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Question

Read the following passage(s) and answer the items that follow each passage. Your answers to these items should be based on the passages only.

PASSAGE 1

Meanwhile, when I had finished my course work, I was assigned a project to design a low-level attack aircraft together with four other colleagues. I had taken up the responsibility of preparing and drawing the aerodynamic design. My team mates distributed among themselves the tasks of designing the propulsion, structure, control and instrumentation of the aircraft.

One day, my design teacher, Prof. Srinivasan, then the Director of the MIT, reviewed my progress and declared it dismal and disappointing. I offered a dozen excuses for the delay, but none of them impressed Prof. Srinivasan. I finally pleaded for a month‘s time to complete the task. The Professor looked at me for some time and said, “Look, young man, today is Friday afternoon. I give you three days’ time. If by Monday morning I don’t get the configuration drawing, your scholarship will be stopped.” I was dumbstruck. The scholarship was my lifeline and I would be quite helpless if it was withdrawn. I could see no other way out but to finish the task as I had been instructed. That night, I remained at the drawing board, skipping dinner. Next morning, I took only an hour’s break to freshen up and eat a little food. On Sunday morning, I was very near completion, when suddenly I felt someone else‘s presence in the room. Prof. Srinivasan was watching me from a distance. Coming straight from the gymkhana, he was still in his tennis outfit and had dropped in to see my progress. After examining my work, Prof. Srinivasan hugged me affectionately and patted my back in appreciation. He said, “I knew I was putting you under stress and asking you to meet an impossible deadline. I never expected you to perform so well.”

Q42. What does the passage imply about the protagonist of the passage?

निम्नलिखित परिच्छेदों को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के आगे आने वाले प्रश्नों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नों के आपके उत्तर इन परिच्छेदों पर ही आधारित होने चाहिए।

परिच्छेद-1

इसी बीच में, जैसे ही मैंने अपने अध्ययन का कार्य समाप्त किया, चार अन्य सहकर्मियों के साथ मुझे एक निम्न-स्तरीय आक्रमणकारी वायुयान की रूपरेखा बनाने की परियोजना का कार्य सौंपा गया। मैंने वायुगतिकीय रूपरेखा (एयरोडायनेमिक डिजाइन) और रेखाचित्र बनाने का उत्तरदायित्व स्वीकार किया था। मेरी टीम के सदस्यों ने वायुयान का प्रणोदन, संरचना, नियंत्रण और यंत्रीकरण का कार्य आपस में बाँट लिया था।

एक दिन डिजाइन के अध्यापक प्रोफेसर श्रीनिवासन (जो तब MIT के निर्देशक थे) ने मेरे कार्य प्रगति की समीक्षा की और उन्होंने उसे खराब और निराशाजनक घोषित कर दिया। मैंने देरी के लिए दर्जनों बहाने बनाये परन्तु उनमें से किसी का भी श्रीनिवासन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अन्ततः मैंने कार्य पूरा करने हेतु एक महीने के समय का निवेदन किया। प्रोफेसर ने कुछ समय के लिए मेरी ओर देखा और कहा, ‘‘देखो, नवयुवक, आज शुक्रवार का अपराहन है। मैं तुम्हे तीन दिन का समय देता हूँ। यदि सोमवार सुबह तक मुझे विन्यास का रेखाचित्र प्राप्त नहीं हुआ, तो तुम्हारी छात्रवृत्ति रोक दी जायेगी’’। मैं भौंचक हो गया। छात्रवृत्ति मेरी जीवनरेखा थी और यदि वह वापिस ले ली जाती तो मैं पूर तरह असहाय हो जाता। मुझे निर्देशानुसार कार्य को समाप्त करने के सिवास कोई और मार्ग नहीं दिख रहा था। उस रात, मैं भोजन को भूल कर ड्राइंग बोर्ड पर ही बना रहा। अगली सुबह, मैंने साफ-सफाई और थोड़े भोजन के लिए केवल एक घंटे का अवकाश लिया और रविवार की सुबह जब मैं अपने कार्य समाप्ति के निकट ही था, मुझे कमरे में किसी और की उपस्थिति का भान हुआ। प्रोफेसर श्रीनिवासन मुझे दूर से ही ध्यानपूर्वक देख रहे थे। जिमखाना से सीधे ही पहुंचे थे। टेनिस की ड्रेस में ही थे और मेरी प्रगति देखने के लिए चले आये थे। मेरी प्रगति की जायजा लेने के पश्चात उन्होंने मुझे स्त्रेह से गले लगा लिया और प्रशंसा से मेरी पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आभास था कि मैं तुम्हे तनाव में डाल रहा हूँ और तुम्हे एक असम्भव समयसीमा में कार्य पूर्ण करने कह रहा हूँ। परन्तु मुझे यह आशा नहीं थी कि तुम इतना अच्छा कार्य करोगे’’।

Q42. इस परिच्छेद के नायक के सम्बन्ध में इस परिच्छेद से क्या संकेत मिलता है?


  1. (a) Protagonist was a student of IIT.

