04 जून 2023 : समाचार विश्लेषण
|
A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: पर्यावरण:
D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
स्वास्थ्य:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
भूजल की कमी और पुनर्प्राप्ति:
पर्यावरण:
विषय: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
मुख्य परीक्षा: भारत में जल तनाव और भूजल की कमी की रोकथाम।
प्रसंग:
- इस लेख में भूजल रिकवरी/ पुनर्प्राप्ति के विभिन्न मापदंडों पर चर्चा की गई है।
विवरण:
- पिछले कुछ दशकों में उत्तर भारत में भूजल में हो रही तेजी से कमी एक सामान्य घटना बन गई है,इस क्षेत्र में वर्ष 2002 से 2022 के बीच भारत के भूजल स्तर में 95% तक की कमी हुई हैं।
- भूजल भंडारण के दो मुख्य कारक हैं,एक भूजल उपयोग और द्वितीय ग्रीष्म मानसून वर्षा में परिवर्तनशीलता।
भूजल पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:
- सिंचाई मांगों को पूरा करने के लिए भूजल से पंप द्वारा पानी खींचने की आवश्यकता में वृद्धि हुई है, इस प्रकार जलवायु परिवर्तन ने भूजल स्थिरता के सामने नई चुनौतियाँ पेश की हैं।
- इस गर्म जलवायु से बाढ़ और सूखे जैसे अधिक हाइड्रोक्लाइमेट चरम स्थितियों की संभावना बनती है, जो भूजल संसाधनों को और अधिक प्रभावित करेगा।
- गर्म जलवायु के परिणामस्वरूप वाष्पोत्सर्जन में वृद्धि से भूजल की पुनर्प्राप्ति हेतु पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी, हालांकि सिंचाई के लिए भूजल के बढ़ते उपयोग से इसका प्रभाव कम हो जाएगा।
शोध के निष्कर्ष:
- आईआईटी गांधीनगर की एक टीम ने गर्म जलवायु के तहत भूजल भंडारण परिवर्तनशीलता को समझने के लिए भूजल कुओं के आंकड़े, ग्रेविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट (GRACE) से उपग्रह अवलोकन और हाइड्रोलॉजिकल मॉडल सिमुलेशन का विश्लेषण किया हैं।
- टीम ने अपने निष्कर्षों में पाया कि निरंतर भूजल निकासी और गैर-नवीकरणीय स्रोतों से अत्यधिक पम्पिंग से भूजल का नुकसान होता हैं।
- आंशिक भूजल पुनर्प्राप्ति में योगदान करने के लिए उच्च वर्षा की अवधि की संभावना के बावजूद, वर्षा में अनुमानित वृद्धि लंबे समय तक और उच्च ताप स्तर पर वाष्पीकरण के प्रमुख प्रभाव के कारण भूजल भंडारण में समग्र वृद्धि नहीं कर सकती है।
निहितार्थ और समाधान:
- जलवायु अनुमान बताते हैं कि ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा में 6-8% की वृद्धि भूजल पुनर्प्राप्ति में सहायता कर सकती है।
- हालांकि इसका सबसे आशावादी परिदृश्य यह हैं कि वर्षा में वृद्धि पिछले दो दशकों में केवल उस लगभग 50% भूजल को पुनर्प्राप्त करने में मदद करेगी जो पिछले दो दशकों में समाप्त हो गया, साथ ही अस्थिर भूजल उपयोग को संबोधित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
- वर्षा में वृद्धि के लाभों को अधिकतम करने के लिए सिंचाई के लिए अस्थिर भूजल उपयोग को प्रतिबंधित करना महत्वपूर्ण है।
- अधिक लगातार सूखे की संभावना के साथ कुशल सिंचाई प्रथाओं और फसल उगाने वाले क्षेत्रों का स्थानांतरण भूजल भंडारण पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने का एक तरीका है।
|
सारांश:
|
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
शांगरी ला डायलॉग:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत को शामिल करने वाले और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
मुख्य परीक्षा: वैश्विक शांति के लिए शांगरी ला डायलॉग का महत्व।
प्रसंग:
- सिंगापुर में 20वां शांगरी-ला डायलॉग ।
विवरण:
- इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) शांगरी-ला डायलॉग ( Shangri-La Dialogue ) एशिया का प्रमुख रक्षा शिखर सम्मेलन है।
- यह एक अनूठी बैठक है जहाँ मंत्री इस क्षेत्र की सबसे अधिक दबाव वाली सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हैं, महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताओं में शामिल होते हैं और एक साथ नए दृष्टिकोण के साथ सामने आते हैं।
- वर्ष 2023 का आयोजन 2-4 जून को सिंगापुर में हो रहा है।
