UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 03 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

03 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. प्रशांत द्वीप समूह में चीन के बढ़ते कदम:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत-पाकिस्तान संबंध और 2019 का प्रतिबिंब:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT)

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत और इज़राइल भविष्य की रक्षा तकनीक पर सहयोग बढ़ाने के इच्छुक:
  2. भारत ने तालिबान के साथ बातचीत के लिए वरिष्ठ राजनयिकों को काबुल भेजा:
  3. लोको पायलटों को सतर्क करने के लिए पटरियों पर किया जाने वाला विस्फोट जल्द रुक सकता है:
  4. व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 23.33 अरब डॉलर हुआ:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

प्रशांत द्वीप समूह में चीन के बढ़ते कदम:

विषय: विकसित और विकासशील देशों की नीतियां एवं राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: प्रशांत द्वीपीय देशों से संबंधित जानकारी।

मुख्य परीक्षा: प्रशांत द्वीपीय देशों का महत्व, इस क्षेत्र में चीन के हित और चीन के हालिया कदमों के निहितार्थ।

संदर्भ:

  • चीन के विदेश मंत्री वर्तमान में दस प्रशांत द्वीपीय देशों (PICs) के दौरे पर हैं और एक व्यापक रूपरेखा समझौते के माध्यम से संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
  • इस विषय से संबंधित पृष्ठभूमि के लिए 15 अप्रैल 2022 का विस्तृत समाचार विश्लेषण पढ़ें।

प्रशांत द्वीपीय देश:

  • प्रशांत द्वीपीय देश 14 द्वीपों का एक समूह है जो एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दोनों अमेरिका के बीच प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित हैं।
  • इन प्रशांत द्वीपीय देशों में कुक द्वीप, फिजी, किरिबाती, मार्शल द्वीप गणराज्य, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य (FSM), नाउरू, नीयू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, समोआ, सोलोमन द्वीप, टोंगा, तुवालु और वानुअतु शामिल हैं।
  • इन देशों को वहां के भौतिक और मानवीय भूगोल के आधार पर तीन अलग-अलग क्षेत्रों जैसे माइक्रोनेशिया, मेलानेशिया और पोलिनेशिया में वर्गीकृत किया गया है।
  • इन द्वीपीय राष्ट्रों के भूमि क्षेत्र बहुत छोटे हैं एवं इनका विस्तार विशाल प्रशांत महासागर में हैं।
  • दुनिया के कुछ सबसे छोटे और सबसे कम आबादी वाले देश होने के बावजूद, इनके अधिकार क्षेत्र में दुनिया के कुछ सबसे बड़े विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) आते हैं।

Wikipedia

चित्र स्रोत: Wikipedia

प्रशांत द्वीपीय देशों का सामरिक महत्व:

  • वृहद विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र: चूंकि इन देशों के अधिकार क्षेत्र में बड़े विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं, इसलिए ये देश इन विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों का उपयोग अपने आर्थिक लाभ के लिए कर सकते हैं जो मत्स्य, ऊर्जा, खनिजों और अन्य समुद्री संसाधनों से समृद्ध हैं।
    • ये सभी राष्ट्र स्वयं को छोटे द्वीपीय देशों के बजाय बड़े महासागरीय देशों के रूप में माना जाना पसंद करते हैं।
    • गौरतलब हैं कि किरिबाती और फेडरेशन स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया जैसे देशों में भारत की तुलना में वृहद विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र मौजूद है।
  • सामरिक प्रतिष्ठान: अतीत में इन द्वीपीय देशों ने प्रमुख शक्ति प्रतिद्वंद्विता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि ये रणनीतिक क्षमताओं को विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए शक्ति अनुमानों और प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए लॉन्चपैड (प्रमोचन मंच) रहे हैं।
  • परमाणु परीक्षण स्थल: विश्व के प्रमुख जनसंख्या वाले देशों से इन द्वीपों की अधिक दूरी के कारण, इन देशों में यू.एस., यू.के. और फ्रांस जैसी परमाणु शक्तियों ने अपने कुछ प्रमुख परमाणु हथियार परीक्षण केंद्र स्थापित कर रखे थे।
    • इसके आलावा इन द्वीपीय देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान और यू.एस. के बीच युद्ध के प्रमुख मंच के रूप में कार्य किया।
  • भू-राजनीतिक प्रभाव: ये 14 प्रशांत द्वीपीय देश साझा आर्थिक और सुरक्षा चिंताओं के माध्यम से एक साथ बंधे हुए हैं,और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के महत्वपूर्ण सदस्य हैं तथा अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने हेतु प्रमुख शक्तियों के लिए वोट बैंक के रूप में कार्य करते हैं।

