28 जनवरी 2023 : समाचार विश्लेषण
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A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण:
D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E.सम्पादकीय: शासन:
राजव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G.महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
1960 के सिंधु समझौते में संशोधन के लिए भारत ने पाकिस्तान को भेजा नोटिस
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: भारत और उसके पड़ोस – संबंध।
प्रारंभिक परीक्षा: सिंधु जल संधि के बारे में तथ्य।
मुख्य परीक्षा: भारत-पाकिस्तान संबंधों में हालिया घटनाक्रम।
प्रसंग:
- हाल ही में भारत ने पाकिस्तान के साथ 62 वर्ष पुरानी सिंधु जल संधि को संशोधित करने के अपने आशय की घोषणा की है।
सिंधु जल संधि:
- 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- विश्व बैंक (World Bank) द्वारा मध्यस्था की गई इस संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद से इसे कभी भी संशोधित नहीं किया गया है।
- यह संधि सिंधु और उसकी सहायक नदियों जो दोनों देशों में कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों को सहारा प्रदान करती हैं, के जल के वितरण के लिए शर्तों को निर्धारित करती है।
- इस संधि को दक्षिण एशिया, जिसने दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव को सहा है, में सबसे सफल अंतर्राष्ट्रीय संधियों में से एक माना जाता है।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: Indus Water Treaty
विवरण :

चित्र स्रोत: Indian Express
- जम्मू और कश्मीर में मौजूद किशनगंगा तथा रतले जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर गतिरोध को हल करने में पाकिस्तान की “हठधर्मिता” को सामने रखते हुए, भारत पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि में संशोधन चाहता है।
- भारत ने नीदरलैंड के हेग में स्थाई मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) से संपर्क करने के पाकिस्तान के “एकतरफा” कदम पर भी चिंता जताई है।
- पाकिस्तान के इस मामले की पहली सुनवाई 27 जनवरी को न्यायालय में शुरू हुई तथा भारत ने इस न्यायालयी प्रक्रिया का बहिष्कार किया है।
- भारत ने संधि के अनुच्छेद XII (3) का हवाला दिया है जिसके अनुसार संधि के प्रावधानों को समय-समय पर दोनों सरकारों के बीच उद्देश्य के अनुसार विधिवत अनुसमर्थित संधि द्वारा संशोधित किया जा सकता है।
भारतीय परियोजनाओं पर पाकिस्तान द्वारा उठाई गई आपत्तियां
- किशनगंगा परियोजना: 2006 में, पाकिस्तान ने झेलम नदी पर भारत द्वारा 330 मेगावाट की किशनगंगा पनबिजली परियोजना के निर्माण पर अपनी आपत्ति व्यक्त की।
- रतले परियोजना: पाकिस्तान ने चिनाब नदी पर 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना के निर्माण पर भी चिंता और आपत्ति जताई थी।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें UPSC Exam Comprehensive News Analysis dated 25 Feb 2022
संधि के अंतर्गत विवाद समाधान प्रक्रिया
- संधि का अनुच्छेद IX“मतभेदों और विवादों के निपटारे” से संबंधित है।
- अनुच्छेद IX के अनुसार, किसी भी पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए तीन संभावित उपाय किए जा सकते हैं जो इस प्रकार हैं:
- स्थायी सिंधु आयोग (PIC) के तहत काम करना जिसमें दोनों देशों के विशेषज्ञ शामिल हैं तथा जिनकी नियमित रूप से बैठक होती है, या।
- विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ से परामर्श करना, या।