इंडोनेशिया की शांति योजना:
- इंडोनेशिया ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करने की योजना का प्रस्ताव रखा हैं।
- इंडोनेशिया ने शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया और वर्तमान स्थितियों पर युद्धविराम, पर्यवेक्षकों और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना द्वारा गारंटीकृत असैन्यकृत क्षेत्र, और विवादित क्षेत्रों में एक असंगठित जनमत संग्रह का सुझाव दिया।
- हालाँकि, इस पहल को उपस्थित लोगों की तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा है।
- इंडोनेशिया, गुटनिरपेक्ष कूटनीति के लिए जाना जाता है, जिसने पहले शांति मध्यस्थता का प्रयास किया था।
- इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो ने कीव और मॉस्को की यात्रा की तथा 2022 में G20 की अध्यक्षता करते हुए देश के नेताओं से मुलाकात की।
अमेरिका-चीन संबंधों पर ऑस्ट्रेलिया:
- ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस ने अपने प्रधान भाषण में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन से उच्च-स्तरीय संचार चैनलों को फिर से शुरू करने तथा बिगड़ते संबंधों को गतिरोध की ओर बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय स्थापित करने का आग्रह किया।
- उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान जलडमरूमध्य या किसी अन्य संघर्ष के संभावित नतीजे प्रमुख शक्तियों से परे चले जाएँगे एवं इसके विनाशकारी वैश्विक परिणाम होंगे।
- इसलिए, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के नेताओं को आपसी संवाद को बढ़ावा देने और संघर्ष को रोकने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में संघर्ष की संभावना अटल नहीं है।
|
सारांश:
|
|---|
संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
LAC पर टकराव वाले बिंदु क्या हैं?
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतरराष्ट्रीय संबंध:
विषय:भारत और उसके पड़ोस
मुख्य परीक्षा: भारत-चीन संबंध
संदर्भ:
- पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तीन साल से गतिरोध बना हुआ है।
विवरण:
- पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तीन साल के गतिरोध के बाद भी, दोनों देश डिसइंगेजमेंट, डी-एस्केलेशन और यथास्थिति की बहाली से बहुत दूर हैं।
- गतिरोध को हल करने के लिए दोनों देश कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक स्तर की वार्ता में लगे हुए हैं।
डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया की स्थिति:
- कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता (2020 में) के बाद से, पांच टकराव बिंदुओं से डिसइंगेजमेंट किया गया है:
- 2020 में गलवान
- फरवरी 2021 में पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिण तट
- अगस्त 2021 में गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वाइंट (PP) 17
- सितंबर 2022 में PP15

स्रोत: The Print
- भारत का कहना है कि देपसांग मैदान और डेमचोक में दो अतिरिक्त टकराव बिंदु हैं। हालाँकि, चीन ने इसे 2020 के गतिरोध से पहले के विरासत के मुद्दों के रूप में करार देते हुए इसे खारिज कर दिया।
- भारत अप्रैल 2020 तक यथास्थिति बहाल करने और पारंपरिक गश्त बिंदुओं तक गश्त के अधिकारों को बहाल करने के अपने रुख पर कायम है।
- चीन इस बात पर कायम है कि वह गतिरोध से पहले की अपनी यथास्थिति को बहाल नहीं करेगा क्योंकि उसका मानना है कि “अप्रैल 2020 की यथास्थिति भारत द्वारा LAC को अवैध रूप से पार करके बनाई गई थी।”
- इसके अलावा, चीन 3488 किमी लंबी LAC पर बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है और नए हथियारों को शामिल कर रहा है।
- भारत चीनियों के स्तर के समरूप पहुँच के लिए बुनियादी ढांचा और क्षमता वृद्धि परियोजनाएं भी चला रहा है।
- इस प्रकार, यह परिदृश्य इस बात पर प्रकाश डालता है कि यथास्थिति को बहाल करने के लिए तनाव कम करने की कोई भी प्रक्रिया दूर की बात लगती है।
बफर जोन और उनकी स्थिति:
- डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के दौरान टकराव वाले बिंदुओं पर बफर जोन बनाए गए थे।
