25 फरवरी 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: सामाजिक न्याय:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: कृषि:
D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
पर्यावरण:
राजव्यवस्था एवं शासन:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
सामाजिक न्याय:
भारत में मासिक धर्म अवकाश नीति
विषय: कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
मुख्य परीक्षा: भारत में मासिक धर्म अवकाश नीति पर बहस
संदर्भ:
- मासिक धर्म अवकाश नीति पर सर्वोच्च न्यायालय का रूख।
भूमिका:
- भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म पीड़ा अवकाश देने हेतु नियम बनाने के लिए राज्यों को निर्देश देने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को नीति बनाने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मासिक धर्म पीड़ा अवकाश के अलग-अलग “आयाम” हैं, यद्यपि यह एक जैविक प्रक्रिया है लेकिन मासिक धर्म पीड़ा अवकाश नियोक्ताओं के लिए अपने प्रतिष्ठानों में महिलाओं को नियुक्त करने से “हतोत्साहन” के रूप में भी कार्य कर सकता है।
भारत में वर्तमान स्थिति:
- एस. एल. भगवती बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में, 1992 में, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने स्वास्थ्य और परिवार की देखभाल हेतु मासिक धर्म अवकाश प्राप्त के लिए महिलाओं के पक्ष में तर्क दिया था।
- वर्तमान में, बिहार (1992 से) और केरल ही एकमात्र ऐसे राज्य हैं जहाँ मासिक धर्म पीड़ा अवकाश की अनुमति है।
- कई निजी कंपनियों ने भी स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश नीतियां लागू की हैं। हालांकि, कंपनियाँ मासिक धर्म अवकाश प्रदान करने के लिए वर्तमान में कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।
- भारत में मासिक धर्म अवकाश की नीतियों को लागू करने वाली कुछ कंपनियों में कल्चर मशीन, गोजूप, मातृभूमि, ज़ोमैटो, स्विगी और बायजूस शामिल हैं।
- नीतियां आम तौर पर महिला कर्मचारियों को उनकी नियमित छुट्टी का उपयोग किए बिना या वेतन में कटौती के बिना प्रति माह एक या दो दिन का अवकाश लेने की अनुमति देती हैं।
- उच्च शिक्षा विभाग ने फरवरी 2023 में विभाग के तहत काम करने वाले विश्वविद्यालयों में छात्राओं के लिए मासिक धर्म और मातृत्व अवकाश लागू करने का आदेश जारी किया था।
वैश्विक परिदृश्य:
- स्पेन की संसद ने 16 फरवरी को महिला श्रमिकों को भुगतान सहित मासिक धर्म अवकाश ( paid menstrual leave) लेने के लिए एक कानून को मंजूरी दी थी।
- जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, जाम्बिया और ताइवान कुछ ऐसे देश हैं जो महिला श्रमिकों को मासिक धर्म अवकाश लेने की अनुमति देते हैं।
- वर्ष 2016 में, स्वीडन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया था, जिसने भुगतान सहित मासिक धर्म अवकाश नीति लागू की थी।
- हालाँकि, फ्रांस सहित अधिकांश अन्य यूरोपीय देशों ने अभी तक इस तरह का कोई कानून पेश नहीं किया है।
- मासिक धर्म अवकाश प्रदान करने के लिए इन देशों में कुछ कंपनियों की अपनी नीतियां हो सकती हैं, लेकिन यह कानूनी आवश्यकता नहीं है।
- इसके अलावा, संयुक्त राज्य में कई कंपनियों ने स्वेच्छा से अपने कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश नीतियों को लागू किया है, जिसमें नाइके और कोएक्सिस्ट शामिल हैं।
मासिक धर्म अवकाश के पक्ष में तर्क:
- लैंगिक समानता को सुनिश्चित करना: यह मासिक धर्म चक्र के कारण महिलाओं की विशिष्ट जरूरतों और उनके द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को स्वीकार करके कार्यस्थल में लैंगिक असमानता को दूर करने में मदद कर सकता है।
- बेहतर उत्पादकता: महिला कर्मचारियों को उनके मासिक धर्म चक्र के दौरान काम से छुट्टी लेने की अनुमति देने से उन्हें मासिक धर्म के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है और अंततः उनकी उत्पादकता में सुधार हो सकता है, नौकरी से संतुष्टि में वृद्धि हो सकती है और तनाव का स्तर कम हो सकता है।
- कलंक और भेदभाव को कम करना: मासिक धर्म अभी भी कार्यस्थल सहित दुनिया के कई हिस्सों में एक वर्जित विषय है। मासिक धर्म अवकाश नीतियों को लागू करने से मासिक धर्म को एक वैध स्वास्थ्य चिंता के रूप में स्वीकार करके कलंक और भेदभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
- कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देना: मासिक धर्म अवकाश नीतियां महिला कर्मचारियों को उनकी नियमित छुट्टी का उपयोग किए बिना या वेतन में कटौती के बिना काम से छुट्टी लेने की अनुमति देकर कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।
