A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. ‘ब्लैक सैटरडे’ के कुछ दिन बाद, रूसियों द्वारा स्थिति का समग्र मूल्यांकन:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  1. डार्क एनर्जी की खोज के लिए यूक्लिड (Euclid) अगले सप्ताह लॉन्च के लिए तैयार:

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

शिक्षा:

  1. रैंकिंग, और उच्च शिक्षा की वास्तविकताएँ:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. जैव उर्वरक योजना को केंद्र की हरी झंडी:
  2. केंद्र द्वारा टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देने के लिए ‘बाजार’ योजना का विचार:
  3. अनुसंधान को रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए कैबिनेट ने NRF विधेयक को मंजूरी दी:
  4. वैश्विक जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है: RBI

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

‘ब्लैक सैटरडे’ के कुछ दिन बाद, रूसियों द्वारा स्थिति का समग्र मूल्यांकन:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ।

प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय घटनाएँ।

मुख्य परीक्षा: भारत और उसके पड़ोसी – संबंध।

प्रसंग:

  • रूस में हाल की घटनाओं, जिसमें वैगनर निजी सैन्य कंपनी के सशस्त्र दस्ते का मॉस्को की ओर मार्च करना भी शामिल है, ने वैश्विक आशंका पैदा कर दी है।
  • राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार के लिए वैगनर विद्रोह जैसी किसी भी कट्टरपंथी चुनौती के निहितार्थ रूस से परे जा सकते हैं, जो संभावित रूप से विश्व व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

रूस में उभरती परिस्थितियों एवं उसके प्रभावों से सम्बंधित जानकारी:

वैगनर विद्रोह प्रकरण:

  • वैगनर समूह के प्रमुख और राष्ट्रपति पुतिन के पूर्व सहयोगी येवगेनी प्रिगोझिन के नेतृत्व में, विद्रोह ने रूस में अपनी अभूतपूर्व प्रकृति के कारण हडकंप मच गया है।
  • इस घटना ने रूस और वहां समाज के भीतर की कमजोरियों को उजागर किया, जो गहरी अंतर्निहित कमजोरियों की ओर इशारा करती है।

संभावित प्रभाव:

  • राजनीतिक वैज्ञानिक किरिल रोगोव इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि असफल सैन्य विद्रोह अक्सर क्रांतियों, तख्तापलट या गृहयुद्ध जैसी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं से पहले घटित होते हैं।
  • यह विद्रोह उन लोगों के बीच “मातृभूमि” की धारणा में विचलन का प्रतीक है, जिन्होंने रूस की एकता के बारे में सवाल उठाते हुए वफादारी का वादा किया था।
  • इस विद्रोह के दौरान, राष्ट्रपति पुतिन ने एकता की आवश्यकता पर जोर दिया और देश को विभाजित करने वाले कार्यों की विश्वासघात के रूप में निंदा की, इसके साथ ही इस घटना की समानता 1917 की क्रांति की उथल-पुथल से मिलती-जुलती है, जिसके परिणामस्वरूप सेना का पतन, राज्य का विघटन और गृहयुद्ध हुआ।
  • राजनीतिक विश्लेषक इन घटनाओं को 21वीं सदी के रूस में तीव्र राजनीतिक संकट के क्षण के रूप में देखते हैं।

रूस में संभावित प्रभाव:

  • राजनीतिक स्थिरता: देश में यूक्रेन के साथ युद्ध चल रहा है जो एक साल से अधिक समय से जारी है। वैगनर समूह के विद्रोह ने रूसी राज्य और समाज के भीतर दरारें उजागर कर दीं हैं, जिससे राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्र की एकता के बारे में चिंताएँ बढ़ गईं हैं।
  • सरकार की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति पुतिन का एकता के लिए आह्वान और विद्रोह पर बाद में की गई कार्रवाई से शक्ति का और अधिक संकेद्रण हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से असहमति और विरोध पर कड़ा नियंत्रण लागू हो सकता है।
  • जनता की धारणा: ये घटनाएँ सरकार पर जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं, विशेष रूप से यदि विद्रोहियों द्वारा उठाई गई शिकायतें व्यापक आबादी को प्रभावित करती हैं, भ्रष्टाचार और निर्णय लेने जैसे मुद्दों को उजागर करती हैं।

