UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 06 May, 2022 UPSC CNA in Hindi

06 मई 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

बुनियादी ढांचा:

  1. स्पाइसजेट में ‘दुर्घटना’:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

सामाजिक न्याय:

  1. एक लीक हुआ ड्राफ्ट, गर्भावस्था की समाप्ति के अधिकार और राजनीति:

शिक्षा:

  1. स्कूल ड्रेस निशाने पर है:

शासन:

  1. क्या खेल और राजनीति को अलग करना संभव है?

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize):

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. मोदी की फ्रांस यात्रा मजबूत दोस्ती और सद्भावना का प्रतीक:
  2. केंद्र ने जोग फॉल्स परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाया:
  3. युद्ध से प्रेरित मुद्रास्फीति में वृद्धि ने RBI को मजबूर किया:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

बुनियादी ढांचा:

स्पाइसजेट में ‘दुर्घटना’

विषय: बुनियादी ढांचा: हवाई अड्डे

प्रारंभिक परीक्षा: झटका/विक्षोभ (Turbulences) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB)।

मुख्य परीक्षा: भारतीय विमानन क्षेत्र में दुर्घटना प्रबंधन और सुरक्षा में सुधार हेतु प्रमुख सिफारिशें।

प्रसंग:

  • स्पाइसजेट कम्पनी का एक बोइंग विमान जो मुंबई से अंडाल (पश्चिम बंगाल) के लिए जा रहा था, में भयंकर झटकों/विक्षोभ का अनुभव किया गया।

विवरण:

  • इस विमान में सौ से अधिक यात्री सवार थे और उसमे लग रहे झटकों के कारण सवार कई यात्रियों के सिर, कंधे, रीढ़ की हड्डी, माथे और चेहरे पर चोटें आईं।
  • इस दौरान विमान का केबिन भी क्षतिग्रस्त हो गया।
  • इस संकट की घडी में फ्लाइट के क्रू ने विमान का मैन्युअल नियंत्रण (ऑटोपायलट मोड से) में लिया और विमान की सुरक्षित लैंडिंग करवाई।
  • नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस घटना को “दुर्घटना” के रूप में वर्गीकृत किया है।

झटके/विक्षोभ (Turbulences) के प्रकार:

  • संवहनी विक्षोभ – यह बादल संवहन के कारण होता है।
  • यांत्रिक विक्षोभ: हवा और जमीन के बीच घर्षण के कारण इसे निम्न-स्तरीय झटका/विक्षोभ भी कहा जाता है,यह विशेष रूप से उबड़-खाबड़ इलाके और मानव निर्मित बाधाओं के कारण होता हैं।
  • भौगोलिक विक्षोभ – पहाड़ों जैसे ऊंचे इलाके के कारण होता है।
  • साफ हवा में लगने वाले झटके/विक्षोभ – इन झटकों का कारण 20,000 से 49,000 फीट की ऊंचाई के बीच बादल रहित हवा में होने वाली अनिश्चित वायु धाराएं है।
  • निम्न-स्तरीय जेट धाराओं के कारण लगने वाले झटके।
  • अन्य विमानों की वेक टर्बुलेंस के कारण लगने वाले झटके।

हवाई जहाजों के संचालन पर नॉरवेस्टर्स (कलबैसाखी-(Norwesters)) का प्रभाव:

  • नॉरवेस्टर्स को “कलबैसाखी” भी कहा जाता है, जो असम और बंगाल में अप्रैल तथा मई के दौरान शाम के समय आने वाला तूफान है।
  • नॉरवेस्टर्स विनाशकारी तूफान हैं और दुर्बल डाउनड्राफ्ट कोष्ठिका (वायु का एक नीचे की ओर प्रवाह) स्वयं को नए तूफान कोष्ठिका (वायु राशि) के रूप में पुन: उत्पन्न करती हैं।
  • नॉरवेस्टर्स के करीब से उड़ान के दौरान विमान उड़ने की गति बाधित (एक तरह से स्थिर हो जाती है) हो सकती है और उसकी ऊंचाई में कमी आ सकती है। विमान को ओलावृष्टि से भी खतरा रहता है।
  • यदि विमान हवा मार्ग के अनुदिश उड़ान भर रहा होता है, तो विमान के तूफान कोष्ठिका के केंद्र में फंसने का अधिक खतरा होता है जिससे उसे गंभीर क्षति और विक्षोम (turbulence) का सामना करना पड़ता है।

