UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 23 Apr, 2022 UPSC CNA in Hindi

23 अप्रैल 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत ने $400 मिलियन मुद्रा विनिमय की अवधि बढ़ाई

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. स्टालिन ने कोयले के लिए पीएम से सहायता मांगी; महाराष्ट्र की कोयला-आयात की योजना

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

भारतीय विरासत एवं संस्कृति

  1. कला संग्रहालय और लोकतंत्र का शिल्प

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. पल्क खाड़ी में मछली पकड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. भारत-यू.के रक्षा, व्यापार संबंध
  2. इसरो शीघ्र पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान लैंडिंग प्रयोग करेगा
  3. राजनाथ सिंह ने रक्षा स्टार्ट-अप के लिए योजनाएं शुरू की

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

स्टालिन ने कोयले के लिए पीएम से सहायता मांगी; महाराष्ट्र की कोयला-आयात की योजना

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में कोयला संकट-कारण और भावी कदम

प्रसंग:

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तमिलनाडु में बिजली उत्पादन इकाइयों के लिए कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
  • महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में बिजली संकट से निपटने के लिए कोयले के आयात की योजना बनाई है।

भारत में कोयला संकट:-

  • नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में 100 से अधिक ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार आवश्यक भंडार से 25% कम हो गया है।
  • 50 से अधिक ताप विद्युत संयंत्रों में भंडार 10% से कम हो गया है, जिससे राज्यों को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति आवश्यक हो गई है।
  • कोयले से संचालित होने वाले ताप विद्युत संयंत्र भारत की 70% बिजली की मांग की पूर्ति करते हैं।
  • वर्तमान में 3.56 गीगावाट की संयुक्त क्षमता वाले नौ ताप विद्युत संयंत्र क्रियाशील नहीं हैं।

भारत में कोयले की कमी के कारण :-

  • मांग में वृद्धि: कोयले की कमी का प्राथमिक कारण बिजली की मांग में वृद्धि है। अप्रैल से अक्टूबर के महीनों के दौरान, बिजली की मांग अत्यधिक होती है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर बिजली की कमी हो जाती है। कई उत्तर भारतीय राज्यों में हीट वेब को बिजली की उच्च मांग के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान: 2021 में, शिपिंग में देरी के कारण, भारत में कोयले की कमी हो गई थी, जिसमें स्टॉक निम्न स्तर तक गिर गया था। कोयले की कमी में वृद्धि हुई है क्योंकि वैश्विक स्तर पर कोयले की कीमतों में वृद्धि हुई है और कोविड -19 महामारी के कारण आपूर्ति बाधित हुई है।
  • कोयले की आपूर्ति में कमी: यह संकट भारत के बिजली के मुख्य स्रोत ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति में कमी के परिणामस्वरूप हुआ है।
  • रूस-यूक्रेन संकट का आयात पर प्रभाव: रूस-यूक्रेन संघर्ष से कोयले की कमी में वृद्धि हुई है क्योंकि ताप विद्युत कंपनियां रूस से कोयला प्राप्त करने में असमर्थ रही हैं।

कोयले की कमी का प्रभाव:-

स्रोत:Indian Express

सरकार द्वारा अपनाए गए उपाय:

  • केंद्र ने राज्यों को बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अपने कैप्टिव कोयला भंडार के 25% तक उपयोग करने की अनुमति दी है। यह बिजली संयंत्रों को CIL के बोझ को कम करने के लिए आयातित कोयले में 10% तक मिश्रण की भी अनुमति देता है।
  • 2020 में, केंद्र ने भारत में कोयला उत्पादन पर CIL के एकाधिकार को ख़त्म करने के लिए खनन सुधारों को पारित किया। संबंधित विवरण निम्नलिखित हैं:

