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14 दिसंबर 2023 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए सुधार उपाय
  2. संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षा
  3. तीन दिवसीय जीपीएआई शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में संपन्न हुआ
  4. राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य प्रोफाइल अध्ययन के अंतर्गत देश भर के 20 चयनित शहरों में मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का आकलन करने के लिए परियोजनाएं मंजूर
  5. शहरी विकास में नवाचार
  6. असंगठित श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए नये उपाय

1. देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए सुधार उपाय

सामान्य अध्ययन: 3

आर्थिक विकास

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय

प्रारंभिक परीक्षा: मिशन ‘ड्रोन शक्ति’

मुख्य परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था को आकार देने में हालिया पहलों/योजनाओं की भूमिका

प्रसंग:

  • केंद्र सरकार ने देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक सुधार उपाय किए हैं।

विवरण:

  • ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए किए गए अनेक सुधार उपायों के तहत कुछ इस प्रकार हैं:
    • उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021 को 25 अगस्त, 2021 को अधिसूचित किया गया है।
    • ड्रोन एयरस्पेस मैप 24 सितंबर 2021 को प्रकाशित किया गया है, जिससे 400 फीट तक उड़ान भरने वाले ड्रोन के लिए लगभग 90 प्रतिशत भारतीय हवाई क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में खोल दिया गया है।
    • ड्रोन और ड्रोन घटकों के उत्‍पादन से जुड़ी प्रोत्‍साहन (पीएलआई) योजना 30 सितंबर 2021 को अधिसूचित की गई है।
    • यूएएस ट्रैफिक मैनेजमेंट (यूटीएम) पॉलिसी फ्रेमवर्क 24 अक्टूबर 2021 को प्रकाशित किया गया है।
    • केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा 22 जनवरी 2022 को कृषि ड्रोन की खरीद के लिए मौद्रिक अनुदान कार्यक्रम की घोषणा की गई थी।
    • ड्रोन नियम, 2021 के अंतर्गत सभी आवेदन पत्र 26 जनवरी 2022 को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन कर दिए गए हैं।
    • ड्रोन प्रमाणन योजना 26 जनवरी 2022 को अधिसूचित की गई है।
    • 1 फरवरी 2022 को केंद्रीय बजट के हिस्से के रूप में ड्रोन स्टार्ट-अप का समर्थन करने और ड्रोन को सर्विस के रूप में (डीआरएएएस) बढ़ावा देने के लिए मिशन ‘ड्रोन शक्ति’ की घोषणा की गई है।
    • ड्रोन आयात नीति को 9 फरवरी 2022 को अधिसूचित किया गया है, जिसमें विदेशी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध है और ड्रोन घटकों के आयात को मुक्त कर दिया गया है।
    • ड्रोन पायलट लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त करते हुए ड्रोन (संशोधन) नियम, 2022 को 11 फरवरी 2022 को अधिसूचित किया गया है। अब रिमोट पायलट सर्टिफिकेट डीजीसीए-अधिकृत रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) द्वारा जारी किया जाता है जो ड्रोन संचालित करने के लिए रिमोट पायलट के लिए पर्याप्त है।
    • ड्रोन (संशोधन) नियम, 2023 को 27 सितंबर 2023 को अधिसूचित किया गया है, जो रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (आरपीसी) जारी करने के लिए आवेदक के पास भारतीय पासपोर्ट की अनुपलब्धता के मामले में एक वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करता है। अब, सरकार द्वारा जारी पहचान-पत्र और मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पते का प्रमाण आरपीसी जारी करने के लिए पर्याप्त होंगे।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1. संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षा

  • 2013 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया था कि 92 संरक्षित स्मारक गायब पाए गए थे।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पुराने अभिलेखों, राजस्व मानचित्रों और प्रकाशित रिपोर्टों के संदर्भ के आधार पर लापता स्मारकों का पता लगाने/पहचान करने के लिए जोरदार प्रयास किए गए थे।
  • इस अभ्यास ने सार्थक परिणाम दिए और 92 स्मारकों में से 74 स्मारकों का पता लगा लिया गया है।
  • संरक्षित स्मारकों और स्थलों पर निगरानी के लिए मल्टी टास्किंग स्टाफ तैनात किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, चुनिंदा स्मारकों पर निजी सुरक्षा कर्मियों के साथ-साथ सीआईएसएफ भी उपलब्ध कराया जाता है और समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों की व्यापक जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