वैश्विक निहितार्थ:

  • भूराजनीतिक प्रभाव: रूस में किसी भी अस्थिरता के वैश्विक शक्ति संतुलन पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंध और गठबंधन प्रभावित होंगे।
  • आर्थिक परिणाम: रूस वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भागीदार है, और यहाँ पर हुई राजनीतिक उथल-पुथल अनिश्चितताओं को और बढ़ाएगी तथा यह वैश्विक बाजारों, व्यापार और निवेश को प्रभावित करेगी।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएं: रूस की परमाणु क्षमताओं और सैन्य ताकत को देखते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, विशेष रूप से जब देश युद्धग्रस्त हो तो देश के भीतर की अस्थिरता चिंता का कारण बन जाती हैं।

सारांश:

  • रूस में वैगनर निजी सैन्य कंपनी के संक्षिप्त विद्रोह ने देश के भीतर अंतर्निहित तनाव और कमजोरियों को उजागर किया है। वर्तमान में रूस जिस प्रकार अनिश्चितता के इस दौर से गुजर रहा है, वहीँ दूसरी ओर दुनिया वैश्विक स्थिरता पर संभावित नतीजों को समझते हुए इस पर बारीकी से नजर रख रही है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

डार्क एनर्जी की खोज के लिए यूक्लिड (Euclid) अगले सप्ताह लॉन्च के लिए तैयार:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ।

प्रारंभिक परीक्षा: यूक्लिड मिशन, डार्क एनर्जी।

मुख्य परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी -विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

प्रसंग:

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency (ESA)) द्वारा लॉन्च किया गया यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप, अरबों आकाशगंगाओं का सर्वेक्षण करने और ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के लिए एक असाधारण मिशन पर जाने के लिए तैयार है।
  • इस लेख में यूक्लिड मिशन, इसके महत्व तथा डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की उल्लेखनीय घटनाओं पर प्रकाश डालने की इसकी क्षमता की पड़ताल की गई है।

यूक्लिड मिशन से संबंधित जानकारी:

  • यूक्लिड मिशन ESA के ‘कॉस्मिक विजन’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना और ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों का अन्वेषण करना है।
  • उन्नत उपकरणों के साथ, मिशन आकाश के एक तिहाई से अधिक हिस्से का सर्वेक्षण करेगा, अरबों आकाशगंगाओं और उनकी विशेषताओं से डेटा एकत्र करेगा।

यूक्लिड के घटक:

  • यूक्लिड उन्नत उपकरणों से निर्मित है।
  • यह 1.2 मीटर चौड़े टेलीस्कोप से सुसज्जित है।
  • यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप अपने साथ एक दृश्य-तरंगदैर्ध्य कैमरा (visible-wavelength camera (VISible)) और एक निकट-अवरक्त कैमरा/स्पेक्ट्रोमीटर (near-infrared camera/spectrometer (NISP)) लेकर जाएगा।
  • NISP आकाशगंगाओं की गति का विश्लेषण करेगा, जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव और पदार्थ के वितरण में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।
  • VISible कैमरा दूर की आकाशगंगाओं के आकार में सूक्ष्म विकृतियों की जांच करेगा, जिससे वैज्ञानिकों को गुरुत्वाकर्षण और डार्क एनर्जी के बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।

संभावित खोजें और महत्व:

1. ब्रह्मांड के विकास की खोज:

  • यूक्लिड मिशन का लक्ष्य 10 अरब साल पहले मौजूद आकाशगंगाओं द्वारा उत्सर्जित प्रकाश का अध्ययन करना है, जो ब्रह्मांड के विकास के शुरुआती चरणों की एक झलक पेश करता है।
  • अरबों साल पहले उत्सर्जित इस प्रकाश का विश्लेषण करके, वैज्ञानिक विशाल ब्रह्मांडीय समय के पैमाने पर आकाशगंगाओं के गठन, संरचना और विकास की बेहतर समझ विकसित कर सकते हैं।

2. डार्क एनर्जी पर अधिक प्रकाश डालना:

  • ब्रह्माण्ड के त्वरित विस्तार के लिए डार्क एनर्जी जिम्मेदार है।
  • डार्क एनर्जी ब्रह्मांड का लगभग 68% हिस्सा है और यह ब्रह्मांड के विकास और इसकी संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • यूक्लिड मिशन का उद्देश्य डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के आसपास के रहस्यों को उजागर करने, उनकी प्रकृति और ब्रह्मांड पर प्रभाव के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए आवश्यक डेटा एकत्र करना है।

3. डार्क मैटर पर अधिक प्रकाश डालना:

  • डार्क मैटर एक अदृश्य पदार्थ है जो ब्रह्मांडीय संरचनाओं को आकार देता है।
  • डार्क मैटर, जिसमें ब्रह्मांड का लगभग 27% हिस्सा शामिल है, दृश्यमान पदार्थ पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव डालता है, जिससे आकाशगंगाओं और आकाशगंगा समूहों का निर्माण प्रभावित होता है।
  • यूक्लिड मिशन का लक्ष्य डेटा एकत्र करना है जो डार्क मैटर के गुणों, वितरण और ब्रह्मांडीय वेब में इसकी भूमिका के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएगा।

4. सहयोग और वैज्ञानिक प्रयास:

  • सहयोग को बढ़ावा देने और मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए यूक्लिड कंसोर्टियम में भौतिक विज्ञानी, खगोलशास्त्री, इंजीनियर और प्रबंधक शामिल हैं।
  • विशेषज्ञता और संसाधनों को मिलाकर, संघ का लक्ष्य ब्रह्मांड की हमारी समझ में क्रांति लाने के लिए यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप की क्षमता का उपयोग करना है।

सारांश:

  • ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के लिए अरबों आकाशगंगाओं का सर्वेक्षण करने वाला एक महत्वाकांक्षी मिशन यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं पेश करता है। डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की घटनाओं की खोज करके, यह मिशन मानव जाति को ब्रह्मांड की अपनी समझ का विस्तार करने, खगोल भौतिकी और वैज्ञानिक कानूनों के भविष्य को आकार देने का अवसर प्रदान करेगा।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

रैंकिंग, और उच्च शिक्षा की वास्तविकताएँ:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शिक्षा:

विषय: शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

प्रारंभिक: NIRF रैंकिंग और इसके मापदंड।

मुख्य परीक्षा: भारतीय उच्च शिक्षा से संबंधित चुनौतियाँ और मुद्दे।

प्रसंग:

  • NIRF रैंकिंग का 8वां संस्करण जारी किया गया है, जो भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों के मूल्यांकन और रैंकिंग को प्रदर्शित करता है।

NIRF के बारे में:

  • NIRF उच्च शिक्षा संस्थानों को रैंक प्रदान करने के लिए भारत में शिक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित एक फ्रेमवर्क है।
  • यह 2016 से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है, 2023 का संस्करण लगातार आठवीं रैंकिंग है।
  • NIRF पांच श्रेणियों में संस्थानों का मूल्यांकन करता है: समग्र, विश्वविद्यालय, कॉलेज, अनुसंधान संस्थान और नवाचार।

मूल्यांकन के लिए मापदंड:

कॉलेज की गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए संस्थानों का मूल्यांकन अलग-अलग भारांश वाले पांच मापदंडों के आधार पर किया जाता है:

  1. शिक्षण, अधिगम और संसाधन (40%)
  2. स्नातक परिणाम (25%)
  3. अनुसंधान और व्यावसायिक प्रथाएं (15%)
  4. पहुँच और समावेशिता (10%)
  5. धारणा (10%)

NIRF के बारे में और पढ़ें: National Institutional Ranking Framework (NIRF)

NIRF रैंकिंग से जिन मुद्दों का अनुमान लगाया जा सकता है:

  • संस्थानों की कम भागीदारी:
    • भारत में केवल 12.3% उच्च शिक्षण संस्थानों ने NIRF रैंकिंग में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे अधिकांश संस्थानों की सीमित भागीदारी के बारे में चिंताएँ बढ़ गईं।
    • शेष 87.7% संस्थानों के लिए रैंकिंग मापदंडों पर जानकारी की कमी चिंता का विषय है, क्योंकि यह रैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही में बाधा डालती है।
    • शीर्ष 100 सूची में ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों की सीमित उपस्थिति के साथ, रैंकिंग एक अंतर्निहित शहरी पूर्वाग्रह को प्रदर्शित करती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों के संस्थानों की समावेशिता और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाता है।
  • मात्रा और गुणवत्ता के बीच असंगति:
    • तमिलनाडु, दिल्ली और केरल जैसे कुछ राज्यों में शीर्ष क्रम के कॉलेजों की सघनता, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के मामले में राज्यों के बीच असमानता को उजागर करती है।
    • उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी संख्या में कॉलेजों वाले राज्यों को शीर्ष 100 की सूची में निम्न प्रतिनिधित्व का सामना करना पड़ता है, जो सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
    • निजी संस्थानों की रैंकिंग आम तौर पर सरकारी संस्थानों की तुलना में कम होती है, जो इन क्षेत्रों के बीच गुणवत्ता अंतर को दर्शाता है।
  • फैकल्टी संख्या और रैंकिंग के बीच संबंध:
    • शीर्ष रैंक वाले संस्थानों और अन्य संस्थानों के बीच फैकल्टी संख्या में पर्याप्त अंतर है। शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शेष संस्थानों की तुलना में फैकल्टी सदस्यों की औसत संख्या अधिक है।
    • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का श्रेय केवल भौतिक बुनियादी ढांचे को नहीं दिया जा सकता; योग्य और पर्याप्त फैकल्टी सदस्यों की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है।
    • कई इंजीनियरिंग संस्थान निर्धारित फैकल्टी-छात्र अनुपात का पालन करने में विफल रहते हैं, जिससे समग्र शैक्षिक अनुभव और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  • वैज्ञानिक प्रकाशन:
    • रैंकिंग से संकाय शक्ति, संस्थागत गुणवत्ता और वैज्ञानिक प्रकाशनों के बीच एक मजबूत संबंध का पता चलता है।
    • भाग लेने वाले केवल 12.3% संस्थान देश में लगभग 90% विद्वतापूर्ण परिणामों के उत्पादन में योगदान करते हैं, जो संस्थानों के एक छोटे से अनुपात के बीच अनुसंधान उत्पादकता के संकेन्द्रण को दर्शाता है।
    • रैंकिंग में भाग लेने वाले इंजीनियरिंग संस्थान अपने क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रकाशनों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
    • प्रबंधन डोमेन एक चिंताजनक प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है, जिसमें भाग लेने वाले 50% संस्थानों में शून्य प्रकाशन हैं, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान पर जोर देने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

भावी कदम:

  • बढ़ी हुई धनराशि और संसाधन प्रदान करके, फैकल्टी की गुणवत्ता में सुधार करके और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देकर राज्य विश्वविद्यालयों को मजबूत करना।
  • ग्रामीण संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और उनकी अनूठी चुनौतियों पर विचार करने वाले मापदंडों को विकसित करने के लिए फ्रेमवर्क को संशोधित करके रैंकिंग में शहरी पूर्वाग्रह को संबोधित करना।
  • फैकल्टी विकास, अनुसंधान गतिविधियों और सहयोग को बढ़ावा देने वाली पहलों के माध्यम से निजी और सरकारी संस्थानों के बीच गुणवत्ता अंतर को पाटना।
  • अनुसंधान को प्राथमिकता देने, वित्त पोषण कार्यक्रम स्थापित करने और फैकल्टी विकास का समर्थन करने के लिए, विशेष रूप से प्रबंधन में, संस्थानों को प्रोत्साहित करके अनुसंधान और प्रकाशन पर जोर देना।
  • उच्च शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाना, बुनियादी ढाँचे के विकास, फैकल्टी भर्ती, अनुसंधान अनुदान और छात्रवृत्ति के लिए अधिक धन आवंटित करना।

सारांश:

  • NIRF इंडिया रैंकिंग 2023 निम्न भागीदारी, मात्रा और गुणवत्ता के बीच असंगति, फैकल्टी-संख्या सहसंबंध और भारत में उच्च शिक्षा में सुधार के लिए बढ़े हुए वित्तपोषण की आवश्यकता के मुद्दों पर प्रकाश डालती है।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.जैव उर्वरक योजना को केंद्र की हरी झंडी:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