मासिक धर्म अवकाश के विरुद्ध में तर्क:
- मासिक धर्म अवकाश के विरोधियों का तर्क है कि अवकाश के अनुरोधों की वैधता निर्धारित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे अन्य कर्मचारियों में नाराजगी पैदा हो सकती है और कार्यस्थल में तनाव पैदा हो सकता है।
- उनका यह भी तर्क है कि यह नियोक्ताओं के लिए प्रशासनिक बोझ पैदा कर सकता है।
- लोगों के एक वर्ग का तर्क है कि यह लैंगिक रूढ़ियों को पुष्ट करता है और इसका महिला कर्मचारियों के खिलाफ भेदभाव के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- करियर में उन्नति के अवसरों के प्रभावित होने के डर से महिलाएं मासिक धर्म अवकाश लेने में अनिच्छुक हो सकती हैं। इसे एक स्वीकारोक्ति के रूप में माना जा सकता है कि वे अपने पुरुष समकक्षों की तरह उत्पादक नहीं हैं और साथ ही यह (मासिक धर्म अवकाश नीति) रूढ़िवादिता या अचेतन पूर्वाग्रहों को जन्म दे सकती है।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
कृषि:
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP)
विषय: सिंचाई के स्रोत
मुख्य परीक्षा: सूखे, बाढ़ और खंडित नौवहन की अंतर-संबंधित समस्याओं के समाधान के रूप में नदियों को आपस में जोड़ना।
संदर्भ:
- मध्य प्रदेश सरकार ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के निष्पादन पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
भूमिका:
- मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने परियोजना के निष्पादन पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
- राजस्थान भी ERCP को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग करता रहा है।
- राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त होने से परियोजना के लिए खर्च अनुपात 90:10 के अनुपात में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी के तहत जाएगा, जिसकी लागत 37,200 करोड़ रुपये आंकी गई है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग (CWC) और राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है।
- मध्य प्रदेश ने भी राजस्थान के कोटा जिले में काली सिंध नदी पर नवनेरा बैराज के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है।
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना:
- पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना बड़े पैमाने की एक सिंचाई परियोजना है जिसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। परियोजना में एक नहर प्रणाली का निर्माण शामिल है जो चंबल नदी तथा उसकी सहायक नदियों से पानी प्राप्त करेगा और इसे क्षेत्र के खेतों में वितरित करेगा।
- इस परियोजना की कल्पना पहली बार 1950 के दशक में की गई थी और इस पर 1960 के दशक में काम शुरू हुआ था।
- इस परियोजना में पार्वती, काली सिंध और चंबल नदियों को जोड़ने वाले लगभग 2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं।
- इसमें क्षेत्र के कृषि परिदृश्य को बदलने और क्षेत्र के लाखों लोगों की आजीविका में सुधार करने की क्षमता है।
- हालांकि, आलोचकों ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में चिंता जताई है, जिसमें स्थानीय समुदायों का विस्थापन, वनों और वन्यजीवों के आवासों का नुकसान और भूजल संसाधनों की कमी शामिल है।
- नहर प्रणाली के रखरखाव की उच्च लागत और क्षेत्र में अनिश्चित जल आपूर्ति को देखते हुए परियोजना की लागत-प्रभावशीलता और स्थिरता के बारे में भी चिंताएँ रही हैं।
मध्य प्रदेश बनाम राजस्थान:
- मध्य प्रदेश ने अपने राज्य में 376 किलोमीटर तक बहने वाली चंबल नदी को लेकर आपत्ति जताई है।
- हालांकि, राजस्थान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वर्ष 2005 में अंतर्राज्यीय जल नियंत्रण बोर्ड के तहत हुए समझौते के अनुसार दोनों राज्यों में से कोई भी अपने जलग्रहण क्षेत्र से पानी और साथ ही दूसरे के जलग्रहण क्षेत्र से प्राप्त पानी के 10% का उपयोग कर सकता है।
- राजस्थान राज्य के जल संसाधन विभाग के अनुसार, भारत का सबसे बड़ा राज्य, राजस्थान जिसका भौगोलिक क्षेत्रफल 342.52 लाख हेक्टेयर है, जो संपूर्ण देश के क्षेत्रफल का 10.4 प्रतिशत है, में भारत के कुल सतही जल का केवल 1.16 प्रतिशत और कुल भूजल का 1.72 प्रतिशत पाया जाता है।
- राज्य के जल निकायों में, केवल चंबल नदी घाटी में अधिशेष जल है लेकिन इस जल का सीधे उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि कोटा बैराज के आसपास के क्षेत्र को मगरमच्छ अभयारण्य के रूप में नामित किया गया है।
