28 अगस्त 2022 : समाचार विश्लेषण
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A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय संबंध
शासन
C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E.सम्पादकीय: शासन :
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G.महत्वपूर्ण तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
संयुक्त राष्ट्र परमाणु संधि
अंतर्राष्ट्रीय संबंध :
विषय: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: परमाणु निरस्त्रीकरण का महत्व और चुनौतियां
संदर्भ: हाल ही में, रूस ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा संयुक्त घोषणा को अपनाने पर रोक लगा दी।
भूमिका:
- रूस ने यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों, विशेष रूप से ज़ापोरिज्जिया के आसपास सैन्य गतिविधियों पर गंभीर चिंता का हवाला देते हुए मसौदे पर आपत्ति व्यक्त की।
- 2015 में पिछली समीक्षा में भाग लेने वाले भागीदार सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थापना पर गंभीर मतभेदों के कारण एक समझौते पर पहुंचने में भी विफल रहे थे।
- NPT समीक्षा सम्मेलन का आयोजन प्रत्येक पांच वर्ष में होता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई।
अप्रसार संधि:
- परमाणु अप्रसार संधि परमाणु हथियारों और हथियार प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकने, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देने और परमाणु निरस्त्रीकरण व सामान्य और पूर्ण निरस्त्रीकरण प्राप्त करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
- इसके 191 हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा हर पांच साल में इसकी समीक्षा की जाती है, और इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।
- अंतिम दस्तावेज को सम्मेलन में सभी देशों के अनुमोदन की आवश्यकता थी जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से संधि के पक्षकार हैं।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
आर्कटिक में रूस-चीन सहयोग
अंतर्राष्ट्रीय संबंध :
विषय: क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
मुख्य परीक्षा: विश्व व्यवस्था और विदेश नीति दृष्टिकोण में बदलाव
संदर्भ: हाल ही में नाटो महासचिव ने रूस के सैन्य गठन और आर्कटिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती रुचि पर अपनी चिंता व्यक्त की।
आर्कटिक में रूस और चीन के प्रतिस्पर्धी रणनीतिक दृष्टिकोण:
- आर्कटिक के पिघलने से इसकी भू-राजनीतिक प्रमुखता और संभावित आर्थिक व्यवहार्यता में वृद्धि हुई है।
- रूस और चीन भविष्य में इस क्षेत्र के प्रमुख देश के रूप में उभरे हैं। औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह से आर्कटिक मामलों पर उनकी साझेदारी एक बदलाव के क्षितिज पर है, जिसमें आवश्यक नहीं कि संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हो।
- रूस स्वेज नहर के माध्यम से दक्षिणी मार्गों के विकल्प के रूप में अपने साइबेरियाई तट के साथ उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास की वकालत कर रहा है और आर्कटिक महासागर में संचालन करने में सक्षम एकमात्र आइसब्रेकर के निर्माण में निवेश कर रहा है।
- इससे पहले 2022 में दोनों देश आर्कटिक के सतत विकास के लिए व्यावहारिक सहयोग को तेज करने पर सहमत हुए थे।
- चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ में आर्कटिक भी शामिल है, जहां चीन ग्लोबल वार्मिंग के माध्यम से खुली शिपिंग लेन विकसित करके ‘पोलर सिल्क रोड’ का विकास करना चाहता है।
- रूस के पास दुनिया के प्रमुख आइसब्रेकर का सबसे बड़ा बेड़ा है। चीन भी हाल ही में MOSAiC अभियान में सहायता के लिए अपना नया आइसब्रेकर,क्सुएलॉन्ग-2 ( Xuelong 2) लेकर आया है।
नाटो की चिंता:
- रूसी मिसाइलों और बमवर्षकों के लिए उत्तरी अमेरिका का सबसे छोटा रास्ता उत्तरी ध्रुव के ऊपर से गुजरता है।
- रूस ने एक नया आर्कटिक कमांड स्थापित किया है और सैकड़ों नए और पूर्व सोवियत युग के आर्कटिक सैन्य स्थल खोले हैं, जिनमें हवाई क्षेत्र और गहरे पानी के बंदरगाह शामिल हैं।
- रूस नए ठिकानों, नई हथियार प्रणालियों के साथ अपनी सेना का निर्माण कर रहा है और हाइपरसोनिक मिसाइलों सहित अपने सबसे उन्नत हथियारों का परीक्षण करने के लिए आर्कटिक का उपयोग कर रहा है।
