28 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. 17ए (पी17ए) जहाज के निर्माण की सातवीं परियोजना की नींव रखी गई: 
  2. व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी लाइट्स) के लिए पीएलआई स्कीम का दूसरा चरण: 
  3. ई-लर्निंग पोर्टल ‘डाक कर्मयोगी’ की शुरूआत:
  4. स्वदेशी उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर एमके III स्क्वाड्रन को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया:
  5. 1 जुलाई 2022 से एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध:
  6. कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन प्रशिक्षण कार्यक्रम:
  7. खेती बैंक:
  8. “सांख्यिकी दिवस” 29 जून, 2022 को मनाया जाएगा:
  9. गति शक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान:
  10. ‘गोल’ कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू:
  11. रिमपैक-22:

1. 17ए (पी17ए) जहाज के निर्माण की सातवीं परियोजना की नींव रखी गई: 

सामान्य अध्ययन: 3

विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी :  

विषय:देश में व्यापक भागीदारी और व्यापक आधार वाले स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोहत्साहन।  

प्रारंभिक परीक्षा: पी17ए श्रेणी के युद्धपोत।

प्रसंग: 

  • भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित पी17ए के सातवें जहाज (वाई-12654) के निर्माण की नींव 28 जून 2022 को मेसर्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुम्बई में नौसेना डिजाइन (सरफेस शिप ग्रुप) के महानिदेशक रियर एडमिरल जी के हरीश द्वारा औपचारिक रूप से रखी गई।

विवरण:  

  • पी17ए श्रेणी के तहत सात युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से चार एमडीएल में और तीन एमडीएल के साथ लीड यार्ड के रूप में जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। 
  • पी17ए श्रेणी के ये युद्धपोत स्वदेशी स्टील से  बनाए जा रहे हैं जो हथियारों और सेंसर से सुसज्जित हैं।
  • इन युद्धपोतों का निर्माण, आत्मनिर्भर भारत और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ प्रतिबद्धता के लिए एक बड़ा बढ़ावा है।
  • पी17ए जहाजों का निर्माण आधुनिक तकनीक ‘एकीकृत निर्माण (आईसी)’ को अपनाते हुए युद्धपोत निर्माण की अवधारणा में भिन्न होता है, जहां युद्धपोतों की निर्माण अवधि को कम करने के लिए ब्लॉक जोड़े जाने से पहले से ही तैयार किए जाते हैं।
  • जब ये युद्धपोत नौसेना में शामिल हो जाएंगे तो यह भारतीय नौसेना के बेड़े की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे।

2. व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी लाइट्स) के लिए पीएलआई स्कीम का दूसरा चरण: 

सामान्य अध्ययन: 3

आर्थिक विकास:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

प्रारंभिक परीक्षा: व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी लाइट्स) के लिए पीएलआई स्कीम। 

मुख्य परीक्षा: व्हाइट गुड्स के लिए पीएलआई के देश में निवेश एवं रोजगार को बढ़ावा देने के महत्त्व पर चर्चा कीजिए।   

प्रसंग: 

  • व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी लाइट्स) के लिए पीएलआई स्कीम के दूसरे चरण में 1,368 करोड़ रुपये  का  निवेश होगा और इसके लिए 15 कंपनियां चुनी गईं हैं। 

उद्देश्य:

  • अगले पांच वर्षों के दौरान, 25,583 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद है,और इससे लगभग 4,000 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। 
  • कुल मिला कर, व्हाइट गुड्स के लिए पीएलआई स्कीम के तहत 61 कंपनियां 6,632 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।1,22,671 करोड़ रुपये का उत्पादन करेंगी तथा 46,368 अतिरिक्त प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करेंगी।
  • व्हाइट गुड्स के लिए पीएलआई के परिणामस्वरूप, घरेलू मूल्यवर्धन के 15-20 प्रतिशत से 75-80 प्रतिशत तक बढ़ जाने की उम्मीद हैं।

विवरण:  

  • गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों, मानकों तथा लेबलों सहित पीएलआई स्कीम और अन्य नियामकीय उपायों ने एसी तथा एलईडी के क्षेत्र में मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को अत्याधिक बढ़ावा दिया है। 
  • कुल मिला कर, दोनों दौरों में अनुमोदित 61 आवेदकों द्वारा लगभग 6,632 करोड़ रुपये के बराबर का एसी तथा एलईडी लाइट उद्योग के कंपोनेंट विनिर्माण इकोसिस्टम में निवेश लाने तथा लगभग 46,368 प्रत्यक्ष रोजगार अवसरों को सृजित किए जाने की उम्मीद है।
  • इस स्कीम से अगले पांच वर्षों के दौरान लगभग 1,22,671 करोड़ रुपये के बराबर एसी तथा एलईडी लाइट के कंपोनेंट का कुल उत्पादन होने की उम्मीद है।
  • एयरकंडीशनरों के लिए, कंपनियां अन्य कंपोनेंट के अतिरिक्त कॉपर ट्यूबिंग, कंप्रेसरों, आईडीयू या ओडीयू के लिए कंट्रोल एसेम्बली, हीट एक्सचेंजर्स तथा बीएलडीसी मोटर का विनिर्माण करेंगी।
  • इसी प्रकार, एलईडी लाइट के लिए, एलईडी चिप पैकेजिंग, एलईडी ड्राइवर्स, एलईडी इंजन, एलईडी लाइट मैनेजमेंट सिस्टम तथा कैपेसिटर्स आदि के लिए मेटालाइज्ड फिल्म का भारत में विनिर्माण किया जाएगा।
  • व्हाइट गुड्स में पीएलआई स्कीम का डिजाइन भारत में एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट उद्योग के लिए संपूर्ण कंपोनेट परितंत्र का निर्माण करने तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए बनाई गई है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 अप्रैल, 2021 को व्हाइट गुड्स (एयर कंडीशनर एवं एलईडी लाइट्स) के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई स्कीम) को मंजूरी दी थी जिसे 6,238 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2021-22 से 2028-29 तक कार्यान्वित किया जायगा ।

 3. ई-लर्निंग पोर्टल ‘डाक कर्मयोगी’ की शुरूआत: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: शासन, पारदर्शिता इसके मुख्य महत्वपूर्ण पहलू एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एवं उनका सरकारी वर्ग पर प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: ई-लर्निंग पोर्टल ‘डाक कर्मयोगी’, मेघदूत पुरस्कार।   

प्रसंग: 

  • संचार,रेल,इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने इंडिया हैबिटाट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में डाक विभाग के एक ई-लर्निंग पोर्टल ‘डाक कर्मयोगी’ की 28-06-2022 को शुरूआत की।

उद्देश्य:

  • इस पोर्टल का उदेश्य भारत सरकार के सभी कर्मचारियों के कार्यों में दक्षता लाने और ‘न्यूनतम सरकार’ और ‘अधिकतम शासन’ के साथ नौकरशाही की कार्य क्षमता में बदलाव लाना है। 
  • ‘डाक कर्मयोगी’ पोर्टल लगभग 4 लाख ग्रामीण डाक सेवकों और विभागीय कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाएगा।
  • पोर्टल प्रशिक्षुओं को समान मानकीकृत प्रशिक्षण सामग्री तक पहुंच प्रदान करेगा ताकि वे ग्राहकों के लिए कई जी2सी सेवाओं को प्रभावी ढंग पहुंचा सकें।

विवरण:  

  • डाक विभाग अपने 10 डाक प्रशिक्षण कें‍द्रों/क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र और रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (आरएकेएनपीए), केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहा है। 
  • हालांकि, इस पोर्टल के माध्यम  से विभागीय कर्मचारी और ग्रामीण डाक सेवक अपनी सुविधा के अनुसार ‘कभी भी, कहीं भी’ प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे और अपने दृष्टिकोण, कौशल तथा ज्ञान (एएसके) को अपनी सुविधानुसार अपडेट कर सकेंगे।

पृष्ठ्भूमि:

  • डाक विभाग के कर्मचारियों को उनके अच्छे काम के लिए  आठ अलग-अलग श्रेणियों में मेघदूत पुरस्कार भी प्रदान किए। 
  • मेघदूत पुरस्कार की शुरूआत 1984 में की गई थी।
  • राष्ट्रीय स्तर पर डाक विभाग का यह सर्वोच्च पुरस्कार है। पुरस्कार आठ श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
  • पुरस्कार विजेताओं को पदक, प्रमाण पत्र और 21,000/- रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
  • ‘डी-क्यूब’ सॉफ्टवेयर का उपयोग लाभार्थियों को मनरेगा मजदूरी के वितरण के लिए किया जाता है।

 

 4. स्वदेशी उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर एमके III स्क्वाड्रन को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया; 

सामान्य अध्ययन: 3

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: देश में व्यापक भागीदारी और व्यापक आधार वाले स्वदेशी स्वदेशी उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर विनिर्माण क्षेत्र को प्रोहत्साहन।   

प्रारंभिक परीक्षा:  स्वदेशी उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर एमके III स्क्वाड्रन । 

प्रसंग: 

  • 28 जून, 2022 को गुजरात के पोरबंदर स्थित एयर एन्क्लेव में 835 स्क्वाड्रन (सीजी) को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया। 

उद्देश्य:

  • यह एक स्वदेशी उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके III स्क्वाड्रन है।   

विवरण:   

  • इस स्वदेशी एएलएच एमके III हेलीकॉप्टर का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने किया है। 
  • इनमें उन्नत रडार सहित इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर, शक्ति इंजन, पूरी तरह से ग्लास कॉकपिट, उच्च-तीव्रता वाली सर्चलाइट, उन्नत संचार प्रणाली, स्वचालित पहचान प्रणाली के साथ-साथ एसएआर होमर जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं।
  • ये विशेषताएं तटरक्षक बल को समुद्री की निगरानी करने के साथ-साथ दिन और रात, के दौरान पोतों का परिचालन करते हुए विस्तारित सीमाओं पर एसएआर करने में सक्षम बनाती हैं।
  • इसके अलावा इस विमान (स्क्वाड्रन) के पास भारी मशीन गन के साथ एक आक्रामक मंच से गंभीर मरीजों के लिए एक गहन चिकित्सा देखभाल इकाई (आईसीयू) के रूप में अपनी भूमिका को बदलने की क्षमता है।
  • अब तक 13 एएलएच एमके-III विमान चरणबद्ध तरीके से भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किए जा चुके हैं।
  • इनमें से चार विमान पोरबंदर में तैनात हैं। सेवा में शामिल होने के बाद से स्क्वाड्रन ने 1,200 घंटे से अधिक अवधि तक उड़ान भरी है।
  • साथ ही, दीव तट पर पहली बार रात में एसएआर सहित कई परिचालन मिशनों का संचालन किया है।
  • इसे सेवा में शामिल करने से गुजरात क्षेत्र में भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ेगी।
  • साथ ही, यह देश की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत करेगा।

 5. 1 जुलाई 2022 से एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध: 

सामान्य अध्ययन: 3

पर्यावरण:

विषय: पर्यावरण एवं पारिस्थिकी की रक्षा एवं बेहतरी के लिये अधिसूचित नियम,गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रारंभिक परीक्षा: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2022 ।  

मुख्य परीक्षा: वैश्विक स्तर पर एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के प्रतिकूल प्रभावों को समुद्री पर्यावरण सहित स्थलीय और जलीय इकोसिस्टम पर पहचाना गया है। भारत सरकार द्वारा इस पर प्रतिबन्ध लगाने के निहितार्थ एवं इसके महत्व तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले  प्रभाव समझाइये।   

प्रसंग: 

  • भारत के प्रधानमंत्री द्वारा 2022 तक एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं को समाप्त करने के लिए दिए गए आह्वान के अनुरूप, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 अगस्त 2021 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया हैं।

उद्देश्य:

  • भारत 1 जुलाई, 2022 से पूरे देश में एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं, जिनकी उपयोगिता कम और प्रदूषण क्षमता अधिक है, के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगा। 
  • कूड़े एवं अप्रबंधित प्लास्टिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से एक निर्णायक कदम उठाया जा रहा है।
  • प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के अवैध निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जायेंगे।

विवरण:  

