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Question

As I searched myself deeper, the necessity for changes both internal and external began to grow on me. As soon as, or even before, I made alterations in my expenses and my way of living, I began to make changes in my diet. I saw that the writers on vegetarianism had examined the question very minutely, attacking it in its religious, scientific, practical and medical aspects. Ethically they had arrived at the conclusion that man’s supremacy over the lower animals meant not that the former should prey upon the latter, but that the higher should protect the lower, and that there should be mutual aid between the two as between man and man. They had also brought out the truth that man eats not for enjoyment but to live. And some of them accordingly suggested and effected in their lives abstention not only from flesh meat but from eggs and milk. Scientifically some had concluded that man’s physical structure showed that he was not meant to be a cooking but a frugivorous animal. Medically they had suggested the rejection of all spices and condiments. According to the practical and economic argument they had demonstrated that a vegetarian diet was the least expensive. All these considerations had their effect on me, and I came across vegetarians of all these types in vegetarian restaurants. There was a vegetarian Society in England where I came in contact with those who were regarded as pillars of vegetarianism, and began my own experiments in dietetics. I stopped taking the sweets and condiments I had got from home. The mind having taken a different turn, the fondness for condiments wore away, and I now relished the boiled spinach which in Richmond tasted insipid, cooked without condiments. Many such experiments taught me that the real seat of taste was not the tongue but the mind.

Q58. The author says that the real seat of taste was not the tongue but the mind to elaborate that

 जैसे ही मैने स्वयं की गहरी खोज की, आंतरिक और वाह्य दोनों परिवर्तनों के लिए आवश्यकता मुझ पर वढ़ना शुरू हो गया। मैंने अपने खर्चों और जीने के तरीके में जैसे हीं प्रत्यावर्तन किया, मैंने अपने आहार में परिवर्तन किया। मैने देखा कि शाकाहारवाद के प्रश्न पर लेखकों ने बहुत बारीकी से परीक्षण किया था। इस पर धार्मिक, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय पक्षों के आधार पर आक्रमण किया। नैतिक रूप से वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि कमजोर पशुओं पर मनुष्य के वर्चस्व का अर्थ यह नहीं था कि पूर्ववर्ती को उत्तरवर्ती का शिकार करना चाहिए, बल्कि उच्चतर को निम्नतर की रक्षा करनी चाहिए तथा यह भी कि इन दोनों के बीच आपसी सहयोग होना चाहिए जैसा कि मनुष्य और मनुष्य के बीच होता है। उन्होंने इस सत्य का भी खुलासा किया कि मनुष्य केवल आनंद के लिए नहीं, वरन् जीने हेतु खाता है। उनमें से कुछ ने तदनुसार न केवल मांस, बल्कि अंडों और दूध से उनके जीवन निरस्त करने हेतु परामर्श दिया। वैज्ञानिक रूप से कुछ ने निष्कर्ष निकाला था कि मनुष्य की शारीरिक बनावट ने दर्शाया है कि वह एक फलाहारी पशु था। चिकित्सीय रूप से उन्होंने सभी मसालों और स्वादिष्ट सामग्री के वहिस्करण का परामर्श दिया था। व्यावहारिक और आर्थिक तर्क के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शित किया कि शाकाहारी आहार कम-से-कम मॅहगा था। इन सभी विचारों का प्रभाव मेरे ऊपर था तथा मैं शाकाहारी रेस्तराओं में शाकाहारियों के इन सभी प्रकारों हेतु यहाँ आया था। इंग्लैंड में शाकाहारी समाज था जहाँ में उन लोगों के संपर्क में आया, जो शाकाहारवाद के स्तंभों के रूप में माने जाते थे तथा आहार संबंधी मेरे अपने प्रयोग शुरू हुए। मैने घर से मिली मिठाइयाँ और स्वादिष्ट सामग्री लेना बंद कर दिया। मन एक मोड़ लिया, स्वादिष्ट सामग्री के लिए प्यार मिट गया तथा उबला हुआ पालक का आनंद लेने लगा, जिसका स्वाद पका रिचमंड जैसा नीरस था। इस तरह के कई प्रयोग ने मुझे सिखाया कि असली स्वाद स्थान जीभ नहीं मन था।

Q. लेखक कहता है कि असली स्वाद-स्थान जीभ नहीं मन था, का विस्तार कथन है किः
  1. Man is a frugivorous animal.

    मनुष्य एक फलाहारी पशु है।
  2. Ethically vegetarianism is justified.

    नैतिक रूप से शाकाहार उचित है।
  3. Man enjoys food that he believes is good.

    मनुष्य उस भोजन का आनंद उठाता है जिसे वह अच्छा मानता है।
  4. None of the above

    उपर्युक्त में से कोई नहीं


Solution

The correct option is C Man enjoys food that he believes is good.

मनुष्य उस भोजन का आनंद उठाता है जिसे वह अच्छा मानता है।
Based on the last two sentences of the passage option (c) is the correct choice.

परिच्छेद के अंतिम दो वाक्यों के आधार पर विकल्प (c) सही चयन है।

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