02 जनवरी 2023 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आधुनिक भारतीय इतिहास:

  1. भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक:

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. भारत-पाकिस्तान संबंध:

राजव्यवस्था:

  1. असम में परिसीमन:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  1. डीपफेक का खतरा:

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत-चीन: 1962 से पहले और अब के बीच

भारतीय राजव्यवस्था:

  1. हां और ना (प्रवासियों को मतदान अधिकार के संबंध में)

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. भारत-ऑस्ट्रिया:
  2. बाजरा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (IYM):

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत में बेरोजगारी दर:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

भारत-पाकिस्तान संबंध:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी देशों के साथ – संबंध।

मुख्य परीक्षा: भारत-पाकिस्तान संबंधों को सकारात्मक राह पर पर लाने के लिए विश्वास-निर्माण के उपाय।

संदर्भ:

  • भारत और पाकिस्तान ने 01 जनवरी, 2023 को 32 साल की परंपरा को जारी रखते हुए एक द्विपक्षीय करार के तहत अपने देशों के परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूचियों का आदान-प्रदान किया है।

परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की सूची:

  • नव वर्ष के मौके पर दोनों देशों ने परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं के खिलाफ हमले के निषेध पर समझौते के तहत शामिल परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की सूची का आदान-प्रदान किया है।
  • इस समझौते पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 27 जनवरी, 1991 को प्रभावी हुआ था।
  • इस समझौते में यह निर्धारित किया गया था कि प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की पहली जनवरी को, भारत और पाकिस्तान को इस समझौते के तहत शामिल परमाणु स्थलों और सुविधाओं के बारे में जानकारी का आदान-प्रदान करना होगा।
  • इसमें एक प्रावधान यह भी है कि दोनों देशों के बीच शत्रुता की स्थिति में इन परमाणु प्रतिष्ठानों (दोनों देशों के) पर हमला नहीं किया जा सकता है।
  • 1 जनवरी, 1992 को पहली सूची के आदान-प्रदान करने के बाद, अब तक दोनों देशों के बीच 32 सूचियों का आदान-प्रदान हो चुका है।

नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची:

  • 01 जनवरी, 2023 को प्रत्येक राष्ट्र (भारत-पाकिस्तान) द्वारा पकड़े गए मछुआरों और असैन्य बंदियों की सूची भी साझा की गई थी।
  • कॉन्सुलर एक्सेस (पहुँच) पर वर्ष 2008 के समझौते के अनुसार, प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को ऐसी सूचियों का आदान-प्रदान वर्ष में दो बार किया जाता है।
  • भारत ने वर्तमान में भारतीय हिरासत में 339 पाकिस्तानी नागरिक कैदियों और 95 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची साझा की है।
  • इसी प्रकार पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में 51 नागरिक कैदियों और 654 मछुआरों की सूची साझा की है, जो भारतीय हैं या भारतीय माने जाते हैं।
  • दोनों देशों के बीच इन सूचियों का आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ कूटनीतिक माध्यम से किया गया।
  • गौरतलब है कि कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच संबंधों में जारी तनाव के बीच सूची का आदान-प्रदान हुआ।

मानवीय मामलों को हल करने के लिए भारत का आह्वान:

  • भारत सरकार ने सभी मानवीय मामलों का समाधान करने के लिए पाकिस्तान की हिरासत से असैन्य कैदियों, लापता भारतीय रक्षा कर्मियों और मछुआरों को उनकी नावों के साथ जल्द रिहा करने और वापस लाने का आह्वान किया है।
  • इसके अतिरिक्त भारत ने अनुरोध किया है कि 631 भारतीय मछुआरों और दो भारतीय नागरिक बंदियों की रिहाई में तेजी लाई जाए, जिन्होंने अपना समय पूरा कर लिया है और जिनकी राष्ट्रीयता सत्यापित की जा चुकी है और पाकिस्तान को अवगत कराया गया है।
  • विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय पक्ष ने “पाकिस्तान की हिरासत में शेष 30 मछुआरों और 22 नागरिक कैदियों, जिन्हें भारतीय माना जाता है” के लिए “तत्काल” कांसुलर एक्सेस की मांग की थी।
  • पाकिस्तान को मछुआरों सहित 71 पाकिस्तानी बंदियों की “राष्ट्रीयता की स्थिति” की पुष्टि करने के लिए भी कहा गया था, जिनका प्रत्यावर्तन अभी भी लंबित है क्योंकि पाकिस्तान ने अभी तक उनकी नागरिकता की स्थिति को प्रमाणित नहीं किया है।

सारांश:

  • भारत एक-दूसरे के देश में कैदियों और मछुआरों से संबंधित मामलों सहित सभी मानवीय मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए, भारत ने पाकिस्तान में भारतीय कैदियों की शीघ्र रिहाई और प्रत्यावर्तन के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने का आह्वान किया है।
  • भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:India-Pakistan Relations

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक:

आधुनिक भारतीय इतिहास:

विषय: 1857 से पहले की आधुनिक भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ।

मुख्य परीक्षा: दलित प्रतीक के रूप में भीमा-कोरेगांव युद्ध।

संदर्भ:

  • 1 जनवरी, 2023 को सन 1818 में हुई भीमा-कोरेगांव युद्ध (Bhima-Koregaon battle) की 205वीं वर्षगांठ मनाई गई।

विवरण:

  • पुणे जिले के पेरने गांव में ‘जयस्तंभ’ पर कोरेगांव भीमा युद्ध की 205 वीं वर्षगांठ को मनाने हेतु 01 जनवरी, 2023 को आयोजित कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
  • ‘जयस्तंभ’ एक ‘सैन्य स्मारक’ है जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1821 में अपने उन सैनिकों की याद में बनवाया था, जिन्होंने 1 जनवरी, 1818 को कोरेगांव भीमा युद्ध में मराठा शासन के दौरान पेशवाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
  • यह तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध की अंतिम लड़ाइयों में से एक थी, जिसने पेशवा वर्चस्व को समाप्त कर दिया था।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 2018 में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के दौरान हिंसा की घटनाएं हुई थीं।
  • वर्ष 2018 के संघर्ष जिसने पूरे राज्य में सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया था और इसकी गूंज पूरे देश में महसूस की गई थी, के परिणामस्वरूप अम्बेडकरवादी अनुयायियों की संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाया गया था।
  • आयोजन के दौरान कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए, पुणे ग्रामीण पुलिस ने शांति भंग करने के संभावित उद्देश्य के साथ उत्तेजक सामग्री वाली 100 से अधिक पोस्टों को हटाते हुए, सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी रखी थी।
  • साथ ही इस इलाके में करीब सात हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।

भीमा कोरेगांव को दलित प्रतीक के रूप में क्यों देखा जाता है?

  • भीमा कोरेगांव युद्ध भारत की अनुसूचित जातियों के बीच काफी प्रसिद्ध है क्योंकि कंपनी बलों में सैनिकों के रूप में बड़ी संख्या में महार दलित शामिल थे।
  • भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की जीत को दलित महारों की जीत माना जाता है, क्योंकि यह लड़ाई पेशवाओं द्वारा किए गए अन्याय के खिलाफ लड़ी गई थी, जो ब्राह्मण थे।
  • पेशवाओं की इस भर्त्सना को समकालीन समय में महारों के सामाजिक और राजनीतिक हाशियाकरण से जोड़ कर देखा जाता हैं।
  • 1 जनवरी 1927 को, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कोरेगांव विजय स्तंभ के स्थल का दौरा किया, जिसने दलित समुदाय के लिए इसकी स्मृति को पुनर्जीवित किया और इसे एक रैली स्थल और गर्व करने का कारण बनाया।
  • हर साल 01 जनवरी को, बी.आर. अम्बेडकर के लाखों अनुयायी उनकी यात्रा की स्मृति में इस स्थल पर आते हैं।

सारांश:

  • 01 जनवरी, 2023 को ‘जयस्तंभ’ पर कोरेगांव भीमा युद्ध की 205वीं वर्षगांठ शांतिपूर्वक मनाई गई। पुणे पुलिस ने वर्ष 2018 में लड़ाई के द्विशतवार्षिक स्मरणोत्सव के दौरान हुई हिंसा के किसी भी दोहराव को रोकने के लिए ‘जयस्तंभ’ और सोशल मीडिया पर कड़ी सुरक्षा के साथ चौकस नजर रखी हुई थी।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

असम में परिसीमन:

राजव्यवस्था:

विषय: चुनाव, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950।

मुख्य परीक्षा: पूर्वोत्तर क्षेत्र में परिसीमन से सम्बंधित मुद्दे।

संदर्भ:

  • चुनाव आयोग द्वारा असम में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

विवरण:

  • भारत के चुनाव आयोग ( Election Commission of India) ने सीटों के पुनर्समायोजन के लिए वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करते हुए 27 दिसंबर, 2022 से असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन शुरू कर दिया है।
  • नवंबर 2022 में केंद्रीय कानून मंत्रालय के एक अनुरोध के बाद, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 8A के अनुसार असम की विधानसभा और संसदीय सीटों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8A अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर या नागालैंड में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (delimitation of Parliamentary and Assembly constituencies) की अनुमति देती है।
  • ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1971 की जनगणना के आधार पर, असम की सीटों को अंतिम बार 1976 में परिसीमन अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार पुनर्वितरित किया गया था।
  • चुनाव आयोग के अनुसार, परिसीमन की कवायद/प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य में 1 जनवरी 2023 से नई प्रशासनिक संस्थाओं के गठन पर रोक रहेगी।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार किया जाएगा।