विधि

महत्त्वपूर्ण प्रावधान

खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020

  • नीलामी हेतु कोयले/लिग्नाइट ब्लॉकों की सूची को बढ़ाने में सहायता के उद्देश्य से समग्र पूर्वेक्षण लाइसेंस-सह-खनन पट्टे (“PL-cum-ML”) हेतु कोयला ब्लॉकों के आवंटन का प्रावधान करने के लिए संशोधन।
  • कोयला क्षेत्र में एफडीआई नीति, कोयले की बिक्री,संबद्ध प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे सहित कोयला खनन गतिविधियों के लिए स्वत: मार्गों के माध्यम से 100% एफडीआई की अनुमति।
  • केंद्र सरकार द्वारा कोयला/लिग्नाइट ब्लॉक का आवंटन या आरक्षण किए जाने के मामलों में पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रावधान

खनिज रियायत नियम 1960 में संशोधन

  • अब खनन योजना तैयार करने के लिए योग्य व्यक्तियों के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।
  • खनन योजना में आमूल बदलाव करने के लिए ब्लॉक आवंटन को सशक्त बनाना और बार-बार अनुमोदन की आवश्यकता को कम करना और इस प्रकार संचालन में लचीलापन देना।
  • कोयला क्षेत्र में अन्वेषण में तेजी लाने, प्रौद्योगिकी लाने और तेजी से विकास करने की दृष्टि से पूर्वेक्षण कार्यों के संचालन और भूवैज्ञानिक रिपोर्ट (GR) तैयार करने हेतु एक मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसी को नियुक्त करने के लिए कोल ब्लॉक के पास अब एक विकल्प उपलब्ध है।

सिफारिश:

  • खनन पर पुनः समुचित ध्यान: बाढ़ जैसे मौसम की स्थिति में सरकार को खनन कार्यों को फिर से शुरू करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • बिजली उत्पादन को प्राथमिकता देना : सरकार और उद्योग को स्टॉक की बारीकी से निगरानी करना चाहिए,और बिजली उत्पादन को प्राथमिकता देने के लिए औद्योगिक उपयोगकर्ताओं से आपूर्ति को इस क्षेत्र की और मोड़ना चाहिए।
  • आपूर्ति नियंत्रण: घरेलू बिजली आपूर्ति को विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में नियंत्रित करना, सबसे आसान समाधानों में से एक के रूप में उभर सकता है।
  • मूल्य प्रोत्साहन: बिजली की बढ़ती कीमतों के कारण बढ़ी लागत से निपटने में मूल्य प्रोत्साहन के जरिए कुछ तटीय संयंत्रों के लिए उच्च लागत वाले आयातित कोयले का उपयोग करना संभवतः व्यवहार्य हो सकता है।
  • घरेलू खनिकों पर बोझ को कम करने के लिए सरकार मूल्य प्रोत्साहन प्रदान कर सकती है।
  • विकल्पों पर ध्यान देना :
    • जल विद्युत उत्पादन: मानसून की वर्षा जिसके परिणामस्वरूप कोयला खदानों में बाढ़ आती है, का उपयोग जल विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। बांधों पर बड़ी पनबिजली परियोजनाएं कोयले के बाद भारत का प्रमुख विद्युत स्रोत हैं।
    • प्राकृतिक गैस: वर्तमान में वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद प्राकृतिक गैस की भूमिका बड़ी हो सकती है। भारत की लगभग 25 गीगावाट गैस आधारित उत्पादन क्षमता है, हालांकि उस क्षमता का लगभग 80% ईंधन की उच्च कीमतों के कारण अप्रयुक्त रहता है।

सारांश:

  • भारत बिजली के संकट से जूझ रहा है क्योंकि देश के कई हिस्सों में तीव्र हीट वेब के कारण बिजली की बढ़ती मांग के बीच कई राज्यों में कोयला भंडार तेजी से खत्म हो रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कोयले की भारी कमी के कारण ब्लैकआउट हो रहा है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

भारत ने $400 मिलियन मुद्रा विनिमय की अवधि बढ़ाई

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

प्रारंभिक परीक्षा: मुद्रा विनिमय समझौता

मुख्य परीक्षा: भारत-श्रीलंका संबंध

संदर्भ: भारत ने श्रीलंका के साथ $400 मिलियन की मुद्रा विनिमय सुविधा की अवधि बढ़ा दी।