- विश्व बैंक एवं स्थाई मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के साथ एक न्यायालयी प्रक्रिया के माध्यम से।
- भारत ने माना है कि दोनों पक्षों को अगला कदम उठाने के लिए आगे बढ़ने हेतु सहमत होने से पहले प्रत्येक कदम के तहत प्रयास कर लेना चाहिए। हालाँकि, पाकिस्तान नवीनतम मुद्दे के संबंध में भारत की सहमति की प्रतीक्षा किए बिना आगे बढ़ गया है।
- 2015 में, परियोजनाओं के निर्माण पर करीब 10 वर्षों के गतिरोध के बाद, पाकिस्तान ने एक तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त करने के लिए विश्व बैंक से संपर्क किया, लेकिन बाद में पाकिस्तान ने अपना रुख बदल दिया तथा मध्यस्थता न्यायालय में चला गया।
भारत का रुख
- भारतीय अधिकारियों के अनुसार एक श्रेणीबद्ध तंत्र के बजाय समानांतर प्रक्रियाओं ने गतिरोध पैदा कर दिया था तथा भारत के पास संधि में संशोधनों पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान से मांग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
- इसके अलावा, भारतीय अधिकारियों को यह भी लगता है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने संधि के प्रावधानों तथा उनके कार्यान्वयन का प्रतिकूल उल्लंघन किया है जिसने भारत को संधि में संशोधन के लिए नोटिस जारी करने के लिए विवश किया है।
पाकिस्तान का रुख
- पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नोटिस पर भारतीय रिपोर्ट “ध्यान भटकाने वाली” थी तथा पाकिस्तान ने संधि के प्रासंगिक प्रावधानों के आधार पर इस मुद्दे को मध्यस्थता न्यायालय के समक्ष उठाया है।
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सारांश: सिंधु जल संधि को अक्सर भारत-पाकिस्तान सहमति का एक दुर्लभ उदाहरण माना जाता है और पाकिस्तान को संधि में संशोधन के लिए नोटिस जारी करने का भारत का हालिया निर्णय ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों ने व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और द्विपक्षीय वार्ता बंद कर दी है तथा यह उनके द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख उल्लेखनीय घटनाक्रम हो सकता है। |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाने के लिए चीता परियोजना
पारिस्थितिकी और पर्यावरण:
विषय: संरक्षण।
प्रारंभिक परीक्षा: चीतों के बारे में।
मुख्य परीक्षा: भारत में चीतों की वापसी ।
प्रसंग:
- भारत और दक्षिण अफ्रीका ने 12 चीतों को भारत में स्थानांतरित करने के लिए एक लंबे समय से लंबित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
विवरण:
- दक्षिण अफ्रीका से चीतों को फरवरी के अंत तक भारत ले जाया जाएगा और मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में फिर से छोड़ा जाएगा।
- इसी तरह के समझौते के तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को लाया गया था।
- पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चीता को फिर से भारत लाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सहयोग की सुविधा प्रदान करता है:
- भारत में व्यवहार्य और सुरक्षित चीता आबादी सुनिश्चित करना।
- संरक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना।
- विशेषज्ञता साझा करना तथा आदान-प्रदान सुनिश्चित करना
अधिक जानकारी के इन लिंकों पर क्लिक करें Cheetahs in India and the re-introduction of Cheetahs in India
AIR Spotlight: Reintroduction of Cheetahs in India
संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
शासन
भारत का भूजल नियमन
विषय: सरकार की नीतियां और विकास के लिए हस्तक्षेप
मुख्य परीक्षा: भूजल प्रबंधन से संबंधित सरकारी पहल.
