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27 मार्च 2023 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. नई दिल्ली में 23वें इंडियासॉफ्ट का उद्घाटन:
  2. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए संरक्षण योजना:  
  3. केंद्र सरकार ने तुअर दाल के भंडार की ताजा स्थिति की निगरानी के लिए समिति का गठन किया: 

1. नई दिल्ली में 23वें इंडियासॉफ्ट का उद्घाटन:

सामान्य अध्ययन: 3

आर्थिक विकास:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं योजना तथा संसाधन संग्रहण, संवृद्धि एवं विकास से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: इंडियासॉफ्ट से सम्बंधित तथ्य।   

प्रसंग: 

  • केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में इंडियासॉफ्ट के 23वें संस्करण का उद्घाटन किया हैं। 

उद्देश्य:

  • इसमें सभी देशों की भारत की विकास गाथा में हिस्सदारी होगी क्योंकि विकसित की गई प्रौद्योगिकियों और समाधानों की सार्वभौमिक प्रासंगिकता होगी।  
  • इंडियासॉफ्ट के अगले तीन दिनों के दौरान 70 से अधिक नए उत्पाद लांच किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत के अनुसंधान एवं विकास के अत्यधिक प्रतिभाशाली लोगों की टीम के प्रयासों के माध्यम से विकसित और परिपूर्ण किया गया है।   

विवरण:  

  • केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत 32 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ एक विकसित देश बन जाएगा जो भारत और वैश्विक समुदाय के लिए भी समान रूप से एक निर्णायक क्षण होगा। 
    • विकास का यह परिमाण आईसीटी सेक्टर में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों से अत्यधिक प्रभावित होगा।
  • यह उस प्रकार की उपलब्धियों को दर्शाता है जो भारत ने डिजिटल क्षेत्र में अर्जित किया है और ये 2047 तक एक विकसित देश बनने के भारत के संकल्प को और भी मजबूत बनाती हैं।
  • भारत का निर्यात, वस्तु एवं सेवा निर्यात दोनों ही, वित्त वर्ष 2021-22 के 650 बिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2022-23 तक 750 बिलियन की ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। 
    • सेवा निर्यात, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं का योगदान भारत के निर्यात लक्ष्यों तक पहुंचने में उल्लेखनीय होगा।
  • वर्ष 2027 तक भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। 
    • अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष में हम एक विकसित देश बन जाएंगे।
  • इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 80 देशों के 650 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 1500 से अधिक भारतीय प्रदर्शक इस कार्यक्रम तथा इससे जुड़े अन्य कार्यक्रमों में अपने उत्पादों तथा समाधानों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • वर्ष 2030 तक भारत का आईसीटी सेक्टर 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा जो देश द्वारा अनुसंधान एवं विकास, नवोन्मेषण और व्यवधानों को दूर करने पर दिए जाने वाले ध्यान के कारण संभव हो पाएगा। 
  • भारत निर्यात की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। 
    • जब हमने 80 के दशक के आखिर में सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं का निर्यात करना आरंभ किया था, तो यह केवल 50 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़ कर 200 बिलियन डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया है। 
  • भारत ने विभिन्न स्कीमों को लागू करने के द्वारा सार्वजनिक सेवाओं को डिजिटलीकृत किया है जो नागरिकों को सरकारी डिलीवरी प्रणाली से सेवाओं तक सहजता से पहुंच बनाने में सक्षम बनाती है।

2. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए संरक्षण योजना:

सामान्य अध्ययन: 3

जैव विविधता:

विषय: पारिस्थिकी एवं पर्यावरण की रक्षा हेतु जैव विविधता का संरक्षण,उद्धार और वृद्धि के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण और मार्गदर्शक सिद्धांत।

प्रारंभिक परीक्षा: वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972,ग्रेट इंडियन बस्टर्ड।

प्रसंग: 

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राजस्थान सहित देश में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण और सुरक्षा के लिए विभिन्न उपाय कर रहा है।

उद्देश्य:

  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को संरक्षण प्रदान करना।   

विवरण:  

इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार हैं:

    • द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है, जिसके अनुसार यह शिकार से उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स के महत्वपूर्ण आवासों को उनकी बेहतर सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय उद्यानों/अभयारण्यों के रूप में नामित किया गया है।
    • केंद्र प्रायोजित योजना- वन्यजीव आवासों के विकास के घटक ‘प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम’ के तहत संरक्षण प्रयासों के लिए प्रजातियों की पहचान की गई है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और इसके आवास को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने की योजना के तहत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का संरक्षण प्रजनन राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र वन विभागों के सहयोग से और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तकनीकी सहयोग से किया गया है।
      • जिसका उद्देश्य जंगल में रिहाई के लिए प्रजातियों की एक बंदी आबादी का निर्माण करने और प्रजातियों के इन-सीटू संरक्षण को बढ़ावा देना हैं।
    • राजस्थान और गुजरात के वन विभागों, भारतीय वन्यजीव संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के परामर्श से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लेसर फ्लोरिकन पक्षियों के संरक्षण प्रजनन केंद्रों की स्थापना के लिए स्थलों की पहचान की गई है।
    • राजस्थान में सैम, जैसलमेर में एक उपग्रह संरक्षण प्रजनन सुविधा स्थापित की गई है।
  • मंत्रालय केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है:
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सहित वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन्यजीव आवासों का विकास।
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के इन-सीटू संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार से मंत्रालय को एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था।
  • मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को सूचित किया है कि राज्य योजना और/या राज्य कैम्पा निधियों से वित्त पोषण सहायता पर विचार करने के लिए प्रस्ताव को राज्य वन्य जीवन बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1. केंद्र सरकार ने तुअर दाल के भंडार की ताजा स्थिति की निगरानी के लिए समिति का गठन किया:

  • उपभोक्ता कार्य विभाग ने अपर सचिव श्रीमती निधि खरे की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।
    • यह समिति राज्य सरकारों के साथ मिलकर निकट समन्वय में आयातकों, मिल मालिकों, जमाकर्ताओं, व्यापारियों आदि जैसी संस्थाओं द्वारा जमा किए गए अरहर दाल के भंडार की निगरानी करेगी। 
    • समुचित मात्रा में दलहन आयात की लगातार आवक होने के बावजूद बाजार के भंडार संघों द्वारा स्टॉक जारी नहीं किये जाने की खबरों की वजह से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
  • भंडार की ताजा स्थिति की निगरानी के लिए इस समिति गठित करने की नवीनतम घोषणा बाजार में जमाखोरों और बेईमान सट्टेबाजों से निपटने के लिए सरकार की मंशा को दर्शाती है। 
    • यह निर्णय आने वाले महीनों में अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के सरकार के दृढ़ संकल्प को भी प्रकट करता है। 
    • इसके अलावा, केंद्र सरकार घरेलू बाजार में अन्य दालों के भंडार की स्थिति पर भी बहुत बारीकी से नजर रख रही है ताकि वर्ष के आगामी महीनों के दौरान दालों के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
  • यहां पर स्मरण रखने योग्य तथ्य यह है कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत तुअर दाल की उपलब्धता के संबंध में भंडार को प्रदर्शित करने की व्यवस्था को लागू करने के उद्देश्य से 12 अगस्त, 2022 को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया था। 
  • सरकार ने एक और पहल करते हुए गैर-एलडीसी देशों से अरहर दाल आयात के लिए लागू 10 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया है क्योंकि कोई भी शुल्क इन एलडीसी देशों से शून्य शुल्क आयात के लिए भी कार्यविधि संबंधी समस्याएं उत्पन्न करता है।

 

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सम्बंधित लिंक्स:

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