02 मई 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

1. प्रधानमंत्री ने छठवें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श सत्र की सह-अध्यक्षता की:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय:  क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना। 

प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा: भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी),भारत और जर्मनी के बीच में व्यापक प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी,हरित और सतत विकास साझेदारी पर जेडीआई।  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री ने जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के साथ भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के पूर्ण सत्र की सह-अध्यक्षता की। 

उद्देश्य:

  • दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख पहलुओं के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श किया।
  • प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-जर्मनी साझेदारी एक जटिल दुनिया में सफलता का उदाहरण बन सकती है।
  •  उन्होंने भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में जर्मन भागीदारी को भी आमंत्रित किया। 

विवरण:  

  • भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत-जर्मनी अंतर सरकारी आयोग के हिस्से के रूप में बर्लिन में अपनी जर्मन समकक्ष सुश्री स्टेफी लेमके, संघीय पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण, परमाणु सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। 
  • भारत ने पर्यावरण और जलवायु मामले को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बताया कि 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करने की सीओपी 26 की अपने संकल्प को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन की तरह कई और पहलें शुरू की हैं।
  • बैठक का एजेंडा पर्यावरण संरक्षण के लिए जलवायु परिवर्तन, जैविक विविधता, महासागरों और कृत्रिम बुद्धिमत्तासे सम्बंधित  था।
  • जलवायु और मौसम को लेकर निकट भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने मॉडल विकास, अक्षय ऊर्जा में पूर्वानुमानों के अनुप्रयोग और निश्चित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग के उपयोग सहित इस क्षेत्र में हमारे सहयोग को बढ़ाने के लिए रुचि दिखाई। 
  • उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी द्विपक्षीय साझेदारी के रणनीतिक स्तंभों में से एक है और मौसम व जलवायु अनुसंधान के उभरते क्षेत्रों में विशेष रूप से, क्षेत्रीय जलवायु की तीव्रता के रुझानों और उष्णकटिबंधीय तथा उच्च अक्षांश सहित संवेनशील क्षेत्रों की परिवर्तनशीलता को लेकर द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने का सुझाव दिया।
  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने जर्मन समकक्ष को बताया कि इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (आईएनसीओआईएस), हैदराबाद में इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर (आईटीईडब्ल्यूसी) हिंद महासागर के किनारे स्थित देशों को सुनामी से संबंधित खतरों के लिए पूर्व चेतावनी की सूचना प्रदान करता है। 
  • उन्होंने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन – अंतर सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (यूनेस्को-आईओसी) के तहत सुनामी सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) में से एक के रूप में मान्यता दी गई है और इस अवसर का उपयोग करने के लिए जर्मनी को आमंत्रित किया है।
  • भारत ने कहा कि भारत यूनेस्को-आईओसी के माध्यम से मकरान क्षेत्र में संभावित सुनामी खतरा आकलन (पीटीएचए) की दिशा में काम कर रहा है और यूएनईएससीएपी द्वारा वित्त पोषित है, जहां जर्मन विशेषज्ञ और संस्थान इस पहल का हिस्सा हैं।
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थानों और जर्मन वैज्ञानिक/अनुसंधान एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए संभावित सुनामी खतरे के आकलनों, भूपंकों के चलते समुद्र के नीचे भूस्खलन से उत्पन्न ’असामान्य सुनामी’ सहित सूनामी का जल्द पता लगाने, उप-समुद्री भूस्खलन के लिए पृथ्वी की उप-सतह की जियोडायनामिक मॉडलिंग और ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) डेटा का उपयोग करके भूपर्पटीय विरूपण निगरानी, हिंद महासागर में (मकरान सबडक्शन जोन पर अधिक जोर) सबडक्शन जोन की टेक्टोनिक सेटिंग्स और मशीन लर्निंग विधियों को एकीकृत करने, आपदा पूर्व तैयारियों को मजबूत करने के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियां और सुनामी रेडी जैसे जोखिम कम करने के कार्यक्रम, दीर्घकालिक आर्कटिक (ध्रुवीय) अवलोकनों और अध्ययनों के क्षेत्र में सहयोग और गैस हाइड्रेट्स और अंडरवाटर ड्रिल के क्षेत्र में सहयोग जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
