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पिनाक मिसाइल

“पिनाक” या पिनाका , भारत में विकसित एक मल्टी-बैरेल मिसाइल प्रक्षेपास्त्र  है जिसे भारतीय सेना के लिए भारतीय  रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (D.R.D.O) द्वारा विकसित किया गया है। ‘पिनाक’ नाम  भगवान शिव  के धनुष के नाम से प्रेरित  है। इस प्रक्षेपास्त्र  प्रणाली में मार्क-1 एवं मार्क -2 रूप हैं | मार्क -1 के लिए 40 किलोमीटर और मार्क-2 के लिए 65 किलोमीटर की मारक क्षमता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (D.R.D.O)  ने साल 1980 में पिनाक सिस्टम को विकसित करने की शुरुआत की थी। 

इसके दस साल बाद पिनाका मार्क वन का परीक्षण भी सफल रहा। 15 फुट लंबी इस मिसाइल का वजन लगभग 280 किलो है और यह 100 किलो तक के एम्म्युनिसन के वहन में सक्षम है | यह  40 से 44  सेकंड में 100-100 कि.ग्रा. के 12 उच्च विस्फोटक रॉकेट का प्रक्षेपण  कर सकता है। अर्थात प्रति 4 सेकंड में 1 प्रक्षेपण |   गतिशीलता के लिए इसे  टेट्रा  ट्रक पर आरोहित किया गया  है। पिनाक कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की  सेवा में रह चुका है । इसके बाद इसे बड़ी संख्या में भारतीय सेना में शामिल कर दिया गया है। पिनाक प्रणाली  की एक बैटरी में 6  लॉन्‍च व्‍हीकल होते हैं, साथ ही लोडर सिस्टम, रडार और  एक “कमांड पोस्‍ट” भी  होती है | 

अंग्रेजी माध्यम में इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए देखें  Pinaka Multi-Barrel Rocket Launcher

हिंदी माध्यम में UPSC से जुड़े मार्गदर्शन के लिए अवश्य देखें हमारा हिंदी पेज  IAS हिंदी

पिनाक के बारे में संक्षिप्त जानकारी

पिनाक : एक नजर में 

लम्बाई  2.91 मी. (9 फूट  7 इंच ) से  5.17 मी. (17 फूट )
व्यास  122 मी.मी. (4.8 इंच ) से  214 मी.मी.  (8.4 इंच )
वजन  280 कि.ग्रा.
निर्माण   स्वदेसी ;1980 के दशक में 
निर्माता  भारतीय  रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (D.R.D.O)
मारक गति (rate of fire) प्रति 4 से.
प्रभावी मारक दूरी (effective range ) 37.5 की.मी. (23.3 मील) से  75 की.मी. (47 मिल )
अधिकतम मारक दूरी (maximum range ) 90 की.मी. (56 मील )

भारत के अन्य प्रक्षेपास्त्र 

1.प्रहार :  यह सतह से सतह पर  मार करने वाली एक मिसाइल है जिसका जुलाई 2011 में परीक्षण किया गया | इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है | ये कई तरह के वारहेड के वहन में सक्षम है | इसकी लंबाई 7.3 मीटर, वजन 1280 किलोग्राम और व्यास  420 मिलीमीटर है | 200 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाली इस मिसाइल का “रिएक्शन टाइम” काफी कम है | इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (D.R.D.O) ने बहुत ही  कम समय में विकसित किया है |

2.पृथ्वी : यह भी सतह से सतह पर  मार करने वाली कम दूरी की एक मिसाइल है | पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का प्रथम परीक्षण  1998 में  चाँदीपुर अंतरिम परीक्षण केंद्र से किया गया। इसकी न्यूनतम मारक क्षमता 40 किमी तथा अधिकतम मारक क्षमता 250 किमी है।

3.त्रिशूल :  यह कम दूरी का सतह  से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है।  इसकी मारक क्षमता ½ की. मी.  से 9 कि.मी तक है। इस मिसाइल की विशेषता यह है कि इसका उपयोग नीची उडान भर रहे विमानो को मार गिराने के लिये किया जाता है। त्रिशूल का एक  नौसेनिक संस्करण भी है जिसे ‘टारपीडो M K 2’ नाम से जाना जाता है। 

4.आकाश : यह भी  सतह  से हवा में मार करने वाला मध्यम दूरी का बहुलक्षीय प्रक्षेपास्त्र है जिसकी मारक क्षमता लगभग 25 कि.मी है। आकाश पहला  ऐसा  भारतीय प्रक्षेपास्त्र है, जिसके प्रोपेल्लेंट  में रामजेट सिद्धांतों का प्रयोग किया गया है। इसकी तकनीक की तुलना अमरीकी “पैट्रियाट मिसाइल” से की जाती है। यह  परम्परागत एवं परमाणु आयुध को ढोने की क्षमता रखता है तथा इसे मोबाइल लांचर से भी प्रक्षेपित किया  जा सकता है।

