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Question

Developing nations and the third world countries are striving to improve the quality of life and standard of life of their citizens. This quest is fraught with severe and adverse consequences for the global environment if they do not adopt sustainable practices. Their share of the world economy is showing an increasing trend. Global actions to mitigate environmental impact of economic growth will necessarily have to factor in their legitimate aspirations.

Advanced nations cannot expect the developing world to slam the brakes on their quest for a better quality of life for their citizens on grounds of sustainability. The world has to find way of reconciling the needs of nations for improving their economies while working towards sustainability.

Developed nations passed through stages of urbanization, deforestation, growth of extractive industries like mining and mechanization before reaching their current stage of development. If they did not mine in their own countries, they accessed metals and energy from their colonies or through commerce. For instance, a blanket ban or mining of coal, iron ore or strategic minerals is not a feasible option in India. Our per capita consumption of steel, aluminium and energy is very low and has to increase if we have to improve the living standards of our people. To achieve this, India has to make trade-offs and hard choices. The bottom line is that production of any engineered product or service consumes energy and natural resources. It is not physically possible to make anything which uses up zero resources and is energy neutral. The best one can hope for is to minimize resource use and reduce waste.

Q46. According to the passage which of the following is/are the challenges faced by the world in addressing climate change?
1. Reconcile the need to developing nations to improve their economy with the objective of sustainability.
2. The lack of understanding on the part of developed countries with respect to the goals of the developing world.
Select the correct answer using the code given below:

विकासशील राष्ट्र एवं तृतीय विश्व अपने-अपने नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और जीवन के मानक को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि वे संवहनीय अभ्यासों को नहीं अपनाते हैं तो वैश्विक जलवायु के लिए यह अन्वेषण गंभीर और प्रतिकूल परिणामों से भरा हुआ होगा। विश्व अर्थव्यवस्था में उनका हिस्सा वर्धमान प्रवृत्ति दर्शा रहा है। आर्थिक विकास के पर्यावरणीय प्रभाव की गंभीरता कम करने हेतु वैश्विक कार्यवाहियों में उनकी वैध आकांक्षाएं अनिवार्यत: शामिल होनी चाहिए।

उन्नत राष्ट्र, विकासशील विश्व से यह अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि संवहनीयता के आधार पर उनके नागरिकों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता हेतु उनके अन्वेषण पर दबावयुक्त ब्रेक लगाएँ। विश्व को राष्ट्रों द्वारा अपने आर्थिक दशा में सुधार एवं संवहनीयता के लिए कार्य करने को मिलानेवाला रास्ता ढुंढना होगा।

विकसित राष्ट्रों ने विकास को वर्तमान स्तर तक पहुँचने से पूर्व शहरीकरण, निर्वनीकरण, खदानों और मशीनीकरण जैसे निकासी उद्योगों की वृद्धि के स्तरों से गुजर चुके हैं। यदि उन्होंने अपने-अपने देशों में खदान-कार्य नहीं किया, तो उन्होंने उनके औपनिवेशों या वाणिज्य के माध्यम से धातुओं और ऊर्जा तक पहुँच बनाया। दृष्टांत के लिए कोयला, लौह अयस्क या रणनीतिक खनिज पदार्थों के खनन पर पूर्ण पाबंदी भारत में व्यवहार्य विकल्प नहीं है। इस्पात, एल्युमीनियम और ऊर्जा की हमारी प्रति व्यक्ति खपत बहुत कम है और इसे बढ़ाना है, यदि हमें अपने लोगों के जीवन के मानक सुधारने हैं। इसे प्राप्त करने हेतु भारत को समझौता करना और कठिन विकल्प अपनाने होंगे। आधारभूत बात यह है कि किसी भी इंजीनियरिंग उत्पाद या सेवा के उत्पादन में ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधनों की खपत होगी ही। भौतिक रूप से वैसी वस्तु बनाना संभव नहीं है, जो शून्य संसाधनों का उपयोग करती हो और ऊर्जा तटस्स्थ हो। संसाधनों का कम उपयोग तथा अपशिष्ट कम करना ही सबसे अच्छा उम्मीद हो सकता है।

