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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
अर्थव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
20 March 2024 Hindi CNA
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
“कैंसर की वर्गीकरण प्रणाली का बदलाव उपचार के परिणामों में सुधार कर सकता है”: डॉक्टर्स
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
विषय: जैव प्रौद्योगिकी।
प्रारंभिक परीक्षा: कैंसर के वर्गीकरण का आधार।
विवरण: कैंसर नामकरण प्रणाली परिवर्तन की आवश्यकता
- प्रिसिशन ऑन्कोलॉजी (precision oncology) में प्रगति के कारण मूल अंगों के आधार पर कैंसर के पारंपरिक वर्गीकरण को चुनौती दी जा रही है। (precision oncology-प्रिसिशन ऑन्कोलॉजी को लक्षित परिवर्तनों की पहचान करने के लिए ट्यूमर की आणविक प्रोफाइलिंग के रूप में परिभाषित किया जाता है)
- ट्यूमर के लिए जिम्मेदार आनुवंशिक उत्परिवर्तन अलग-अलग होते हैं, और दवाओं के साथ उन्हें लक्षित करना संभव हो गया है।
- मेटास्टेटिक कैंसर, जो अधिकांश कैंसर से होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार है, के लिए अक्सर प्रणालीगत दवा उपचार की आवश्यकता होती है।
- परिणामस्वरूप, कैंसर को उनके मूल ऊतक के बजाय उनकी आणविक और आनुवंशिक विशेषताओं के आधार पर पुनर्वर्गीकृत करने पर जोर बढ़ रहा है।
उपचार में देरी पर अनुक्रमिक परीक्षण का प्रभाव:
- अंग-विशिष्ट वर्गीकरण के आधार पर नैदानिक परीक्षणों में दवाओं के अनुक्रमिक परीक्षण से उपचार तक पहुंच में देरी होती है।
- विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए अलग-अलग किए गए परीक्षण समान आनुवंशिक उत्परिवर्तन वाले रोगियों को संभावित प्रभावी दवाओं तक पहुंचने से रोकते हैं।
- यह देरी दवा निवोलुमैब जैसे मामलों में स्पष्ट है, जो ट्यूमर में पाए जाने वाले विशिष्ट प्रोटीन को लक्षित करती है लेकिन विभिन्न कैंसर प्रकारों के लिए अलग से परीक्षण किया गया था।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ और बाधाएँ:
- नियामक एजेंसियों को दवा अनुमोदन में आणविक लक्ष्यों के महत्व को प्रतिबिंबित करने के लिए दिशानिर्देशों को अद्यतन करने की आवश्यकता है।
- संस्थानों को मरीजों के आणविक प्रोफाइल का विश्लेषण करने के लिए टीमों की स्थापना करनी चाहिए, और चिकित्सा शिक्षा को आणविक स्तर पर कैंसर को समझने पर जोर देना चाहिए।
- आनुवंशिक परीक्षण तक पहुंच एक महत्वपूर्ण बाधा है, विशेष रूप से भारत जैसे देशों में जहां लागत अधिक है और उपलब्धता सीमित है।
- प्रस्तावित वर्गीकरण प्रणाली संभावित लाभ प्रदान करती है, जबकि इसे परिणामों पर रोग के स्थान के प्रभाव को नजरअंदाज करने से बचने और उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक लागू किया जाना चाहिए।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
ऐसे संबंध जो भारत की पड़ोसी प्रथम नीति का प्रतीक हैं:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
विषय: भारत और उसके पड़ोसी – संबंध।
मुख्य परीक्षा: भारत-भूटान संबंध।
विवरण:
- आकार और जनसंख्या में भारी अंतर के बावजूद, भारत और भूटान (India and Bhutan) ने आपसी सम्मान और समानता पर आधारित एक अनूठी साझेदारी को बढ़ावा दिया है।
- भूटान की पहचान और संप्रभुता के प्रति भारत के सम्मान के साथ-साथ उसके विकास के लिए भारत के समर्थन में भूटान के विश्वास ने दोनों देशों के बीच एक मजबूत बंधन को जन्म दिया है।
- विश्वास और समझ पर आधारित यह रिश्ता दोनों देशों के नेतृत्व के बीच हाल की उच्च स्तरीय यात्राओं और चर्चाओं से प्रमाणित हुआ है।
जलविद्युत सहयोग: द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला
- जलविद्युत सहयोग भारत-भूटान संबंधों की आधारशिला के रूप में कार्य करता है, जिसमें कई सफल परियोजनाएं भारत को स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करती हैं और भूटान के लिए राजस्व उत्पन्न करती हैं।
- जबकि पनबिजली परियोजनाओं के लिए कुछ संयुक्त उद्यम मॉडल को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, सरकार-से-सरकार सहयोग मॉडल ने महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं।