प्रशांत द्वीपीय देशों में चीन के हित:

  • चीन इन द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है, क्योंकि पश्चिमी शक्तियों के विपरीत, इन देशों के साथ चीन का कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं रहा है।
  • इन द्वीपों की भू-रणनीतिक स्थिति चीन के समुद्री हित और नौसैनिक शक्ति के विस्तार के अनुकूल है।
    • ये देश चीन की ‘प्रथम द्वीप श्रृंखला’ से परे स्थित हैं। गौरतलब है कि, प्रथम द्वीप श्रृंखला (First Island Chain) चीन के समुद्री विस्तार का प्रथम प्रवेश द्वार हैं।
    • चीन इस क्षेत्र को अपने ‘सुदूर समुद्र’ (Far Seas) के रूप में संदर्भित करता है और इस पर नियंत्रण पाने से चीन की नौसेना एक प्रभावी ब्लू वाटर सक्षम नौसेना बन जाएगी जो महाशक्ति बनने के लिए एक आवश्यक शर्त है।
  • चीन चतुष्कोणीय सुरक्षा वार्ता (QUAD) के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए इन देशों के साथ अपने संबंध स्थापित करना चाहता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा है।
  • इन द्वीपीय देशों की विशाल समुद्री समृद्धि और विशाल आर्थिक क्षमता ने भी चीन को आकर्षित किया है।
  • ताइवान कारक- दक्षिण प्रशांत में स्थित ये द्वीप ऐसे देश हैं जहां राजनयिक मान्यता के लिए चीन की ताइवान के साथ प्रतिस्पर्धा है।
    • चीन ताइवान को स्वयं से अलग हुए एक प्रांत के रूप में देखता है और अपने साथ इसके पुनः एकीकरण की प्रतीक्षा कर रहा है, इसलिए चीन के साथ संबंध रखने वाले किसी भी देश को ताइवान के साथ संबंध तोड़ना होगा।
    • इन द्वीपीय देशों को पश्चिम और ताइवान से दूर करने से ताइवान के पुन: एकीकरण का लक्ष्य चीन के लिए आसान हो जाएगा।
    • चीन अपनी आर्थिक सहायता के माध्यम से 14 में से 10 प्रशांत द्वीप राज्यों से राजनयिक मान्यता प्राप्त करने में सफल रहा है और वर्तमान में इनमें से केवल चार देश अर्थात् तुवालु, पलाऊ, मार्शल द्वीप और नाउरू ही ताइवान को मान्यता देते हैं।

चीन के हालिया कदमों के निहितार्थ:

  • हाल ही में, चीन द्वारा तैयार किए गए दो मसौदा दस्तावेज अर्थात् “चाइना-पैसिफिक आइसलैंड कन्ट्रीज (PICs) कॉमन डेवलपमेंट विज़न”, (“China-Pacific Island Countries (PICs) Common Development Vision”,) और “चाइना-पैसिफिक आइसलैंड्स फाइव-ईयर एक्शन प्लान ऑन कॉमन डेवलपमेंट (2022-2026)” ( “China-Pacific Islands Five-Year Action Plan on Common Development (2022-2026)” ) लीक हो गए हैं और इन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट हुआ है।
    • ये विज़न दस्तावेज राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग में सुधार के प्रस्ताव से संबंधित है।
    • एक्शन प्लान दस्तावेज इन चिन्हित क्षेत्रों में सहयोग के विशिष्ट विवरणों पर प्रकाश डालता है।
  • हालांकि, प्रशांत द्वीपीय देशों ने अपने सामूहिक निर्णय में चीन के व्यापक और महत्वाकांक्षी प्रस्तावों को खारिज कर दिया है।
  • फेडरेशन स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के प्रधानमंत्री ने इन सभी द्वीपीय देशों की सरकारों से कहा है कि चीन के प्रस्तावों पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि वे इन द्वीपीय देशों की संप्रभुता और एकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और भविष्य में इन्हे शक्ति संघर्षों में खींच सकते हैं।
  • लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चीन एक नए समझौते के साथ वापस आएगा है जो अधिक स्वीकार्य होगा और यदि इस सौदे पर आम सहमति नहीं भी बन पाती हैं तो भी यह विफलता चीन को समान प्रकृति के अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय सौदा करने से रोक नहीं पाएगी।
  • चीन की इस नीति ने यू.एस. और ऑस्ट्रेलिया जैसी उन शक्तियों को आगाह किया हैं, जिनका इस क्षेत्र में परंपरागत रूप से उच्च प्रभाव रहा है।
    • चीन-सोलोमन द्वीप समझौते के बाद से अमेरिका इस क्षेत्र के लिए अपनी कूटनीतिक प्राथमिकता पर फिर से विचार कर रहा है।
    • इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि अमेरिका ने चीन द्वारा प्रस्तावित इस सौदे के खिलाफ विपक्ष को जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है क्योंकि फेडरेशन स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया एकमात्र ऐसा देश है जो चीन को मान्यता देता है और इसके साथ ही यह यू.एस. के फ्री एसोसिएशन ऑफ कॉम्पैक्ट का भी हिस्सा है।
    • ऑस्ट्रेलिया ने अपने अधिकारियों को इन देशों में अपने संबंधों पर फिर से विचार करने के लिए भेजा है और इन देशों को उचित प्राथमिकता और सहायता देने का वादा किया है।

सारांश:

  • प्रशांत द्वीपीय देशों के भू-रणनीतिक महत्व ने औपनिवेशिक युग की प्रमुख शक्तियों को अतीत में इन देशों पर नियंत्रण हासिल करने हेतु एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए आकर्षित किया था और इस संदर्भ में चीन के हालिया कदमों ने इस क्षेत्र की अन्य प्रमुख शक्तियों और इन प्रशांत द्वीपीय देशों के नेताओं को सतर्क कर दिया है।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

भारत-पाकिस्तान संबंध और 2019 का प्रतिबिंब:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी देशो के साथ संबंध।

प्रारंभिक परीक्षा: सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) तथा अनुच्छेद – 370।

मुख्य परीक्षा: भारत की पड़ोस नीति के परिवर्तन के संदर्भ में भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए भावी कदमों का विश्लेषण।

संदर्भ:

  • सिंधु जल संधि के तत्वावधान/संरक्षण में भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता हुई।

भारत-पाकिस्तान: संबंधों को मजबूत करना

  • भारत ने अपनी पड़ोस नीति के तहत अधिक मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण को अपनाया है।
  • दीर्घकाल से, भारत-पाकिस्तान संबंध (India-Pakistan Relation) में शत्रुता और दुश्मनी जैसे ऐतिहासिक प्रकरणों का विस्तार हुआ है।
  • हालाँकि, गतिशीलता कूटनीति का एक प्रमुख अंग है।
  • हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई है जो भारत और पाकिस्तान के बीच घटती शत्रुता को प्रदर्शित करती हैं।
  • भारत सरकार ने विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत गेहूं की खेप पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान को भेजी है।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच संचार के माध्यम खुले हैं।
  • नेताओं के राजनीतिक भाषणों में देशों के बीच उभरते संबंधों को देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दुश्मन देश के रूप में संबोधित करना बंद कर दिया है।
  • भारत ने संयुक्त अरब अमीरात को वार्ताकार के रूप में इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के साथ बैकचैनल वार्ता की शुरुआत की है।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि इस तरह के बदलाव यथार्थवादी विचारों से प्रेरित है जो भारत और चीन के बीच लद्दाख के गालवान क्षेत्र में सीमा संघर्ष के दौरान सामने आए थे।

चीन का प्रभाव:

  • यह सर्वविदित है कि चीन की आक्रामक विस्तारवादी विचारधारा भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और उसकी सीमा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा रही है।
  • लद्दाख में सीमा संकट ने चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य खतरे की आशंका बढ़ा दी है।
  • कई सैन्य विशेषज्ञों का मनना है कि सीमा संकट की चुनौती को केवल सैन्य कार्रवाई के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है।
  • लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के साथ सीमित अलगाव (disengagement) हुआ था।
  • भारत के साथ बैकचैनल वार्ता के कारण पाकिस्तान ने अपनी सेना को नियंत्रण रेखा पर लामबंद करने से परहेज किया। इसने भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों ओर से बढ़े हुए सीमा खतरों से सुरक्षित रखा।
  • ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए कूटनीति के अन्य साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, शांतिपूर्ण वार्ता, राजनयिक वार्ता और आर्थिक जुड़ाव आदि इसी प्रकर के साधन हैं।

पाकिस्तान की मांग:

  • अनुच्छेद 370 (Article 370) को समाप्त करने और केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू और कश्मीर राज्य के पुनर्गठन ने विवादित क्षेत्रों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक नया असंतोष पैदा कर दिया है।
  • पाकिस्तान ने भारत के साथ किसी भी तरह की वार्ता में शामिल होने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं।
  • इन शर्तों में शामिल हैं:
    • जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना।
    • कश्मीर घाटी में किसी भी प्रकार का जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं करने की घोषणा करना।

संभावित निष्कर्ष:

  • बैकचैनल वार्ता दीर्घकाल तक चली और भारत ने पाकिस्तान की मांगों के अनुरूप कोई भी कार्रवाई करने में अपनी राजनीतिक अक्षमता व्यक्त की।
  • भारत-पाकिस्तान संबंधों का पुनरुत्थान कुछ असहमति के कारण गतिरोध तक पहुंच गया।
  • प्रशासन द्वारा उच्च सुरक्षा केंद्रित दृष्टिकोण के बावजूद क्षेत्र में बढ़ती हिंसा के साथ कश्मीर मुद्दा एक चुनौती बना हुआ है।
  • भारत सरकार द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि कश्मीर में हिंसा को पाकिस्तान द्वारा हथियारों और आतंकवादियों के सीमा पार हस्तांतरण के माध्यम से पोषित किया जाता है।
  • इन मुद्दों के समाधान में समय लगेगा और इसे एक दीर्घकालिक प्रक्रिया द्वारा ही हल किया जा सकता है।

भावी कदम:

  • दोनों पक्षों (भारत और पाकिस्तान) के अधिकारियों द्वारा यह कहा गया है कि कुछ ऐसे विवाद हैं जिन्हें राजनीतिक इच्छाशक्ति की मदद से सुलझाया जा सकता है।
  • इन मुद्दों में शामिल हैं:
    • सर क्रीक विवाद पर समझौता।
    • द्विपक्षीय व्यापार के पुनरुद्धार के लिए समझौता।
    • दिल्ली और इस्लामाबाद में मिशनों में उच्चायुक्तों की वापसी।
    • मजबूत राजनयिक संबंध विकसित करना।
  • सियाचिन हिमनद के विसैन्यीकरण के संबंध में वार्ता की जानी चाहिए, जो अभी दूरगामी प्रतीत हो रही है।
  • स्थिति की गहन समझ से यह स्पष्ट होता है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद द्वारा संबंधों को पुनर्जीवित करने की इच्छा व्यक्त की गई है, लेकिन पाकिस्तान की घरेलू राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट के कारण दोनों पक्ष आगे बढ़ने में नाकामयाब हैं।
  • इसलिए, पाकिस्तान में माहौल भारत के साथ किसी भी प्रकार की प्रगति के लिए अनुकूल नहीं है।
  • हालांकि, पाकिस्तान के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सुधारने हेतु भारत के लिए द्वार हमेशा खुले हैं।

सारांश:

  • पारंपरिक शत्रुता से उचित कूटनीतिक और राजनीतिक जुड़ाव के पक्ष में कार्रवाई करना मौजूदा चुनौतियों के बावजूद भारत-पाकिस्तान संबंधों को पुनर्जीवित करने की आधारशिला होगी। इस तरह के विकासोन्मुख संबंधो को राष्ट्रीय हितों तथा प्रभावी पड़ोस नीति का समर्थन प्राप्त होता है।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT)

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

प्रारंभिक परीक्षा: इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) के संदर्भ में।

संदर्भ:

  • विश्व का पहला तरल दर्पण दूरबीन (लिक्विड मिरर टेलीस्कोप) देवस्थल में स्थापित किया गया है।

इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT):

