12 अक्टूबर 2022 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: अर्थव्यवस्था:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: शासन:
भारतीय अर्थव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
IMF ने इस वर्ष भारत की विकास दर का अनुमान घटाकर 6.8 फीसदी किया:
अर्थव्यवस्था:
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और वृद्धि एवं विकास से संबंधित विषय।
प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से संबंधित तथ्य।
मुख्य परीक्षा: वित्त वर्ष 2023 के लिए IMF द्वारा वृद्धि का अनुमान और इन अनुमानों में गिरावट के प्रमुख कारण।
संदर्भ:
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( International Monetary Fund (IMF)) ने भारत के लिए वित्त वर्ष 2023 में वृद्धि के अनुमान को 7.4% से घटाकर 6.8% कर दिया है।
विवरण:

चित्र स्रोत: The Hindu
- रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने 31 मार्च, 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में 8.7% की दर से वृद्धि दर्ज की थी।
- हालांकि, IMF द्वारा जून 2022 के पूर्वानुमान की तुलना में चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि/विकास के अनुमान में 0.6 प्रतिशत अंक की कटौती की गई है।
- वृद्धि दर में इस कमी के लिए दूसरी तिमाही में कमजोर उत्पादन और बाहरी मांग में कमी को जिम्मेदार ठहराया गया है।
- इसके अलावा, अगले वित्त वर्ष के लिए पूर्वानुमान को 6.1% पर अपरिवर्तित रखा गया है।
- इसके अतिरिक्त, IMF ने टिप्पणी की है कि वैश्विक वृद्धि दर वर्ष 2021 में 6.0% से घटकर वर्ष 2022 में 3.2% और 2023 में 2.7% हो जाएगी।
- इसका मुख्य कारण वर्ष 2022 की पहली छमाही के दौरान अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद में संकुचन, दूसरी छमाही में यूरो क्षेत्र के संकुचन, चीन में कोविड-19 के प्रकोप में वृद्धि और सम्पदा क्षेत्र के संकट हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund (IMF)):
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना 1930 के दशक में आई महामंदी (Great Depression) के बाद वर्ष 1944 में संयुक्त राष्ट्र ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में की गई थी।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शुरुआत 44 संस्थापक सदस्य देशों के साथ की गई थी और वर्तमान में 190 से अधिक देश इसके सदस्य हैं।
- भारत, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का संस्थापक सदस्य है और भारत के केंद्रीय वित्त मंत्री IMF के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में पदेन गवर्नर होते हैं।
- इसका मुख्यालय अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. में स्थित है।
- IMF का मुख्य उद्देश्य: वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देने वाली आर्थिक नीतियों का समर्थन करके अपने सभी 190 सदस्य देशों के लिए सतत विकास और समृद्धि प्राप्त करने की दिशा में काम करना जो उत्पादकता, रोजगार सृजन और आर्थिक कल्याण को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- IMF के तीन मिशन/लक्ष्य:
- अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को आगे बढ़ाना।
- व्यापार और आर्थिक विकास के विस्तार को प्रोत्साहित करना।
- नीतियों को हतोत्साहित करना जो समृद्धि को नुकसान पहुंचाएं।
- IMF के लिए धन के स्रोत: सदस्य कोटा, ऋण व्यवस्था और द्विपक्षीय उधार समझौते।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: International Monetary Fund (IMF)
वृद्धि के अनुमान में कमी के कारण:
- उच्च मुद्रास्फीति (High Inflation):