- चीन ने स्वयं को “आर्कटिक सन्निकट” राज्य भी घोषित कर दिया है।
- चीन दुनिया का सबसे बड़ा आइसब्रेकर बनाने की भी योजना बना रहा है तथा आर्कटिक में ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अनुसंधान परियोजनाओं में निवेश कर रहा है ताकि खनिज संसाधनों और नए शिपिंग मार्गों का पता लगाया जा सके क्योंकि बढ़ते तापमान के साथ बर्फ कम हो रही है।
निष्कर्ष:
आर्कटिक क्षेत्र यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। फिनलैंड और स्वीडन के शामिल होने के साथ, आठ आर्कटिक राज्यों में से सात नाटो के सदस्य होंगे। इसलिए नाटो आर्कटिक में बढ़ती उपस्थिति और नई क्षमताओं में निवेश के साथ रूस और चीन को जवाब देने की योजना बना रहा है।
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सारांश: आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती उपस्थिति और व्यावहारिक सहयोग नाटो के मूल्यों और हितों के लिए एक चुनौती बन रहा है। जलवायु परिवर्तन आर्कटिक को सेनाओं के लिए अधिक सुलभ बना रहा है और आर्कटिक के प्रति देशों के दृष्टिकोण को बदल दिया है। |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
क्रिप्टोकरेंसी विनियमन
शासन :
विषय: सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप
मुख्य परीक्षा: क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी चुनौतियां
संदर्भ: सरकारी खुफिया एजेंसियां क्रिप्टो सौदों पर प्रासंगिक कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डाल रही हैं।
भूमिका:
- हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में सरकारी जांच और खुफिया एजेंसियों ने केंद्र सरकार से मौजूदा नियामक तंत्र के तहत क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।
- इससे एक्सचेंजों के लिए पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ संदिग्ध लेनदेन के बारे में जानकारी को सक्रिय रूप से साझा करना अनिवार्य हो जाएगा।
- क्रिप्टो एक्सचेंजों को संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट करने के लिए कोई विशिष्ट कानून नहीं है।
क्रिप्टो एक्सचेंजों के साथ मुद्दे:
- पिछले कुछ महीनों में जांच से पता चला है कि चीन की कई शेल कंपनियां, जो भारत में डिजिटल ऋण मोबाइल ऐप संचालित करती हैं, ने क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से भारत से बाहर धन प्रेषित किया है।
- भारत में चीन से संचालित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों की स्वामित्व जानकारी किसी भी रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है।
- फिलहाल खुफिया अधिकारी ऐसे एक्सचेंजों से आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद ही सूचना मांग सकते हैं। FIR के अभाव में इन एक्सचेंजों से महत्वपूर्ण सूचना नहीं मांगी जा सकी।
- अधिकांश एक्सचेंजों का भौतिक कार्यालय नहीं है और डेटा भंडारण क्लाउड-आधारित था।
- एजेंसियां एक्सचेंजों से सूचना प्राप्त करने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के समान शक्तियों की मांग कर रही थीं।
भावी कदम:
- भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के मौद्रिक और राजकोषीय स्वास्थ्य के लिए “अस्थिर प्रभाव” का हवाला देते हुए क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित या प्रतिबंधित करने वाला कानून केवल तभी प्रभावी हो सकता है जब किसी प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय समझौता हो।
- क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने के बजाय, यह सुनिश्चित करने के लिए विनियमन की आवश्यकता है कि क्रिप्टोकरेंसी का दुरुपयोग न हो, और अनिश्चित निवेशकों को बाजार की अत्यधिक अस्थिरता और संभावित घोटालों से बचाव हो ।
सारांश: क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से जानकारी प्राप्त करने की शक्ति के साथ जांच एजेंसियों को विनियमित और सशक्त बनाने की तत्काल आवश्यकता है और उन्हें पुलिस या खुफिया एजेंसियों के साथ संदिग्ध लेनदेन पर खुफिया जानकारी साझा करना चाहिए।
संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
शासन
क्या पेगासस मैलवेयर रिपोर्ट पर स्पष्टता है?
विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू।
प्रारंभिक परीक्षा: पेगासस स्पाइवेयर.
मुख्य परीक्षा: पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग से जुड़ी प्रमुख चिंताएं।
संदर्भ: पेगासस मामले में पैनल की रिपोर्ट पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी।
पेगासस मामले के बारे में विवरण:
- जुलाई 2021 में दुनिया भर के विभिन्न मीडिया कंपनियों द्वारा पेगासस प्रोजेक्ट की सूचना दी गई थी और भारत पर कम से कम 40 संवैधानिक पद धारकों, कैबिनेट मंत्रियों और पत्रकारों की निगरानी करने का आरोप लगा था।
- रिपोर्ट का आधार लगभग पचास हजार संपर्क नंबरों का एक डेटाबेस था, जो एक पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल को प्राप्त हुआ था। ये संपर्क विवरण एनएसओ समूह के ग्राहकों के कथित हित के थे। इस सॉफ्टवेयर का विकास NSO द्वारा किया गया है।
- द गार्जियन के अनुसार, एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब ने डेटाबेस में 67 भारतीय फोन नंबरों की जांच की और यह पाया गया कि 67 में से 23 प्रभावित पाए गए और 14 में घुसपैठ के प्रयास के संकेत मिले।
- जैसा कि पेगासस के एक साइबर हथियार होने की सूचना दी गई है, इसलिए इसे केवल एक अधिकृत सरकार (इजरायल के कानून के तहत) को उपलब्ध कराया जा सकता है, इस प्रकार ग्राहक देशों की अधिकृत सरकारों पर उंगलियां उठती हैं।
पैनल संबंधित विवरण:
- उच्चतम न्यायालय द्वारा मांगे गए एक विस्तृत हलफनामे को केंद्र ने अस्वीकार कर दिया और इसलिए एक पैनल का गठन किया गया।
- इस पैनल में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय तकनीकी समिति शामिल थी।
- पैनल ने प्रोटोकॉल के अपने सेट का मसौदा तैयार किया और पेगासस हेतु फोन की जांच के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया।
- पेगासस मामले पर विचार करने के लिए गठित पैनल ने बताया कि इजरायल मूल के स्पाइवेयर के उपयोग पर 29 सेल फोन से किसी भी प्रकार का निर्णायक साक्ष्य नहीं निकाला जा सकता है।
पैनल की रिपोर्ट:
- रिपोर्ट में तीन उप-भाग थे:
- सेल फोन के विश्लेषण की तकनीकी।
- तकनीकी समिति का रिकॉर्ड।
- पर्यवेक्षक (न्यायाधीश) की रिपोर्ट।
- पैनल ने इन दो प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया:
- तकनीकी पहलू, स्पाइवेयर के उपयोग के आरोपों की जांच। यह पाया गया कि 29 में से 5 फोन में मैलवेयर के संकेत थे, लेकिन विशेष रूप से पेगासस के नहीं थे।
- साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और निजता अधिकारों से संबंधित मौजूदा कानूनों का मूल्यांकन।
केंद्र का रुख:
- केंद्र से एक विस्तृत हलफनामा की मांग करने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश को पहले सुनवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया गया था।
- केंद्र ने मांग की कि मामले की जांच करने वाला पैनल उसके अधीन हो। उच्चतम न्यायालय ने पक्षपात की संभावना के कारण मांग को अस्वीकार कर दिया।
- मुख्य न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान केंद्र की ओर से सहयोग में कमी थी।
सारांश:
भारत के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने पैनल की रिपोर्ट से उल्लेख किया है कि केंद्र जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। हालांकि, यह भी बताया गया कि जासूसी का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला। रिपोर्ट के विस्तृत अध्ययन के बाद पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
शासन:
ट्विटर के व्हिसल ब्लोअर के क्या दावे हैं?
विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू।
मुख्य परीक्षा: डेटा गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ।
संदर्भ: पूर्व ट्विटर कर्मचारी व व्हिसल ब्लोअर द्वारा भारत सरकार के खिलाफ की गई शिकायत।
विवरण:
- वाशिंगटन पोस्ट अखबार और सीएनएन ने बताया कि ट्विटर के एक पूर्व कर्मचारी (सुरक्षा प्रमुख के रूप में काम करने वाले) व व्हिसलब्लोअर द्वारा शिकायत दर्ज की गई थी।
- यह शिकायत अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग में दर्ज की गई थी।
- इस शिकायत में भारत सरकार पर सोशल मीडिया नेटवर्क को सरकार द्वारा निर्धारित एजेंट को काम पर रखने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है, जिससे सरकार की संवेदनशील उपयोगकर्ता जानकारी तक पहुंच हो सकती है।
रिपोर्ट का विवरण:
- प्रमुख पत्रिकाओं/समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टें ट्विटर की कमजोरियों और सुरक्षा मुद्दों से संबंधित प्रकटीकरण दस्तावेज़ से संबंधित हैं जो पूर्व सुरक्षा अधिकारी द्वारा यू.एस. सरकार की समितियों और एजेंसियों को भेजी गई थीं।
- दस्तावेजों में लगाए गए विभिन्न आरोप इस प्रकार हैं:
- गोपनीयता, सत्यनिष्ठा और सुरक्षा के संबंध में पूर्व नियोक्ता द्वारा दिए गए झूठे बयान। इसके अलावा उन पर निवेशकों और निदेशक मंडल को धोखा देने का भी आरोप लगाया गया है।
- इसमें ट्विटर के दावों की सटीकता के बारे में टेस्ला के संस्थापक के संदेह का भी समर्थन किया गया है, ज्ञात हो कि उन्होंने ट्विटर के 5% से कम खाते फर्जी होने के डाटा पर संदेह जताया था।
- यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्विटर सिस्टम में बहुत से लोगों को संवेदनशील डेटा तक पहुंचने की अनुमति है। और यह सर्वर कमजोरियों और मूलभूत संरचना मुद्दों से भी ग्रस्त है।
- रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि विदेशी खुफिया संस्थाओं द्वारा ट्विटर को प्रभावित करने की कई घटनाएं लोकतांत्रिक शासन के सामने मौजूद खतरों में शामिल हैं। इस आरोप में भारत सरकार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
रिपोर्ट पर प्रतिक्रियाएं:
- ट्विटर ने खराब प्रदर्शन और अयोग्य नेतृत्व के कारण पूर्व सुरक्षा प्रमुख को बर्खास्त करने का कारण बताते हुए इन आरोपों का खंडन किया है। ट्विटर डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं में विसंगतियों की झूठी कहानियों को भी खारिज करता है।
- ट्विटर ने भारत सरकार की संलिप्तता पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की है।
- भारत में सरकारी अधिकारियों ने पूरे मामले पर कुछ भी टिप्पणी नहीं की है।
- सीएनएन की रिपोर्ट ने यह भी मुद्दा उठाया है कि आरोप में संदर्भित “एजेंट” एक शिकायत अधिकारी हो सकता है, जिसे भारत में लागू किए गए नए आईटी नियमों के अनुसार सभी महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियुक्त किया जाना आवश्यक है। हालांकि, इस संबंध में न तो सरकार की ओर से और न ही इस सोशल मीडिया कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान दिया गया है।
- भारत में सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति ने, वास्तव में, ट्विटर से भारत में कर्मचारियों की संख्या के साथ-साथ उन कर्मचारियों की संख्या के बारे में पूछा, जिन्होंने पहले एक अलग रिपोर्ट में सरकार के साथ काम किया था।
सारांश:
- ट्विटर के पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप से डेटा गोपनीयता और डेटा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूरे मामले को सभी दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है जब सभी हितधारक अपने तर्क रखे। सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति को भी इस मामले को तत्काल आधार पर देखना चाहिए।
प्रीलिम्स तथ्य
- ज़ापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र
विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय घटनाएं
प्रारंभिक परीक्षा: समाचारों में महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्रों, नदियों का स्थान
संदर्भ: यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र, ज़ापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र, हाल ही में चर्चा में आ गया।
- रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के परमाणु संयंत्र का संपर्क, रूसी गोलाबारी के कारण राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से कट गया था।
- यह संयंत्र ग्रिड से जुड़ा हुआ है और यूक्रेन की जरूरतों के लिए बिजली का उत्पादन करता है।
- इसका निर्माण सोवियत संघ द्वारा एनरहोदर शहर के पास, नीपर नदी पर मौजूद काखोवका जलाशय के दक्षिणी किनारे पर किया गया था।
- यह सभी यूक्रेनी एनपीपी द्वारा उत्पन्न कुल बिजली का लगभग 40% और यूक्रेन के वार्षिक बिजली उत्पादन का पांचवां हिस्सा प्रदान करता है।

चित्र स्त्रोत: BBC
- माल्विनास क्षेत्रीय मुद्दा
विषय; महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय घटनाएं
प्रारंभिक परीक्षा: महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्रों की अवस्थिति, चर्चा में नदियाँ
संदर्भ: भारत ने दक्षिण अटलांटिक महासागर में अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक क्षेत्रीय मामले के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय वार्ता के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
मुख्य विवरण:
- हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अर्जेंटीना की अपनी यात्रा के दौरान माल्विनास या फ़ॉकलैंड क्षेत्रीय मुद्दे सहित विभिन्न विषयों पर आधिकारिक चर्चा की।
- दोनों देशों ने सामरिक क्षेत्रों में सैन्य आदान-प्रदान और व्यापार बढ़ाने पर संवाद किया।
- दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में भुगतान तंत्र के विकास की संभावनाओं का पता लगाने के लिए “सहमत” हुए।
फ़ॉकलैंड आइलैंड:
- फ़ॉकलैंड द्वीप समूह, जिसे माल्विनास द्वीप समूह या स्पैनिश इस्लास माल्विनास के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण अटलांटिक महासागर में एक स्वशासी ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है। यह दक्षिण अमेरिका के सबसे दक्षिणी बिंदु से लगभग 300 मील (480 किमी) उत्तर पूर्व में और मैगलन जलडमरूमध्य के पूर्व में इतनी ही दूरी पर स्थित है।

चित्र स्त्रोत: polgeonow.com
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. डुगोंग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह एक समुद्री स्तनपायी है।
- यह भारत के लिए स्थानिक है तथा मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, पाक (Palk) खाड़ी एवं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है।
- डुगोंग को संकटग्रस्त प्रजातियों की अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में गंभीर रूप से संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 3
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 सहीहै, डुगोंग, जिसे ‘समुद्री गाय’ के नाम से भी जाना जाता है, सिरेनिया की चार जीवित प्रजातियों में से एक है। यह शाकाहारी स्तनपायी की एकमात्र प्रजाति है जो विशेष रूप से समुद्र में रहती है।
- कथन 2 गलत है, ये 30 से अधिक देशों में पाए जाते हैं और भारत में मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, पाक खाड़ी और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में देखे जाते हैं।
- कथन 3 गलत है, इन्हें IUCN की रेड लिस्ट में सुभेद्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और भारत में वन्य (जीवन) संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं।

चित्र स्त्रोत:WWF
प्रश्न 2. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही है?
