11 जुलाई 2022 : समाचार विश्लेषण
|
A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: राजव्यवस्था:
C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E.सम्पादकीय: स्वास्थ्य:
आधारभूत संरचना:
राज्यव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G.महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : |
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
आईटी एक्ट की धारा 69ए पर ट्विटर की याचिका:
राजव्यवस्था:
विषय: भारत का संविधान – विशेषताएं और महत्वपूर्ण प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए)।
मुख्य परीक्षा: आईटी अधिनियम की धारा 69 (ए) के प्रावधानों का कार्यान्वयन और इससे जुड़े विभिन्न मुद्दे।
संदर्भ:
- ट्विटर पर पोस्ट की गई कुछ सामग्री को हटाने के केंद्र सरकार के आदेशों के खिलाफ ट्विटर ने जो याचिका याचिका दायर की थी उसकी सुनवाई कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुरू कर दी है।
पृष्ठ्भूमि:
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फरवरी 2021 से 2022 के बीच ट्विटर को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT अधिनियम) की धारा 69 (A) के तहत लगभग 1,400 खातों और 175 ट्वीट को हटाने का आदेश दिया था।
- इनमे से कुछ लंबित आदेशों (blocking orders) पर पुनर्विचार करने के लिए ट्विटर मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है।
- हालांकि, मंत्रालय ने जून में ट्विटर को आदेशों का पालन करने का अंतिम अवसर दिया था और यह भी कहा था कि इन आदेशों का पालन न करने पर “गंभीर परिणाम” भुगतने की चेतावनी दी थी ।
- वहीँ दूसरी और ट्विटर ने आरोप लगाया है कि इनमें से कुछ आदेश आईटी अधिनियम की धारा 69ए के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए):
- अधिनियम की धारा 69A के अनुसार यदि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन हैं तो केंद्र सरकार किसी भी एजेंसी या उसके मध्यस्थों के माध्यम से किसी भी कंप्यूटर पर पारेषित, प्राप्त या संग्रहित किसी भी जानकारी को जनता तक न पहुंचाने का आदेश दे सकती है।
- भारत की संप्रभुता या अखंडता, भारत की रक्षा।
- राज्य की सुरक्षा।
- विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध।
- किसी संज्ञेय अपराध को उकसाने से रोकने के लिए सार्वजनिक आदेश या आयोग।
- किसी भी अपराध की जांच के लिए।
- इस अधिनियम के तहत सरकार के पास राष्ट्र हित में इंटरनेट साइटों को ब्लॉक करने का अधिकार है। इस अधिनियम में किसी भी साइट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया और सुधार उपाय भी हैं।
- यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 19 के दायरे में आता है,जो भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, क्योंकि अनुच्छेद का खंड 2 सरकार (देश में) को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर “उचित प्रतिबंध” लगाने का अधिकार देता है जो आईटी अधिनियम की धारा 69A के समान हैं।
- किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को प्रसारित न करने के सभी आदेश लिखित रूप में होने चाहिए।
- आदेशों का पालन न करने पर या उसमे विफल रहने पर सोशल मीडिया बिचौलियों को अधिक से अधिक 7 साल तक के कारावास के अतिरिक्त जुर्माना का भी प्रावधान है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:- Information Technology Act, 2000
प्रावधानों के कार्यान्वयन की प्रक्रिया:
- इन प्रावधानों को क्रियान्वित करने की प्रक्रियाओं का उल्लेख सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना की पहुंच को कम के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 में किया गया है।
- इसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा नामित अधिकारी और एक परीक्षा समिति को सामग्री हटाने का अनुरोध प्राप्त होने के 48 घंटों के भीतर सामग्री को सत्यापित करना होगा।
- इस नियम के तहत नामित अधिकारी और एक परीक्षा समिति सामग्री के प्रवर्तक (प्रणेता) को स्पष्टीकरण देने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
- इन सिफारिशों को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव को अनुमोदन के लिए भेजा जाता है ताकि सोशल मीडिया मध्यस्थ द्वारा इस सामग्री को आगे बढ़ाने से प्रतिबंधित किया जा सके।