- देश में मुद्रास्फीति भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक बनी हुई है और IMF ने उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के चालू वित्त वर्ष में 6.9% तथा अगले वर्ष में 5.1% रहने का अनुमान लगाया है।
- इसके अलावा, IMF का अनुमान है कि भारत में मुद्रास्फीति केवल वित्त वर्ष 2023-24 में मुद्रास्फीति सहिष्णुता बैंड के भीतर आएगी।
वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक दशाएँ/परिस्थितियां:
- तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अर्थात् संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरो क्षेत्र और चीन की विकास दर चालू वर्ष के लिए क्रमशः 1.6%, 3.1% और 3.2% और अगले वर्ष के लिए क्रमशः 1.0%, 0.5% और 4.4% रहने का अनुमान लगाया गया था।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के आर्थिक आघात उन आर्थिक घावों को फिर से हरा कर देंगे जो महामारी के बाद आंशिक रूप से ठीक हो गए थे।
- इस रिपोर्ट के अनुसार, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने वाली मौद्रिक नीति मंदी के जोखिम को कम करने की कुंजी है।
- इसके अलावा राजकोषीय नीति का उपयोग मानव पूंजी, आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण, डिजिटलीकरण और हरित ऊर्जा में निवेश करके अस्थिर माहौल को अनुकूल बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव:
- यूरोप में ऊर्जा संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति के भू-राजनीतिक पुनर्गठन का वृद्धि के अनुमान पर व्यापक और गंभीर प्रभाव पड़ा है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि देशों को मूल्य नियंत्रण, सब्सिडी और निर्यात प्रतिबंधों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अस्थायी हस्तांतरण के माध्यम से सुभेद्य क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना चाहिए।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
NBDA द्वारा गूगल पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता।
मुख्य परीक्षा: सर्च इंजन द्वारा निभाई गई भूमिका और समाचार आउटलेट द्वारा गूगल पर लगाए गए विभिन्न आरोप।
संदर्भ:
- हाल ही में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (News Broadcasters and Digital Association (NBDA)) ने गूगल के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India (CCI)) से संपर्क किया है।
विवरण:
- NBDA ने आरोप लगाया है कि सर्च-इंजन ऑपरेटर गूगल ने उन्हें गूगल के प्लेटफॉर्म पर समाचार प्रसारित करने से प्राप्त होने वाले उचित राजस्व से वंचित कर दिया है।
- गूगल के खिलाफ पूर्व में भी इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी ( Indian Newspaper Society (INS)) और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (Digital News Publishers Association (DNPA)) ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
सर्च इंजन द्वारा निभाई गई भूमिका:
- परंपरागत रूप से देश में समाचार पत्र उद्योग एक ऐसे व्यवसाय मॉडल पर बहुत अधिक निर्भर है, जहाँ उसे विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व उसके कुल राजस्व का लगभग 67% है।
- ऑनलाइन प्रसार के साथ, समाचार प्रकाशकों की डिजिटल विज्ञापन से प्राप्त होने राजस्व पर निर्भरता बढ़ गई है और इस तरह तकनीक-आधारित फर्मों पर उनकी निर्भरता बढ़ गई है।
- सर्च इंजन सर्च क्वेरी (जिज्ञासा) में समाचार वेबसाइटों की प्राथमिकता निर्धारित करने के लिए अपने एल्गोरिदम और आंतरिक गुणवत्ता पुनरीक्षण का उपयोग करते हैं।
- इसलिए सर्च इंजन ऑनलाइन समाचार खपत का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि पाठक आमतौर पर किसी विशिष्ट समाचार वेबसाइट के URL को टाइप करने/खोजने के बजाय ऑनलाइन वेब सर्च का उपयोग करते हैं।
