06 May 2022: PIB Summary for UPSC

06 मई 2022 : PIB विश्लेषण

विषय सूची:

  1. राजमार्ग अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए एनएचएआई का समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
  2. कोयला मंत्रालय द्वारा कोयला गैसीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए राजस्व साझाकरण में 50 प्रतिशत रियायत को स्वीकृति
  3. औषध विभाग द्वारा अकादमिक संस्थानों के लिए “औषधि नवाचार और उद्यमिता पर सामान्य दिशा-निर्देश” जारी
  4. जयपुर में क्लस्टर-आधारित व्यापार संगठनों (CBBO) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का सम्मेलन
  1. राजमार्ग अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए एनएचएआई का समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
  2. सामान्य अध्ययन:3

    अर्थव्यवस्था:

    विषय:बुनियादी ढाँचा: सड़क परिवहन को बेहतर करने के लिए सरकारी और अन्य हितधारकों के प्रयास।

    प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)।

    मुख्य परीक्षा: राजमार्ग अवसंरचना को बेहतर बनाने में विभिन्न समझौता ज्ञापनों का महत्त्व

    प्रसंग:

    • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने लखनऊ में अधिकारियों और उत्तर प्रदेश पूर्व तथा पश्चिम, उत्तराखंड और बिहार के अन्य क्षेत्रीय हितधारकों के साथ दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MOU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो राष्ट्रीय राजमार्ग की अवसंरचना को बेहतर बनाने में योगदान देंगे और उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों में पर्यावरण के संरक्षण में योगदान देंगे।

    विवरण:

    • एनएचएआई और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, उत्तर प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण करने में स्वयं सहायता समूहों को शामिल करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए, जिसे अपनी तरह का पहला समझौता कहा जा सकता है। यह पहल मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में भी शुरू की जाएगी।
    • एनएचएआई और अम्मन्न इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दूसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों संस्थाओं ने उच्च कौशल प्राप्त कार्यबल का एक समूह बनाने के लिए सहयोग किया है, जो राजमार्ग निर्माण, पुनर्वास और रखरखाव से सम्बंधित उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित होगा।
    • एक आत्मनिर्भर राष्ट्र का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब उसके पास एक मजबूत अवसंरचना हो और इसलिए, एक स्थायी राजमार्ग नेटवर्क बनाना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
    • “क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने का उद्देश्य प्रौद्योगिकी साझा करना और उन चीजों के बारे में चर्चा करना है, जो न केवल निर्माण की गति को तेज करते हैं, बल्कि सड़क निर्माण प्रक्रिया को अधिक गुणवत्तापूर्ण और स्थायित्व प्रदान करते हैं।”
    • वित्त वर्ष 2021-22 में एनएचएआई ने सभी क्षेत्रों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। वर्ष के दौरान, एनएचएआई ने कुल 6,306 किलोमीटर की परियोजनाओं का कार्य सौंपा है, जो पिछले तीन वर्षों में प्राधिकरण द्वारा दी गयी सड़क निर्माण की सबसे अधिक लंबाई है। सौंपी गई परियोजनाओं की कुल पूंजीगत लागत 2.47 लाख करोड़ रुपए है। वित्त वर्ष 2021-22 में, एनएचएआई ने कुल 4,325 किमी की लंबाई का निर्माण किया, जो वित्त वर्ष 2020-21 के 4,218 किमी और वित्त वर्ष 2019-20 के 3,979 किमी की तुलना में अधिक है।
    • राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए एनएचएआई द्वारा पूंजीगत व्यय अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 21-22 के लिए 1,68,770 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, एनएचएआई ने एक वित्तीय वर्ष में शुरू की गई परियोजनाओं की अधिकतम लंबाई (तिथियां घोषित) की उपलब्धि हासिल की है। प्राधिकरण ने 2021-22 में 4,331 किलोमीटर की परियोजनाएं शुरू कीं। विवाद समाधान में, एनएचएआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 14,590 करोड़ रुपये की दावा राशि के स्थान पर 60 मामलों को 4,076 करोड़ रुपये में निपटाया, जो कुल दावा राशि का लगभग 28 प्रतिशत है।
    • उत्तर प्रदेश में, एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। पिछले 8 वर्षों में, एनएचएआई ने एक लाख करोड़ रुपये की कुल 2,100 किलोमीटर लंबाई की 31 परियोजनाओं को पूरा किया है। इनमें से ज्यादातर या तो 4 या 6 लेन के हाईवे हैं। वर्तमान में, राज्य में लगभग 73,000 करोड़ रुपये लागत की कुल 2,200 किलोमीटर लंबाई की 50 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। अगले 3-4 वर्षों में प्राधिकरण की योजना लगभग 63,000 करोड़ रुपये की लागत से और 1,800 किलोमीटर राजमार्ग का विकास करना है।
  3. कोयला मंत्रालय द्वारा कोयला गैसीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए राजस्व साझाकरण में 50 प्रतिशत रियायत को स्वीकृति
  4. सामान्य अध्ययन: 3

