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Question

Q. Which of the following Geo-engineering methods can potentially help in fighting global warming?

1. Shooting mirrors into space
2. Creating a condition similar to the volcanic eruption
3. Pumping out iron from the sea

Select the correct answer using the codes given below

Q. निम्नलिखित में से कौन सी जियोइंजीनियरिंग विधि ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में मदद कर सकती है?

1. अंतरिक्ष में दर्पण को स्थापित करना।
2. ज्वालामुखी उदभेदन जैसी स्थिति को निर्मित।
3. समुद्र से लोहा को बाहर निकालना।

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:

A

1 only
केवल 1
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B

1 and 2 only
केवल 1 और 2
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C

2, and 3 only
केवल 2 और 3
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D

1, 2, and 3 only
केवल 1, 2 और 3
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Solution

The correct option is B
1 and 2 only
केवल 1 और 2
Statement 1 is correct:
Strategically positioning of a mirror the size of Greenland, between the sun and earth, could deflect the sunlight. This will possibly result in a reduction in the amount of sunlight reaching the earth. Thus, it can help in fighting global warming.

Statement 2 is correct:
A volcanic eruption emits million tons of sulphur dioxide into the atmosphere, which creates clouds blocking sunlight from entering the earth's surface. Some scientists believe that by creating a similar condition and injecting sulfur into the atmosphere, similar clouds can be created, which will block the solar radiation and help reduce global warming.

Statement 3 is incorrect:
Phytoplankton in the sea help in sequestration of carbon during the process of photosynthesis. They also prefer iron. So, if we try to pump out iron from the sea, it will affect the growth of phytoplankton and result in more carbon in the atmosphere. Thus, it will increase global warming. On the other hand, if we try to seed the sea with iron, it will help in the growth of phytoplankton and help in reducing global warming.

कथन 1 सही है:
सूर्य और पृथ्वी के बीच ग्रीनलैंड के आकार के बराबर एक दर्पण को स्थापित करने से यह सूर्य के प्रकाश को विक्षेपित कर सकती है।इससे संभवतः पृथ्वी पर पहुंचने वाली सूर्य की रोशनी की मात्रा में कमी आएगी।इस प्रकार यह ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में मदद कर सकता है।

कथन 2 सही है:
ज्वालामुखी विस्फोट से वातावरण में कई मिलियन टन सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जो सूरज की रोशनी को अवरुद्ध करने वाले बादल का निर्माण करते हैं,जिससे पृथ्वी की सतह पर सूर्य की रौशनी प्रवेश नहीं कर पाती है।कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रकार की स्थिति का निर्माण कर और वातावरण में सल्फर को इंजेक्ट करके, ऐसे ही बादल का निर्माण किया जा सकता है, जो सौर विकिरण को अवरुद्ध करेंगे और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद करेंगे।

कथन 3 गलत है:
प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान समुद्र में फाइटोप्लांकटन कार्बन के संचय में मदद करता है। लोहा की मात्रा में इन फाइटोप्लांकटन के लिए आवश्यक होती है।इसलिए, यदि हम समुद्र से लोहे को बाहर निकालने की कोशिश करते हैं, तो यह फाइटोप्लांकटन की वृद्धि को प्रभावित करेगा और इसके परिणामस्वरूप वातावरण में अधिक कार्बन का उत्सर्जन होगा।इस प्रकार यह ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाएगा।दूसरी ओर, यदि हम समुद्र में लोहे की मात्रा को बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तो यह फाइटोप्लांकटन की वृद्धि में मदद करेगा और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद करेगा।

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