विमान में “दुर्घटना” को परिभाषित करने वाली परिस्थितियां:

  • एक मानवयुक्त विमान के मामले में, दुर्घटना को किसी व्यक्ति के उड़ान के इरादे से विमान में सवार होने और उतरने के बीच के समय होने वाली अप्रिय घटना के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • एक मानव रहित विमान के मामले में, दुर्घटना को विमान के उड़ान भरने और उड़ान के उपरांत बंद (प्राथमिक प्रणोदन प्रणाली के बंद होने तक) हो जाने के बीच के समय होने वाली अप्रिय घटना के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें विमान में होने, या विमान के किसी भी हिस्से के सीधे संपर्क या जेट विस्फोट के सीधे संपर्क में आने के परिणामस्वरूप एक व्यक्ति घातक या गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
  • यदि विमान क्षतिग्रस्त या संरचनात्मक रूप से विफल हो जाता है जो विमान की संरचनात्मक क्षमता, प्रदर्शन या उड़ान विशेषताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, या विमान के लापता होने या पूरी तरह से दुर्गम (inaccessible) होने पर प्रभावित घटक की बड़े पैमाने पर मरम्मत या प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB):

  • भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) भारतीय हवाई क्षेत्र में होने वाले विमान संचालन में “सुरक्षा घटनाओं के वर्गीकरण” के लिए एक जिम्मेदार निकाय है,जो इस प्रकार की घटनाओं का वर्गीकरण ‘दुर्घटनाओं’, ‘गंभीर घटनाओं’ और ‘घटनाओं’ के रूप में करता है।
  • AAIB नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तत्वावधान में कार्य करता है।
  • AAIB किसी भी ऐसे विमान की ‘दुर्घटना’ या ‘गंभीर घटना’ की जांच करता है जिसमे 2,250 किलोग्राम से अधिक के “कुल वजन” (यात्रियों, कार्गो और ईंधन वाले विमान का कुल वजन) वाले विमान शामिल होते हैं।

कार्य:

  • प्रारंभिक जांच की जा रही हैं।
  • जांच समिति की स्थापना में और औपचारिक जांच शरू करने में सरकार की सहायता करना।
  • सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई तकनीक को शामिल करने के साधनों सहित विभिन्न सुरक्षा अध्ययनों के आधार पर सुरक्षा सिफारिशें करना।
  • सूचना के प्रभावी विश्लेषण की सुविधा के लिए दुर्घटना और घटना डेटाबेस की स्थापना और रखरखाव करना।

विमान में झटके/ विक्षोभ की घटना को रोकने के लिए प्रमुख सिफारिशें:

  • कई एयरलाइनों की अपनी मौसम पूर्वानुमान टीम होने के बावजूद, उन्हें अपने संचालन के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की मौसम सेवाओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • विशेषज्ञों ने विमान में लगने वाले इन झटकों के लिए एक गाइड के रूप में कुल वायु तापमान (Total Air Temperature (TAT)) के महत्व पर प्रकाश डाला है।
  • उड़ान के दौरान और विमान के ऊपर उठने और नीचे आने के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान चालक दल द्वारा TAT की निगरानी आवश्यक है।
  • TAT के बारे में और अधिक उड्डयन जागरूकता होनी चाहिए जिसकी कमी हाल के वर्षों में देखी जा रही है।
  • विमान में लगने वाले झटकों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और स्थितिजन्य जागरूकता प्रणाली को बढ़ाना होगा।
  • अधिक उन्नत मौसम रडार प्रणालियों को अपनाना होगा जिसमें 3डी चित्रीकरण जैसी नए युग की विशेषताएं निहित हों।
सारांश:

  • विमान में यात्रा के दौरान लगने वाले झटकों की घटनाएं जो न केवल गंभीर शारीरिक चोटों का कारण बनती हैं बल्कि यात्रियों के मानसिक स्वास्थ को भी प्रभावित करती हैं, ऐसी घटनाओं को उचित कार्य योजना,मौसम संबंधी बेहतर ज्ञान और विमान के रडार सिस्टम में प्रगति के माध्यम से टाला जा सकता है।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सामाजिक न्याय:

एक लीक हुआ ड्राफ्ट, गर्भावस्था की समाप्ति के अधिकार और राजनीति:

विषय: अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मुख्य परीक्षा: रो बनाम वेड मामले के फैसले का महत्व और फैसले को पलटने के निहितार्थ।

संदर्भ

गर्भपात कानून पर संयुक्त राज्य सर्वोच्च न्यायालय की राय का एक मसौदा लीक हो गया था।

विवरण

  • लीक हुए मसौदे से पता चलता है कि अधिकांश न्यायाधीशों ने अमेरिका में गर्भपात को वैध बनाने वाले 1973 के रो बनाम वेड मामले में अदालत के फैसले को खारिज करना स्वीकार कर लिया है।
  • इससे अमेरिका में जनता और मीडिया वर्ग ने भारी कोलाहल मच गया है।

रो बनाम वेड मामला, 1973

  • रो बनाम वेड मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ने अमेरिका में गर्भपात को एक संवैधानिक अधिकार बना दिया और यह वर्तमान में देश में कानून के रूप में बना हुआ है।
  • अदालत ने कई राज्यों में गर्भपात को अवैध बनाने वाले कानूनों को खारिज कर दिया, और कहा कि गर्भपात को भ्रूण की जीवन क्षमता की स्थिति (जिस समय के बाद एक भ्रूण गर्भ के बाहर जीवित रह सकता है) तक अनुमति दी जाएगी।
    • रो फैसले के समय, भ्रूण की जीवन क्षमता लगभग 28 सप्ताह थी।

रो फैसले का महत्व

  • निर्णय ने अमेरिकी संविधान में “निजता के अधिकार” को बरकरार रखा, (जिसे न्यायाधीशों ने बहुमत से बरकरार रखा) जिसका राज्य के कानूनों द्वारा उल्लंघन किया गया था, जो एक महिला के गर्भ के बाहर भ्रूण की जीवन क्षमता स्थिति तक पहुँचने से पहले गर्भपात कराने के अधिकार को प्रतिबंधित करते थे।
  • निर्णय ने अमेरिकी संविधान में निहित “जीवन के अधिकार” और “व्यक्तिगत स्वतंत्रता” की अवधारणाओं को भी बरकरार रखा।
  • यह निर्णय इस बात को निर्धारित करने वाला पहला निर्णय था कि राज्य द्वारा गर्भपात के अपराधीकरण से व्यथित होने वाला पक्ष एक महिला के चिकित्सक के बजाय महिला स्वयं हो सकती है।

रो फैसले को उलटने का प्रभाव

  • यदि सर्वोच्च न्यायालय रो मामले के फैसले को पलटने का नियम बनाता है, तो गर्भपात पर निर्णय लेने की शक्ति प्रत्येक राज्य के निर्वाचित नेताओं के पास होगी।
    • चूंकि अमेरिका में गर्भपात के अधिकार की रक्षा करने वाला कोई संघीय कानून नहीं है, इसलिए रो मामले के निर्णय को उलटने से गर्भपात कानून पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर हो जाएगा।
  • वर्तमान में, 50 राज्यों में से लगभग 21 राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून हैं जो रो मामले के निर्णय को उलटने पर तुरंत गर्भपात पर प्रतिबंध लगा देंगे।
    • इसके अलावा यदि रो मामले के निर्णय को उलट दिया जाता है तो, 5 अन्य राज्यों में भी गर्भपात पर प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका है।
  • अपने राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध के कारण, महिलाएं गर्भपात कराने के लिए राज्य से बाहर जा सकती हैं और अवैध गोलियों का भी उपयोग कर सकती हैं क्योंकि प्रतिबंध उनके स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करने वाले सुरक्षित गर्भपात तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करता है।
  • रो मामले के निर्णय को उलटने से देश में कानूनी गर्भपात की संख्या में कम से कम 14% की कमी आएगी।
  • गर्भपात के संवैधानिक अधिकार का समापन देश भर में ज्यादातर निम्न आय वाले लोगों, अश्वेतों और ग्रामीण समुदायों को प्रभावित करता है।
  • विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कानूनी समर्थन के बिना क्लीनिकों की उपलब्धता और बीमा भुगतान भी प्रभावित होंगे जो महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुद्दे का राजनीतिक दृष्टिकोण

