24 सितंबर 2022 : PIB विश्लेषण
विषय-सूची:
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1.“ग्लोबल क्लीन एनर्जी एक्शन फोरम- 2022” में भारत ने स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों को बढ़ावा देकर निम्न कार्बन वाले भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
सामान्य अध्ययन: 2
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय:द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
मुख्य परीक्षा: ग्लोबल क्लीन एनर्जी एक्शन फोरम- 2022” में भारत की प्रतिबद्धता और इसके निहितार्थ
प्रसंग:
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने ग्लोबल क्लीन एनर्जी एक्शन फोरम- 2022” में स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों को बढ़ावा देकर एक निम्न कार्बन वाले भविष्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है।
विवरण:
- स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (CEM 13) और मिशन इनोवेशन (MI-7) की संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए, भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा, भारत 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 500 गीगावाट की स्थापित क्षमता हासिल करने और 2030 तक अनुमानित उत्सर्जन को मौजूदा स्तर से एक अरब टन कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा मिश्रण रणनीतियों में स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर एक बड़ा बदलाव, विनिर्माण क्षमता में बढ़ोतरी, ऊर्जा उपयोग दक्षता और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों सहित हाइड्रोजन के लिए नीतिगत प्रोत्साहन शामिल हैं। इसके अलावा, 2जी एथेनॉल पायलट, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए सहज जलवायु बॉक्स, हाइड्रोजन वैलीज, हीटिंग और कूलिंग वर्चुअल रिपॉजिटरी जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर काम करना है।
- भारत ने जैव आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक रोडमैप और एक रणनीतिक विकसित की है, जो 2025 तक 150 अरब डॉलर की होने जा रही है। इससे निम्न कार्बन वाले जैव आधारित उत्पादों के जैव विनिर्माण के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की सहूलियत मिलेगी। हाल में, भारत ने लागत प्रतिस्पर्धी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को संभव बनाने के लिए नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन भी शुरू किया है।
- भारत सरकार सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों के लिए वित्तपोषण सुनिश्चित कर रही है। मिशन इनोवेशन 2.0 के तहत ऐसी ही कल्पना की गई थी। केंद्रीय मंत्री ने सफल सार्वजनिक निजी भागीदारी के दो सफल उदाहरण दिए- पहला एक विशेष अनुसंधान एवं नवाचार (R&I) मॉडल प्लेटफॉर्म “क्लीन एनर्जी इंटरनेशनल इनक्यूबेशन सेंटर” है जिसकी स्थापना निजी भागीदार टाटा ट्रस्ट्स ने की। इसके परिणाम स्वरूप एकल शोधकर्ताओं की सहायता के लिए 20 से ज्यादा स्वच्छ ऊर्जा समाधान प्राप्त हो चुके हैं, जो एक अनूठी उपलब्धि है। दूसरा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और तेल विपणन कंपनियों (OMC) का संयुक्त केंद्र (ज्वाइंट सेंटर) है, जिसने 2जी एथेनॉल तकनीक विकसित की है।
- स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (CEM) व्यवस्था भारत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के विकास में उसके योगदान को प्रदर्शित करने का एक अवसर प्रदान करने में सक्षम रही है। उन्होंने कुछ बड़ी CEM पहलों का उल्लेख किया, जिनमें CEM का ग्लोबल लाइटिंग चैलेंज (GLC) अभियान, स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम, उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडी फॉर ऑल (उजाला) कार्यक्रम, द वन सन-वन वर्ड- वन ग्रिड पहल शामिल हैं।
2. खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि के शासी निकाय का नौवां सत्र
सामान्य अध्ययन: 3
कृषि:
विषय: कृषि क्षेत्र के उन्नयन हेतु की जा रही विभिन्न पहलें
मुख्य परीक्षा: शासी निकाय के नौंवे सत्र (GB9) के निष्कर्ष
प्रसंग:
- खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि (ITPGFRA) के शासी निकाय का नौवां सत्र (GB9) नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
विवरण:
- ऐतिहासिक रूप से पहली बार, भारतीय बीज उद्योग महासंघ (FSII) ने GB-9 बैठकों के दौरान भारतीय बीज क्षेत्र की ओर से पहले सामूहिक योगदान के तौर पर लाभ-साझाकरण कोष (BSF) में 20 लाख रुपये (25,000 अमेरिकी डॉलर) का योगदान दिया। दरअसल BSF इस संधि का वित्तपोषण तंत्र है जिसका उपयोग इस संधि के अनुबंधकारी पक्षों के बीच क्षमता निर्माण, संरक्षण और टिकाऊ उपयोग वाली परियोजनाओं को मजबूती देने के लिए किया जाता है।