वर्तमान प्रतिनिधित्व की स्थिति:

  • असम राज्य में 14 लोकसभा, 126 विधानसभा और 07 राज्यसभा सीटें हैं।
  • वर्तमान असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई, 2026 को समाप्त होगा।

परिसीमन अभ्यास का विरोध:

  • राज्य में विपक्षी पक्ष वाले व्यक्ति इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि परिसीमन की कवायद/प्रक्रिया वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर क्यों की जा रही है, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर क्यों नहीं।
  • आलोचकों के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और परिसीमन प्रक्रिया को संचालित करने के लिए वर्ष 2021 की जनगणना प्रक्रिया को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
  • संविधान के अनुच्छेद 170 के तहत अनिवार्य किया गया है कि जनगणना के आंकड़े (2001) का उपयोग राज्य में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन के उद्देश्य से किया जाएगा।
  • असम के मुख्यमंत्री जनसंख्या के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के आलोचक हैं, क्योंकि यह सरकार की दो बच्चों की नीति (two-child policy) को हतोत्साहित करता है।
  • असम में संबंधित दबाव समूहों ने पिछले परिसीमन अभ्यास का विरोध करते हुए जोर देकर कहा था कि “अवैध अप्रवासियों” को बाहर निकालने के लिए नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (National Register of Citizens (NRC) ) के पूरा होने के बाद ही इसे पूरा किया जाना चाहिए।

सारांश:

  • चुनाव आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर असम में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। हालाँकि अधिकांश लोगों ने इस परिसीमन प्रक्रिया का स्वागत किया है, जो लंबे समय से लंबित थी, जबकि कुछ ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के बजाय 2001 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करने के लिए इस पर चिंता जताई है और NRC के पूरा होने तक परिसीमन को रोकने की भी राय दी है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

डीपफेक का खतरा:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।

मुख्य परीक्षा: डीपफेक की नैतिक एवं कानूनी चुनौतियां।

संदर्भ:

  • इस लेख में डीपफेक के उपयोग से उत्पन्न खतरों पर चर्चा करते हुए संभावित समाधानों का विश्लेषण किया गया है।

डीपफेक क्या है?

  • डीपफेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके हेरफेर की गईं डिजिटल मीडिया (वीडियो, ऑडियो, और छवियाँ) है।
  • कमोडिटी क्लाउड कंप्यूटिंग तक पहुंच, सार्वजनिक अनुसंधान AI एल्गोरिदम, और प्रचुर मात्रा में डेटा तथा मीडिया की उपलब्धता ने मीडिया के निर्माण और हेरफेर का लोकतंत्रीकरण करने में मदद की है। इस कृत्रिम/सिंथेटिक मीडिया सामग्री को डीपफेक कहा जाता है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-जनित सिंथेटिक मीडिया या डीपफेक का कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट लाभ है, जैसे अभिगम्यता (accessibility), शिक्षा, फिल्म निर्माण, आपराधिक फोरेंसिक और कलात्मक अभिव्यक्ति।
  • डीपफेक का इस्तेमाल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, सबूत गढ़ने, जनता को धोखा देने और लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास कम करने के लिए किया जा सकता है।
  • डीपफेक से उत्पन्न खतरों और उनसे निपटने के संभावित समाधानों से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Threats posed by Deepfake and possible solutions to tackle them

सारांश:

  • डीपफेक के रूप में दुष्प्रचार युद्ध के हथियार के रूप में विकसित हुआ है जो सामाजिक कलह पैदा कर सकता है, ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है। डीपफेक के खतरों को विधायी नियमों तथा प्लेटफॉर्म नीतियों में सहयोगी कार्यों और सामूहिक तकनीकों के साथ कम किया जा सकता है। इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए, लगभग सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने डीपफेक के लिए कुछ नीति बनाई है।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

अंतरराष्ट्रीय संबंध:

भारत-चीन: 1962 से पहले और अब के बीच

विषय: भारत और उसके पड़ोस संबंध।

मुख्य परीक्षा: भारत-चीन संबंध।

प्रारंभिक परीक्षा: अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप विवादित और संवेदनशील क्षेत्र।

संदर्भ:

  • अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हालिया विवाद।

विवरण:

  • वर्ष 2020 की गलवान झड़प और अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से में भारतीय सैनिकों और चीनी PLA के बीच हालिया विवाद ने एक बार फिर दो पड़ोसियों के बीच सीमा विवाद के साथ-साथ जटिल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को सामने ला दिया है।
  • गलवान घाटी झड़प के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें: India-China Conflict – Galwan Valley Clash. Detailed Analysis & Summary for IAS

पृष्ठभूमि विवरण:

  • वर्तमान और 1960 के दशक के भारत-चीन संबंध सीमा विवाद से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, 1950 के दशक में मूल प्रश्न “क्षेत्रीय विवाद” था जिसमें भारत के अधिकार वाला संपूर्ण अक्साई चिन और चीन के अधिकार वाला संपूर्ण NEFA (अब अरुणाचल प्रदेश) शामिल था।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चीन वर्तमान में अक्साई चिन पर मजबूती से कब्जा कर रहा है और भारत अरुणाचल प्रदेश में अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा कर रहा है। 2020 के दशक में तात्कालिक मुद्दा LAC के समीप किए जा रहे अतिक्रमण पर केंद्रित हो गया है।
  • पहले के दशकों के विपरीत, लद्दाख (पश्चिमी क्षेत्र) में मतभेद केवल दौलत बेग ओल्डी (DBO) क्षेत्र में ट्रिग हाइट्स और दक्षिण में डेमचोक तक ही सीमित नहीं हैं। चीन डेपसांग बल्ज, गलवान, पैंगोंग झील और हॉट स्प्रिंग्स जैसे अन्य क्षेत्रों पर अधिकार करना चाहता है।
  • गलवान संघर्ष के बाद, देपसांग और डेमचोक में गतिरोध से बाहर निकलने के लिए सैन्य और कूटनीतिक वार्ता जारी रहने के साथ दोनों पक्ष कई विवादित क्षेत्रों में तटस्थ रूख पर कायम हैं।
  • मध्य (मध्य क्षेत्र) में लगभग सत्तर वर्षों से विवाद का क्षेत्र उत्तराखण्ड में चमोली के उत्तर में स्थित बाराहोती चरागाह है।
  • अरुणाचल प्रदेश (पूर्वी क्षेत्र) में, चीन तवांग सेक्टर तथा अन्य क्षेत्रों जैसे ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र और म्यांमार के साथ त्रि-जंक्शन के पास घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा और LAC को 1914 की मैकमोहन रेखा द्वारा वाटरशेड सिद्धांत (जल विभाजन का सिद्धांत) के आधार पर परिभाषित किया गया था।
  • वर्तमान में प्रमुख अंतर यह है कि विशाल सीमा विवाद के मुकाबले मुख्य रूप से LAC पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, हालांकि दोनों में से किसी ने भी अपने क्षेत्रीय दावों को नहीं छोड़ा है।

चित्र: भारत और चीन के बीच विवादित और संवेदनशील क्षेत्र

स्रोत: Times of India

यह भी पढ़ें: China’s Five Finger Policy: Origins and Relevance

चीन का रुख:

  • परंपरागत रूप से, चीन तिब्बत में भूभाग पर अधिकार करने और लॉजिस्टिक्स के मामले में लाभान्वित हुआ। इसने हमेशा LAC की मिथ्या/कल्पित व्याख्या पेश की है और मध्य क्षेत्र से संबंधित दो दशक पहले नक्शों के एकबारगी आदान-प्रदान के बाद बड़े पैमाने पर नक्शों के आदान-प्रदान के माध्यम से अपनी स्थिति के स्पष्टीकरण से भी बचता रहा है।
  • 1950 के दशक में, चीन ने पाकिस्तान के पक्ष में (कश्मीर मुद्दे सहित) अपने पक्षपात का खुलासा किया। वर्तमान में, संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए चीन खुले तौर पर भारत के हितों के खिलाफ पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करता है।
  • चीन की आंतरिक कमजोरियों ने हमेशा भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए,
    • 1950 के दशक के उत्तरार्ध में, माओत्से तुंग ने आंतरिक चुनौतियों के दौरान अपने नेतृत्व को मजबूत करने और विनाशकारी राजनीतिक तथा आर्थिक नीतियों की निंदा से बचने के लिए भारत के प्रति एक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया।
    • इसी तरह, चीनी नेतृत्व वर्तमान में शून्य-कोविड नीति और बढ़ते अधिनायकवाद की जांच हेतु निरंतर बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है।
    • इसके अलावा, तिब्बत चीन के लिए असुरक्षा का मूल कारण भी बना हुआ है।

सबक:

  • 1962 में, भारत को सैन्य सहायता के लिए अमेरिका और पश्चिमी देशों से संपर्क करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हालाँकि, समर्थन बहुत कम और बहुत देरी से मिला था। वर्तमान परिदृश्य में, भारत ने रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ को पर्याप्त महत्व देते हुए नई हथियार प्रणालियों को सक्रिय रूप से सेवा में शामिल किया है।
  • एक अन्य घटना में, चीनियों ने 1986-87 में तवांग क्षेत्र में सुमदोरोंग चू घाटी में प्रवेश किया। इससे दोनों पड़ोसियों के बीच घनिष्ठ टकराव हुआ। वर्ष 1995 में दोनों पक्ष आठ साल बाद पीछे हट गए, जब भारत ने हथुंगला-लुंगरोला कटक रेखा के दक्षिण की ओर अपनी जया और नेगी चौकियों को स्थानांतरित कर दिया। यह तर्क दिया जाता है कि अनजाने में भारत ने अपने क्षेत्र पर एक बफर क्षेत्र बना लिया। इस प्रकार, भारत को इस घटना से सबक लेना चाहिए और लद्दाख में इसके अनुसार कार्य करना चाहिए।

निष्कर्ष:

  • भारत सरकार का प्रयास अच्छे-पड़ोसी और शांतिपूर्ण संबंधों तथा समावेशी विकास की अपनी व्यापक विश्व दृष्टि के साथ चीन के साथ जुड़ना है। जबकि चीन का उद्देश्य समानता और बहुध्रुवीयता की धारणाओं का बहुत कम सम्मान करते हुए चीन-केंद्रित प्रणाली का निर्माण करना है।

संबंधित लिंक:

India – China Relations: Updates about the Recent Clashes at the LAC and other Events

सारांश:

  • भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवादित मुद्दा अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर है। अतीत में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिन्होंने इसे उजागर किया है और हाल ही में लद्दाख तथा अरुणाचल प्रदेश में हुई घटनाएं भी इसी का परिणाम हैं। भारत को पिछली घटनाओं की सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी चाहिए और अपनी सुरक्षा तथा क्षेत्रीय अखंडता के लिए उचित उपाय करने चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

भारतीय राजव्यवस्था:

हां और ना (प्रवासियों को मतदान अधिकार के संबंध में)

विषय: संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

मुख्य परीक्षा: भारत निर्वाचन आयोग और प्रवासियों को मतदान का अधिकार।

संदर्भ:

  • प्रवासियों को मतदान का अधिकार देने के लिए भारत निर्वाचन आयोग का हालिया प्रस्ताव।

विवरण:

  • जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों और आर्थिक अवसरों में क्षेत्रीय विविधताओं के कारण भारत में प्रवासन की उच्च दर है। 2001-2011 के जनगणना दशक में प्रवासन दर लगभग दोगुनी हो गई है।
  • प्रवासियों के आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के साथ प्रायः उनके मूल स्थान और निवास स्थान से समझौता किया जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने घरेलू प्रवासियों के लिए रिमोट मतदान की सुविधा के लिए एक तंत्र का प्रस्ताव दिया है।
  • रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) प्रोटोटाइप का उपयोग एक ही रिमोट पोलिंग बूथ से एक साथ 72 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराने के लिए किया जा सकता है।
  • आयोग ने 16 जनवरी 2023 को प्रोटोटाइप के प्रदर्शन के लिए राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया है।
  • प्रवासियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास का स्वागत किया जाना चाहिए। हालाँकि, जल्दबाजी किया जाने वाला कोई भी प्रयास चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को नुकसान पहुँचा सकता है।

यह भी पढ़ें: Human Migration in India, Features of Migration & Advantages [UPSC GS-II & Essay]

मतदाता भागीदारी में रुझान:

  • हालांकि भारत में मतदाता भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है, फिर भी, वर्ष 2019 में, तीन मतदाताओं में से एक ने मतदान नहीं किया।
  • वर्ष 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में लगभग 14 करोड़ आंतरिक-प्रवासी हैं, और उन्हें मतदान में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

संबद्ध चिंताएं:

  • कई विशेषज्ञों द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में जनता का भरोसा कम है, क्योंकि मतदाता के पास यह देखने का कोई तरीका नहीं है कि उसका वोट रिकॉर्ड हुआ है या नहीं।
  • यह भी तर्क दिया गया है कि हालिया प्रस्ताव भारत निर्वाचन आयोग की EVM की निष्पक्षता और विश्वसनीयता के बारे में जनता के संदेह को और बढ़ा देगा।
  • नई योजना से जुड़े कुछ मूलभूत प्रश्न नागरिकता और क्षेत्रीयता के बीच संबंध हैं।
  • इसके अलावा, दूरस्थ रूप से मतदान करने के योग्य एक प्रवासी को परिभाषित करना भी विवादास्पद हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी स्थान पर प्रवासी कब निवासी बन जाता है?
  • भारत निर्वाचन आयोग ने भी अतीत में प्रवासियों के लिए रिमोट मतदान अधिकारों की व्यावहारिकता पर संदेह व्यक्त किया है।
  • इस बीच, अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए मतदान के अधिकार की भी मांग की जा रही है।

