13 जनवरी 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: राजव्यवस्था:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
राजव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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राज्यपाल और मुख्यमंत्री में टकराव:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राजव्यवस्था:
विषय: राज्य विधायिका – संरचना, कामकाज, कार्य संचालन, शक्तियाँ और विशेषाधिकार एवं इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
प्रारंभिक परीक्षा: राज्यपाल के पद से संबंधित तथ्य।
मुख्य परीक्षा: भारत में राज्यपाल के पद से जुड़े विवाद।
प्रसंग:
- हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल और राज्य मंत्रिमंडल के बीच तकरार देखने को मिली है।
पृष्ठभूमि:
- 9 जनवरी 2023 को तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा दिए गए अपने अभिभाषण में उन्होंने कुछ अंशों को छोड़ दिया, जिसे राज्य मंत्रिमंडल द्वारा तैयार और अनुमोदित किया गया था।
- राज्यपाल द्वारा छोड़े गए इन खंडों में राज्य के पूर्व राजनीतिक नेताओं और शासन के द्रविड़ मॉडल के विभिन्न संदर्भ शामिल थे।
- इसके पश्चात् तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने राज्यपाल द्वारा छोड़े गए खंडों को अलग रखने और रिकॉर्ड के लिए कैबिनेट द्वारा तैयार किए गए मूल भाषण पर विचार करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया।
- इस तरह के विवाद के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल विधानसभा से बाहर चले गए।
राज्यपाल पर संवैधानिक दायित्व:
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार, राज्यों की कार्यकारी शक्तियाँ राज्यपाल में निहित हैं और राज्यपाल को ऐसी शक्तियों का प्रयोग संविधान के अनुसार सीधे या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करना चाहिए।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार, राज्यों की कार्यकारी शक्तियाँ राज्यपाल में निहित हैं और राज्यपाल को ऐसी शक्तियों का प्रयोग संविधान के अनुसार सीधे या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करना चाहिए।
- हालांकि अनुच्छेद 163 में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्यपाल को अपने विवेक की आवश्यकता वाले कार्यों को छोड़कर अपने कार्यों को मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से करना चाहिए।
- अनुच्छेद 163 (2) के अनुसार ” यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई मामला ऐसा है या नहीं है जिसके संबंध में राज्यपाल को इस संविधान के द्वारा या इसके तहत अपने विवेक से कार्य करने की आवश्यकता है, तो राज्यपाल द्वारा अपने विवेक से लिया गया निर्णय अंतिम होगा”।
- इसके अलावा 1976 के 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम (42nd Constitutional Amendment Act of 1976) ने मंत्रियों की सहायता और सलाह को राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी बना दिया। हालांकि, राज्यपाल के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
राज्यपाल का पद से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Office of Governor
सर्वोच्च न्यायालय के विचार:
- सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों की सीमा को परिभाषित किया है।
- भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में नबाम रेबिया फैसले (2016) में सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 163 राज्यपाल को राज्य के मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के विरुद्ध या उसके बिना कार्य करने की सामान्य विवेकाधीन शक्ति प्रदान नहीं करता है।
- इसके अलावा शमशेर सिंह और अन्य बनाम पंजाब राज्य (1974), जिसे राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों की अवधारणा के संबंध में ऐतिहासिक निर्णयों में से एक माना जाता है, में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को कुछ असाधारण स्थितियों को छोड़कर अपने मंत्रियों की सहायता और सलाह के अनुसार अपनी औपचारिक शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।
