17 जनवरी 2023 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

  1. दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल (LG) के बीच गतिरोध जारी:

शासन:

  1. केरल नए बिजली नियमों का विरोध क्यों कर रहा है?

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. भविष्य निधि पेंशन योजना को कारगर बनाने का समय:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. मिशन शुक्रयान – I

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. मांग में कमी के कारण निर्यात में एक वर्ष में 12.2% की गिरावट आई है:
  2. उत्तरी आयरलैंड व्यापार पर समझौता करने के लिए यू.के. और ई.यू. बातचीत कर रहे हैं:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल (LG) के बीच गतिरोध जारी:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

विषय: राज्य विधायिका – संरचना, कामकाज, कार्य संचालन, शक्तियाँ और विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) और संविधान के अनुच्छेद 239AA से संबंधित जानकारी।

मुख्य परीक्षा: दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल (LG) के बीच विवाद/संघर्ष।

प्रसंग:

  • दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल (LG) के बीच हालिया समय में खींचतान और गतिरोध जारी है।

उपराज्यपाल और NCT दिल्ली:

  • संविधान के अनुच्छेद 239 के अनुसार भारत के केंद्र शासित प्रदेशों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक प्रशासक द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Territory (NCT)) दिल्ली का प्रशासक नामित किया गया था।
  • हालाँकि, 1991 के 69वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 239AA पेश किया, जिसने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली के लिए एक निर्वाचित विधान सभा और मुख्यमंत्री सहित एक मंत्रिपरिषद के निर्माण का प्रावधान किया।
  • इसके अलावा, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए विधान सभा और मंत्रिपरिषद से संबंधित संविधान के पूरक प्रावधानों” के लिए 1991 में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) अधिनियम’ पारित किया गया था।
  • केंद्र सरकार भी 2021 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) अधिनियम (Government of National Capital Territory (Amendment) Act) लेकर आई है।

विवाद/मुद्दा:

  • 6 जनवरी को दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के बाद उपराज्यपाल ने महापौर चुनावों की अध्यक्षता करने के लिए विपक्षी पार्टी से संबंधित एक पार्षद नियुक्त किया था और उसी के लिए एक गजट अधिसूचना जारी की थी।
  • हालांकि दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ने वरिष्ठतम पार्षद को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने की परंपरा को दरकिनार कर दिया है।
    • इसके अलावा, उपराज्यपाल पर निर्वाचित सरकार की सिफारिश को दरकिनार करने का भी आरोप है।
  • इसके अतिरिक्त उपराज्यपाल ने MCD में 10 “एल्डरमेन” (Aldermen) को भी नामित किया है।
    • एल्डरमेन किसी नगरपालिका परिषद के उन सदस्यों को संदर्भित करता है, जिनका नामांकन महत्वपूर्ण स्थान के आधार पर सटीक जिम्मेदारियों के साथ किया जाता है।
    • एल्डरमेन के रूप में नामांकित होने वाले सदस्यों को “नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव” होना चाहिए।
    • हालांकि दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि सभी नामित एल्डरमेन के विपक्ष में किसी अन्य पार्टी के साथ राजनीतिक संबंध हैं,और दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल पर महापौर चुनावों में इन एल्डरमेन को मतदान अधिकार प्रदान करने का आरोप लगाया है, जो कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के खिलाफ है।

दिल्ली सरकार के आरोप:

  • दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल पर “व्यावहारिक रूप से हर” विषय पर सीधे मुख्य सचिव को आदेश जारी करने का आरोप लगाया है, फिर उपराज्यपाल ही ऐसे आदेशों के क्रियान्वयन की निगरानी भी करते हैं जो निर्वाचित सरकार को पूरी तरह से दरकिनार कर देता है।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री ने तर्क दिया है कि पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि जैसे तीन आरक्षित विषयों के अलावा, अन्य सभी विषयों जैसे कि शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य पर कार्यकारी नियंत्रण जिसे स्थानांतरित विषय कहा जाता है, दिल्ली की निर्वाचित सरकार के पास है।
  • हालांकि दिल्ली सरकार ने कहा है कि उपराज्यपाल उन विषयों पर भी आदेश जारी करते रहे हैं जो विषय चुनी हुई सरकार के नियंत्रण में आते हैं।
  • दिल्ली सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को भी दोहराया है जिसके जरिए कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उपराज्यपाल सभी हस्तांतरित विषयों पर मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बंधे हैं और उपराज्यपाल केवल मंत्रिपरिषद के साथ मतभेद होने की स्थिति में ही संविधान के अनुच्छेद 239AA (4) को लागू कर सकते हैं।
    • अनुच्छेद 239AA (4) के अनुसार किसी भी मामले पर मंत्रिपरिषद के साथ मतभेद की स्थिति में उपराज्यपाल किसी मामले को निर्णय के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और राष्ट्रपति द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कार्य करेंगे।