  • नौ न्यायाधीशों में से छह को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों द्वारा नियुक्त किया गया है और उनमें से पांच ने रो मामले के निर्णय को उलटने पर सहमति व्यक्त की है।
  • डेमोक्रेट्स ने इस कदम की कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह न केवल महिलाओं पर बल्कि सभी अमेरिकियों के अधिकारों पर पिछले 50 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध होगा और आधुनिक इतिहास के सबसे खराब और सबसे हानिकारक निर्णयों में से एक के रूप में जाना जाएगा।
  • राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर 2022 में होने वाले मध्यावधि चुनाव के कारण यह मुद्दा राजनीतिक हो गया है।

भारत में गर्भपात की वैधता

  • भारत का ‘गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971’ ने गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति देता है। 2021 में पारित एक संशोधन अधिनियम के माध्यम से, विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए गर्भपात की समय सीमा को बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया है।
  • अधिनियम के बारे में अधिक पढ़ने के लिए, लिंक देखें – Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Act 2021

सारांश:

  • रो मामले के निर्णय को उलटने के लिए संयुक्त राज्य सर्वोच्च न्यायालय के ‘निर्णय’ के लीक हुए मसौदे ने उदारवादियों (डेमोक्रेट) जो वर्तमान गर्भपात कानूनों का समर्थन करते हैं और रूढ़िवादियों (रिपब्लिकन) जो गर्भपात के खिलाफ हैं के बीच एक सामाजिक और वैचारिक तनाव उत्पन्न कर दिया है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शिक्षा:

स्कूल ड्रेस निशाने पर है:

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

मुख्य परीक्षा: स्कूलों में अनिवार्य यूनिफार्म लागू करने के कदम का आलोचनात्मक विश्लेषण।

संदर्भ

इस लेख में यूनिफार्म के दिशा-निर्देशों पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक तर्क दिया गया है।

पृष्ठभूमि

इस मुद्दे की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी के लिए निम्नलिखित लेख देखें:

UPSC Exam Comprehensive News Analysis of 16th Mar 2022

यूनिफार्म बनाम ड्रेस कोड

  • यूनिफार्म ड्रेस कोड से अलग होती है।
  • एक ड्रेस कोड बच्चों और उनके माता-पिता को ऐसे कपड़ों का उपयोग करने से रोकता है जो हैसियत या दौलत का प्रदर्शन करती हो।
  • ड्रेस कोड की तुलना में यूनिफार्म अधिक निर्देशात्मक होती है क्योंकि यह न केवल रंग बल्कि सामग्री और डिजाइन को भी निर्धारित करती है।