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- Sri Lanka Economy Crisis: Currency Swap & Line of Credit

संपादकीय-द हिन्दू

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित

भारतीय विरासत और संस्कृति

कला संग्रहालय और लोकतंत्र का शिल्प

विषय: वास्तुकला के मुख्य पहलू

मुख्य परीक्षा: लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने में संग्रहालयों का महत्व, नए संग्रहालयों के निर्माण की चिंता और प्रमुख सिफारिशें।

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली के तीन मूर्ति एस्टेट में प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री संग्रहालय

  • हाल ही में भारत के सभी भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों को समर्पित प्रधानमंत्री संग्रहालय खोला गया है।
  • तीन मूर्ति भवन भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू का निवास था और उनकी मृत्यु के बाद एक स्मारक में परिवर्तित कर दिया गया था, जिसे प्रधानमंत्री संग्रहालय के लिए नवीनीकृत किया गया है।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के जरिए संग्रहालय बनाने की योजना

  • नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की इमारतें, जिनमें वर्तमान में प्रधान मंत्री कार्यालय तथा गृह मंत्रालय, रक्षा, वित्त और विदेश मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं, को भारत के सबसे बड़े संग्रहालय में परिवर्तित किया जा रहा है।
  • इसके अलावा, 2026 तक रायसीना हिल पर एक नए संग्रहालय का उद्घाटन किया जाएगा तथा “भारत या भारत के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेगा जो हमेशा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अर्थों में मौजूद थे, भले ही ऐतिहासिक आवश्यकताओं ने राष्ट्रीयता की प्राप्ति को रोका हो”।
  • संग्रहालयों की वर्तमान प्रवृत्ति के अनुसार, संग्रहालयों की कहानी मुख्य रूप से संवर्धित वास्तविकता(AR) के अनुभवों, कम्प्यूटरीकृत गतिज मूर्तियों, होलोग्राम और स्मार्टफोन अनुप्रयोगों के माध्यम से होगी।
  • जनपथ पर स्थित वर्तमान राष्ट्रीय संग्रहालय को अलग किया जाएगा और इसके संग्रह को एक भंडारण सुविधा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

संग्रहालयों का महत्व

  • राष्ट्रों, औपनिवेशिक साम्राज्यों और औद्योगीकरण के उदय के साथ-साथ 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में कला संग्रहालयों का निर्माण शुरू हुआ।
  • पुराने जमाने में, संग्रहालय का प्राथमिक उद्देश्य देशभक्ति का पोषण और विजय का प्रदर्शन करना था।
  • अतीत के लोगों की सौंदर्य, सामाजिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने में संग्रहालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • अतीत की वस्तुओं की प्रदर्शनी का उपयोग सभ्यताओं की प्रगति की तुलना और विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है।
  • गैर-औपनिवेशीकरण के बाद उभरते देशों ने अपने राष्ट्रीय आख्यानों को मजबूत करने के लिए संग्रहालयों का निर्माण किया।

राष्ट्रीय संग्रहालय के पुनर्निर्माण की हाल की योजनाओं पर चिंता

  • आलोचकों का मत है कि नए संग्रहालय का निर्माण भारत की सांस्कृतिक विरासत और भारत की विविधता सहित इसके संघर्षों की स्वीकारोक्ति के बिना किया जाएगा।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि कई ऐतिहासिक कलाकृतियों के बिना, रायसीना हिल पर एक संग्रहालय विकसित करके एक साहसिक नए भारत का प्रदर्शन करने की योजना एक पुराने युग की वापसी है जहां संग्रहालय ने राष्ट्रवाद को पोषित किया और विजय का प्रदर्शन किया।
  • इस बात को लेकर भी चिंताएं हैं कि सांस्कृतिक कलाकृतियों के अमूल्य संग्रह का क्या हो सकता है, जो देश की विरासत के लिए अपने मूल्य में विशिष्ट हैं, और वर्तमान राष्ट्रीय संग्रहालय में रखे गए हैं।
  • साथ ही, इस बात का भी खुलासा नहीं किया गया है कि जगह परिवर्तन के दौरान कलाकृतियों का संरक्षण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