उपराज्यपाल का रुख:

  • सरकार के आरोपों का जवाब देते हुए उपराज्यपाल कहते है कि ऐसे संवैधानिक प्रावधान, क़ानून और अधिनियम उपलब्ध हैं जो दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में प्रशासन की बहुस्तरीय योजना के बारे में उल्लेख करते हैं, जिन्होंने संविधान सभा, राज्य पुनर्गठन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और भारतीय संसद में महत्वपूर्ण बहस को आकर्षित किया है।
  • उपराज्यपाल कार्यालय ने बिंदु-दर-बिंदु तर्क के साथ एक बयान जारी किया है जो उपराज्यपाल के फैसलों को सही ठहराता है और यह भी कहता है कि उपराज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय “दिल्ली के NCT के प्रशासक” के रूप में उन्हें दी गई शक्तियों के अनुरूप हैं।
  • इसके अलावा उपराज्यपाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री को हर शुक्रवार को मिलना आवश्यक है। हालांकि, ये बैठकें अक्टूबर 2022 के बाद से नहीं हुई हैं।
  • उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री पर अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार में भाग लेने के कारण इन बैठकों को छोड़ देने का आरोप लगाया है।

उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच टकराव के अन्य बिंदु:

  • उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव से दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी से सरकारी विज्ञापनों के नाम पर प्रकाशित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च किए गए 164 करोड़ रुपये की वसूली करने के लिए कहा था।
  • उपराज्यपाल ने फिनलैंड में एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वहां भेजने के सरकार के अनुरोध को भी वापस लौटा दिया था।
  • उपराज्यपाल के कार्यालय ने इसका लागत-लाभ विश्लेषण करने के लिए कहा था, जबकि दिल्ली सरकार ने इसे अपने शिक्षा मॉडल पर सीधे हमले के रूप में देखा।
  • दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने पूर्व में यह भी आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार दिल्ली में सरकार को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय अधिकारियों और एजेंसियों पर अपने नियंत्रण का दुरुपयोग कर रही है और दिल्ली सरकार के नेताओं पर झूठे मामले भी चला रही है।

इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए 22 दिसंबर 2022 का यूपीएससी परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण देखें।

सारांश:

  • हालिया गतिरोध ने दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान को और बढ़ा दिया है। जबकि एक स्वस्थ लोकतंत्र में किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और संबंधित राज्यपालों के बीच सहयोग और समन्वय राज्य विधानमंडल के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

केरल नए बिजली नियमों का विरोध क्यों कर रहा है?

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शासन:

विषय: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप एवं उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: विद्युत संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022

मुख्य परीक्षा: विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 की प्रमुख विशेषताएं और इससे जुड़ी चिंताएं।

प्रसंग:

  • केरल सरकार ने विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 के प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

विद्युत (संशोधन) नियम, 2022:

  • केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 27 दिसंबर 2022 को विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 पर राजपत्र अधिसूचना जारी की।
  • विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 का उद्देश्य 2005 के विद्युत नियम में संशोधन करना है।
  • नियमों में प्रमुख संशोधनों में निम्न बिंदु शामिल हैं:
    • ओपन एक्सेस चाहने वाले उपभोक्ताओं द्वारा देय अधिभार को शामिल करना।
    • वितरण अनुज्ञप्तिधारी द्वारा विद्युत क्रय लागत की समय पर वसूली।
    • केंद्रीय पूल के लिए एकसमान नवीकरणीय ऊर्जा टैरिफ का कार्यान्वयन।
  • नियम 14 में राज्य विद्युत नियामक आयोगों को मासिक आधार पर उपभोक्ता शुल्क के माध्यम से लागतों को स्वचालित रूप से पारित करने के लिए मूल्य समायोजन सूत्र निर्दिष्ट करने की आवश्यकता थी।
    • नए नियमों के अनुसार, ईंधन और विद्युत खरीद समायोजन अधिभार की गणना मासिक आधार पर राज्य विद्युत नियामक आयोगों द्वारा निर्दिष्ट फार्मूले के आधार पर, स्वचालित रूप से, विनियामक अनुमोदन प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता के बिना की जाएगी और उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी।

केरल सरकार का रुख:

  • केरल सरकार ने नियम 14 पर चिंता जताई है, जो वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को उपभोक्ताओं से मासिक आधार पर ईंधन की कीमतों और बिजली खरीद लागत में बदलाव से उत्पन्न होने वाले खर्चों को स्वचालित रूप से वसूल करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • केरल सरकार के अनुसार बिजली बिल के माध्यम से स्वचालित रूप से लागत वसूलने के लिए डिस्कॉम को दी गई स्वतंत्रता उपभोक्ता के हितों के लिए हानिकारक है।
    • राज्य सरकार का मानना है कि उपभोक्ताओं को बार-बार कीमतों में अनुचित उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा।
  • केरल सरकार ने यह भी कहा है कि नए नियमों के लागू होने से अधिभार तय करने में राज्य विद्युत आयोगों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका कमजोर हो जाएगी।

एक नियामक की भूमिका:

  • नए नियमों के पुरःस्थापित होने से पहले तक, केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) थर्मल ईंधन अधिभार एकत्र करने के लिए तिमाही आधार पर केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर करता था।
  • चूंकि केरल राज्य के भीतर अपनी बिजली की मांग का लगभग 30% ही पैदा करता है, इसलिए विशेष रूप से गर्मी के महीनों के दौरान बिजली खरीद व्यय आमतौर पर अधिक होता है।
  • केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग तब सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से KSEB की याचिकाओं पर निर्णय लेता था।
  • केरल सरकार का मानना है कि इस तरह की प्रक्रिया को कमजोर करने से मौजूदा विवेकपूर्ण नियंत्रण भी कमजोर होगा और आम जनता को इसका बोझ उठाना पड़ेगा।

भावी कदम:

  • केरल के बिजली मंत्री ने कहा है कि उनका विभाग नियमों को इस तरह से लागू करने के लिए कानूनी राय लेगा, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
  • मंत्री ने बिजली विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं क्या नए नियमों के कारण होने वाले संभावित टैरिफ उतार-चढ़ाव को राज्य में विस्तारित मानसून के महीनों के दौरान टैरिफ को कम करके संतुलित किया जा सकता है, जब जलविद्युत के रूप में उच्च बिजली उत्पादन के कारण बिजली खरीद का स्तर कम होता है।
  • मंत्री ने उपभोक्ताओं पर बोझ डालने से रोकने के लिए शेष महीनों में बिजली खरीद लागत को न्यूनतम रखने की सिफारिश की है।
  • हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुरक्षा उपाय केवल उन मामलों में काम करेंगे जहां राज्य द्वारा संचालित इकाई जैसे KSEB सत्ता में हो और उनका मानना है कि वास्तविक चिंता तब पैदा होती है जब निजी क्षेत्र के भागीदार बिजली वितरण शुरू करते हैं।

संसद टीवी परिप्रेक्ष्य: ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Sansad TV Perspective: The Energy Conservation (Amendment) Bill, 2022

सारांश:

  • केरल की राज्य सरकार ने नए विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 के नियम 14 पर चिंता जताई है। राज्य सरकार के मुताबिक इन नए नियमों को लागू करने से राज्य द्वारा संचालित विद्युत बोर्डों के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

भविष्य निधि पेंशन योजना को कारगर बनाने का समय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित

राजव्यवस्था एवं शासन:

विषय: सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप।

मुख्य परीक्षा: कर्मचारी पेंशन योजना और संबंधित चिंताएं।

प्रारंभिक परीक्षा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)।

विवरण:

  • कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 1995 के तहत उच्च पेंशन के लिए सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के बावजूद 70 लाख पेंशनभोगियों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा आदेशित एक परिपत्र में कुछ शर्तों के साथ पेंशनभोगियों के केवल एक वर्ग को शामिल किया गया है। इससे पेंशनभोगियों की परेशानी बढ़ गई है।
    • EPFO EPS के लिए प्रशासनिक निकाय है।
    • परिपत्र को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अगली कड़ी माना जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा EPFO को अक्टूबर 2016 के आदेश को लागू करने के लिए भी कहा गया था।

पृष्ठभूमि विवरण:

  • मामला 2005 की शुरुआत में शुरू हुआ, जब हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों के एक वर्ग ने अधिक पेंशन की मांग की। चूँकि उनके नियोक्ता ने उनके वास्तविक वेतन पर 12% अनिवार्य योगदान दिया था, वे पेंशन फंड में अपने वास्तविक वेतन का 8.33% जमा करने के लाभ के हकदार होंगे।
  • लेकिन EPFO ने उनकी मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने कट-ऑफ तारीख के भीतर अपने विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया। नतीजतन, सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया।
  • अक्टूबर 2016 में, शीर्ष अदालत ने EPFO की कटऑफ तारीख की अवधारणा को खारिज कर दिया और सूचित किया कि EPS नियमों में कट-ऑफ तारीख केवल पेंशन योग्य वेतन की गणना में लागू होती है। परिणामस्वरूप, लगभग 24,672 पेंशनरों को इस निर्णय से लाभ हुआ।
  • इस बीच केंद्र ने EPS के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया, जो ₹15000 तक मासिक पेंशन योग्य वेतन अर्जित करने वालों के लिए योजना की प्रयोज्यता को सीमित करता है। ये प्रावधान 1 सितंबर 2014 से प्रभावी किए गए थे।
  • इसके अलावा, नियोक्ताओं और उन कर्मचारियों को जिनका योगदान वैधानिक सीमा (अब ₹15000) से अधिक है, एक नया विकल्प देने के लिए छह महीने की समय अवधि (जिसे अगले 6 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है) प्रदान की गई थी।
  • तीन उच्च न्यायालयों द्वारा बदले गए प्रावधान को रद्द करने के बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय में भेजा गया।
  • नवंबर 2022 में, सर्वोच्च न्यायालय ने मोटे तौर पर संशोधित योजना को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने विकल्प देने के लिए कटऑफ तारीख को खारिज करने पर जोर दिया और EPFO को उन लोगों को विकल्प का प्रयोग करने के लिए चार महीने का समय देने का निर्देश दिया जो 1 सितंबर 2014 तक सदस्य थे।
  • दिसंबर सर्कुलर ने लाभार्थियों के कवरेज के संकीर्ण दायरे (2016 के फैसले का हवाला देते हुए) को तीन शर्तों के साथ लागू करने की मांग की:
    • उच्च या वास्तविक मजदूरी पर अंशदान का भुगतान।
    • सेवा में रहते हुए संयुक्त विकल्प का प्रयोग।
    • EPFO द्वारा उच्च पेंशन की अनुमति देने से इंकार करना।
  • कई पेंशनभोगियों का तर्क है कि अधिकारियों ने सेवारत व्यक्तियों को लगभग 12 वर्षों तक (दिसंबर 2004 से शुरू) अपना विकल्प प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, 2014 के बाद सेवानिवृत्त (वे जो 1 सितंबर, 2014 के बाद 58 वर्ष के हैं) भी अपनी स्थिति के बारे में अनजान हैं।
  • अधिक पेंशन देने के लिए PF अधिकारियों की अनिच्छा के निम्न कारण हैं:
    • अधिक पेंशन देने में प्रमुख आशंकाओं में से एक पेंशन फंड की स्थिरता है।
    • एक और चिंता यह है कि कम पेंशन पाने वालों को अधिक पेंशन पाने वालों (या जिन्हें मिलने की संभावना है) के लिए क्रॉस-सब्सिडी देनी पड़ सकती है।
    • अन्य कारकों जैसे घटता बीमांकन, रिटर्न की कम दर और पेंशनभोगियों की लंबी उम्र में वृद्धि के कारण प्राप्तियों से अधिक पेंशन भुगतान करना पड़ सकता है।
    • EPFO के मुताबिक ज्यादा पेंशन सामाजिक सुरक्षा के खिलाफ है।