स्कूलों में यूनिफॉर्म के अनिवार्य प्रकार के खिलाफ तर्क

  • यूनिफार्म का इतिहास
    • औपनिवेशिक शासन के दौरान विकसित हुई शिक्षा प्रणाली आमतौर पर स्कूल की यूनिफार्म के सख्त प्रवर्तन को निर्धारित करती है।
    • स्कूल यूनिफॉर्म का विचार शहरीकरण, समृद्धि और निजीकरण के साथ फैल गया है क्योंकि आजादी के शुरुआती वर्षों में गांवों और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में यूनिफार्म के लिए अनिवार्य नियम नहीं थे।
    • निजी स्कूलों की संख्या में वृद्धि के साथ दैनिक यूनिफार्म अनिवार्य हो गई और यूनिफार्म व्यवसाय ने स्थानीय एकाधिकार को प्रोत्साहित किया क्योंकि कई स्कूलों ने माता-पिता को एक विशेष स्रोत से यूनिफार्म ख़रीदने के लिए कहा।
  • शिक्षाविदों की स्वायत्तता को सीमित करना
    • आलोचकों का मानना है कि स्कूल की यूनिफार्म एक शिक्षा प्रणाली में प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की पहले से ही समाप्त स्वायत्तता को सीमित करने का एक साधन बन गई है।
    • उदाहरण: यूनिफार्म के लिए दिशा-निर्देशों पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के परिणामस्वरूप एक पूर्ण समान संहिता बन गई है जो अब राज्य के केंद्रीय विद्यालयों तक विस्तारित है जो वास्तव में किसी भी प्रांतीय सरकार द्वारा शासित नहीं हैं।
    • कर्नाटक ने कोठारी आयोग की सिफारिशों को भी लागू नहीं किया है, जो शिक्षा में प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करेगा और नियम स्थापित करने में स्कूल के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगा।
  • राजनीतिक उपकरण
    • आलोचक यह भी बताते हैं कि चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए स्कूल की यूनिफार्म एक राजनीतिक उपकरण के रूप में विकसित हुई है।
  • विविधता के महत्व को कम करता है
    • माना जाता है कि शिक्षा, हालांकि, सार्वजनिक बहस के दायरे का विस्तार करके और सभी की भागीदारी को सक्षम करके, समाज के सभी स्तरों और वर्गों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देती है।
    • श्री अरबिंदो प्रकृति में विविधता की तुलना यह समझाने के लिए करते हैं कि एकरूपता आकर्षक क्यों है लेकिन यह एकता की भावना पैदा नहीं करती है।

सारांश:

  • स्कूल यूनिफॉर्म निर्धारित या लागू करने वाली नीतियों पर फिर से विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उभर रहा है जो शिक्षाविदों की स्वायत्तता को भी कम करता है। इसके बजाय, शिक्षण को कम रूढ़िबद्ध, अधिक जीवंत और बाल-केंद्रित बनाने वाली नीतियों का अनुसरण करना होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शासन:

क्या खेल और राजनीति को अलग करना संभव है?

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मुख्य परीक्षा: राजनीति और खेल के बीच अंतर्संबंध का विश्लेषण और भावी कदम।

संदर्भ:

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के मद्देनजर, विंबलडन ने रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को इसके 2022 संस्करण में भाग लेने से रोक दिया।

विवरण

  • विंबलडन के अलावा, फुटबॉल, ट्रैक एंड फील्ड और फॉर्मूला वन जैसे कई अन्य खेल संगठनों ने भी विभिन्न प्रतिबंध लगाए हैं।
  • इस मुद्दे ने खेल पर राजनीति के प्रभाव पर बहस को सुर्खियों में ला दिया है।

खेलों पर राजनीति का प्रभाव

  • राजनीति खेलों पर अपना प्रभाव बढ़ाती है क्योंकि खेल एक ऐसे समाज के भीतर होता है जो लगातार राजनीति से प्रभावित होता है।
  • व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे देश के कानून का समर्थन करें और उसका पालन करें और चूंकि खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उन्हें सरकार के निर्णयों का पालन करना चाहिए।
  • चूंकि सरकारें आवश्यक धन उपलब्ध कराकर खेलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए सरकारें खेलों पर अधिक प्रभाव डालती हैं।
  • खेलों को देशों और उनकी सरकारों के लिए अपनी सॉफ्ट पावर बढ़ाने के उपाय के रूप में भी देखा जाता है और इसलिए खेल में राजनीतिक भागीदारी का इतिहास है।
  • दुनिया भर में सरकार द्वारा ऐतिहासिक रूप से खेलों का इस्तेमाल अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए किया जाता रहा है, जैसे: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद शासन के मामले में और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने के लिए घुटने टेकने और मुट्ठी उठाने की मुद्रा के मामले में।
  • कई देशों में खेल संस्थाएं सरकार के दायरे में आती हैं।