राज्यपालों और संबंधित राज्य सरकारों के बीच विवाद के हालिया उदाहरण:
- अक्टूबर 2022 में केरल के राज्यपाल ने वहां के राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में 11 कुलपतियों से उनकी नियुक्तियों में अनियमितताओं के कारण इस्तीफा मांगा था।
- इसके बाद केरल सरकार ने राज्यपाल को राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के पद से हटाने के लिए एक विधेयक पारित किया था।
- महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के कार्यकाल के दौरान, राज्य सरकार विधानसभा अध्यक्ष की अपनी पसंद को लेकर राज्यपाल से भिड़ गई थी।
- तेलंगाना में, राज्य के राज्यपाल और मुख्यमंत्री अक्सर सार्वजनिक बहस में संलग्न रहते हैं।
राज्य सरकार बनाम राज्यपाल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Sansad TV Perspective: State Govt vs Governor
भावी कदम:
- इस मुद्दे को हल करने के लिए गठित की गई विभिन्न समितियों और विशेषज्ञ पैनल ने केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए विभिन्न उपायों का सुझाव दिया है।
- इन समितियों और विशेषज्ञ पैनलों की विभिन्न रिपोर्टों ने संबंधित राज्य के मुख्यमंत्रियों और राज्य सरकारों के परामर्श के बाद स्वतंत्र तंत्र के माध्यम से गैर-राजनीतिक राज्यपालों की नियुक्ति की सिफारिश की है।
- सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) ने कहा था कि राज्यपाल की भूमिका अपनी सरकार बनाने की कोशिश करने के बजाय यह देखने की होगी कि सरकार का गठन संविधान के अनुसार हो और सरकार संविधान के अनुसार कार्य करे।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
2023 में अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों एवं राजनीति का प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: बदलती विश्व व्यवस्था में भारत।
संदर्भ:
- इस लेख में भू-राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में चल रही विभिन्न चुनौतियों और जोखिमों पर चर्चा की गई है।
भूमिका:
- 2022 में भू-राजनीतिक खतरे और चुनौतियां काफी बढ़ गईं, जिसने पूरी दुनिया को असमंजस में डाल दिया है।
- फरवरी 2022 में भड़का रूस-यूक्रेन संघर्ष, मौजूदा व्यवस्था के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। इसने आधुनिक समय में सबसे बड़े आबादी विस्थापन को जन्म दिया है।
- 2021 के मध्य तक रूस के विभिन्न कदमों ने आगामी संघर्ष के संकेत दे दिए थे।
- रूस ने यूक्रेन के आसपास एक बड़ा जमावड़ा शुरू कर दिया था और दिसंबर 2021 में, रूस के विदेश मंत्रालय ने नई सुरक्षा गारंटी की एक सूची प्रकाशित की जो वह अमेरिका और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) से चाहता था, जिसमें पूर्व की ओर गठबंधन का विस्तार न करने का वादा भी शामिल था।
- हालाँकि, यूक्रेनी राष्ट्रवाद के असाधारण प्रदर्शन, तथा नाटो और अमेरिका सहित पश्चिम की त्वरित प्रतिक्रिया, यूक्रेन के समर्थन एवं सैन्य और अन्य प्रकार के सहयोग के विस्तार की आशा नहीं थी।
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व ने उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अनुभव किया, द्वितीय विश्व युद्ध ने विश्व व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष भविष्य में एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में भूमिका निभा सकते हैं।
युद्ध के परिणाम:
- प्रथम विश्व युद्ध और वर्तमान में जारी संघर्ष के बीच कई समानताएं हैं।
- प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्षैतिज और लंबवत रूप से वृद्धि के जोखिम को बहुत कम करके आंका गया था।
- वर्तमान मामले में, लंबवत किसी भी वृद्धि का अर्थ परमाणु हथियारों का उपयोग होगा। क्षैतिज रूप से किसी भी वृद्धि का मतलब नए मोर्चों का खुलना होगा।
- 1916 की स्थिति के समान आज भी कई पहलू ‘अज्ञात’ हैं। आज की अप्रत्याशित घटनाओं के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।
- रूस के खिलाफ अमेरिका, यूरोप और नाटो के ‘छद्म युद्ध’ का दुनिया भर के आर्थिक क्षेत्र में बड़ा असर पड़ रहा है।
