22 सितंबर 2022 : समाचार विश्लेषण
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A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: शासन:
C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: अर्थव्यवस्था:
D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E.सम्पादकीय: राजव्यवस्था:
अर्थव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G.महत्वपूर्ण तथ्य: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
सोलर सेल के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मंजूरी:
अर्थव्यवस्था:
विषय:औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उसका प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: पीएलआई योजनाएं।
संदर्भ:
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में घरेलू सौर सेल मॉड्यूल के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए एक उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production Linked Incentive (PLI) ) योजना को मंजूरी दी है।
पृष्ठ्भूमि:
- भारत ने वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट वर्ष 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करने का करने का लक्ष्य रखा है।
- इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वर्ष 2030 तक हर साल करीब 25 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन करने की जरूरत है।
- नवंबर 2020 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाने के लिए 10 प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (Production Linked Incentive (PLI)) योजना को मंजूरी दी थी।
- ‘उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल’ के लिए पीएलआई योजना उन 10 क्षेत्रों में से एक है।
- वर्तमान में भारत की सौर क्षमता में वृद्धि काफी हद तक आयातित सौर पीवी सेल और मॉड्यूल पर निर्भर करती है क्योंकि यह घरेलू विनिर्माण उद्योग सौर पीवी सेल के लिए लगभग 2,500 मेगावाट और सौर पीवी मॉड्यूल के लिए 9,000-10,000 मेगावाट की परिचालन वार्षिक क्षमता तक सीमित है।
कार्यान्वयन:
- पीएलआई योजना भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) -इरेडा) के माध्यम से एमएनआरई द्वारा कार्यान्वित की जाएगी जो की इसकी कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।
- इसके लाभार्थियों का चयन एक पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
- परियोजनाओं के लिए बोली लगाने वालों को विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने और चलाने के लिए पीएलआई प्रदान किया जाएगा,जो पॉलीसिलिकॉन सेल, सिल्लियां (ingots), वेफर्स और पैनल बनाने से लेकर बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले मॉड्यूल को असेंबल करने तक मॉड्यूल के पूरे उत्पादन चक्र का विस्तार करेगा।
- ग्रीनफील्ड की नई सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण इकाइयां पीएलआई के लिए पात्र होंगी।
- ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करने पर पीएलआई के तहत शामिल किया जाएगा। ऐसी ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के लिए पीएलआई दर ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की दर का 50% होगी।
- ब्राउनफील्ड परियोजनाएं मौजूदा सौर पीवी निर्माताओं द्वारा स्थापित ऐसी सभी नई सौर पीवी विनिर्माण क्षमताओं को संदर्भित करेंगी जो पहले से मौजूद सौर पीवी निर्माण क्षमताओं के साथ कुछ सामान्य बुनियादी सुविधाओं को साझा करती हैं या मौजूदा सौर पीवी निर्माण सुविधाओं में नई विनिर्माण लाइनों को जोड़ती हैं।
इस योजना का महत्व:
- यह योजना भारत में उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के निर्माण को बढ़ावा देगी और इस प्रकार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करने में सहायक होगी।
- यह उच्च दक्षता वाले मॉड्यूल के निर्माण के लिए भारत में अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने में भी सहायता प्रदान करेगी।
- इससे लगभग 94,000 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश होगा और प्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,95,000 और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 7,80,000 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। साथ ही स्वदेश में इसके निर्माण से भारत द्वारा आयात कम करने से लगभग ₹ 1.37 ट्रिलियन की बचत होगी।
- यह बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एकीकृत संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा देता है।