- भारत के आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के डॉ. सुनील अर्चक को कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया के कृषि विभाग के डॉ. माइकल रायन के साथ ‘बहुपक्षीय सिस्टम के संवर्धन (MLS)’ पर कार्य समूह का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया। ITPGFRA की सफलता के लिए एक कार्यशील यूजर-फ्रेंडली और सरल MLS महत्वपूर्ण है। संवर्धन के इन तत्वों में – बढ़ा हुआ लाभ साझाकरण तंत्र, फसलों का विस्तार और MLS के माध्यम से उपलब्ध पहुंच के उपाय शामिल होंगे। साथ ही वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक, तकनीकी और नीतिगत वातावरण में बदलाव का संज्ञान लेना भी इसमें शामिल होगा।
- GB9 ने अनुबंध करने वाले पक्षों से राष्ट्रीय कानून के अनुसार, इस संधि के तहत किसानों के अधिकारों के राष्ट्रीय क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय उपायों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सीखे गए सबको की सूची को अपडेट करने का आह्वान किया। इसके अलावा, संधि सचिवालय से अनुरोध किया गया कि किसानों के अधिकारों को प्राप्त करने के लिए विकल्पों को प्रकाशित करें, जिसमें विकल्प श्रेणी 10 (किसानों के अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए कानूनी उपाय) भी शामिल हैं।
- ITPGFRA के GB9 में एक बड़ी सफलता ये रही कि अनुबंध करने वाले पक्षों ने भारत द्वारा किए गए हस्तक्षेप को स्वीकार किया जिसे कई अफ्रीकी देशों का समर्थन प्राप्त था। ये हस्तक्षेप वैश्विक स्तर पर जीन बैंकों के वित्तपोषण पर CGIAR प्रणाली के भीतर संस्थागत सुधार के कारण हुए असर के संबंध में और विशेष रूप से CIFOR-ICRAF और ICRISAT के संबंध में थे। GB ने अनुच्छेद 15 IARC जीन बैंक की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और जर्मप्लाज्म के वितरण तथा इस संधि व क्रॉप ट्रस्ट तंत्र को मजबूत करते हुए दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी बल दिया।
3. ‘मेक इन इंडिया’ के 8 वर्ष पूरे
सामान्य अध्ययन: 3
अर्थव्यवस्था:
विषय:भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
मुख्य परीक्षा:मेक इन इंडिया कार्यक्रम की उपलब्धियाँ
प्रसंग:
- भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम मेक इन इंडिया, जो निवेश को सुगम बनाता है, नवोन्मेश को बढ़ावा देता है, कौशल विकास में वृद्धि करता है तथा सर्वश्रेष्ठ विनिर्माण अवसंरचना का निर्माण करता है, के गौरवशाली आठ वर्ष पूर्ण हुए।
विवरण:
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में शुरू किया गया ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम देश को एक अग्रणी वैश्विक विनिर्माण तथा निवेश गंतव्य के रूप में रूपांतरित कर रहा है। मेक इन इंडिया से 27 सेक्टरों में पर्याप्त प्रगति हुई है। इनमें विनिर्माण तथा सेवाओं जैसे रणनीतिक क्षेत्र भी शामिल हैं।
- विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए, भारत सरकार ने एक उदार और पारदर्शी नीति बनाई है जिसमें अधिकांश क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट के तहत FDI की अनुमति है। भारत में FDI आवक वित्त वर्ष 2014-15 में 45.15 बिलियन डॉलर था और इसमें आठ वर्षों तक निरंतर वृद्धि हुई है जो रिकॉर्ड FDI आवक तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 83.6 बिलियन डॉलर की सर्वाधिक FDI दर्ज किया गया। FDI की आवक में 101 देश शामिल है और भारत में 31 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों तथा 57 क्षेत्रों में इसका निवेश किया गया है। हाल के वर्षों में आर्थिक सुधारों तथा व्यापार सुगमता की बदौलत, देश चालू वित्त वर्ष के दौरान 100 बिलियन डॉलर FDI आकर्षित करने की राह पर है।
- 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI ) मेक इन इंडिया पहल के लिए एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में वित्त वर्ष 2020-21 में लांच की गई। यह योजना रणनीतिक वृद्धि के क्षेत्रों में, जहां भारत को तुलनात्मक रूप से बढ़त हासिल है, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। इनमें घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ बनाना, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना, भारतीय उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना तथा निर्यात क्षमता को बढ़ावा देना शामिल है। इस योजना से उत्पादन एवं रोजगार में उल्लेखनीय लाभ की उम्मीद है जिनमें MSME परितंत्र तक लाभ पहुंच सकता है।