संबंधित चिंताएं और भावी कदम

  • नवंबर के फैसले के बाद दो महीने तक EPFO खामोश रहा। इसके अलावा, दिसंबर के परिपत्र पर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है।
  • पेंशनभोगियों के बीच भ्रम को दूर करने के लिए, अधिकारियों को सक्रिय रूप से सूचना साझा करनी चाहिए थी या संबंधित लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
  • EPFO और सरकार को न्यूनतम मासिक पेंशन को वर्तमान में ₹1000 से बढ़ाकर ₹3000 करना चाहिए। यह निचले वेतन वर्ग में पेंशनभोगियों की चिंताओं को दूर करेगा।
  • EPFO दिसंबर 2004 से सेवानिवृत्त (अपने विकल्प का प्रयोग किए बिना) उच्च वेतन समूह से संबंधित लोगों को एक बार अवसर भी दे सकता है।
  • सरकार को EPFO को अपनी वित्तीय सहायता भी बढ़ानी चाहिए।
  • इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) में उन युवाओं के लिए भी प्रावधान किया जा सकता है, जिन्हें सितंबर 2014 के बाद भर्ती किया गया था और अधिक वेतन के कारण EPS से बाहर कर दिया गया है।

संबंधित लिंक:

National Pension Scheme (NPS) – Benefits, Features & More [UPSC Notes]

सारांश:

  • कर्मचारी पेंशन योजना में परिवर्तनों की स्थिरता और स्पष्टता सवालों के घेरे में है। सरकार और EPFO दोनों को पेंशनभोगियों की चिंताओं को दूर करने और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए आगे आना चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.मिशन शुक्रयान – I

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

प्रारंभिक परीक्षा: मिशन शुक्रयान I और शुक्र के अन्य मिशन।

संदर्भ:

  • पी. श्रीकुमार, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में एक प्रोफेसर और सलाहकार हैं, ने कहा है कि इसरो को अभी तक शुक्रयान I मिशन के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिली है, जिसके परिणामस्वरूप मिशन को 2031 तक के लिए स्थगित किया जा सकता है।

शुक्रयान I मिशन:

  • शुक्रयान I इसरो का एक शुक्र मिशन है।
  • मिशन के दिसंबर 2024 में लॉन्च होने की उम्मीद थी।
  • शुक्रयान I एक ऑर्बिटर मिशन होगा और इसके पेलोड में एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन सिंथेटिक एपर्चर रडार और एक ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार शामिल हैं।
  • शुक्रयान I मिशन का मुख्य उद्देश्य शुक्र की भूगर्भीय और ज्वालामुखी गतिविधि, धरातल पर उत्सर्जन, हवा की गति, बादलों के आवरण और अंडाकार कक्षा सहित अन्य ग्रहीय विशेषताओं का अध्ययन करना है।
  • पृथ्वी से शुक्र तक इष्टतम लॉन्च विंडो हर 19 महीने में एक बार उपलब्ध होती है। हालाँकि, इससे भी अधिक इष्टतम विंडो हर आठ साल में उपलब्ध होती हैं, जो लिफ्ट-ऑफ के लिए आवश्यक ईंधन की मात्रा को और कम कर सकती हैं।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, NASA (VERITAS) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (EnVision) दोनों ने 2031 के लिए शुक्र मिशन की योजना बनाई है।
  • शुक्र के कुछ अन्य अंतरिक्ष मिशनों में शामिल हैं:
    • अमेरिका द्वारा – मेरिनर श्रृंखला (1962-1974), पायनियर वीनस 1 और पायनियर वीनस 2 (1978), और 1989 में मैगलन
    • रूस द्वारा – अंतरिक्ष यान की वेनेरा श्रृंखला (1967-1983), 1985 में वेगास 1 और 2
    • जापान द्वारा – अकात्सुकी अंतरिक्ष यान (2015)।
    • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा – वीनस एक्सप्रेस (2005)।

