UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 29th Apr, 2022 UPSC CNA in Hindi

29 अप्रैल 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. गैस आपूर्ति पर रूसी खेल

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. निजीकृत हवाई अड्डों में राजस्व हिस्सेदारी की मांग

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

राजव्यवस्था:

  1. मृत्युदंड पर पुनर्विचार

अर्थव्यवस्था:

  1. क्या मुफ्त उपहार भारत के आर्थिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं?

F. प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहें: वायुसेना प्रमुख
  2. क्वाड समूह का मुकाबला करने के लिए शी की ‘वैश्विक सुरक्षा पहल’

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

गैस आपूर्ति को लेकर रूसी खेल

विषय: विकसित और विकासशील देशों की नीतियों एवं राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: यूरोपीय देशों को गैस की आपूर्ति में कटौती के लिए रूस के कदम का विश्लेषण और यूरोपीय संघ द्वारा रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम करने हेतु उठाए गए कदम।

संदर्भ:

  • रूसी ऊर्जा कंपनी गज़प्रोम (Gazprom) ने बुल्गारिया और पोलैंड को गैस की आपूर्ति रोक दी है।

विवरण:

  • रूस ने रूबल में भुगतान करने में विफलता का हवाला देते हुए इन देशों को गैस की आपूर्ति रोक दी है।
  • हाल ही में, रूसी राष्ट्रपति ने घोषणा की थी कि “अमित्र विदेशी खरीदारों” को रूस से गैस की खरीद के लिए रूबल में भुगतान करना होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि रूबल में भुगतान न करने के परिणामस्वरूप अनुबंधों को रद्द कर दिया जाएगा।
  • पोलैंड और बुल्गारिया ने कहा है कि रूस ने अनुबंध का उल्लंघन किया है, जिसमें कहा गया था कि भुगतान यूरो और डॉलर में ही किया जाएगा।

गैस आपूर्ति के लिए रूस पर यूरोप की निर्भरता:

  • रूस यूरोप के 23 देशों को विभिन्न पाइपलाइनों के माध्यम से गैस की आपूर्ति करता है।
  • रूस यूरोप का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता है।
  • यूरोपीय संघ अपनी गैस का लगभग 40% रूस से आयात करता है।

चित्र स्रोत: Hindu

रूस द्वारा पोलैंड और बुल्गारिया को लक्षित करने के कारण

  • पोलैंड:
    • पोलैंड ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान यूक्रेन को निरंतर सैन्य हार्डवेयर उपकरणों की आपूर्ति की है।
    • पोलैंड यूक्रेन को अपने टैंक भी भेजने की योजना बना रहा है।
    • इसने रूसी व्यवसायों और कुलीन वर्गों के खिलाफ नए प्रतिबंध भी लगाए हैं।
  • बुल्गारिया:
    • बुल्गारिया की नई उदारवादी सरकार रूस के साथ अपने कई पुराने संबंधों को खत्म कर रही है।
    • बुल्गारिया ने भी रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन किया है।
    • इसने काला सागर तट पर पश्चिमी लड़ाकू विमानों के बेड़े की मेजबानी भी की है।
    • यह गैर-नाटो हथियारों का एक प्रमुख उत्पादक है और उन्हें यूक्रेन भेजने की योजना बना रहा है।

गैस आपूर्ति ठप होने का प्रभाव:

