05 जून 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: सुरक्षा:
D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अर्थव्यवस्था:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित
सुरक्षा
मिजोरम में शरणार्थियों का आगमन
विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले बाह्य राज्य और गैर-राज्य तत्त्वों की भूमिका।
मुख्य परीक्षा: भारत में शरणार्थी संकट के विभिन्न मापदंड।
प्रसंग:
- इस लेख में मिजोरम में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या के प्रभावों पर चर्चा की गई है।
भूमिका:
- पिछले कुछ वर्षों में, मिज़ोरम में म्यांमार और हाल ही में बांग्लादेश और मणिपुर से आए शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसने क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है।
- म्यांमार से आए शरणार्थियों की संख्या के संबंध में राज्य सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के बीच विसंगतियां हैं।
- हालाँकि, मणिपुर से लगभग 8,000 व्यक्ति और बांग्लादेश से 900 से अधिक लोग मिज़ोरम में आए हैं, तथा इन संख्याओं के और बढ़ने की आशंका है।
- राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देशानुसार म्यांमार से आने वाले व्यक्तियों को इस आवश्यकता के साथ प्रवेश की अनुमति दी है कि वे उचित रूप से अपना पंजीकरण कराएँ।
- वर्तमान में, शिविर स्थापित किए गए हैं, लेकिन अधिकांश शरणार्थियों ने रिश्तेदारों के साथ रहने या कहीं और रोजगार तलाशने का विकल्प चुना है।
शरणार्थी की आमद के निहितार्थ:
- मिजोरम में मौजूदा आबादी को विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से बड़ी संख्या में आने वाले शरणार्थियों को समायोजित करने और एकीकृत करने के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे सांस्कृतिक संघर्ष, तनावपूर्ण सामाजिक संबंध और संभावित संघर्ष हो सकते हैं।
- मुख्य रूप से चुनौतीपूर्ण इलाके के कारण दक्षिण मिजोरम में स्थानीय संसाधनों की कमी की समस्या, शरणार्थियों की आमद के कारण बढ़ गई है। इस कमी के कारण स्थानीय आबादी के बीच अशांति पैदा होने की आशंका है।
- बड़ी संख्या में शरणार्थियों के आगमन के मिजोरम के लिए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं।
- एक ओर, यह आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और वस्तुओं तथा सेवाओं की मांग को बढ़ा सकता है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को संभावित रूप से लाभ हो सकता है।
- दूसरी ओर, यह सीमित संसाधनों और नौकरी के अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकता है, जिससे स्थानीय आबादी के बीच संभावित बेरोजगारी और आर्थिक असमानताएं पैदा हो सकती हैं।
- बढ़ते शरणार्थी अंतर्वाह के परिणामस्वरूप जनसंख्या घनत्व में वृद्धि के पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं।
- वनों की कटाई, भूमि का क्षरण, और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि बढ़ती आबादी को समायोजित करने के लिए आवास और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक भूमि का उपयोग किया जाएगा।
नशीले पदार्थों की तस्करी:
- जमीनी स्तर पर अधिकारी बांग्लादेश से आने वाले लोगों के बारे में विशेष चिंता व्यक्त करते हैं, क्योंकि इससे नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के रास्ते खुल हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती पैदा हो सकती है।
- भारत-म्यांमार सीमा (IMB) पर एक महत्वपूर्ण मुद्दा नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी है, जिसकी जब्ती हर साल लगातार बढ़ रही है।
- दक्षिण मिजोरम के घने जंगलों के माध्यम से शरणार्थियों का नेतृत्व करने वाले गाइडों/मार्गदर्शकों की उपस्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की गई है, जिनका हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए उपयोग किया जा सकता है।
