02 मार्च 2023 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत ने G-20 से आर्थिक अपराधियों का तेजी से प्रत्यर्पण करने को कहा:
  2. विंडसर फ्रेमवर्क को समझना:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

शिक्षा:

  1. इस धारणा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना कि, ‘गणित लड़कियों के लिए नहीं है’:

राजव्यवस्था:

  1. परिपक्वता के लिए संदेश:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. S-400:

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. अनुसूचित जनजाति पैनल ने शीर्ष अदालत से FRA कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की:
  2. भारतीय प्रेस परिषद् ने प्रिंट मीडिया द्वारा ‘पेड न्यूज’ के प्रकाशन के खिलाफ चेतावनी दी:
  3. फरवरी में PMI विनिर्माण में स्थिर विस्तार का संकेत दे रहा है:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

भारत ने G-20 से आर्थिक अपराधियों का तेजी से प्रत्यर्पण करने को कहा:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत से जुड़े वैश्विक समूह एवं समझौते।

प्रारंभिक परीक्षा: G-20 और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से संबंधित तथ्य।

मुख्य परीक्षा: भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अन्य तंत्र।

प्रसंग:

  • भारत ने G-20 देशों से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के तेजी से प्रत्यर्पण और संपत्ति की वसूली के लिए बहुपक्षीय कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

विवरण:

  • गुरुग्राम में आयोजित G-20 सदस्यों की भ्रष्टाचार विरोधी कार्य समूह की पहली बैठक में, भारत ने सदस्य देशों से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए कार्रवाई में तेजी लाने और अपने देशों के भीतर एवं बाहर संपत्ति की वसूली करने का आह्वान किया है।
  • भारत के कार्मिक राज्य मंत्री जिन्होंने सह-अध्यक्ष इटली के साथ इस बैठक की अध्यक्षता की और कहा कि इस प्रकार के आर्थिक अपराध देशों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गए हैं, खासकर जब ऐसे अपराधी देश से भाग जाते हैं।
  • भारत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 नामक एक विशेष कानून पारित किया है, जिसके तहत “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” शब्द को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके खिलाफ भारत में किसी भी अदालत द्वारा अनुसूचित अपराध के संबंध में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है और जिसने आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़ दिया है; या ऐसा व्यक्ति विदेश में है, एवं आपराधिक मुक़दमे का सामना करने के लिए देश लौटने से इनकार करता है।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए करीब 180 अरब डॉलर की संपत्ति वसूल की है जिन्हें उच्च निवल संपत्ति वाले व्यक्तियों द्वारा किए गए ऐसे आर्थिक धोखाधड़ी के कारण लगभग $272 बिलियन का नुकसान हुआ था।
  • ऐसा कहा जाता है कि इस तरह के अपराधों के खिलाफ सख्त तंत्र तथा घर और बाहर दोनों जगह अपराध से अर्जित आय की त्वरित जब्ती ऐसे अपराधियों को अपने देश वापस लौटने के लिए मजबूर करेगी।
  • नीतियां बनाने और उन्हें मजबूत करने से प्रभावी जांच और अपराधों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित होगी और यह भगोड़े आर्थिक अपराधियों द्वारा किए गए डिफ़ॉल्ट की पुनःपूर्ति करने में बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कर अधिकारियों की सहायता करेगा।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 से संबंधित अधिक जानकरी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:

सारांश:

  • सूचना साझा करने, संपत्ति-वसूली मानदंडों को मजबूत करने और कानून प्रवर्तन सहयोग में सुधार के संबंध में देशों के बीच आम सहमति बनाने से भगोड़े आर्थिक अपराधियों द्वारा उत्पन्न जटिल चुनौतियों का समाधान करने और उन्हें अपने देश लौटने के लिए मजबूर करने में मदद मिलेगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

विंडसर फ्रेमवर्क को समझना:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: विकसित विश्व की नीतियां एवं राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: विंडसर फ्रेमवर्क से संबंधित जानकारी।

मुख्य परीक्षा: विंडसर फ्रेमवर्क/ढांचे का महत्वपूर्ण मूल्यांकन।

प्रसंग:

  • यूके एवं यूरोपीय संघ ने उत्तरी आयरलैंड के लिए ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार नियमों के संबंध में 27 फरवरी को एक समझौते पर बातचीत की है।
  • विंडसर फ्रेमवर्क उन राजनीतिक जटिलताओं को दूर करने का एक प्रयास है जिसने इस क्षेत्र में व्यापार और भावनाओं को प्रभावित किया है।