- इस अधिनियम में ऐसे आपातकालीन प्रावधान भी हैं, जिनके तहत विशिष्ट कारणों की वजह से ऐसी सामग्री को हटाने के 48 घंटों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा जा सकता है।
- इसमें पूरी जांच के बाद लंबित आदेशों को रद्द किया जा सकता है।
- इस अधिनियम के नियम 16 में यह में यह प्रावधान हैं कि सरकार के सभी अवरुद्ध आदेशों और अनुरोधों के जवाब में एक मध्यस्थ द्वारा की गई कार्रवाई को हर हाल में गोपनीय रखना होगा।
- इस प्रावधान की आलोचना इसलिए की गई है क्योंकि यह सम्पूर्ण प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
ट्विटर द्वारा हाइलाइट किए गए प्रक्रियात्मक मुद्दे:
- ट्विटर का दावा है कि सरकार यूआरएल (URLs) और अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए सिर्फ धारा 69ए के शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, फतेहगढ़ बनाम राम मनोहर लोहिया मामले (1960) में अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक हित में लगाए गए प्रतिबंधों का उद्देश्य सही होना चाहिए और यदि संयोजन सही नहीं है ,काल्पनिक या असंबद्ध” है तो प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे।
- हालांकि, ट्विटर ने यह आरोप लगाया है कि सरकार ने इसके पीछे ऐसे कारण नहीं बताए हैं जो यह साबित करते हो कि प्रतिबंध सार्वजनिक व्यवस्था के हित में या किसी अन्य कारण से आवश्यक थे।
- दायर की गई याचिका में ट्विटर का कहना है कि उसके द्वारा केवल अधिकृत इकाई से “वैध और उचित दायरे वाले अनुरोध” के आधार पर उल्लंघनकारी सामग्री को प्रतिबंधित किया जाता है।
- ट्विटर ने ऐसे प्रतिबंधों के आदेशों के खिलाफ चिंता जताई है जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत खातों को अवरुद्ध करना है न कि विशिष्ट सामग्री को।
- ट्विटर ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि क्या इस कानून का दायरा पहले से ट्विटर पर मौजूद सामग्री तक सीमित है जिसे भविष्य में संभावित रूप से विस्तारित किया जा सकता है (अवरुद्ध व्यक्तियों द्वारा)।
- ट्विटर ने यह भी कहा है कि जिस आधार पर मंत्रालय द्वारा कई खातों और पोस्ट को प्रतिबंधित करने का जो आदेश दिया है वह मनमाना है क्योंकि इसमें प्रवर्तक को पूर्व सूचना और अनिवार्य तौर पर उसकी सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
- इसके अलावा, इनमें से प्रतिबंधित के कुछ आदेश राजनीतिक दलों और पत्रकारों के आधिकारिक खातों से संबंधित हैं, जो कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हैं।
आईटी अधिनियम की धारा 69 (ए) के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट के विचार:
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आईटी अधिनियम की धारा 69 ए की संवैधानिकता को इस आधार पर बरकरार रखा कि वेबसाइट को अवरुद्ध करने का आधार वही था जो अनुच्छेद 19 के खंड 2 में था।
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उस खंड के प्रावधानों को भी स्वीकार किया था, जिसमें सामग्री के लेखक और मध्यस्थ की सुनवाई का अवसर देने का प्रावधान था।
- इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में सुझाव दिया है कि आपत्तिजनक सामग्री का मूल्यांकन “मजबूत दिमाग वाले, दृढ़ और साहसी” व्यक्ति के मानकों से किया जाना चाहिए न की एक “कमजोर” व्यक्ति के दृष्टिकोण से नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसा व्यक्ति हर विरोधी दृष्टिकोण को खतरे के तौर पर देखता हैं।
|
सारांश:
|
|---|
संपादकीय-द हिन्दू
सम्पादकीय:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
स्वास्थ्य:
आयुर्वेद के लिए वर्तमान दृष्टिकोण क्या है?:
विषय: सामाजिक क्षेत्र व स्वास्थ्य से संबंधित सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
मुख्य परीक्षा: आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़ी चुनौतियाँ और प्रमुख सिफारिशें।
संदर्भ:
- इस लेख में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की गई है।
आयुर्वेद:
- आयुर्वेद भारत की पारंपरिक औषधियों का ज्ञान है जो लगभग तीन हजार वर्षों से प्रचलन में है।