- बफर जोन का अर्थ है कि दोनों पक्ष किसी भी नई झड़प को रोकने के लिए समान दूरी पर पीछे हटेंगे।
- इसके अलावा, शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई गश्त नहीं की जाएगी।
- सभी पांच बिंदुओं पर बफर जोन मौजूद है।
- आपसी समझ का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए, भारत मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) और उपग्रहों द्वारा नियमित निगरानी करता है।
देपसांग मैदान और डेमचोक:
- डेमचोक
- यह एक विवादित क्षेत्र है और चीन ने चार्डिंग ला इलाके में टेंट लगा रखा है।
- दौलत बेग ओल्डी (DBO)
- यह महत्वपूर्ण सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) का एक हिस्सा है।
- वर्तमान में, इस हवाई क्षेत्र में 255 किलोमीटर लंबी दरबुक-श्योक-डीबीओ (DSDBO) सड़क से पहुंचा जा सकता है।
- यह एक प्राचीन व्यापार मार्ग था।
- सासेर ला पर एक वैकल्पिक आधार बनाने की योजना है।
- देपसांग मैदान
- यह सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) का एक और हिस्सा है।
- यह रणनीतिक साल्टोरो टीले और सियाचिन ग्लेशियर की ओर उन्मुख काराकोरम दर्रे के भी करीब है।
- विशेष रूप से, देपसांग में चीन की तरफ निर्माण कार्य DBO में मौजूद भारतीय पोस्ट के लिए खतरा है। यह चीनी सैनिकों को DSDBO रोड के और करीब लाता है।
- चीन भारतीय सेना के गश्ती दल को PP 10, 11, 11A, 12 और 13 तक जाने से रोक रहा है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना आखिरी बार जनवरी/फरवरी 2020 में देपसांग में पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर पहुंची थी।
- इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि देपसांग क्षेत्र में LAC तक की पेट्रोल की सीमा (LoP), जिस पर PP मौजूद हैं, से दूरी अधिकतम है।
- देपसांग में अतीत में कई टकराव की घटनाएँ देखी गई हैं।
- इसके अलावा, 2013 के बाद से सैनिकों की संख्या और गश्त की आवृत्ति बढ़ गई थी।
संबंधित लिंक
India – China Relations: Updates about the Recent Clashes at the LAC and other Events
|
सारांश:
|
|---|
भारत अपनी एनीमिया नीति पर पुनर्विचार क्यों कर रहा है?
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
स्वास्थ्य:
विषय: स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे।
प्रारंभिक परीक्षा: एनीमिया ।
मुख्य परीक्षा: भारत का एनीमिया बोझ और संबंधित नीति।
भूमिका:
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 6 जुलाई 2023 से शुरू होगा।
- एनीमिया से संबंधित प्रश्नों को सर्वेक्षण से हटा दिया जाएगा क्योंकि कई विशेषज्ञों ने इस्तेमाल की जा रही विधि की प्रभावकारिता को चुनौती दी है।
साथ ही, इसे भी पढ़िए: National Family Health Survey 5 – Facts about NFHS for UPSC
एनीमिया के बारे में विवरण:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एनीमिया को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित करता है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है।
- यह थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस की तकलीफ का कारण बनता है।
- एनीमिया कई कारकों के कारण होता है, जिनमें आयरन की कमी प्रमुख है।
- NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, भारत में एनीमिया का बोझ काफी अधिक है।
- यह पाया गया है कि 15-49 आयु वर्ग की 57% महिलाएं तथा 6 से 59 महीने के बीच के 67% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं।
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एनीमिया एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। इस प्रकार इसने अपने आकलन को भारत में नए आहार और बायोमार्कर सर्वेक्षण (DABS-I) में बदल दिया है।
- DABS-I को 2022 में आहार, पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति का खाका तैयार करने के लिए लॉन्च किया गया था।
- यह ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच बीमारी का सही अनुमान प्रदान करेगा।
सर्वेक्षण में नवीन परिवर्तन:
- शोधकर्ताओं का तर्क है कि भारत में एनीमिया का अति निदान किया जा रहा है क्योंकि हीमोग्लोबिन के लिए WHO कट-ऑफ का पालन किया जा रहा है। कटऑफ भारत के अनुकूल नहीं हो सकता है, क्योंकि यह उम्र, लिंग, शारीरिक स्थिति और ऊंचाई जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
- WHO के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित स्थितियों में से कोई एक स्थिति देखी जाती है तो वह एनीमिक है:
- यदि पांच साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए समुद्र तल पर हीमोग्लोबिन की मात्रा <110 g/L है।
- यह गैर-गर्भवती महिलाओं के लिए हीमोग्लोबिन सांद्रता <120 g/L है
- भारतीय शोधकर्ताओं ने NFHS में नमूने के लिए रक्त निकालने के तरीके में अंतर पर भी आपत्ति जताई है।
- सर्वेक्षण में इसे केशिका रक्त की एक बूंद जो उंगली की चुभन से प्राप्त किया जाता है, के माध्यम से मापा जाता है। हालाँकि, यह गलत मान दे सकता है।
- शिरापरक रक्त नमूनाकरण विधि का उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि यह अधिक सटीक मान देता है।
आहार सर्वेक्षण DABS-I:
- DABS-I एक व्यापक राष्ट्रीय स्तर का आहार सर्वेक्षण है।
- यह विभिन्न आयु समूहों का व्यक्तिगत आहार सेवन डेटा एकत्र करेगा तथा फिर भोजन और पोषक तत्वों की पर्याप्तता को परिभाषित करेगा।
- एनीमिया सर्वेक्षण का महत्व:
- सार्वजनिक स्वास्थ्य की निगरानी और नई नीतियों को तैयार करने के लिए एनीमिया डेटा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कमजोर वर्गों (गर्भवती महिलाओं और बच्चों) की रुग्णता और मृत्यु दर से संबंधित है।
- प्रजनन स्वास्थ्य की प्रगति की निगरानी करना भी महत्वपूर्ण है।
- आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया कार्य उत्पादकता को कम करता है तथा अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय विकास को बाधित करता है।
- यह साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और लक्षित हस्तक्षेपों में मदद करेगा।
संबंधित तथ्य:
Anaemia Mukt Bharat (AMB) – A MoHFW Initiative [UPSC Notes]
|
सारांश:
|
|---|
प्रीलिम्स तथ्य:
1. फौकॉल्ट पेंडुलम:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
भूगोल:
विषय: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ।
प्रारंभिक परीक्षा: पृथ्वी का घूर्णन; कोरिओलिस बल।
संदर्भ:
- नए संसद भवन में फौकॉल्ट पेंडुलम।
भूमिका:
- कोलकाता में नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (NCSM) ने हाल ही में उद्घाटन किए गए संसद भवन, विशेष रूप से संवैधानिक गैलरी क्षेत्र में फौकॉल्ट पेंडुलम को डिजाइन और स्थापित किया।
- फौकॉल्ट पेंडुलम एक उपकरण है जो पृथ्वी के घूर्णन को प्रदर्शित करता है। इसमें एक लंबा, भारी पेंडुलम होता है जो एक निश्चित तल में आगे और पीछे झूलता है।
- समय के साथ, पृथ्वी के घूर्णन के कारण, दोलन का तल घूमता हुआ प्रतीत होता है, जो पृथ्वी के घूर्णन का प्रमाण प्रदान करता है।
- 19वीं शताब्दी के एक फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी जीन बर्नार्ड लियोन फौकॉल्ट ने खराद पर धातु की छड़ के साथ काम करते समय गलती से पेंडुलम का आविष्कार किया था। जब उसने छड़ को खींचा, तो उसका एक सिरा उसी तल में कंपन किया, जबकि दूसरा सिरा, खराद से जुड़ा हुआ, घूर्णन अवस्था में था।
- फौकॉल्ट के शोध से पता चला कि निचले अक्षांशों की तुलना में ध्रुवों पर पेंडुलम का उपयोग करके पृथ्वी के घूर्णन का अवलोकन करना आसान है।
- ध्रुवों पर, पेंडुलम का तल लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है, जो पृथ्वी के घूमने की अवधि के अनुरूप है।
- इसके विपरीत, भूमध्य रेखा पर, व्यापक केंद्रीय क्षेत्र में पृथ्वी के तेजी से घूमने के कारण पेंडुलम बिल्कुल भी नहीं घूमता है।
- पेंडुलम अपने बॉब (गोले) की गति से निश्चित एक तल में झूलता है। जैसे ही पृथ्वी घूर्णन करती है, तो पेंडुलम का तल धीरे-धीरे घूमता हुआ प्रतीत होता है। हालाँकि, यह वास्तव में पृथ्वी ही है जो घूर्णन कर रही होती है, पेंडुलम नहीं।
- यह सापेक्ष गति कोरिओलिस प्रभाव (Coriolis effect) को स्पष्ट करती है।