  • इस बात पर प्रकाश डाला कि महासागर अन्वेषण में द्विपक्षीय सहयोग के लिए नीली अर्थव्यवस्था नये भारत की परिकल्पना का एक महत्वपूर्ण आयाम है। 
  • तटीय समुद्री स्थानिक योजना और पर्यटन, समुद्री मत्स्यपालन, जलीय कृषि और मछली प्रसंस्करण, तटीय और गहरे समुद्र में खनन और अपतटीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग का प्रस्ताव है।
  • दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों ने आईजीसी के विभिन्न पहलुओं संबंधी अपनी बैठकों पर संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की:
    • विदेश मामले और सुरक्षा
    • आर्थिक, वित्तीय नीति और वैज्ञानिक एवं सामाजिक विनिमय
    • जलवायु, पर्यावरण, सतत विकास और ऊर्जा
  • पूर्ण सत्र का समापन प्रधानमंत्री और चांसलर शुल्ज द्वारा हरित और सतत विकास साझेदारी की स्थापना के संयुक्त घोषणा पत्र (जेडीआई) पर हस्ताक्षर के साथ हुआ। 
  • यह साझेदारी सतत विकास लक्ष्यों और जलवायु कार्रवाई पर भारत-जर्मनी सहयोग के लिए एक संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण की परिकल्पना करती है।
  • इसके तहत जर्मनी 2030 तक 10 अरब यूरो की नई और अतिरिक्त विकास सहायता की अग्रिम प्रतिबद्धता के लिए सहमत हो गया है।
  • साझेदारी को उच्च स्तरीय समन्वय और राजनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए यह जेडीआई आईजीसी के दायरे में एक मंत्रिस्तरीय तंत्र भी बनाएगा।
  • मंत्रिस्तरीय द्वपक्षीय बैठकों के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • समझौते:
    • हरित और सतत विकास साझेदारी पर जेडीआई।
  • अन्य समझौते:
    • तीसरे देशों में त्रिकोणीय विकास सहयोग परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर जेडीआई।
    • विदेश मंत्रालय और जर्मन विदेश कार्यालय के बीच वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते की स्थापना तथा एक सीधा कूटभाषा आधारित संपर्क स्थापित करने के लिए समझौते की स्थापना पर जेडीआई।
    • नवीकरणीय ऊर्जा भागीदारी के सम्बन्ध में भारत-जर्मन विकास सहयोग।
    • व्यापक प्रवास और आवागमन साझेदारी पर समझौते की शुरुआत पर संयुक्त घोषणा।
    • भारत के कॉर्पोरेट और कनिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने पर जेडीआई।
  • वर्चुअल रूप में हस्ताक्षर
  • भारत-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन कार्यबल।
  • कृषि पारिस्थितिकी पर जेडीआई।
  • वन परिदृश्य के लिए पूर्वावस्था की प्रप्ति पर जेडीआई।
  • प्रधानमंत्री ने जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत और जर्मनी के बीच द्विवार्षिक अंतर सरकारी परामर्श (आईजीसी) के छठे दौर से पहले आयोजित की गई।
  • इन चर्चाओं में समग्र रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम के मद्देनजर द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया
  • जर्मनी के साथ कृषि पारिस्थितिकी व प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के संबंध में संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किये।
  • भारत एवं जर्मनी के बीच कृषि पारिस्थितिकी एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को लेकर पहल हुई है। 
  • इस संबंध में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं जर्मनी की आर्थिक सहयोग व विकास मंत्री सुश्री स्वेंजा शुल्ज़ ने वर्चुअल बैठक में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए।
  • इसके माध्यम से दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों और किसानों सहित अभ्यासकर्ताओं के बीच संयुक्त अनुसंधान,ज्ञान के आदान-प्रदान व नवाचार और निजी क्षेत्र के साथ आदान-प्रदान एवं साझेदारी तथा अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित करके प्रौद्योगिकी व वैज्ञानिक ज्ञान के अंतरण को बढ़ावा दिया जाएगा। 
  • जर्मनी का संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय इस पहल के तहत परियोजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहयोग के लिए वर्ष 2025 तक 300 मिलियन यूरो तक प्रदान करने का इरादा रखता है।
  • तकनीकी सहयोग परियोजना द्वारा भारत में कृषि पारिस्थितिकी परिवर्तन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए जर्मनी इस लाईटहाउस पहल के लिए समन्वित सहायता प्रदान करेगा।