- भूटान के विकास में भारत की सहायता, जिसमें उसकी पंचवर्षीय योजनाओं में पर्याप्त योगदान शामिल है, पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करते हुए, भूटानी प्राथमिकताओं के अनुरूप परियोजनाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भविष्य की संभावनाएँ: द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाना
- गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी का विकास भारत के लिए भूटान की समृद्धि में और योगदान देने का अवसर प्रस्तुत करता है।
- प्रस्तावित उपायों में सीधी उड़ानें शुरू करना, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे की विशेषज्ञता प्रदान करना और भारतीय व्यवसायों और पर्यटकों को गेलेफू के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
- माइंडफुलनेस सिटी की सफलता न केवल भूटान के लिए फायदेमंद है, बल्कि भारत के पड़ोसी क्षेत्रों के लिए संभावित सामाजिक-आर्थिक लाभ भी है, जो भारत-भूटान सहयोग की पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रकृति को प्रदर्शित करता है।
निष्कर्ष: एक समृद्ध साझेदारी को कायम रखना
- भूटान के विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसे चल रहे सहयोग और संभावनाओं के माध्यम से प्रकट होती है, जो भारत की पड़ोसी प्रथम नीति की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है।
- आपसी सम्मान, समझ और सहयोग को प्राथमिकता देकर, भारत और भूटान दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सफल द्विपक्षीय संबंधों का उदाहरण स्थापित करना जारी रख रहे हैं।
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सारांश:
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गारंटीकृत एमएसपी एक नैतिक अनिवार्यता है:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
अर्थव्यवस्था:
विषय: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित मुद्दे।
मुख्य परीक्षा: एमएसपी को कानूनी समर्थन देने पर बहस।
विवरण:
- जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, किसानों द्वारा अपनी उपज के उचित मूल्य निर्धारण के लिए विरोध करने से कृषि मुद्दे प्रमुखता प्राप्त करते जा रहे हैं।
- चिंताओं को दूर करने की सत्तारूढ़ सरकार की कोशिशों को किसानों ने खारिज कर दिया, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price (MSP)) की गारंटी की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
गारंटीशुदा एमएसपी की नैतिक अनिवार्यता:
- एमएसपी भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों को नुकसान पहुंचाने वाली बाजार विफलताओं का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- मूल्य निर्धारण में प्रभाव की कमी किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर बनाती है, जिससे एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी की आवश्यकता होती है।
- वार्षिक एमएसपी घोषणाओं के बावजूद,इनका कार्यान्वयन ख़राब बना हुआ है, जिससे कई किसान आर्थिक रूप से तनावग्रस्त हैं और कर्ज़ और निराशा के चक्र में फंस गए हैं।
- एमएसपी के लिए कानूनी सहारा संवैधानिक लेखों और अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं द्वारा समर्थित है, जो व्यापक सार्वजनिक समर्थन को दर्शाता है।
प्रयास एवं समाधान:
- विभिन्न राज्यों और संगठनों ने एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए उपाय प्रस्तावित किए हैं, जैसे कृषि अधिनियमों में संशोधन और निजी सदस्य बिल (private member bills) पेश करना।
- गन्ना उत्पादक पहले से ही वैधानिक एमएसपी से लाभान्वित हैं, जबकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य राज्यों ने अन्य फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी देने के लिए विधेयक प्रस्तावित किए हैं।
- बजट आवंटन के साथ मौजूदा कानूनों में मामूली संशोधन एमएसपी को लागू कर सकते हैं और फसल के बाद के अधिशेष के प्रबंधन के लिए आवश्यक बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज स्थापित कर सकते हैं।