प्रसंग: इस आलेख में भारत में भूजल की वर्तमान स्थिति और भूजल संरक्षण के संबंध में विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों पर चर्चा की गई है।
भूमिका:
- दुनिया की लगभग 18% आबादी के साथ भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 2.4% मौजूद है और यहाँ कुल जल संसाधनों का 4% उपभोग होता है।
- विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के साथ सबसे बड़ा भूजल उपयोगकर्ता है।
- भूजल भारत की जल सुरक्षा के लिए विशेष रूप से भारत की कृषि और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जो देश के लगभग 80% पीने के पानी और इसकी दो-तिहाई सिंचाई जरूरतों को पूरा करता है।
- केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, भारत में कृषि भूमि की सिंचाई के लिए हर साल 230 बिलियन मीटर क्यूब भूजल निकाला जाता है, इस प्रकार देश के कई हिस्सों में भूजल की तेजी से कमी हो रही है।
- केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से स्थायी भूजल प्रबंधन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम कर रही है।
नीतिगत हस्तक्षेप:
- टिकाऊ भूजल प्रबंधन को प्राप्त करने के लिए, प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्यों की पहचान की है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं,
- भूजल निष्कर्षण में 70% से नीचे तक की कमी
- भूजल अवलोकन कुओं के नेटवर्क को बढ़ाना
- रियल टाइम निगरानी के लिए डिजिटल जल स्तर रिकार्डर स्थापित करना
- भूजल गुणवत्ता की आवधिक निगरानी
- जलभृत मानचित्रण(Aquifer Mapping) तथा डेटा प्रसार
- उद्योगों द्वारा भूजल निष्कर्षण का बेहतर विनियमन और
- सहभागी भूजल प्रबंधन और समय-समय पर भूजल संसाधन मूल्यांकन को बढ़ावा देना।
- मई 2019 में, मांग और आपूर्ति प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के साथ जल संसाधनों के प्रबंधन को गति देने के लिए जल शक्ति मंत्रालय का गठन हुआ था।
- संपत्ति निर्माण, वर्षा जल संचयन (‘कैच द रेन’ अभियान) और व्यापक जागरूकता अभियान के माध्यम से जन शक्ति को जल शक्ति में बदलने के लिए जल शक्ति अभियान की शुरूआत की गई थी।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
- भूजल के प्रभावी प्रबंधन और नियमन के लिए अटल भूजल योजना (ABY) और जलभृत प्रबंधन पर राष्ट्रीय परियोजना (NAQUIM) जैसी पहलें भी की गई हैं।
- सामुदायिक भागीदारी के साथ भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार द्वारा विश्व बैंक की सहायता से अटल भूजल योजना शुरू की गई थी।
- इसके तहत प्रोत्साहन द्वारा संभव किए गए व्यवहार परिवर्तन को विकसित करने का ध्येय है।
- NAQUIM में प्रामाणिक डेटा एकत्र करने और सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाने में मदद करने हेतु उपसतह जल धारण करने वाले भूगर्भीय संरचनाओं (Acquifiers) के मानचित्रण की परिकल्पना की गई है।
- लगभग 25 लाख वर्ग किमी के उपलब्ध मानचित्रण योग्य क्षेत्र से देश के लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का मानचित्रण किया गया है।
- क्षेत्रवार जलभृत प्रबंधन योजनाएं तैयार की जा रही हैं और राज्यों के साथ साझा की जा रही हैं।
- सरकार उच्च भूजल निकालने वाले औद्योगिक और शहरी समूहों और भूजल तनाव वाले क्षेत्रों की पहचान करने पर विशेष ध्यान देने के साथ भारत में निगरानी स्टेशनों को भी बढ़ा रही है।
- भारी तथा अल्प मात्रा वाली धातुओं की उपस्थिति की जांच के लिए निश्चित स्थानों से नमूने प्राप्त करके सालाना क्रियाशील भूजल मूल्यांकन किया जाता है।
- ‘इंडिया-ग्राउंडवाटर रिसोर्स एस्टिमेशन सिस्टम (IN-GRES)’ नामक एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
- 2022 में विभिन्न क्षेत्रों में नियमन के लिए व्यापक भूजल दिशानिर्देश लागू किए गए थे।
- अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को वेब आधारित एप्लिकेशन का उपयोग करके पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया था।