पृष्ठभूमि:

  • इस विषय पर विस्तृत पृष्ठभूमि की जानकारी के लिए 01 मार्च 2023 का यूपीएससी परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण का निम्नलिखित लेख देखें।

विंडसर फ्रेमवर्क:

चित्र स्रोत: The Hindu

  • विंडसर फ्रेमवर्क का उद्देश्य उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल ( Northern Ireland Protocol) के कारण उत्तरी आयरलैंड और शेष यूके के बीच व्यापार में व्यवधान को हल करना है।
  • विंडसर फ्रेमवर्क ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के बीच मुक्त व्यापार की अनुमति देता है, जिसमें उत्तरी आयरलैंड की ओर जाने वाले सामानों के लिए ग्रीन और रेड लेन का उपयोग किया जाता है।
    • इस के तहत ग्रीन लेन के सामान में कम जांच और नियंत्रण होंगे, जिसमें कोई सीमा शुल्क जांच या उत्पत्ति के नियम शामिल नहीं होंगे।
    • EU के एकल बाजार को संरक्षित करने के लिए इस फ्रेमवर्क के तहत रेड लेन सामान जाँच और नियंत्रण के अधीन होंगे।
  • इसके अलावा किसानों पर इसके प्रभाव को कम करने की दृष्टि से, मांस और डेयरी जैसे कृषि उत्पादों पर जांच और नियंत्रण कम हो जाएगा, तथा सुपरमार्केट, थोक व्यापारी और कैटरर्स जैसे खाद्य खुदरा विक्रेताओं को कृषि-खाद्य को ग्रीन लेन के माध्यम से स्थानांतरित करने की अनुमति भी दी जाएगी।
  • इसके अतिरिक्त उत्तरी आयरलैंड में बेचे जा रहे ग्रेट ब्रिटेन के कुछ प्रकार के शीत भंडारित मांस पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया जाएगा।

फ्रेमवर्क का महत्वपूर्ण मूल्यांकन:

  • ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के अधिकारियों का मानना है कि नवीनतम फ्रेमवर्क उत्तरी आयरलैंड के बाजारों में भोजन और दवाओं जैसे ब्रिटिश सामानों की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
  • विंडसर फ्रेमवर्क यूके के भीतर उत्तरी आयरलैंड की स्थिति को सुरक्षित रखने और वहां के लोगों की संप्रभुता को बहाल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • हालाँकि, “स्टॉर्मोंट ब्रेक” (Stormont brake) के आसपास केंद्रित नए फ्रेमवर्क पर आपत्ति जताई गई है।
    • स्टॉर्मोंट ब्रेक एक आपातकालीन उपाय है जो उत्तरी आयरलैंड की सरकार को यूरोपीय संघ के नए मानदंडों को लागू करने से रोकने की अनुमति देता है और यह एक उपाय है जिसमें लंदन वीटो का अधिकार बरकरार रखता है।
  • साथ ही आगे यह भी देखा जाएगा कि उत्तरी आयरलैंड में यूरोपीय संघ के नियमों को स्वीकार किया जाएगा या नहीं क्योंकि यह पूरी तरह से प्रांत में संघवादियों और रिपब्लिकन के बीच शक्ति संतुलन पर निर्भर करता है।

सारांश:

  • विंडसर फ्रेमवर्क पर घोषणा यूके और यूरोपीय संघ के बीच शांति और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक आवश्यक कदम है क्योंकि यह न केवल यूके के आंतरिक बाजार में बल्कि यूरोपीय संघ के एकल बाजार में भी उत्तरी आयरलैंड के स्थान की रक्षा करता है।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

इस धारणा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना कि, ‘गणित लड़कियों के लिए नहीं है’:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शिक्षा:

विषय: शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: STEM क्षेत्रों में लड़कियों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे।

प्रसंग:

  • इस लेख में STEM क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और प्रदर्शन के बारे में चर्चा की गई है।

विवरण

  • बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गाँव में स्कूली छात्रों के साथ एक अनौपचारिक चर्चा में यह देखा गया कि छात्राओं ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में अपनी उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अपनी रुचि व्यक्त की।
  • हालांकि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों या अन्य गणित-गहन क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम रहा है,
  • कम प्रतिनिधित्व की यह प्रवृत्ति न केवल भारत तक ही सीमित है बल्कि अन्य विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित दुनिया में भी देखी जाती है।

क्या लड़कियां लड़कों की तुलना में बुनियादी गणित में खराब प्रदर्शन करती हैं?