- केंद्रीय जल आयोग के 36 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, चंबल में हर साल औसतन 19,000 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी बर्बाद हो जाता है और समुद्र में बह जाता है।
- पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राजस्थान के लोगों की पीने और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल 3,500 MCM पानी की आवश्यकता होगी।
- मध्य प्रदेश ने स्वयं पार्वती नदी की सहायक नदी नेवाज नदी पर मोहनपुरा बांध और काली सिंध नदी पर कुंडलिया बांध बनाया है, जो राज्य में 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई में सहायक है।
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सारांश:
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नदी जोड़ों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए: Interlinking of Rivers
संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
साइबर हमलों में वृद्धि, लेकिन इसके समाधान की आदर्श स्थिति मौजूद
विषय: आईटी और कंप्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता।
प्रारंभिक परीक्षा: साइबर सुरक्षा
मुख्य परीक्षा: साइबर हमले और साइबर सुरक्षा।
विवरण:
- पिछले कुछ महीनों में भारत में कुछ साइबर हमले के उदाहरण:
- प्रीमियम चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के सर्वर पर रैनसमवेयर हमला। ऐसा कहा जाता है कि लगभग 40 मिलियन स्वास्थ्य रिकॉर्ड की चोरी हुई। इसके अलावा, सिस्टम को पुनः ऑनलाइन करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा था।
- एक अन्य घटना में एक रैंसमवेयर गिरोह, ब्लैककैट ने सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर हमला किया और 2 टेराबाइट से अधिक डेटा चोरी किया।
साथ ही इसे भी पढ़िए: Types of Cyber Attacks
पृष्ठभूमि विवरण:
- रैंसमवेयर दुर्भावनापूर्ण साइबर हमले का एक रूप है, जहां अपराधी चोरी किए गए डेटा को जारी करने के लिए भारी भुगतान की मांग करते हैं।
- ऐसा पाया गया है कि लगभग 75% भारतीय संगठनों ने इस तरह के हमलों का सामना किया है, जिसमें प्रत्येक ब्रीच के कारण औसतन ₹35 करोड़ की क्षति हुई है।
- देश के सभी महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे जैसे बैंकिंग और ऊर्जा प्रणाली शत्रुतापूर्ण राज्य और गैर-राज्य तत्त्वों के ऐसे हमलों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गए हैं।
- साइबर क्षमताओं का उपयोग संघर्ष वाली स्थितियों में भी किया जाता है। उदाहरण के लिए, यूक्रेन में, हैकिंग और जीपीएस जैमिंग के माध्यम से हथियार, रडार और संचार उपकरणों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अप्रभावी हो गए थे।
साइबर सुरक्षा के लिए मौजूदा प्रावधान:
- 2022 में, भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी, भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-in) ने डिजिटल क्षेत्र में संगठनों के लिए दिशानिर्देशों का एक समूह जारी किया था। इसके कुछ प्रावधान इस प्रकार हैं:
- साइबर हमले की घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करने की बाध्यता।
- CERT-In के साथ संपर्क के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त करना।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक 2022 के मसौदे में डेटा उल्लंघनों के लिए ₹500 करोड़ तक का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है।
- एक रक्षा साइबर एजेंसी (DCyA), जो आक्रामक और रक्षात्मक युद्धाभ्यास करने में सक्षम है, भारत के सशस्त्र बलों द्वारा स्थापित की गई है।
- इसके अलावा, सभी राज्यों ने अपने स्वयं के साइबर कमांड और नियंत्रण केंद्र स्थापित किए हैं।
- उपरोक्त प्रावधानों के अलावा, संगठनों को डिजिटल जिनेवा कन्वेंशन पर विचार करने की सलाह दी जाएगी।
- डिजिटल जिनेवा सम्मेलनों में, 30 से अधिक वैश्विक कंपनियों ने ग्राहकों और उपयोगकर्ताओं को साइबर उल्लंघनों से बचाने के लिए एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं, और समान विचारधारा वाले अंतर-सरकारी और राज्य के ढांचे के साथ सहयोग करती हैं।
- भारत ने अमेरिका, रूस, यू.के., दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ जैसे कई देशों के साथ साइबर सुरक्षा संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं।
- QUAD और I2U2 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साइबर प्रतिक्रिया, प्रौद्योगिकी सहयोग, क्षमता निर्माण और साइबर लचीलापन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के प्रयास भी किए जाते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) पर्यावरण में सुरक्षा उद्देश्यों के लिए दो प्रक्रियाओं की शुरुआत की है।