  • कृषि पारिस्थितिकी के परिवर्तनशील एजेंडा के लिए दोनों देशों ने मूल्यवर्धित प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक हस्तांतरण की सुविधा को बढ़ाने के साथ भारत, जर्मनी व अन्य देशों के अभ्यासकर्ताओं के साथ अत्याधुनिक ज्ञान विकसित तथा साझा करने के लिए वित्तीय सहयोग द्वारा समर्थित संयुक्त अनुसंधान केंद्र की स्थापना की परिकल्पना की गई है।
  • कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करने के लिए संबंधित मंत्रालयों, अर्थात् पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा मात्सियकी, पशुपालन तथा डेयरी मंत्रालय और नीति आयोग के साथ एक कार्यकारी समूह गठित किया जाएगा।
  • इसके अलावा भारत और जर्मनी के बीच वन परिदृश्य बहाली पर आशय की संयुक्त घोषणा (जेडीआई) पर वर्चुअल रूप से हस्ताक्षर किए गए।
  • यह जेडीआई दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ सफलतापूर्वक साझेदारी करने और वन परिदृश्य बहाली, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने में और सक्षम बनाएगा।
  • भारत और जर्मनी के बीच वन परिदृश्य बहाली पर आशय की संयुक्त घोषणा (जेडीआई) पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और जर्मनी की पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण, परमाणु सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री सुश्री स्टेफी लेमके के बीच वर्चुअल रूप से हस्ताक्षर किए गए। यह छठे भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के प्रदेयों में से एक है।
  • यह जेडीआई संरक्षण और बहाली, जलवायु संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में हमारी साझेदारी और समर्थन को और आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करेगा। यह दोनों देशों की साझेदारी को और महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाएगा।
  • जेडीआई हमें एक-दूसरे के साथ सफलतापूर्वक साझेदारी करने और वन परिदृश्य बहाली, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने में सक्षम बनाएगा।
  • प्रधानमंत्री की यात्रा में भारत-जर्मनी IGC इस वर्ष में किसी भी देश के साथ पहली IGC है। ये कई फर्स्ट्स दर्शाते हैं कि भारत और जर्मनी, दोनों ही देश इस महत्वपूर्ण साझेदारी को कितनी प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • पिछली IGC वर्ष 2019 में हुई थी। तब से विश्व मे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। कोविड-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव डाला है।
  • हाल की जियोपोलिटिकल घटनाओं ने भी दिखाया कि विश्व की शांति और स्थिरता कितनी नाजुक स्थिति में है, और सभी देश कितने परस्पर हैं।
  • यूक्रेन के संकट के आरम्भ से ही हमने तुरंत युद्ध-विराम का आह्वान किया, और इस बात पर जोर दिया था कि विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत ही एकमात्र उपाय है। हमारा मानना है कि इस युद्ध में कोई विजयी पार्टी नहीं होगी, सभी को नुकसान होगा।
  •  छठी IGC से भारत-जर्मनी भागीदारी को एक नई दिशा मिली है। 
  • इस IGC ने – ऊर्जा और पर्यावरण – दोनों क्षेत्रों में हमारे सहयोग को महत्वपूर्ण गाइडेंस दिया है।
  •  किए गए निर्णयों का हमारे क्षेत्र और विश्व के भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। 
  •  हरित और सतत विकास पर भारत-जर्मनी भागीदारी को लोंच कर रहे है। 
  • भारत ने ग्लासगो में अपने जलवायु महत्वाकांक्षा को बढ़ा कर विश्व को यह दर्शाया कि हमारे लिए हरित और सतत विकास एक आर्टिकल ऑफ़ फैथ है। 
  • इस नयी पार्टनरशिप के तहत, जर्मनी ने वर्ष 2030 तक 10 बिलियन यूरो की अतिरिक्त विकास सहायता से भारत के ग्रीन ग्रोथ प्लान्स को सपोर्ट करने का निर्णय लिया है।  
  • हमारे पूरक ताकत/मानार्थ ताकत(complimentary strengths) को देखते हुए हमने एक ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स भी बनाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों मे ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में यह बहुत उपयोगी रहेगा।
  • भारत और जर्मनी दोनों को ही अन्य देशों में विकास सहयोग का लम्बा अनुभव है। अपने अनुभवों को जोड़ कर त्रिपक्षिया सहयोग के जरिये तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य करने का भी निर्णय लिया है। 
  • हाल ही में हमने बहुत कम समय में UAE तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किये। EU के साथ भी भारत FTA वार्ताओं में शीघ्र प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत के कुशल कामगारों और प्रोफेशनल्स से कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिला है।
  • इसके साथ ही भारत और जर्मनी के बीच हो रहे व्यापक प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौते से दोनों देशों के बीच आवाजाही सुगम बनेगी।

2. नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री (एनओएआर) ने सफलतापूर्वक काम करना शुरू किया: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन: 

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

प्रारंभिक परीक्षा:  नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री (एनओएआर) ।   

प्रसंग: 

  • नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री (एनओएआर) ने 1 मई 2022 से सफलतापूर्वक काम करना शुरू कर दिया है।  

उद्देश्य:

  • एनओएआर को एक एकीकृत सिंगल विंडो इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के रूप में डिजाइन किया गया है, जो अल्‍पकालिक खुली पहुंच वाली एप्‍लीकेशन की इलेक्‍ट्रॉनिक प्रोसेसिंग के लिए ओपन एक्सेस प्रतिभागियों, व्यापारियों, पावर एक्सचेंजों, राष्ट्रीय / क्षेत्रीय / राज्य लोड डिस्पैच केन्‍द्रों सहित सभी हितधारकों के लिए उपलब्‍ध है। 
  • इसके कारण अंतर-राज्‍यीय ट्रांसमिशन प्रणाली में अल्‍पकालिक खुली पहुंच की व्‍यवस्‍था को स्वचालित किया जा सकता है।

विवरण:  

  • एनओएआर प्लेटफॉर्म आरएलडीसी या एसएलडीसी द्वारा स्थायी मंजूरी और खुली पहुंच वाले ग्राहकों को अल्‍पकालिक खुली पहुंच प्रदान करने तथा हितधारकों को इस तरह की सूचनाएं उपलब्‍ध कराने सहित अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन में अल्‍पकालिक ओपन एक्सेस से जुड़ी सूचनाओं के भंडार के रुप में कार्य करेगा। 
  • हितधारकों को ऑनलाइन भुगतान करने और एनओएआर के साथ एकीकृत वित्तीय लेखांकन और अल्पकालिक ओपन एक्सेस लेनदेन पर नजर रखने की सुविधा प्रदान करेगा।
  • पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (पोस्‍को) द्वारा संचालित नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) को एनओएआर के कार्यान्वयन और संचालन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। 
  • एनओएआर बिजली बाजारों की तेजी से सुविधा और ग्रिड में अक्षय ऊर्जा (आरई) के एकीकरण को सक्षम करने में महत्‍वपूर्ण होगा। 
  • एनओएआर अल्पकालिक बिजली बाजार तक आसान और तेज पहुंच के साथ खुली पहुंच वाले उपभोक्ता द्वारा निर्बाध बाजार भागीदारी को सक्षम करेगा, जिसमें अखिल भारतीय मांग का लगभग 10 प्रतिशत शामिल है।
  • एनओएआर विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की पहल का हिस्सा है और सीईआरसी ने आवश्‍यक नियामक ढांचे को अंतर-राज्‍यीय ट्रांसमिशन में खुली पहुंच के 5वें संशोधन नियम के संचालन के माध्यम से अधिसूचित किया है।