- भूजल आकलन 2022 के निष्कर्ष भूजल के प्रबंधन में सकारात्मकता का संकेत देते हैं।
- 2017 की तुलना में ‘अतिदोहित’ भूजल इकाइयों की संख्या में 3% की कमी और ‘सुरक्षित’ श्रेणी की इकाइयों की संख्या में 4% की वृद्धि हुई है।
- 909 इकाइयों में भूजल की स्थिति में सुधार हुआ।
- वार्षिक निष्कर्षण में कमी (लगभग 9.53 बिलियन क्यूबिक मीटर) आई है; सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू उपयोग के आंकड़े क्रमश: 208.49 BCM, 3.64 BCM and 27.05 BCM हैं।
- कुल मिलाकर जल दोहन में 2017 के बाद से लगभग 3.25% की गिरावट देखी गई।
भावी कदम:
- मानवजनित दबावों से निपटने के लिए सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत के लिए पर्याप्त भूजल संसाधन आवश्यक हैं।
- भारत को जल अधिशेष राष्ट्र बनाने तथा सभी के लिए जल के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य के उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रासंगिक कदम उठाए जाने चाहिए।
- सरकार जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्रोत स्थिरता सुनिश्चित कर सकती है।
- विभिन्न सरकारी एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों की मदद से भूजल संसाधनों का अधिक से अधिक सामुदायिक भागीदारी के साथ प्रबंधन किया जाना चाहिए।
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सारांश: जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, चूंकि भूजल संसाधनों के संबंध में अनिश्चितताएं बढ़ेंगी, तो ऐसी परिस्थिति में ऐसे समाधान खोजने के प्रयास किए जाने चाहिए जो सतत विकास के लिए आवश्यक हों। समग्र भूजल परिदृश्य पर सकारात्मक प्रभाव को सक्षम करने में सरकार के हस्तक्षेप, भूजल प्रबंधन में सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाते हैं। |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
राजव्यवस्था
आधारभूत आदर्श
विषय: भारतीय संविधान
मुख्य परीक्षा: वर्तमान समय में भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित बुनियादी मूल्यों की प्रासंगिकता।
प्रसंग: 74वें गणतंत्र दिवस गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन।
भूमिका:
- राष्ट्र के नाम अपने पहले और प्रथागत गणतंत्र दिवस संबोधन में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र के संस्थापक अर्थात आधारभूत आदर्शों को दोहराया।
- देश के सर्वोच्च पद संभालने वाली पहली आदिवासी महिला के रूप में, उन्होंने लोकतंत्र, बहुलवाद और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उदाहरण दिया।
- राष्ट्रपति ने गणतंत्र की इस विशेषता – पुराने और नए, पारंपरिक और आधुनिक के समामेलन को रेखांकित किया ।
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक कीजिए: President’s Address to the Nation
प्रीलिम्स तथ्य:
1. पश्मीना शॉल:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:
भारतीय कला और संस्कृति:
प्रारंभिक परीक्षा: पश्मीना शॉल के बारे में।
प्रसंग:
- कश्मीर की प्रसिद्ध पश्मीना शॉल को वर्तमान फ्रांसीसी स्वरुप मिला है, ज्ञात हो कि एक कलाकार ने पश्चिमी संवेदनाओं के अनुसार पेरिस की प्रदर्शनी में समकालीन कला रूपों के लिए इसके कपड़े को कैनवास में बदल दिया।
पश्मीना शॉल
- पश्मीना शॉल सदियों से जानी जाती हैं और अपने जटिल “बूटा या पैस्ले पैटर्न” के लिए प्रसिद्ध हैं।
- ये शॉल पश्मीना ऊन का उपयोग करके बनाए जाते हैं जो इस क्षेत्र की स्थानिक चांगथांगी बकरी (कैप्रा एगैग्रस हिरकस) से प्राप्त होते हैं।
- पश्मीना शॉल बुने हुए डिज़ाइन और पैटर्न के लिए जाने जाते हैं। सबसे लोकप्रिय में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बूटी – लघु एकल फूल डिजाइन
- बूटा – बहु पुष्प
- खत-रस्त – धारियाँ जो शॉल की पूरी लंबाई में होती हैं।
- बादाम/अंबी/कैरी – पैस्ले
- सरू (साइप्रेस – cypress) – फूलों का गुच्छा
- पश्मीना शॉल को पश्चिम में “कैश्मीर” के रूप में जाना जाता है और इसकी काफी मांग है।
- अगस्त 2013 में, कश्मीरी पश्मीना को भौगोलिक संकेत (GI) [Geographical Indication (GI) tag ] टैग प्रदान किया गया था।
इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: Pashmina shawls
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. केरल की राजधानी में जलपक्षियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई
- 2023 की एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (AWC) ने केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में जलपक्षियों में 65% वृद्धि का संकेत दिया है, जिसने मानवजनित गतिविधियों से उत्पन्न चिंताओं के बावजूद आत्मविश्वास पैदा किया है।
- एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (AWC), ग्लोबल इंटरनेशनल वॉटरबर्ड सेंसस (IWC) पहल का हिस्सा है।
- एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2023 जो वर्ल्ड वाइड फंड-इंडिया तथा वन विभाग के सामाजिक वानिकी शाखा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वार्षिक जनगणना अभ्यास है, ने जिले भर में फैले 11 स्थलों से 70 प्रजातियों से संबंधित 5,396 पक्षियों की गणना की है।
- 2022 में 72 प्रजातियों से संबंधित पक्षियों की संख्या 3,270 दर्ज की गई थी, जिसमें काफी वृद्धि हुई है।
- पूवर मुहाना और पुंचक्करी-वेल्लायानी आर्द्रभूमि परिसर में देखी गई मामूली गिरावट के अलावा, अन्य सभी स्थानों में वृद्धि की प्रवृत्ति दर्ज की गई है।
- पुंचक्करी-वेल्लयानी आर्द्रभूमि परिसर, जिसे तिरुवनंतपुरम का पक्षी केंद्र माना जाता है, कई खतरों का सामना कर रहा है, जिसमें ठोस कचरे का डंपिंग, धान की खेती से उर्वरक-गहन सब्जी की खेती की ओर बदलाव, किसानों द्वारा पक्षियों को भगाने के लिए पटाखों के उपयोग से ध्वनि प्रदूषण तथा विवाह और अन्य फोटो शूट की बढ़ती प्रवृत्ति शामिल हैं।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें Asian Waterbird Census (AWC)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. 1946 में गठित अंतरिम सरकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)
- अंतरिम सरकार का गठन अगस्त 1946 में चुनी गई संविधान सभा से हुआ था। संविधान सभा का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं था और प्रतिनिधि प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चुने गए थे।
- ग़ज़नफ़र अली ख़ान कांग्रेस और मुस्लिम लीग की अंतरिम सरकार में वित्त मंत्री थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- दोनों
- इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर:
विकल्प a
व्याख्या:
कथन 1 सही है: अगस्त 1946 में चुनी गई संविधान सभा से अंतरिम सरकार का गठन किया गया था।
- संविधान सभा का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं था और प्रतिनिधि प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चुने गए थे।
कथन 2 सही नहीं है: लियाकत अली खान अंतरिम सरकार के वित्त मंत्री थे।
- गजनफर अली खान स्वास्थ्य मंत्री थे।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-मध्यम)
- पश्मीना शॉल को मुगल साम्राज्य के दिनों में प्रतिष्ठा और कुलीनता की वस्तुओं के रूप में बहुत प्रसिद्धि मिली।
- भारत में पश्मीना बकरियों की दो नस्लें हैं, चेगू और चांगथांगी।
- कश्मीर पश्मीना को जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर:
विकल्प d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: पश्मीना शॉल को मुगल साम्राज्य के दिनों में प्रतिष्ठा और कुलीनता की वस्तुओं के रूप में बहुत प्रसिद्धि मिली थी।
- बाबर ने सबसे पहले ख़िल’अत – ‘सम्मान के वस्त्र’ देने की प्रथा स्थापित की।
- कथन 2 सही है, भारत में पश्मीना बकरियों की दो नस्लें हैं, चेगू और चांगथांगी।
- चेगू बकरी की एक अनोखी नस्ल है जो पश्चिमी हिमालय के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में पाई जाती है।
- चांगथांगी उत्तरी भारत में लद्दाख के उच्च पठारों के लिए स्थानिक कश्मीरी बकरी की एक नस्ल है।
- कथन 3 सही है, कश्मीरी पश्मीना को 2013 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया गया था।