सिफारिशें

  • पारदर्शिता बनाए रखना
    • चूंकि सांस्कृतिक विरासत सार्वजनिक स्मृति का एक महत्वपूर्ण मामला है, इसलिए विरासत को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों के मामले में सार्वजनिक पारदर्शिता, प्रकटीकरण और परामर्श के उच्चतम स्तर की आवश्यकता होती है।
  • वर्तमान राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्रह का प्रदर्शन
    • राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्रह, कम से कम जिन्हें सुरक्षित रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है, उन्हें नए संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
    • ऐसी रणनीति जवाबदेही को भी बढ़ावा दे सकती है और एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्था के प्रशासन के काम को जनता के लिए पारदर्शी बना सकती है।
  • भारत और शेष विश्व के बीच परस्पर जुड़ाव को दर्शाने वाली कलाकृतियों का प्रदर्शन
    • उदाहरण: मुहरें जो मेसोपोटामिया और सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यताओं के बीच संपर्कों को उजागर करती हैं, जिसमें कुषाणों और मध्य एशियाई मैदान के खानाबदोशों के बीच संबंधों को प्रदर्शित करने के लिए सिक्के और चित्र, कपड़ा और लकड़ी की नक्काशी पूर्वी अफ्रीका और गुजरात के बीच यात्रा करने वाले व्यापारियों की कहानियों का वर्णन है। सुलेख और लघु चित्रकला मुगल और तुर्क साम्राज्यों के बीच संपर्क को दर्शाती है।
    • भारत और दुनिया के जुड़े हुए इतिहास को प्रदर्शित करके, नया संग्रहालय आगंतुकों को बेहतर अवगत नागरिक बनने में मदद करने की आकांक्षा रख सकता है।
  • भविष्य के लिए प्रयोगशाला
    • नए संग्रहालय को भविष्य के लिए एक टिकाऊ और बहुउद्देश्यीय भवन बनाकर प्रयोगशाला के रूप में बनाने की रणनीति।
    • यह अतीत पर एक प्रतिबिंब आरोपित करके और नए विचार-विमर्श को बढ़ावा देकर इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हो सकता है।

सारांश: यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि नए संग्रहालय औपनिवेशिक अतीत की छाया से घिरे नहीं हो और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बढ़ावा देने के मूल दायित्व को पूरा करने में सक्षम हो।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

पल्क खाड़ी में मछली पकड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान

विषय:भारत और उसके पड़ोसी संबंध

प्रारंभिक परीक्षा: इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन (IMBL), बॉटम ट्रॉलिंग और डीप सी फिशिंग

मुख्य परीक्षा: भारत और श्रीलंका के मछुआरों के बीच के मुद्दे तथा संभावित समाधान।

प्रसंग

लगभग 15 महीने बाद मत्स्यन पर भारत-श्रीलंका संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक हुई।

पृष्ठभूमि

  • हाल की चर्चाओं से पूर्व, पल्क खाड़ी में कई अप्रत्याशित घटनाएं घटी थीं जिनमें समुद्र में हुई झड़पों में दोनों पक्षों के मछुआरों की मौत भी शामिल थी।
  • पल्क खाड़ी के आसपास तमिलनाडु के कुछ मछुआरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) का अतिक्रमण करते हैं, और श्रीलंका के अधिकारियों द्वारा उन्हें गिरफ्तार किया जाता है और उनकी नौकाओं को जब्त किया जाता है।
  • इस मामले पर द्विपक्षीय व्यवस्था के बावजूद फरवरी 2022 में लगभग 150 जब्त नौकाओं की नीलामी की गई थी।