- किसानों की आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए 50% लाभ मार्जिन प्रदान करने के लिए एमएसपी को बढ़ाना संभव और आवश्यक है।
चुनौतियाँ और विरोध:
- एमएसपी सुनिश्चित करने को बिचौलियों और मौजूदा बाजार की गतिशीलता से लाभान्वित होने वाले लोगों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
- मुक्त बाज़ार सिद्धांतों का पालन अक्सर किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए आवश्यक सरकारी हस्तक्षेप में बाधा डालता है।
- पीएम-आशा ( PM-AASHA) जैसी सरकारी योजनाएं, एमएसपी समर्थन के तत्वों से युक्त होते हुए भी, राजनीतिक स्वार्थ के कारण दरकिनार कर दी जाती हैं, जिससे किसान संकट के प्रभावी समाधान में बाधा आती है।
निष्कर्ष:
- गारंटीकृत एमएसपी न केवल किसानों की आर्थिक भलाई के लिए बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूख और कुपोषण को दूर करने के लिए भी आवश्यक है।
- हालाँकि चुनौतियां और विरोध अब भी किये जा रहे हैं, जबकि बाजार की विफलताओं को सुधारने और मौजूदा कृषि संकट का उचित समाधान प्रदान करने के लिए एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी जरूरी है।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1.’सबसे गर्म वर्ष’ का रिकॉर्ड “वर्ष 2023 के नाम”: विश्व मौसम संगठन ने पुष्टि की
सन्दर्भ:
- विश्व मौसम विज्ञान संगठन ( World Meteorological Organisation (WMO)) विभिन्न जलवायु एजेंसियों के निष्कर्षों के अनुरूप, रिकॉर्ड के आधार पर वर्ष 2023 को सबसे गर्म वर्ष के रूप में घोषित किया है।
- यह घोषणा 19 मार्च को जारी “द स्टेट ऑफ़ ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट” के हिस्से के रूप में आई है।
सम्बन्धित जानकारी:
- वर्ष 2023 के लिए वैश्विक औसत निकट-सतह तापमान पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.45 डिग्री सेल्सियस अधिक मापा गया, जिसमें ± 0.12 डिग्री सेल्सियस की अनिश्चितता का अंतर था।
- यह रिकॉर्ड पर 10 साल की सबसे गर्म अवधि को दर्शाता है, जो वैश्विक तापमान में चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है।
- इससे पहले वर्ष 2016 और 2020 संयुक्त रूप से सबसे गर्म वर्ष थे, जिनका तापमान क्रमशः 1.29 ± 0.12 डिग्री सेल्सियस और 1.27 ± 0.13 डिग्री सेल्सियस था, जो 1850-1900 के औसत से अधिक था।
महत्व:
- यह पुष्टि जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने की तात्कालिकता को रेखांकित करती है क्योंकि तापमान में वृद्धि जारी है।
- इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, साथ ही देशों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
- यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए दुनिया भर में स्थायी प्रथाओं और नीतियों को अपनाने के गहन प्रयासों के लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करती है।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को 8 करोड़ श्रमिकों को राशन कार्ड देने का निर्देश दिया:
सन्दर्भ:
- प्रवासी श्रमिकों के लिए राशन कार्ड के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देश ने ध्यान आकर्षित किया है।
- यह आदेश अप्रैल 2023 के पिछले फैसले का अनुसरण करता है।
सम्बन्धित जानकारी:
- सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अप्रैल 2023 के आदेश को लागू करने में हो रही देरी पर चिंता जताई हैं।
- इस निर्देश का उद्देश्य ईश्रम पोर्टल (eShram portal) में पंजीकृत लेकिन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर नहीं किए गए लगभग आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड प्रदान करना है।
- पोर्टल पर 28.6 करोड़ पंजीकरणकर्ताओं में से 20.63 करोड़ पहले से ही राशन कार्ड डेटाबेस में पंजीकृत हैं।
महत्व:
- न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अगुवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने ईश्रम पोर्टल पर पंजीकृत शेष आठ करोड़ प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को दो महीने के भीतर राशन कार्ड जारी करने का निर्देश दिया हैं।