- ओपन-एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG) की स्थापना रूस द्वारा एक प्रस्ताव के माध्यम से की गई थी। इसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य शामिल हैं।
- अमेरिका द्वारा एक और प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया है, यह सरकारी विशेषज्ञों के समूह (GGE) की निरंतरता के बारे में है। इसमें दुनिया के सभी प्रमुख क्षेत्रों के 25 देश शामिल हैं।
संबद्ध चिंताएं:
- साइबर खतरों की पहचान करने के लिए संगठनों के पास उपकरणों की कमी है।
- साइबर सुरक्षा पेशेवरों की भारी कमी है। उदाहरण के लिए, भारत में कुल 3 लाख कार्यबल है, वहीं अमेरिकी कार्यबल में 12 लाख लोग हैं।
- भारत में संगठन मुख्य रूप से निजी उद्यम हैं और इस प्रकार भारत की साइबर सुरक्षा संरचनाओं में उनकी भागीदारी सीमित है।
- 5G और क्वांटम कंप्यूटिंग के आगमन के साथ भेद्यता और बढ़ जाएगी।
- साइबर सुरक्षा के लिए कोई वैश्विक ढांचा नहीं है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य और भारत के महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार (रूस और यू.एस.) खुलेपन, डेटा प्रवाह पर सीमा और डिजिटल संप्रभुता जैसे कई पहलुओं पर एक-दूसरे से भिन्न हैं।
भावी कदम:
- ऐसा अनुमान है कि 2023 में, साइबर अपराध से दुनिया भर में लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा। इस प्रकार, डिजिटल स्पेस को सुरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
- G-20 शिखर सम्मेलन को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय समूहों को एक साथ लाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, और साइबर सुरक्षा परामर्श की दिशा को आगे बढ़ाना चाहिए।
- भारत साइबर सुरक्षा के लिए साझा न्यूनतम स्वीकार्यता के वैश्विक ढांचे की परिकल्पना करने का भी प्रयास कर सकता है।
संबंधित लिंक:
AIR Spotlight: Cyber Security In India: Preparedness, Threats and Challenges
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
पर्यावरण:
चंद्रपुर की जहरीली हवा में सांस लेना मुश्किल
विषय: पर्यावरण प्रदूषण- वायु प्रदूषण।
प्रारंभिक परीक्षा: वायु प्रदूषण
मुख्य परीक्षा: वायु प्रदूषण (चंद्रपुर, महाराष्ट्र का एक केस स्टडी)।
विवरण:
- महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में कोयले से चलने वाला चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन (CSTPS) लगभग 2920 मेगावाट की क्षमता वाली सात-इकाई की सुविधा है। यह महाराष्ट्र के कोयला समृद्ध क्षेत्र, विदर्भ क्षेत्र, में स्थित है।
- चंद्रपुर को ‘भारत के ब्लैक गोल्ड सिटी’ के रूप में जाना जाता है। हालाँकि, यह भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।
- खानों के अलावा, चंद्रपुर में सीमेंट, विस्फोटक, कागज और कपड़ा कारखाने भी हैं।
चंद्रपुर में वायु प्रदूषण और संबंधित चिंताएं:
- CSTPS प्लांट से लगभग 7,100 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश निकलता है जो लगभग 18 जंबो जेट्स के वजन के बराबर है।
- इसके अलावा, यह 2900 मीट्रिक टन बॉटम ऐश भी उत्पन्न करता है (यह कोयले का भारी कचरा है जो गैर-दहनशील है और इसके सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता होती है)।
- विशेष रूप से, फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश को एक साथ कोयले की राख (ऐश) के रूप में जाना जाता है।
- 2019 में, यह पाया गया कि चंद्रपुर का व्यापक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (CEPI) स्कोर बहुत उच्च 76.41 था।
- CEPI भारत में औद्योगिक क्षेत्रों की समग्र पर्यावरणीय गुणवत्ता की निगरानी करता है।
- जनवरी 2022 में हवा और भी अधिक जहरीली हो गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) उत्सर्जन भी मानक सीमा से बहुत अधिक पाया गया था।
- जून 2020 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल स्ट्रीट वेंडर्स में से 32% ने रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की शिकायत की थी।
- इसी तरह, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) द्वारा फरवरी 2022 में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2020 में CSTPS में इकाइयों के संचालन को चंद्रपुर में अनुमानित 85 और नागपुर में 62 अकाल मृत्यु से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, इस रिपोर्ट के खिलाफ महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO) द्वारा मानहानि नोटिस जारी किया गया था।
