नारी शक्ति पुरस्कार

भारत के राष्ट्रपति  श्री राम नाथ कोविंद ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2022 को   राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में 2020 और 2021 के लिए ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ प्रदान किए। यह पुरस्कार वर्ष 2020 और 2021 में  उत्कृष्ट और असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली 28 महिलाओं को प्रदान किए गए। 

इस पुरस्कार का उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धियों को स्वीकार करना है | महिला एवं  बाल विकास मंत्रालय,भारत सरकार  महिलाओं और संस्थानों को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उनकी  सेवा और  सकारात्मक बदलाव लाने के उत्प्रेरक के रूप में उनकी सराहना करने के लिए नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान करता है। कोविड वैश्विक  महामारी के कारण वर्ष 2021 में 2020 के लिए ये पुरस्कार समारोह आयोजित नहीं किये गये थे | इस लेख में  2022 के नारी शक्ति पुरस्कार विजेताओं के बारे में विस्तृत जनकारी दी गई है | हिंदी माध्यम में यूपीएससी से जुड़े मार्गदर्शन के लिए अवश्य देखें हमारा हिंदी पेज  आईएएस हिंदी |

परीक्षोपयोगी मुख्य बिंदु :

  • नारी शक्ति पुरस्कार के अवसर पर आमतौर पर अधिकतम 15 पुरस्कार दिए जाते हैं | वर्ष 2020 और 2021- प्रत्येक के लिए इस वर्ष 14-14 पुरस्कार वितरित किये गये |
  • नारी शक्ति पुरस्कार 1999 से प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं |
  • इस पुरस्कार के अंतर्गत प्रत्येक विजेता को एक प्रशस्ति पत्र तथा  2 लाख रूपए की राशी प्रदान की जाती है |
  • यह पुरस्कार महिला एवं  बाल विकास मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा दिया जाता है |
  • पुरस्कार के लिए नामित आवेदक की उम्र न्यूनतम 25 वर्ष होनी चाहिए |
  • कई बार यह पुरस्कार  महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं जैसे गैर सरकारी संस्थाओं (NGO) इत्यादि को भी दिया जाता है,किंतु  ऐसी संस्थाएं कम से कम 5 वर्ष पुरानी होनी चाहियें |
  • एक ही महिला या संस्था को यह पुरस्कार 2 या 2 से अधिक बार नहीं दिया जाता |
  • आमतौर पर यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता (किंतु इस वर्ष त्रिपुरा की प्रसूति एवं स्त्री रोग चिकित्सक डॉ.इला लोध को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया गया )
  • यह पुरस्कार निम्नलिखित 6 श्रेणियों में दिया जाता है :
  1. रानी लक्ष्मीबाई :- महिला सशक्तिकरण के लिए 
  2. रानी गिदालू :- महिला कल्याण के लिए 
  3. माता जिजाबाई :-शहरी क्षेत्र में कार्य  के लिए 
  4. देवी  अहिल्या बाई होलकर :-महिला कल्याण के लिए
  5. रानी रुद्रम्मा :-महिला शिक्षा के क्षेत्र में कार्य के लिए 
  6. कन्नागी देवी :- महिला लिंगानुपात के क्षेत्र में कार्य के लिए 

1.अनीता गुप्ता : अनीता गुप्ता बिहार के भोजपुर जिले की  एक सामाजिक उपक्रमी हैं जिन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित होने के बाद ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य ,शिक्षा एवं व्यवसाय  लिए एक गैर सरकारी संस्था ( N.G.O) एवं स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की स्थापना की |

2.आरती राणा : उत्तर प्रदेश की आरती राणा एक हथकरघा बुनकर एवं शिक्षिका हैं | उन्होंने जनजातीय महिलाओं की उन्नति के लिए विशेष कार्य किया है |

3.डॉ.इला लोध: पेशे से प्रसूति एवं स्त्री रोग चिकित्सक त्रिपुरा की  डॉ.इला लोध ने हेपेटाइटिस फाउंडेशन की स्थापन की और महिला  स्वास्थ्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है | उन्हें यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया गया |

