19 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

1. प्रधानमंत्री ने जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की आधारशिला रखी: 

सामान्य अध्ययन: 2

स्‍वास्‍थ्‍य: 

विषय:  पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना और नवाचार करना।

प्रारंभिक परीक्षा:डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन ।   

मुख्य परीक्षा:  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री ने जामनगर में मॉरीशस के प्रधानमंत्री श्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस घेब्रेयसस की उपस्थिति में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जीसीटीएम) की आधारशिला रखी।  

उद्देश्य:

  • जीसीटीएम दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा के लिए पहला और एकमात्र वैश्विक आउटपोस्ट केंद्र होगा। यह वैश्विक कल्याण के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरेगा। 

विवरण:  

  • यह सेंटर वास्तव में एक वैश्विक परियोजना हैं, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 107 सदस्य देशों में इसके विशिष्ट सरकारी कार्यालय हैं, जिसका अर्थ है कि दुनिया पारंपरिक चिकित्सा में नेतृत्व के लिए भारत आएगी। 
    • पारंपरिक दवाओं के उत्पाद विश्व स्तर पर प्रचुर मात्रा में हैं और केंद्र पारंपरिक चिकित्सा के वादे को पूरा करने में एक लंबा सफर तय करेगा। 
  • दुनिया के कई क्षेत्रों के लिए पारंपरिक चिकित्सा, उपचार का पहला चरण है। 
  • नया केंद्र डेटा, नवाचार और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करेगा और पारंपरिक चिकित्सा के उपयोग का अनुकूलन करेगा। 
  • डॉ. टेड्रोस घेब्रेयसस ने कहा कि केंद्र के पांच मुख्य क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नेतृत्व, साक्ष्य एवं शिक्षा, डेटा एवं विश्लेषण, स्थायित्व एवं समानता तथा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी शामिल होंगे।
  • “डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन के साथ वेलनेस के क्षेत्र में जामनगर के योगदानों को वैश्विक पहचान मिलेगी।”
  • गौरतलब हैं कि पांच दशक से भी अधिक समय पहले, जामनगर में विश्व की पहली आयुर्वेद यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी। यहां एक बेहतरीन आयुर्वेद संस्थान- इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद है।
  • प्रधानमंत्री ने नए केंद्र के लिए पांच लक्ष्य निर्धारित किए है:
    • पहला, प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए पारंपरिक ज्ञान प्रणाली का डेटाबेस बनाना;
    • दूसरा, जीसीटीएम पारंपरिक दवाओं के परीक्षण और प्रमाणन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक बना सकता है ताकि इन दवाओं पर विश्वास बढ़े।
    • तीसरा, जीसीटीएम को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जाएगा जहां पारंपरिक दवाओं के वैश्विक विशेषज्ञ एक साथ आएंगे और अनुभव साझा करेंगे। उन्होंने केंद्र से एक वार्षिक पारंपरिक चिकित्सा उत्सव की संभावना तलाशने को भी कहा।
    • चौथा, जीसीटीएम को पारंपरिक दवाओं के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए धन जुटाना चाहिए।
    • अंत में, जीसीटीएम को विशिष्ट रोगों के समग्र उपचार के लिए प्रोटोकॉल विकसित करना चाहिए ताकि रोगियों को पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा दोनों से लाभ मिल सके।

2. राष्ट्रीय राजमार्ग प्री-कास्ट कंक्रीट नीति: 

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था: 

विषय: एमएसएमई सेक्टर के विकास में तेजी लाने में इसकी भूमिका। 

प्रारंभिक परीक्षा:  प्री-कास्ट कंक्रीट नीति। 

प्रसंग: 

  • औद्योगीकृत प्री-कास्ट कंक्रीट में सभी मौसमों के अनुकूल तथा त्वरित निर्माण, भरोसेमंद गुणवत्ता तथा उन्नत निष्पादन स्थायित्व के कारण सौंदर्य बोध, साइट पर निम्न निर्माण कार्यकलापों के कारण न्यूनतम यूजर समय विलंब/कम कार्बन उत्सर्जन/ निम्न ध्वनि तथा वायु प्रदूषण आदि के लाभ शामिल हैं।  

उद्देश्य:

  •  इसके अतिरिक्त, यह एमएसएमई सेक्टर के विकास में तेजी लाने में भी एक अभिन्न भूमिका निभाएगा। 

विवरण:  

  • राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे तथा अन्य केंद्रीय प्रायोजित सड़क परियोजनाओं के निर्माण में प्री-फैब्रिकेशन के लाभ के लिए, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्री-कास्ट फैक्टरी के 100 किमी दायरे के भीतर की परियोजनाओं में फैक्टरी विनिर्मित प्री-कास्ट कंक्रीट नीति को अनिवार्य बना दिया है। 
  • न्यूनतम अनिवार्य उपयोग पुलों/वायडक्ट/आरओबी की नीवों तथा उप-संरचनाओं के अतिरिक्त कुल कंक्रीट वाल्यूम का 25 प्रतिशत होना चाहिए।
  • प्री-कास्ट फैक्टरी भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई )/एनसीसीबीएम/आरडीएसओ/आईआईटी द्वारा प्रमाणित होगी तथा इसमें बेहतर गुणवत्ता के लिए पूरी तरह ऑटोमैटिक आरओ प्लांट, भाप उपचार के लिए व्यवस्था, कंक्रीट तथा प्री कास्ट कंपोनेंट के यांत्रिक संचालन, बार बेंडिंग मशीनों, स्टैकिंग यार्ड, इन-हाउस डिजाइन टीम तथा एनएबीएल प्रत्यायित गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला, जल शोधन आदि की सुविधा होगी।