गूगल पर आरोप:
- NBDA के अनुसार गूगल के सर्च इंजन की देश में 94% बाजार हिस्सेदारी है और समाचार वेबसाइटों पर कुल ट्रैफ़िक का 50% से अधिक गूगल के माध्यम से आता है।
- आमतौर पर कोई भी समाचार वेबसाइट विज्ञापन एक्सचेंजों के माध्यम से अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन हेतु निर्धारित स्थान बेचकर राजस्व अर्जित करती है और इसके अलावा गूगल एक सर्च इंजन होने के कारण एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म भी संचालित करता है जो प्रकाशक के ऑनलाइन विज्ञापनों और उपकरणों की बिक्री का प्रबंधन करता है जिन्हें विज्ञापन स्थान प्रदर्शित करने के लिए खरीदा जाना आवश्यक होता है।
- गूगल के अनुसार इन राजस्वों का उपयोग डेटा केंद्रों को बनाए रखने, तकनीकी पर निवेश करने, नवाचारों को बढ़ावा देने और निवेश पर विज्ञापनदाता का लाभ बढ़ाने जैसे जटिल और विकसित व्यवसाय को संचालित करने के लिए किया जाता है।
- हालांकि, विभिन्न समाचार प्रकाशकों का आरोप है कि गूगल ने समाचार प्रकाशकों को गूगल के प्लेटफार्मों में उनके योगदान के लिए उचित अंशदान नहीं दिया है।
- DNPA के अनुसार, उन्हें गूगल से विज्ञापन राजस्व का केवल 51% प्राप्त होता है।
- समाचार प्रकाशकों का यह भी दावा है कि गूगल ने ऐसी प्रथाओं को नियोजित किया है जो इस क्षेत्र में उसके एकाधिकार को बढ़ावा देती हैं।
- इस क्षेत्र में गूगल के प्रभुत्व के कारण, प्रकाशक अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री को एकीकृत करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
- विज्ञापनदाताओं को कंपनी के एक्सचेंजों में व्यापार करने और Google Ads/DV 360 जैसे टूल खरीदने के लिए भी मजबूर किया जाता है।
गूगल पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं:
- फरवरी 2022 में, यूरोपीय प्रकाशक परिषद ने यूरोपीय आयोग से गूगल के खिलाफ एक विश्वास-विरोधी शिकायत की थी जिसमें समाचार प्रकाशकों के खिलाफ इसके “विज्ञापन तकनीक की पकड़” (ad tech stranglehold) को चुनौती दी गई थी।
- इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में इसी तरह के मुद्दों को हल करने के लिए फरवरी 2021 में “मीडिया सौदेबाजी सहिता” (Media Bargaining Code) लाया गया था।
- यह संहिता समाचार प्रकाशकों के लिए फेसबुक और गूगल जैसे तकनीकी दिग्गजों के साथ व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से वाणिज्यिक सौदों पर बातचीत करना अनिवार्य बनाती है, जिसका उल्लंघन किए जाने पर 10 मिलियन डॉलर तक के नागरिक दंड का प्रावधान किया गया है।
- इसके अलावा, सर्च एल्गोरिदम में प्रकाशकों की सामग्री को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रकार के परिवर्तन किए जाने पर तकनीकी फर्मों के लिए समाचार प्रकाशक/आउटलेट को एक नोटिस भेजने की आवश्यकता को अनिवार्य किया गया है।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:
शासन:
आत्महत्या के कारण होने वाली मौतों के लिए प्रौद्योगिकी को दोष देना गलत है:
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रो में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा क्रियान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो।
मुख्य परीक्षा: भारत में आत्महत्या के कारण होने वाली मौतें।
संदर्भ:
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) डेटा 2021 जारी।
विवरण:
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2021 के आंकड़ों (30 अगस्त, 2022 को जारी) के अनुसार, देश में आत्महत्या के कारण लगभग 1,64,033 मौतें हुईं।
- आत्महत्या भारत में सामाजिक संकट और सार्वजनिक नीति की चिंता का एक प्रमुख स्रोत है।
- आत्महत्या के कारण जीवन का नुकसान बेहद दुखदायी और प्रभावित परिवार के लिए तर्क से परे है।