- इसे राज्यों की विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच का अधिकार है।
- इस एजेंसी का मुख्यालय नई दिल्ली में है और भारत के सभी राज्यों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
- इस एजेंसी को संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने का अधिकार है।
विकल्प:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है, NIA देश में केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी है। इसकी स्थापना 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच से निपटने के लिए की गई थी।
- कथन 2 गलत है, इस एजेंसी का मुख्यालय नई दिल्ली में है और पूरे भारत में इसके 8 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। इसका नेतृत्व एक महानिदेशक (एक आईपीएस अधिकारी) करते हैं।
- कथन 3 सही है, NIA अधिनियम और UAPA अधिनियम में हाल के संशोधनों ने एनआईए को संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार दिया है।
प्रश्न 3. वैकल्पिक ईंधन के रूप में एथेनॉल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह उन फसलों और पौधों के किण्वन द्वारा तैयार किया जाता है जो शर्करा (sugar) से भरपूर होते हैं या जिनमें सेल्यूलोज और स्टार्च में परिवर्तित होने की क्षमता होती है।
- इसका ऊष्मीय मान पेट्रोल की तुलना में कम होता है।
- यह पानी सोखने की अपनी क्षमता के कारण अत्यधिक संक्षारक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: d
व्याख्या:
- इथेनॉल प्रमुख जैव ईंधन में से एक है, जिसका उत्पादन स्वाभाविक रूप से खमीर द्वारा शर्करा के किण्वन द्वारा या एथिलीन हाइड्रेशन जैसी पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है। इसका अनुप्रयोग चिकित्सा क्षेत्र में एंटीसेप्टिक और कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है। वैकल्पिक ईंधन स्रोत होने के अलावा, इसका उपयोग रासायनिक विलायक के रूप में और कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है।
- इथेनॉल ईंधन का कैलोरी मान पेट्रोल की तुलना में कम होता है।
- इथेनॉल-गैसोलीन मिश्रण (EGB) इथेनॉल की उपस्थिति के कारण बड़ी मात्रा में जल को आसानी से अवशोषित कर सकते हैं और परिणामस्वरूप ईंधन अधिक संक्षारक होता है।
प्रश्न 4. भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं?
- भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति का न्यायपालिका के शीर्ष पद पर एक वर्ष का न्यूनतम कार्यकाल होगा।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि वह पूर्व में अनिवार्य रूप से किसी भी उच्च न्यायालय या अधीनस्थ न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर रहा हो।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है। एक बार नियुक्त होने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश पूरे 65 वर्ष तक पद धारण करते हैं। कदाचार या अक्षमता के अलावा उन्हें उनके कार्यकाल के दौरान हटाया नहीं जा सकता है।
- कथन 2 गलत है। राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित न्यायविद को भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
प्रश्न 5. भारत के किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
- वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में राज्यपाल सदन के सदस्यों के लिए रूढि़गत संबोधन करता है।
- जब किसी विशिष्ट विषय पर राज्य विधानमंडल के पास कोई नियम नहीं होता, तो उस विषय पर वह लोक सभा के नियम का पालन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176 (1) के तहत, राज्यपाल विधायी शक्तियों के अनुसार प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र में राज्य विधानमंडल को संबोधित कर सकता है।
- कथन 2 सही है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 208 में दी गई प्रक्रिया के नियमों के अनुसार
- राज्य विधानमंडल का सदन अपनी प्रक्रिया और अपने कार्य के संचालन के विनियमन के लिए नियम बना सकता है।
- किसी विशेष मामले पर नियम न होने पर राज्य विधायिका लोकसभा के नियमों का पालन करती है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
- मानव अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता पर पेगासस स्पाइवेयर के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए और निगरानी को रोकने के लिए पैनल द्वारा की गई सिफारिशों पर चर्चा कीजिए। (10 अंक; 150 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -2; राजव्यवस्था एवं शासन)
- अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम के बीच फ़ॉकलैंड द्वीप विवाद पर टिप्पणी कीजिए। (10 अंक; 150 शब्द) (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -2; अंतर्राष्ट्रीय संबंध)