2. तीन दिवसीय जीपीएआई शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में संपन्न हुआ

  • ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जीपीएआई) के अध्यक्ष भारत ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में जीपीएआई शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की।
  • पिछले तीन दिनों में लगभग 30 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें जीपीएआई, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, उद्योग/स्टार्टअप और शिक्षा जगत के वैश्विक एआई विशेषज्ञों ने भाग लिया।
  • इनमें से कुछ सत्र क्लोज डोर मीटिंग्स में आयोजित किए गए जिनमें जीपीएआई के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल थे।
  • अन्य सत्र सार्वजनिक रूप से आयोजित किए गए और व्यापक भागीदारी के लिए लाइव स्ट्रीम किए गए।
  • शिखर सम्मेलन में 22,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया और इनमें से 15,000 से अधिक एआई उत्साही लोगों ने शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
  • जीपीएआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्राप्त प्रमुख परिणाम इस प्रकार हैं:
  • जीपीएआई नई दिल्ली डिक्लियरेशन ने जीपीएआई सदस्यों के बीच सुरक्षित, संरक्षित और भरोसेमंद एआई को आगे बढ़ाने और जीपीएआई परियोजनाओं की स्थिरता का समर्थन करने की प्रतिबद्धता पर आम सहमति बनाई।
  • प्रधानमंत्री ने एआई के नैतिक उपयोग के लिए एक वैश्विक ढांचा तैयार करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
  • एआई प्रतिभा और एआई-संबंधित विचारों के क्षेत्र में मुख्य भागीदार के रूप में भारत पर फोकस किया गया।
  • भारत एआई इनोवेशन के लिए ग्लोबल हब के रूप में चमक रहा है।
  • भारत ने जीपीएआई नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के एक कार्यक्रम में एआई के लिए सभी प्रमुख पहल – एआई पर संयुक्त राष्ट्र सलाहकार समूह, यूके एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन – को एक साथ लाया।
  • एआई रिसर्च एनालिटिक्स एंड नॉलेज डिसेमिनेशन प्लेटफॉर्म (एआईआरएडब्ल्यूएटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय कार्यक्रम और भारत में एआई इकोसिस्टम को आकार देने में इसकी भूमिका पर प्रमुखता से जोर दिया गया।
  • अनुसंधान समुदाय को उनके मूल और व्यावहारिक अनुसंधान को प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान किया गया।
  • एक्सपो में स्टार्टअप कम्युनिटी को अपने एआई उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया गया।
  • एआई पिच फेस्ट ने आगामी स्टार्टअप्स को अपने नवाचार और मूल्यवर्धित उत्पादों और सेवाओं के लिए पिच करने का अवसर प्रदान किया।
  • शिखर सम्मेलन ने एआई को आम जनता, विशेषकर युवाओं और छात्रों के बीच ले जाने के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण को सामने लाया तथा प्रौद्योगिकी, नीति, ढांचे, औद्योगिक, नैतिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से एआई पर नवीनतम प्रगति पर प्रकाश डाला।

3. राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य प्रोफाइल अध्ययन के अंतर्गत देश भर के 20 चयनित शहरों में मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का आकलन करने के लिए परियोजनाएं मंजूर