- आयुर्वेद की खोज का श्रेय हिंदू पौराणिक कथाओं में देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि को दिया जाता है।
- उपचार की इस प्रणाली में शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाकर रोगों का इलाज किया जाता है।
- चरक को ‘आयुर्वेद का जनक’ कहा जाता है।
- आयुर्वेदिक उपचार आकाश (अंतरिक्ष), जल (जल), पृथ्वी (पृथ्वी), तेज (अग्नि) और वायु (वायु) नामक पांच तत्वों के संतुलन पर केंद्रित है।
- आयुर्वेद के अनुसार तीन दोषों में पित्त (अग्नि और जल), वात (वायु और अंतरिक्ष) और कफ (पृथ्वी और जल) शामिल हैं।
वर्तमान में आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली से जुड़ी चुनौतियाँ:
- चूंकि आयुर्वेद एक प्राचीन उपचार प्रणाली है, इसलिए वर्तमान संदर्भ में इसके पूरी तरह से प्रासंगिक होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में वर्तमान में कुछ अप्रचलित उपचार पद्धतियों के साथ-साथ कुछ उपयोगी उपचार पद्धतियां भी हैं।
- उदाहरण: आयुर्वेद कहता है कि “आराम की भावना, बेहतर फिटनेस, आसान पाचन, आदर्श शरीर-वजन और शारीरिक विशेषताओं में सुंदरता आदि नियमित व्यायाम से प्राप्त होने वाले लाभ हैं” जो आज भी प्रासंगिक और मान्य है।
- हालाँकि, आयुर्वेद का सिद्धांत जो कि मूत्र निर्माण पर गुर्दे की भूमिका की उपेक्षा करता है, अप्रासंगिक माना जाता है।
- उदाहरण: आयुर्वेद कहता है कि “आराम की भावना, बेहतर फिटनेस, आसान पाचन, आदर्श शरीर-वजन और शारीरिक विशेषताओं में सुंदरता आदि नियमित व्यायाम से प्राप्त होने वाले लाभ हैं” जो आज भी प्रासंगिक और मान्य है।
- आयुर्वेद के शिक्षकों को प्राचीन अटकलों और स्थापित वैज्ञानिक तथ्यों के बीच अंतर करने में कठिनाई होती है।
- आयुर्वेद का त्रिदोष सिद्धांत एक अपरिष्कृत और वैज्ञानिक मॉडल है जिसका उपयोग लेखकों के द्वारा चिकित्सा अनुभवों को व्यवस्थित करने हेतु किया गया था।
- निदान के उपायों और उपचार के तरीकों को इस अनुमानी मॉडल के आधार पर वर्गीकृत किया गया था।
- चूंकि स्वास्थ्य और बीमारी के पीछे की जैविक प्रक्रियाओं की समझ की कमी थी, इसलिए अटकलों ने भी इस मॉडल में अपनी जगह बना ली।
- इसलिए, इस मॉडल में मान्य पहलुओं के साथ-साथ काल्पनिक बातें भी शामिल होती हैं।
- इसके अलावा, आयुष मंत्रालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के अनुसंधान केंद्र अभी भी मानते हैं कि चूंकि आयुर्वेद संतों द्वारा खोजा गया है, इसलिए यह वर्तमान में भी प्रासंगिक है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेद छात्रों को यह विश्वास दिलाने में असफल रहा है कि आयुर्वेद एक “अति-परिष्कृत उन्नत विज्ञान” है।
सुझाव:
- आर्य वैद्य शाला कोट्टक्कल के पी.एस.वेरियर ने बताया कि “आयुर्वेद के सरीरस्थान: (Sareerasthana) खंड जो शरीर की संरचना और कार्य से संबंधित है, को संशोधित किया जाना चाहिए तथा अन्य प्रमुख वर्गों की भी समीक्षा और सुधार किया जाना चाहिए।
- देबिप्रसाद चट्टोपाध्याय और प्रियव्रत शर्मा जैसे विद्वानों ने भी आयुर्वेदिक ग्रंथों की समीक्षा और संशोधन का आह्वान किया है।
- इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स के “कन्फेशंस ऑफ ए आयुर्वेद प्रोफेसर” नाम के एक लेख में भी आयुर्वेद में सुधार और संशोधन का आग्रह किया गया है।
- लेखक ने स्वीकार किया है कि आयुर्वेदिक में निहित शरीर रचना विज्ञान और शरीर विज्ञान ज्यादातर पुराना है तथा इस विषय के संबंध में उल्लिखित दृष्टिकोण गुमराह कर रहे हैं।
- लेखक ने पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव का आह्वान किया है।
|
सारांश:
|
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
आधारभूत संरचना:
उत्पादकता की राह:
विषय: आधारभूत संरचना: सड़कें।
मुख्य परीक्षा: आर्थिक विकास हासिल करने में शहरों और बुनियादी ढांचे का महत्व।
संदर्भ:
- इस लेख में आर्थिक विकास में शहरों तथा सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में चर्चा की गई है।
आर्थिक विकास में शहरों का महत्व:
- दुनिया भर के देशों ने COVID महामारी के दौरान राष्ट्रीय और व्यापक आर्थिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में शहरों के महत्व को महसूस किया है।