Q. परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित चुनौतियों में से कौन-सी जलवायु परिवर्तन के संबोधन में विश्व द्वारा सामना की गई चुनौती/चुनौतियाँ है/हैं?
1. संवहनीयता के उद्देश्य से उनकी अर्थव्यवस्था को सुधारने की विकासशील राष्ट्रों की आवश्यकता का समाधान।
2. विकासशील विश्व के लक्ष्यों के संबंध में विकसित देशों की ओर से समझ का अभाव।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
 
  1. Only 1

    केवल 1
  2. Only 2

    केवल 2
  3. Both 1 and 2

    1 और 2 दोनों
  4. None of the above

    इनमे से कोई नहीं


Solution

The correct option is A Only 1

केवल 1
Statement 1 is correct according to the passage. The phrase lack of understanding makes statements 2 incorrect.

परिच्छेद के अनुसार कथन 1 सही है। ‘समझ का अभाव’ वाक्यांश प्रयोग करने के कारण कथन 2 गलत है।

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All India Test Series
Q1.
Passage

Much of the national discourse in India poses environmental sustainability as desirable but inimical to our objective of achieving a high rate of GDP growth, without which poverty eradication and economic and social development of our people would not be possible. There is a trade-off, it is argued, between pursuing development and safeguarding the environment. Still others point to the history of modern industrial development: first there was widespread pollution and degradation of the environment, and then a clean-up and setting of high international standards once prosperity was achieved. China appears to be following the same logic even though there appears to be some rethinking on the subject. We reject these arguments. At the very outset we wish to reiterate that safeguarding the environment is not at all inimical to rapid economic development.

In fact, in our resource constrained world today, maintaining high environmental standards may have become a prerequisite for achieving steady, long-term growth of our economy. This is particularly so given our high population density and the dependence of large numbers on ecosystem services. Nor do we accept the argument that higher standards of living are incompatible with an insistence on environmental sustainability. In fact, maintaining and improving the quality of life for all our citizens may only be possible if the environmental degradation that we witness all around us is reversed and the fragile ecology of our country is preserved. These two propositions lie at the heart of the concept of Green Growth.

According to the Organisation for Economic Cooperation and Development, “Green growth is about fostering economic growth and development while ensuring that the natural assets continue to provide the resources and environmental services on which our well-being relies.” The 13th Finance Commission clearly underscored this in stating, “Green growth involves rethinking growth strategies with regard to the impacts on environmental sustainability and the environmental resources available to poor and vulnerable groups.”

Q. Why has the importance of maintaining high environmental standards become even more important in a resource constrained world/country, according to the passage?
1. High population density
2. To avoid repetition of mistakes committed by developed countries.
3. Fragile state of our ecology.
Select the correct answer from the codes given below:

भारत में राष्ट्रीय चर्चा के अधिकाँश भाग में पर्यावरण संधारणीयता को बांछनीय किन्तु सकल घरेलू उत्पाद में उच्च वृद्धि दर प्राप्त करने के हमारे लक्ष्य का विरोधी माना जाता है, जिसके बिना निर्धनता उन्मूलन एवं हमारे लोगों का आर्थिक व सामाजिक विकास संभव नहीं होगा। जैसा कि तर्क दिया जाता है, विकास अनुशीलन के साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखना एक समझौता है। कुछ अन्य आधुनिक औद्योगिक विकास के इतिहास की ओर संकेत करते हैं: पहले व्यापक प्रदूषण था तथा पर्यावरणीय निम्नीकरण हो रहा था। उसके बाद सफाई पर बल दिया गया और समृद्धि प्राप्त करने के बाद उच्च अंतर्राष्ट्रीय मानक तय कर दिए गए। चीन भी इसी तर्क का अनुसरण करता दिख रहा है, हालांकि वहाँ इस विषय पर पुनर्चिन्तन भी होता दिख रहा है। हम इन तर्कों को निरस्त करते हैं। आरम्भ में ही हम इस बात को दोहराना चाहते हैं कि पर्यावरण का संरक्षण तीव्र आर्थिक विकास का बिल्कुल विरोधी नहीं है।