  • पोलैंड:
    • पोलैंड अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 40% रूस से आयात करता है
    • पोलैंड रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रहा है।
    • नवीनतम कदम के परिणामस्वरूप पोलैंड को पांच अरब घन मीटर गैस का नुकसान होगा और यह इसकी भरपाई जर्मनी से करने की योजना बना रहा है।
  • बुल्गारिया:
    • यह अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 77% रूस से आयात करता है और इसलिए यह कदम इसके लिए एक बड़ी चुनौती है।
    • हालाँकि, बुल्गारिया के ऊर्जा मंत्री का कहना है कि अभी उनके पास पर्याप्त गैस है।
    • लेकिन अब बुल्गारिया को भी नए विकल्पों की तलाश करनी होगी।
  • रूस:
    • पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी अर्थव्यवस्था गैस निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर है और यूरोपीय संघ के देशों को गैस हेतु रूबल में भुगतान करने के लिए मजबूर करने का कदम उल्टा पड़ सकता है। इससे यूरोप और रूस के बीच ऊर्जा ‘साझेदारी’ समाप्त हो सकती है।
    • विभिन्न बाजारों में पाइप्ड प्राकृतिक गैस को भेजना भी बहुत मुश्किल कार्य है और रूस के पास भंडारण के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा नहीं होने के कारण वह इसे सस्ते मूल्य पर अन्य खरीदारों को बेचने हेतु मजबूर हो सकता है।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया:

  • यूरोपीय संघ ने रूस के कदम को “ब्लैकमेल” करने वाला कदम कहा है और रूस पर यूक्रेन संकट पर पश्चिम के रुख को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
  • यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि “यूरोप में रूसी जीवाश्म ईंधन का युग समाप्त हो रहा है।”

गैस के लिए रूस पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय देशों द्वारा उठाए गए कदम:

  • यूरोप में जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा होने के कारण, यूरोपीय संघ प्राकृतिक गैस की खरीद के तरीकों की तलाश कर रहा है जिसे ऊर्जा का सबसे स्वच्छ स्रोत माना जाता है।
  • एक अल्पकालिक योजना के रूप में, वे नॉर्वे, अजरबैजान और उत्तरी अफ्रीका जैसे देशों से अधिक तरलीकृत प्राकृतिक गैस आयात कर रहे हैं।
  • यूरोपीय देश पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी लाने का प्रयास कर रहे हैं।
  • यूरोपीय देशों की दीर्घकालिक योजना अमेरिका और मध्य पूर्व से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात करने की है।

रूसी प्राकृतिक गैस से LNG में स्थानांतरण की व्यवहार्यता:

  • प्राकृतिक गैस से LNG में स्थानांतरण को मुख्य रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि प्राकृतिक गैस को पाइपलाइन के माध्यम से परिवहन करना आसान और सस्ता है जबकि LNG के परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर सुविधाओं और कंटेनर युक्त जहाजों की जरुरत होती है जिनके लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
  • यूरोपीय संघ ने समय के साथ कई बड़े टर्मिनलों का निर्माण करके अपने LNG बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। हालांकि, कंटेनर युक्त जहाजों द्वारा यू.एस. से आयातित LNG पाइपलाइन के माध्यम से प्राप्त रूसी गैस की तुलना में अधिक महंगी होगी।
  • रूसी गैस के बदले अमेरिकी LNG खरीदने से यूरोप रणनीतिक स्वायत्तता तो प्राप्त कर लेगा लेकिन इससे उन उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमतें बढ़ जाएंगी जो वर्तमान में सस्ती रूसी गैस से लाभान्वित हो रहे हैं।

सारांश:

  • यूरोप को गैस आपूर्ति बंद करने के रूस के एकतरफा कदम से आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है जो मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है, आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा सकता है और यहां तक कि महाद्वीप मंदी की चपेट में भी आ सकता है। इसलिए, यूरोपीय संघ को शीघ्र-अतिशीघ्र गैस के लिए रूस पर अपनी निर्भरता को कम करने के तरीकों की तलाश करनी चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

निजीकृत हवाई अड्डों में राजस्व हिस्सेदारी की मांग

विषय: बुनियादी ढांचा: हवाई अड्डे।

मुख्य परीक्षा: निजीकृत हवाई अड्डों में राजस्व हिस्सेदारी के लिए तमिलनाडु सरकार की मांग का समालोचनात्मक विश्लेषण।

संदर्भ:

  • तमिलनाडु प्रशासन का कहना है कि जब भी केंद्र सरकार किसी हवाई अड्डे का निजीकरण करती है तो राज्य सरकारों को राजस्व में हिस्सा मिलना चाहिए।

हवाई अड्डों का निजीकरण:

  • भारत में, हवाई अड्डों के निजीकरण का कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ था जब सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत मुंबई और दिल्ली हवाई अड्डों को अद्यतित (अपग्रेड) करने के लिए हस्ताक्षर किए थे।
  • वर्ष 2019 में, लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी में हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत पट्टे (lease) पर दिया गया था।
  • दिसंबर 2021 में, सरकार ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) के तहत अगले पांच वर्षों में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा प्रबंधित 25 हवाई अड्डों का निजीकरण करने की योजना बनाई है।

तमिलनाडु सरकार का प्रस्ताव:

  • तमिलनाडु सरकार के अनुसार, राज्य सरकार केंद्र द्वारा संचालित AAI को मुफ्त में भूमि का अधिग्रहण और हस्तांतरण करती है और यदि AAI या केंद्र उस भूमि को किसी तीसरे पक्ष या एक निजी क्षेत्र को हस्तांतरित करते हैं, तो इससे प्राप्त राजस्व को आनुपातिक रूप से राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाना चाहिए।
  • इसके अलावा, राज्य की नीति के अनुसार हवाई अड्डे के विशेष प्रयोजन वाहन में भूमि का मूल्य, राज्य सरकार की इक्विटी में परिवर्तित किया जाना चाहिए या हवाई अड्डे को तीसरे पक्ष को स्थानांतरित करने से पहले एक उचित राजस्व बंटवारे की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • नीति का मसौदा तमिलनाडु सरकार द्वारा तैयार किया गया था क्योंकि केंद्र ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत तमिलनाडु में चार हवाई अड्डों का निजीकरण करने का प्रस्ताव दिया है जिसमें चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और त्रिची शामिल हैं।

प्रस्ताव के पक्ष में तर्क:

  • झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने तमिलनाडु के प्रस्तावों का समर्थन किया है।
  • छत्तीसगढ़ के एक मंत्री ने कहा है कि “संयुक्त उद्यम में, भारत सरकार अपनी पूंजी बुनियादी ढांचे में निवेश करती है और राज्य सरकार अपनी पूंजी को अपनी भूमि के संदर्भ में निवेश करती है और इसलिए ऐसे प्रत्येक उद्यम में यदि जमीन किसी तीसरे पक्ष को बेची जाती है तो उसकी कीमत राज्य सरकार को दी जानी चाहिए”।
  • झारखंड के वित्त मंत्री ने भी प्रस्ताव के समर्थन में यह कहते हुए आवाज उठाई है कि “भूमि राज्य की है। केंद्र सरकार के अधीन राज्यों को अपनी जमीन, पानी और अन्य संसाधन देने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन अगर केंद्र इसे निजी क्षेत्र को सौंप रहा है, तो राजस्व को राज्य सरकार के साथ साझा किया जाना चाहिए। इस संबंध में सभी राज्यों के लिए एक नीति तैयार की जानी चाहिए”।

प्रस्ताव के खिलाफ तर्क:

  • विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डों के विकास से होने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक गतिविधि से पूरे राज्य को लाभ होता है।
  • जिस क्षेत्र में हवाईअड्डा विकसित किया जाता है, वहां के कैचमेंट क्षेत्र को लाभ होता है, जिससे राज्य को भी लाभ मिलता है।
    • साथ ही, हवाई अड्डों के निर्माण से उसके आस पास की भूमि के मूल्य में वृद्धि होती है जिससे राज्यों को अधिक स्टाम्प शुल्क प्राप्त होता है।
  • यदि निजी कंपनियों को AAI के अतिरिक्त राज्यों को भी धनराशि देने के लिए कहा जाता है, तो यह कदम परियोजना के प्रति उनके आकर्षण को प्रभावित करेगा।

सारांश:

  • तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव जो निजीकृत हवाई अड्डों से राजस्व साझा करने का प्रावधान करता है, को अन्य राज्यों से समर्थन प्राप्त हो रहा है और यह कदम आर्थिक मुद्दों पर मौजूदा केंद्र-राज्य संघर्ष को और बढ़ा सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

मृत्युदंड पर पुनर्विचार:

विषय: भारतीय संविधान की विशेषताएं, महत्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना।

प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21।

मुख्य परीक्षा: बचन सिंह मामला और मृत्युदंड के खिलाफ तर्क।

संदर्भ:

  • हाल ही में, भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इरफान बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में ट्रायल न्यायाधीशों द्वारा दोषियों को मृत्युदंड देने के तरीके को चुनौती देते हुए जांच करने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि:

बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (1980):

  • बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (1980) एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक निर्णय था जिसे मृत्युदंड संबंधित कानूनी सुधार का श्रेय जाता है। इसने मृत्युदंड क्या भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है की जांच की।
  • इस मामले में मुख्य मुद्दा यह था कि क्या अपराधी को सजा देने से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 354 (3) के तहत निर्धारित प्रक्रिया असंवैधानिक है।
    • दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354(3) के अनुसार, मृत्युदंड देते समय न्यायाधीश को ऐसा करने के लिए “विशेष कारण” बताना चाहिए। इस प्रावधान के द्वारा, अदालतों को विवेकहीन अधिकार दिया गया और यह पूरी तरह से उनके विवेक पर निर्भर करता है कि वे सुनिश्चित करें कि मृत्युदंड होना चाहिए या नहीं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत के आधार पर अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने IPC की धारा 302 के तहत मौत की सजा के मामले में और साथ ही साथ CrPC, 1973 की धारा 354 (3) की संवैधानिकता को भी खारिज कर दिया था।
  • हालांकि इस मामले में संविधान पीठ ने मौत की सजा को असंवैधानिक घोषित नहीं किया, लेकिन इसने मौत की सजा के संबंध में एक मानवीय और सुधारवादी ढांचे को अपनाने का सुझाव दिया।
    • इस मामले के द्वारा यह निर्णय लिया गया कि अभियुक्त को मृत्युदंड दिया जाना है या नहीं का निर्धारण “अन्यान्यतम” के सिद्धांत द्वारा किया जायेगा। इस सिद्धांत के अनुसार, मौत की सजा केवल दुर्लभतम मामलों में ही दी जा सकती है, वह भी तब जब कोई ” विकल्प (सजा के मामले में, जैसे आजीवन कारावास) न बचा हो”। इसलिए पीठ ने मृत्युदंड से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों के अंधाधुंध उपयोग को समाप्त करने का सुझाव दिया है।
    • पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया था कि अपराध की गंभीरता की जांच के अलावा, अदालतों को अन्य कारकों जैसे कि आरोपी की स्थिति और ‘सुधार की संभावना’ पर भी विचार करना होगा। पीठ ने शमन कारकों (mitigation factors) पर विचार करते हुए एक व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण की सिफारिश की, जिसमें मृत्युदंड को रोकने के लिए सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन, मानसिक स्वास्थ्य, आनुवंशिकता, पालन-पोषण, समाजीकरण, शिक्षा आदि को शामिल किया जाए।

वर्तमान न्यायशास्त्र से संबंधित चिंताएँ:

ठोस दिशा-निर्देशों का अभाव:

  • विशेष रूप से, बचन सिंह के फैसले में सजा को कम करने वाले तत्वों या मौत की सजा को रोकने के लिए उन्हें लागू करने से सम्बन्धित विधि को विस्तार से नहीं बताया गया है। इसमे सबूत की प्रभाविता और सबूत के मानक जैसे मुद्दों को भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
  • इस स्पष्टता की कमी के कारण बचन सिंह मामले के तहत निर्धारित सिद्धांतों के विपरीत कई मामलों में फैसला किया जा रहा है।

बचन सिंह मामले के सिद्धांत का उल्लंघन:

  • विशेष रूप से, बचन सिंह सिद्धांत का सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में उल्लंघन किया है।
    • रावजी बनाम राजस्थान राज्य (1995) में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को एक उपयुक्त तरीका माना जाना चाहिए, न कि अपराधी को। यह अवलोकन बचन सिंह मामले में की गई टिप्पणियों के विपरीत था।
    • माछी सिंह बनाम पंजाब राज्य (1983) में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अन्य दंडों की अपर्याप्तता मृत्युदंड को सही ठहरा सकती है। यह बचन सिंह मामले में प्रतिपादित मानवतावादी उदारवाद के विरुद्ध था।