- पश्चिम और उसके सहयोगियों द्वारा रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को लागू करने, SWIFT से रूसी बैंकों को अवरुद्ध करने और रूसी विदेशी संपत्ति को फ्रीज करने से वर्तमान में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है।
- यह तेल की बढ़ती कीमतों के साथ संरेखित है, रूस तेल को एक हथियार के रूप में उपयोग कर रहा है।
- यूरोप में हाल के घटनाक्रमों के परिणामी प्रभाव यूरोपीय तटों से काफी दूर महसूस किए जा रहे हैं।
- चीन रूस के साथ अपने सामरिक संबंधों को गहरा कर रहा है।
- ताइवान के बारे में पश्चिम की बढ़ती चिंताओं के परिणामस्वरूप नए संरेखण पूरे एशिया में उभर रहे हैं।
- यह देखते हुए कि यूक्रेन, या यूरोप का कोई अन्य देश, अमेरिका और नाटो के बिना रूसी हमले से नहीं बच सकता है, “रणनीतिक स्वायत्तता” जैसे वाक्यांश पहले ही अपना महत्व खो चुके हैं।
- यह चीन जैसे प्रमुख “विस्तारवादी देशों” का सामना करते समय एशियाई देशों की सोच को निर्धारित कर सकता है।
- सामरिक स्वायत्तता को एक राज्य की अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने और अन्य विदेशी राज्यों पर निर्भर हुए बिना अपनी पसंदीदा विदेश नीति अपनाने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है।
रक्षा खर्च में वृद्धि:
- वर्तमान में जारी संघर्ष ने आर्थिक तनाव और कोविड19 महामारी के बावजूद वैश्विक सैन्य खर्च को गति दी है।
- दुनिया भर में रक्षा पर अनुमानित खर्च 2022 में 2 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है, और 2023 में इसमें काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

चित्र स्रोत: SIPRI
- जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों ने रक्षा खर्च में भारी वृद्धि की घोषणा की है।
- जर्मनी ने 2021 में अपनी सेना पर 56.0 बिलियन डॉलर या अपने सकल घरेलू उत्पाद का 1.3 प्रतिशत खर्च किया।
- दुनिया के दूसरे सबसे बड़े व्ययकर्ता चीन ने 2021 में अपनी सेना के लिए अनुमानित $293 बिलियन आवंटित किए, जो 2020 की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है।
- अपने 2021 के बजट की प्रारंभिक स्वीकृति के बाद, जापानी सरकार ने सैन्य खर्च में 7.0 बिलियन डॉलर और जोड़े। परिणामस्वरूप, 2021 में खर्च 7.3 प्रतिशत बढ़कर 54.1 बिलियन डॉलर हो गया, जो 1972 के बाद सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है।
- चीन और उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरों को देखते हुए जापान ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह अपने रक्षा बजट को अपने सकल घरेलू उत्पाद के 2% तक बढ़ा देगा।
- बढ़े हुए रक्षा बजटों से रक्षा संबंधों की प्रकृति में परिवर्तन होने का ख़तरा है, जिसे रणनीतिक स्वायत्तता के रूप में प्रतिपादित किया जाता है।
- गुटनिरपेक्षता और किसी एक गुट का अनुसरण न करने के लाभों जैसे पहले के विचारों को समाप्त करते हुए, नए रणनीतिक संरेखण द्वारा विश्व व्यवस्था को बनाए रखा जा सकता है।
- ये विकास आर्थिक, तकनीकी और वित्तीय स्वायत्तता के बारे में पिछले विचारों को भी खतरे में डालते हैं।
भारत पर प्रभाव:
- भारत से रक्षा खर्च में अन्य देशों का अनुसरण करने की भी उम्मीद है।
- हालाँकि, यह देखते हुए कि रूसी सैन्य हार्डवेयर ने यूक्रेन में सबसे आधुनिक पश्चिमी हथियारों के खिलाफ खराब प्रदर्शन किया है, रूसी सैन्य उपकरणों पर भारत की निर्भरता में परिवर्तन हो सकता है।
- भारत का गुटनिरपेक्षता की नीति से बहु-संरेखण की ओर जाना संभवतः इसके रक्षा संबंधों को विस्तृत करने में मदद कर सकता है।
- भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्वाड जैसे समूह भारत के रक्षा ढांचे में अधिक प्रमुखता प्राप्त कर सकते हैं।
- 2023 में फ्रांस के साथ भारत के रक्षा संबंधों में, विशेष रूप से अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में वृद्धि होने की संभवना है।
2023 में भारत के पड़ोस में अपेक्षित परिवर्तन:
- चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता कोविड-19 और उसके आर्थिक संकट के प्रभावों का प्रबंधन करना होगा। इस वजह से, यह संदेहास्पद है कि चीन 2023 में अपने पड़ोसियों के प्रति संघर्ष शुरू करेगा या उकसाने वाली कार्रवाई करेगा।