5.अग्नि :  सतह  से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलस्टिक मिसाइल है। अग्नि श्रेणी में कुल तीन प्रक्षेपास्त्र हैं : अग्नि-1 , अग्नि-2  एवं अग्नि-3 | अग्नि-1 के विकास का कार्य  1999 में शुरु हुआ था लेकिन परीक्षण 2002 में किया गया | इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था | यह 700  किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है | अग्नि-2 मिसाइल की मारक क्षमता 2000 किलोमीटर है और ये एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है | इसमें अति आधुनिक दिशा प्रणाली  और तकनीक है | अग्नि-3 परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखता है जिसका  2006 में परीक्षण किया गया  था जो पुर्णतः सफल नहीं रहा |  इसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है | 2007 , 2008 और 2010   में अग्नि-3 का सफल परिक्षण  किया गया |  3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइल 17 मीटर लंबी है और इसका व्यास  2  मीटर है |  ये 1.5 टन का पेलोड ले जा सकता है | यह  अति -आधुनिक कम्प्यूटर और दिशा प्रणाली से लैस  है तथा  परम्परागत तथा परमाणु दोनों प्रकार के विस्फोटकों को ढ़ोने की क्षमता रखती है। अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण नवंबर 2011 को किया गया | इसमें कई तरह की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है | ये पहली की मिसाइलों से हल्की है | परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम, लगभग एक हज़ार किलोग्राम के पेलोड क्षमता वाली अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल वस्तुतः  अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है |

6.नाग : यह एक  टैंक रोधी निर्देशित प्रक्षेपास्त्र है जिसकी मारक क्षमता 4 किमी है।1990 में इसका प्रथम सफल परीक्षण किया गया था |

7.धनुष : यह भी सतह  से सतह पर मार करने वाले प्रक्षेपास्त्रों में से एक है और मूलतः पृथ्वी  प्रक्षेपास्त्र का ही  एक  नौसैनिक रूपान्तरण है।  इसकी मारक क्षमता 150 किमी है तथा इस पर लगभग 500 किग्रा आयुध प्रक्षेपित किया जा सकता है।

8.सागरिका : यह एक “सबमरीन लांच  बैलेस्टिक मिसाइल”  है, जिसे पनडुब्बी से प्रक्षेपित किया जा सकता है । समुद्र के भीतर से इसका पहला परीक्षण  2008 में किया गया था ।  यह भी  परम्परागत एवं परमाणु दोनों ही तरह के आयुध (warhead) ले जाने में सक्षम है। इसे भी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के द्वारा तैयार किया गया है। गौरतलब है कि सागरिका के सफल परीक्षण के बाद अमेरिका, फ्रांस,रूस एवं चीन के अलाव  भारत ऐसा पाँचवा देश बन गया  है जिसके पास पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता है। 

9. अस्त्र : यह मध्यम दूरी का हवा से हवा में मार करने वाला और स्वदेशी तकनीक से विकसित प्रक्षेपास्त्र है। इसकी मारक क्षमता 10 से 25 किमी है। यह भारत का प्रथम हवा से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है। 

10. ब्रह्मोस : भारत एवं रूस के संयुक्त प्रयास से  विकसित प्रेक्षपास्त्र ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रहम्पुत्र नदी तथा रूस की मोस्को नदी के नाम पर रखा गया  है। यह सतह से सतह पर मार करने वाला मध्यम दूरी का सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसका प्रथम सफल परीक्षण 2001 में किया गया था और  2007 में इसे भारतीय थल सेना में सम्मिलित किया गया। इसकी मारक क्षमता लगभग 290 कि.मी तक है और यह  200 किलोग्राम वजन तक के  परमाणु बम के वहन  में सक्षम है | इसकी गति  ध्वनि की लगभग तीन गुना तेज  है। यह एक  क्रूज मिसाइल का उदाहारण है |

11.प्रदुम्न : यह एक  इंटरसेप्टर मिसाइल  है । पृथ्वी मिसाइल की तकनीक से साम्य के कारण इसका नाम “पृथ्वी एयर डिफेन्स” रखा गया |  इसका परीक्षण  2007 में  किया गया था ।