- संयंत्र के आसपास के क्षेत्र में श्वसन संबंधी समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा यह उजागर किया गया है कि CSTPS पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है।
- महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने सितंबर 2021 में आगे प्रकाश डाला कि प्रति वर्ष सात मिलियन मीट्रिक टन राख बांध में फेंक दी जाती है और इस संयंत्र द्वारा अवैज्ञानिक तरीके से राख का भंडारण किया जाता है।
- फ्लाई ऐश घोल को थर्मल प्लांट से राख के तालाब (ash pond) तक ले जाने वाला पाइप भी मार्च 2022 में ठीक इरई नदी (चंद्रपुर के लोगों की जीवन रेखा) के ऊपर लीक हो गया था।
- फ्लाईएश वॉच ग्रुप के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में घोल के रिसाव की 76 घटनाएं दर्ज की गईं हैं।
- भारत सालाना लगभग 180 मिलियन मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उत्पादन करता है तथा यह प्रमुख रूप से अनुपचारित और गैर-पुनर्नवीनीकरण रहता है।
- विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के अनुसार, हर दो कोयला आधारित संयंत्रों में से एक में पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन होता है।
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा प्रावधान:
- नए नियमों के अनुसार सरकार ने फ्लाई ऐश का 100% उपयोग अनिवार्य कर दिया है। इससे तात्पर्य यह है कि सभी कोयला बिजली संयंत्रों को तीन साल के भीतर अपनी फ्लाई ऐश का 100% पुन: उपयोग करना होगा या ₹1,000 प्रति टन के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
- यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि कई चिंताओं के बावजूद, CSTPS ने हमेशा राष्ट्रीय हरित अधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ‘संचालन की सहमति’ प्राप्त की है।
- भारत सरकार ने फ़्लू गैस डिसल्फराइज़ेशन (FGD) इकाइयों की स्थापना और फ्लाई ऐश के सुरक्षित निपटान की मांग करते हुए एक अधिसूचना जारी की है।
- FGD एक ऐसी प्रणाली है जो कुछ इकाइयों में SO2 उत्सर्जन को 80-90% तक कम कर सकती है।
भावी कदम:
- FGD को सभी थर्मल पावर प्लांटों में लगाया जाना चाहिए।
- फ्लाई ऐश का भी प्रभावी ढंग से पुन: उपयोग किया जाना चाहिए।
- पीने के पानी में संदूषकों की सांद्रता को सुरक्षा सीमा के भीतर लगातार बनाए रखने एवं इसकी निगरानी के प्रयास भी किए जाने चाहिए।
- इसके अलावा, राज्य द्वारा संचालित बिजली संयंत्रों को स्थानीय निवासियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए कानूनी रूप से काम करना चाहिए।
संबंधित लिंक:
Delhi Air Pollution [UPSC Notes]
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राजव्यवस्था एवं शासन:
मनरेगा: 40% से अधिक ग्राम पंचायतों में डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं होती
विषय: सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप।
मुख्य परीक्षा: मनरेगा उपस्थिति और संबंधित चिंताएं।
प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS)
संदर्भ:
- राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS) के माध्यम से मनरेगा श्रमिकों की उपस्थिति।
विवरण:
- सरकार ने राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS) नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है।
- ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 41.3% ग्राम पंचायतों ने ऐप का इस्तेमाल नहीं किया है।
- रिपोर्ट (MIS रिपोर्ट 21.6) ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि NMMS का उपयोग कुल 2,69,637 ग्राम पंचायतों में से केवल 1,58,390 में दर्ज किया गया था।
- प्रत्येक कार्यस्थल पर उपस्थिति दर्ज करने का कार्य मनरेगा मेट या पर्यवेक्षकों को आवंटित किया जाता है।
- लगभग 3.84 लाख मेट के पंजीकरण के बावजूद, केवल 99687 (25.9%) ने उपस्थिति दर्ज करने के लिए पंजीकृत उपकरणों का उपयोग किया।
- हालांकि, मंत्रालय के अधिकारी का दावा है कि औसतन 85% मनरेगा कार्यस्थलों पर डेटा एकत्र करने के लिए NMMS ऐप का उपयोग होता है। और क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के कारण 10% कार्यस्थलों को छूट दी गई है।
- दूसरी ओर, कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्ट) का दावा है कि NMMS ऐप का कम उपयोग मनरेगा के काम में मंदी का प्रतिबिंब है।
संबद्ध चिंताएं:
- ऐसा तर्क दिया जाता है कि खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण NMMS नई चुनौतियां लेकर आया है।