वस्तुतः, विरुद्ध संसाधनों वाले हमारे वर्तमान विश्व में पर्यावरण के उच्च मानक को बनाए रखना हमारी अर्थव्यवस्था के स्थिर तथा दीर्घकालीन वृद्धि के लिये हो सकता है कि पूर्वशर्त बन गयी हो। जनसंख्या के हमारे उच्च घनत्व तथा पारिस्थितकीय सेवाओं पर जनसंख्या के बड़े भाग की निर्भरता को देखते हुए यह बात विशिष्ट रूप से और भी लागू होती है। हम इस तर्क को भी स्वीकार नहीं करते कि पर्यावरण संधारणीयता पर बल जीवन शैली के उच्च स्तर का परस्पर विरोधी है। वस्तुतः, हमारे सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना तथा उसे उन्नत करना तभी संभव हो सकता है जब हमारे आस-पास दिख रहे पर्यावरणीय निम्नीकरण की दिशा बदल दी जाए तथा हमारे देश की नाजुक पारिस्थितिकी को संरक्षित किया जाए। ये दोनों ही प्रस्ताव हरित विकास की अवधारणा के केंद्र में अवस्थित हैं।

आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन के अनुसार, “हरित विकास से आशय प्राकृतिक सम्पदाओं द्वारा हमारे कल्याण के लिए आवश्यक संसाधन तथा पर्यावरण संबंधी सेवायें प्रदान करते रहने की सुनिश्चितता के साथ आर्थिक वृद्धि तथा विकास को बढ़ावा देना है”। 13वें वित्त आयोग ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है, “हरित विकास में पर्यावरण संधारणीयता तथा निर्धनों व कमजोर समूहों को उपलब्ध पर्यावरणीय संसाधनों पर प्रभाव के सम्बन्ध में विकासपरक रणनीतियों पर पुनर्विचार करना सम्मिलित हैं।”

Q. परिच्छेद के अनुसार, एक संसाधन निरुद्ध विश्व/देश में उच्च पर्यावरण संबंधी स्तर को बनाए रखने की महत्ता और अधिक क्यों बढ़ गयी है?
1. उच्च जनसंख्या घनत्व।
2. विकसित देशों द्वारा की गयी भूलों को दोहराने से बचना।
3. हमारे पारिस्थितिकी की भंगुरता।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
All India Test Series
Q2.
Passage

Much of the national discourse in India poses environmental sustainability as desirable but inimical to our objective of achieving a high rate of GDP growth, without which poverty eradication and economic and social development of our people would not be possible. There is a trade-off, it is argued, between pursuing development and safeguarding the environment. Still others point to the history of modern industrial development: first there was widespread pollution and degradation of the environment, and then a clean-up and setting of high international standards once prosperity was achieved. China appears to be following the same logic even though there appears to be some rethinking on the subject. We reject these arguments. At the very outset we wish to reiterate that safeguarding the environment is not at all inimical to rapid economic development.

In fact, in our resource constrained world today, maintaining high environmental standards may have become a prerequisite for achieving steady, long-term growth of our economy. This is particularly so given our high population density and the dependence of large numbers on ecosystem services. Nor do we accept the argument that higher standards of living are incompatible with an insistence on environmental sustainability. In fact, maintaining and improving the quality of life for all our citizens may only be possible if the environmental degradation that we witness all around us is reversed and the fragile ecology of our country is preserved. These two propositions lie at the heart of the concept of Green Growth.

According to the Organisation for Economic Cooperation and Development, “Green growth is about fostering economic growth and development while ensuring that the natural assets continue to provide the resources and environmental services on which our well-being relies.” The 13th Finance Commission clearly underscored this in stating, “Green growth involves rethinking growth strategies with regard to the impacts on environmental sustainability and the environmental resources available to poor and vulnerable groups.”