  • समुद्री पर्यावरण सहित स्थलीय और जलीय इकोसिस्टम पर एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के प्रतिकूल प्रभावों को वैश्विक स्तर पर पहचाना गया है। 
  • एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करना सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन गया है।
  • 2019 में आयोजित चौथी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में, भारत ने एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के प्रदूषण से निपटने के लिए एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें वैश्विक समुदाय द्वारा इस बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता को स्वीकार किया गया था।
  • यूएनईए 4 में इस प्रस्ताव को स्वीकार करना एक महत्वपूर्ण कदम था।
  • मार्च 2022 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के हाल ही में संपन्न पांचवें सत्र में, भारत प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने के संकल्प पर आम सहमति के लिए सभी सदस्य देशों के साथ वार्ता कर रहा है।
  • भारत सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक से उत्पन्न कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
  • प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में ये वस्तुएं शामिल हैं- प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए पॉलीस्टाइनिन (थर्मोकोल), प्लास्टिक की प्लेट, कप, गिलास, कटलरी, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, मिठाई के डिब्बों को रैप या पैक करने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट, 100 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर, स्टिरर।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम 2021 के अंतर्गत 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण, आयात, संग्रहण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर 30 सितंबर 2021 से और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले सामान पर 31 दिसंबर, 2022 से प्रतिबंध लगाया गया है
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 फरवरी, 2022 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2022 के रूप में प्लास्टिक पैकेजिंग पर विस्तारित उत्पादकों की जिम्मेदारी पर दिशा-निर्देशों को भी अधिसूचित किया है।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) दरअसल उत्पाद की शुरुआत से अंत तक उसके पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर प्रबंधन करना उत्पादक की जिम्मेदारी होती है।
  • ये दिशा-निर्देश प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे की चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, प्लास्टिक पैकेजिंग के नए विकल्पों को खोजने और कारोबारी जगत द्वारा टिकाऊ प्लास्टिक पैकेजिंग के विकास से संबंधित रूपरेखा मुहैया कराएंगे।
  • ऐसे उद्यमों के लिए प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक के निर्माण को बंद करने में सहायता करने के भी प्रावधान किये गए हैं।
  • भारत सरकार ने नवाचार को बढ़ावा देने और पूरे देश में त्वरित पहुंच और विकल्पों की उपलब्धता के लिए एक इकोसिस्टम बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं।
  • 1 जुलाई 2022 से चिन्हित एसयूपी वस्तुओं पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायेंगे तथा प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक के अवैध निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं उपयोग की निगरानी के लिए विशेष प्रवर्तन दल गठित किये जायेंगे।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की वस्तुओं के अंतर-राज्य परिवहन को रोकने के लिए सीमा जांच केंद्र स्थापित करने के लिए कहा गया है।
  • सीपीसीबी शिकायत निवारण ऐप, नागरिकों को प्लास्टिक से जुड़ी समस्या से निपटने के लिए शुरू किया गया है।

6. कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन प्रशिक्षण कार्यक्रम: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय: भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय सम्मेलनों,प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन प्रशिक्षण कार्यक्रम।

प्रसंग: 

  • आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच पर कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन प्रशिक्षण कार्यक्रम (20-28 जून, 2022) राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

उद्देश्य:

  • यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दरअसल वर्ष 2022-23 के लिए कोलंबो सुरक्षा सम्‍मेलन के सहयोग और गतिविधियों के लिए रोडमैप में चिन्हित सहभागिता गतिविधियों में से एक था जिसे  9-10 मार्च 2022 को मालदीव में आयोजित एनएसए स्तर की 5वीं बैठक में सदस्य देशों द्वारा सहमति दी गई थी।  

विवरण:  

  • सहभागी देशों ने अपने-अपने देशों में आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच में आई विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की और अपने-अपने देशों में कानूनी प्रावधानों, आतंकवाद के वित्तपोषण (नकली मुद्रा सहित), ऑनलाइन कट्टरता और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रतिकूल प्रभाव, संगठित अपराध, आर्थिक खुफिया, साइबर एवं मोबाइल फॉरेंसिक, और इंटरपोल की भूमिका पर अपने-अपने अनुभव एवं सर्वोत्तम तौर-तरीके साझा किए।
  • पैनलिस्टों ने आतंकवाद और कट्टरता से संबंधित मामलों की प्रभावकारी जांच और अभियोजन के लिए कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के सदस्य एवं पर्यवेक्षक देशों के बीच अपने-अपने अनुभव साझा करने, घनिष्ठ सहयोग और समन्वय स्‍थापित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