- फिर भी, ताइवान और प्रथम द्वीप श्रृंखला (First Island Chain) का कोई भी उल्लंघन चीन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा।
- रूस के साथ भारत की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी चीन और रूस की बढ़ती निकटता से प्रभावित हो रही है, जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
- पाकिस्तान द्वारा इसके आंतरिक मुद्दों और आर्थिक चुनौतियों के कारण 2023 में एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करने की संभावना नहीं है।
- चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ स्पष्ट सीमाओं का अभाव भारत के लिए चुनौती हो सकती है।
- हालाँकि, यह आशंका है कि पाकिस्तान उकसावे और आतंकी रणनीति का इस्तेमाल जारी रखेगा, जिसके परिणामस्वरूप जम्मू और कश्मीर में रुक-रुक कर हमले होंगे।
- नेपाल में, नई सरकार चीन की ओर झुकी हुई प्रतीत होती है और 2023 में भारत के लिए एक समस्या बन सकती है।
- तालिबान के अधीन अफ़गानिस्तान समस्या बना रहेगा क्योंकि वहाँ से संचालित होने वाली आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हो रही है।
- श्रीलंका और बांग्लादेश दोनों के साथ भारत के संबंधों को कुशल कूटनीति से प्रबंधित किया जा सकता है।
- इस्लामिक स्टेट के फिर से खड़े होने और अफगानिस्तान में इसकी भागीदारी और गतिविधि के संकेत के साथ 2023 में आतंकवाद एक निरंतर चिंता का विषय बना रहेगा।
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सारांश:
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दिल्ली में कार्यकारी शक्तियां:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राजव्यवस्था:
विषय: संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ।
मुख्य परीक्षा: दिल्ली में निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के बीच न्यायिक संघर्ष की समस्या।
संदर्भ:
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की चुनी हुई सरकार का उपराज्यपाल के साथ टकराव चल रहा है।
भूमिका:
- उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के नवगठित सदन की पहली बैठक के लिए भाजपा पार्षद सत्या शर्मा को पीठासीन अधिकारी के रूप में नामित किया।
- उपराज्यपाल, जो “प्रशासक” हैं, ने 1957 के नगर निगम अधिनियम (DMC अधिनियम) के तहत निहित शक्तियों के अनुसरण में 10 व्यक्तियों को नामित भी किया है।
- दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि निर्वाचित सरकार से परामर्श किए बिना पीठासीन अधिकारी और 10 नामित व्यक्तियों को MCD में नियुक्त किया गया और उपराज्यपाल इस विषय के संबंध में मंत्रिपरिषद की “सहायता और सलाह के प्रति बाध्य” हैं।
- उपराज्यपाल के कार्यालय ने सरकार के दावे का खंडन किया और कहा कि श्री सक्सेना ने नवनिर्वाचित MCD के लिए अंतरिम (प्रोटेम) पीठासीन अधिकारी का नामांकन करते समय संवैधानिक प्रावधानों, अधिनियमों और विधियों का पालन किया।
दिल्ली में दोहरा शासन:
- दिल्ली की स्थिति संविधान की अनुसूची 1 के तहत एक केंद्र शासित प्रदेश है।
- हालाँकि, इसे अनुच्छेद 239 AA के तहत ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ के रूप में नामित किया गया है।
- अनुच्छेद 239AA दिल्ली को एक विधान सभा वाले एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में विशेष स्वरुप प्रदान करता है जिसके प्रशासनिक प्रमुख के रूप में एक उपराज्यपाल होता है। ऐसा तब भी था जब दिल्ली को दिल्ली का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) नाम दिया गया था।
- इसने दिल्ली में निर्वाचित मंत्रिपरिषद और केंद्र सरकार के बीच संबंधों की गतिशीलता को गंभीर तनाव में डाल दिया है।
दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियाँ:
- उपराज्यपाल पर मंत्रिपरिषद की अनदेखी करने और दो संस्थाओं के बीच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित सत्ता के विभाजन की परवाह किए बिना सभी मामलों पर सीधे नौकरशाही को आदेश जारी करने का आरोप है।
- NCT दिल्ली सरकार बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल के पास कोई स्वतंत्र निर्णयन शक्ति नहीं है तथा वह पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित मामलों को छोड़कर सभी मामलों पर दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की “सहायता और सलाह” का पालन करने के लिए बाध्य हैं।