- कोरिओलिस बल एक ऐसी परिघटना है जो पृथ्वी की तरह एक घूर्णन संदर्भ फ्रेम में गतिमान वस्तुओं पर कार्य करती प्रतीत होती है।
अनुप्रयोग:
- फौकॉल्ट पेंडुलम के मुख्य अनुप्रयोगों में से एक शैक्षिक प्रतिष्ठानों और विज्ञान संग्रहालयों में है। यह पृथ्वी के घूर्णन की अवधारणा और विभिन्न घटनाओं पर इसके प्रभाव को समझाने में मदद करने के लिए एक दृश्य और संवादात्मक साधन के रूप में कार्य करता है।
- फौकॉल्ट पेंडुलम का उपयोग किसी स्थान के अक्षांश को सटीक रूप से निर्धारित करने के लिए किया जाता रहा है। पेंडुलम के घूमने की दर को मापकर, उस स्थान के अक्षांश की गणना की जा सकती है जहां पेंडुलम स्थित होता है।
- फौकॉल्ट पेंडुलम का एक अन्य अनुप्रयोग सटीक टाइमकीपिंग में है। पेंडुलम का झूलना पृथ्वी के घूर्णन से प्रभावित होता है, और पेंडुलम की अवधि को मापकर, समय को सटीक रूप से मापा जा सकता है।
- इसे वायुमंडलीय विज्ञान, भूभौतिकी और खगोल विज्ञान से संबंधित प्रयोगों में नियोजित किया गया है।
- इसने कला और वास्तुकला की दुनिया में भी अपना मार्ग प्रशस्त किया है। इसे नेत्रहीन मनोरम और विचारोत्तेजक अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठानों और प्रदर्शनों में शामिल किया गया है।
- इसका उपयोग कुछ खगोलीय वेधशालाओं में कुछ उपकरणों की सटीकता को जांचने और सत्यापित करने के लिए किया गया है। इसकी सटीक और पूर्वानुमेय गति माप और समायोजन के लिए एक संदर्भ के रूप में कार्य करती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1.इंडस-एक्स और आईसीईटी ( INDUS-X & iCET):
- अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन ने कहा कि महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पर अमेरिका-भारत पहल (iCET) महत्वपूर्ण रक्षा प्लेटफार्मों के संयुक्त विकास के लिए अभिनव दृष्टिकोण की जांच-पड़ताल को सक्षम बनाता है।
- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की आगामी यात्रा से पहले सह-विकास और सह-उत्पादन परियोजनाओं पर चर्चा करने के लिए ऑस्टिन भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ नई दिल्ली में बैठक के लिए तैयार हैं।
- ऑस्टिन ने चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) के माध्यम से विशेष रूप से समुद्री सहयोग, मानवीय सहायता और आपदा राहत में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला हैं।
- ऑस्टिन ने रक्षा समकक्षों के साथ बैठक से इनकार करने के लिए भी चीन की आलोचना की और बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया हैं।
- इंडस-एक्स और आईसीईटी ( INDUS-X & iCET) पर अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: INDUS-X & iCET
2. G-20 वैश्विक टीका अनुसंधान सहयोग:
- भारत सरकार ग्लोबल वैक्सीन रिसर्च कोलैबोरेटिव (वैश्विक टीका अनुसंधान सहयोग) स्थापित करने के लिए G-20 सदस्य देशों और अन्य लोगों के बीच आम सहमति बनाने और बढ़ावा देने के लिए वैश्विक गैर-लाभकारी संगठनों के साथ सहयोग कर रही है।
- G-20 मंच को सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, दवा कंपनियों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग के एक महत्वपूर्ण सूत्रधार के रूप में देखा जाता है।
- ग्लोबल वैक्सीन रिसर्च कोलैबोरेटिव का उद्देश्य इस अंतर को पाटना है और दुनिया भर में टीकों की समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
- इसके अतिरिक्त, यह संसाधनों का अनुकूलन करना और प्रयासों के दोहराव को रोकना चाहता है।
- पहल मुख्य रूप से अगले महामारी की घटना से पहले टीका अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण अंतराल को संबोधित करने पर केंद्रित होगी।
- इसके उद्देश्यों में बेहतर तैयारी के लिए एक रूपरेखा और सिद्धांत स्थापित करना, समन्वय में सुधार के लिए तंत्र बनाना और वैक्सीन अनुसंधान और विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देना शामिल है।