    (a) नायक IIT का छात्र था।

  2. (d) Protagonist was a very strong team player.

    (d) नायक एक सशक्त टीम का खिलाड़ी था।

  3. (b) Protagonist was a bright student, though financially backward, who was studying on scholarship.

    (b) नायक यद्यपि वह आर्थिक रूप से पिछड़ा था, लेकिन प्रतिभाशाली छात्र था और छात्रवृत्ति पर पढ़ाई कर रहा था।

  4. (c) Protagonist was interested in sports, especially Tennis.

    (c) नायक की खेलकूल में रूचि थी, विशेषकर टेनिस में।


Solution

The correct option is C

(b) Protagonist was a bright student, though financially backward, who was studying on scholarship.

(b) नायक यद्यपि वह आर्थिक रूप से पिछड़ा था, लेकिन प्रतिभाशाली छात्र था और छात्रवृत्ति पर पढ़ाई कर रहा था।


“The scholarship was my lifeline and I would be quite helpless if it was withdrawn.” This shows that the student was on a scholarship and his finances were depended on that. So option (b) is the right answer.

Protagonist was in MIT not IIT. So option (a) is wrong.

There is no mention of protagonist being interested in sports and no mention of him being a good team player. So options (c) and (d) are also wrong.

छात्रवृति ही मेरी जीवनरेखा थी और यदि इसे हटा लिया जाता है तो मैं असहाय हो जाऊँगा", इससे प्रदर्शित होता है कि छात्र, छात्रवृति पर था और उसकी वित्तीय स्थिति उसी पर निर्भर थी। इसलिए विकल्प (b) सही उत्तर है।

नायक MIT में था IIT में नही। इसलिए विकल्प (a) गलत है।

परिच्छेद में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि नायक की खेलकूद में कोई रूचि थी और वह अच्छा टीम खिलाड़ी था। इसलिए विकल्प (c) और (d) भी गलत हैं।

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Q2.

पत्र अपने समय के महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की बातों/विचारों का दस्तावेज़ होता है। इसलिए महत्त्वपूर्ण पत्रों का संकलन भी किया जाता है और समय-समय पर उससे लाभ भी उठाया जाता है। तुम्हें पता होगा कि भारत की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी आंदोलन भी चला था जिसमें सरदार भगत सिंहभी शामिल थे। स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उनके द्वारा अपने मित्रों को लिखे गए एक पत्र को आगे दिया गया है। तुम इसे पढ़ो।


 

साथियों,

ज़िंदा रहने की ख्वाहिश कुदरती तौर पर मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन मेरा ज़िंदा रहना मशरूत (सशर्त) है। मैं बंदी बनकर या पाबंद होकर ज़िंदा रहना नहीं चाहता। मेरा नाम हिंदुस्तानी इंकलाब पार्टी का निशान बन चुका है और इंकलाब-पसंद पार्टी के आदर्शों और बलिदानों ने मुझे बहुत ऊँचा कर दिया है। इतना ऊँचा कि ज़िंदा रहने की सूरत में इससे ऊँचा मैं हरगिज़ नहीं हो सकता।

आज मेरी कमज़ोरियाँ लोगों के सामने नहीं हैं। अगर मैं फाँसी से बच गया तो वे ज़ाहिर हो जाएँगी और इंकलाब का निशान मद्धिम पड़ जाएगा या शायद मिट ही जाए। लेकिन मेरे दिलेराना ढंग से हँसते-हँसते फाँसी पाने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए बलिदान होने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि इंकलाब को रोकना साम्राज्यवाद की संपूर्ण शैतानी शक्तियों के बस की बात न रहेगी।

हाँ, एक विचार आज भी कचोटता है। देश और इंसानियत के लिए जो कुछ हसरतें मेरे दिल में थीं, उनका हज़ारवाँ हिस्सा भी मैं पूरा नहीं कर पाया। अगर ज़िंदा रह सकता तो शायद इनको पूरा करने का मौका मिल जाता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता।

इसके सिवा कोई लालच मेरे दिल में फाँसी से बचा रहने के लिए कभी नहीं आया। मुझसे ज़्यादा खुशकिस्मत और कौन होगा? मुझे आजकल अपने आप पर बहुत नाज़ है। अब तो बड़ी बेताबी से आखिरी इंतिहां का इंतज़ार है। आरज़ू है कि यह और करीब हो जाए।

आपका साथी

भगत सिंह


 

अब तुम बताओ कि

1. तुम्हें इस पत्र द्वारा आज़ादी से पहले किसके बारे में और क्या जानकारी मिली।

2. तुमने देखा कि पत्रों द्वारा तुम्हें देश-विदेश की ही नहीं बल्कि किसी भी समय, किसी भी महत्त्वपूर्ण बात की जानकारी मिल सकती है। तुम अपनी पसंद के विभिन्न समय, समाज और महत्त्वपूर्ण संदर्भों से जुड़े कुछ पत्रों का एक संकलन तैयार करो तथा उस पर अपने साथियों के साथ बातचीत भी करो।

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Q3.

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