मृत्युदंड के खिलाफ तर्क:

  • कुछ लोगों द्वारा मृत्युदंड को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
  • मृत्युदंड जघन्य अपराधों के लिए एक निवारक के रूप में कार्य करता परन्तु, कई सर्वेक्षणों और सांख्यिकीय रिपोर्टों ने इसके के विपरीत यह सुझाव दिया है कि मृत्युदंड एक निवारक के रूप में कार्य नहीं करता है।
  • 2021 के एमनेस्टी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में, 144 देशों (कुल देशों के दो-तिहाई से अधिक) ने मौत की सजा को समाप्त कर दिया है, जबकि 108 देशों ने सभी अपराधों के लिए कानून में मृत्युदंड को समाप्त कर दिया है। भारत उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां अभी तक मौत की सजा को खत्म नहीं किया गया है।
  • भारत में, अन्य जगहों की तरह, मृत्युदंड से गरीब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। मौत की सजा पाने वाले अशिक्षित और अनपढ़ लोगों की संख्या शिक्षित और साक्षर लोगों से अधिक है। यह हाशिए के वर्गों के साथ असमानता को प्रदर्शित करता है जो संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकारों का उल्लंघन है। इसका कारण है गरीबों द्वारा प्राप्त असंतोषजनक कानूनी सहायता जो अक्सर उनकी सजा का कारण बनती है तथा सजा के मामले में, कम करने वाले कारकों को या तो ट्रायल कोर्ट के सामने नहीं रखा जाता या फिर ट्रायल जज के सामने मौत की सजा से बचाने के लिए पर्याप्त दलीले नहीं दी जाती है।

सुझाव:

बचन सिंह मामले से संबंधित कमियों को दूर करना:

  • मृत्युदंड देने के लिए एक प्रभावी ढांचा तैयार करना समय की मांग है।
  • अदालत को तत्काल मामले की जांच करते समय सजा को कम करने वाले कारकों और व्यक्तिगत-केंद्रित सजा नीति से संबंधित मुद्दों पर पुनर्विचार करना होगा और ऐसी नीति के लिए ठोस दिशा-निर्देशों के साथ आगे बढ़ना होगा।
  • न्यायालय को सामाजिक कार्य, मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान, नृविज्ञान (anthropology) आदि के क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ मिलकर अभियुक्तों की सामाजिक-आर्थिक और वंशानुगत पृष्ठभूमि से संबंधित एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने जैसे कानूनी उपकरण को अपनाना चाहिए।
  • अपराध, अपराधी और सजा से संबंधित कारकों की व्यापक जांच होनी चाहिए।
  • न्यायालय को सजा कम करने वाले कारकों के आकलन, सबूत के मानक के निर्धारण, सबूत की प्रभावशीलता आदि के लिए ठोस प्रस्ताव भी निर्धारित करने चाहिए।
  • यह एक दोषी-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित कर सकता है ताकि मृत्युदंड को लागू करना दुर्लभ, निष्पक्ष और सैद्धांतिक हो

मृत्युदंड की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार:

  • यह देखते हुए कि केवल एक न्यायसंगत और विवेकपूर्ण सजा नीति विकसित करने से, निर्णय संबंधी त्रुटियों, निर्णय की खराब गुणवत्ता, पार्टियों की अक्षमता या पिछड़ापन तथा उनकी रक्षा की अपर्याप्तता, सिद्धांत के व्यावहारिक उपयोग में असमानता जैसे कारकों को समायोजित करने में सक्षम नहीं हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ‘बचन सिंह’ में मूल प्रश्न मृत्युदंड की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार करना चाहिए।

सारांश:

  • इरफ़ान बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले की चुनौती को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय भारत के मृत्युदंड न्यायशास्त्र को मौलिक रूप से बदलने का अवसर प्रदान करता है। ऐतिहासिक बचन सिंह मामले के अंतराल को भरने की कोशिश करते हुए अदालत को मौत की सजा की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार करना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

क्या मुफ्त उपहार भारत के आर्थिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं?