- भारत अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करने के लिए वैक्सीन निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करके और नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके घरेलू बाजार में टीकों की उचित पहुंच को बढ़ावा दे रहा है।
- इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसी मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं।
3.बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा पर केंद्र:
- जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) को भारत में बांधों की भूकंप सुरक्षा के उद्घाटन के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में नामित किया गया है।
- इस केंद्र का उद्देश्य बांधों की संरचनात्मक अखंडता और भूकंप सुरक्षा के संबंध में प्रौद्योगिकी संबंधी चिंताओं को दूर करने में देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।
- सुरक्षा मानकों को स्थापित करने और परिष्कृत करने के उद्देश्य से केंद्र विशिष्ट बांधों का एक पायलट अध्ययन शुरू करेगा।
- इसके अतिरिक्त, यह केंद्रीय जल आयोग के नियमावली की समीक्षा करेगा, जिससे क्षेत्र में वर्तमान प्रथाओं और ज्ञान के साथ उनका संरेखण सुनिश्चित होगा।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) एक ऐसी दवा है जिसमें एक खुराक के रूप में दो या दो से अधिक सक्रिय घटक शामिल होते हैं।
- FDC एकल घटक (ingredient) दवाओं की तुलना में कम किफायती होते हैं।
- दवा की गुणवत्ता के संबंध में किसी भी विवाद के मामले में, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) अपीलीय प्राधिकरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कितना/कितने सही है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) एक ऐसी दवा को संदर्भित करता है जिसमें एक खुराक के रूप में निश्चित अनुपात में दो या दो से अधिक सक्रिय फ़ार्मास्युटिकल सामग्री (API) होती हैं।
- इन संयोजनों को सुविधाजनक और सरल तरीके से कई दवाओं के चिकित्सीय लाभ प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
- कथन 2 गलत है: एकल घटक दवाओं की तुलना में FDC अधिक किफायती हैं।
- कथन 3 सही है: यदि दवा की गुणवत्ता के संबंध में कोई विवाद होता है तो DCGI का कार्यालय एक अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है। DCGI रक्त और रक्त उत्पादों, IV तरल पदार्थ, टीके और सेरा जैसी दवाओं की निर्दिष्ट श्रेणियों के लाइसेंस के अनुमोदन के लिए भी उत्तरदायी है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिएः (स्तर-कठिन)
जलडमरूमध्य संस्पर्शी भूभाग
- फॉर्मोसा जलडमरूमध्य चीन और ताइवान
- युकाटन जलडमरूमध्य मेक्सिको और क्यूबा
- मेसिना जलडमरूमध्य इटली और अल्बानिया
- होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान
उपरोक्त युग्मों में से कितना/कितने सुमेलित है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) केवल तीन
(d) सभी चार
उत्तर: c
व्याख्या:
- मेसिना जलडमरूमध्य सिसिली के पूर्वी सिरे और दक्षिणी इटली के बीच एक संकीर्ण जलडमरूमध्य है।
- दुनिया के प्रमुख जलडमरूमध्य के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:Major Straits of the world
प्रश्न 3. पिग्मी हॉग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)
- यह दुनिया में सुअर की सबसे छोटी प्रजाति है।
- पिग्मी हॉग केवल हिमालय की तलहटी में गीले ऊंचे घास के मैदानों में पाए जाते हैं।
- यह IUCN की लाल सूची में गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कितना/कितने गलत है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: a
व्याख्या:
- पिग्मी हॉग (Pygmy Hog) को IUCN लाल सूची में ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- यह एक प्रकार का इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) है।
- यह पाचन तंत्र में ऊतकों की सूजन का कारण बनता है।
- इस बीमारी का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, लेकिन उपचार इसके संकेतों और लक्षणों को बहुत कम कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में निम्नलिखित में से किसका सर्वोत्तम वर्णन है ?
