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Question

Q33. In 1889 Indian National Congress session, a minority clause was adopted in the resolution demanding reform of legislative councils. According to the clause:

Q33. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1889 के अधिवेशन में, विधायी परिषदों में सुधार की मांग के प्रस्ताव में अल्पसंख्यक खंड को शामिल किया गया था। इस खंड के अनुसार:


  1. a) Wherever Parsis, Christians, Muslims or Hindus were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the population.

    a) जहां भी पारसी, ईसाई, मुस्लिम या हिंदू अल्पसंख्यक थे, परिषदों हेतु चुने जाने में उनकी संख्या जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकती थी।

  2. b) Wherever only Christians and Muslims were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the population.

    b) जहां भी केवल ईसाई और मुसलमान अल्पसंख्यक थे, परिषदों हेतु चुने जाने में उनकी संख्या जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकती थी।

  3. c) Wherever only Muslims were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the population.

    c) जहां भी केवल मुसलमान अल्पसंख्यक थे, परिषदों हेतु चुने जाने में उनकी संख्या जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकती थी।

  4. d) Wherever only Parsis and Christians were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the population.

    d) जहां भी केवल पारसी और ईसाई अल्पसंख्यक थे, परिषदों के लिए चुने जाने में उनकी संख्या जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकती थी।


Solution

The correct option is A

a) Wherever Parsis, Christians, Muslims or Hindus were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the population.

a) जहां भी पारसी, ईसाई, मुस्लिम या हिंदू अल्पसंख्यक थे, परिषदों हेतु चुने जाने में उनकी संख्या जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकती थी।


In 1889 Indian National Congress session, a minority clause was adopted in the resolution demanding reform of legislative councils. According to the clause, wherever Parsis, Christians, Muslims or Hindus were a minority their number elected to the Councils would not be less than their proportion in the Population. The reason given by the mover of the resolution was that India was not yet a homogenous country and political methods here had, therefore, to differ from those in Europe.

1889 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में, विधायी परिषदों के सुधार की मांग के प्रस्ताव में अल्पसंख्यक खंड को शामिल किया गया था। इस खंड के मुताबिक, जहां पारसी, ईसाई, मुस्लिम या हिंदू अल्पसंख्यक थे, परिषदों के लिए चुने  जाने में उनकी संख्या, जनसंख्या में उनके अनुपात से कम नहीं हो सकते थे। संकल्प के प्रणेताओं द्वारा दिया गया कारण यह था कि भारत उस समय तक एक समरूप देश नहीं था और इसलिए यूरोप में अपनाये गये राजनीतिक तरीकों से यहाँ के तरीके भिन्न होने चाहिए थे।

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