- आत्महत्या एक सामाजिक मुद्दा है जिसे समाज को संवेदनशील और समग्र रूप से संबोधित करने की आवश्यकता है।
- NCRB के अनुसार, देश में आत्महत्या से होने वाली दो-तिहाई मौतों के लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
- पारिवारिक समस्याएं
- विवाह/प्रेम संबंधी मुद्दे
- मादक द्रव्यों का सेवन
- बीमारी
आत्महत्या में प्रौद्योगिकी की भूमिका:
- समकालीन तर्क-वितर्क और चर्चाओं के अनुसार, डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका आत्महत्या का कारण है। प्रौद्योगिकी को अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बढ़ने के लिए दोषी ठहराया जाता है।
- इस मुद्दे में योगदान करने वाले कारक हैं:
- ऑनलाइन सामग्री का अत्यधिक अवलोकन
- सत्यापन के लिए आभासी मित्रों/समुदायों/अनुयायियों पर अत्यधिक निर्भरता
- सोशल मीडिया के कारण आत्मसम्मान की हानि
- साइबर बुलिंग (किसी को अश्लील या धमकाने वाले संदेश भेजना या किसी भी रूप में परेशान करना)
- मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों में प्रौद्योगिकी की भूमिका को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है। लेकिन, यह महसूस किया जाना चाहिए कि प्रौद्योगिकी न तो इस मुद्दे के मूल में है और न ही इसका वांछित समाधान है।
- प्रायः यह तर्क दिया जाता है कि प्रौद्योगिकी का मुद्दा आत्महत्या के कारणों का सनसनीखेज और गलत दिशा में किया गया विश्लेषण है। प्रौद्योगिकी को दोष देना आत्महत्या के मुद्दे को व्यापक रूप से समझने और इसका उचित समाधान खोजने से ध्यान भटकाता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा वित्तपोषित एक अध्ययन के अनुसार, साइबर बुलिंग से पीड़ित लोगों के आत्महत्या करने की संभावना उन लोगों की तुलना में चार गुना अधिक थी, जो इसका शिकार नहीं हुए थे। हालाँकि, फिजिकल बुलिंग (शारीरिक रूप से परेशान करना) के मामले में भी परिणाम समान थे। इससे पता चलता है कि बुलिंग के माध्यम के बजाय बुलिंग आत्महत्या का मुख्य कारण है।
तमिलनाडु का केस स्टडी:
- भारत में आत्महत्या के कारण सबसे अधिक मौतें तमिलनाडु में होती हैं। पिछले दशक में आत्महत्या के कुल मामलों में से 11% से अधिक मामले इसी राज्य में रिपोर्ट किए गए थे और वर्ष 2021 में लगभग 19,000 मामले रिपोर्ट किए गए थे।
- ऑनलाइन गेम खेलने की लत, विशेष रूप से रमी (rummy) खेलों को तमिलनाडु में बड़ी संख्या में आत्महत्याओं का कारण माना जाता है।
- आत्महत्या की रिपोर्टों के परिणामस्वरूप, तमिलनाडु सरकार ने पैसे से जुड़े ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।
- हालांकि, रोटरी रेनबो प्रोजेक्ट (Rotary’s Rainbow Project) जैसी कई स्वतंत्र एजेंसियों ने गहन जांच करने के बाद पाया कि, ऑनलाइन रमी गेम आत्महत्या का प्रमुख कारण नहीं था और इसे बढ़ाचढ़ा कर पेश किया गया था।
- कई विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि, मौतों के वास्तविक कारण रिपोर्ट किए गए कारणों से अलग थे। इसके अलावा, तमिलनाडु सरकार के पास इसके बारे में अपर्याप्त डेटा था।
- तमिलनाडु में आत्महत्या के कारण होने वाली मौतों पर NCRB के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा की गई नीतिगत प्रतिक्रिया में इस मुद्दे पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया गया है।
उपाय:
- फरवरी 2022 में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के दूर-दराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों में मुफ्त और चौबीसों घंटे मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है।
- राज्य सरकार को समस्या के मूल कारणों को दूर करना चाहिए और एक समग्र नीति प्रतिक्रिया तैयार करनी चाहिए।