    अर्थव्यवस्था:

    विषय: ऊर्जा।

    प्रारंभिक परीक्षा: कोयला गैसीकरण

    प्रसंग:

    • केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कोयला मंत्रालय ने कोयला गैसीकरण के लिए राजस्व साझाकरण में 50 प्रतिशत रियायत को स्वीकृति दे दी है।

    विवरण:

    • मुंबई में एक निवेशक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को ऊर्जा के मामले में स्वतंत्र बनाने में सहायता हेतु कोयले से हाइड्रोजन बनाने जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे पहले उन्होंने राजस्व साझेदारी मॉडल पर कोल इंडिया लि. की बंद/ ठप हो चुकी खदानों का शुभारम्भ किया था।
    • “कोयला गैसीकरण वर्तमान समय की आवश्यकता और टिकाऊ भविष्य की ओर एक कदम है।” सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का है। इससे तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्र में रोजगार का सृजन होगा।
    • कोयला गैसीकरण को कोयला जलाने की तुलना में स्वच्छ विकल्प माना जाता है। गैसीकरण से कोयले की रासायनिक विशेषताओं के उपयोग की सहूलियत मिलती है। केंद्रीय मंत्री ने उद्योग को ‘कोयला से हाइड्रोजन’ के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कोयला मंत्रालय द्वारा तैयार ‘कोयले से हाइड्रोजन के लिए रोडमैप’ पर एक रिपोर्ट पेश की। इस कार्यक्रम के दौरान कोयला गैसीकरण में उद्योग के विशेषज्ञों, परामर्शकों, शोधकर्ताओं और हितधारकों ने अपने विचार रखे।
    • कोयला गैसीकरण को समर्थन और रियायती दर पर क्षेत्र को कोयला उपलब्ध कराने के क्रम में, कोयला मंत्रालय ने कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी के लिए राजस्व साझेदारी में 50 प्रतिशत रियायत के लिए एक नीति पेश की है। अगर सफल बोलीदाता निकाले गए कोयले का या तो अपने संयंत्र (या संयंत्रों) या अपनी होल्डिंग, सहायक कंपनियों, संबद्ध कंपनियों, एसोसिएट कंपनियों में कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण में उपयोग करती है या सालाना आधार पर कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए कोयले को बेचती है तो बोलीदाता रियायत का पात्र होगा। हालांकि, यह उस साल के लिए स्वीकृत खनन योजना के तहत निर्धारित कोयला उत्पादन का कम से 10 प्रति गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए उपभोग करने या बेचने की शर्तों से बंधा रहेगा।
    • कोयले से निर्मित सिन-गैस का उपयोग बिजली उत्पादन के साथ ही हाइड्रोजन (CCUS के साथ नीली), वैकल्पिक प्राकृतिक गैस (SNG या मीथेन), डाई-मिथाइल ईथर (DME) जैसे गैसीय ईंधन, मेथेनॉल, एथेनॉल, सिंथेटिक डीजल जैसे तरल ईंधन और मेथेनॉल डेरिवेटिव्स, ओलेफिन्स, प्रोपिलीन, मोनो एथिलीन ग्लाइकोल (MEG) जैसे रसायन, अमोनिया, डीआरआई, औद्योगिक रसायनों सहित नाइट्रोजन उर्वरक बनाने में किया जा सकता है। इन उत्पादों से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने में सहायता मिलेगी।
  5. औषध विभाग द्वारा अकादमिक संस्थानों के लिए “औषधि नवाचार और उद्यमिता पर सामान्य दिशा-निर्देश” जारी
  6. सामान्य अध्ययन: 2