- अकेले मिजोरम में, 2022 में ₹355 करोड़ की तुलना में चालू वर्ष में जब्त किए गए नशीले पदार्थों का कुल मूल्य ₹603.43 करोड़ तक पहुंच गया है।
- भारत-म्यांमार सीमा (IMB) पर तैनात असम राइफल्स सक्रिय रूप से स्थिति की निगरानी कर रहा है और सुरक्षा चिंताओं को दूर कर रहा है।
- भारत-म्यांमार सीमा के पास हाल के हवाई हमलों के साथ-साथ कई राज्यों और क्षेत्रों में म्यांमार के सैन्य जुंटा द्वारा मार्शल लॉ लगाने से सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ गया है। बहरहाल, मिजोरम में भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा स्थिति स्थिर बनी हुई है।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 से संबंधित:
अर्थव्यवस्था:
कवच प्रणाली को समझना
विषय: अवसंरचना- रेलवे
मुख्य परीक्षा: रेलवे की कवच प्रणाली
प्रारंभिक परीक्षा: कवच प्रणाली
प्रसंग: उड़ीसा में रेल दुर्घटना।
विवरण:
- 2 जून 2023 को एक भयानक रेल दुर्घटना हुई जिसमें लगभग 288 यात्रियों की मृत्यु हो गई।
दुर्घटना के बारे में विवरण के लिए, यहां पढ़ें: UPSC Exam Comprehensive News Analysis. June 3rd, 2023 CNA. Download PDF
कवच प्रणाली:
- अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने भारतीय उद्योग के साथ स्वदेशी रूप से स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली विकसित की है जिसे कवच कहा जाता है।
- यह सुरक्षा अखंडता स्तर-4 (SIL-4) मानकों के साथ एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है।
- यह रेलगाड़ियों को लाल (खतरे) सिग्नल को पार करने और टकराव से बचने के लिए सुरक्षा प्रदान करती है।
- यदि चालक गति को नियंत्रित करने में विफल रहता है, तो कवच ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय कर देता है।
- यह कार्यात्मक कवच प्रणालियों से लैस दो लोकोमोटिव के बीच टकराव को भी टालता है। यह आपातकालीन स्थितियों के दौरान SoS संदेशों को भी प्रसारित करता है।
- इसके अतिरिक्त, यह नेटवर्क निगरानी प्रणाली के माध्यम से ट्रेन की आवाजाही की केंद्रीकृत लाइव निगरानी सुविधा से भी लैस है।
- यह एक लगत प्रभावी SIL-4-प्रमाणित तकनीक है जिसमें 10,000 वर्षों में 1 त्रुटि होने की संभावना है।
- यातायात भिडंत वर्जन प्रणाली (Traffic Collision Avoidance System – TCAS) स्टेशन मास्टर और लोको-पायलट के बीच दोतरफा संचार सुनिश्चित करने में मदद करता है।
- लोकोमोटिव में लगे उपकरण और स्टेशनों पर ट्रांसमिशन टावर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग से जुड़े होते हैं जो संदेश देने में मदद करते हैं।
- यह लोको-पायलट को दृश्य सीमा में आए बिना पहले से ही सिग्नल को समझने में मदद करता है और इस प्रकार वह अनुमेय गति को बनाए रखता है।
- ध्यान देने वाली बात यह है कि, उड़ीसा में हुई दुर्घटना में दोनों ट्रेनों (शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस और यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस) में कवच-TACS नहीं लगाए गए थे।
- कवच का क्रियान्वयन:
- कवच-TACS के क्रियान्वयन के अग्रणियों में से एक दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) क्षेत्र है।
- सिकंदराबाद स्थित भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान (IRISET) कवच के लिए ‘उत्कृष्टता केंद्र’ की मेजबानी करता है।
- यह सेवारत रेलवे कर्मचारियों को कवच के बारे में प्रशिक्षित करता है।
कवच परिनियोजन रणनीति:
- रेलवे बोर्ड नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त मार्गों से शुरुआत करते हुए एक केंद्रित और चरणबद्ध तरीके से कवच को लागू कर रहा है।
- अगली प्राथमिकता कवच को अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क पर लागू करना है। इसके बाद उच्च यात्री घनत्व वाले मार्गों और अन्य सभी मार्गों पर इसे लागू किया जाना है।
संबंधित लिंक:
Indian Railways: Establishment and Brief Facts for UPSC Exam
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
उत्तर कोरिया जासूसी उपग्रह क्यों चाहता है?