भावी कदम

  • खेलों में राजनीति की भागीदारी को सीमित करने की आवश्यकता है क्योंकि खेल राजनीति से प्रभावित होते हैं जब सरकारें मनमाने निर्णय लेने में शामिल होती हैं।
  • सरकारों को खेलों पर अपने प्राधिकार नहीं थोपने चाहिए और खेलों पर अपना प्रभाव सीमित करना चाहिए क्योंकि ज्यादातर समय खेलों के आयोजनों के लिए केवल अनुमति के अलावा और किसी और चीज की आवश्यकता नहीं होती।
  • खेलों को लोगों को एकजुट करने के माध्यम के रूप में जाना जाता है और सरकारों को यह तय करने से बचना चाहिए कि कुछ खिलाड़ियों या कुछ देशों को बिना किसी महत्वपूर्ण कारण के खेलों से बाहर कर दिया जाए क्योंकि यह खेल आयोजनों के मूल उद्देश्य को नष्ट कर देता है।

सारांश:

  • खेल और राजनीति हमेशा मिश्रित रहे हैं और परंपरागत रूप से राजनीति ने खेलों पर अधिक प्रभाव डाला है, लेकिन दुनिया भर की सरकारों को अपने प्रभाव का इस्तेमाल खेलों में हेरफेर करने और खिलाड़ियों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं करना चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize):

कृषि;

विषय: खाद्य सुरक्षा।

प्रारंभिक परीक्षा: विश्व खाद्य पुरस्कार।

प्रसंग:

  • नासा के एक जलवायु अनुसंधान वैज्ञानिक सिंथिया रोसेनज़्वेग (Cynthia Rosenzweig)ने इस तथ्य को समझाया हैं कि कैसे वैश्विक खाद्य उत्पादन को बदलती जलवायु के अनुकूल होना चाहिए, जिसके लिए उन्हें विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया हैं।

विश्व खाद्य पुरस्कार:

  • यह पुरस्कार 1987 से आयोवा (यू.एस.ए.) में प्रतिवर्ष प्रस्तुत किया जाता है।
  • इस पुरस्कार के विजेताओं को एक डिप्लोमा, शाऊल बास द्वारा डिजाइन की गई स्मारक के रूप में एक मूर्ति और $ 250,000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार उन व्यक्तियों की उपलब्धियों को मान्यता देता है जिन्होंने दुनिया में भोजन की गुणवत्ता, मात्रा या उपलब्धता में सुधार करके मानव विकास को उन्नत किया है।
  • यह पुरस्कार विश्व खाद्य आपूर्ति में शामिल किसी भी क्षेत्र में योगदान हेतु दिया जाता है जिसमें पौधे, पशु और मृदा विज्ञान; खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पोषण; ग्रामीण विकास; विपणन; आदि शामिल हैं।
  • इस पुरस्कार को खाद्य और कृषि के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान के रूप में जाना जाता है।
  • यह पुरस्कार विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • भारत की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत के एम. एस. स्वामीनाथन को 1987 में पहला विश्व खाद्य पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • पुरस्कार जीतने वाले अन्य भारतीयों में वर्गीज कुरियन (1989), गुरदेव खुश (1996), बी.आर. बरवाले (1998), सुरिंदर वासल (2000) और मोदादुगु विजय गुप्ता (2005) शामिल हैं।
  • वर्ष 2020 का यह पुरस्कार भारतीय मूल के ही प्रसिद्ध अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल को प्रदान किया गया था।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. मोदी की फ्रांस यात्रा मजबूत दोस्ती और सद्भावना को दर्शाती है:

  • भारत के प्रधान मंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने मुलाकात की जिसमे उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा दृष्टिकोण और भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक भलाई के लिए एक बल बनाने के लिए मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।
  • प्रधान मंत्री की फ्रांस यात्रा ने न केवल दोनों देशों के बीच बल्कि दोनों नेताओं के बीच भी मजबूत मित्रता और सद्भावना को प्रदर्शित किया हैं।
  • भारत और फ्रांस मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं और दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष और लोगों से लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय जुड़ाव के सभी प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की।

2. केंद्र ने जोग फॉल्स परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाया:

  • केंद्र ने सवाल किया हैं की क्या कर्नाटक वन विभाग द्वारा पांच सितारा होटल के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ पर कोई पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन किया गया है।
  • इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि प्रस्तावित विकास पश्चिमी घाट के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के बीच है, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (आरईसी) ने इस परियोजना से सम्बंधित अतिरिक्त स्पष्टीकरण और विवरणों की मांग की हैं।
  • MoEF & CC ने लिविंग अर्थ फाउंडेशन (बेंगलुरु स्थित पर्यावरण अनुसंधान संगठन) द्वारा दायर आपत्तियों के एक सेट का भी उल्लेख किया।

3. युद्ध से प्रेरित मुद्रास्फीति में वृद्धि ने RBI को मजबूर किया:

  • विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और अप्रैल 2022 में ‘युद्ध-प्रेरित मुद्रास्फीति’ में अप्रत्याशित और तेजी से वृद्धि ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) को तीन वर्षों में पहली बार रेपो दर बढ़ाने के लिए मजबूर किया।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें अधिक देरी प्रतिकूल भी हो सकती थी क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था दर में अधिक वृद्धि का सामना करने की स्थिति में नहीं थी और और ऐसा महसूस किया है कि RBI का लक्ष्य अपने महामारी पूर्व के समय की दरों को छोटे-छोटे चरणों द्वारा वापस लाना है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. परिसीमन आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – सरल)

  1. परिसीमन आयोग की नियुक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा की जाती है।
  2. परिसीमन आयोग जनगणना के बाद संसद द्वारा परिसीमन अधिनियम लागू करने के बाद अनुच्छेद 82 के तहत गठित एक स्वतंत्र निकाय है।
  3. 1981 और 1991 की जनगणना के बाद कोई परिसीमन नहीं हुआ।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए।

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: परिसीमन आयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और भारत के चुनाव आयोग के सहयोग से काम करता है।
  • कथन 2 सही है: परिसीमन आयोग संसद द्वारा जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम लागू करने के बाद अनुच्छेद 82 के तहत गठित एक स्वतंत्र निकाय है।
  • कथन 3 सही है: 1991 और 1981 में जनगणना के बाद ऐसे कोई आयोग नहीं थे।

प्रश्न 2. जोग जलप्रपात के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)

  1. यह भारत के कर्नाटक राज्य के शिवमोगा जिले के पूर्वी घाट में शरावती नदी (Sharavati River) पर अवस्थित एक झरना है।
  2. यह भारत का दूसरा सबसे ऊँचाई से गिरने वाला जलप्रपात है।
  3. जोग जलप्रपात का एक अन्य लोकप्रिय नाम गेरुसोप्पा जलप्रपात है।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: जोग जलप्रपात कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में पश्चिमी घाट में स्थित शरावती नदी पर स्थित एक जलप्रपात है।
  • कथन 2 सही है: यह भारत का दूसरा सबसे ऊँचाई से गिरने वाला जलप्रपात है।
  • कथन 3 सही है: गेरुसोप्पा जलप्रपात, जोग जलप्रपात का एक अन्य लोकप्रिय नाम है।

प्रश्न 3. .हाल ही में, ____________________ राज्य में उत्तर पूर्व के पहले विशेषीकृत “अदरक” प्रसंस्करण संयंत्र को पुनःप्रारम्भ किया गया । (स्तर – मध्यम)

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a)असम

(b)त्रिपुरा

(c)मेघालय

(d)नगालैंड

उत्तर: c

व्याख्या:

  • मेघालय के री-भौई जिले में पूर्वोत्तर के पहले विशिष्ट “अदरक” प्रसंस्करण संयंत्र को पुनःप्रारम्भ किया गया है।
  • उत्तर पूर्व भारत में एकमात्र अदरक प्रसंस्करण संयंत्र जो 2004 में स्थापित किया गया था,लेकिन कई वर्षों से गैर-कार्यात्मक बना हुआ है, उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (एनईआरएएमएसी), पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय के तत्वावधान में काम कर रहे एक पीएसयू ने इसे पुनर्जीवित किया है।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना 1961 में किसके द्वारा की गई थी? (स्तर – मध्यम)

(a)विश्‍व स्वास्थ्‍य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र महासभा।

(b)खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र महासभा ।

(c)खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्‍व स्वास्थ्‍य संगठन (WHO)।

(d)यूनिसेफ (UNICEF) और संयुक्त राष्ट्र महासभा।

उत्तर: b

व्याख्या:

  • संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना 1961 में खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा की गई थी।
  • इसलिए विकल्प B सही है।

प्रश्न 5. विकास की वर्तमान स्थिति के साथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से क्या प्रभावी ढंग से कर सकती है? (स्तर – सरल)

  1. औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत में कमी
  2. सार्थक लघु कथाओं और गीतों का सृजन
  3. रोग निदान
  4. टेक्स्ट-टू-स्पीच रूपांतरण
  5. विद्युत ऊर्जा का तार रहित संचरण

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a)केवल 1, 2, 3 और 5

(b)केवल 1, 3 और 4

(c)केवल 2, 4 और 5

(d)1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: d

व्याख्या:

  • विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र में दक्षता निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त की जा सकती है: ऊर्जा की मांग का पूर्वानुमान लगाना और उसके अनुसार उत्पादन का प्रबंधन करना।
    • यह ईंधन पर निर्भरता को कम करने, या इसकी खपत का प्रबंधन करने में मदद कर सकता है, जिससे उत्सर्जन भी कम होता है। अत: 1 सही है।
    • सनस्प्रिंग या इट्स नो गेम को क्रमशः 2016 और 2017 में जारी किया गया था, इन लघु फिल्मों की पटकथा बेंजामिन – एक स्व-नामित सिस्टम-ऑन-चिप जो एक दीर्घकालिक अल्पकालिक स्मृति (LSTM) आवर्तक तंत्रिका नेटवर्क पर कार्य करता है – द्वारा लिखी गई थी। अत: 2 सही है।
  • द लैंसेट डिजिटल हेल्थ द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन ने 2012 से 2019 के बीच किए गए अध्ययनों के एक नमूने का उपयोग करते हुए मेडिकल इमेजिंग से रोगों का पता लगाने में डीप लर्निंग – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एक रूप – के प्रदर्शन की स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों से तुलना की। इसलिए, 3 सही है।
    • गूगल असिस्टेंट वाक् पहचान AI, बोले गए आदेशों और प्रश्नों को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ टेक्स्ट-टू-स्पीच रूपांतरण हेतु सीखने के लिए डीप न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करता है। अत: 4 सही है।
    • विद्युत ऊर्जा के तार रहित संचरण में, पावर रिसीवर्स को कुशलतापूर्वक चार्ज करने के लिए, रिसीवर की स्थिति की ऑनलाइन पूर्व-सूचना आवश्यक है, और इस उद्देश्य के लिए AI का उपयोग किया जाता है।अत: 5 सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. संयुक्त राज्य अमेरिका में गर्भपात के ऐतिहासिक फैसले को पलटने से वैश्विक स्तर पर संवैधानिक न्यायशास्त्र के निहितार्थ होंगे। कथन का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) (जीएस II – सामाजिक न्याय)

प्रश्न 2. क्या होता है जब एक विमान यात्रा के दौरान झटके या विक्षोभ का सामना करता है? एयरलाइंस इस झटके से कैसे बच सकती हैं? (10 अंक, 150 शब्द) (जीएस III – इंफ्रास्ट्रक्चर)

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