3. “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज: कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना” की अवधि 180 दिन और बढ़ा दी गई है: 

सामान्य अध्ययन: 2

स्‍वास्‍थ्‍य: 

विषय: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का स्वास्थकर्मियों हेतु लाभ,प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज। 

प्रसंग: 

  • ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी), कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना’ की अवधि 19 अप्रैल, 2022 से 180 दिन और बढ़ा दी गई है।  

उद्देश्य:

  • इस बीमा पॉलिसी की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है ताकि उन स्वास्थ्य कर्मियों के आश्रितों के लिए सुरक्षा कवच उपलब्ध कराना जारी रखा जा सके जो कोविड-19 रोगियों की देखभाल के लिए नियुक्त हैं। 

विवरण:  

  • पीएमजीकेपी को 30 मार्च, 2020 को सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों और निजी स्वास्थ्य कर्मियों सहित उन 22.12 लाख स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को 50 लाख रुपये का व्यापक व्यक्तिगत दुर्घटना कवर प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया था ।
  • इसके अलावा अप्रत्याशित स्थिति के कारण राज्यों/केंद्रीय अस्पतालों/केंद्र/राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के  स्वायत्त अस्पतालों, एम्स और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों/अस्पतालों कोविड-19 रोगियों की देखभाल के लिए केंद्रीय मंत्रालयों के अस्पतालों द्वारा विशेष रूप से तैयार अस्पतालों द्वारा अधिग्रहण किए गए निजी अस्पताल के कर्मचारी/सेवानिवृत्त/स्वयंसेवक/स्थानीय शहरी निकाय/अनुबंध/दैनिक वेतन/एडोक/आउटसोर्स स्टाफ भी पीएमजीकेपी के अंतर्गत आते हैं।
  • योजना के शुभारंभ के बाद से अब तक उन 1905 स्वास्थ्य कर्मियों के दावों का निपटारा किया जा चुका है, जिनकी कोविड संबंधित कार्यों के लिए तैनात किए जाने के दौरान मृत्यु हो गई थी।

4. प्लाज्मा आधारित हरित कीटाणुनाशक से कोविड-19 जैसे संक्रामक रोगों के प्रसार पर लग सकती है लगाम: 

सामान्य अध्ययन: 2,3

स्‍वास्‍थ्‍य,विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी : 

विषय:  विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी का कोविड-19 जैसे संक्रामक रोगों के प्रसार को सीमित करने में योगदान। 

प्रारंभिक परीक्षा:शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा (सीएपी) ।   

प्रसंग: 

  • शोधकर्ताओं ने शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा (सीएपी) की मदद से उत्पन्न प्लाज्मा-आधारित एक कीटाणुनाशक विकसित किया है जो कोविड-19 के लिए एक हरे रंग के परिशोधक के रूप में कार्य कर सकता है। 

उद्देश्य:

  • कोविड-19 महामारी ने एक परिशोधकों की तत्काल आवश्यकता पैदा कर दी है जो संपर्क के माध्यम से संक्रामक रोगों के प्रसार को सीमित कर सकता है। 
  • हालांकि, अधिकांश परिशोधकों में ऐसे रसायन होते हैं जो पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं। इसी कारण शोधकर्ता हरित विकल्पों की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित हुए।

विवरण:  

  • शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्रदर्शित किया है कि शीत वायुमंडलीय दबाव (सीएपी) द्वारा उत्पन्न प्लाज्मा में सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन को निष्क्रिय करने की क्षमता है, जो वायरल संक्रमण और बाद में कोविड -19 को प्रेरित करने के लिए मानव एसीई-2 रिसेप्टर यानी अभिग्राहक को जमा देता है अर्थात उसे जकड़ लेता है।
  • प्लाज्मा, पदार्थ की चौथी अवस्था है जो प्रयोगशाला में नियंत्रित परिस्थितियों में उत्पादित होने पर ब्रह्मांड का अधिकांश भाग बनाती है और इसे शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा (सीएपी) कहा जाता है।
  • वैज्ञानिकों ने एक उच्च वोल्टेज विद्युत क्षेत्र के माध्यम से हीलियम, ऑर्गन और वायु जैसे प्लाज्मा बनाने वाली गैसों को पास किया, जिसके कारण आयनों के मिश्रण के साथ एक स्थिर प्लाज्मा और अभिक्रिया कक्ष के भीतर सीएपी की एक गुलाबी चमक का उत्सर्जन करने वाले इलेक्ट्रॉनों का निर्माण होता है।
  • प्लाज्मा में उत्पन्न अल्पकालिक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन और नाइट्रोजन प्रजातियां (आरओएस/ आरएनएस) ने सीएपी उपचार के 2 मिनट के भीतर सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन को पूरी तरह से निष्क्रिय कर देता है।
  • आरटी-पीसीआर विश्लेषण ने यह भी स्थापित किया है कि सीएपी सार्स-सीओवी-2 वायरस के आरएनए को निष्क्रिय कर सकता है।
  • शोधकर्ताओं ने बताया कि सीएपी, एक प्लाज्मा-आधारित कीटाणुशोधन विधि पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक रासायन-आधारित परिशोधन विधियों का एक बेहतर विकल्प है।
  • “शीत वायुमंडलीय प्लाज्मा पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, क्योंकि प्लाज्मा उपचार द्वारा पूरी परिशोधन प्रक्रिया के दौरान, कोई रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं। 

19 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण  :-Download PDF Here

लिंक किए गए लेख में 18 अप्रैल 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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