- उपराज्यपाल खुद को निर्वाचित मंत्रिपरिषद के प्रतिपक्ष के रूप में अभिव्यक्ति करने के बजाय एक सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करेगा।
- यदि उपराज्यपाल और मंत्री किसी मामले पर असहमत होते हैं, तो उपराज्यपाल इसे निर्णय के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और तदनुसार कार्य करेंगे।
- सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि “किसी भी मामले” का अर्थ “हर मामला” नहीं लगाया जा सकता है, और ऐसा संदर्भ केवल असाधारण परिस्थितियों में उत्पन्न होगा।
- अनुच्छेद 239AB के तहत, राष्ट्रपति, उपराज्यपाल से प्रतिवेदन प्राप्त होने पर या अन्यथा, आदेश द्वारा अनुच्छेद 239AA के किसी भी प्रावधान के संचालन को निलंबित कर सकते हैं जब ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें NCT का प्रशासन अनुच्छेद 239AA के प्रावधानों के अनुसार नहीं किया जा सकता।
भावी कदम:
- सर्वोच्च न्यायालय ने हालिया गतिरोध, जो राष्ट्रीय राजधानी में शासन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, को हल करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा राजधर्म और विवेकशीलता का आह्वान किया।
- संविधान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में उल्लिखित रूपरेखा, एक सहयोगी व्यवस्था की कल्पना करती है जिसे केवल संवैधानिक विश्वास के माध्यम से संचालित किया जा सकता है।
- सहायकता, राजकोषीय संघवाद का मार्गदर्शक सिद्धांत, मजबूत उप-राष्ट्रीय संस्थानों की मांग करता है। इसलिए, केंद्र सरकार को शहरी सरकारों को अधिक स्वायत्तता आवंटित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- भारत ने LAC के बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की: सेना प्रमुख
- चीनी पक्ष में बुनियादी ढांचे के निर्माण की रिपोर्टों के मद्देनजर भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि हर मौसम में कनेक्टिविटी और वैकल्पिक कनेक्टिविटी विकसित करने की योजनाओं के साथ-साथ हमारी ओर से बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- सेना प्रमुख ने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को “स्थिर लेकिन अप्रत्याशित” माना है क्योंकि सेना की पूर्वी कमान के सामने चीनी सैनिकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है।
- उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न स्तरों पर चल रही बातचीत के साथ सात फ्लैशप्वाइंट (टकराव के बिंदुओं) में से पांच को सुलझा लिया गया है।
- सेना प्रमुख के मुताबिक, सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पिछले पांच सालों में करीब 6,000 किलोमीटरसड़कों का निर्माण किया है और इसमें से 2,100 किलोमीटर की सड़कें उत्तरी सीमाओं के साथ लगती हुई बनाई गई हैं।
- आगामी परियोजनाओं में शामिल हैं:
- अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न घाटियों को जोड़ने वाली सीमांत सड़क का निर्माण।
- (देश की सीमा पर रक्षा एवं विदेश व्यापार के लिए भारतीय सीमा सड़क संगठन द्वारा सड़कों को बनाया जाता है जिसे सीमांत सड़क कहते हैं।)
- अरुणाचल प्रदेश में लद्दाख और कामेंग दोनों में सभी मौसम में कनेक्टिविटी विकसित करना।
- इसके अलावा, सेला सुरंग के वर्ष के मध्य तक चालू होने की संभावना है जो असम में गुवाहाटी और अरुणाचल प्रदेश में तवांग के बीच सभी मौसम की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।
- लद्दाख में ज़ोजिला और जेड-मोड़ सुरंगों को खोला जायेगा जो घाटी को लद्दाख से जोड़ेगी।
- अटल सुरंग (Atal tunnel ) के साथ-साथ शिंकू ला सुरंग और नेमू-पदम-दरीचा सड़क का निर्माण दोनों तरफ से लद्दाख तक सभी मौसम की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।
- अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न घाटियों को जोड़ने वाली सीमांत सड़क का निर्माण।