यह भी पढ़ें – ISRO’s unique goal for Venus mission

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. मांग में कमी के कारण निर्यात में एक वर्ष में 12.2% की गिरावट आई है:

चित्र स्रोत: The Hindu

  • भारत ने दिसंबर 2022 में 34.48 बिलियन डॉलर का माल निर्यात किया है, जो नवंबर के 32 बिलियन डॉलर के आंकड़े की तुलना में 7.75% अधिक है। हालांकि, 2021 के आंकड़ों की तुलना में माल के निर्यात में 12.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
    • इसके अलावा, 2021 में 60.33 बिलियन डॉलर की तुलना में आयात भी 3.5% घटकर 58.2 बिलियन डॉलर हो गया है।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक विकास पूर्वानुमान वैश्विक आर्थिक गतिविधि और व्यापार में मंदी का संकेत दे रहे हैं और ग्लोबल कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स रिपोर्ट (जनवरी 2023) के अनुसार, नए निर्यात ऑर्डर दिसंबर में लगातार 10वें महीने के लिए अनुबंधित हुए हैं।
  • इसके अलावा, सूती धागे और हथकरघा (-40.4%), हस्तशिल्प (-36.9%), पेट्रोलियम उत्पाद (-26.9%), प्लास्टिक और लिनोलियम (-26.23%), रत्न और आभूषण (-15.2%) जैसे 30 प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में से लगभग 19 शिपमेंट भी दिसंबर में घट गए हैं।
  • इंजीनियरिंग सामान का निर्यात, जो हाल के वर्षों में भारत के निर्यात का एक प्रमुख घटक रहा है, उसमें भी दिसंबर 2022 में लगभग 12% की गिरावट आई है।
  1. उत्तरी आयरलैंड व्यापार पर समझौता करने के लिए यू.के. और ई.यू. बातचीत कर रहे हैं:
  • ब्रेक्सिट के कारण बने गतिरोध से निपटने के लिए, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के नेता उत्तरी आयरलैंड (NI) में वस्तु व्यापार पर एक समझौता करने के लिए बातचीत करना चाह रहे हैं।
  • नेता हाल ही में एक समझौते पर पहुंचे हैं जिसमें यू.के. यूरोपीय संघ को आयरिश सागर, जो उत्तरी आयरलैंड को शेष यूके से अलग करता है, में व्यापार डेटा तक वास्तविक समय पहुंच प्रदान करेगा।
  • 2019 ट्रेडिंग ‘प्रोटोकॉल’, उत्तरी आयरलैंड को यूरोपीय संघ के एकल बाजार में व्यापार जारी रखने की अनुमति देता है, जिससे उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड गणराज्य के बीच सीमा शुल्क सीमा से बचा जा सकता है, जो यूरोपीय संघ का हिस्सा है।
    • नतीजतन, ग्रेट ब्रिटेन (यानी, यू.के. के बाकी हिस्सों) से आने वाले सामानों को उत्तरी आयरलैंड के बंदरगाहों पर रोक दिया जाता है, जिससे यू.के. के लिए राजनीतिक रूप से अनुचित स्थिति पैदा होती है।
    • हालाँकि, उत्तरी आयरलैंड की डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (DUP) उस प्रोटोकॉल पर सत्ता साझाकरण समझौते से हट गई, जिसने फरवरी 2022 से इस क्षेत्र को कार्यात्मक कार्यपालिकाविहीन छोड़ दिया है।
    • इस मुद्दे का यूरोपीय संघ से परे महत्वपूर्ण प्रभाव था और ब्रिटिश प्रधान मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था कि उत्तरी आयरलैंड शांति संधि (गुड फ्राइडे एग्रीमेंट) की 25 वीं वर्षगांठ पर 10 अप्रैल तक उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल पर एक समझौता हो जाएगा।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. अग्निपथ योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर–सरल)