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य प्रोफाइल अध्ययन के अंतर्गत देश भर के 20 चयनित शहरों में मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का आकलन करने के लिए परियोजनाएं मंजूर की हैं।
  • राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य प्रोफाइल अध्ययन पर्यावरणीय कारकों का एक व्यापक मूल्यांकन है जो वायु प्रदूषण सहित एक विशिष्ट क्षेत्र के भीतर जन-स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    • चयनित तटीय और दक्षिण भारतीय शहरों में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए पारे के स्तरों और उसके जोखिम का अनुमान।
    • इलेक्ट्रॉनिक कचरे के ज्‍वलन के कारण पॉलीक्लोराइनेटेड बाइफिनाइल्स, डाइऑक्सिन और फ्यूरान जैसे डाइऑक्सिन की जैव-उपलब्धता।
    • तिरुचिरापल्ली शहर के लिए सह-लाभकारी कारकों के साथ वायु प्रदूषण का आकलन।
    • दिल्ली में किशोरों के स्वास्थ्य पर यातायात उत्सर्जन का प्रभाव।
    • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली के दौरान पटाखे फोड़ने से स्वास्थ्य पर प्रभाव।
    • आवासीय क्षेत्रों के निकट फसल अवशेष जलाने के कारण श्वसन स्वास्थ्य पर वायु गुणवत्ता का प्रभाव, जिससे श्वसन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
    • उत्तरी और पूर्वी भारत में ग्रामीण घरों में बायोमास ईंधन जलाने से निकलने वाले धुएं के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव।
    • जलवायु परिवर्तन पर वायु प्रदूषण के प्रभाव के संबंध में कोई अध्ययन नहीं किया गया है।
  • “राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम” (एनसीएपी) जनवरी 2019 में लॉन्‍च किया गया है जो वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है।
  • एनसीएपी के अंतर्गत आधार वर्ष 2017 की तुलना में 24 राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 131 शहरों में 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) सांद्रता में 20 से 30 प्रतिशत की कमी के लक्ष्यों को प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है।
  • इसके बाद, 2025-26 तक पीएम सांद्रता के संदर्भ में 40 प्रतिशत तक की कमी या राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को प्राप्त करने के लिए लक्ष्य को संशोधित किया गया है।

4. शहरी विकास में नवाचार

  • भारत सरकार ने शहरी विकास में स्टार्टअप्स और तकनीकी हस्तक्षेप को शामिल किया है।
  • तकनीक का उपयोग विभिन्न शहरी सेवाओं जैसे कि जल आपूर्ति प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आदि में प्रभावी ढंग से किया गया है।
  • शहर के यातायात की निगरानी और प्रबंधन के लिए विभिन्न स्मार्ट शहरों में एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (आईटीएमएस) लागू की गई है।
  • इस संबंध में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) और अमृत में स्टार्टअप और तकनीकी हस्तक्षेप को शामिल किया है।
  • स्टार्टअप्स और तकनीकी हस्तक्षेप के समावेश ने शहरों में उपयोग से संबंधित मामलों व समाधानों के संग्रह का वेबसाइटों पर प्रकाशन, सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों पर सार-संग्रह और दस्तावेज बनाकर भारत शहरी डेटा एक्सचेंज (आईयूडीएक्स) प्लेटफॉर्म पर सफल डेटा कहानियां प्रकाशित करके अभिनव समाधानों को अनुकरणीय मॉडल के रूप में लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।
  • स्टार्टअप्स और तकनीकी हस्तक्षेप के बीच जुड़ाव स्मार्ट खरीदारी दिशानिर्देशों के माध्यम से संचालित होता है, जो अभिनव स्टार्टअप्स समाधानों को अपनाने के लिए एक प्रगतिशील प्रक्रिया है।
  • ये दिशानिर्देश प्रगतिशील हैं और इसकी विशेषताओं को गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ने भी अपनाया है।

5. असंगठित श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए नये उपाय

  • असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के अनुसार, सरकार के लिए जीवन और विकलांगता सुरक्षा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा आदि से संबंधित मामलों पर उपयुक्त कल्याणकारी योजनाएं बनाकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य है।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:
    • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के माध्यम से जीवन और विकलांगता सुरक्षा प्रदान की जाती है।
    • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) योजना के अंतर्गत किसी भी कारण से बीमाधारक की मृत्यु होने पर 436/- रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर 2.00 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है।
    • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के अंतर्गत 20/- रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम पर आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण रूप से स्थायी विकलांगता के मामले में 2.00 लाख रुपये और दुर्घटना के कारण आंशिक स्थायी विकलांगता के लिए 1.00 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा मिलती है।
    • आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के माध्यम से अभाव और व्यवसाय मानदंड के अंतर्गत स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ का बीमा किया जाता है।
    • यह माध्यमिक और तृतीयक देखभाल संबंधी अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार 5.00 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा प्रदान करता है।
    • भारत सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था सुरक्षा प्रदान करने के लिए, वर्ष 2019 में असंगठित श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद 3000/- रुपये की मासिक पेंशन प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (पीएम-एसवाईएम) नाम से एक पेंशन योजना शुरू की थी।
    • उपरोक्त के अलावा, अन्य योजनाएं जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना के अंतर्गत एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली , महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना, दीन दयाल अंत्योदय योजना, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि भी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उनकी पात्रता मानदंडों के आधार पर उपलब्ध हैं।

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