- बार्कलेज की एक रिपोर्ट ने बताया कि “कुल आर्थिक नुकसान कुआलालंपुर, मनीला, दिल्ली और मुंबई के बंद होने से प्रति सप्ताह $ 1 बिलियन- $ 1.7 बिलियन का नुकसान हुआ।
- विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में महामारी से प्रेरित लॉकडाउन ने भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
- शहर अपने श्रम बाजार के माध्यम से आर्थिक उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि श्रम बल अपने श्रम का आदान-प्रदान करते हैं तथा ज्ञान का विस्तार करते है।
- एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी योजनाकार एलेन बर्टौद के अनुसार “शहरों तथा उनकी नौकरियों में महत्वपूर्ण मात्रा में आर्थिक और उत्पादक गतिविधियाँ होती हैं”।
- इसके अलावा, एक शहर का प्रभावी श्रम बाजार जितना बड़ा होगा, उसकी अर्थव्यवस्था एवं ज्ञान का फैलावभी उतना ही अधिक होगा।
बेहतर सड़क और बुनियादी ढांचे का महत्व:
- श्रम बल यात्रा का समय और उत्पादकता के बीच संबंध- श्रम बल की कार्यस्थल तक की यात्रा का समय शहरों में उनकी उत्पादकता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- किसी शहर में आवागमन का समय जितना लंबा होगा, उसका प्रभावी श्रम बाजार उतना ही छोटा होगा।
- यात्रा के समय और शहर में सड़कों की स्थिति का श्रम बाजार के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर भारी प्रभाव पड़ता है
- कर्नाटक के शहरों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि सड़क की लंबाई का शहर के कर आधार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
- ऐसा इसलिए है क्योंकि बेहतर सड़कें नौकरियों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करती हैं और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाती हैं, जिससे जनता को अपने करों का भुगतान करने की प्रेरणा मिलती है।
- इसके अलावा, अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि एक शहर की सड़क की लंबाई में हर एक किमी की वृद्धि शहरी स्थानीय निकायों (ULB) के राजस्व में लगभग ₹ 430 प्रति व्यक्ति की वृद्धि करती है।
भारत के शहरों में सड़कों की समस्या:
- 2016 में, यह देखा गया कि काम करने के लिए यात्रा का समय बेंगलुरु (22 किमी / घंटा पर सबसे धीमा), दिल्ली (25 किमी / घंटा), और चेन्नई (33 किमी / घंटा) जैसे शहरों में सबसे धीमा था।
- इसके अलावा, यात्रा का समय महामारी के बाद भी बढ़ता जा रहा है क्योंकि ULB आर्थिक रूप से तनावग्रस्त हैं और गड्ढों जैसी समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ हैं।
- बेंगलुरु में निजी फर्मों ने शहर छोड़ने और यातायात की समस्याओं को ठीक नहीं करने पर स्थानांतरित करने की चेतावनी दी थी, क्योंकि यह उनके कर्मचारियों की उत्पादकता को प्रभावित कर रहा था।
भावी कदम:
- विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों को इस तरह विकसित करने की जरूरत है कि आने-जाने का समय कम हो और शहर के भीतर आने-जाने की लागत भी कम हो।
- ULB को सड़क नेटवर्क जैसे बुनियादी ढांचे के विकास में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि इसके विकास से राजस्व में वृद्धि होगी।
- इसके अलावा, सड़कों पर गड्ढों को ठीक करने जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार से यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी आएगी जो न केवल शहरों के प्रभावी श्रम बाजारों एवं उनके आर्थिक उत्पादन को बढ़ाती है बल्कि स्कूली शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार करती है जिसके परिणामस्वरूप निवासियों की समग्र भलाई होती है।
|
सारांश:
|
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राज्यव्यवस्था:
कानून की नज़र में आज़ादी का महत्व:
विषय: भारत के संविधान की विशेषताएं और महत्वपूर्ण प्रावधान।
मुख्य परीक्षा: भारत में आपराधिक कार्यवाही के विषय में चिंता।
संदर्भ:
- हाल ही में AltNews वेबसाइट के सह-संस्थापक की गिरफ्तारी हुई है।
विवरण:
- इस व्यक्ति को दिल्ली पुलिस ने उसके ट्वीट के लिए, जो लगभग चार साल पहले अज्ञात व्यक्तियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के कारण गिरफ्तार किया गया है ।