भारत और श्रीलंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL)

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा भौगोलिक या भू-राजनीतिक मानदंडों का उपयोग करके देश के जल क्षेत्रों का एक वैचारिक सीमांकन है।
  • 1970 के दशक में भारत और श्रीलंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) का सीमांकन करने के लिए संधियों पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इस संधि के परिणामस्वरूप पल्क जलडमरूमध्य एक ‘दो राष्ट्रों का जल क्षेत्र’ बन गया, जो कि सभी तीसरे राष्ट्रों के बहिष्कार के लिए प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UN Convention on the Law of the Sea-UNCLOS) नियमों के तहत था।
  • इन समझौतों में मछुआरों को इन क्षेत्रों में मत्स्यन से रोकने का प्रावधान नहीं था, क्योंकि मछुआरों के लिए समुद्री सीमाओं का सीमांकन करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए दोनों देशों के मछुआरे समुदाय पल्क खाड़ी क्षेत्र में मत्स्यन करते हैं जिसके परिणामस्वरूप झड़पें होती हैं।

स्त्रोत : Times of India

भारत के मछुआरों की चिंता

  • भारत के मछुआरों की समस्या वास्तविक है।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के सीमांकन के परिणामस्वरूप मत्स्यन क्षेत्रों की कमी हो गई है
  • धनुषकोडी (तमिलनाडु) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के बीच की दूरी 9 समुद्री मील (NM) है तथा देवीपट्टनम और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के बीच की दूरी 34 NM है।
    • लेकिन, तमिलनाडु मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट 1983 के अनुसार, मशीनीकृत मत्स्यन वाली नाव तट से केवल 3 NM तक के क्षेत्रों में मत्स्यन कर सकती हैं, जिससे उपलब्ध मत्स्यन क्षेत्र और कम हो जाता है।
  • भारतीय जल क्षेत्र में मत्स्यन के लिए उपलब्ध क्षेत्र उथले होने के साथ-साथ चट्टानों और प्रवाल भित्तियों की प्रचुरता है, इस प्रकार मत्स्यन प्रभावित होता है।
  • यही कारण है कि मछुआरे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के पार चले जाते हैं।

बॉटम ट्रॉलिंग का मुद्दा:

  • प्रादेशिक जल में अवैध शिकार के अलावा, मशीनीकृत बॉटम ट्रॉलर का उपयोग चिंता का कारण बन गया है।
  • बॉटम ट्रॉलिंग मछली पकड़ने की एक विधि है जो अविवेकपूर्ण है क्योंकि इसमें एक बड़े मछली पकड़ने वाले जाल , जिसका खुला भाग समुद्र तल की ओर होता है, को खींचा जाता है।
  • मछली पकड़ने की यह विधि, जिसे कभी भारत द्वारा बढ़ावा दिया गया था, अब समुद्री पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत प्रतिकूल है।
  • श्रीलंकाई मछुआरों का कहना है कि मछली पकड़ने का यह तरीका उन्हें प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है, जो देश में चल रहे आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हैं।