विषय: विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव
मुख्य परीक्षा: उत्तर कोरिया का जासूसी उपग्रह प्रक्षेपण और इसका निहितार्थ
प्रसंग:
- उत्तर कोरियाई उपग्रह मल्लिगयोंग-1 (Malligyong-1) को 31 मई 2023 को लॉन्च किया गया था।
भूमिका:
- उत्तर कोरिया ने चोलिमा-1 नामक एक नए प्रकार के रॉकेट की मदद से एक सैन्य टोही उपग्रह मल्लिगयोंग-1 का प्रक्षेपण किया।
- रॉकेट के इंजन और ईंधन प्रणाली में अस्थिरता के कारण उपग्रह 10 मिनट बाद पीला सागर में गिर गया।
- इस प्रक्षेपण ने दक्षिण कोरिया और जापान को सचेत कर दिया है। अमेरिका समेत दोनों देशों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
यह भी पढ़ें: UPSC Exam Comprehensive News Analysis. June 1st, 2023 CNA. Download PDF
उत्तर कोरिया का अंतरिक्ष कार्यक्रम:
- उत्तर कोरिया का पिछले दशक में एक सक्रिय अंतरिक्ष कार्यक्रम का इतिहास रहा है।
- यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उपग्रह प्रक्षेपण यान में अंतरमहाद्वीपीय लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम लंबी दूरी की मिसाइलों में उपयोग की जाने वाली कोर तकनीक के समान तकनीक का उपयोग किया जाता है।
- 1998 की शुरुआत में, उत्तर कोरिया ने तीन असफल प्रयासों के बाद 2012 में अपने पहले उपग्रह को कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया था।
- अप्रैल 2023 में उत्तर कोरिया ने घोषणा की कि उसने अपने पहले जासूसी उपग्रह का निर्माण पूरा कर लिया है।
- यह उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे संघर्षों के दौरान लक्ष्यों को सटीकता के साथ नष्ट करने की क्षमता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
- गौरतलब है कि उत्तर कोरिया का अंतरिक्ष कार्यक्रम क्षेत्र में अन्य रणनीतिक घटनाक्रमों की प्रतिक्रिया है। उदाहरण के लिए:
- अमेरिका ने घोषणा की है कि वह कोरिया में अमेरिकी अंतरिक्ष बलों को सक्रिय करेगा। यह दक्षिण कोरिया को मिसाइल चेतावनी और उपग्रह संचार की उन्नत क्षमताओं से लैस करेगा।
- 25 मई 2023 को, दक्षिण कोरिया ने सफलतापूर्वक नूरी रॉकेट प्रक्षेपित किया था जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करना है।
पूर्वी एशिया पर प्रभाव:
- उत्तर कोरियाई उपग्रह के प्रक्षेपण से पूर्वी एशिया में सुरक्षा चिंता पैदा हो गई है।
- उत्तर कोरिया अपने तकनीकी प्रयोजनों को लेकर भयमुक्त हो गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन होने के बावजूद, इस पर अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा, यह उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों की कमजोर प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है।
- कक्षा में चार से पांच सैन्य उपग्रहों का समूह उत्तर कोरिया की निगरानी क्षमता में सुधार करेगा।
संबंधित लिंक:
India-South Korea Relations [UPSC International Relations Notes]
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत् सौदे
विषय: अवसंरचना-ऊर्जा
प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय जल विद्युत् निगम; टिहरी जल विकास निगम लिमिटेड
प्रसंग:
- अरुणाचल ने निजी कंपनियों के साथ किए गए 44 पनबिजली सौदों को रद्द कर दिया है।
भूमिका:
- अरुणाचल प्रदेश सरकार ने कई नोटिसों के बावजूद प्रतिबद्धता की कमी के कारण निजी डेवलपर्स के साथ किए गए 44 पनबिजली अनुबंधों को रद्द कर दिया है।
- 32,415 मेगावाट की कुल क्षमता वाली रद्द की गई परियोजनाओं को अब नए समझौतों के माध्यम से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को हस्तांतरित किया जाएगा।
- राष्ट्रीय जल विद्युत् निगम और टिहरी जल विकास निगम लिमिटेड सहित केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई 29 परियोजनाओं की सांकेतिक सूची का विश्लेषण और मूल्यांकन किया है।
राष्ट्रीय जल विद्युत् निगम (NHPC):
- NHPC की स्थापना 1975 में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए देश की जलविद्युत् क्षमता का दोहन करने के उद्देश्य से की गई थी।
- एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में, NHPC भारत सरकार के विद्युत् मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।
- इसने अरुणाचल प्रदेश में प्रतिष्ठित 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत् परियोजना सहित विभिन्न राज्यों में कई प्रमुख जलविद्युत् परियोजनाओं को विकसित और परिचालित किया है।
- NHPC की परियोजनाएं न केवल स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न करती हैं, बल्कि उन क्षेत्रों की आर्थिक वृद्धि और विकास में भी योगदान करती हैं जहां वे स्थित हैं।
- कंपनी अपनी परियोजना नियोजन और निष्पादन में जल संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देती है।
- कंपनी का अपनी परियोजनाओं के आसपास के क्षेत्रों में सामुदायिक विकास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण सहित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों पर विशेष ध्यान रहता है।
- NHPC अपनी परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों, स्थानीय समुदायों और तकनीकी संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ भी सहयोग करता है।
टिहरी जल विकास निगम लिमिटेड (THDC):
- THDC भारत सरकार के विद्युत् मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- इसे 1988 में उत्तराखंड, भारत में टिहरी जलविद्युत परिसर के विकास और संचालन के प्राथमिक उद्देश्य के साथ निगमित किया गया था।
- टिहरी शहर के पास भागीरथी नदी पर स्थित टिहरी जलविद्युत परिसर, भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत् परियोजनाओं में से एक है।
- इसमें टिहरी बांध और टिहरी पंप स्टोरेज संयंत्र शामिल हैं। 260.5 मीटर की ऊंचाई वाला टिहरी बांध दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों में से एक है।
- टिहरी जलविद्युत परिसर के अलावा, THDC ने कोटेश्वर बांध और विष्णुगढ़ पीपलकोटी जलविद्युत् परियोजनाओं समेत देश भर में कई अन्य जलविद्युत् परियोजनाएं भी शुरू की हैं।
भारत में जलविद्युत् संयंत्रों के बारे में और पढ़ें: Hydroelectric power plants in India
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:
वाष्पन-उत्सर्जन (Evapotranspiration)
विषय: भूगोल
प्रारंभिक परीक्षा: जल चक्र; वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन
प्रसंग:
- इस लेख में वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया पर चर्चा की गई है।
मुख्य विवरण:
- वाष्पन-उत्सर्जन (Evapotranspiration) वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन की संयुक्त प्रक्रिया है जिससे पृथ्वी की सतह से जल वायुमंडल में स्थानांतरित होता है।
- ‘इवेपोट्रांसपिरेशन’ (Evapotranspiration) शब्द 1944 में जलवायु विज्ञानी चार्ल्स वॉरेन थॉर्नथवेट द्वारा गढ़ा और बाद में परिभाषित किया गया था।
- वाष्पीकरण तरल पानी के जल वाष्प में रूपांतरण (मुख्य रूप से खुले जल निकायों से) को संदर्भित करता है, जबकि पौधों द्वारा उनकी पत्तियों के माध्यम से जल वाष्प की हानि को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है।
- कई कारक वाष्पन-उत्सर्जन की दर को प्रभावित करते हैं, जिसमें तापमान, आर्द्रता, हवा की गति, सौर विकिरण और मिट्टी में पानी की उपलब्धता शामिल है।
- उच्च तापमान, कम आर्द्रता और तेज हवाएं वाष्पन-उत्सर्जन को बढ़ाती हैं, जबकि बादल युक्त स्थिति और मिट्टी की सीमित नमी प्रक्रिया को कम करती है।
- वाष्पन-उत्सर्जन को मापने के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है। इनमें वाष्पीकरण पैन, लाइसीमीटर, और मौसम संबंधी उपकरणों जैसे कि एटमोमीटर और एडी सहप्रसरण (covariance) प्रणाली का उपयोग शामिल है।
- ये तकनीकें शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को कृषि क्षेत्रों, जंगलों और शहरी क्षेत्रों सहित विभिन्न परिदृश्यों से जल की हानि का अनुमान लगाने में मदद करती हैं।
- कृषि जल प्रबंधन में वाष्पन-उत्सर्जन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फसलों की पानी की जरूरतों को समझकर और वाष्पोत्सर्जन दर का अनुमान लगाकर, किसान पानी के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई समय-निर्धारण को अनुकूलित कर सकते हैं।