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित मुद्दे, संसाधन जुटाना, विकास और रोजगार।

मुख्य परीक्षा: मुफ्त की संस्कृति (Freebie culture) – पक्ष और विपक्ष में तर्क।

संदर्भ:

  • हाल ही में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एन.के. सिंह, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष, ने अपने वक्तव्य में कुछ राज्य सरकारों द्वारा मुफ्त उपहार देने की प्रथा की आलोचना की तथा उन्होंने चेतावनी दी कि यह “राजकोषीय आपदा का त्वरित मार्ग” हो सकता है।

इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए निम्नलिखित लेख पढ़े:

https://byjus.com/free-ias-prep/upsc-exam-comprehensive-news-analysis-apr20-2022/#Danger%20of%20electoral%20sops%20flagged

मुफ्त की राजनीति:

  • वर्षों से मुफ्तखोरी की राजनीति भारत में चुनावी राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा बन गई है।
  • देश में चुनावी समय के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार देने वाले राजनीतिक नेता काफी आम हैं। राजनीतिक दल लोगों का वोट सुरक्षित करने के लिए मुफ्त बिजली / पानी की आपूर्ति, बेरोजगारों, दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों और महिलाओं को मासिक भत्ता के साथ-साथ लैपटॉप, स्मार्टफोन जैसे गैजेट देने का वादा करते हैं।

मुफ्त की राजनीति के विपक्ष में तर्क:

राजकोषीय स्थिरता पर प्रभाव:

  • यह फ्रीबी संस्कृति (मुफ्त की संस्कृति) देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए हानिकारक हो सकती है। यह विदित है कि कुछ सब्सिडी बेकार में दी जाती हैं और वे अतिरिक्त क्षमता निर्माण में सहायक नहीं होती हैं, बल्कि केवल व्यय को बढ़ाती हैं। इसलिए, वे सतत नहीं होती हैं और इससे बढ़ते ब्याज भुगतान के कारण अर्थव्यवस्था की राजकोषीय स्थिरता में गिरावट आ जाती है।

कानूनी प्रश्न:

  • विशेष तौर पर, मुफ्त का वादा करने वाले स्पष्ट रूप से अपनी जेब से भुगतान नहीं करते हैं, बल्कि करदाताओं की जेब से करते हैं। इसलिए राज्य के खजाने से मुफ्त का वादा करना, नैतिकता और गंभीर कानूनी मुद्दों को जन्म देता है, जबकि सरकार द्वारा करदाताओं से राजस्व एकत्र किया जाता है तथा लोगों के कल्याण के लिए इस पैसे का उपयोग करने हेतु निर्धारित प्रक्रियाएं भी मौजूद हैं।
  • मुफ्त उपहार राजनीतिक दलों के लिए मतदाताओं को लुभाने और प्रभावित करने का एक जरिया है। मार्च 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस विषय पर एक याचिका की तत्काल सुनवाई करते हुए विचार पर सहमति व्यक्त की गई, जिसमें राजनीतिक दलों के खिलाफ कथित तौर पर मुफ्त में मतदाताओं को प्रेरित करने हेतु प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि मुफ्त उपहारों का उपयोग करने के लिए इस तरह का प्रलोभन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (1) (b) के प्रावधानों के तहत भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी में लिप्त है।

मुफ्त उपहारों का अवांछित प्रभाव:

  • गैर-लक्षित ऋण माफी के अवांछित परिणाम होते हैं जैसे ऋण लेने की प्रथा को नष्ट करना।
  • ग्रामीण समुदायों को मुफ्त बिजली के प्रावधान से जल स्तर में गिरावट, बिजली की बर्बादी और कई अन्य विनाशकारी परिणाम सामने आए हैं।

पक्ष में तर्क:

गरीबी घटाना:

  • गरीबी, मौजूदा असमानता और महामारी के कारण होने वाले संकट से आबादी को सब्सिडी और मुफ्त राहतों की आवश्यकता है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे कल्याणकारी उपायों ने गरीबी कम करने में योगदान दिया है।

जनसंख्या की उत्पादक क्षमता में सुधार:

  • शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुफ्त सुविधाएं आबादी की उत्पादक क्षमता में सुधार करने में सहायक होगी।
  • शिक्षा में दी जाने वाली सब्सिडी, जैसे लैपटॉप और अन्य चीजों से उत्पादकता, ज्ञान और कौशल बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आर्थिक विकास:

  • इसके अलावा, इनमें से कुछ सब्सिडी वास्तव में अर्थव्यवस्था के विकास पथ को जारी रखने के लिए आवश्यक हैं।
  • महामारी से उत्पन्न आर्थिक मंदी के कारण अर्थव्यवस्था में मांग में भारी गिरावट आई है। कल्याणकारी खर्च, खपत की मांग में कमी को रोकने में सक्षम रहा है।

सुझाव:

  • निर्देशित कल्याणकारी खर्च आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ विकास में भी सहायक हो सकता है, इसलिए कल्याणकारी खर्च के उत्पादक और अनुत्पादक रूपों के बीच अंतर करने की आवश्यकता है। उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए जहां कल्याणकारी खर्च का प्रभाव सकारात्मक है।
  • साथ ही, इस तरह के खर्च को कम करने और खर्च की प्रभावशीलता को बढ़ाने की जरूरत है।

सारांश:

  • निर्देशित कल्याणकारी खर्च आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ विकास में भी सहायक हो सकता है, जबकि केवल लुभाने वाले मतदाताओं पर लक्षित मुफ्त की नीति राजकोषीय स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इसलिए कल्याणकारी खर्च के उत्पादक और अनुत्पादक रूपों के बीच अंतर करने की आवश्यकता है। .

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. तीव्र संघर्ष के लिए तैयार रहें: वायुसेना प्रमुख
  • यूक्रेन युद्ध और रूस से उपकरणों की समय पर डिलीवरी के बारे में आशंकाओं की पृष्ठभूमि में, वायु सेना प्रमुख ने कहा कि मांग पूर्वानुमान विधियों और स्टॉकिंग दर्शन का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
  • वायु सेना प्रमुख ने आगे कहा कि इस संदर्भ में भावी कदम “सेवाक्षमता से जुड़ी सूची प्रबंधन प्रणाली” हो सकती है।
  • उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर भारतीय वायु सेना को कम समय में तीव्र और छोटी अवधि वाले ऑपरेशन के लिए तैयार करने की आवश्यकता है। उच्च तीव्रता के ऑपरेशन के इस नए प्रतिमान, न्यूनतम बिल्ड-अप समय के साथ, परिचालन रसद के मामले में बड़े बदलाव की आवश्यकता है।
  1. क्वाड समूह का मुकाबला करने के लिए शी की ‘वैश्विक सुरक्षा पहल’
  • चीनी राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित एक नई वैश्विक सुरक्षा पहल को अमेरिकी हिन्द-प्रशांत रणनीति और क्वाड का मुकाबला करने के रूप में देखा जा रहा है।
  • चीन ने एक वैश्विक सुरक्षा पहल का प्रस्ताव रखा है जो साझा, व्यापक, सहकारी और स्थायी सुरक्षा के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध है और एकपक्षीयता तथा समूह की राजनीति और गुटबाजी का विरोध करता है।
  • चीन के विदेश मंत्री ने आगे कहा कि वे क्षेत्र को विभाजित करने और ‘नया शीत युद्ध’ शुरू करने के लिए ‘हिंद-प्रशांत’ रणनीति के इस्तेमाल और नाटो के एशियाई संस्करण के साथ सैन्य गठबंधनों के प्रयोग का विरोध करते हैं।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत का पहला ई-कचरा क्लिनिक भोपाल में स्थापित किया गया था।
  2. महाराष्ट्र भारत में ई-कचरे का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  3. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को अधिसूचित किया, जिसके तहत उत्पादकों को ई-कचरे के संग्रह और उसके विनिमय के लिए जिम्मेदार बनाया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: विकल्प a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: भारत का पहला ई-कचरा क्लिनिक भोपाल (मध्य प्रदेश) में स्थापित किया गया है।
    • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और भोपाल नगर निगम (BMC) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है।
  • कथन 2 सही है: भारत में महाराष्ट्र ई-कचरे का सबसे बड़ा उत्पादक है।
    • महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु (दूसरा), आंध्र प्रदेश (तीसरा), उत्तर प्रदेश (चौथा), दिल्ली (पांचवां), गुजरात (छठा), कर्नाटक (सातवां) और पश्चिम बंगाल (आठवां) है।
  • कथन 3 सही नहीं है: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 को अधिसूचित किया है।