- इस योजना के तहत आवंटन एकीकृत विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करेगा क्योंकि भारत में पॉलीसिलिकॉन और वेफर्स (सौर पैनलों के लिए कच्चा माल) के निर्माण हेतु कोई सुविधानहीं है।
- एकीकृत विनिर्माण सुविधाएं सौर विनिर्माण में स्थानीय सामग्री की सोर्सिंग के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेंगी।
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम के निर्माण के लिए पीएलआई योजना:
अर्थव्यवस्था:
विषय: औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर प्रभाव।
मुख्य परीक्षा : भारतीय अर्थव्यवस्था में अर्धचालक उपकरणों का महत्व।
संदर्भ:
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब प्रोत्साहन योजना में संशोधन को मंजूरी दी है।
पृष्ठ्भूमि:
- वर्ष 2021 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY)) ने भारत में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले विनिर्माण (display manufacturing) इकोसिस्टम के विकास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम को मंजूरी प्रदान की थी।
- सरकार ने अगले छह वर्षों में सेमीकंडक्टर्स के विकास और उसके डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 76,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है।
संशोधित योजना:
- इस संशोधित योजना के तहत भारत में सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना हेतु सभी प्रौद्योगिकी नोड्स के लिए परियोजना लागत की 30% से 50% की वित्तीय सहायता सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।
- डिस्प्ले फैब की स्थापना के लिए भी परियोजना लागत की 50% की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- इसके तहत कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर/डिस्क्रिट सेमीकंडक्टर्स फैब की स्थापना के लिए परी-पासु मोड (pari-passu mode) में 50% की वित्तीय सहायता भी प्रदान तहत की जाएगी ।
- (परी-पासु का अर्थ है “समान स्तर”, और इसका वित्तीय अर्थ है दो या दो से अधिक पक्ष जिनके साथ वित्तीय दावे या अनुबंध के संबंध में समान व्यवहार करना। यह शब्द वित्त के कई अलग-अलग क्षेत्रों पर लागू हो सकता है।)
- इसके अतिरिक्त, योजना के तहत लक्षित प्रौद्योगिकियों में असतत अर्धचालक फैब शामिल होंगे।
- असतत अर्धचालक का उपयोग बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए किया जाता है।
महत्व:
- वर्तमान भू-राजनीतिक वातावरण में महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए अर्धचालकों और डिस्प्ले के भरोसेमंद स्रोत महत्वपूर्ण हैं।
- स्वीकृत कार्यक्रम भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को मजबूती प्रदान करेगा।
- इसके अतिरिक्त यह कदम अत्यधिक कुशल नौकरियों के अवसर पैदा करेगा ताकि राष्ट्र अपने जनसांख्यिकीय लाभांश से लाभान्वित हो सके।
- वर्ष 2025 तक इस कार्यक्रम के जरिये इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग का मजबूत स्थानीय मूल्यवर्धन होगा जिससे 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था और 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी ।
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सारांश:
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- भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Semiconductor Industry in India
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के नियम अधिसूचित:
शासन:
विषय: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
मुख्य परीक्षा: सीआरपीसीमें सुधार।
संदर्भ:
- केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs (MHA)) ने हाल ही में आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के नियमों को अधिसूचित किया है।
आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022:
- इस अधिनियम को मार्च 2022 में संसद द्वारा कैदियों की पहचान के लिए बने अधिनियम, 1920 को निरस्त करने के लिए पारित किया गया था।
- इस कानून में पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को गिरफ्तार व्यक्तियों के रेटिना,आईरिस स्कैन सहित भौतिक और जैविक नमूने एकत्र करने और विश्लेषण करने का अधिकार हैं।
- इस अधिनियम ने संसद और देश भर में एक ऐसी व्यापक बहस को जन्म दिया है, जो मौलिक अधिकारों ( Fundamental Rights) और कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार के नियंत्रण और संतुलन से संबंधित महत्वपूर्ण चिंताओं को उजागर करती है।