- इसके अलावा, मेट अर्ध-कुशल श्रमिक हैं जो मोबाइल फोन और इंटरनेट बिल के बोझ से दबे होंगे क्योंकि इस व्यवस्था के लिए अतिरिक्त मजदूरी प्रदान नहीं की जाती है।
संबंधित लिंक:
What are the benefits of MGNREGA? Answer at BYJU’S IAS
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
- ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विषय: पर्यावरण
प्रारंभिक परीक्षा: जैव विविधता; पारिस्थितिक हॉटस्पॉट
संदर्भ:
- ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC) 2023
भूमिका:
- ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC) इंडिया, ग्लोबल ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट जो प्रत्येक फरवरी माह में 4 दिनों तक चलता है, का भारतीय क्रियान्वयन है।
- GBBC 2023 में भाग लेने वाले 190 देशों में भारत भी शामिल था। ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट एक वार्षिक कार्यक्रम है जो पक्षी प्रेमियों, छात्रों और प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों को उन पक्षियों की गिनती के लिए एक साथ लाता है जहां वे रहते हैं, काम करते हैं या अध्ययन करते हैं।GBBC को पहली बार वर्ष 1998 में अमेरिका में प्रारंभ किया गया था।
- नागरिक वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान किए गए डेटा का उपयोग वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों द्वारा पक्षी प्रजातियों को बेहतर ढंग से समझने और उनकी रक्षा करने के लिए किया जाता है।
- वर्ष 2013 में इस कार्यक्रम के दुनिया भर में संचालन के बाद से भारतीय बर्डर्स ने GBBC में भाग लिया है।
- GBBC इंडिया का समन्वय बर्ड काउंट इंडिया द्वारा किया जाता है, जो पक्षियों, प्रकृति और इसके संरक्षण में रुचि रखने वाले कई समूहों और संगठनों का एक समूह है।
गणना (काउंट) की मुख्य बातें:
- 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC) 2023 के दौरान पश्चिम बंगाल में पक्षियों की प्रजातियों की संख्या सबसे अधिक रही, इसके बाद उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश का स्थान रहा।
- जबकि पश्चिम बंगाल में 489 प्रजातियां दर्ज की गईं, वहीं उत्तराखंड में 426, अरुणाचल प्रदेश में 407, असम में 397 और कर्नाटक में 371 प्रजातियां दर्ज की गईं।
- तमिलनाडु और केरल ने क्रमशः 349 और 325 प्रजातियों के साथ आठवां और नौवां स्थान प्राप्त किया।
- दूसरी ओर, केरल ने पक्षियों की 9,768 सूचियाँ अपलोड करके पक्षियों की सबसे अधिक जाँच सूची दर्ज की। महाराष्ट्र 7,414 सूचियों के साथ और तमिलनाडु 6,098 के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहा।
- पुणे के बर्डर्स ने 5,900 से अधिक सूचियाँ अपलोड कीं, जो शहरी केंद्रों में सबसे अधिक हैं।
- BCI द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पक्षी अवलोकन रिकॉर्ड रखने वाले एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ई-बर्ड पर 46,000 से अधिक चेकलिस्ट और कुल 1,067 पक्षी प्रजातियों को अपलोड किया गया है।
- देश भर में भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दूसरी सबसे अधिक संख्या में चेकलिस्ट और किसी भी देश की तीसरी सबसे अधिक संख्या में प्रजाति अपलोड करने में मदद की।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल:
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने मानव अंतरिक्ष मिशन – गगनयान की पहली परीक्षण उड़ान के लिए पहला सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल (SCM) संरचना असेंबली प्राप्त की।
- इसे हैदराबाद की निजी फर्म मंजीरा मशीन बिल्डर्स ने बनाया है।
- SCM 2.7 मीटर ऊंचा, 3.1 मीटर चौड़ा है और 3.5 टन वजनी एल्यूमीनियम मिश्र धातु तथा स्टील से निर्मित क्रू मॉड्यूल है।
- इसरो के अनुसार, SCM एक अनप्रेशराइज्ड क्रू मॉड्यूल है। यह आकार, बाहरी मोल्ड लाइन और पैराशूट सिस्टम और वास्तविक चालक दल मिशन कॉन्फ़िगरेशन के पायरोस जैसी प्रमुख प्रणालियों के इंटरफेस का अनुकरण करता है।
- क्रू एस्केप सिस्टम और अन्य सबसिस्टम को मान्य करने के लिए परीक्षण रॉकेट मिशन में SCM का उपयोग किया जाएगा।
- वास्तविक क्रू मॉड्यूल एक दबावयुक्त कैप्सूल है जो गगनयान मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को अनुकूलित करता है।
- नगरपालिका बांड सूचकांक:
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NSE) की एक शाखा, NSE Indices Ltd. ने देश का पहला नगरपालिका बांड सूचकांक (municipal bond index) पेश किया था।
- नया निफ्टी इंडिया म्युनिसिपल बॉन्ड इंडेक्स परिपक्वता के दौरान भारतीय नगर निगमों द्वारा जारी किए गए म्यूनिसिपल बॉन्ड के प्रदर्शन और निवेश ग्रेड क्रेडिट रेटिंग को ट्रैक करेगा।