- यह ज्ञान अत्यधिक सिंचाई, जिससे पानी की बर्बादी और पर्यावरण संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, और कम सिंचाई, जिससे फसल उत्पादकता कम हो सकती है, को रोकने में मदद करता है।
- वाष्पन-उत्सर्जन पृथ्वी के जल चक्र का एक अनिवार्य घटक है और इसके महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव हैं।
- यह भूमि की सतह और वातावरण के बीच नमी के आदान-प्रदान को विनियमित करके क्षेत्रीय और वैश्विक जलवायु पैटर्न को प्रभावित करता है।
- भू-उपयोग परिवर्तन, वनों की कटाई, या जलवायु परिवर्तन के कारण वाष्पन-उत्सर्जन दर में परिवर्तन स्थानीय और क्षेत्रीय जल उपलब्धता, वर्षा पैटर्न और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
- प्रभावी जल संसाधन प्रबंधन और सतत विकास के लिए वाष्पन-उत्सर्जन को समझना महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. शानन विद्युत परियोजना:
- पंजाब और हिमाचल प्रदेश शानन जलविद्युत् परियोजना को लेकर संघर्ष के कगार पर हैं, क्योंकि ब्रिटिश काल के शासक द्वारा पंजाब को दी गई 99 साल की लीज मार्च 2024 में समाप्त होने वाली है।
- हिमाचल प्रदेश लीज की अवधि समाप्त होने के बाद परियोजना को राज्य को सौंपने की मांग करते हुए लीज का नवीनीकरण या विस्तार नहीं करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लीज की अंतिम तिथि की सूचना दी है और परियोजना को अपने हाथ में लेने की राज्य की मंशा जाहिर की है।
- यदि आवश्यक हो तो पंजाब कानूनी कार्रवाई की योजना बना रहा है, क्योंकि परियोजना वर्तमान में पंजाब सरकार के स्वामित्व और अधिकार में है।
शानन पावर हाउस:
- शानन पावर हाउस हिमाचल प्रदेश में स्थित है।
- 1932 में, पावर हाउस को मंडी के तत्कालीन राजा जोगेंद्र सेन और पंजाब सरकार के मुख्य अभियंता कर्नल बीसी बैटी के बीच 99 साल के लीज समझौते के तहत शुरू किया गया था।
- 1925 में लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- भारत की स्वतंत्रता से पहले, यह पावर हाउस लाहौर और दिल्ली सहित पूरे अविभाजित पंजाब के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत के रूप में कार्य करता था।
- 1966 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद, शानन पावर हाउस को केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में स्थानांतरित कर दिया गया था, हालाँकि, 1925 का मूल लीज समझौता अभी भी प्रभावी था।
- शुरुआत में इसे 48 मेगावाट की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया था, बाद में 1982 में पंजाब सरकार ने इसे 60 मेगावाट तक बढ़ा दिया तथा 50 मेगावाट और जोड़कर इसे 110 मेगावाट तक बढ़ा दिया गया था।
2. रेलवे में कपलिंग विफ़लता:
- रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कपलिंग विफ़लता के कारण लोकोमोटिव के रेक से अलग होने की समस्या पर प्रकाश डाला गया।
- सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को हल करने के निर्देश के बावजूद, रेलवे ने तीन साल से अधिक समय से इस प्रमुख सुरक्षा चिंता की उपेक्षा की है।
- कोच को लोकोमोटिव से जोड़ने वाले कपलर का अलग होना खतरनाक स्थिति पैदा करता है, क्योंकि इससे रेक अलग हो जाता है और ट्रैक पर आगे बढ़ता रहता है।
- भारतीय रेलवे में कपलिंग का फ़ैल होना रेलवे कारों या कोचों को जोड़ने वाली कपलिंग प्रणाली की खराबी या विफलता को संदर्भित करता है।
- ट्रेन के जुड़ाव और स्थिरता को बनाए रखने के लिए कपलिंग प्रणाली महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कर्षण बलों के हस्तांतरण को सक्षम करती है और यह सुनिश्चित करती है कि यात्रा के दौरान कारें/कोच सुरक्षित रूप से एक-दूसरे से जुड़ी रहें।
- कपलिंग विफलता विभिन्न कारणों से हो सकती है, जिसमें टूट-फूट, रखरखाव की कमी, यांत्रिक दोष या मानवीय त्रुटि शामिल है।
- रेलवे अधिकारियों ने इस दोष को दूर करने के लिए रेलवे की अनुसंधान शाखा अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) से संपर्क किया है।