कृषि:

विषय: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी से संबंधित मुद्दे, पर्यावरण प्रदूषण एवं संरक्षण।

प्रारंभिक परीक्षा: नैनो यूरिया, पीएम-प्रणाम कार्यक्रम।

प्रसंग:

  • हाल ही में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM) या “धरती माता की जीर्णोद्धार जागरूकता, सृजन, पोषण और सुधार के लिए प्रधानमंत्री कार्यक्रम” को मंजूरी दे दी है।

विवरण:

  • इस वर्ष के बजट (2023-24 union budget) में पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM) योजना का प्रस्ताव रखा गया था।
  • इसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता को बचाना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
  • यह एक प्रोत्साहन आधारित योजना है जिसमें राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी शामिल है।
  • वैकल्पिक उर्वरक अपनाने वाले राज्यों को रासायनिक उर्वरक के उपयोग में कमी से बचाई जाने वाली सब्सिडी के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि एक राज्य हरित उर्वरकों का उपयोग करके पारंपरिक उर्वरकों की खपत को तीन लाख टन तक कम कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप 3,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचत होती है। अतः इन प्रयासों से केंद्र सरकार उस सब्सिडी बचत का 50% प्रदान करके राज्य को प्रोत्साहित करेगी।
  • मौजूदा यूरिया सब्सिडी योजना को जारी रखना: यूरिया सब्सिडी योजना जारी रहेगी, जिससे किसानों को किफायती मूल्य पर यूरिया की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि किसानों को वित्तीय बोझ के बिना अपनी फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों तक पहुंच प्राप्त हो।
  • जैविक उर्वरकों के लिए बाज़ार विकास सहायता (MDA): पीएम-प्रणाम योजना में बाजार विकास सहायता (MDA) के लिए 1,451.84 करोड़ रुपये का आवंटन शामिल है।
  • MDA का लक्ष्य गोबरधन पौधों से प्राप्त जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देना है, जो बायो-गैस संयंत्रों और संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्रों से उप-उत्पाद के रूप में किण्वित जैविक खाद (FOM), तरल FOM और फॉस्फेट युक्त जैविक खाद (PROM) का उत्पादन करते हैं।
  • यूरिया के पर्यावरण अनुकूल विकल्प का उपयोग अर्थात नैनो यूरिया उत्पादन: देश में यूरिया के अधिक कुशल और पर्यावरण अनुकूल रूप नैनो यूरिया का उपयोग बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 तक 44 करोड़ बोतल उत्पादन क्षमता वाले आठ नैनो यूरिया संयंत्र चालू हो जाएंगे।
  • नैनो यूरिया प्रौद्योगिकी फसलों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाती है और नाइट्रोजन के नुकसान को कम करती है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता और लागत बचत में वृद्धि होती है।
  • यह पहल प्राकृतिक/जैविक कृषि पद्धतियों का समर्थन करती है और मिट्टी की उत्पादकता को फिर से जीवंत करने में योगदान देती है।

2. केंद्र द्वारा टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देने के लिए ‘बाजार’ योजना का विचार:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण:

विषय: पर्यावरण प्रदूषण संरक्षण एवं क्षरण।

प्रसंग:

  • हाल ही में, भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय प्रस्तावित ‘ग्रीन क्रेडिट योजना’ की एक मसौदा अधिसूचना लेकर आया है जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय कार्यों को प्रोत्साहित करना और टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देना है।

विवरण:

  • इस योजना में व्यक्तियों और संगठनों के लिए वनीकरण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और वायु प्रदूषण को संबोधित करने जैसी उनकी गतिविधियों के लिए ‘हरित क्रेडिट’ उत्पन्न करने का प्रावधान है।
  • इन क्रेडिट का मौद्रिक मूल्य के लिए व्यापार किया जा सकता है। यह स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्यों को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ प्रथाओं को चलाने के लिए एक बाजार-आधारित दृष्टिकोण है।
  • इस योजना का उद्देश्य व्यक्तियों, समुदायों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं को पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • ग्रीन क्रेडिट के लिए योग्य गतिविधियाँ: मसौदा अधिसूचना आठ क्षेत्रों या गतिविधियों की पहचान करती है जो ग्रीन क्रेडिट उत्पन्न करने के लिए योग्य हैं।
  • इन्हें मोटे तौर पर निम्नलिखित में शामिल किया गया है:
  1. वृक्षारोपण-आधारित क्रेडिट: वृक्षारोपण और संबंधित पहलों के माध्यम से हरित आवरण के विस्तार को बढ़ावा देना।
  2. जल-आधारित क्रेडिट: जल संरक्षण, जल संचयन, कुशल जल उपयोग और अपशिष्ट जल उपचार और पुन: उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  3. सतत कृषि-आधारित क्रेडिट: प्राकृतिक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों का समर्थन करना, भूमि की बहाली, और मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादित भोजन के पोषण मूल्य में सुधार करना।
  4. अपशिष्ट प्रबंधन-आधारित क्रेडिट: स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना और अपशिष्ट निपटान विधियों में सुधार लाना।
  • यह योजना वनों की कटाई, पानी की कमी, मिट्टी के क्षरण और प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों को कम करने में योगदान देगी।
  • इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करके पारिस्थितिक संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना है।
  • इस प्रकार का मॉडल कई देशों में लागू है लेकिन जो बात इस योजना को अद्वितीय बनाती है वह इसमें शामिल गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला है जिसमें सभी की भागीदारी की गुंजाइश है।

3.अनुसंधान को रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए कैबिनेट ने NRF विधेयक को मंजूरी दे दी:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 और 3 से संबंधित:

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव (GS 3)। सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप (GS 2)।

प्रसंग:

  • हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) विधेयक, 2023 को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य NRF को भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए शीर्ष निकाय के रूप में स्थापित करना है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप है। इससे देश में वैज्ञानिक प्रयासों को रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है।

विवरण:

  • राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना: NRF विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई है, जिससे भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए शीर्ष निकाय के रूप में NRF की स्थापना का मंच तैयार हो गया है।
  • NRF देश भर में उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने और वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयासों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • NRF विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की प्रशासनिक निगरानी में काम करेगा।
  • इस विधेयक का उद्देश्य समान वित्त पोषण और भागीदारी सुनिश्चित करना है।
  • शासन संरचना:
    • बोर्ड: NRF विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं और पेशेवरों के एक बोर्ड द्वारा शासित होगा, जिसके पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं शिक्षा मंत्री पदेन उपाध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।
    • एक कार्यकारी परिषद: परिषद NRF के संचालन और निर्णय लेने की प्रक्रिया की देखरेख करेगी। इसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार करेंगे।
  • विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) का अधिक्रमण करना: NRF विधेयक विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) की जगह लेगा, जिसे 2008 में संसद द्वारा स्थापित किया गया था, और इसे NRF में शामिल कर लिया जाएगा।
  • एक एकीकृत ढांचे के तहत वित्त पोषण और समन्वय का समेकन: NRF प्रतिष्ठित IITs और IISc से परे राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए समान समर्थन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के साथ, अनुसंधान वित्त वितरण में मौजूदा असमानताओं को दूर करेगा।
  • NRF विधेयक वैज्ञानिक अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को बढ़ावा देना चाहता है।
  • NRF कार्यकारी परिषद द्वारा निर्धारित अनुसंधान आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर वित्त पोषण को प्राथमिकता देगा।
  • वित्त पोषण: सरकार ने पांच वर्षों की अवधि में 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है।
    • निजी योगदान से करीब 36000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।

4. वैश्विक जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है: RBI

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना से संबंधित मुद्दे

प्रसंग:

  • हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी अर्द्धवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) जारी की है। रिपोर्ट वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितता में भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू वित्तीय प्रणाली की ताकत और लचीलेपन पर प्रकाश डालती है।
  • रिपोर्ट में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) में गिरावट और तनाव परिदृश्यों के तहत पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) की क्षमता जैसे सकारात्मक संकेतक सामने आए हैं।

विवरण:

  • NPA में गिरावट: FSR से पता चलता है कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित संपत्ति अनुपात मार्च 2023 में 10 साल के निचले स्तर 3.9% पर पहुंच गया। यह गिरावट परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार का संकेत देती है, जो बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन को दर्शाती है।
  • मजबूत पूंजी भंडार: RBI के मैक्रो तनाव परीक्षण दर्शाते हैं कि SCBs गंभीर तनाव परिदृश्यों में भी न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं का अनुपालन करने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हैं। यह भारतीय बैंकों के विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन और मजबूत पूंजी भंडार को दर्शाता है।
  • लचीली घरेलू वित्तीय प्रणाली: जबकि वैश्विक वित्तीय प्रणाली विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग उथल-पुथल के कारण तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, ऐसी स्थिति में भी भारतीय वित्तीय क्षेत्र स्थिर और लचीला बना हुआ है।
  • दोहरे तुलन पत्र (ट्विन बैलेंस शीट) का लाभ: बैंकिंग और कॉर्पोरेट दोनों क्षेत्रों ने अपने तुलन पत्र (बैलेंस शीट) को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। गवर्नर दास ने इसे ‘ट्विन बैलेंस शीट के लाभ’ के रूप में वर्णित किया है, जो अधिक स्थिर और लचीली वित्तीय प्रणाली को बढ़ावा देकर समग्र आर्थिक विकास में योगदान देता है।
  • सकारात्मक आर्थिक दृष्टिकोण: मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों द्वारा समर्थित भारतीय अर्थव्यवस्था का लचीलापन, भविष्य के विकास के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
    • मजबूत बैलेंस शीट, घटते NPAs और SCBs की तनाव परिदृश्यों को झेलने की क्षमता भारतीय अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिरता में योगदान करती है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र किसके संदर्भ में अक्सर समाचारों में देखे जाते हैं?

  1. टाइग्रे युद्ध
  2. रूस-यूक्रेन युद्ध
  3. सर्बिया-कोसोवो संघर्ष
  4. अफगानिस्तान संकट

उत्तर: b

व्याख्या:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र (एक साथ डोनबास क्षेत्र कहा जाता है) पूर्वी यूक्रेन में हैं जो रूस की सीमा पर स्थित है।

प्रश्न 2. उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसे एनजीओ प्रथम द्वारा जारी किया गया है।
  2. इसमें भारतीय क्षेत्र में स्थित और देश में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
  3. इसकी शुरुआत साल 2021 में की गई थी।

इनमें से कितने कथन सही है/हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 और 3 गलत हैं: उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) वर्ष 2011 में शुरू किया गया था, जिसके दौरान वर्ष 2010-11 के लिए डेटा एकत्र किया गया था। इसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है।

प्रश्न 3. हाल ही में समाचारों में देखा गया यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप किसके द्वारा विकसित किया गया है?

  1. रॉसकॉसमॉस
  2. जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी
  3. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी
  4. इज़राइल अंतरिक्ष एजेंसी

उत्तर: c

व्याख्या:

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का यूक्लिड मिशन स्पेसएक्स से फाल्कन9 रॉकेट पर अंतरिक्ष में लॉन्च करने के लिए तैयार है। मिशन को विशेष रूप से सुदूर ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो “डार्क मैटर” और “डार्क एनर्जी” दोनों का अन्वेषण करेगा।

प्रश्न 4. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की अध्यक्षता की जाती है?

  1. वित्त मंत्री द्वारा
  2. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री द्वारा
  3. प्रधानमंत्री द्वारा
  4. गृह राज्य मंत्री द्वारा

उत्तर: c

व्याख्या:

  • CCEA सरकार द्वारा गठित कैबिनेट की स्थायी समितियों में से एक है। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।

प्रश्न 5. वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) किसके द्वारा प्रकाशित की जाती है?

  1. भारतीय रिजर्व बैंक
  2. वित्त मंत्रालय
  3. कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय
  4. नीति आयोग

उत्तर: a

व्याख्या:

  • वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रकाशित एक अर्द्धवार्षिक रिपोर्ट है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. वैगनर समूह ने रूसी राजनीति में निहित कमियों का खुलासा किया है। टिप्पणी कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध]

प्रश्न 2. NIRF रैंकिंग को लेकर बहुत सारे विवाद हैं। क्या आप इससे सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) [जीएस-2, शिक्षा]