4.जया मुत्थु एवं तेजम्मा (संयुक्त रूप से ) : तमिलनाडु की जया मुत्थु एवं तेजम्मा , निलगिरी की विख्यात  बारीक “टोडा कढाई” वाली  वस्त्र शिल्पी हैं | इन दोनों महिलाओं ने न केवल अन्य महिलाओं को रोजगार दिया बल्कि इस लुप्त होती विरासत का भी संरक्षण किया है |

5.जोधेया बाई बैगा : मध्य प्रदेश   की जोधेया बाई बैगा एक जनजातीय चित्रकार (tribal artist) हैं | उनके चित्रों का प्रदर्शन इटली और फ्रांस जैसे देशों की प्रदर्शनियों में भी हो चुका है |

6.मीरा ठाकुर : पंजाब की मीरा ठाकुर एक सक्की घास कलाकार हैं जो एक लोक हस्त कला शिल्प प्रशिक्षण केंद्र भी चलाती हैं |

7.नासिरा अख्तर : जम्मू कश्मीर की नासिरा अख्तर को यह पुरस्कार पॉलिथीन के  जैव -निम्नीकरण (biodegradable) की तकनीक  खोजने के लिए दिया गया है |

8.निवृति राय : कर्नाटक की निवृति राय  को सेमी-कंडक्टर चिप बनाने के लिए प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया गया |

9.पद्मा यांग्चन : लेह -लदाख की डिजाइनर  पद्मा यांग्चन   को क्षेत्रीय  बुनाई -कढाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक लाने में योगदान देने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया |

10.संध्या धर : जम्मू कश्मीर की संध्या धर एक दिव्यांग सामजिक कार्यकर्त्ता हैं जिन्होंने दिव्यान्गों के लिए स्वरोजगार सृजन और ऋण के क्षेत्र में कार्य किया है |

11.सायली नन्द किशोर : महाराष्ट्र की सायली नन्द किशोर एक कथक नृत्यांगना हैं जो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं | (डाउन सिंड्रोम एक आनुवांशिक बिमारी  है जिसमे  आमतौर पर शारीरिक विकास में धीमी गति और निम्न   से मध्यम बौद्धिक विकलांगता पाई जाती है । डाउन सिंड्रोम से पीड़ित   एक वयस्क व्यक्ति  का औसत  बौद्धिक स्तर 50 होता है जो की  8 वर्षीय बच्चे की मानसिक क्षमता के बराबर है ) |

12.टिफ्फ्नी बरार : केरल की नेत्रहीन सामाजिक कार्यकर्त्ता टिफ्फ्नी बरार ने अपने ज्योतिर्मय फाउंडेशन के जरीय अन्य नेत्रहीन महिलाओं की जीवन गुणवत्ता को सुधारने का कार्य किया है |

13.उशा बेन दिनेश भाई वसावा  : गुजरात की उशा बेन दिनेश भाई वसावा एक जैविक कृषक और आदिवासी कल्याण कार्यकर्त्ता हैं जिन्होंने वंचित आदिवासी महिलाओं को उनका भूमि अधिकार दिलाया है |

14.वनिता जग्देओ बोराडे : महाराष्ट्र की वनिता जग्देओ बोराडे एक विख्यात सर्प मित्र (सर्प बचाव कार्यकर्त्ता)  हैं जिन्हें प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के लिए  यह पुरस्कार प्रदान किया गया है | उन्हें  अब तक 50,000 से भी अधिक साँपों की रक्षा का श्रेय जाता है | महाराष्ट्र सरकार ने भी  उन्हें “छत्रपति शिवाजी महाराज वन श्री पुरस्कार” से सम्मानित किया है |

15.अंशुल मल्होत्रा : हिमाचल प्रदेश की अंशुल मल्होत्रा हस्तकरघा उद्द्योग के क्षेत्र में कार्य करती हैं और ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त में हस्तकरघा का प्रशिक्षण देती हैं |