  • समाज में यह आम धारणा है कि लड़कियां लड़कों की तुलना में बुनियादी गणित में खराब प्रदर्शन करती हैं।
  • शिक्षा का वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट / एनुअल सर्वे ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ASER) के आधार पर एक हालिया शोध पत्र, जो 2010-18 के बीच बच्चों (8 से 16 वर्ष के बीच) के गणित टेस्ट अंक और पढ़ने की क्षमता का विश्लेषण करता है, यह सुझाव देता है कि लड़के गणित में लड़कियों से महत्वपूर्ण रूप से आगे हैं।
  • हालांकि, देश भर में टेस्ट अंक में काफी भिन्नता है।
    • उत्तर भारतीय राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में, यह देखा गया कि लड़के लड़कियों से काफी आगे हैं।
    • जबकि भारत के दक्षिणी राज्यों में लड़कियां गणित में लड़कों से आगे हैं।
  • लेकिन लड़कों की तुलना में लड़कियों का प्रदर्शन औसतन खराब है।
  • यह चिंता का कारण है क्योंकि यह विषय में रुचि और समझ की कमी को दर्शाता है, जिसके भविष्य की शैक्षणिक और करियर की सफलता पर महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं।

प्रदर्शन में इस अंतर के महत्वपूर्ण कारण

  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कड़े सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों ने लड़कों और लड़कियों के बीच उनकी क्षमता के बजाय उनके प्रदर्शन के संबंध में असमानताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • दक्षिणी राज्यों में लड़कों की तुलना में लड़कियों के प्रदर्शन से पता चलता है कि यह अंतर निहित क्षमता नहीं है जिसके कारण यह अंतराल उत्पन्न होता है।
  • सम्पूर्ण भारत में समाज में लड़कियों की गणितीय योग्यता से संबंधित व्यवस्थित अवमूल्यन का व्यापक प्रचलन है।
  • यह रूढ़िवादी धारणा है कि “समाज में विज्ञान और गणित लड़कों के लिए तथा कला और मानविकी लड़कियों के लिए हैं।

नीतिगत हस्तक्षेप

  • विभिन्न राज्यों के साथ-साथ केंद्रीय नीतियों और कार्यक्रमों ने छात्राओं के साथ होने वाले इस तरह के भेदभाव और पूर्वाग्रहों को स्वीकार किया है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) ने स्कूली शिक्षा में इस तरह के लिंग संबंधी अंतराल और सामाजिक समूहों में मौजूदा असमानताओं को दूर करने की आवश्यकता को मान्यता दी है।
    • NEP ने लड़कियों की उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करने वाले हस्तक्षेपों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
    • इसके अलावा, नीति शिक्षकों के लिए लिंग-संवेदनशील प्रशिक्षण शुरू करने और राज्यों के लिए एक लिंग-समावेशी कोष स्थापित करने की आवश्यकता के बारे में बात करती है।
  • इसी तरह, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा विकसित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा भी लैंगिक असमानताओं को स्वीकार करती है।
  • 2005 में NCERT द्वारा प्रकाशित “गणित का शिक्षण” पत्र गणित में लड़कियों के खराब प्रदर्शन को उनकी क्षमता के सामाजिक अवमूल्यन से जोड़ता है।
    • यह इस बारे में भी बात करता है कि कैसे लैंगिक धारणाएं और शिक्षकों का व्यवहार छात्राओं और गणित में उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

मुख्य सिफारिशें

  • उन पूर्वाग्रहों और धारणाओं की व्यापकता और प्रभाव को दूर करने के लिए प्रयास करने की तत्काल आवश्यकता है जिनमें माना जाता है कि “गणित लड़कियों के लिए नहीं है”।
  • लक्षित व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप घरेलू, स्कूल और सामाजिक स्तरों पर लैंगिक रूढ़िबद्धता के मुद्दों को संबोधित करने में मदद कर सकते हैं।
  • महिला गणितज्ञों के संदर्भ प्रस्तुत करने और पाठ्यक्रम में STEM क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को उजागर करने वाले अध्यायों को शामिल करने से महिला रोल मॉडल को बढ़ावा मिलेगा और युवा लड़कियों को इस तरह के करियर विकल्प चुनने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए, निम्न आलेख देखें:

UPSC Exam Comprehensive News Analysis dated 02 Sep 2022

सारांश:

  • “गणित लड़कियों के लिए नहीं है” जैसी लैंगिक रूढ़िवादिता भारतीय समाज में अत्यधिक प्रचलित है जो महिला शिक्षा, करियर विकल्पों और रोज़गार के अवसरों को होने वाले और अधिक नुकसान को रोकने के लिए इस समस्या को दूर करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है।

परिपक्वता के लिए संदेश:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र से 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

विषय: राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

मुख्य परीक्षा: राज्यपाल के पद से संबंधित मुद्दे तथा राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच संघर्ष।

प्रसंग:

  • बजट सत्र को लेकर राज्य सरकार और पंजाब के राज्यपाल के बीच हालिया खींचतान सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गई है।

पृष्ठभूमि

  • राज्यपाल और राज्य के मुख्यमंत्री के बीच झगड़ा राज्यपाल द्वारा मांगी गई कुछ सूचनाओं से शुरू हुआ, जिन्होंने बजट सत्र के लिए राज्य विधानसभा का सत्र आहूत करने में देरी की।
  • राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा था कि उन्हें बजट सत्र बुलाने की कोई जल्दी नहीं है और मुख्यमंत्री को राजभवन के एक पत्र पर उनकी “अपमानजनक” प्रतिक्रिया के बारे में याद दिलाया।
  • इसके बाद पंजाब सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 (Article 32 of the Constitution) के तहत एक रिट याचिका के जरिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
  • पंजाब सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने और पंजाब के राज्यपाल के प्रमुख सचिव को बजट सत्र बुलाने का निर्देश देने की मांग की है और शीर्ष अदालत से यह घोषणा जारी करने की भी अपील की है कि राज्यपाल इस संबंध में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य हैं।
  • संविधान के अनुच्छेद 174 ने राज्यपाल को यह अधिकार दिया है कि वह समय-समय पर राज्य विधानमंडल के सदन या प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो कि वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिये आहूत करेगा।
    • हालाँकि, नबाम रेबिया मामले (2016) में अपने फैसले में एक संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्यपाल केवल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर सदन को आहूत कर सकते हैं, सत्रावसान कर सकते हैं और सदन को भंग कर सकते हैं।

राज्यपाल के संवैधानिक विवेक के बारे में अधिक जानकारी के लिए: Constitutional discretion of Governor

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियां

  • सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच खींचतान का जिक्र करते हुए कहा है कि यह मुद्दा संवैधानिक विमर्श की जरूरत को दर्शाता है।
  • खंडपीठ का नेतृत्व करने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक संवैधानिक प्राधिकरण की अपने कर्तव्य के निर्वहन में विफलता दूसरे प्राधिकरण द्वारा संविधान के तहत अपने विशिष्ट कर्तव्यों का निर्वहन न करने को न्यायोचित नहीं बनाता है।
  • मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि “लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद स्वीकार्य हैं और संयम के साथ काम करना होगा। जब तक इन सिद्धांतों को ध्यान में नहीं रखा जाता है, तब तक संवैधानिक मूल्यों का प्रभावी कार्यान्वयन खतरे में पड़ सकता है।
  • अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार, मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह “राज्य के मामलों के प्रशासन और कानून के प्रस्तावों से संबंधित ऐसी जानकारी प्रस्तुत करें” जो राज्यपाल माँगे।

भावी कदम

  • राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों (राज्य सरकार) दोनों को संवैधानिक सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए।
    • जबकि राज्य का प्रशासन एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकार और एक मुख्यमंत्री को सौंपा गया है, वहीं एक संवैधानिक प्राधिकारी के रूप में राज्यपाल को राज्य सरकार के लिए एक मार्गदर्शक और परामर्शदाता होने का कर्तव्य सौंपा गया है।
  • राज्यों के राज्यपालों को राज्य सरकार को मार्गदर्शन, चेतावनी और सलाह देने पर अधिक ध्यान देना चाहिए बजाय टिप्पणीकार, आलोचक और यहां तक कि कई बार विपक्ष की भूमिका निभाने के, क्योंकि यह संवैधानिक शासन के लिए अच्छा नहीं है।

यह भी पढ़ें- Sansad TV Perspective: State Govt vs Governor

सारांश:

  • जैसा कि हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के बीच खींचतान की घटनाएं अधिक हो रही हैं, राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि वे अपनी संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करें और अपने मतभेदों का समाधान करने में परिपक्व राजनीतिज्ञता का प्रदर्शन करें।

