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साहित्य अकादमी पुरस्कार - 2021

30 दिसम्बर 2021 को साहित्य अकादमी पुरस्कारों  की घोषणा की गई | ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद यह देश का दूसरा सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार है जो भारत सरकार के द्वारा साहित्य लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए  प्रदान किया जाता है | प्रतिवर्ष  24 भाषाओं में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाते हैं | ये भाषाएँ हैं :- असमिया, अंग्रेजी , बांग्ला, बोडो, डोगरी गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मैथिली  मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, राजस्थानी ,संथाली, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगू व  उर्दू  | 30 दिसम्बर 2021 को  20 भाषाओं में ही पुरस्कारों की घोषणा की गई थी  | गुजराती, मणिपुरी, मैथिली और उर्दू भाषा के विजेताओं की घोषणा फरवरी 2022 में की गई जिसकी आद्यतन सूचि नीचे तालिका में दी गई है | अंग्रेजी माध्यम में साहित्य अकादमी पुरस्कार की अधिक जानकारी के लिए देखें Sahitya Akademi Awards .

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साहित्य अकादमी पुरस्कार 2021 विजेताओं की सूचि

साहित्य अकादमी पुरस्कार 2021 के विजेता 
भाषा  पुरस्कार प्राप्तकर्ता 
असमिया अनुराधा शर्मा पुजारी
बंगाली ब्रात्य  बसु (‘मीरजाफ़र’ के लिए )
बोडो  मोदाय गाहाय
डोगरी  राज राही 
गुजराती  यज्ञेश दावे (‘गंध मञ्जूषा’ के लिए )
हिंदी  दया प्रकाश सिन्हा (‘सम्राट अशोक’ के लिए)
कन्नड़ नागभूषण 
कश्मीरी  वाली मोहम्मद असीर कश्तवारी
कोंकणी  संजीव वेरेंकार 
मराठी  किरण गुरव 
मैथिलि  जगदीश प्रसाद मंडल (‘पंगु के लिए ’)
मलयालम  जॉर्ज ओनाक्कूर
मणिपुरी  थोकचोम इबोहनवी
नेपाली छविलाल उपाध्याय 
ओड़िया हृषिकेश मल्लिक
पंजाबी  खालिद हुसैन (‘सूलां दा सालण’ के लिए)
राजस्थानी  मीठेश निर्मोही
संस्कृत  विन्देश्वरी प्रसाद मिश्र “विनय” 
संथाली निरंजन हांसदा 
सिन्धी  अर्जुन चावला
तमिल  अम्बई
तेलुगु गोराति वेंकन्ना
उर्दू  चन्द्रभान ख्याल (‘ताज़ा हवा की ताबिशें ’ के लिए )
अंग्रेजी  नमिता गोखले (‘थिंग्स टू लीव बिहाइंड’ के लिए)

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार एवं बाल साहित्य पुरस्कार 2021

मुख्य साहित्य अकादमी पुरस्कारों  के साथ अकादमी ने युवा पुरस्कार एवं बाल साहित्य पुरस्कार 2021 की भी घोषणा की । युवा एवं बाल पुरस्कार 22 भारतीय भाषाओं के लिए दिए गए | साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2021 में हिंदी के लिए हिमांशु वाजपेयी को उनके कहानी-संग्रह “किस्सा किस्सा लखनउवा – लखनऊ के अवामी किस्से’ के लिए, अंग्रेज़ी के लिए मेघा मजुमदार को उनके उपन्यास ‘ए बर्निंग’, उर्दू के लिए उमर फरहत को उनके काव्य संग्रह ‘ज़मीन ज़ाद’ तथा पंजाबी के लिए वीर देविंदर सिंह को उनके निबंध संग्रह ‘पा दे पैलां’  के लिए पुरस्कार दिए गए । पुरस्कार के अन्य  विजेताओं में गौरब चक्रवर्ती (बंगाली), गौतम दैमारी (बोडो), अरुण आकाश देव (डोगरी), एच लक्ष्मी नारायण स्वामी (कन्नड़), श्रद्धा गरद (कोंकणी), लेनिन खुमानचा (मणिपुरी), अमित मिश्रा (मैथिली), और  थगुल्ला गोपाल (तेलुगु) , दृष्टि सोनी (गुजराती), मोबिन मोहन (मलयालम), प्रणव सखादेव (मराठी) और कुना हंसदा (संताली), अभिजीत बोरा (असमिया), रजी ताहिर भगत (कश्मीरी), महेश दहल (नेपाली), श्वेतपद्मा शतपति (संस्कृत), राकेश शेवानी (सिंधी), और देबब्रत दास (उड़िया) के नाम शामिल हैं।

तमिल में पुरस्कार बाद में घोषित किया जाएगा तथा इस वर्ष राजस्थानी में पुरस्कार घोषित नहीं किया जाएगा।