- हालांकि, RDSO द्वारा डेलनर कपलर (Dellner coupler) के लिए सुझाए गए संशोधन में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है, जिस पर 2020 में कार्रवाई हो जानी चाहिए थी, जिससे ट्रेन के अलग होने की घटनाएं हुई हैं।
- इस चिंता के जवाब में, सभी क्षेत्रीय रेलवे के महाप्रबंधकों को असंशोधित डेलनर कपलर की पहचान करने और उनके सुधार को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।
- संशोधन में प्रत्येक कोच के कपलर में एक अतिरिक्त पिन जोड़ना शामिल है ताकि अचानक ब्रेक लगाने और झटकों के दौरान कोचों को अलग होने से रोका जा सके।
- इसके अलावा, जोनल अधिकारियों को उन क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए निर्देशित किया गया है जहां मवेशियों के ट्रैक पर आने के मुद्दों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
राष्ट्रीय जलमार्ग संख्यानदी प्रणाली
- NW 16 बराक नदी
- NW 64 महानंदा नदी
- NW 98 सतलुज नदी
- NW 110 यमुना नदी
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: c
व्याख्या:
- युग्म 01 सही सुमेलित है: बराक नदी उत्तर पूर्वी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी नदी है। यह नागालैंड-मणिपुर सीमा के पास नागालैंड में कोहिमा के दक्षिण से निकलती है। नागालैंड, मणिपुर और असम से गुजरने के बाद, यह भंगा में सूरमा और कुशियारा नामक दो धाराओं में विभाजित हो जाती है।
- ये दोनों धाराएँ बांग्लादेश में मरकुली में मिलती हैं और उसके बाद नदी को मेघना कहा जाता है।
- भारत में बराक नदी का नौगम्य भाग लखीपुर और भंगा के बीच 121 किमी. का हिस्सा है जिसे वर्ष 2016 में राष्ट्रीय जलमार्ग-16 घोषित किया गया है।
- युग्म 02 सही सुमेलित नहीं है: पारादीप समुद्र के मुहाने से संबलपुर तक महानदी के 425 किलोमीटर के विस्तार को भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग-64 घोषित किया गया है।
- युग्म 03 सही सुमेलित है: हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर गुजरने वाली सतलुज नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग-98 घोषित किया गया है।
- युग्म 04 सही सुमेलित है: दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गुजरने वाली यमुना नदी के खंड को राष्ट्रीय जलमार्ग-98 घोषित किया गया है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)
- लैवेंडर पूरी तरह से खिली हुई धूप में शुष्क, अच्छी तरह से जल निकासी वाली, रेतीली या बजरी वाली मिट्टी में सबसे बेहतर पनपते हैं।
- व्यावसायिक रूप से, यह पौधा मुख्य रूप से लैवेंडर के सुगंधित तेल के उत्पादन के लिए उगाया जाता है।
- एरोमा मिशन को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के माध्यम से शुरू किया गया था, जिसने भारत में प्रसिद्ध “बैंगनी क्रांति” को जन्म दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- बैंगनी या लैवेंडर क्रांति 2016 में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अरोमा मिशन (Aroma Mission) के माध्यम से शुरू की गई थी।
प्रश्न 3. जांच आयोग अधिनियम, 1952 के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-कठिन)
- यह अधिनियम उन मामलों की जांच के लिए आयोगों की नियुक्ति करने के लिए बनाया गया है जो बड़े पैमाने पर जनता से जुड़े हैं या जनता को प्रभावित करते हैं।
- केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इस तरह के जांच आयोगों का गठन कर सकती हैं और वे 7वीं अनुसूची में उल्लिखित किसी भी विषय की जांच के लिए ऐसे आयोगों की नियुक्ति कर सकती हैं।
- यदि राज्य सरकार पहले आयोग का गठन करती है, तो केंद्र सरकार उसी विषय पर समानांतर आयोग का गठन नहीं कर सकती।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 01 सही है: संसद ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 को अधिनियमित किया, जो संघ और राज्य सरकारों को सार्वजनिक महत्व के निश्चित मामलों में जांच करने के लिए जांच आयोग नियुक्त करने के लिए अधिकृत करता है। यह संविधान की अनुसूची VII, सूची I और III के तहत अधिनियमित एक केंद्रीय कानून है।