- इसके अलावा, टॉप-डाउन नीति निर्माण और कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, एक समावेशी समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या-रोकथाम दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
- राज्य इस मुद्दे को हल करने के लिए सेवा प्रदाताओं से तकनीकी समाधान पर भी विचार कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें:
https://byjus.com/free-ias-prep/national-mental-health-programmenmhp/
सम्बंधित लिंक:
https://byjus.com/free-ias-prep/upsc-exam-comprehensive-news-analysis-dec10-2021/
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 से संबंधित:
भारतीय अर्थव्यवस्था:
शहरी उपभोक्ता अभी भी पर्याप्त आश्वस्त नहीं हैं:
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और वृद्धि एवं विकास से संबंधित विषय।
मुख्य परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति से संबंधित RBI के सर्वेक्षण का विश्लेषण।
संदर्भ:
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों की रिपोर्ट जारी की गई।
विवरण:
- भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में निराशावादी दृष्टिकोण रखने वाले शहरी उपभोक्ताओं के प्रतिशत में सितंबर 2022 में भी गिरावट जारी रही। ऐसा कोविड-19 मामलों की संख्या में निरंतर गिरावट के कारण हुआ है।
- हालांकि, अर्थव्यवस्था के बारे में निराशावादी दृष्टिकोण रखने वाले लोगों की संख्या अभी भी आशावादी दृष्टिकोण रखने वाले लोगों की संख्या से दोगुनी है। इस प्रकार सुधार की राह काफी विस्तृत है।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष:
- यह सर्वेक्षण 1 से 10 सितंबर के बीच भारत के 19 प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया था।
- लगभग 59.2% लोगों का विचार था कि सितंबर 2022 में आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। हालांकि, यह कोविड-19 के प्रकोप के बाद से सबसे कम संख्या थी, फिर भी यह उन लोगों की संख्या के दोगुने से अधिक थी जो यह मानते थे कि आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। लगभग 26.2% लोगों का मानना है कि इसमें सुधार हुआ है।
- लगभग 54% प्रतिभागी रोजगार की स्थिति के बारे में निराशावादी थे। मई 2022 से अनुपात स्थिर बना हुआ है, जो रोजगार के मोर्चे पर सुस्त सुधार को दर्शाता है।
- इसी तरह, अपनी आय के स्तर को लेकर चिंतित शहरी उपभोक्ताओं का प्रतिशत मई 2022 से स्थिर बना हुआ है।
- लगभग 95% उत्तरदाताओं का कहना था कि वस्तुओं के मूल्य स्तर में वृद्धि हुई है। इसे भारत में उच्च खुदरा मुद्रास्फीति के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इस प्रकार यह कम उपभोक्ता विश्वास को दर्शाता है।
चित्र 1: 1 से 10 सितंबर 2022 के बीच 19 शहरों में उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण

स्रोत: The Hindu
अन्य निष्कर्ष:
- अप्रैल से जून 2022 की अवधि के लिए 734 विनिर्माण कंपनियों के लिए भी सर्वेक्षण किया गया था। इससे पता चलता है कि पिछली चार तिमाहियों में इन कंपनियों द्वारा नए आर्डर प्राप्त करने के संबंध में वृद्धि दर्ज की।
- ऋण सर्वेक्षण के अनुसार, खुदरा क्षेत्र के नेतृत्व वाले सभी क्षेत्रों द्वारा जुलाई-सितंबर 2022 की अवधि में ऋण की मांग में वृद्धि हुई है।
- सर्वेक्षण में जुलाई से सितंबर 2022 की अवधि के लिए सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों से संबंधित लगभग 590 कंपनियों का डेटा इकट्ठा किया गया था। कंपनियों को अपने टर्नओवर की स्थिति पर विवरण देने के लिए कहा गया था। निम्नलिखित आंकड़ा (चित्र 2) शुद्ध प्रतिक्रिया को दर्शाता है। सकारात्मक संख्या टर्नओवर में वृद्धि दर्ज करने वाली कंपनियों के उच्च हिस्से को दर्शाती है और नकारात्मक संख्या इसके विपरीत स्थिति की ओर इशारा करती है।