भावी कदम

  • वार्ता का क्रियान्वयन– दोनों देशों के बीच JWG और अन्य बैठकों में समस्या पर चर्चा के साथ, यह समय कदम उठाने और इस मुद्दे को समाप्त करने का है।
  • मानवीय और आजीविका दृष्टिकोण – यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि इस मुद्दे को मानवीय और आजीविका के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
  • मछुआरा स्तर की वार्ता – दोनों देशों के मछुआरा समुदायों की भाषा, संस्कृति और धर्म के समान पक्षों को ध्यान में रखते हुए विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए बातचीत में शामिल होना चाहिए।
  • देशों के बीच आपसी समझ – जैसा कि भारत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने या मछली पकड़ने के वैकल्पिक तरीकों के लिए एक रोडमैप तैयार कर रहा है, श्रीलंकाई लोगों को इस तथ्य को समझना चाहिए कि इस संक्रमण में समय लगता है तथा यह तत्काल नहीं हो सकता है और आगे किसी भी संघर्ष से बचना चाहिए।
  • गहरे समुद्र में मछली पकड़ना – भारत को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की अपनी योजना पर फिर से विचार करना चाहिए जो मछुआरों को बिना किसी संदेह के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने में मदद करती है।
    • संशोधित योजना में लांग लाइनर्स की इकाई लागत और परिचालन लागत दोनों शामिल होनी चाहिए।
    • केंद्र और तमिलनाडु राज्य सरकारों को इन परिवर्तनों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में लागू करना चाहिए जिसमें वैकल्पिक आजीविका तंत्र जैसे समुद्री शैवाल की खेती, खुले समुद्र में पिंजरे की खेती, और समुद्र में रैंचिंग शामिल हैं।
  • मुआवजे का विस्तार – जब भी किसी भी पक्ष के मछुआरों द्वारा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की वास्तविक शिकायत होती है, तो उन्हें उस देश द्वारा मुआवजा दिया जाना चाहिए जिससे नुकसान हुआ है।
  • बहु-हितधारक संस्थागत तंत्र – दोनों देशों को एक स्थायी बहु-हितधारक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए जो क्षेत्र में मछली पकड़ने को विनियमित करे।

सारांश: मत्स्यन को लेकर पाक खाड़ी क्षेत्र में जारी विवादों के मद्देनजर, इस क्षेत्र में मत्स्यन पर संयुक्त अनुसंधान शुरू करने हेतु JWG का कदम एक स्वागत योग्य संकेत है क्योंकि इससे क्षेत्र को न केवल परेशानियों से मुक्त करने के लिए विभिन्न समाधान बल्कि मछली पकड़ने में सहयोगात्मक प्रयासों हेतु एक मॉडल भी मिलेंगे।

प्रीलिम्स तथ्य:

  1. भारत-यू.के रक्षा, व्यापार संबंध

विषय:अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रारंभिक परीक्षा: ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL)

प्रसंग:

  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की हाल की भारत यात्रा के दौरान, यूके ने भारत के लिए ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) की घोषणा की।

ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL):

  • ओपन जनरल लाइसेंस एक प्रकार का लाइसेंस है जिसका उपयोग घरेलू आपूर्तिकर्ताओं हेतु सरकार द्वारा जारी निर्यात लाइसेंस के लिए किया जाता है।
  • भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। तीन प्रकार की वस्तुएं हैं: निषिद्ध, प्रतिबंधित और स्वतंत्र रूप से आयात करने योग्य। ये वर्गीकरण उत्पादों की प्रकृति और इच्छित उपयोग पर आधारित है।
  • आने वाले दशक में अधिक से अधिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग का समर्थन करने के लिए यूके एक ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) जारी करेगा।
  • OEGL का उद्देश्य: OEGL का प्राथमिक उद्देश्य भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना है। इससे व्यापार में सुगमता आएगी और आयात व निर्यात में भी सुधार होगा।
  • OEGL का लाभ: OEGL नौकरशाही के हस्तक्षेप को कम करेगा और भारत की रक्षा खरीद के लिए डिलीवरी का समय कम करेगा। यह भारत-प्रशांत क्षेत्र में पहला ब्रिटिश OEGL है।
  1. इसरो शीघ्र पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान लैंडिंग प्रयोग करेगा

विषय:विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रारंभिक परीक्षा: पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान – प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (RLV-TD)

संदर्भ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का लक्ष्य एक लैंडिंग प्रयोग (LEX) करना है, जो पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान-प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (RLV-TD) कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक है।

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें Reusable Launch Vehicle – Technology Demonstrator (RLV-TD)

  1. राजनाथ सिंह ने रक्षा स्टार्ट-अप के लिए योजनाएं शुरू की

विषय:विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रारंभिक परीक्षा: रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) -प्राइम

संदर्भ: हाल ही में, रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) प्राइम का शुभारंभ किया।


रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) -प्राइम

  • इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में लगातार बढ़ते स्टार्टअप की मदद के लिए ₹1.5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक के सहयोग की आवश्यकता वाली परियोजनाओं की सहायता करना है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

Q1. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. वह पांच वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु , जो भी पहले हो, तक पद धारण करता है।
  2. CAG भारत की आकस्मिकता निधि और भारत के सार्वजनिक खाता से होने वाले सभी व्यय का अंकेक्षण करता है।
  3. CAG केंद्र के खातों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करता है।

विकल्प:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: b

व्याख्या:

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 148 नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति का प्रावधान करता है।
  • इसकी नियुक्ति 6 वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु होने तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाती है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • 1971 में नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें ) अधिनियम को संसद में पारित किया गया था।
  • संविधान द्वारा निर्धारित नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य और कार्य इस प्रकार हैं:
  • भारत की संचित निधि, प्रत्येक राज्य की संचित निधि और एक विधान सभा वाले प्रत्येक संघ राज्य क्षेत्र की संचित निधि से आहरित समस्त व्यय से संबंधित लेखाओं का लेखा परीक्षण करना।
  • भारत की आकस्मिकता निधि और भारत के सार्वजनिक खाते के साथ-साथ आकस्मिक निधि और राज्यों के सार्वजनिक खाते से सभी व्यय का अंकेक्षण। अत: कथन 2 सही है
  • केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के किसी भी विभाग के सभी व्यापार, निर्माण, लाभ और हानि खातों, बैलेंस शीट और अन्य सहायक खातों का अंकेक्षण।
  • भारत सरकार और प्रत्येक राज्य की प्राप्तियों और व्यय की लेखा परीक्षा करना यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस संबंध में नियम और प्रक्रियाएं राजस्व के निर्धारण, संग्रह और उचित आवंटन पर एक प्रभावी निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई हैं।
  • अग्रलिखित प्राप्तियों और व्यय की लेखा परीक्षा: केंद्र या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित सभी निकायों और प्राधिकरणों ; सरकारी कंपनियां; और अन्य निगमों और निकायों का अंकेक्षण अर्थात लेखा-परीक्षा जब संबंधित कानूनों द्वारा ऐसा आवश्यक हो।
  • ऋण, डूबती निधि, जमा, अग्रिम, सस्पेंस खाते और प्रेषण व्यवसाय से संबंधित केंद्र और राज्य सरकारों के सभी लेनदेन की लेखा परीक्षा। वह राष्ट्रपति के अनुमोदन से, या जब राष्ट्रपति द्वारा आवश्यक हो, प्राप्तियों, स्टॉक खातों और अन्य का भी ऑडिट करता है।
  • राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा अनुरोध किए जाने पर किसी अन्य प्राधिकरण के खातों का अंकेक्षण करना। उदाहरण के लिए, स्थानीय निकायों की लेखापरीक्षा अर्थात अंकेक्षण।
  • केंद्र और राज्यों के खातों को किस रूप में रखा जाएगा, इसके बारे में राष्ट्रपति को सलाह देना (अनुच्छेद 150)।
  • राष्ट्रपति को केंद्र सरकार के खातों से संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करना, जो उसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखेगा (अनुच्छेद 151)।
  • राज्यपाल को राज्य सरकार के खातों से संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करना, जो उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखेगा (अनुच्छेद 151)।
  • किसी भी कर या शुल्क की शुद्ध आय का पता लगाना और प्रमाणित करना (अनुच्छेद 279)। इसका प्रमाणपत्र अंतिम है। ‘शुद्ध आय’ का अर्थ है कर या शुल्क की आय से संग्रह की लागत को घटाना।
  • संसद की लोक लेखा समिति के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करना। वह राज्य सरकार के खातों का संकलन और रखरखाव करता है। 1976 में, उसे लेखाओं के विभागीयकरण के माध्यम से लेखाओं को लेखा परीक्षा से अलग करने के कारण भारत सरकार के खातों के संकलन और रखरखाव के संबंध में जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। CAG राष्ट्रपति को तीन ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करता है:
  • विनियोग लेखा पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट
  • वित्तीय खातों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट
  • सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट
  • अनुच्छेद 151 के अनुसार संघ के खातों से संबंधित भारत के सीएजी की रिपोर्ट राष्ट्रपति (केंद्र नहीं) को प्रस्तुत की जाएगी, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगा। अतः कथन 3 सही नहीं है।