- कथन 02 सही है: केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इस तरह के जांच आयोगों की स्थापना कर सकती हैं, राज्यों को उन विषय-वस्तुओं तक ही सीमित किया गया है जिन पर उन्हें कानून बनाने का अधिकार है।
- कथन 03 सही है: यदि पहले केंद्र सरकार आयोग का गठन करती है, तो केंद्र की स्वीकृति के बिना राज्य उसी विषय पर समानांतर आयोग का गठन नहीं कर सकते हैं।
- लेकिन अगर किसी राज्य ने एक आयोग नियुक्त किया है, तो केंद्र उसी विषय पर एक और आयोग नियुक्त कर सकता है यदि उसकी राय है कि जांच का दायरा दो या दो से अधिक राज्यों तक बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रश्न 4. सुपरबग के बारे में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है? (स्तर-मध्यम)
- रोगाणु जो एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी बन गए हैं।
- कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित किए जा रहे हार्डवेयर को नुकसान पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक कंप्यूटर वायरस।
- जैव-उपचार प्रक्रिया में प्रयुक्त सूक्ष्मजीव।
- ओरल पोलियोवायरस वैक्सीन (OPV) में प्रयुक्त सूक्ष्मजीव।
उत्तर: a
व्याख्या: सुपरबग जीवाणु, विषाणु, परजीवी और कवक के उपभेद हैं जो अधिकांश उन एंटीबायोटिक दवाओं और अन्य दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं जिनका उपयोग आमतौर पर उनके कारण होने वाले संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है।
- सुपरबग के कुछ उदाहरणों में प्रतिरोधी जीवाणु शामिल हैं जो निमोनिया, मूत्र मार्ग के संक्रमण और त्वचा के संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
प्रश्न 5. बाजार में बिकने वाला ऐस्परटेम कृत्रिम मधुरक है। यह ऐमीनो अम्लों से बना होता है और अन्य ऐमीनो अम्लों के समान ही कैलोरी प्रदान करता है। फिर भी यह भोज्य पदार्थों में कम कैलोरी मधुरक के रूप में इस्तेमाल होता है। उसके इस्तेमाल का क्या आधार है? (स्तर-कठिन) (PYQ-CSE-2011)
- ऐस्परटेम सामान्य चीनी जितना ही मीठा होता है, किंतु चीनी के विपरीत यह मानव शरीर में आवश्यक एन्जाइमों के अभाव के कारण शीघ्र ऑक्सीकृत नहीं हो पाता
- जब ऐस्परेटेम आहार प्रसंस्करण में प्रयुक्त होता है, तब उसका मीठा स्वाद तो बना रहता है किंतु यह ऑक्सीकरण-प्रतिरोधी हो जाता है।
- ऐस्परटेम चीनी जितना ही मीठा होता है, किंतु शरीर में अंतर्गहण होने के बाद यह कुछ ऐसे उपचयजों (मेटाबोलाइट्स) में परिवर्तित हो जाता है जो कोई कैलोरी नहीं देते।
- ऐस्परेटेम सामान्य चीनी से कई गुना अधिक मीठा होता है, अतः थोड़े से ऐस्परेटेम में बने भोज्य पदार्थ ऑक्सीकृत होने पर कम कैलोरी प्रदान करते हैं।
उत्तर: d
व्याख्या: ऐस्परटेम सामान्य चीनी से कई गुना अधिक मीठा होता है, अतः थोड़े से ऐस्परटेम में बने भोज्य पदार्थ ऑक्सीकृत होने पर कम कैलोरी प्रदान करते हैं।
- ऐस्परटेम शरीर द्वारा दो घटक अमीनो अम्ल और मेथनॉल में मेटाबोलाइज़ किया जाता है। इन हाइड्रोलिसिस उत्पादों को शरीर द्वारा उसी तरह से नियंत्रित किया जाता है जैसे अन्य उपभोग किए गए खाद्य पदार्थों से प्राप्त एस्पार्टिक अम्ल, एल-फेनिलएलनिन और मेथनॉल को किया जाता है। इसमें कैलोरी होती है, लेकिन उपभोक्ता सामान्य चीनी की तुलना में इसे कम उपयोग करेंगे क्योंकि यह सामान्य चीनी से लगभग 200 गुना अधिक मीठा होता है।
- ऐस्परटेम ताप-स्थिर नहीं है और गर्म होने पर अपनी मिठास खो देता है, इसलिए यह आमतौर पर पकी हुई वस्तुओं में प्रयोग नहीं किया जाता।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. कवच प्रणाली क्या है? इस प्रणाली की मुख्य विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक) (GS III -विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
प्रश्न 2. “उत्तर कोरिया के अंतरिक्ष कार्यक्रम में पूर्वी एशिया को अस्थिर करने की क्षमता है” चर्चा कीजिए।
(150 शब्द, 10 अंक) (GS III -विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)