  • विश्व का पहला लिक्विड मिरर टेलीस्कोप उत्तराखंड के नैनीताल में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के देवस्थल वेधशाला में स्थापित किया गया था। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
  • इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप, देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप (DOT) (2016 में भारत में स्थापित सबसे बड़ा) और देवस्थल फास्ट ऑप्टिकल टेलीस्कोप (DFOT) (2010 में) के उद्घाटन के बाद, देवस्थल से संचालित होने वाला तीसरा टेलीस्कोप होगा।
  • यह टेलीस्कोप आसमान का सर्वेक्षण करने और ऐसी छवियां प्राप्त करने में सहायक होगा जो क्षुद्रग्रह, सुपरनोवा जैसी क्षणिक घटनाओं का निरीक्षण करने तथा अंतरिक्ष मलबे या उल्कापिंडों की उपस्थिति को रिकॉर्ड करने में सहायक हो सकती हैं।
  • ILMT का निर्माण कनाडा, बेल्जियम और भारत के वैज्ञानिकों के सयुक्त प्रयास से किया गया है।
    • इसे एडवांस्ड मैकेनिकल एंड ऑप्टिकल सिस्टम्स कॉर्पोरेशन एंड सेंटर स्पैटियल डी लीज, बेल्जियम में डिजाइन एवं निर्मित किया गया था।
  • टेलीस्कोप द्वारा ली गई पहली छवि में कई तारे और एक आकाशगंगा, NGC 4274 शामिल थी, जो 45 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है।
  • ILMT में एक प्राथमिक दर्पण होता है जो तरल होता है तथा इसे किसी भी दिशा में घुमाया और इंगित नहीं किया जा सकता है।
    • टेलीस्कोप मूल रूप से शीर्षबिंदु की ओर और पृथ्वी के घूर्णन के अनुरूप आकाश की निगरानी करता है,जिससे विभिन्न वस्तुओं का दृश्य दिखाई देता है।
    • इसका उपयोग आकाश को स्कैन और सर्वेक्षण करने, क्षणिक घटनाओं और उल्कापिंडों जैसी गतिमान वस्तुओं का निरीक्षण करने के लिए किया जा सकता है।
  • पारे (mercury) को एक बर्तन में रखा जाता है जो इतनी तेजी से घूमता है कि यह एक परवलयिक आकार में बदल जाता है। चूंकि पारा परावर्तक होता है, इसलिए यह आकार परावर्तित प्रकाश को केंद्रित करने में सहायक होता है। पारा को हवा से बचाने के लिए मायलर (mylar) की एक पतली परत का उपयोग किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भारत और इज़राइल भविष्य की रक्षा तकनीक पर सहयोग बढ़ाने के इच्छुक:

  • भारत के रक्षा मंत्री और उनके इजरायली समकक्ष ने भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर आशय पत्र का आदान-प्रदान किया।
  • दोनों ने मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) और रक्षात्मक क्षमताओं पर ध्यान देने के साथ सरकार-से-सरकार ढांचे, सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग पर साझेदारी पर भी चर्चा की।
  • मंत्रियों ने भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इजरायल के रक्षा अनुसंधान एवं विकास निदेशालय के बीच हस्ताक्षरित एक सहयोग समझौते पर भी चर्चा की।
  • मंत्रियों ने भारत के असाधारण विकास और उत्पादन क्षमताओं के साथ-साथ इजरायल की तकनीकी प्रगति और परिचालन अनुभव का उपयोग करने वाले तरीके से रक्षा सहयोग को और विकसित करने के अपने इरादों की घोषणा की।
  • दोनों देश द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी अंतिम रूप दे रहे हैं।

2. भारत ने तालिबान के साथ बातचीत के लिए वरिष्ठ राजनयिकों को काबुल भेजा:

  • अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में वापसी और अगस्त 2021 में काबुल में भारतीय दूतावास को खाली कराए जाने के बाद से भारत ने पहली बार वरिष्ठ राजनयिकों का एक बहु-सदस्यीय दल अफगानिस्तान भेजा है।
  • तालिबान ने भारतीय दल से काबुल में फिर से अपना दूतावास खोलने का आग्रह किया है।
  • विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भविष्य में अफगानिस्तान में अधिक खाद्यान्न और चिकित्सा शिपमेंट भेजे जाएंगे एवं भारत ने ईरान में रहने वाले अफगान शरणार्थियों के बीच वितरण के लिए ईरान को कोविड-19 टीकों की एक मिलियन खुराक देने की भी घोषणा की है।
  • राजनयिकों के दल ने हबीबिया हाई स्कूल का दौरा किया, जिसका पुननिर्माण भारत सरकार की सहायता से किया जा रहा है। दल ने चिमतला विद्युत सब-स्टेशन का भी दौरा किया जिसे पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा काबुल को बिजली आपूर्ति के लिए बनाया गया था।
  • वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के इस दल में एक महिला अधिकारी भी शामिल है, जिसकी व्याख्या तालिबान को अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में की जा रही है।

3. लोको पायलटों को सतर्क करने के लिए पटरियों पर किया जाने वाला विस्फोट जल्द रुक सकता है:

  • भारतीय रेल लोको पायलटों को किसी बाधा या खतरे के प्रति सचेत करने के लिए डेटोनेटर सिग्नल के दशकों पुराने उपयोग को जल्दी ही बंद कर सकती है।
  • रेलवे के विभिन्न कर्मचारी संघों ने इन विस्फोटों की संकेत की प्रथा को रोकने का आग्रह किया है क्योंकि नवीन प्रौद्योगिकी एवं गैजेट्स जैसे कि टक्कर-रोधी उपकरण, ट्रेन सुरक्षा चेतावनी प्रणाली, शॉर्ट-सर्किट क्लिप, फॉग सिग्नल डिवाइस और सहायक चेतावनी प्रणाली इस उद्देश्य की पूर्ति करते हैं।
    • विस्फोटक पदार्थ अधिनियम कर्मचारियों को सार्वजनिक स्थानों पर विस्फोटक रखने पर भी प्रतिबंध लगाता है।
  • रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि डेटोनेटर सिग्नलों को खत्म करने से लोको पायलटों और ट्रेन प्रबंधकों द्वारा ले जाए जाने वाले आवश्यक उपकरणों के वजन में भी कमी आएगी।

4. व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 23.33 अरब डॉलर हुआ:

  • भारत का व्यापारिक व्यापार घाटा मई 2022 में रिकॉर्ड 23.33 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, क्योंकि निर्यात 15.5 फीसदी बढ़कर 37.3 अरब डॉलर, जबकि आयात 56.1% बढ़कर 60.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
    • पिछला उच्चतम मासिक व्यापार घाटा नवंबर 2021 में 22.91 अरब डॉलर था।
  • अप्रैल की तुलना में माल निर्यात में 7.2% की गिरावट आई थी, जिसके कारण 2022-23 के पहले दो महीनों में व्यापार घाटा बढ़कर 41.73 बिलियन डॉलर हो गया था।
  • पेट्रोलियम निर्यात जिसमें मई 2021 से 52.7%, इलेक्ट्रॉनिक्स (41.5%) और रेडीमेड टेक्सटाइल गारमेंट्स (22.9%) में हुई वृद्धि ने निर्यात वृद्धि में सबसे ज्यादा योगदान दिया है।
  • यह लगातार तीसरा महीना है जब माल का आयात 60 अरब डॉलर को पार कर गया है, इसका मुख्य कारण रूस-यूक्रेन के मध्य संघर्ष की वजह से वस्तुओं और तेल की कीमतों में वृद्धि है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. भारत में मृत्युदंड के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायालय, मृत्युदंड की सजा सुना सकते हैं लेकिन इस मृत्युदंड की सजा की वैधता के लिए उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि किए जाने की आवश्यकता होती है।
  2. भारत के विधि आयोग ने अपनी 262वीं रिपोर्ट में भारत में मृत्युदंड को बनाए रखने की सिफारिश की थी।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न हीं 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 28(2) के अनुसार, एक सत्र न्यायाधीश या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा दे सकता है, लेकिन किसी भी न्यायाधीश द्वारा पारित मौत की सजा उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के अधीन होगी।
    • प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट का न्यायालय तीन वर्ष या उससे कम की अवधि के लिए कारावास, या दस हजार रुपए या उससे कम का जुर्माने, या दोनों की सजा दे सकता है। इसलिए, प्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट मौत की सजा नहीं सुना सकता हैं।
  • कथन 2 सही नहीं है: 1962 में, विधि आयोग ने अपनी 35वीं रिपोर्ट में मृत्युदंड को बनाए रखने की सिफारिश की थी।
    • मृत्युदंड पर भारत के 262वें विधि आयोग की रिपोर्ट में आतंकवाद से संबंधित अपराधों को छोड़कर सभी अपराधों के लिए मृत्युदंड को समाप्त करने की सिफारिश की गई है।