7. खेती बैंक:

  • द गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक लि. जिसे खेती बैंक कहते हैं, की स्थापना 1951 में हुई। 
  • सरदार पटेल साहब की प्रेरणा से और पोरबंदर के युवराज उदयभान सिंह के प्रयासों से हज़ारों किसान ज़मीन के मालिक बन गए और उस समय किसान भाईयों को जमीन का मालिक बनाने में इस खेती बैंक ने लोन देकर बहुत बड़ी भूमिका अदा की थी।
  • सौराष्ट्र और काठियावाड़ में उस वक़्त लगभग 222 छोटे-छोटे रजवाडे थे और समग्र सौराष्ट्र की जमीन राजों-रजवाडों के नाम पर थी। किसान राजा के लिए जमीन जोतते थे और अपना जीवनयापन करते थे।
  • उस समय सरदार पटेल साहब की प्रेरणा से और पोरबंदर के युवराज उदयभान सिंह जी के प्रयासों से एक सौराष्ट्र लैंड मोर्गेज बैंक की स्थापना हुई और किसानों को ऋण देकर उन्हें जमीन का मालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • आज सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के किसान जमीन के मालिक हैं और इसका सबसे बडा श्रेय इस खेती बैंक को जाता है।
  • गुजरात के किसानों को एग्रीकल्चर-ईन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मध्यम और लंबी अवधि के लोन देने का काम खेती बैंक कर रहा है।
  • नाबार्ड की स्थापना के बाद खेती बैंक का स्वरूप थोड़ा बदला और खेती के साथ-साथ ग्रामीण विकास, कुटीर उद्योग, डेयरी और स्वरोजगार के लिए भी ऋण देने का काम खेती बैंक ने शुरु किया।

8. “सांख्यिकी दिवस” 29 जून, 2022 को मनाया जाएगा:

  • सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में प्रोफेसर (दिवंगत) प्रशांत चंद्र महलनोबिस के किए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 29 जून को “सांख्यिकी दिवस” ​​के रूप में नामित किया है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले विशेष दिवसों की श्रेणी में रखा गया है। 
  • इस दिवस का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक योजना और नीति निर्धारण में सांख्यिकी की भूमिका और इसके महत्व के बारे में प्रोफेसर (दिवंगत) महलनोबिस से प्रेरणा लेने के लिए विशेष रूप से युवा पीढ़ी में जन जागरूकता पैदा करना है।
  • सांख्यिकी दिवस हर साल समकालीन राष्ट्रीय महत्व के विषय के साथ मनाया जाता है। सांख्यिकी दिवस, 2022 का विषय ‘सतत विकास के लिए डेटा’ है।

9. गति शक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान:

  • प्रधानमंत्री द्वारा बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अक्टूबर 2021 में गति शक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की गई थी। 
  • विभिन्न मंत्रालयों को एक साथ लाकर बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए एकीकृत योजना तैयार करने के साथ-साथ उनका कार्यान्वयन करना इसका उद्देश्य है ।
  • इसमें  विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को शामिल किया जायगा ।

10. ‘गोल’ कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू:

  • जनजातीय मामलों के मंत्री ने गोइंग ऑनलाइन एज़ लीडर्स (GOAL) कार्यक्रम के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। 
  • यह कार्यक्रम जनजातीय मामलों के मंत्रालय और मेटा (फेसबुक) की एक संयुक्त पहल है।
  • जीओएएल 2.0 पहल का उद्देश्य देश के जनजातीय समुदायों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देकर और डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके उनके लिए अवसर खोलकर 10 लाख युवाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना है।
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से, चिन्हित किए गए जीओएएल प्रतिभागियों की मेटा बिजनेस कोच-व्हाट्सएप आधारित लर्निंग बॉट तक पहुंच होगी जो प्रतिभागियों को फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से व्यवसाय को बढ़ाने और विकसित करने के बारे में कौशल सीखने %A