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Question

Q31. Which of the following features are significant attributes of Indo- Islamic architecture?

  1. Arcuade style of architecture
  2. Arabesque method of decoration
  3. Jaali works in buildings
  4. Charbagh  style of gardening
  5. Pietra- dura technique

Select the correct answer using the codes given below:

 

Q31. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषताएँ इंडो-इस्लामिक वास्तुकला की महत्वपूर्ण देन हैं?

1.   वास्तुकला की धनुषाकार शैली

2.   सजावट की अराबेस्क विधि

3.   इमारतों में जाली का काम

4.   बागवानी की चारबाग शैली

5.   पित्रा-दूरा तकनीक

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:


  1. (a) Only 1, 2, 3 and 4 

    (a) केवल 1, 2, 3 और 4         

  2. (b) Only 2, 3 and 5
     

    (b) केवल 2, 3 और 5

  3. (c) Only 4 and 5          

    (c) केवल 4 और 5                  
  4. (d) All of the above

    (d) उपर्युक्त सभी


Solution

The correct option is D (d) All of the above

(d) उपर्युक्त सभी

Ans:31)(d)

Explanation: Some of the features of Indo-Islamic architecture are given as follows:

  • The use of arch and domes gained prominence during this period. It was known as ‘arcuade’ style of architecture and replaced the traditional Trabeat style of architecture.
  • The Islamic rulers introduced the use of minars around the mosques and the mausoleums.
  • Arabesque method was also used for decoration. Arabesque meant the use of geometrical vegetal ornamentation and was characterised by a continuous stem which split regularly, producing a series of counterpoised, leafy, secondary stems.
  • The buildings had intricate jaali works, which signifies the importance of light in Islamic religion.
  • The Islamic rulers introduced the Charbagh style of gardening, in which a square block was divided into four adjacent identical gardens.
  • The architectures of these times also used the pietra-dura technique for the inlay of precious stones and gems into the stone walls.

उत्तर:31)(d)

व्याख्या: इंडो-इस्लामिक आर्किटेक्चर की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इस अवधि के दौरान मेहराब और गुंबदों के उपयोग को प्रमुखता मिली। इसे वास्तुकला की 'आर्कुएट' शैली (धनुषाकार शैली) के रूप में जाना जाता था जिसने वास्तुकला की पारंपरिक ट्रैबिट शैली को बदल दिया गया था।
  • इस्लामिक शासकों ने मस्जिदों और मकबरों के आसपास मीनारों के उपयोग की शुरुआत की
  • अलंकार विधि का उपयोग सजावट के लिए भी किया जाता था। अराबेस्क का अर्थ था ज्यामितीय वनस्पति अलंकरण का उपयोग और एक अखण्ड तने की विशेषता थी जो नियमित रूप से विभाजित हो जाती है, जिससे प्रतिरूपित, पत्तेदार, माध्यमिक उपजी की एक श्रृंखला का उत्पादन होता है।
  • इमारतों में जालीदार काम किया जाता था, जो इस्लामी धर्म में प्रकाश के महत्व को दर्शाता है।
  • इस्लामिक शासकों ने चारबाग शैली को बागवानी के रूप में पेश किया, जिसमें एक चौकोर खंड को आसन्न समान उद्यानों में विभाजित किया गया था।
  • इन समय के स्थापत्य ने पत्थर की दीवारों में कीमती पत्थरों और रत्नों की जड़ के लिए पित्रा-दूरा तकनीक का भी इस्तेमाल किया।

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