साहित्य अकादमी बाल पुरस्कारों में हिंदी के लिए देवेंद्र मेवाड़ी को उनके नाटक-संग्रह ‘नाटक-नाटक में विज्ञान’, अंग्रेज़ी में अनीता वच्छरजनी को उनकी जीवनी पुस्तक ‘अमृता शेर-गिलः रिबेल विद ए पेंटब्रश’ तथा  उर्दू के लिए कौसर सिद्दीकी को उनके कविता-संग्रह ’चराग फूलों के’ के लिए पुरस्कार दिए गए । अन्य  प्राप्तकर्ताओं में मृणाल चंद्र कलिता (असमिया), सुनीरमल चक्रवर्ती (बंगाली), रत्नेश्वर नारजारी (बोडो), नरसिंह देव जामवाल (डोगरी), बसु बेविनागिडा (कन्नड़), मजीद मजाजी (कश्मीरी), सुमेधा कामत देसाई (कोंकणी), रघुनाथ पलेरी (मलयालम), निंगोमबम जदुमनी सिंह (मणिपुरी), संजय वाघ (मराठी), कीर्ति शर्मा (राजस्थानी), आशा अग्रवाल (संस्कृत), मु. मुरुगेश (तमिल) और देवराजू महाराजू (तेलुगु) के नाम शामिल हैं। गुजराती और पंजाबी भाषा में इस वर्ष  बाल  पुरस्कार नहीं दिए गए | 

उल्लेखनीय है कि साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए रचनाकार की आयु  35 वर्ष या  उससे कम होनी चाहिए |  युवा पुरस्कार व बाल साहित्य पुरस्कार विजेताओं को एक उत्कीर्ण ताम्रफलक और 50,000 रुपये की राशि दी जाती है |

संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाएँ

भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियां (Schedules) हैं जिसमे से 8वीं  अनुसूची में भारत गणराज्य की 22 आधिकारिक भाषाओं को सूचीबद्ध किया गया है। ये भाषाएँ हैं : असमिया, बांग्ला,बोडो, डोगरी गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम,मैथिली  मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी,संथाली, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगू व  उर्दू । इन भाषाओं में से 14 भाषाएँ  संविधान में  प्रारंभ से  ही हैं । वर्ष 1967 में सिंधी भाषा को 21वें सविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 8वीं अनुसूची में शामिल किया गया | वर्ष 1992 में 71वें संशोधन अधिनियम द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को शामिल किया गया। वर्ष 2003 में 92वें सविधान संशोधन अधिनियम जो कि वर्ष 2004 से प्रभावी हुआ, द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को इस  अनुसूची में शामिल किया गया। वर्तमान में भोजपुरी ,कुडुख ,मागधी इत्यादि को भी अनुसूचित भाषा का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्रवार आन्दोलन चलाए जा रहे हैं |

परीक्षोपयोगी मुख्य बिंदु

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 से हुई है |
  • यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है |
  • भारतीय  संविधान की 8वीं अनुसूची  में शामिल 22 अनुसूचित  भाषाओं के अलावा अंग्रेज़ी तथा राजस्थानी भाषा में भी यह पुरस्कार दिया जाता है |
  • पुरस्कार विजेता को पुरस्कार स्वरूप एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है |
  • पुरस्कार का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में लेखन कार्य को पहचान एवं बढ़ावा देना तथा साहित्य में उनके योगदान को और समृद्ध बनाना है |
  • माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी भाषा से इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले प्रथम कवि थे |   

पुरस्कार प्राप्ति की योग्यता व शर्तें 

  • रचनाकार के पास भारत की  राष्ट्रीयता होनी चाहिये।
  • रचना का प्रकाशन भारत में होना चाहिये |
  • पुरस्कार के लिये चयनित रचना ने संबंधित भाषा और साहित्य के क्षेत्र की  समृद्धि में योगदान दिया  हो |
  • एक से अधिक पुस्तकों के बीच प्रतियोगिता की स्थिति में या जब उनके बीच  समान योग्यता हो , तो विजेता  की घोषणा  कुछ निश्चित मानदंडों पर की जाती है जैसे कि :- साहित्य के क्षेत्र में रचनाकार का कुल  योगदान,रचनाकारों की स्थापित प्रतिष्ठा  इत्यादि |
  • रचना का प्रकाशन पिछले 5 वर्षों के दौरान हुआ हो |
  • पुरस्कार चयन के लिए  प्रत्येक  भाषा में तीन-तीन सदस्यों की जूरी गठित की जाती है  और पुरस्कार के लिए विजेता  का चयन या तो आम सहमति से अथवा बहुमत से किया जाता है |

ज्ञानपीठ पुरस्कार क्या है ?

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का  सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार है जो कि “भारतीय ज्ञानपीठ” द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है | यह पुरस्कार  केवल एक भारतीय नागरिक ही प्राप्त कर  सकता है। भारतीय संविधान की 8 वीं अनुसूची  में उल्लिखित 22  भाषाओं के अलावा यह  अंग्रेज़ी में भी  प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के अंतर्गत 11 लाख रुपए की नकद राशि, एक प्रशस्ति पत्र और ज्ञान की देवी सरस्वती की एक कांस्य प्रतिकृति प्रदान की जाती है। 

मलयालम भाषा के लेखक संकर कुरूप इस पुरस्कार के प्रथम विजेता थे (1965) | कोंकणी भाषा के दामोदर मौज़ो इस पुरस्कार  के 57वें और नवीनतम विजेता हैं (2021)

वर्ष 2018 में लेखक अमिताव घोष यह  पुरस्कार पाने  वाले  अंग्रेजी भाषा के प्रथम  लेखक बने।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक :

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