प्रश्न 2. गिद्दा, सम्मी और किकली भारत के किस राज्य के लोक नृत्य हैं?

  1. अरुणाचल प्रदेश
  2. हिमाचल प्रदेश
  3. पंजाब
  4. सिक्किम

उत्तर: विकल्प c

व्याख्या:

  • गिद्दा, सम्मी और किकली पंजाब के लोक नृत्य हैं।
  • गिद्दा केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक लोकप्रिय लोक नृत्य है, जो त्योहारों के मौसम में विशेष रूप से फसल की बुवाई और कटाई के दौरान किया जाता है।
  • सम्मी नृत्य पंजाब के आदिवासी समुदायों की महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • किकली पंजाब का एक लोकनृत्य है, जिसमें दो लड़कियां हाथ पकड़कर एक दूसरे को घेरे में घुमाती हैं और स्वयं को वृत्ताकार गतियों में संतुलित रखती हैं।

प्रश्न 3. कवि जयदेव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. जयदेव के भजनों को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है।
  2. उन्हें उनकी महाकाव्य कविता गीतांजलि के लिए जाना जाता है।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न हीं 2

उत्तर: विकल्प a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: जयदेव के दो सूक्तों को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है।
  • कथन 2 सही नहीं है: जयदेव अपनी महाकाव्य कविता गीता गोविंद के लिए जाने जाते हैं।
    • गीतांजलि रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं का संग्रह है।

प्रश्न 4. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
  2. आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं जिनकी सेवा शर्तें और कार्यकाल संसद द्वारा निर्धारित किया जाता है।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न हीं 2

उत्तर: विकल्प d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक संवैधानिक निकाय है।
    • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी और इसे 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 के माध्यम से एक संवैधानिक दर्जा दिया गया था।
  • कथन 2 सही नहीं है: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है।

प्रश्न 5. भारत में काले धन के सृजन के निम्नलिखित प्रभावों में से कौन-सा भारत सरकार की चिंता का प्रमुख कारण है?

  1. स्थावर संपदा के क्रय और बिलासितायुक्त आवास में निवेश के लिए संसाधनों का अपयोजन।
  2. अनुत्पादक गतिविधियों में निवेश और जवाहरात, गहने, सोना आदि का क्रय।
  3. राजनीतिक दलों को बड़े चंदे और क्षेत्रवाद का विकास।
  4. कर चोरी/अपवंचन के कारण राजकोष में राजस्व की हानि।

उत्तर: विकल्प d

व्याख्या:

  • काले धन में अवैध गतिविधि के माध्यम से अर्जित सभी धन और वह कानूनी आय शामिल होती है जिस पर कर नहीं दिया जाता है।
  • काले धन में वृद्धि का अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता है क्योंकि इससे सरकारी राजस्व में कमी आती है।
  • अत: विकल्प d सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. मृत्युदंड पर रोक लगाना सभ्य समाज की एक अनिवार्य विशेषता है। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (GS IV – नैतिकता)

प्रश्न 2. भारतीय राजनीति में मुफ्त की संस्कृति (Freebie culture) भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाने के विचार से उपजी है। विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (GS II – राजव्यवस्था)

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