- लगभग 51.2% सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कारोबार में वृद्धि दर्ज की।
- 40.3% कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं होने की सूचना दी थी।
- 8.5% ने कारोबार में कमी की सूचना दी थी।
- शुद्ध प्रतिक्रिया +42.7% अंक थी, जो पूर्व-महामारी के स्तर से अधिक है।
- अवसंरचना क्षेत्र की कंपनियों ने भी सकारात्मक परिणाम की सूचना दी थी।
चित्र 2: सेवा और अवसंरचना क्षेत्र की शुद्ध प्रतिक्रिया

स्रोत: The Hindu
संबंधित लिंक:
https://byjus.com/free-ias-prep/upsc-exam-comprehensive-news-analysis-sep13-2022/
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. तीन लाख और गणना जारी: पूरे भारत में सूचना आयोगों में आरटीआई याचिकाओं की बाढ़:

Image Source: The Hindu
- सतर्क नागरिक संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूचना का अधिकार (Right to Information (RTI) Act) अधिनियम की शुरूआत के 17 साल बाद, भारत भर में 26 सूचना आयोगों के पास कुल 3.15 लाख शिकायतें और अपील अभी भी लंबित हैं।
- सबसे अधिक लंबित मामले महाराष्ट्र में हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission (CIC)) और बिहार का स्थान है।
- RTI अधिनियम के अनुसार, सूचना आयोग अंतिम अपीलीय प्राधिकरण हैं और लोगों के सूचना के अधिकार की रक्षा एवं उसे सुनिश्चित करने का काम उन्हें सौंपा गया है।
- हालांकि, आयोग के द्वारा अब तक सभी मामलों में लगाए गए जुर्माने के विश्लेषण से पता चलता है कि आयोग उन 95% मामलों में जुर्माना लगाने में विफल रहा है जहां जुर्माना लगाया जाना चाहिए था।
- रिपोर्ट के अनुसार:
- भारत भर में स्थापित 29 आयोगों में से झारखंड और त्रिपुरा में स्थित दो सूचना आयोग क्रमशः 29 महीने और 15 महीने से अधिक समय से पूरी तरह से निष्क्रिय हैं।
- वर्तमान में, मणिपुर, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में स्थित सूचना आयोग, सूचना आयोग प्रमुख के बिना कार्य कर रहे हैं।
- साथ ही आयोगों में कुल पदों में से केवल 5% पदों पर महिलाएं काबिज है और केंद्रीय सूचना आयोग सहित कई सूचना आयोग कम क्षमता के साथ काम कर रहे हैं।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई आयोगों में काफी अधिक संख्या में मामले लंबित है, जिसके कारण मामले के निपटान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है, क्योंकि सरकारें समय पर नियुक्तियां करने में विफल रही हैं।
2. बेटी पढाओ योजना में शामिल लड़कियों का गैर-पारंपरिक आजीविका कौशल विकास:
- केंद्र सरकार ने गैर-पारंपरिक आजीविका (NTL) में लड़कियों के कौशल विकास को शामिल करके बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के दायरे को बढ़ा दिया है।
- इस योजना के तहत अब माध्यमिक शिक्षा, विशेष रूप से STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) विषयों में लड़कियों के नामांकन को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि महिलाओं को अपने कौशल में सुधार करने, विभिन्न प्रकार के व्यवसायों में संलग्न कार्यबल में प्रवेश करने और अपनी पसंद के व्यवसायों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।
- इसके अलावा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय समिति को योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा और निगरानी के लिए शीर्ष समिति के रूप में गठित किया गया है।
‘STEM में महिलाएं’ के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें:
3. प्रौद्योगिकी समावेश का एक उपकरण है, बहिष्करण का नहीं: संयुक्त राष्ट्र कांग्रेस में प्रधानमंत्री का वक्तव्य:
- हैदराबाद में द्वितीय संयुक्त राष्ट्र विश्व भू-स्थानिक सूचना कांग्रेस (United Nations World Geospatial Information Congress (UNWGIC)) के उद्घाटन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी समावेश का एक उपकरण है, न कि बहिष्करण का।
- प्रधानमंत्री ने समावेश और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में स्वामित्व (SWAMITVA scheme) योजना द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में भी चर्चा की।
- भारत की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था के वर्ष 2025 तक 12.8% की वृद्धि दर से 63,100 करोड़ को पार करने का अनुमान है और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी उत्पादकता में सुधार, बुनियादी ढांचे की स्थायी योजना बनाने, प्रभावी प्रशासन और कृषि क्षेत्र की मदद करके सामाजिक-आर्थिक विकास में प्रमुख सहायक बन गई है।
- प्रधानमंत्री ने दक्षिण एशिया उपग्रह और भारत के पड़ोस में कनेक्शन तथा संचार को सुविधाजनक बनाने में इसकी प्रासंगिकता के बारे में भी चर्चा की।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)
- चुनाव चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करने और चुनाव चिन्ह आवंटित करने का अधिकार देता है।
- बहुजन समाज पार्टी और असम गण परिषद दोनों का पार्टी चिन्ह ‘हाथी’ है।
- जहां पार्टी या तो लंबवत रूप से विभाजित है या निश्चित रूप से यह कहना संभव नहीं है कि किस समूह के पास बहुमत है, ऐसी स्थित में चुनाव आयोग पार्टी के चिन्ह पर प्रतिबन्ध लगा सकता है और समूहों को स्वयं को नए नाम से पंजीकृत करने या पार्टी के मौजूदा नामों में उपसर्ग या प्रत्यय जोड़ने की अनुमति दे सकता है।
सही कूट का चयन कीजिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करने और चुनाव चिन्ह आवंटित करने का अधिकार देता है।
- इस आदेश के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव आयोग दल के नाम और प्रतीक पर दावा करने वाले किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी वर्गों के बीच विवादों का फैसला कर सकता है।
- कथन 2 सही है: बहुजन समाज पार्टी और असम गण परिषद दोनों का पार्टी चिन्ह ‘हाथी’ है।
- बहुजन समाज पार्टी असम में अपने हाथी चिन्ह का उपयोग नहीं कर सकती है, क्योंकि क्षेत्रीय असम गण परिषद को बसपा को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता मिलने से बहुत पहले हाथी चिन्ह आवंटित किया गया था।
- कथन 3 सही है: जहां पार्टी या तो लंबवत रूप से विभाजित है या निश्चित रूप से यह कहना संभव नहीं है कि किस समूह के पास बहुमत है, ऐसी स्थित में चुनाव आयोग पार्टी के चिन्ह पर प्रतिबन्ध लगा सकता है और समूहों को स्वयं को नए नाम से पंजीकृत करने या पार्टी के मौजूदा नामों में उपसर्ग या प्रत्यय जोड़ने की अनुमति दे सकता है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में ‘5+1’ कॉलेजियम की अवधारणा उत्पन्न होती है? (स्तर – मध्यम)
- जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद हेतु एक संभावित उम्मीदवार 5 सदस्यीय कॉलेजियम का हिस्सा नहीं होता है।
(b) यदि भारत के मुख्य न्यायाधीश को कॉलेजियम के विस्तार की आवश्यकता महसूस होती है।
(c) यदि भारत के राष्ट्रपति द्वारा ऐसा निर्देश दिया जाता है।
(d) कभी नहीं।
उत्तर: a
व्याख्या:
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justices of India) करते हैं और इसमें न्यायालय के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- यह कॉलेजियम सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण के लिए सरकार को सिफारिशें करता है।