- वर्तमान में, सूचकांक में 10 जारीकर्ताओं द्वारा जारी किए गए 28 नगरपालिका बांड शामिल हैं, जिनमें सभी की AA क्रेडिट रेटिंग है। सूचकांक घटकों को बकाया राशियों के आधार पर भारांक दिया जाता है।
- पूंजी बाजार से पैसा जुटाना नगर निगमों को नई परियोजनाओं के लिए धन मुहैया कराने और नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करता है और साथ ही उन्हें वित्तीय रूप से अनुशासित तथा शासन उन्मुख बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- कीमत प्रतिफल और कूपन प्रतिफल सहित कुल प्रतिफल पद्धति का उपयोग करके सूचकांक की गणना की जाती है। सूचकांक की आधार तिथि 1 जनवरी, 2021 और आधार मूल्य 1,000 है। सूचकांक की तिमाही समीक्षा की जाएगी।
- वित्तीय कार्रवाई कार्य बल:
- वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर रूस की सदस्यता निलंबित कर दी है।
- ऐसा पहली बार हुआ है जब वित्तीय कार्रवाई कार्य बल से किसी देश को निलंबित किया गया है।
- FATF ने अपने एक बयान में कहा कि रूस की कार्रवाई पूरी तरह से इसके मूल सिद्धांतों जिसका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा, संरक्षा और अखंडता को बढ़ावा देना है, का उल्लंघन है।
- FATF ने हथियारों के व्यापार और दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों के साथ-साथ चोरी की गतिविधियों में रूस की भागीदारी की पुष्टि की है।
- यह निलंबन यूक्रेन द्वारा रूस को FATF की काली सूची में शामिल करने के अभियान के बाद किया गया है।
- वर्तमान में FATF की काली सूची में तीन देश शामिल हैं: उत्तर कोरिया, ईरान और म्यांमार। यह उन देशों की एक सूची है जहाँ व्यवसाय और वित्तीय संस्थान धन शोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के उच्च जोखिम में होते हैं।
- हालाँकि रूस को अब निलंबित कर दिया गया है, लेकिन यह अभी एक सदस्य बना हुआ है।
- रूस के निलंबन का अर्थ है कि रूस अब समूह की बैठकों में भौतिक और आभासी दोनों तरह से शामिल नहीं हो सकता है और FATF दस्तावेजों तक इसे पहुंच प्राप्त नहीं हो सकती है। हालाँकि, रूस FATF के धन-शोधन-रोधी मानकों को लागू करने के लिए जवाबदेह बना हुआ है।
- जून 2022 से रूस को किसी भी नेतृत्व या सलाहकार की भूमिका निभाने या मानक-निर्धारित करने, सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रियाओं और शासन तथा सदस्यता के मुद्दों पर निर्णय लेने में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- 24 फरवरी को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने मोरक्को और कंबोडिया को ‘निगरानी सूची’ से हटाते हुए नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका को इसमें शामिल कर लिया है।
- राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण:
- राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने मीडिया प्रमुख ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd.) के खिलाफ शुरू की गई दिवाला कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
- यह मामला एस्सेल ग्रुप की मल्टीसिस्टम ऑपरेटर शाखा सिटी नेटवर्क्स द्वारा किए गए 89 करोड़ रुपए के डिफॉल्ट से संबंधित है जैसा कि इंडसइंड बैंक का दावा है और इसके लिए ज़ी एंटरटेनमेंट एक गारंटीकर्त्ता था।
- इंडसइंड ने लगभग 92 करोड़ रुपये के वित्तीय ऋण का दावा करते हुए NCLAT से संपर्क किया था। हालाँकि, इसे ज़ी एंटरटेनमेंट ने बैंक द्वारा याचिका की पोषणीयता (maintainability) के खिलाफ एक और अपील दायर करके चुनौती दी थी।
दिवाला एवं दिवालियापन संहिता के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए: Insolvency and Bankruptcy Code
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- ओरंगुटान सबसे बड़े वृक्षवासी स्तनपायी (arboreal mammal) हैं।
- ये इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों के मूल निवासी (native) हैं।
- सभी तीन ओरंगुटान प्रजातियों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: ओरंगुटान सबसे बड़े वृक्षवासी स्तनपायी हैं, जो अपना अधिकांश समय पेड़ों पर व्यतीत करते हैं।
- कथन 2 सही है: ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों के मूल निवासी हैं। ये अब केवल बोर्नियो और सुमात्रा के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं, लेकिन प्लीस्टोसिन युग के दौरान ये संपूर्ण दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण चीन में पाए जाते थे।