Q. According to the passage which of the following comes under green growth?
1. Reversing environmental degradation
2. Preserving our fragile ecology
3. Maintaining harmonious balance between economic development and environment protection.
4. Environmental resources made available to poor and vulnerable groups
Select the correct answer from the codes given below:

भारत में राष्ट्रीय चर्चा के अधिकाँश भाग में पर्यावरण संधारणीयता को बांछनीय किन्तु सकल घरेलू उत्पाद में उच्च वृद्धि दर प्राप्त करने के हमारे लक्ष्य का विरोधी माना जाता है, जिसके बिना निर्धनता उन्मूलन एवं हमारे लोगों का आर्थिक व सामाजिक विकास संभव नहीं होगा। जैसा कि तर्क दिया जाता है, विकास अनुशीलन के साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखना एक समझौता है। कुछ अन्य आधुनिक औद्योगिक विकास के इतिहास की ओर संकेत करते हैं: पहले व्यापक प्रदूषण था तथा पर्यावरणीय निम्नीकरण हो रहा था। उसके बाद सफाई पर बल दिया गया और समृद्धि प्राप्त करने के बाद उच्च अंतर्राष्ट्रीय मानक तय कर दिए गए। चीन भी इसी तर्क का अनुसरण करता दिख रहा है, हालांकि वहाँ इस विषय पर पुनर्चिन्तन भी होता दिख रहा है। हम इन तर्कों को निरस्त करते हैं। आरम्भ में ही हम इस बात को दोहराना चाहते हैं कि पर्यावरण का संरक्षण तीव्र आर्थिक विकास का बिल्कुल विरोधी नहीं है।

वस्तुतः, विरुद्ध संसाधनों वाले हमारे वर्तमान विश्व में पर्यावरण के उच्च मानक को बनाए रखना हमारी अर्थव्यवस्था के स्थिर तथा दीर्घकालीन वृद्धि के लिये हो सकता है कि पूर्वशर्त बन गयी हो। जनसंख्या के हमारे उच्च घनत्व तथा पारिस्थितकीय सेवाओं पर जनसंख्या के बड़े भाग की निर्भरता को देखते हुए यह बात विशिष्ट रूप से और भी लागू होती है। हम इस तर्क को भी स्वीकार नहीं करते कि पर्यावरण संधारणीयता पर बल जीवन शैली के उच्च स्तर का परस्पर विरोधी है। वस्तुतः, हमारे सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना तथा उसे उन्नत करना तभी संभव हो सकता है जब हमारे आस-पास दिख रहे पर्यावरणीय निम्नीकरण की दिशा बदल दी जाए तथा हमारे देश की नाजुक पारिस्थितिकी को संरक्षित किया जाए। ये दोनों ही प्रस्ताव हरित विकास की अवधारणा के केंद्र में अवस्थित हैं।

आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन के अनुसार, “हरित विकास से आशय प्राकृतिक सम्पदाओं द्वारा हमारे कल्याण के लिए आवश्यक संसाधन तथा पर्यावरण संबंधी सेवायें प्रदान करते रहने की सुनिश्चितता के साथ आर्थिक वृद्धि तथा विकास को बढ़ावा देना है”। 13वें वित्त आयोग ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है, “हरित विकास में पर्यावरण संधारणीयता तथा निर्धनों व कमजोर समूहों को उपलब्ध पर्यावरणीय संसाधनों पर प्रभाव के सम्बन्ध में विकासपरक रणनीतियों पर पुनर्विचार करना सम्मिलित हैं।”

Q. परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा हरित विकास के अंतर्गत आता है?
1. पर्यावरणीय निम्नीकरण की दिशा बदलना।
2. हमारी भंगुर पारिस्थितिकी को संरक्षित करना।
3. आर्थिक विकास तथा पर्यावरण की सुरक्षा के बीच समरसतापूर्ण संतुलन बनाये रखना।
4. निर्धन तथा सुभेद्य समूहों को पर्यावरणीय संसाधन उपलब्ध कराया जाना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
All India Test Series
Q3.
Developing nations and the third world countries are striving to improve the quality of life and standard of life of their citizens. This quest is fraught with severe and adverse consequences for the global environment if they do not adopt sustainable practices. Their share of the world economy is showing an increasing trend. Global actions to mitigate environmental impact of economic growth will necessarily have to factor in their legitimate aspirations.

Advanced nations cannot expect the developing world to slam the brakes on their quest for a better quality of life for their citizens on grounds of sustainability. The world has to find way of reconciling the needs of nations for improving their economies while working towards sustainability.