  1. यह केवल अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए है (वे जो कमीशन अधिकारियों के रूप में सेना में शामिल नहीं होते हैं)।
  2. 4 साल की सेवा पूरी होने पर, अग्निवीरों को 11.71 लाख रुपये का एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज दिया जाएगा, जिसमें उनका अर्जित ब्याज शामिल होगा।
  3. सेवा के दौरान मृत्यु के मामले में, असेवित अवधि के लिए वेतन के अलावा कोई अलग भुगतान नहीं किया जाता है।

सही कूट का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: अग्निपथ योजना के तहत, लगभग 45,000 से 50,000 सैनिकों की सालाना भर्ती की जाएगी, और यह केवल अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए है (जो कमीशन अधिकारियों के रूप में सेना में शामिल नहीं होते हैं)।
  • कथन 2 सही है: “सेवा निधि” पैकेज के तहत, जो आयकर से मुक्त है, अग्निवीरों को 4 साल की सेवा पूरी होने पर लगभग 11 लाख – 12 लाख प्राप्त होंगे जिसमें सरकार का योगदान और अर्जित ब्याज शामिल है।
  • कथन 3 गलत है: अग्निवीरों को चार साल के लिए 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर भी मिलेगा और मृत्यु के मामले में भुगतान 1 करोड़ रुपये से अधिक होगा, जिसमें असेवित अवधि के लिए भुगतान भी शामिल है।

प्रश्न 2. भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया ज्ञापन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर–सरल)

  1. प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) न्यायाधीशों की नियुक्ति पर सरकार और न्यायपालिका द्वारा स्वीकृत आधिकारिक प्लेबुक (नियमावली) है।
  2. चूंकि कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों की एक श्रृंखला के माध्यम से विकसित हुई है, और कानून पर आधारित नहीं है, इसलिए प्रक्रिया ज्ञापन नियुक्तियों की प्रक्रिया का आधार है।
  3. 16 अक्टूबर, 2015 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) में लाए गए संवैधानिक संशोधन को रद्द करने के बाद MoP पर फिर से विचार करने की मांग की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) न्यायाधीशों की नियुक्ति पर सरकार और न्यायपालिका द्वारा स्वीकृत आधिकारिक प्लेबुक है।
    • MoP एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को नियंत्रित करता है।
  • कथन 2 सही है: चूंकि कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसलों की एक श्रृंखला के माध्यम से विकसित हुई है, और कानून पर आधारित नहीं है, इसलिए MoP नियुक्तियों की प्रक्रिया का आधार है।
  • कथन 3 सही है: 16 अक्टूबर, 2015 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) में लाए गए संवैधानिक संशोधन को रद्द करने के बाद MoP पर फिर से विचार करने की मांग की गई थी।

प्रश्न 3. बहिर्ग्रहों (Exoplanets) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर–मध्यम)

  1. बहिर्ग्रह वे ग्रह हैं जो अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं और हमारे सौर मंडल से परे हैं।
  2. बहिर्ग्रहों की खोज करना काफी कठिन होता है क्योंकि वे छोटे होते हैं और उन्हें उनके चमकीले मेजबान सितारों के आसपास खोजना मुश्किल है।
  3. जब कोई ग्रह ऐसी दूरी पर होता है जो उस ग्रह को पानी जैसी तरल अवस्था में बनाए रखने में सक्षम बनाता है, तो उसे “गोल्डीलॉक्स ज़ोन” कहा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: बहिर्ग्रह वे ग्रह हैं जो हमारे सौर मंडल से बाहर हैं। इनमें से अधिकांश बहिर्ग्रह अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं एवं मुक्त रूप से गति करते बहिर्ग्रहों को दुष्ट ग्रह कहा जाता है।
  • कथन 2 सही है: बहिर्ग्रहों की खोज करना कठिन है और इसमें जटिल प्रक्रियाएँ शामिल हैं क्योंकि वे छोटे होते हैं और उन्हें उनके चमकीले मेजबान सितारों के आसपास खोजना मुश्किल है।
    • नासा के अनुसार, वैज्ञानिक अप्रत्यक्ष तरीकों पर भरोसा करते हैं, जैसे कि पारगमन विधि, जो “एक तारे के मंदन को मापता है जो उसके सामने से एक ग्रह गुजरने के कारण होता है”।
  • कथन 3 सही है: जब कोई ग्रह सूर्य/तारे से सही दूरी पर होता है जो उसे पानी की तरल अवस्था में बनाए रखने में सक्षम बनाता है, तो उसे “गोल्डीलॉक्स ज़ोन” कहा जाता है।
    • यदि कोई बहिर्ग्रह तारे के बहुत करीब है, तो इसका तापमान पानी को तरल बनाए रखने के लिए बहुत गर्म हो सकता है और यदि वह तारे बहुत दूर है, तो इसमें पानी केवल बर्फ़ की अवस्था में हो सकता है।