(a) अल्काप्टोनुरिया
(b) चगास रोग
(c) क्रोहन रोग
(d) व्हिपल रोग
उत्तर: c
व्याख्या:
- क्रोहन रोग एक पुरानी सूजन आंत्र रोग (IBD) है जो मुख्य रूप से जठरांत्र संबंधी मार्ग को प्रभावित करता है।
- यह पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से में सूजन और अल्सर का कारण बनता है, आमतौर पर छोटी आंत में और बड़ी आंत (कोलन) की शुरुआत में।
- क्रोहन रोग के सामान्य लक्षणों में पेट में दर्द, दस्त, थकान, वजन घटना, बुखार और मलाशय से खून बहना शामिल है।
- हालाँकि क्रोहन रोग का सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन यह माना जाता है कि यह आनुवंशिक, पर्यावरण और प्रतिरक्षा प्रणाली कारकों के संयोजन का परिणाम है।
- इसके साक्ष्य से यह ज्ञात होता है कि एक असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पाचन तंत्र में पुरानी सूजन को ट्रिगर करती है, जिससे विशिष्ट लक्षण देखने को मिलते हैं।
- क्रोहन रोग विभिन्न जटिलताओं को जन्म दे सकता है, जैसे कि सख्त (आंतों का संकुचित होना), फिस्टुलस, फोड़े, कुपोषण और आंत्र रुकावट।
- इसके अतिरिक्त, कुछ व्यक्तियों को अतिरिक्त आंतों की अभिव्यक्तियों का अनुभव हो सकता है, जिसमें जोड़ों का दर्द, त्वचा विकार, आंखों की सूजन और यकृत की स्थिति शामिल है।
- हालाँकि क्रोहन रोग का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को सीमित करने और सूजन को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
प्रश्न 5. बलुई और लवणीय क्षेत्र एक भारतीय पशु जाति का प्राकृतिक आवास है। उस क्षेत्र में उस पशु के कोई परभक्षी नहीं हैं किंतु आवास ध्वंस होने के कारण उसका अस्तित्व खतरे में है। यह पशु निम्नलिखित में कौन-सा हो सकता है? (PYQ-CSE-2011) (स्तर-मध्यम)
(a) भारतीय वन्य भैंस
(b) भारतीय वन्य गधा
(c) भारतीय वन्य शूकर
(d) भारतीय गजेल (कुरंग)
उत्तर: b
व्याख्या:
- भारतीय वन्य गधा, जिसे खुर या घुड़खर के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्क घास के मैदानों और रेगिस्तानी मैदानों में पाए जाने वाले जंगली गधे (खुर वाले स्तनधारी) की एक अनूठी और लुप्तप्राय प्रजाति है।
- उनका प्राकृतिक आवास कच्छ, गुजरात, भारत के छोटे रण में जंगली गधा अभयारण्य है।
- वे कठोर रेगिस्तानी वातावरण के अनुकूल हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा भारतीय जंगली गधे को एक लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- निवास के नुकसान, विखंडन, अवैध शिकार और संसाधनों के लिए पशुओं के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण इन जंगली गधों की आबादी लगातार घट रही है।
- इनकी संख्या को बचाने और बढ़ाने के लिए संरक्षण के प्रयास चल रहे हैं।
- भारतीय वन्य गधा (Indian Wild Ass) पर अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Indian Wild Ass
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. ऐसा प्रतीत होता है कि भारत-चीन सीमा के बीच गतिरोध से पीछे हटने और तनाव कम करने को लेकर गतिरोध उत्पन्न हो गया है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) (जीएस II-अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न 2. एनीमिया के कारणों और प्रभावों पर चर्चा कीजिए। देश में एनीमिया के बोझ का अनुमान लगाने के लिए भारत एक नई पद्धति को क्यों अपना रहा है? (250 शब्द, 15 अंक) (जीएस II -स्वास्थ्य)