Developed nations passed through stages of urbanization, deforestation, growth of extractive industries like mining and mechanization before reaching their current stage of development. If they did not mine in their own countries, they accessed metals and energy from their colonies or through commerce. For instance, a blanket ban or mining of coal, iron ore or strategic minerals is not a feasible option in India. Our per capita consumption of steel, aluminium and energy is very low and has to increase if we have to improve the living standards of our people. To achieve this, India has to make trade-offs and hard choices. The bottom line is that production of any engineered product or service consumes energy and natural resources. It is not physically possible to make anything which uses up zero resources and is energy neutral. The best one can hope for is to minimize resource use and reduce waste.

Q48. According to the passage, which of the following is/are the challenges that countries like India face in improving the life of its citizens?
1. Increasing the consumption of steel, aluminium and energy.
2. To minimize resource utilization and reduce wastage.
3. Tough decision making to balance legitimate aspirations with mitigation of environmental impact.
Select the correct answer using the code given below:

विकासशील राष्ट्र एवं तृतीय विश्व अपने-अपने नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और जीवन के मानक को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि वे संवहनीय अभ्यासों को नहीं अपनाते हैं तो वैश्विक जलवायु के लिए यह अन्वेषण गंभीर और प्रतिकूल परिणामों से भरा हुआ होगा। विश्व अर्थव्यवस्था में उनका हिस्सा वर्धमान प्रवृत्ति दर्शा रहा है। आर्थिक विकास के पर्यावरणीय प्रभाव की गंभीरता कम करने हेतु वैश्विक कार्यवाहियों में उनकी वैध आकांक्षाएं अनिवार्यत: शामिल होनी चाहिए।

उन्नत राष्ट्र, विकासशील विश्व से यह अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि संवहनीयता के आधार पर उनके नागरिकों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता हेतु उनके अन्वेषण पर दबावयुक्त ब्रेक लगाएँ। विश्व को राष्ट्रों द्वारा अपने आर्थिक दशा में सुधार एवं संवहनीयता के लिए कार्य करने को मिलानेवाला रास्ता ढुंढना होगा।

विकसित राष्ट्रों ने विकास को वर्तमान स्तर तक पहुँचने से पूर्व शहरीकरण, निर्वनीकरण, खदानों और मशीनीकरण जैसे निकासी उद्योगों की वृद्धि के स्तरों से गुजर चुके हैं। यदि उन्होंने अपने-अपने देशों में खदान-कार्य नहीं किया, तो उन्होंने उनके औपनिवेशों या वाणिज्य के माध्यम से धातुओं और ऊर्जा तक पहुँच बनाया। दृष्टांत के लिए कोयला, लौह अयस्क या रणनीतिक खनिज पदार्थों के खनन पर पूर्ण पाबंदी भारत में व्यवहार्य विकल्प नहीं है। इस्पात, एल्युमीनियम और ऊर्जा की हमारी प्रति व्यक्ति खपत बहुत कम है और इसे बढ़ाना है, यदि हमें अपने लोगों के जीवन के मानक सुधारने हैं। इसे प्राप्त करने हेतु भारत को समझौता करना और कठिन विकल्प अपनाने होंगे। आधारभूत बात यह है कि किसी भी इंजीनियरिंग उत्पाद या सेवा के उत्पादन में ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधनों की खपत होगी ही। भौतिक रूप से वैसी वस्तु बनाना संभव नहीं है, जो शून्य संसाधनों का उपयोग करती हो और ऊर्जा तटस्स्थ हो। संसाधनों का कम उपयोग तथा अपशिष्ट कम करना ही सबसे अच्छा उम्मीद हो सकता है।

Q. परिच्छेद के अनुसार, भारत जैसे देशों को उनके नागरिकों के जीवन बेहतर करने में निम्नलिखित चुनौतियों में से कौन-सी चुनौती/चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
1. इस्पात, अल्युमीनियम और ऊर्जा की खपत बढ़ाना।
2. संसोधन का कम उपयोग और अपशिप्ट कम करना।
3. पर्यावरणीय प्रभाव के शमन के साथ वैध आकांक्षाओं को संतुलित करने हेतु कठोर निर्णय लेना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
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