1556 से 1605 ई तक शासन किया और उसे भारत का सबसे महान मुगल सम्राट माना जाता है।
  • अकबर अपनी धार्मिक सहिष्णुता, साम्राज्य-निर्माण, प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों तथा कलाओं को दिए गए संरक्षण के लिए जाना जाता है।
  • अकबर ने अपनी नई राजधानी, फतेहपुर सीकरी में इबादत खाना (प्रार्थना का हॉल) नामक एक हॉल बनाया, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म, जैन धर्म, ईसाई धर्म और पारसी धर्म जैसे सभी धर्मों के विद्वानों को आमंत्रित किया और उनके साथ धार्मिक विचार-विमर्श किया।
  • अकबर ने दीन-ए-इलाही/तौहीद-ए-इलाही (ईश्वरीय एकेश्वरवाद) नामक एक नया धर्म भी स्थापित किया जो एक ईश्वर और सुलह-ए-कुल (सभी धार्मिक संप्रदायों के लिए समान सहिष्णुता और सम्मान) में विश्वास करता है।
  • अकबर का दरबार इसके असाधारण अधिकारियों के निवास के लिए भी जाना जाता है, जिन्हें अकबर का नवरत्न कहा जाता है क्योंकि वे संख्या में नौ थे जिसमे उसके पसंदीदा व्यक्ति शामिल थे,ये:बीरबल, तानसेन, अबुल फजल, फैजी, राजा मान सिंह, राजा टोडर मल, मुल्ला दो पियाजा, फकीर अजियाओ-दीन और अब्दुल रहीम खान-ए-खाना थे।
  • अकबर और उनके योगदान के सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए;Akbar and his contributions

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. GEAC ने एक बार फिर GM सरसों की व्यावसायिक खेती को मंजूरी दी:

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तत्वावधान में काम करने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति ( Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC)) ने एक बार फिर आनुवंशिक रूप से संशोधित (genetically modified (GM) mustard plant) सरसों के पौधे की व्यावसायिक खेती के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
  • इससे पूर्व GEAC ने वर्ष 2017 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन उस समय मंत्रालय ने इसे वीटो कर दिया और पैनल को GM फसल पर और अध्ययन करने के लिए कहा था।
  • GEAC ने GM सरसों की खेती के लिए आवश्यक मंजूरी प्रदान कर दी है और यह GM कपास के बाद दूसरी GM फसल होगी जिसकी देश में व्यावसायिक रूप से खेती की मंजूरी दी गयी हैं।
  • GEAC ने आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों की दो किस्मों [धारा सरसों हाइब्रिड (डीएमएच-11)] के पर्यावरण रिलीज की अनुमति दे दी है, ताकि इसका उपयोग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agriculture Research (ICAR)) की देखरेख में नई पैतृक वंशावलियों और संकरों के विकास के लिए किया जा सके।
  • समिति ने इसकी मंजूरी के लिए कुछ शर्तें भी लागू की हैं जिनमें निम्न शामिल हैं:
  • यह अनुमोदन चार साल की सीमित अवधि के लिए है,और अनुपालन रिपोर्ट के आधार पर एक बार में दो वर्षों के लिए नवीकरणीय है।
  • बाहरी विशेषज्ञ प्रत्येक मौसम में कम से कम एक बार फसल के उगने वाले स्थानों का दौरा करेंगे।
  • आवेदक [सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP)] को भी अनुमोदित किस्मों के DNA फिंगरप्रिंट को विकसित/निकाल कर उसे जमा कराना होगा।
  • हालांकि, कई कार्यकर्ताओं ने GEAC के फैसले पर चिंता जताई है और केंद्र से इनमें से किसी भी फैसले को मंजूरी नहीं देने को कहा है।
  • आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Genetically Modified (GM) Crops

2.इसरो NavIC को बढ़ावा देने हेतु अवस्थिति प्रणाली के उपयोगकर्ता आधार को विस्तृत करें:

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) NavIC (भारतीय नक्षत्र के साथ नेविगेशन) में सुधार लाने के उद्देश्य से कई प्रयास कर रहा है, जो कि भारत का स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं के साथ प्रयास किये जा रहे हैं कि NavIC को वैश्विक पहुंच मिले और अधिक से अधिक लोग इसे इंस्टाल एवं उपयोग करने के लिए प्रेरित हों।साथ ही इसे वैश्विक पहुंच देने की भी योजना है।
  • NavIC सात उपग्रहों का एक समूह है और यह अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), यूरोपीय संघ के गैलीलियो और रूस के GLONASS के समान है।
  • NavIC वर्तमान में भारत की मुख्य भूमि और इसके आसपास के 1,500 किमी के क्षेत्र के दायरे में उपयोग के लिए उपलब्ध है। हालाँकि इस सिस्टम का व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता है,क्योंकि मोबाइल फोन को इसके संकेतों को संसाधित करने के लिए अनुकूल नहीं बनाया गया है।
  • सरकार ने इसके निर्माताओं से संगतता जोड़ने का आग्रह किया है एवं इसकी समय सीमा जनवरी 2023 तक निर्धारित की है।
  • इसरो के अध्यक्ष के अनुसार,L1 बैंड को NavIC में जोड़ना एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि यह बैंडविड्थ GPS का हिस्सा है और नागरिक नौवहन उपयोग के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला बैंडविड्थ है।
  • वर्तमान में, NavIC केवल L5 एवं S बैंड के साथ संगत है और केवल संक्षिप्त कोड (शॉर्टकोड) प्रदान करता है।
  • लांग कोड रणनीतिक क्षेत्र के उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह सिग्नल को भंग होने से रोकता है।

3.पर्यटन के लिए मणिपुर की गुफा से निकाले गए चमगादड़:अध्ययन

  • मणिपुर में एक प्राणीशास्त्रीय अध्ययन से पता चला है कि मणिपुर में पुरापाषाण कालीन गुफा प्रणाली से चमगादड़ों की एक कॉलोनी को पर्यटकों के अनुकूल बनाने के लिए हटा दिया गया हैं।
  • खांगखुई (खांगखुई मंगसोर(Khangkhui Mangsor)) मणिपुर के उखरूल जिले में स्थित एक प्राकृतिक चूना पत्थर की गुफा है और पुरातत्वविदों द्वारा खुदाई से पता चला है कि यह गुफा पाषाण युग के समुदायों का घर था।
  • गौरतलब है कि जापानी सेना के मणिपुर और उससे सटे नागालैंड की ओर बढ़ने के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा इस गुफा को आश्रय के रूप में भी इस्तेमाल किया गया था।
  • इसके अलावा इस गुफा में राइनोलोफिडे और हिप्पोसाइडरिडे परिवारों से संबंधित चमगादड़ों की एक बड़ी आबादी भी रहती थी।
  • जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (Zoological Survey of India (ZSI)) के शोधकर्ताओं द्वारा किये गए एक अध्ययन से अब पता चला है कि वर्ष 2016-17 के बाद खांगखुई गुफा को “अधिक पर्यटक-अनुकूल” बनाने के लिए वहां से चमगादड़ों को मार दिया गया और उन्हें वहां से बेदखल कर दिया गया।
  • ZSI के शोधकर्ताओं ने पहले वर्ष 2019 और वर्ष 2021 में दो व्यापक क्षेत्र सर्वेक्षणों के दौरान खांगखुई गुफा में बेलीथ के हॉर्सशू चमगादड़ (Blyth’s horseshoe bat) को रिकॉर्ड किया था।
  • यह चमगादड़ मणिपुर के स्तनधारी जीवों में शामिल 12 नई प्रजातियों में से एक हैं। अन्य में ऐश राउंडलीफ चमगादड़, इंटरमीडिएट हॉर्सशू चमगादड़, नॉर्दर्न वूली हॉर्सशू चमगादड़, ग्रेटर फाल्स वैम्पायर चमगादड़, हेयरी फेस्ड चमगादड़, हॉजसन चमगादड़, हटन ट्यूब-नोज्ड चमगादड़ और राउंड-ईयर ट्यूब-नोज्ड चमगादड़ शामिल थे।
  • नवीनतम अध्ययन मणिपुर में उन स्थानों पर भी ध्यान देता है जहां चमगादड़ को उनके औषधीय गुणों के लिए या प्रोटीन के पूरक स्रोत के रूप में खाया जाता है और चमगादड़ के लिए एक और गंभीर खतरा अवैध पक्षी जाल रखना है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के कार्य हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. यह शेयरों की व्‍यापक खरीद और कंपनियों के अधिग्रहण की निगरानी करता है।
  2. यह इनसाइडर ट्रेडिंग (भेदिया कारोबार) को प्रतिबंधित करता है।
  3. यह विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करता है।
  4. यह भुगतान और निपटान प्रणाली की निगरानी करता है।
  5. यह स्टॉक एक्सचेंजों का लेखा-जोखा और जांच पड़ताल करता है।

विकल्प:

(a) केवल 1 और 4

(b) केवल 1, 2 और 5

(c) केवल 2, 3, 4 और 5

(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: यह शेयरों के वास्तविक अधिग्रहण और कंपनियों के अधिग्रहण की निगरानी करता है।
  • कथन 2 सही है: इसमें अंदरूनी व्यापार पर अंकुश लगाने की शक्ति है।
  • कथन 3 सही नहीं है: भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक है और इनमे उनके निवेश के प्रबंधन की जिम्मेदारी निहित है।
  • कथन 4 सही नहीं है: एक केंद्रीय बैंक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका में भुगतान और निपटान प्रणाली की निगरानी और परिचालन करना है।
  • कथन 5 सही है: स्टॉक एक्सचेंजों का लेखा-जोखा और जांच पड़ताल करता है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. अकबर के शासनकाल के पहले कुछ वर्षों के दौरान, मीर खां ने उसके राज्य-संरक्षक के रूप में कार्य किया था।
  2. अकबर ने साम्राज्य को 12 सूबों या प्रांतों में विभाजित किया था।
  3. अकबर ने राजपूत राजकुमारी जोधा बाई से शादी की, जो आमेर के राजा भारमल की बेटी थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) 1, 2 और 3

(d) कोई भी नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: अकबर के शासनकाल के पहले कुछ वर्षों के दौरान, बैरम खान ने उसके राज्य-संरक्षक के रूप में कार्य किया था।
  • कथन 2 सही है: 1580 ई. में, अकबर ने अपने साम्राज्य को 12 सूबों या प्रांतों में विभाजित किया था। ये थे बंगाल, बिहार, इलाहाबाद, अवध, आगरा, दिल्ली, लाहौर, मुल्तान, काबुल, अजमेर, मालवा और गुजरात।
  • कथन 3 सही है: अकबर ने राजपूत राजकुमारी जोधा बाई से शादी की, जो आमेर के राजा भारमल की बेटी थी।

प्रश्न 3. हाल ही में चर्चा में रही खांगखुई मांगसोर गुफा (Khangkhui Mangsor Cave) किस राज्य में स्थित है? (स्तर – कठिन)

(a) असम

(b) मणिपुर

(c) त्रिपुरा

(d) अरुणाचल प्रदेश

उत्तर: b

व्याख्या:

  • खांगखुई (खांगखुई मंगसोर) मणिपुर के उखरूल जिले में स्थित एक प्राकृतिक चूना पत्थर की गुफा है।
  • पुरातत्वविदों द्वारा खुदाई से पता चला है कि गुफा पाषाण युग के समुदायों का घर था।

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)

  1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास भारत में बैंक नोट जारी करने का ‘अनन्य अधिकार’ है।
  2. सिक्का-निर्माण अधिनियम, 2011 भारतीय रिजर्व बैंक को विभिन्न मूल्यवर्ग के सिक्कों को डिजाइन करने और ढालने की शक्ति प्रदान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) दोनों

(d) कोई भी नहीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: रिजर्व बैंक के पास भारत में बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार है।
  • कथन 2 सही नहीं है: सिक्का अधिनियम, 2011 के अनुसार भारत सरकार विभिन्न मूल्यवर्ग के सिक्कों का डिजाइन करने और ढलाई करने के लिए जिम्मेदार है।

प्रश्न 5. परिवर्तनीय बांड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (PYQ (2022)) (स्तर – मध्यम)

  1. चूँकि बॉन्ड को इक्विटी के लिए बदलने का विकल्प है, परिवर्तनीय बॉन्ड अपेक्षाकृत कम ब्याज दर का भुगतान करते हैं।
  2. इक्विटी में बदलने का विकल्प बॉन्ड-धारक को बढ़ती हुई उपभोक्ता कीमतों से सहलग्नता (इंडेक्सेशन) की मात्रा प्रदान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: एक परिवर्तनीय बांड एक इक्विटी और ऋण साधन के बीच का मिश्रण है और जैसा कि इक्विटी के लिए बांड के आदान-प्रदान करने का विकल्प है, क्योंकि परिवर्तनीय बांड कम ब्याज दर का भुगतान करते हैं।
  • कथन 2 सही है: इक्विटी के लिए बदलने का विकल्प बॉन्ड-धारक को बढ़ती हुई उपभोक्ता कीमतों से सहलग्नता (इंडेक्सेशन) की मात्रा प्रदान करता है,क्योंकि इक्विटी की कीमतें दिए गए ब्याज से व्यापक रूप से भिन्न हो सकती हैं और इसमें अंतर को मुद्रास्फीति के लिए बचाव के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. GM फसलों को अनुमति देने में भारत की अनिच्छा विज्ञान से ज्यादा राजनीति पर आधारित है। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस-3; पर्यावरण)

प्रश्न 2. भौतिक प्रतीकों से ज्यादा हमारी सोच में उपनिवेशवाद का वास है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? विस्तार से व्याख्या कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस-1; संस्कृति)