- आमतौर पर, सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक भारत के मुख्य न्यायाधीश का स्थान लेता हैं, लेकिन अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जहाँ उत्तराधिकारी न्यायाधीश चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से नहीं होता है, तो उसे अनिवार्य रूप से कॉलेजियम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
- इसलिए, ‘5+1’ कॉलेजियम की अवधारणा तब उत्पन्न होती है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद हेतु एक संभावित उम्मीदवार 5 सदस्यीय कॉलेजियम का हिस्सा नहीं होता है।
प्रश्न 3. बौद्ध धर्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)
- बौद्ध धर्म अपनाते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अपने हजारों अनुयायियों के साथ 22 मन्नतें पढ़ीं, जो अब अनुष्ठान का एक हिस्सा हैं।
- अक्टूबर,1935 में, नासिक के पास ‘येओला धर्मांतरण सम्मेलन’ के अध्यक्ष के रूप में, अम्बेडकर ने जाति व्यवस्था का विरोध करने के एक मार्ग के रूप में, हिंदू धर्म को त्यागने के अपने निर्णय की घोषणा की।
- भिक्षु चंद्रमणि की उपस्थिति में, अम्बेडकर और उनकी पत्नी ने बौद्ध प्रतिज्ञा ली।
सही कूट का चयन कीजिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 15 अक्टूबर 1956 को नागपुर में दीक्षाभूमि पर बौद्ध धर्म अपनाते हुए अपने अनुयायियों के साथ 22 प्रतिज्ञाएं की, जो अब इस अनुष्ठान का हिस्सा हैं।
- कथन 2 सही है: 13 अक्टूबर, 1935 को अम्बेडकर ने नासिक के पास ‘येओला धर्मांतरण सम्मेलन’ के अध्यक्ष के रूप में, हिंदू जाति व्यवस्था का विरोध करने के मार्ग के रूप में, हिंदू धर्म को त्यागने के अपने निर्णय की घोषणा की थी।
- कथन 3 सही है: भिभिक्षु चंद्रमणि की उपस्थिति में, अम्बेडकर और उनकी पत्नी ने बौद्ध प्रतिज्ञा ली थी।
- फिर उन्होंने तीन रत्नों (त्रिशरण), पांच उपदेशों (पंचशील) का पाठ किया, इकट्ठे लोगों के लिए स्व-निर्मित 22 प्रतिज्ञाओं का उच्चारण किया और हिंदू धर्म को त्याग दिया।
- इस घटना को भारत में बौद्ध धर्म के पुनर्जागरण के रूप में चिह्नित किया गया है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए सुविख्यात है? (स्तर-सरल)
(a) विश्व बैंक
(b) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
(c) विश्व आर्थिक मंच
(d) न्यू डेवलपमेंट बैंक
उत्तर: b
व्याख्या:
- ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund (IMF)) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली एक प्रमुख रिपोर्ट है।
प्रश्न 5. प्रायः समाचारों में देखे जाने वाला शब्द Cas9 प्रोटीन क्या है? PYQ (2019) (स्तर – सरल)
(a) लक्ष्य-साधित जीन संपादन (टारगेटेड जीन एडिटिंग) में प्रयुक्त आण्विक कैंची।
(b) रोगियों में रोगजनकों की ठीक-ठीक पहचान के लिए प्रयुक्त जैव संवेदक।
(c) एक जीन जो पादपों को पीड़क-प्रतिरोधी बनाता है।
(d) आनुवंशिकतः रूपांतरित फसलों में संश्लेषित होने वाला एक शाकनाशी पदार्थ।
उत्तर: a
व्याख्या:
- Cas9 (CRISPR से संबद्ध प्रोटीन 9) एक विशेष प्रोटीन है जिसे CRISPR तकनीक के तहत साधित जीन संपादन में उपयोग की जाने वाली “आण्विक कैंची” (genetic scissors) के रूप में जाना जाता है।
- Cas9 प्रोटीन प्राकृतिक और कृत्रिम CRISPR-Cas9 प्रणाली में लक्ष्य DNA का पता लगाने और उसे विभाजित करने के लिए जिम्मेदार है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. “आरटीआई के तहत लंबित मामले बढ़ने से लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही कम होती है।” विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-2, राजव्यवस्था एवं शासन]
प्रश्न 2.”मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के संबंध में, प्रौद्योगिकी एक दोधारी तलवार है।” स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक) [जीएस-2, शासन]