 3. सी-डॉट और सी-डैक ने दूरसंचार और आईसीटी के विविध क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए: 

सामान्य अध्ययन: 2,3

शासन,विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी: 

विषय:सरकार की विज्ञानं समर्पित योजनाएं एवं दैनिक जीवन में विकास एवं उनके अनुप्रयोग और प्रभाव तथा उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।   

प्रारंभिक परीक्षा:  सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट),सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक)।  

मुख्य परीक्षा:  उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास करने के लिए सी-डॉट और सी-डैक के बीच साझेदारी से किस प्रकार देश की दूरसंचार और आईसीटी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी?

प्रसंग: 

  • संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केन्‍द्र सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की एक स्वायत्त वैज्ञानिक सोसायटी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने स्वदेशी तकनीकी डिजाइन और विकास को बढ़ावा देने के लिए दूरसंचार और आईसीटी के विविध क्षेत्रों में एक साथ काम करने के उद्देश्य से 30 अप्रैल, 2022 को बैंगलोर में सेमीकॉनइंडिया 2022 कार्यक्रम में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। 

उद्देश्य:

  • एमओयू पर हस्ताक्षर करने से दोनों संगठनों को अपने-अपने कार्य क्षेत्र में एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। 

विवरण:  

  • सी-डॉट संचार मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संगठन है, जो नैरोबैंड और ब्रॉडबैंड स्विचिंग और ट्रांसमिशन नेटवर्क, टेरेस्ट्रियल रेडियो सिस्टम, सैटेलाइट सिस्टम, ऑप्टिकल संचार उपकरण, नेटवर्क प्रोटोकॉल, आधुनिक सुरक्षा समाधान और नेटवर्क प्रबंध प्रणालियों में उन्नत अनुसंधान और विकास कायों को अंजाम देता है। 
  • सी-डॉट को देश में स्वदेशी दूरसंचार क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है। विशेष रूप से भारतीय परिदृश्य के अनुकूल तीन दशक से अधिक समय से दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और उत्पादन में अपने अथक अनुसंधान एवं विकास प्रयासों के साथ सी-डॉट प्रौद्योगिकी में सबसे आगे रहा है और इसने भारतीय दूरसंचार नेटवर्क के डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • सी-डैक की स्थापना सामाजिक आर्थिक प्रगति के लिए इलेक्ट्रॉनिक और आईसीटी प्रौद्योगिकियों और एप्‍लीकेशनों के डिजाइन, विकास के लिए एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्थान के रूप में उभरने के लिए की गई थी।
  • इसका लक्ष्‍य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की सीमाओं का विस्तार करने, प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने, संरचना, राष्‍ट्रीय दृष्टि से महत्‍वपूर्ण समस्‍याओं के लिए व्‍यवस्‍था और मानक, प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग के माध्यम से भाषा की बाधाओं को दूर करके ज्ञान का तेजी से प्रसार करने, अनुभव साझा करने और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नत क्षमता का निर्माण करने में मदद करने के लिए अनुभव और जानकारी का आदान-प्रदान और इसे व्यावसायिक अवसरों में परिवर्तित करके बौद्धिक संपदा का उपयोग करना है।
  • सी-डॉट और सी-डैक दोनों 4जी/5जी, ब्रॉडबैंड, आईओटी/एम2एम, पैकेट कोर, कंप्यूटिंग आदि के क्षेत्रों में  विकास में सहयोग करने और संयुक्त रूप से काम करने के लिए सहमत हुए हैं।
  • उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास करने के लिए सी-डॉट और सी-डैक के बीच साझेदारी से देश की दूरसंचार और आईसीटी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • यह सब राष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत करेगा, उन्हें सुरक्षित रखेगा, सहज कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा और उन्नत एप्लिकेशन प्रदान करेगा जो “आत्मनिर्भर भारत” की नींव को मजबूत करेगा।
  • सी-डॉट ने स्वदेशी रूप से 4 जी / एलटीई समाधान विकसित किए हैं और 5 जी पर काम कर रहे हैं और हमें उम्‍मीद है कि डॉट और सी-डैक दोनों द्वारा पारस्परिक रूप से पहचाने गए अन्य क्षेत्रों के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान के लिए हम सी-डॉट के साथ काम करेंगे।
  • सी-डॉट और सी-डैक ने “आजादी का अमृत महोत्सव” के उत्सव के हिस्से के रूप में देश में डिजिटल परिवर्तन के लिए स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई है।

