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Question

The political-transition paradigm has been widely debated but its idealistic younger sibling, the transitional-justice paradigm, has rarely been scrutinized so critically. As the International Criminal Court runs out of steam, the heyday of transitional justice—with its clamour for more international tribunals and truth commissions—has passed. Whatever lawyers want us to believe, laws are made by people, and law cannot be morally superior to politics. In the aftermath of mass violence, we need a combination of serious historical research and pragmatic political solutions, not therapeutic legalism.

Q. Which one of the following is the best justification of the above passage?

राजनीतिक-संक्रमण प्रतिमान पर व्यापक चर्चाएँ हो चुकी हैं, किन्तु इसके आदर्शवादी लघु भ्राता संक्रान्तिक-न्याय प्रतिमान की कदाचित ही कभी इतनी गंभीरतापूर्वक छान-बीन की गयी है। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के अप्रभावी हो जाने के बाद, संक्रमणकालीन न्याय के बहार के दिन (और अधिक संख्या में अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरणों तथा सत्यता आयोगों की अपनी मांग के साथ) अब बीत चुके हैं। अधिवक्ता चाहे हमें किसी भी चीज़ का विश्वास क्यों न दिलाना चाहें, क़ानून लोगों द्वारा बनाए जाते हैं तथा क़ानून, राजनीति की अपेक्षा नैतिक रूप से श्रेष्ठ नहीं हो सकते। बड़े पैमाने पर हिंसा के बाद, हमें उपचारात्मक कर्मकांडवाद की नहीं बल्कि गंभीर ऐतिहासिक शोध तथा व्यावहारिक राजनीतिक समाधानों के मेल की आवश्यकता है।

Q. निम्नलिखित में से कौन-सा उपर्युक्त परिच्छेद के संदर्भ में सर्वाधिक तर्कसंगत कथन है?

A
An international legislative body is a perquisite to an international tribunal.

एक अंतर्राष्ट्रीय विधायिका किसी अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण की एक पूर्व-शर्त है।
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B
International issues are too closely watched to involve violation of justice.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर इतनी पैनी दृष्टि रखी जाती है कि इसमें न्याय का उल्लंघन हो ही नहीं सकता।
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C
Justice without institutional mechanisms to enforce decisions will lead to failure.

निर्णयों को प्रवर्तन के लिए संस्थागत तंत्र के बिना न्याय सफल नहीं हो सकता।
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D
International Criminal Court lacks popular mandate to qualify as a judicial body.

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के पास न्यायिक निकाय बनने का पर्याप्त लोकप्रिय अधिदेश नहीं है।
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Solution

The correct option is D International Criminal Court lacks popular mandate to qualify as a judicial body.

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के पास न्यायिक निकाय बनने का पर्याप्त लोकप्रिय अधिदेश नहीं है।
The passage mentions that laws are made by people, and law cannot be morally superior to politics. Here the passage is criticizing the international Criminal Court. Hence a correct justification of this can be the fact that international Criminal Court lacks popular mandate to qualify as a judicial body. Thus, option (d) is the correct answer.

Option (a) is incorrect because an international legislative body may not be a perquisite to an international tribunal. Option (b) is incorrect because despite being closely watched, international issues do involve violation of justice. Option (c) is also incorrect because lack of enforcing mechanisms is not discussed in the passage.

परिच्छेद में इस बात की चर्चा है कि क़ानून लोगों द्वारा बनाए जाते हैं तथा क़ानून, राजनीति की अपेक्षा नैतिक रूप से श्रेष्ठ नहीं हो सकते। यहाँ, परिच्छेद में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की आलोचना की जा रही है। इसलिए यह तथ्य, इस बात की सही अभिपुष्टि हो सकती है कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के पास न्यायिक निकाय बनने के लिए पर्याप्त लोकप्रिय अधिदेश नहीं है। इस प्रकार, विकल्प (d) सही उत्तर है।

विकल्प (a) असत्य है क्योंकि एक अंतर्राष्ट्रीय विधायिका किसी अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण की पूर्व-शर्त न हो, ऐसा भी हो सकता है। विकल्प (b) असत्य है चूँकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर कड़ी निगरानी रखे जाने के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों में न्याय का उल्लंघन भी सम्मिलित होता है। विकल्प (c) भी असत्य है क्योंकि इस परिच्छेद में प्रवर्तन तंत्र की चर्चा नहीं की गयी है।

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