प्रीलिम्स तथ्य:

  1. S-400:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

रक्षा:

विषय: रक्षा और सुरक्षा।

प्रारंभिक परीक्षा: S-400 वायु रक्षा प्रणाली से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी।

प्रसंग:

  • S-400 वायु रक्षा प्रणालियों की पांच रेजीमेंटों की डिलीवरी साल के अंत या वर्ष 2024 की शुरुआत तक पूरी होने की उम्मीद है।

S-400 वायु रक्षा प्रणाली:

चित्र स्रोत: The Eurasian Times

  • S-400 वायु रक्षा प्रणाली रूस के अल्माज़ सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा विकसित एक विमान भेदी मिसाइल रक्षा प्रणाली है।
  • S-400 रक्षा प्रणाली में न केवल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली बल्कि प्रणालियों का एक पूरा समूह शामिल है,जिसमें रडार, कमांड सेंटर, मिसाइल और सहायक घटक शामिल हैं जो एक साथ हवाई क्षेत्र के विशाल क्षेत्रों की रक्षा में मदद करते हैं।
  • इसके अलावा प्रत्येक लॉन्च वाहन के भीतर लॉन्च करने के लिए तैयार मिसाइलों के साथ चार ट्यूब अलग से दिए गए हैं।
  • S-400 का वर्तमान संस्करण विभिन्न रेंज और ऊंचाई वाली चार अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों को लॉन्च कर सकता है।
  • भारत ने अक्टूबर 2018 में पांच S-400 मिसाइल प्रणाली की डिलीवरी के लिए रूस के साथ $5.43 बिलियन या ₹40,291 करोड़ के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे।
  • शेष दो और रेजिमेंटों की डिलीवरी के साथ तीसरी S-400 रेजीमेंट की डिलीवरी पूरी कर ली गई है।
  • हालाँकि अमेरिका द्वारा CAATSA (प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला) के खतरे के कारण इस प्रणाली की डिलीवरी में देरी हुई है।

S-400 मिसाइल प्रणाली से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: S-400 Missile Systems

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. अनुसूचित जनजाति पैनल ने शीर्ष अदालत से FRA कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की:
  • वन संरक्षण नियम, 2022 (Forest Conservation Rules, 2022) को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के बीच जारी गतिरोध की पृष्ठभूमि में NCST ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की वन अधिकार अधिनियम (FRA) की कार्यान्वयन रिपोर्ट प्राप्त कर ली है।
  • जब केंद्र सरकार ने नवीन वन संरक्षण नियम, 2022 पेश किया था तब NCST ने पर्यावरण मंत्रालय से नियमों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह किया था क्योंकि वे वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 (Forest Rights Act (FRA), 2006) के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे थे।
    • हालांकि, मंत्रालय ने यह कहकर इसका जवाब दिया कि नियम वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (Forest (Conservation) Act, 1980) के तहत तैयार किए गए थे अतः NCST की आशंकाएं “कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं”।
  • NCST ने अपनी संवैधानिक शक्तियों यानी अनुच्छेद 338A के खंड 8D के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए किया और FRA की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच के संबंध में अदालत के समक्ष दायर सभी सामग्रियों की मांग की।
    • इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि मांगे गए दस्तावेज NCST को उपलब्ध कराए जाएं।
  • NCST अब FRA के समग्र कार्यान्वयन की समीक्षा करने, अधिकारों की अस्वीकृति और वन भूमि पर अतिक्रमण का मूल्यांकन करने पर विचार कर रहा है।
    • इसके अलावा, आयोग अपने संवैधानिक जनादेश के आधार पर वनवासियों के अधिकारों को और सुरक्षित करने के लिए सिफारिशें प्रस्तावित करेगा।
  • दिसंबर 2022 में राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार जून 2022 तक FRA के तहत किए गए वन भूमि के दावों के सिर्फ 50% के खिलाफ स्वामित्व अधिकार जारी किए गए थे जिसमें से व्यक्तिगत दावों के मामलों में अधिकतम लंबिता और अस्वीकृति देखने को मिली।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: National Commission for Scheduled Tribes (NCST)