- इसके अलावा, सेना रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि के मद्देनजर अपने भंडार में विभिन्न सोवियत और रूसी मूल के उपकरणों का मूल्यांकन कर रही है तथा पुर्जों और गोला-बारूद के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही है।
- संविधान के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून सभी पर बाध्यकारी हैं:

चित्र स्रोत: The Hindu
- भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) के फैसले की सार्वजनिक आलोचना की पृष्ठभूमि के खिलाफ, शीर्ष अदालत ने माना है कि उपराष्ट्रपति द्वारा की गई टिप्पणी “देश के कानून” के खिलाफ है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि उसके न्यायिक निर्णयों ने कानून निर्धारित किया है और संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों के लिए बाध्यकारी है।
- भारत के उपराष्ट्रपति ने कहा था कि वह इस विचार से सहमत नहीं हैं कि न्यायपालिका विधायिका द्वारा पारित संशोधनों को इस आधार पर रद्द कर सकती है कि वे “संविधान के मूल संरचना सिद्धांत” (Basic Structure doctrine of the Constitution) का उल्लंघन करते हैं, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले (1973) (Kesavananda Bharati case (1973)) में अपने फैसले के माध्यम से स्थापित किया गया था।
- उन्होंने आगे कहा कि संसदीय संप्रभुता को कार्यपालिका या न्यायपालिका द्वारा कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
- न्यायालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि केशवानंद भारती के फैसले ने स्पष्ट किया था कि न्यायिक समीक्षा संसदीय संप्रभुता को कमजोर करने का एक साधन नहीं है, बल्कि यह नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था का एक हिस्सा है “जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि संवैधानिक पदाधिकारी अपनी सीमा का उल्लंघन न करें।
- न्यायालय ने अपने NJAC के फैसले में न्यायिक स्वतंत्रता को संविधान की मूल विशेषता के रूप में बरकरार रखा था और कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 368 केवल संविधान में संशोधन करने की एक प्रक्रिया प्रदान करता है और इसका मतलब यह नहीं है कि यह अनुच्छेद संसद को संविधान में संशोधन करने और संविधान की “मूल संरचना” को बदलने की शक्ति प्रदान करता है।
- डॉक्टरों की कमी: स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि CHC में 80% विशेषज्ञों की कमी है

चित्र स्रोत: The Hindu
- केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी रिपोर्ट बताती है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (Community Health Centres (CHCs)) में लगभग 80% आवश्यक विशेषज्ञों की कमी के साथ भारत विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी का सामना कर रहा है।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) 30-बिस्तर वाली ब्लॉक-स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, जो सर्जरी, स्त्री रोग, बाल रोग और सामान्य चिकित्सा जैसी बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता हैं।
- हाल ही में जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार देश भर में लगभग 6,064 CHC हैं, और इनमें से अधिकांश केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने में मंत्रालय विफल रहा है।
- रिपोर्ट के अनुसार, CHC में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में 25% की वृद्धि हुई है, जो 2005 में 3,550 से बढ़कर 2022 में 4,485 हो गई है। हालांकि, CHC की बढ़ती संख्या के साथ विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ी है।
- इस रिपोर्ट में देश भर के CHC में सर्जन (83.2%), प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ (74.2%), चिकित्सक (79.1%) और बाल रोग विशेषज्ञ (81.6%) सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर प्रकाश डाला गया है।
- इसके अतिरिक्त, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उप-केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा महिला स्वास्थ्य कर्मियों और सहायक नर्सिंग दाइयों की भी कमी है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार जनवरी में नहीं मनाया जाता है? (स्तर – सरल)