 4. कृषि में ड्रोन का होगा बहुआयामी उपयोग:  

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था: 

विषय:  भारतीय अर्थव्यवस्था में ड्रोन के उपयोग की पहल के माध्यम से विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कीटनाशकों व पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए ‘किसान ड्रोन’ के उपयोग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)।   

मुख्य परीक्षा:  सरकार द्वारा कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग की पहल देश के किसानों के व्यापक हित में  कितनी लभदायक होगी?

प्रसंग: 

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने “किसान ड्रोन को बढ़ावा: मुद्दे, चुनौतियां और आगे का रास्ता” विषय पर सम्मेलन का शुभारंभ किया। 

विवरण:  

  • इसमें उन्होंने बताया कि सरकार किसानों की सुविधा, लागत घटाने व आय बढ़ाने के लिए ड्रोन उपयोग को बढ़ावा दे रही है। 
  • इसके लिए ड्रोन खरीदने में विभिन्न वर्गों को छूट प्रदान की गई है।
  • व्यक्तिगत तौर पर ड्रोन खरीद के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए है, जिसके अंतर्गत अनुसूचित जाति- जनजाति, लघु और सीमांत, महिलाओं एवं पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए ड्रोन की खरीद हेतु ड्रोन लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
  • अन्य किसानों को 40 प्रतिशत अथवा अधिकतम 4 लाख रु. की सहायता दी जाएगी।
  • सरकार ने किसानों के व्यापक हित में कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग की पहल की है।
  • फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कीटनाशकों व पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए ‘किसान ड्रोन’ के उपयोग को सरकार बढ़ावा दे रही है, जिसका बजट में भी प्रावधान किया गया है।
  • इस प्रौद्योगिकी को किसानों व अन्य हितधारकों के लिए किफायती बनाने हेतु कृषि यंत्रीकरण पर उपमिशन के तहत आकस्मिक व्यय के साथ-साथ, फार्म मशीनरी प्रशिक्षण व परीक्षण संस्थानों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों व राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को ड्रोन की खरीद हेतु लागत के 100% की दर से सहायता प्रदान की जाएगी।
  • किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को कृषि ड्रोन लागत का 75% तक अनुदान दिया जाएगा।
  • ड्रोन से कृषि सेवाएं प्रदान करने के लिए किसान सहकारी समिति व ग्रामीण उद्यमियों के तहत मौजूदा व नए कस्टम हायरिंग केंद्रों (सीएचसी) द्वारा ड्रोन खरीद के लिए ड्रोन व इसके पुर्जों की मूल लागत की  40% की दर से या 4 लाख रु. तक, जो भी कम हो, वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • सीएचसी स्थापना करने वाले कृषि स्नातक ड्रोन लागत के 50% की दर से अधिकतम 5 लाख रु. तक वित्तीय सहायता के पात्र हैं।
  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय देशभर में कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई स्कीमों के माध्यम से राज्य सरकारों को सहायता-सुविधा प्रदान कर रहा है और विभिन्न कृषि कार्यों से जुड़े मानव परिश्रम को कम करने के अलावा उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने, बीजों, उर्वरकों व सिंचाई जल जैसे आदानों की उपयोग दक्षता में सुधार के लिए किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुंच में मदद कर रहा है।

 प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं। 

02 May 2022 : PIB विश्लेषण  :-Download PDF Here
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