प्रश्न 3. पेट्रापोल-बेनापोल एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) भारत और निम्नलिखित में से किस देश के बीच अधिक आर्थिक एकीकरण और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में मदद करेगा?(स्तर-आसान)
- बांग्लादेश
- भूटान
- म्यांमार
- नेपाल
उत्तर:
विकल्प a
व्याख्या:
- हाल ही में, भारत और बांग्लादेश पेट्रापोल-बेनापोल एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) के 24×7 संचालन को लागू करने पर सहमत हुए हैं।
- पेट्रापोल (भारत) – बेनापोल (बांग्लादेश) व्यापार और यात्री आवाजाही दोनों के मामले में भारत-बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण भूमि सीमा है।
- पेट्रापोल-बेनापोल एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) के चालू होने से भारत और बांग्लादेश के बीच अधिक आर्थिक एकीकरण तथा कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।
प्रश्न 4. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से गलत है/हैं? (स्तर-कठिन)
- इस अधिनियम के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और जमानती हैं।
- बाल विवाह स्वत: अमान्य हैं।
- किसी भी विश्वसनीय सूचना के आधार पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत स्वत: संज्ञान ले सकती है।
विकल्प:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर:
विकल्प a
व्याख्या:
- कथन 1 सही नहीं है, इस अधिनियम के तहत अपराधों को संज्ञेय तथा गैर-जमानती माना जाता है।
- कथन 2 सही नहीं है, अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक बाल विवाह, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या बाद में संपन्न हुआ हो, अनुबंध करने वाले किसी एक पक्ष के चयन पर अमान्य होगा जो विवाह के समय अवयस्क अवस्था (child) में हो :
- बशर्ते कि शून्यता की डिक्री द्वारा बाल विवाह को रद्द करने के लिए एक याचिका जिला अदालत में केवल एक ऐसे अनुबंध पक्ष द्वारा दायर की जा सकती है जो विवाह के समय अवयस्क अवस्था में रहा हो।
- कथन 3 सही है, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत भी किसी विश्वसनीय रिपोर्ट या सूचना के आधार पर स्वत: संज्ञान ले सकती है।
2007 प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न 5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- भारत में एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने का तरीका वही है जो उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश को पद से हटाने का है।
- पद से सेवानिवृत्ति के बाद, उच्च न्यायालय का एक स्थायी न्यायाधीश भारत के किसी भी अदालत में या किसी प्राधिकरण के समक्ष वकालत नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर:
विकल्प a
व्याख्या:
- कथन 1 सही है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए अनुच्छेद 124 के खंड (4) में प्रदान किए गए तरीके से भारत के एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा अपने पद से हटाया जा सकता है।
- इसलिए, भारत में एक उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को पद से हटाने का तरीका वही है जो सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को पद से हटाने का है।
- कथन 2 सही नहीं है, संविधान के अनुच्छेद 217 में कहा गया है कि “कोई भी व्यक्ति जिसने उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में पद संभाला है, सर्वोच्च न्यायालय तथा अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत में किसी भी न्यायालय में या किसी भी प्राधिकरण के समक्ष वकालत नहीं करेगा। ”
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न 1. सिंधु जल संधि क्या है? इसमें निहित विवाद समाधान तंत्र पर चर्चा कीजिए?
(15 अंक, 150 शब्द) (GS II – अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न 2. “भूजल भारत की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है” स्पष्ट कीजिए
(10 अंक, 150 शब्द) (GS II – शासन)