- यह निर्णय प्रवासी श्रमिकों के कल्याण पर अदालत के जोर और सामाजिक कल्याण योजनाओं में शीघ्र समावेशन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- न्यायालय प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड प्रणाली में तुरंत एकीकृत करने, आवश्यक खाद्य आपूर्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी दोहराती है।
3. वर्ष 2021 में 27.6 मिलियन लोग जबरन मजदूरी में संलग्न रहे: ILO
सन्दर्भ:
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization (ILO)) ने जिनेवा में 2021 में जबरन श्रम पर निष्कर्षों का विवरण देते हुए एक अध्ययन जारी किया है।
- इस अध्ययन में जबरन श्रम से उत्पन्न अवैध मुनाफे में चिंताजनक वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है, जो सालाना 36 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
- इस अध्ययन हेतु डेटा इकट्ठा करने के लिए सऊदी अरब और कतर में भारतीयों सहित श्रमिकों के बीच सर्वेक्षण किया गया हैं।
मुद्दा:
- जबरन श्रम में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, वर्ष 2021 में 27.6 मिलियन लोग इसमें लगे हुए हैं, जो वर्ष 2014 के बाद से अवैध मुनाफे में 37% की वृद्धि दर्शाता है।
- श्रम के लिए मजबूर लोगों की संख्या और उनके शोषण से प्राप्त लाभ दोनों में वृद्धि इस चिंताजनक प्रवृत्ति में योगदान करती है।
- अध्ययन से पता चलता है कि तस्कर और अपराधी अब प्रति पीड़ित 10,000 डॉलर के करीब कमा रहे हैं, जो एक दशक पहले 8,269 डॉलर था।
- निजी तौर पर लगाए गए श्रम में केवल 27% पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद, जबरन वाणिज्यिक यौन शोषण कुल अवैध लाभ का एक बड़ा हिस्सा (73%) है।
- उद्योग, सेवाएँ, कृषि और घरेलू कार्य जैसे विभिन्न क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिसमें श्रमिकों के वेतन की कीमत पर महत्वपूर्ण अवैध लाभ कमाया जा रहा है।
महत्व:
- जबरन श्रम गरीबी और शोषण के चक्र को कायम रखता है, जिससे व्यक्ति अपनी गरिमा और सही मजदूरी से वंचित हो जाते हैं।
- समय के साथ स्थिति और खराब हो गई है, 2016 और 2021 के बीच जबरन श्रम में 2.7 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई है।
- इस अन्याय का मुकाबला करने और कमजोर श्रमिकों के शोषण को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
4. ‘खाद्य कीमतें मुद्रास्फीति की गिरावट को रोक रही हैं’:
संदर्भ:
- डिप्टी गवर्नर माइकल डी. पात्रा के नेतृत्व में आरबीआई अधिकारियों ने आरबीआई बुलेटिन में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की हैं।
- मुद्रास्फीति में सामान्य गिरावट के बावजूद, खाद्य कीमतों ने हेडलाइन मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य की ओर तेजी से गिरने से रोक दिया है।
सम्बन्धित जानकारी:
- मुद्रास्फीति में गिरावट आ रही है, विशेष रूप से मुख्य मुद्रास्फीति (core inflation) में यदि खाद्य कीमतों का दबाव न होता तो हेडलाइन मुद्रास्फीति तेजी से 4% लक्ष्य के करीब आ जाती।
- जनवरी और फरवरी के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सूचनाएँ अनाज की कीमतों में मजबूत गति और मांस और मछली की कीमतों में उछाल के साथ सब्जियों की कीमतों में उथली और अल्पकालिक नरमी का संकेत देती है।
- मुख्य अवस्फीति द्वारा खाद्य कीमतों के दबाव का मुकाबला किया गया है।
- मार्च (15 तारीख तक) के लिए उच्च-आवृत्ति खाद्य मूल्य डेटा से पता चलता है कि अनाज की कीमतों में गिरावट आई है, मुख्य रूप से गेहूं के लिए, जबकि दालों में वृद्धि देखी गई है और खाद्य तेल की कीमतें नरम हो गई हैं।
- मार्च में टमाटर की कीमतों में सुधार देखा गया है, पिछले तीन महीनों में नरमी के बाद प्याज और आलू की कीमतों में उछाल आया है।
- सरकार द्वारा एलपीजी की कीमतों में कटौती के कारण मार्च में ईंधन की कीमतों में गिरावट बढ़ने की उम्मीद है।
- फरवरी में हेडलाइन मुद्रास्फीति की कुल गति सकारात्मक हो गई, जिससे अनुकूल आधार प्रभाव कम हो गया।
महत्व:
- मौद्रिक नीति को जोखिम न्यूनतम करने, विकास को बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति (inflation) को लक्ष्य की ओर निर्देशित करने पर ध्यान केंद्रित रखने की आवश्यकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act (CAA)), 2019 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सीएए पड़ोसी देशों के सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों से संबंधित अनिर्दिष्ट अप्रवासियों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करता है।
2. यह अधिनियम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को स्वचालित नागरिकता प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 2
(d) कोई नहीं
उत्तर: d
प्रश्न 2. भारत में खाद्य मुद्रास्फीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खाद्य मुद्रास्फीति एक अल्पकालिक घटना है और इसका अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ता है।
2. चरम मौसम की घटनाओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान खाद्य मूल्य अस्थिरता में एक प्रमुख योगदानकर्ता है।
3. उच्च खाद्य मुद्रास्फीति से खाद्य सुरक्षा, घरेलू बजट और समग्र आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर: b
प्रश्न 3. भारत में मुख्य मुद्रास्फीति और हेडलाइन मुद्रास्फीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोर मुद्रास्फीति किसी अर्थव्यवस्था में खाद्य और ईंधन की कीमतों सहित वस्तुओं और सेवाओं के समग्र मूल्य स्तर को मापती है।
2. हेडलाइन मुद्रास्फीति अपनी गणना से भोजन और ईंधन जैसी अस्थिर वस्तुओं को बाहर रखती है, केवल गैर-खाद्य गैर-ईंधन वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर: d
प्रश्न 4. भारत में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एमएसपी किसानों को प्रदान किया गया एक कानूनी अधिकार है, जो उन्हें उनकी कृषि उपज के लिए न्यूनतम आय की गारंटी देता है।
2. एमएसपी की घोषणाएं किसानों को उच्च घोषित कीमतों वाली फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
3. एमएसपी एक न्यूनतम मूल्य के रूप में कार्य करता है, जो अधिशेष उत्पादन के मौसम के दौरान कृषि वस्तुओं की बाजार कीमतों को एक निश्चित स्तर से नीचे गिरने से रोकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: c
प्रश्न 5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: PYQ 2020
1. कोयले की राख में आर्सेनिक, सीसा और पारा होता है।
2. कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र पर्यावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड छोड़ते हैं।
3. भारतीय कोयले में राख की मात्रा अधिक पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: d
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. भारत-भूटान संबंधों के आर्थिक और पर्यावरणीय परिदृश्य को आकार देने में गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और जलविद्युत सहयोग जैसी परियोजनाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध] (Discuss the significance of projects like the Gelephu Mindfulness City and hydropower cooperation in shaping the economic and environmental landscape of India-Bhutan relations. (10 marks, 150 words) [GS-2, IR])
प्रश्न 2. ऊतक की उत्पत्ति के बजाय उनकी आणविक और आनुवंशिक विशेषताओं के आधार पर कैंसर को वर्गीकृत करने के प्रस्ताव का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही विशेष रूप से विकासशील देशों के संदर्भ में ऐसी प्रणाली को लागू करने के संभावित लाभों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) [जीएस-3, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी] (Critically analyze the proposal to classify cancers based on their molecular and genetic characteristics rather than the tissue of origin. Discuss the potential benefits and challenges of implementing such a system, especially in the context of developing countries. (10 marks, 150 words) [GS-3, Science & Technology])
(नोट: मुख्य परीक्षा के अंग्रेजी भाषा के प्रश्नों पर क्लिक कर के आप अपने उत्तर BYJU’S की वेव साइट पर अपलोड कर सकते हैं।)