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Question

Q. In the context of the Governor’s office envisaged by the Indian Constitution, consider the following statements. Which of the above given statements is/are correct?

Q. भारतीय संविधान द्वारा परिकल्पित राज्यपाल के कृत्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?


A

1 and 2 only
केवल 1 और 2
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B

2 only
केवल 2
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C

1 and 3 only
केवल 1 और 3
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D

3 only
केवल 3
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Solution

The correct option is B
2 only
केवल 2
Explanation:

Statement 1 is incorrect - It is the legislative power of the Governor to promulgate the ordinances under Article 213 of the Constitution when the state legislature is not in session. He/she required the instructions of the President only in the following instances to promulgate the ordinances.
  1. A Bill containing the same provisions would under this Constitution have required the previous sanction of the President for the introduction thereof into the Legislature
  2. He would have deemed it necessary to reserve a Bill containing the same provisions for the consideration of the President.
  3. An Act of the Legislature of the State containing the same provisions would under the Constitution have been invalid unless, having been reserved for the consideration of the President, it had received the assent of the President.
Statement 2 is correct - For the matters of the disqualifications of the members of state legislature (under the article 191 of the Constitution), the decision of the Governor shall be final. Before giving any decision on any such question, the Governor shall obtain the opinion of the Election Commission and shall act according to such opinion.

Statement 3 is incorrect - It is a Judicial power of the Governor under Article 233 of the Constitution for making the appointments, postings and promotions of the district judges in consultation with the state High Court.
 
Explainer’s Perspective:

This question might look difficult at first but it can be solved with a very basic understanding of how the Governor’s office in India works.
Statement 1 mentions that for all kinds of ordinances the Governor has to consult the President. The word “all” makes the statement extreme and needs a careful examination. Ordinances will be used when the legislative houses are not in session. If the Governor consults the President for all purposes, then there will be no meaning for the existence of the elected government in the state. Hence, students can mark the statement 1 as incorrect.
Now, we are left with the options (b) and (d) only. So, either statement 2 or 3 is correct but not both. Statement 2 has no suspicious element in it since seeking the opinion of the Election Commission for disqualifying a member contains merit in it because of the legal experience of the commission in these matters. Hence the answer is (b).
On the other hand, if one takes the statement 3 a word play can be observed. The High Court will be consulted but not the Chief Minister. This can be easily found by remembering the concept of separation of powers. 

व्याख्या:

कथन 1 गलत है - राज्य की विधायिका सत्र में नहीं होने पर संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेशों को प्रख्यापित करना राज्यपाल की विधायी शक्ति है। अध्यादेशों को प्रख्यापित करने के लिए उन्हें केवल निम्नलिखित उदाहरणों में राष्ट्रपति के निर्देशों की आवश्यकता होती है।
  1. संविधान के तहत समान प्रावधानों वाले विधेयक को विधानमंडल में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती है।
  2. वह राष्ट्रपति के विचार के लिए समान प्रावधानों वाले विधेयक को आरक्षित करना आवश्यक समझे।
  3. समान प्रावधानों वाले राज्य के विधानमंडल का अधिनियम संविधान के तहत अमान्य होगा जब तक कि राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखे जाने पर उसे राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त नहीं होती।
कथन 2 सही है - राज्य विधायिका के सदस्यों की अयोग्यता के मामलों के लिए (संविधान के अनुच्छेद 191 के तहत), राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा। ऐसे किसी भी प्रश्न पर कोई भी निर्णय देने से पहले, राज्यपाल चुनाव आयोग की राय प्राप्त करेगा और उसके अनुसार कार्य करेगा।

कथन 3 गलत है - संविधान के अनुच्छेद 233 के तहत यह राज्यपाल की न्यायिक शक्ति है कि वह राज्य उच्च न्यायालय के परामर्श से जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों, पोस्टिंग और पदोन्नति के संबंध में निर्णय लेगा।
 
एक्सप्लेनर परिप्रेक्ष्य:

यह प्रश्न प्रथम दृष्टि में मुश्किल लग सकता है, लेकिन इसे बुनियादी समझ के साथ हल किया जा सकता है कि भारत में राज्यपाल का पद  कैसे काम करता है।
कथन 1 में उल्लेख है कि सभी प्रकार के अध्यादेशों के लिए राज्यपाल को राष्ट्रपति से परामर्श करना होगा। शब्द "सभी" कथन को चरम बनाता है और सावधानीपूर्वक परीक्षण की आवश्यकता होती है। अध्यादेश का प्रयोग तब किया जाएगा जब विधायी सदन सत्र में न हों। यदि राज्यपाल सभी उद्देश्यों के लिए राष्ट्रपति से सलाह लेगा, तो राज्य में निर्वाचित सरकार के अस्तित्व का कोई अर्थ नहीं होगा। इसलिए, छात्र कथन 1 को गलत के रूप में चिह्नित कर सकते हैं।
अब, हमारे पास केवल विकल्प (b) और (d) बचे हैं। तो, कथन 2 या 3 में कोई एक सही है, लेकिन दोनों नहीं। कथन 2 में कोई संदिग्ध तत्व नहीं है क्योंकि किसी सदस्य को अयोग्य ठहराने के लिए चुनाव आयोग की राय लेने से इन मामलों में आयोग के कानूनी अनुभव के कारण उसमें योग्यता है। इसलिए उत्तर (b) है।
दूसरी ओर, यदि कोई कथन 3 लेता है तो उसे नाटकीय शब्द संरचना का अवलोकन करना होगा। हाईकोर्ट से सलाह ली जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री से नहीं। इसे शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा को याद करके आसानी से चिन्हित किया जा सकता है।

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