- उन पर IPC की धारा 153A (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-A (दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा) के तहत आरोप शामिल है।
- इसने भारत में आपराधिक कार्यवाही पर बहस को सुर्खियों में ला दिया है।
भारत में आपराधिक कार्यवाही को लेकर उठी चिंता:
अनावश्यक गिरफ्तारियों का प्रभाव:
- आलोचकों का कहना है कि एक मामले में किसी व्यक्ति को समन करने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तार करना सही नहीं है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि गलत और गैरजरूरी गिरफ्तारियों के बाद फैसले में देरी से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
- इसके अलावा, कई बार ऐसी गलत गिरफ्तारी के लिए पुलिस को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता है।
तलाशी और जब्ती पर:
- आलोचकों का कहना है कि पुलिस को वारंट रहित तलाशी और जब्ती की व्यापक शक्तियां दी गई हैं, जिसके लिए पुलिस को तलाशी से पहले अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होती है।
- इसके अलावा, कानून के तहत संपत्ति को जब्त करने की पुलिस की एकमात्र शक्ति यह है कि क्या ऐसी संपत्ति “ऐसी परिस्थितियों में बनाई गयी हो जो किसी भी अपराध के संबंध में संदेह पैदा करती हैं” जिसकी जांच आसानी से सकती है।
- इसके अलावा, कोई अलग वैधानिक नियम नहीं हैं जो फोन और लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरणों की खोज और जब्ती को प्रतिबंधित करते हैं।
जमानत के प्रावधानों पर:
- गैर-जमानती अपराधों के मामले में (आरोपी के लिए जमानत का कोई अधिकार नहीं है), जमानत देना न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर है जो कि किसी भी वैधानिक मानदंडों या नियमों द्वारा विनियमित नहीं है।
- आलोचकों का कहना है कि न्यायिक विवेक का प्रयोग आरोपों की गंभीरता और लंबित जांच के हितों जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखना चाहिए।
|
सारांश:
|
|---|
प्रीलिम्स तथ्य:
1. खेजड़ी का पेड़ और बिश्नोई आंदोलन:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
पर्यावरण:
विषय: जैव विविधता और संरक्षण।
प्रारंभिक परीक्षा: खेजड़ी वृक्ष एवं बिश्नोई आंदोलन।
संदर्भ:
- राजस्थान के जोधपुर जिले में आठ सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का विरोध बिश्नोई समाज द्वारा किया जा रहा हैं।
खेजड़ी के पेड़:
- खेजरी (प्रोसोपिस सिनेरिया-Prosopis cineraria) फैबेसी (मटर परिवार) में फूलों के पेड़ की एक प्रजाति है।
- इसे गफ़ (Ghaf) (मध्य पूर्व में), छोंकारा (उत्तर प्रदेश) और जम्मी (तेलंगाना) भी कहा जाता है।
- यह पेड़ भारत में राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश के शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है इसके अलावा यह अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान में भी पाया जाता है।
- इस पेड़ को अत्यधिक रेगिस्तानी परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता के कारण ‘रेगिस्तान का कल्पवृक्ष’ और ‘रेगिस्तान का राजा’ और ‘आश्चर्यजनक वृक्ष’ (wonder tree) के रूप में भी कहा जाता है।
- यह वृक्ष शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- राजस्थान का राजकीय वृक्ष खेजड़ी है।
- खेजड़ी का वृक्ष मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करने वाला वृक्ष है साथ ही यह मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाता है।
- खेजड़ी के पेड़ की पत्तियों का पोषक मूल्य उच्च होता है जिसे स्थानीय रूप से ‘लूंग’ (loong) कहा जाता है और पेड़ की छाल का उपयोग बिच्छू और सांप के काटने के इलाज में किया जाता है।
- बिश्नोई आंदोलन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Bishnoi Movement
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. कंगारू कोर्ट ट्रायल के बाद असम का एक आदमी जल गया:
- मध्य असम के नागांव जिले में एक कंगारू अदालत द्वारा 22 वर्षीय महिला की हत्या का दोषी ठहराए जाने के बाद एक व्यक्ति को कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया।
- एक कंगारू अदालत उस अदालत को कहते हैं,जिसे गैर क़ानूनी रूप से स्थापित किया जाता है।
- हालाँकि इस क्षेत्र में इनको कोई आधिकारिक समर्थन नहीं मिलता है।