प्रश्न 2. तरल दर्पण दूरबीन (लिक्विड मिरर टेलीस्कोप) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर- मध्यम)

  1. यह देश का प्रथम और एशिया में सबसे बड़ा तरल दर्पण दूरबीन है।
  2. यह आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के देवस्थल वेधशाला परिसर में 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  3. दूरबीन का डिजाइन और निर्माण भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर में किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: देवस्थल में स्थापित इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) दुनिया का पहला लिक्विड मिरर टेलीस्कोप है।
  • कथन 2 सही है: यह उत्तराखंड के नैनीताल में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) की वेधशाला में 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
  • कथन 3 सही नहीं है: इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप का निर्माण कनाडा, बेल्जियम और भारत के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया गया है।
    • इसे एडवांस्ड मैकेनिकल एंड ऑप्टिकल सिस्टम्स कॉर्पोरेशन एंड सेंटर स्पैटियल डी लीज, बेल्जियम में डिजाइन एवं निर्मित किया गया था।

प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. कश्मीर का सूफियाना घराना, जम्मू और कश्मीर का एकमात्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत घराना है।
  2. संतूर तार वाला एक भारतीय संगीत वाद्ययंत्र है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न हीं 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: कश्मीर का सूफियाना घराना जम्मू और कश्मीर का एकमात्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत घराना है।
  • कथन 2 सही है: संतूर तार वाला एक वाद्य यंत्र है जिसके दुनिया भर में कई प्रकार हैं और यह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में लोकप्रिय है।

प्रश्न 4. गुरु अर्जुन/अर्जन देव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर – कठिन)

  1. उन्होंने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के नाम से मशहूर हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखी थी।
  2. वह पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे तरनतारन साहिब और करतारपुर के संस्थापक थे।
  3. उन्हें औरंगजेब ने राजकुमार खुसरो को धन और आर्शीवाद के साथ मदद करने के आरोप में मार डाला था।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 3

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: गुरु अर्जुन देव ने हरमंदिर साहिब का निर्माण किया, जिसे लोकप्रिय रूप से स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है।
  • कथन 2 सही है: गुरु अर्जन देव पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे तरनतारन साहिब और करतारपुर के संस्थापक थे।
  • कथन 3 सही नहीं है: लोगों के बीच बढ़ते प्रभाव और सिख धर्म के प्रसार के कारण मुगल सम्राट जहांगीर ने गुरु अर्जन देव को कैद करके मार डाला था।

प्रश्न 5. जल किसी भी अन्य द्रव की अपेक्षा अधिक पदार्थों को घोल सकता है, क्योंकि- PYQ (2021) (स्तर – कठिन)

(a) इसकी प्रकृति द्विध्रुवीय है।

(b) यह ऊष्मा का सुचालक है।

(c) इसकी विशिष्ट ऊष्मा का मान उच्च होता है।

(d) यह हाइड्रोजन का एक ऑक्साइड है।

उत्तर: a

व्याख्या:

  • पानी के अणु में इलेक्ट्रॉनों के असमान वितरण के कारण सकारात्मक और नकारात्मक ध्रुव होता है, जिसे द्विध्रुवीय कहा जाता है।
  • पानी के अणुओं की यह द्विध्रुवीय प्रकृति इसे अन्य ध्रुवीय अणुओं (सकारात्मक या नकारात्मक) को बहुत आसानी से विलीन करने में मदद करती है।
  • अत: विकल्प a सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. कश्मीर मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, भारत पाकिस्तान को सर क्रीक विवाद, सियाचिन और द्विपक्षीय व्यापार को फिर से शुरू करने जैसे आसानी से हल किए जा सकने वाले मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि दोनों देशों के संबंधों को इसका लाभ मिले। क्या आप इससे सहमत हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न 2. बहुत ही कम समय में इजराइल कई क्षेत्रों में भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

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