प्रश्न 4. श्रीलंका के संविधान के 13वें संशोधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सही नहीं है? (स्तर–सरल)

(a) यह जुलाई 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते का परिणाम है, जिस पर भारतीय राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन और श्रीलंका के राष्ट्रपति जे.आर. जयवर्धने ने जातीय संघर्ष और गृहयुद्ध को हल करने के प्रयास में हस्ताक्षर किए थे।

(b) 13वां संशोधन, जिसके कारण प्रांतीय परिषदों का निर्माण हुआ, ने सिंहल बहुसंख्यक क्षेत्रों सहित देश के सभी नौ प्रांतों को स्व-शासन के लिए सक्षम बनाने हेतु सत्ता-साझाकरण व्यवस्था का आश्वासन दिया।

(c) शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आवास, भूमि और पुलिस जैसे विषय प्रांतीय प्रशासन को सौंपे गए हैं।

(d) विशेष रूप से, पुलिस और भूमि संबंधी प्रावधानों को कभी भी लागू नहीं किया गया है।

उत्तर: a

व्याख्या:

  • श्रीलंका के संविधान का 13वां संशोधन जुलाई 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते का परिणाम था, जिस पर तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री राजीव गांधी और तत्कालीन श्रीलंकाई राष्ट्रपति जे. आर. जयवर्धने ने श्रीलंका के गृह युद्ध को समाप्त करने के प्रयास में हस्ताक्षर किए थे।
  • 13वें संशोधन ने प्रांतीय परिषदों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे सिंहली बहुसंख्यक क्षेत्रों सहित देश के सभी नौ प्रांतों को स्व-शासन करने में सक्षम बनाने के लिए सत्ता साझा करने की व्यवस्था सुनिश्चित हुई।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आवास, भूमि और पुलिस जैसे विषय प्रांतीय प्रशासन को सौंपे गए।
  • हालांकि, राष्ट्रपति को दी गई वित्तीय शक्तियों और अधिभावी शक्तियों पर प्रतिबंध के कारण, प्रांतीय प्रशासन अधिक प्रगति करने में विफल रहे हैं और विशेष रूप से पुलिस और भूमि से संबंधित प्रावधानों को कभी भी लागू नहीं किया गया है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा जीव निस्यंदक भोजी (फिल्टर फीडर) है? (PYQ 2021)

(स्तर–कठिन)

(a) अशल्क मीन (कैटफिश)

(b) अष्टभुज (ऑक्टोपस)

(c) सीप (ऑयस्टर)

(d) हवासील (पेलिकन)

उत्तर: c

व्याख्या:

  • प्राणी विज्ञान में फिल्टर फीडिंग, भोजन प्राप्ति का एक रूप है जिसमें भोजन के कण या छोटे जीव बेतरतीब ढंग से पानी से छन जाते हैं।
  • अन्य सीप की तरह शेलफिश में अद्वितीय फिल्टर-फीडिंग क्षमता होती है, इस अर्थ में कि यह अपने गलफड़ों के माध्यम से पानी ग्रहण करती है, जो फिर इस पानी को प्लैंकटन के निलंबित टुकड़ों जैसे पोषक तत्वों के लिए फ़िल्टर करती है, जबकि शेष पानी को स्वचालित रूप से बाहर निकाल दिया जाता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. भारत के निर्यात पर किसी भी मंदी के विभिन्न प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस III – अर्थव्यवस्था)

प्रश्न 2. क्या इस तर्क में दम है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए ? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – राजव्यवस्था)