(a) मकर संक्रांति
(b) पोंगल
(c) कटि बिहू
(d) लोहड़ी
उत्तर: c
व्याख्या:
- मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी शीतकालीन फसल उत्सवों के नाम हैं जो आमतौर पर जनवरी के महीने में मनाए जाते हैं।
- कटि बिहू जिसे आमतौर पर कोंगाली बिहू के नाम से जाना जाता है, असम राज्य से जुड़ा एक त्योहार है। यह आमतौर पर अक्टूबर के महीने में मनाया जाता है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)
- एनएसओ देश में खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी करता है।
- डीपीआईआईटी (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी करता है।
विकल्प
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) भारत में खुदरा मुद्रास्फीति पर डेटा जारी करता है।
- कथन 2 गलत है: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) डेटा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया जाता है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा / से सही है / हैं? (स्तर – सरल )
- भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित कानून नहीं है।
- मानसिक स्वास्थ्य विकार को आयुष्मान भारत योजना के तहत कवरेज प्राप्त है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित कानूनों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (MHCA), 2017 और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 शामिल हैं।
- कथन 2 सही है: भारत में पहली बार मानसिक बीमारी के लिए कवरेज आयुष्मान भारत योजना द्वारा प्रदान किया गया।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (स्तर – मध्यम)
- भारत ने हॉकी के क्षेत्र में 8 ओलंपिक स्वर्ण जीते हैं।
- भारत 2023 में पहली बार पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी करेगा।
- हॉकी गोलकीपर को गेंद को रोकने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करने की अनुमति है।
विकल्प:
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: भारत की हॉकी टीम ओलंपिक में अब तक की सबसे सफल टीम है और उसने 8 स्वर्ण पदक, 1 रजत पदक और 3 कांस्य पदक जीते हैं।
- कथन 2 गलत है: भारत 2023 में चौथी बार पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी करेगा।
- भारत इससे पहले 1982 (मुंबई), 2010 (दिल्ली) और 2018 (ओडिशा) में पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर चुका है।
- कथन 3 सही है: हॉकी के खेल में, गोलकीपर एकमात्र खिलाड़ी होता है जिसे अपने शरीर के किसी भी हिस्से से गेंद को छूने की अनुमति होती है।
प्रश्न 5. भारतरत्न और पद्म पुरस्कारों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (PYQ 2021) (स्तर -कठिन)
- भारतरत्न और पद्म पुरस्कार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत उपाधियाँ हैं।
- वर्ष 1954 में प्रारंभ किए गए पद्म पुरस्कारों को केवल एक बार निलंबित किया गया था।
- किसी वर्ष-विशेष में भारतरत्न पुरस्कारों की अधिकतम संख्या पाँच तक सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही नहीं हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: भारतरत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार भारत के संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत उपाधियाँ नहीं हैं।
- कथन 2 गलत है: पद्म पुरस्कार वर्ष 1954 में प्रारंभ किए गए थे और वर्ष 1978, 1979, 1993 और 1997 को छोड़कर हर साल विभिन्न प्राप्तकर्ताओं को दिए जाते हैं।
- कथन 3 गलत है: किसी विशेष वर्ष में वार्षिक पुरस्कारों की संख्या अधिकतम तीन तक सीमित है। पुरस्कार प्रदान करने पर, प्राप्तकर्ता को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाण पत्र) और एक पदक प्राप्त होता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार का प्रभाव स्वास्थ्य मानकों से परे होगा। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।(250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – शासन)
प्रश्न 2. नियंत्रण और संतुलन का सिद्धांत भारतीय संविधान के केंद्र में है। विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – राजव्यवस्था)