- ये भी जरूरी नहीं हैं कि ये अदालतें कानून द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करें।
- इसे कंगारू अदालतें नाम दिया गया है क्योंकि उनकी कार्यवाही जल्दी आहूत की जाती है,और इसलिए भी कि उनकी न्याय कार्यवाही कंगारू की तरह “छलांग जैसी” होती है, जो बताती है कि इसमें सबूतों की उपेक्षा की जाती हैं।
2. सेना को नए उपयोगी हेलीकॉप्टरों की जरुरत हैं:
- पुराने हो रहे चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के मद्देनजर,सेना उड्डयन निकाय (Army Aviation Corps) स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों को शामिल करके अपनी मारक क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रही है।
- Ka-226T और स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) को शामिल करने से युद्ध क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
- LUH को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
- अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर बोइंग के अमेरिकी ट्विन-टर्बोशाफ्ट अटैक हेलीकॉप्टर हैं।
- कामोव ka-226 (Kamov Ka-226) एक छोटा दोहरा/जुड़वां (twin-engine) इंजन वाला रूसी हेलीकॉप्टर है।
3. नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से राजस्व कम होगा:
- इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) के एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत और रूस, ब्राजील और चीन जैसे अन्य प्रमुख विकासशील देशों में जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में परिवर्तन के लिए वित्तीय चुनौतियों का सामना कर सकता है क्योंकि जीवाश्म ईंधन से मिलने वाले राजस्व पर उनकी उच्च निर्भरता है।
- भारत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध आयातक होने के बावजूद, पेट्रोल, डीजल और तेल की खपत पर उपकरों और करों से महत्वपूर्ण मात्रा में राजस्व अर्जित करता है।
- वर्तमान में जीवाश्म ईंधन के उत्पादन और खपत से सार्वजनिक राजस्व के तौर पर रूस में सामान्य सरकारी राजस्व का 34%, भारत में 18%, इंडोनेशिया में 16%, ब्राजील में 8% और दक्षिण अफ्रीका में 6% होता है।
- अध्ययन बताता है कि 2050 तक, ब्राजील, रूस, इंडोनेशिया, भारत और चीन में कुल जीवाश्म ईंधन राजस्व $ 570 बिलियन तक हो सकता है, जो कि सामान्य व्यापार परिदृश्य से कम है।
- भारत ($178 बिलियन), चीन ($140 बिलियन) और रूस ($134 बिलियन) में व्यापक अंतराल होने की उम्मीद है।
- इससे भारत ($178 बिलियन),चीन ($140 बिलियन) और रूस ($134 बिलियन) में सबसे बड़ा अंतराल होने की उम्मीद है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन सा बिश्नोई आंदोलन (Bishnoi Movement) का सबसे अच्छा वर्णन है ? (स्तर – मध्यम)
(a) उत्तराखंड में बड़े बांधों के निर्माण का विरोध।
(b) एक सदाबहार उष्णकटिबंधीय जंगल, साइलेंट वैली की सुरक्षा के उद्देश्य से एक सामाजिक आंदोलन।
(c) राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों और अन्य वन्यजीवों जैसे मृग, हिरण और जंगली पक्षियों की रक्षा के लिए एक आंदोलन।
(d) ओडिशा में प्रवासी पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता हेतु जागरूकता अभियान।
उत्तर: c
व्याख्या:
- बिश्नोई आंदोलन राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों और अन्य वन्यजीवों जैसे मृग, हिरण और जंगली पक्षियों की रक्षा के लिए एक आंदोलन है।
- यह बिश्नोई समुदाय द्वारा राजस्थान में 18 वीं शताब्दी के शुरुआती भाग में शुरू किया गया था और इसे पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और हरित जीवन हेतु पहले संगठित समर्थकों में से एक माना जाता है।
प्रश्न 2. वेल्लोर विद्रोह के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)
- वेल्लोर विद्रोह 1857 के विद्रोह से लगभग एक दशक पहले हुआ था।
- यह ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भारतीय सिपाहियों द्वारा बड़े पैमाने पर और हिंसक विद्रोह का पहला उदाहरण था।
- इसके प्रमुख कारणों में से एक, हिंदू और मुस्लिम सिपाहियों की धार्मिक संवेदनाओं की अंग्रेजों द्वारा अवहेलना करना था ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 सही नहीं है: वेल्लोर विद्रोह 10 जुलाई 1806 को हुआ था।