12.शौर्य : शौर्य मिसाइल सतह से सतह पर मार करने में सक्षम, मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल है जिसका सफल  परीक्षण 2011 में किया गया था | हालाँकि इसका पहला परीक्षण 2004 में किया गया था |  शौर्य मिसाइलों की मारक क्षमता 700 किलोमीटर है | यह दो चरणों वाले ठोस प्रणोदकों (propellent)  से युक्त है और  500-800 कि.ग्रा. तक के  पे-लोड के वहन में सक्षम  है | यह मिसाइल जमीन के अलावा पानी के भीतर से भी प्रक्षेपित की  जा सकती है | 

13.निर्भय : यह देश की पहली अध्वनिक (subsonic) मिसाइल है जिसका परिक्षण  2014 में  किया गया | DRDO द्वारा विकसित यह स्वदेशी मिसाइल  टर्बोजेट इंजन और ठोस प्रणोदकों पर आधारित है  इसकी रफ़्तार 0.65 मैक है तथा  यह 450 किग्रा. तक के पेलोड का वहन कर सकती है | इसकी मारक क्षमता  800-1000 किलो मीटर की है |  इस मिसाइल की मुख्य विशेषता यह है कि एक निश्चित ऊंचाई पर पहुँचने के बाद इसमें लगे पंख खुल जाते हैं और यह एक विमान की तरह काम करने लगती है | साथ ही  यह कम ऊंचाई पर उडती है जिसकी वजह से ये राडार के पकड़ में आसानी से नहीं आती | इसे दूर से भी  नियंत्रित किया जा सकता है | यह भी क्रूज मिसाइल का उदाहारण है |

बैलिस्टिक एवं क्रूज़ मिसाइल में अंतर  

प्रक्षेपास्त्र /मिसाइल मुख्यतः 2 प्रकार के होते हैं | बेलिस्टिक मिसाइल एवं क्रूज़ मिसाइल | बैलिस्टिक से आशय ऐसे प्रक्षेपास्त्र से है जिसमें इसके प्रक्षेपण के लिए तो आवश्यक बल लगाया जाता है , किन्तु जमीन पर स्थित लक्ष्य पर गिरने के लिए उसे गुरुत्वाकर्षण के सहारे छोड़ दिया जाता है । जबकि क्रूज मिसाइल  अपने लक्ष्य को खोज कर उस पर प्रहार करती है। बैलिस्टिक मिसाइल को अधिक ऊंचाई पर प्रक्षेपित किया जाता है जबकि क्रूज मिसाइल को कम ऊंचाई पर |  ब्रह्मोस एवं निर्भय  क्रूज मिसाइल का उदाहारण है, जबकि पृथ्वी, अग्नि, धनुष इत्यादि बैलिस्टिक मिसाइल के |

DRDO क्या है ?

D.R.D.O (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन-Defence Research and Development Organisation)   भारत की सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की सर्वोच्च  संस्था है। यह संगठन भारत सरकार के  रक्षा मंत्रालय की एक  ईकाई के रूप में काम करता है। इसकी स्थापना 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली है | वर्तमान में संस्था की 50 से भी अधिक  प्रयोगशालाएँ हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान में कार्यरत हैं। इन प्रयोगशालाओं में 5000  से  भी  अधिक वैज्ञानिक कार्यरत हैं | संगठन का नेतृत्व भारत सरकार के रक्षा मंत्री  के  वैज्ञानिक सलाहकार  द्वारा किया जाता है । “बलस्य मूलम् विज्ञानम्” – अर्थात  “शक्ति का स्रोत विज्ञान है” इस सन्गठन का आदर्श वाक्य है | इस संस्था के अंतर्गत कुछ प्रमुख इकाइयां इस प्रकार हैं :-

  1. एडवांस्ड नूमेरिकल रिसर्च एण्ड एनालिसिस ग्रुप (ANURAG ) – हैदराबाद;
  2. एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी – हैदराबाद
  3. एरियल डेलीवेरी रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ईस्टैब्लिश्मन्ट – आगरा
  4. ऐरोनोटिकल डेवलपमेंट ईस्टैब्लिश्मन्ट – बेंगलुरू
  5. अर्नमेंट्स रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ईस्टैब्लिश्मन्ट – पुणे
  6. सेंटर फॉर ऐरबोर्न सिस्टम – बेंगलुरू
  7. सेंटर फॉर आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स एण्ड रोबाटिक्स – बेंगलुरू
  8. सेंटर फॉर फायर एक्सप्लोसिव एण्ड एनवायरनमेंट सैफ्टी – दिल्लीकम्बैट वीइकल रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ईस्टैब्लिश्मन्ट – चेन्नई
  9. डिफेन्स फूड रिसर्च लेबोरेटरी – मैसूर
  10. टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी  – चंडीगढ़

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