  1. भारतीय प्रेस परिषद् ने प्रिंट मीडिया द्वारा ‘पेड न्यूज’ के प्रकाशन के खिलाफ चेतावनी दी:
  • भारतीय प्रेस परिषद् (Press Council of India) ने प्रिंट मीडिया को विभिन्न राज्यों में चुनाव के दौरान “पेड न्यूज” पर पत्रकारिता आचरण-2022 के मानदंडों का पालन करने की सलाह दी है।
  • भारतीय प्रेस परिषद् ने अखबारों से कहा है कि वे किसी भी नेता द्वारा दिए गए बयानों को गलत तरीके से उद्धृत न करें और अखबारों से कहा है कि वे बयानों को उनकी सच्ची भावना से उद्धृत करें।
  • परिषद के अनुसार, समान सामग्री वाले प्रतिस्पर्धी समाचार पत्रों में प्रकाशित राजनीतिक समाचार दृढ़ता से इंगित करते हैं कि ऐसी रिपोर्टें पेड न्यूज हैं।
    • किसी विशेष दल या उम्मीदवार के पक्ष में किसी समाचार या तस्वीर की प्रस्तुति का तरीका भी पेड न्यूज का सूचक है।
    • इसके अलावा, परिषद ने कहा कि एक उम्मीदवार की जीत या सफलता का अनुमान लगाना, जिसने अभी तक नामांकन दाखिल नहीं किया है, भी पेड न्यूज का संकेत देता है।
  • परिषद ने सुझाव दिया है कि समाचार पत्र उम्मीदवारों की रिपोर्ट या साक्षात्कार प्रकाशित करते समय संतुलन सुनिश्चित करें और किसी विशेष दल या उम्मीदवार का पक्ष न लें।
  1. फरवरी में PMI विनिर्माण में स्थिर विस्तार का संकेत दे रहा है:

चित्र स्रोत: The Hindu

  • भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने फरवरी 2023 में लगातार बीस महीनों में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की है।
  • सर्वेक्षण-आधारित मौसमी रूप से समायोजित S&P ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Purchasing Managers’ Index (PMI)) के अनुसार, उत्पादन वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू बाजार द्वारा संचालित है क्योंकि निर्यात ऑर्डर में वृद्धि 11 महीने के निचले स्तर पर दर्ज की गई है।
    • फरवरी में PMI 55.3 पर था जो जनवरी के 55.4 से थोड़ा कम है।
  • इसके अलावा, सूचकांक यह भी उल्लेख करता है कि हाल के महीनों में इनपुट लागत सबसे तेज गति से बढ़ी है क्योंकि कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऊर्जा, खाद्य पदार्थों, धातुओं और वस्त्रों के लिए उच्च कीमतों का उल्लेख किया है।
    • हालांकि, 94% उत्पादकों ने उच्च लागत को खरीदारों पर डालने के बजाय उन्हें स्वयं वहन करने का फैसला किया है।
  • सूचकांक इस तथ्य पर भी प्रकाश डालता है कि नए ऑर्डरों में मजबूत वृद्धि के बावजूद, रोजगार सृजन में केवल आंशिक विस्तार देखा गया है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के संबंध में कौन से कथन सत्य हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. यह रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन है।
  2. इसका उद्देश्य सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता में सुधार करना है।
  3. जन औषधि केंद्र दवा और सर्जिकल उपकरण दोनों बेचते हैं।

विकल्प:

  1. 1 और 2
  2. 2 और 3
  3. 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना (PMBJP) नवंबर, 2008 में भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा शुरू की गई थी।
  • कथन 2 सही है: PMBJP का मुख्य उद्देश्य सभी को सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना है।
  • कथन 3 सही है: PMBJP की उत्पाद टोकरी में दवाओं के साथ-साथ सर्जिकल उपकरण दोनों को शामिल किया गया हैं।

प्रश्न 2. निम्नलिखित सैन्य/विशेष बल अभ्यासों और जिस देश के साथ यह आयोजित किया जाता है, के कितने युग्म सुमेलित हैं? (स्तर – कठिन)

  1. गरुड़ शक्ति: फ्रांस
  2. धर्म गार्जियन: नेपाल
  3. वरुणः इंडोनेशिया
  4. शिन्यू मैत्री: जापान

विकल्प:

  1. केवल एक युग्म
  2. केवल दो युग्म
  3. केवल तीन युग्म
  4. सभी चारों युग्म

उत्तर: a

व्याख्या:

  • युग्म 1 गलत है: गरुड़ शक्ति भारत और इंडोनेशिया की सेनाओं के विशेष बलों के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास है।
  • युग्म 2 गलत है: धर्म गार्जियन भारत और जापान के बीच आयोजित एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
  • युग्म 3 गलत है: भारत फ़्रांस के साथ अभ्यास वरुण नामक एक नियमित नौसेना अभ्यास आयोजित करता है।
  • युग्म 4 सही है: शिन्यू मैत्री जापानी वायु आत्मरक्षा बल (Air Self Defence Force) के साथ भारतीय वायु सेना का सैन्य अभ्यास है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कितने कथन सत्य हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. भारतीय वन सर्वेक्षण प्रत्येक 2 वर्ष में एक बार अपनी वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
  2. 40-70% के कैनोपी कवर वाले वृक्ष क्षेत्रों को घने जंगल के रूप में जाना जाता है।
  3. 40% से कम कैनोपी कवर वाले किसी भी क्षेत्र को सर्वेक्षण के तहत वन क्षेत्र के रूप में नहीं गिना जाता है।
  4. इसमें वृक्षारोपण भी शामिल नहीं है।

विकल्प:

  1. केवल एक कथन
  2. केवल दो कथन
  3. केवल तीन कथन
  4. सभी चारों कथन

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) का एक द्विवार्षिक प्रकाशन है।
  • कथन 2 सही है: 40% और उससे अधिक कैनोपी घनत्व वाले सभी भूमि क्षेत्रों को घने जंगल माना जाता है।
  • कथन 3 गलत है: 10-40% के बीच के सभी भूमि क्षेत्रों को खुला वन माना जाता है और वन क्षेत्रों के रूप में गिना जाता है।
  • कथन 4 गलत है: वृक्षारोपण भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) में शामिल हैं।

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सत्य हैं? (स्तर – कठिन)

  1. विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम गैर सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) को मिलने वाले विदेशी धन को विनियमित करता है।
  2. विदेशी दान लेने के लिए एन.जी.ओ. का एस.बी.आई. में ही खाता होना चाहिए।
  3. एन.जी.ओ. को धन प्राप्त करने के उद्देश्य को निर्दिष्ट करने की आवश्यकता है।
  4. यदि एक एन.जी.ओ. कार्य करने में सक्षम नहीं है तो धन को उस एन.जी.ओ. से दूसरे में स्थानांतरित किया जा सकता है।

विकल्प:

  1. 1, 2 और 3
  2. 1, 3 और 4
  3. 2, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: FCRA को 1976 में आपातकाल के दौरान व्यक्तियों और संघों द्वारा विदेशी धन की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
  • कथन 2 सही है: गैर सरकारी संगठनों को विदेशी दान प्राप्त करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI), दिल्ली में एक FCRA खाता खोलने और बनाए रखने की आवश्यकता है।
  • कथन 3 सही है: गैर-सरकारी संगठनों को भी धन प्राप्त करने के उद्देश्य को निर्दिष्ट करने और इस तरह के धन का उपयोग केवल निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए करने की आवश्यकता होती है।
  • कथन 4 सही नहीं है: FCRA किसी अन्य NGO को धन के हस्तांतरण पर रोक लगाता है।

प्रश्न 5. ‘चार्टर ऐक्ट’, 1813’ के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: PYQ 2019 (स्तर – मध्यम)

  1. इसने भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी के व्यापार एकाधिपत्य को, चाय का व्यापार तथा चीन के साथ व्यापार को छोड़कर, समाप्त कर दिया।
  2. इसने कम्पनी द्वारा अधिकार में लिए गए भारतीय राज्यक्षेत्रों पर ब्रिटिश राज (क्राउन) की सम्प्रभुता को सुदृढ़ कर दिया।
  3. भारत का राजस्व अब ब्रिटिश संसद के नियंत्रण में आ गया था।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: 1813 के चार्टर अधिनियम ने चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया।
  • कथन 2 सही है: 1813 के चार्टर अधिनियम ने कम्पनी द्वारा अधिकार में लिए गए भारतीय राज्यक्षेत्रों पर ब्रिटिश राज (क्राउन) की सम्प्रभुता को सुदृढ़ कर दिया।
  • कथन 3 गलत है:पिट्स इंडिया अधिनियम, 1784 के माध्यम से भारत के राजस्व को ब्रिटिश संसद द्वारा नियंत्रित किया जाता था।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। Link (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, राजव्यवस्था]

प्रश्न 2. भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से निपटने में इसकी प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।Link (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-3, अर्थव्यवस्था]