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Question

Q. India's underwater weaponry is set to get more firepower with the Navy deciding to induct the "Varunastra" torpedo into its arsenal. Which of the following statements about this torpedo is incorrect?

Q. “वरुणास्त्र” टारपीडो को भारतीय नौसेना द्वारा अपने शस्त्रागार में शामिल किये जाने के निर्णय से जल के अंदर इसकी प्रहार क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इस टारपीडो के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

  1. It will put India in a group of only eight countries that have the capability to manufacture heavyweight torpedoes.
    यह भारत को केवल आठ देशों के समूह में करेगा जो हैवीवेट टॉरपीडो के निर्माण की क्षमता रखते हैं।

  2. It has been developed under a joint venture between India and France.
    इसे भारत और फ्रांस के संयुक्त उद्यम के तहत विकसित किया गया है।

  3. The weapon system uses its own intelligence in tracing the target.
    इसमें लगी हथियार प्रणाली अपनी ही बुद्धि का इस्तेमाल कर लक्ष्य का पता लगाने में सक्षम  है ।

  4. It is an anti-submarine electric torpedo equipped with remote-controlled guidance systems.
    यह एक पनडुब्बी रोधी इलेक्ट्रिक टारपीडो है जो रिमोट-नियंत्रित मार्गदर्शन प्रणालियों से लैस है।


Solution

The correct option is B
It has been developed under a joint venture between India and France.
इसे भारत और फ्रांस के संयुक्त उद्यम के तहत विकसित किया गया है।
  • Developed by Naval Science and Technological Laboratory (NSTL), a premier laboratory of DRDO, the indigenously-built heavyweight anti-submarine torpedo Varunastra has been successfully inducted in the navy, making India one of the eight countries to have the capability to design and build such a system.
  • It is an anti-submarine electric torpedo equipped with automatic and remote-controlled guidance systems. The weapon system uses its own intelligence in tracing the target.
  • The weapon has been jointly developed by the Naval Science and Technology Laboratory (NTSL), Visakhapatnam and the Bharat Dynamics Limited -BDL (Hyderabad).
  • Having almost 95 per cent indigenous content, Varunastra, costing about Rs 10-12 crore per unit, is capable of targeting quiet and stealthy submarines, both in deep and littoral waters in an intense counter-measure environment.
डीआरडीओ की एक प्रमुख प्रयोगशाला, नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा विकसित,स्वदेश  निर्मित हेवीवेट एंटी-सबमरीन टारपीडो वरुणास्त्र को नौसेना में सफलतापूर्वक शामिल किया गया है, जिससे भारत उन आठ देशों में शामिल  हो गया  जिनके पास ऐसी  क्षमता है।

यह एक पनडुब्बी रोधी इलेक्ट्रिक टारपीडो है जो स्वचालित और रिमोट-नियंत्रित मार्गदर्शन प्रणालियों से लैस है। हथियार प्रणाली लक्ष्य का पता लगाने में अपनी बुद्धि का उपयोग करती है।

हथियार को नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NTSL), विशाखापत्तनम और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड -BDL (हैदराबाद) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
लगभग 95 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होने के कारण, प्रति यूनिट लगभग 10-12 करोड़ रुपये की लागत वाला वरुणास्त्र गहरे पानी में  चुपके  से और चोरी-छिपे  पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।

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