निष्कर्ष:

  • अभूतपूर्व मानव गतिशीलता के युग में, पोर्टेबल वोटिंग अधिकारों की अवधारणा विचार करने योग्य है।
  • इसके अलावा, चुनावों के दौरान अधिक मतदान के लिए प्रयास करना उचित है, लेकिन दूरगामी प्रभाव पर विचार करते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

संबंधित लिंक:

Representation of People Act, 1951 – Important Features. UPSC Polity & Governance Notes

सारांश:

  • प्रवासियों को मतदान का अधिकार देने का भारत निर्वाचन आयोग का हालिया प्रस्ताव चुनावों में अधिक से अधिक मतदान की दिशा में एक अच्छा कदम है। हालाँकि, इससे जुड़ी चिंताएँ हैं जिनका आयोग द्वारा सावधानीपूर्वक समाधान किया जाना चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.भारत-ऑस्ट्रिया:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत के हितों भारतीय परिदृश्य पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: व्यापक प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौता

संदर्भ:

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वर्ष 2023 में अपनी पहली राजनयिक वार्ता की शुरुआत अपने ऑस्ट्रियाई समकक्ष अलेक्जेंडर शालेनबर्ग के साथ की।

मुख्य विवरण:

  • यह पिछले 27 वर्षों में भारत से ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री स्तर की पहली यात्रा है और यह वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हो रही है।
  • ऑस्ट्रिया की अपनी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर स्लावकोव प्रारूप (Slavkov format) में चेक, स्लोवाक और ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

व्यापक प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौता:

  • भारत और ऑस्ट्रिया द्वारा 02 जनवरी, 2023 को “व्यापक प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौते” (MMPA) पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।
    • यह समझौता अवैध प्रवासन का मुकाबला करने के लिए एक उपयोगी साधन है, क्योंकि यह अवैध प्रवासियों की शीघ्र वापसी को सक्षम बनाता है। ऑस्ट्रिया को भारत से 15,000 से अधिक अवैध प्रवासियों का सामना करना पड़ा था, जिन्हें ऑस्ट्रिया ने शरण देने से इंकार कर दिया था।
    • समझौते के तहत पेशेवरों और छात्र विनिमय कार्यक्रमों के लिए प्रवेश वीजा (entry visa) को भी विनियमित किया जाएगा और एक संयुक्त कार्य समूह द्वारा नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाएगी।
  • भारत ने हाल ही में फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फिनलैंड के साथ इसी तरह के गतिशीलता समझौते किए हैं।
  • यूरोपीय देशों के साथ ये समझौते लंबे समय से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के मुद्दों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन देशों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को सुविधा प्रदान करते हैं।
  • यूरोपीय देश भी इन समझौतों को भारत से अवैध आप्रवासन को रोकने के एक तरीके के रूप में देखते हैं।

2. अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM):

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

कृषि:

विषय: खाद्य सुरक्षा।

प्रारंभिक परीक्षा: बाजरा एवं इसका महत्व।

संदर्भ:

  • बड़े पैमाने पर बाजरे की खेती और खपत को बढ़ावा देने के प्रयास के सन्दर्भ में केंद्र सरकार ने 01 जनवरी, 2023 से अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM) शुरू किया है।

मुख्य विवरण:

  • भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (International Year of Millets (IYM) ) 2023 के प्रस्ताव को प्रायोजित किया था जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने स्वीकार कर लिया था।
  • यह घोषणा भारत सरकार के लिए IYM मनाने में सबसे आगे रहने के लिए सहायक रही है।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ‘बाजरा के लिए वैश्विक हब’ के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ IYM 2023 को ‘जन आंदोलन’ बनाने के लिए अपना दृष्टिकोण भी साझा किया है।

बहु-हितधारक जुड़ाव दृष्टिकोण:

  • कृषि और किसान कल्याण विभाग ने IYM 2023 के उद्देश्य को प्राप्त करने और भारतीय बाजरा ( Indian millets) के लिए केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों, किसानों, स्टार्ट-अप, निर्यातकों, खुदरा व्यवसायों, होटलों, भारतीय दूतावासों आदि को शामिल करते हुए विश्व स्तर पर एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया है।
  • मंत्रालयों, राज्यों और भारतीय दूतावासों को 2023 में IYM के प्रचार के लिए विभिन्न गतिविधियों को करने और उपभोक्ता, किसान तथा जलवायु के लिए बाजरा के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्रित महीने आवंटित किए गए हैं।
  • जनवरी में, केंद्रीय खेल और युवा मामले मंत्रालय, और छत्तीसगढ़, मिजोरम तथा राजस्थान सरकारें IYM कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करेंगी।
  • बाजरा G-20 बैठकों का भी एक अभिन्न हिस्सा है और प्रतिनिधियों को चखने, किसानों से मिलने तथा स्टार्ट-अप और एफपीओ ( FPOs) के साथ इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से बाजरा का सच्चा अनुभव दिया जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भारत में बेरोजगारी दर:

  • सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2022 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 8.3% हो गई है, जो 16 महीनों में सबसे अधिक है। नवंबर में यह 8% थी।
  • बेरोजगारी दर हरियाणा में बढ़कर 37.4%, राजस्थान में 28.5% और दिल्ली में 20.8% हो गई है।
  • शहरी बेरोजगारी दर नवंबर में 8.96% से बढ़कर दिसंबर में 10.09% हो गई है।
  • ग्रामीण बेरोजगारी दर 7.55% से गिरकर 7.44% हो गई है।
  • श्रम भागीदारी दर दिसंबर में बढ़कर 40.48% हो गई है, जो 12 महीनों में सबसे अधिक है।
  • दिसंबर में रोजगार दर बढ़कर 37.1% हो गई है, जो जनवरी 2022 के बाद सबसे अधिक है।
  • राज्य द्वारा संचालित राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संकलित एक अलग तिमाही आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही में 7.6% की तुलना में जुलाई-सितंबर तिमाही में बेरोजगारी दर घटकर 7.2% रह गई थी।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (स्तर-मध्यम)

  1. पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी आधार प्राप्त है।
  2. माधव गाडगिल समिति और कस्तूरीरंगन समिति ने पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र के क्रियान्वयन से संबंधित हैं।
  3. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि देश भर में प्रत्येक संरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य में उनकी सीमांकित सीमाओं से कम से कम एक किमी का एक अनिवार्य पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) होना चाहिए।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों जैसे अत्यधिक संरक्षित क्षेत्रों के आसपास एक बफर या संक्रमण क्षेत्र है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) के माध्यम से पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों को अधिसूचित किया जाता है।
  • कथन 2 सही है: माधव गाडगिल समिति और कस्तूरीरंगन समिति ने पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र के क्रियान्वयन से संबंधित हैं।
  • माधव गाडगिल रिपोर्ट ने छह राज्यों में फैले और 44 जिलों तथा 142 तालुकों को कवर करने वाले संपूर्ण पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के रूप में वर्गीकृत किया था।
  • कस्तूरीरंगन समिति ने ESZ के कुल क्षेत्रफल का 37 प्रतिशत घटा दिया था और लगभग 60,000 वर्ग किमी. के क्षेत्र को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने का प्रस्ताव किया था। इसने सिफारिश की थी कि 123 राजस्व गांवों को ESA के रूप में सीमांकित किया जाए।
  • कथन 03 सही है: जून 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि देश के प्रत्येक राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य में उसकी सीमांकित सीमाओं से कम से कम एक किलोमीटर का एक अनिवार्य पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र होगा। यह निर्णय तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में वन भूमि की रक्षा के लिए एक याचिका के जवाब में दिया गया था।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘डीपफेक’ शब्द का सर्वोत्तम वर्णन करता है? (स्तर- सरल)

  1. मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में गहराई से समाई हुई नकली ख़बरें।
  2. डीप वेब पर मिलने वाली छिपी हुई जानकारी जो अवैध गतिविधियों को सक्षम बनाती है।
  3. अति यथार्थवादी डिजिटल मिथ्याकरण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके किया जाने वाला डिजिटल मीडिया हेरफेर।
  4. इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर: c

व्याख्या:

  • डीपफेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके हेरफेर की गईं डिजिटल मीडिया (वीडियो, ऑडियो, और छवियाँ) है। डीपफेक का इस्तेमाल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, सबूत गढ़ने, जनता को धोखा देने और लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास कम करने के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 3. यह महानदी नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित भारत के पूर्वी तट पर एक प्राकृतिक, गहरे पानी का बंदरगाह है। हाल ही में इस बंदरगाह पर देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मासिक कार्गो कार्य-व्यापार दर्ज किया गया है। यह विवरण किस बंदरगाह को संदर्भित करता है? (स्तर-मध्यम)

  1. विशाखापत्तनम
  2. पारादीप
  3. हल्दिया
  4. काकीनाडा

उत्तर: b

व्याख्या:

  • पारादीप बंदरगाह ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में भारत के पूर्वी तट पर एक प्राकृतिक, गहरे पानी का बंदरगाह है। यह महानदी नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है।
  • बंदरगाह का संचालन पारादीप पोर्ट ट्रस्ट (PPT) द्वारा किया जाता है, जो भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाला एक स्वायत्त निगम है।
  • पारादीप पोर्ट ट्रस्ट (PPT) भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख बंदरगाह है और प्रमुख पोर्ट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 के तहत प्रशासित है, इसे 1966 में लौह अयस्क के निर्यात के लिए एक मोनो कमोडिटी पोर्ट के रूप में कमीशन/शरू किया गया था।
  • दिसंबर 2022 में, पारादीप बंदरगाह ने 12.6 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो को हैंडल किया, जो कि देश के किसी भी बड़े पोर्ट द्वारा दर्ज की गई उच्चतम मासिक कार्गो मात्रा है।
  • दिसंबर 2022 तक, PPA ने 96.81 MMT कार्गो कार्य-व्यापार को संभाला है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इसी अवधि में यह 83.6 MMT था।

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से कौन-से गलत हैं? (स्तर- मध्यम)

  1. भारतीय विज्ञान कांग्रेस, भारत में शोधकर्ताओं की वार्षिक सभा, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा आयोजित की जाती है।
  2. यह दो ब्रिटिश रसायनज्ञों, प्रोफेसर जे.एल. सिमोनसेन और प्रोफेसर पी.एस. मैकमोहन के मौलिक विचार की पहल है।
  3. भारतीय विज्ञान कांग्रेस की पहली सभा वर्ष 1914 में कलकत्ता में एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित की गई थी।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. केवल 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: भारतीय विज्ञान कांग्रेस भारत में शोधकर्ताओं का वार्षिक जमावड़ा कार्यक्रम है। यह ISCA (इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन) द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसका मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है।
  • कथन 2 सही है: भारतीय विज्ञान कांग्रेस (ISCA) की उत्पत्ति दो ब्रिटिश रसायनज्ञों जिसमें प्रोफेसर जे.एल. सिमोनसेन और प्रोफेसर पी.एस. मैकमोहन शामिल थे, की दूरदर्शिता और पहल के कारण हुई थी।
  • कथन 3 सही है: भारतीय विज्ञान कांग्रेस की पहली बैठक 15-17 जनवरी, 1914 को एशियाटिक सोसाइटी, कलकत्ता के परिसर में हुई थी।

प्रश्न 5. यह प्रयोग तीन ऐसे अंतरिक्षयानों को काम में लाएगा जो एक समबाहु त्रिभुज के आकार में उड़ान भरेंगे जिसमें प्रत्येक भुजा एक मिलियन किमी. लंबी है और यानों के बीच लेजर चमक रहीं होंगी। कथित प्रयोग किसे संदर्भित करता है? (CSE-PYQ-2022) (स्तर- मध्यम)

  1. वॉयेजर-2
  2. न्यू होराइजन्स
  3. LISA पाथफाइंडर
  4. इवोल्वड LISA

उत्तर: d

व्याख्या:

  • इवोल्वड लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA) पहली बार अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड की खोज करने के उद्देश्य से शरू किया गया एक मिशन है।
  • eLISA मिशन में एक “मदर” (Mother) और दो “डॉटर” (Daughter) अंतरिक्ष यान शामिल हैं। ये त्रिकोणीय विन्यास में सूर्य की परिक्रमा करेंगे।
  • तीन उपग्रह एक सटीक इंटरफेरोमीटर का निर्माण करेंगे, जिसमें दो डॉटर अंतरिक्ष यान 1 मिलियन किमी. लंबी लेजर बीम से एक-एक करके मदर से जुड़े होंगे।
  • यह इंटरफेरोमीटर 0.1 मेगाहर्ट्ज से 1 हर्ट्ज की आवृत्ति में गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने में सक्षम होगा।
  • eLISA को कक्षाओं के साथ डिजाइन किया गया है जो तीन उपग्रहों को उनके निकट-समबाहु त्रिकोणीय विन्यास को बनाए रखने की अनुमति देता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. प्रवासी कामगारों को रिमोट मतदान करने में सक्षम बनाने का चुनाव आयोग का निर्णय भारत को अधिक समावेशी, सहभागी और जीवंत लोकतंत्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक होने जा रहा है। टिप्पणी कीजिए। (150 शब्द) (जीएस-2; राजव्यवस्था)

प्रश्न 2. चीन की भारत नीति को इसके चीन, सोवियत संघ (अब रूस) और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी महा शक्तियों के रणनीतिक त्रिकोण के दृष्टिकोण के आधार पर आकार दिया गया है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द) (जीएस-2; अंतर्राष्ट्रीय संबंध)