Q2.कुरील द्वीप-समूह विवाद निम्नलिखित में से किन देशों के बीच है?

  1. रूस और चीन
  2. चीन और जापान
  3. जापान और रूस
  4. चीन और फिलीपींस

उत्तर: c

व्याख्या:

कुरील द्वीप विवाद, जिसे जापान में उत्तरी क्षेत्र विवाद के रूप में भी जाना जाता है, चार दक्षिणी कुरील द्वीपों पर जापान और रूसी संघ के बीच स्वामित्व से संबंधित है।

अत: विकल्प c सही है।

स्त्रोत: https://www.dw.com/

Q3. नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसका गठन भारत सरकार के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा किया गया था।
  2. इसके उपाध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. दोनों
  4. इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • नीति आयोग एक कार्यकारी निकाय है। 2014 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग के उन्मूलन की घोषणा की और एक कार्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से नीति आयोग की स्थापना की। यह न तो संवैधानिक निकाय है और न ही वैधानिक निकाय। अतः कथन 1 सही है।
  • नीति आयोग परिषद में दिल्ली और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों, सभी केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक उपाध्यक्ष (राष्ट्रपति नहीं) के साथ सभी राज्य के मुख्यमंत्री शामिल हैं। अतः कथन 2 सही नहीं है।

Q4. कार्यसूची (Agenda) 21 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. यह महासागर और तटीय “लचीलापन” को बढ़ाने की एक रणनीति है।
  2. यह ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) का परिणाम है।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. दोनों
  4. इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • एजेंडा 21 सतत विकास से संबंधित एक कार्य योजना है, लेकिन यह गैर-बाध्यकारी है।
  • वन सिद्धांतों को औपचारिक रूप से ‘सभी प्रकार के वनों के प्रबंधन, संरक्षण और सतत विकास पर वैश्विक सहमति के लिए सिद्धांतों का कानूनी रूप से गैर-बाध्यकारी आधिकारिक वक्तव्य’ कहा जाता है। अतः कथन 1 सही नहीं है
  • एजेंडा 21, पर्यावरण और विकास पर रियो घोषणा, और वनों के सतत प्रबंधन के लिए सिद्धांतों का वक्तव्य, 3 से 14 जून 1992 के बीच ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) में 178 से अधिक देशों द्वारा अपनाया गया था। इसलिए कथन 2 सही है

PYQ (2021)

Q5.सत्रहवीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश में, निम्नलिखित में से कहाँ इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कारखाना/के कारखाने स्थित था/थे?

  1. भरूच
  2. चिकाकोल
  3. त्रिचिनोपोली

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 3
  4. केवल 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने 17वीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश तक सूरत, भरूच, अहमदाबाद, आगरा और मसूलीपट्टम में कारखाने स्थापित कर लिए थे।
  • चिकाकोल और त्रिचिनोपोली में कारखाना नहीं था।
  • अत: विकल्प a सही है

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

  1. अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में समग्र प्रगति के बावजूद, भारत अभी भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले पर अत्यधिक निर्भर है। विस्तारपूर्वक समझाइए। (250 शब्द; 15 अंक) सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र III (ऊर्जा)
  2. अनिवासी भारतीयों को मतदान का अधिकार देने पर जोर देने के बजाय, घरेलू प्रवासी मजदूरों के मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र II (राजव्यवस्था)

Leave a Comment

Your Mobile number and Email id will not be published.

*

*