- कथन 3 सही है: ओरंगुटान की तीन प्रजातियां हैं- बोर्नियन ओरंगुटान, सुमात्रन ओरंगुटान और तपनौली ओरंगुटान। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची के अनुसार, इन तीनों प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति गंभीर रूप से संकटग्रस्त है।
प्रश्न 2. केरल सरकार ने न्यायमूर्ति थोट्टाथिल बी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जिसका उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है? (स्तर-कठिन)
- मुख्य तौर पर केरल में मौजूद पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) या बफर जोन का आकलन करना
- केरल की सिल्वरलाइन रेल परियोजना के बारे में अध्ययन करना
- अर्थव्यवस्था के विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की भूमिका को समझना
- केरल में नदियों के प्रदूषण की निगरानी करना
उत्तर: a
व्याख्या: कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश थोट्टाथिल बी. राधाकृष्णन केरल सरकार द्वारा क्षेत्र अध्ययन और वन्यजीव अभ्यारण्यों तथा राष्ट्रीय उद्यानों के चारों ओर 1 किमी. के बफर क्षेत्र में मौजूद घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य संरचनाओं का विवरण रिकॉर्ड करने के लिए गठित एक विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता करेंगे।
प्रश्न 3. प्रायः चर्चा में रहने वाला सबांग बंदरगाह निम्नलिखित में से किस देश का हिस्सा है? (स्तर-कठिन)
- जापान
- इंडोनेशिया
- म्यांमार
- फिलिपींस
उत्तर: b
व्याख्या:
- इंडोनेशिया के आचे प्रांत में मौजूद सबांग शहर में वेह द्वीप और सुमात्रा के उत्तरी किनारे के कई छोटे द्वीप शामिल हैं।
- सबांग बंदरगाह अंडमान द्वीप समूह से 710 किमी. दक्षिण-पूर्व में और मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार से 500 किमी. से भी कम दूरी पर स्थित है, जिसके माध्यम से भारत का 40% से अधिक व्यापार होता है। मलक्का जलडमरूमध्य को व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले वैश्विक समुद्री मार्गों के साथ छह चोक पॉइंट या संकीर्ण चैनलों में से एक माना जाता है।
प्रश्न 4. ‘देखो अपना देश’ योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-मध्यम)
- यह एक पर्यटन अभियान है जिसका उद्देश्य भारत में घरेलू यात्रा को बढ़ावा देना है।
- इसकी शुरुआत केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई थी।
- इस योजना का उद्देश्य भारत के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: इस योजना का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा विविधता के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना है।
- कथन 2 गलत है: इसे केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किया गया था।
- कथन 3 सही है: इस योजना का उद्देश्य भारत के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। सरकार ने इस योजना के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त बजट निर्धारित किया है, जिसका उपयोग यात्रा को बढ़ावा देने और देश भर में पर्यटक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाएगा।
प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सुकून का उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या था? (PYQ-CSE-2007) (स्तर-कठिन)
- अपने देश में भूकंप पीड़ितों के पुनर्वास के प्रयासों में इंडोनेशिया की मदद करना
- मध्य पूर्व में संघर्ष के दौरान लेबनान से भारतीय नागरिकों को निकालना
- उत्तरी अफ्रीका के दारफुर क्षेत्र में गृह युद्ध पीड़ितों की मदद करने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र की सहायता करना
- आंध्र प्रदेश में अन्य किसानों द्वारा आत्महत्याओं की कई घटनाओं के बाद किसानों को राहत पैकेज प्रदान करना
उत्तर: b
व्याख्या: ऑपरेशन सुकून भारतीय नौसेना द्वारा 2006 के लेबनान युद्ध के दौरान संघर्ष क्षेत्र से भारतीय, श्रीलंकाई और नेपाली नागरिकों के साथ-साथ भारतीय जोड़ीदार वाले लेबनानी नागरिकों को निकालने के लिए शुरू किया गया एक ऑपरेशन था।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. आधुनिक साइबर प्रौद्योगिकी विभिन्न क्षेत्रों में भारत की क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ इसकी सुभेद्यता को भी बढाती है। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (GSIII-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
प्रश्न 2. जहाँ प्रौद्योगिकी में विशाल सामर्थ्य निहित है, वहीं यह सामाजिक समानता प्राप्त करने की दिशा में एक बाधा भी हो सकती है। क्या आप सहमत हैं? विस्तारपूर्वक समझाइए। (250 शब्द; 15 अंक) (GSII-सामाजिक न्याय)