16.बतूल बेगम : राजस्थान की मांड और भजन लोक गायिका बतूल बेगम को भारतीय लोक संगीत को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए  यह पुरस्कार दिया  गया | वह कई प्रकार के वाद्ययंत्र में भी निपुण हैं और उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन कई अंतर्राष्ट्रीय पटलों पर प्रदर्शित भी किया है |

17.कमल कुम्भर : महाराष्ट्र की  कमल कुम्भर को पशुपालन के क्षेत्र में कुशल उद्यमिता के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है  |

18.मधुलिका रामटेके : छत्तीसगढ़ की मधुलिका रामटेके को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है | मधुलिका रामटेके घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की उन्नति के लिए काम करती हैं | उन्होंने ऐसी महिलाओं की वित्तीय सहायता के लिए 2001 में  एक लघु बैंकिंग संस्थान भी स्थापित किया है जिसका नाम “मां बमलेश्वरी बैंक” है | आज इस बैंक की कुल 5372 से भी अधिक शाखाएं हैं | यह बैंक भी पुर्णतः महिलाओं द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित है | उनकी संस्था स्थानीय महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट भी बनाने का प्रशिक्षण देती है |

19.नीना गुप्ता : नीना गुप्ता कलकत्ता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान की गणितग्य, शोधकर्ता व प्राध्यापिका हैं | उन्हें 70 साल पुरानी जारिस्की निरस्तीकरण समस्या (Zariski Cancellation Problem) को हल करने के लिए  यह पुरस्कार प्रदान किया गया है, जो की बीज गणितीय ज्यामिति की एक पुरानी व जटिल समस्या थी  | गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पहले भी “रामानुजन पुरस्कार” और “शान्ति स्वरुप भटनागर ” पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है |

20.नीरजा माधव : उत्तर प्रदेश की नीरजा माधव एक हिंदी लेखिका हैं जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है | “यमदीप” , “तेभ्य” , “स्वधा” , “अवर्ण महिला कोन्स्टेबल की डाएरी” इत्यादि उनकी कुछ प्रमुख रचनाएं हैं |

21.निरंजनाबेन मुकुलभाई  कलार्थी  : पेशे से शिक्षिका ,गुजरात की निरंजनाबेन एक गुजराती साहित्य की  लेखिका भी हैं | “बा और बापू” उनकी एक प्रसिद्द रचना है |

22.पूजा शर्मा : हरियाणा की  पूजा शर्मा एक कृषक -उद्द्यमी (Agro-business person) हैं | उद्द्यमिता के क्षेत्र में कौशल विकास  के लिए उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया |

23.राधिका मेनन : केरल  की राधिका मेनन मर्चेंट नेवी की पहली महिला कप्तान हैं | वे जून 2015 में एमटी सम्पूर्ण स्वराज  जहाज की कमान के दौरान चलाए गए बचाव अभियान में नाव में 7 दिनों तक फंसे रहे मछुआरों को बचाने के कारण सुर्ख़ियों में आई थीं |

23.सतुपति प्रसन्ना श्री : आन्ध्र विश्वविद्यालय की अध्यक्ष सतुपति प्रसन्ना एक भाषाविद हैं जिन्होंने अल्पसंख्यक भाषाओँ को संरक्षित करने की दिशा में अमूल्य योगदान दिया है | उन्होंने कई लुप्त होती भाषाओं के लिए लिपियाँ भी तैयार की हैं |

24.शोभा गस्ती : कर्नाटक की शोभा गस्ती को देवदासी प्रथा के उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने के  लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है |

25.श्रुति महापात्र : उड़ीसा की श्रुति महापात्र एक दिव्यांग अधिकार कार्यकर्त्ता हैं |

26.तगे रीता  ताखे : अरुणाचल प्रदेश की तगे रीता  ताखे एक उद्द्यमी हैं जो देश की पहली ऑर्गनिक किवी वाइन का उत्पादन करती हैं |

27.थारा रंगास्वामी : तमिल नाडू की थारा रंगास्वामी एक मनो चिकित्सक हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन समूह की सदस्य भी रह चुकी हैं |

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