- यह 1857 के भारतीय विद्रोह से लगभग आधी सदी पहले का है।
- कथन 2 सही है: वेल्लोर विद्रोह, या वेल्लोर क्रांति, ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भारतीय सिपाहियों द्वारा बड़े पैमाने पर और हिंसक विद्रोह का पहला उदाहरण था।
- कथन 3 सही है: इसके प्रमुख कारणों में से एक हिंदू और मुस्लिम भारतीय सिपाहियों की धार्मिक संवेदनाओं के प्रति अंग्रेजों की अवहेलना थी।
- विद्रोह का तात्कालिक कारण मुख्य रूप से सिपाही ड्रेस कोड में बदलाव से होने वाली नाराजगी थी।
- हिंदुओं को ड्यूटी के दौरान अपने माथे पर धार्मिक निशान लगाने से मना किया गया था, और मुसलमानों को अपनी दाढ़ी मुंडवाने और अपनी मूंछें काटने के लिए कहा गया था।
प्रश्न 3. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)
हेलीकाप्टर देश
- AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर: USA
- पोल स्टार या ध्रुव (Pole Star): UK
- CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर: फ्रांस
- ML-35 हेलीकॉप्टर: रूस
उपर्युक्त में से कौन सा/से सुमेलित नहीं है/हैं?
(a) केवल 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 4
उत्तर: b
व्याख्या:
- जोड़ी 1 सही है: AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर अमेरिका का है।
- जोड़ी 2 सही नहीं है: पोल स्टार या ध्रुव हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (ALH) है।
- जोड़ी 3 सही नहीं है: सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिका से संबंधित है।
- जोड़ी 4 सही है: एमआई -35 एम रूसी हेलीकॉप्टरों की सहायक कंपनी रोस्टवर्टोल द्वारा निर्मित एक बहूद्देशीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है।
प्रश्न 4. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर – मध्यम)
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का आधार वर्ष 2015 है।
- यह एक प्रदूषण नियंत्रण पहल है, जिसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक वातावरण में मोटे और सूक्ष्म कणों की सांद्रता को 20% तक कम करना है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न हीं 2
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही नहीं है: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का आधार वर्ष 2017 है।
- कथन 2 सही नहीं है: एनसीएपी एक प्रदूषण नियंत्रण पहल है जिसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2024 तक वातावरण में मोटे और सूक्ष्म कणों की सांद्रता को कम से कम 20% तक कम करना है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित संचार तकनीकों पर विचार कीजिए: PYQ (2022)
- क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन
- रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान
- वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क
उपर्युक्त में से किसे शॉर्ट-रेंज डिवाइस/प्रौद्योगिकियां माना जाता है?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: d
व्याख्या:
- शॉर्ट रेंज डिवाइस (SDR) ऐसे रेडियो उपकरण हैं जो अन्य रेडियो सेवाओं के हस्तक्षेप में आमतौर पर उनकी संचरित शक्ति के कारन कम जोखिम पूर्ण होते हैं, और इसलिए उनकी सीमा कम होती है।
शॉर्ट रेंज डिवाइस के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं:
- अलार्म और मूवमेंट डिटेक्टर
- क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी)
- ताररहित ऑडियो डिवाइस
- वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क
- चिकित्सा प्रत्यारोपण
- रिमोट कंट्रोल
- रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID)।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न 1. प्रासंगिक उदाहरणों के साथ कंगारू अदालतों का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) (जीएस II – राजनीति)
प्रश्न 2. आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए, जो केंद्र को एक मध्यस्थ हेतु सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने की अनुमति देती है, में सुधार की आवश्यकता है। क्या आप सहमत हैं? पुष्टि कीजिए।