    स्वास्थ्य:

    विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

    मुख्य परीक्षा: “औषध नवाचार और उद्यमिता पर औषध विभाग द्वारा अकादमिक संस्थानों के लिए जारी सामान्य दिशा-निर्देश” का प्रभाव

    प्रसंग:

    • औषधि विभाग ने नवाचार व अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और उद्यमिता को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय नवाचार और स्टार्टअप नीति 2019, राष्ट्रीय आईपीआर नीति 2016 और अन्य संस्थानों/विभागों की इसी तरह की नीतियों पर विचार करने के बाद अपने अधीन शैक्षणिक संस्थानों के लिए ‘औषधि नवाचार और उद्यमिता पर एक सामान्य दिशा-निर्देश’ तैयार किया है।

    विवरण:

    • औषध विभाग का उद्देश्य भारतीय फार्मा क्षेत्र को गुणवत्तापूर्ण दवाओं के लिए वैश्विक नेता के रूप में बढ़ावा देना और देश में दवाओं व चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, पहुंच तथा वहनीयता को सुनिश्चित करना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के उपायों में से एक अनुसंधान व विकास और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना भी है। इसे प्राप्त करने के लिए विभाग ने कई अन्य उपायों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और हाई-एंड अनुसंधान के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में सात राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) की स्थापना की है।
    • हाल ही में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) ने उद्योग और शोधकर्ताओं के लिए एक सामान्य (कॉमन) अनुसंधान पोर्टल लॉन्च किया है। इसके अलावा संस्थान ने राष्ट्रीय जरूरतों और अपनी विशेषज्ञता व सुविधाओं के आधार पर एक सामान्य अनुसंधान कार्यक्रम भी तैयार किया है। वहीं, विभाग जल्द ही ‘भारत में फार्मा-मेडटेक (चिकित्सा प्रौद्योगिकी) क्षेत्र में अनुसंधान व विकास और नवाचार को उत्प्रेरित करने की नीति’ भी ला रहा है।
    • इस नीति का उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान को अभिनव व व्यावसायिक रूप से अनुकूल प्रौद्योगिकियों/उत्पादों में रूपांतरित करना, रचनात्मकता व उद्यमशीलता की गतिविधियों के पोषण के लिए मजबूत वातावरण का निर्माण और आत्मनिर्भर भारत मिशन में अपना योगदान करना है।
    • नीति दिशा-निर्देशों का उद्देश्य है:
      • उद्यमिता को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षकों/कर्मचारियों और छात्रों को प्रोत्साहित करना
      • नीतियों को तैयार करना और सभी विषयों में विचारों को उत्पन्न करने के लिए एक इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देना, जिसे सफल प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और सेवाओं में रूपांतरित किया जा सके
      • प्रौद्योगिकी विकास और तकनीकी हस्तांतरण के लिए एक तंत्र स्थापित करना
      • इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करना, और
      • लोगों को लाभ पहुंचाने वाली अपूर्ण चिकित्सीय और सामाजिक रूप से प्रभावशाली प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए औषधि नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देना
    • रसायन और उर्वरक मंत्री ने इन नीति दिशानिर्देशों के अंतिम रूप को मंजूरी दे दी है। इनकी त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर और अधिक कदम उठाने के लिए सभी राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) में इसे भेज दिया गया है।
  7. जयपुर में क्लस्टर-आधारित व्यापार संगठनों (CBBO) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का सम्मेलन
  8. सामान्य अध्ययन: 3

    कृषि:

    विषय: भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग।

    प्रारंभिक परीक्षा:किसान उत्पाद संगठनों (FPO) का गठन और संवर्धन योजना।

प्रसंग:

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में 10,000 FPO के गठन और संवर्धन की योजना के तहत क्लस्टर आधारित व्यापार संगठनों (CBBO) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के सम्मेलन का उद्घाटन किया।

विवरण:

  • किसानों की आय दोगुनी करने में CBBO तथा FPO की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा इसलिए, CBBO को FPO आंदोलन में शामिल होने के लिए छोटे तथा सीमांत किसानों को संगठित करने हेतु स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों से संपर्क करना चाहिए। सरकारी योजनाओं में FPO को प्राथमिकता दी जाती है।
  • गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान योजनाओं को लागू कर रहे हैं जिसके तहत 894 उत्पाद क्लस्टर आवंटित किए गए हैं और 563 एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं, 1.35 लाख से अधिक किसानों को संगठित किया गया है और लगभग 56,012 किसानों को एफपीओ के शेयरधारकों के रूप में पंजीकृत किया गया है। किसान सदस्यों द्वारा इक्विटी योगदान की राशि 9.64 करोड़ रुपए है। 30 महिला केंद्रित एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं। जनजातीय जिलों में 64 एफपीओ पंजीकृत किए गए और आकांक्षी जिलों में 85 एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं।

10,000 किसान उत्पाद संगठनों (FPO) के गठन और संवर्धन के बारे में

  • भारत सरकार ने ‘10,000 किसान उत्पाद संगठनों (FPO) का गठन और संवर्धन’ नामक एक नई योजना तैयार की थी, जिसे औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री द्वारा 29.02.2020 को चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) में 6865 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ लॉन्च किया गया था। इस सम्मेलन में, छोटे और सीमांत किसानों द्वारा FPO गठित करने तथा किसानों के सशक्तिकरण हेतु उनकी आर्थिक ताकत, मोल-जोल की शक्ति और बाजार संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
  • यह योजना उत्पादन क्लस्टर दृष्टिकोण पर आधारित होने के साथ-साथ उत्पादन, उत्पादकता, बाजार पहुंच, विविधीकरण में वृद्धि, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने तथा आर्थिक रूप से सशक्त किसानों के माध्यम से कृषि से संबंधित रोजगार के अवसर उत्पन्न करने पर आधारित है। क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण को अपनाते हुए, उत्पाद विशेषज्ञता के विकास के लिए FPO का गठन ‘एक जिला एक उत्पाद’ पर केंद्रित होगा।
  • वित्तीय लाभ और तकनीकी सहायता के लिए योजना के तहत पात्र होने के लिए FPO को कंपनी अधिनियम, 2013 या राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। योजना के तहत उन्हें टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए प्रबंधन लागत के रूप में 3 साल के लिए प्रति FPO अधिकतम 18.00 लाख रुपए की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। मैदानी इलाकों में न्यूनतम 300 किसानों की सदस्यता वाला FPO योजना के तहत पात्र होगा, जबकि उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों में *(केंद्रशासित प्रदेशों के ऐसे अन्य क्षेत्रों सहित), 100 किसानों की सदस्यता वाला FPO इक्विटी अनुदान के लिए पात्र होगा। FPO के वित्तीय आधार को मजबूत करने के लिए, अधिकतम 2000/- रुपए प्रति सदस्य के बराबर इक्विटी अनुदान का प्रावधान भी है, जिसकी अधिकतम सीमा 15 लाख रुपए/एफपीओ और ऋण गारंटी सुविधा तक एक बैंक-योग्य परियोजना ऋण 2.00 करोड़ रुपए तक है।
  • इस योजना के तहत, CBBO को किसानों की लामबंदी, बेसलाइन सर्वेक्षण, उत्पाद समूहों की पहचान, समूहों के गठन, पंजीकरण और क्षमता निर्माण से लेकर व्यापार योजना तैयार करने, एफपीओ को बाजार उपलब्ध कराने के आश्वासन के साथ उसके निष्पादन तक की मूल्य श्रृंखला में स्वयं को शामिल करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका का प्रावधान किया गया है। उन्हें क्रियान्वयन एजेंसियों और FPO के साथ निकट संपर्क भी स्थापित करना है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कोई समाचार नहीं हैं।

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