- विश्व अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टरों के महत्व को स्वीकार करते हुए, भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले, डिजाइन इकोसिस्टम का निर्माण करने के लिए 10 बिलियन डॉलर की एक प्रोत्साहन स्कीम लांच की है।
- मेक इन इंडिया पहल को सुदृढ़ बनाने के लिए, भारत सरकार द्वारा कई अन्य उपाय किए गए हैं। सुधार के इन उपायों में कानून में संशोधन, अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करने के लिए दिशानिर्देशों एवं विनियमनों का उदारीकरण, लागत में कमी लाना तथा भारत में व्यवसाय करने की सुगमता बढ़ाना शमिल है। नियमों एवं विनियमनों के बोझिल अनुपालनों को सरलीकरण, विवेकीकरण, गैर अपराधीकरण एवं डिजिटाइजेशन के जरिए कम कर दिया गया है तथा भारत में व्यवसाय करना और अधिक आसान बना दिया गया है। इसके अतिरिक्त, श्रम सुधारों से भर्ती और छंटनी में लचीलापन लाया गया है। स्थानीय विनिर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लागू किए गए हैं। विनिर्माण और विनिवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाये गए कदमों में कंपनी करों में कमी, सार्वजनिक खरीद ऑर्डर तथा चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम शामिल है।
- इसके अतिरिक्त, अनुमोदनों एवं मंजूरियों के लिए निवेशकों को एक एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के जरिये व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार लाने के लिए सितंबर 2021 में राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) भी लांच किया गया है। इस पोर्टल ने निवेशक अनुभव को बढ़ाने के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के विविध विद्यमान मंजूरी प्रणालियों को समेकित किया है।
- देश में विनिर्माण जोनों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए एक प्रोग्राम भी लांच किया है जिसे प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्यक्रम कहा जाता है जो ऐसी अवसंरचना, जो व्यवसाय प्रचालनों में लजिस्टिक संबंधी दक्षता सुनिश्चित करेगा, के सृजन के जरिये कनेक्टिविटी में सुधार लाएगा। यह वस्तुओं और लोगों की तीव्र आवाजाही को सक्षम बनाएगा तथा बाजारों, हबों और अवसरों तक पहुंच में वृद्धि होगी तथा लॉजिस्टिक्स संबंधी लागत में कमी आएगी।
- एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल देश के प्रत्येक जिले से स्वदेशी उत्पादों के संवर्धन और उत्पादन को सुगम बनाने तथा कारीगरों और हस्तशिल्प, हथकरघा, कपड़ा, कृषि तथा प्रसंस्कृति उत्पादों के विनिर्माताओं को एक वैश्विक मंच उपलब्ध कराने और इसके माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान के जरिये ‘मेक इन इंडिया’ विजन की एक और अभिव्यक्ति है।
- ऐसे कई रुझान हैं जो भारतीय विनिर्माण में बदलाव को रेखांकित करते हैं जिनमें घरेलू मूल्यवर्धन और स्थानीय सोर्सिंग में वृद्धि, अनुसंधान एवं विकास, नवोन्मेष तथा निर्वहनीयता उपायों पर अधिक ध्यान देना शामिल है।
- मेक इन इंडिया पहल यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि देश का व्यवसाय परितंत्र भारत में व्यवसाय करने वाले निवेशकों के लिए अनुकूल रहे तथा देश के विकास और वृद्धि में योगदान देता रहे। ऐसा कई सुधारों के माध्यम से किया गया है जिसके कारण निवेश प्रवाह में वृद्धि हुई है तथा आर्थिक प्रगति भी हुई है।
प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
- आभासी सम्मेलन ‘सिम्फोने’
- सिम्फोने, उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास सम्मेलन के लिए संवादों की एक श्रृंखला की शुरुआत है, जिसमें उत्तर पूर्वी भूभाग में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीति विचारकों, हितधारकों और प्रभावशाली लोगों की एक व्यापक श्रृंखला को शामिल किया गया है।
- इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की अनदेखी सुंदरता का प्रदर्शन करना और उत्तर पूर्वी भूभाग में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप तैयार करना है। इस कार्यक्रम में चिंतकों, नीति विचारकों, सोशल मीडिया प्रभावकों, पर्यटन संचालकों और डोनर मंत्रालय तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के विचारों, चर्चाओं और सुझावों को सम्मिलित किया जाएगा।
- ‘सिम्फोने’ का उद्देश्य आगंतुकों और पर्यटन संचालकों के सामने आने वाली समस्याओं का हल करने के लिए वन-स्टॉप समाधान का विकास करना है। जिसमें लॉजिस्टिक्स और मूलभूत सुविधाएं, पर्यटकों के बीच गंतव्य स्थलों के बारे में कम और अधूरी जानकारी, लोगों के बीच आवश्यक जानकारियों का प्रचार, प्रसार और विपणन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।