- जब तक नियमों को अधिसूचित नहीं किया जाता है, तब तक किसी अधिनियम को लागू नहीं किया जा सकता है।
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सारांश:
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- आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: The Criminal Procedure (Identification) Act, 2022
संपादकीय-द हिन्दू
सम्पादकीय:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:
राजव्यवस्था:
बंधुत्व का दायरा और गुमनामी की मजदूरी:
विषय:संसद-भारत का संविधान-ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
प्रारंभिक परीक्षा: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर और संविधान की प्रस्तावना।
मुख्य परीक्षा: भारतीय संदर्भ में बंधुत्व के सिद्धांत का महत्व और लोकतंत्र के सफल कामकाज की शर्तें।
संदर्भ
भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा लिखित यह लेख भारतीय संदर्भ में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श पर चर्चा की गई है।
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
- डॉ. बी.आर. के अनुसार, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार को अलग-अलग संस्थाओं के रूप में नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वे त्रिमूर्ति का एक संघ हैं जिसमें एक का दूसरे से अलग होना लोकतंत्र के उद्देश्य को ही खत्म कर देगा।
- न्याय के साथ-साथ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व शब्द भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित बुनियादी मूल्यों में उनका अपना एक स्थान हैं, जिसमे “हम, भारत के सभी नागरिकों को ‘सुरक्षित’ करने का संकल्प है।”
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें-
https://byjus.com/free-ias-prep/preamble-decoded/
बंधुत्व का सिद्धांत
- भारतीय संदर्भ में भाईचारे के विचार को अक्सर गलत समझा जाता है।
- बंधुत्व की अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि लोगों या नागरिकों की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारियां हैं।
- फ्रांसीसी क्रांति के दौरान बंधुत्व के सिद्धांत को अस्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया था:
- दूसरों के साथ वह मत करो जो आप नहीं चाहेंगे कि वे आपके साथ करें
- दूसरों के लिए लगातार वह अच्छा करें जो आप उनसे प्राप्त करना चाहते हैं
- हालाँकि, भारतीय संदर्भ में, जैसा कि अम्बेडकर ने व्यक्त किया था की बंधुत्व के विचार का अधिक महत्व है जो प्रस्तावना में दिखता है जहाँ व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता दोनों अनिवार्य हैं।
व्यक्तिगत नागरिक की जिम्मेदारियां
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा था कि “हमें इस तथ्य को स्वीकार करते हुए कहा था कि भारतीय समाज में दो चीजों का पूर्ण अभाव है। इनमें से एक समानता है और इसके परिणामस्वरूप हम 26 जनवरी, 1950 को ‘अंतर्विरोधों के जीवन’ में प्रवेश करेंगे।”
- मौलिक कर्तव्यों पर अंबेडकर द्वारा की गई उपरोक्त टिप्पणियों के आधार पर 1976 में 42वां संविधान संशोधन पारित किया गया था।
- संविधान के मौलिक कर्तव्यों के तहत अनुच्छेद 51A(e) में कहा गया है कि यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि “धार्मिक, भाषाई और क्षेत्रीय या अनुभागीय विविधताओं से परे भारत के सभी लोगों के बीच सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दें और महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक व्यवहार न करें”।
- इस कर्तव्य को निभाने की जिम्मेदारी राज्य की नहीं है, बल्कि नागरिको की है। इसलिए बंधुत्व भारत में नागरिकता का एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसे उपेक्षित नहीं किया जा सकता है।
लोकतंत्र की सफलता की शर्तें
- अम्बेडकर ने संविधान सभा में अपने भाषण में “लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए पूर्व-स्थितियों” के बारे में बात की।
- अम्बेडकर ने अपने भाषण में लोकतंत्र को “सरकार का एक रूप और पद्धति के रूप में परिभाषित किया, जिससे लोगों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन बिना रक्तपात के किया जा सकता है”।
- अम्बेडकर ने सात शर्तों को सूचीबद्ध किया जो लोकतंत्र के सफल कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, वे हैं:
- असमानताओं का अभाव।
- एक विपक्ष की उपस्थिति।
- कानून और प्रशासन में समानता।
- संवैधानिक नैतिकता का पालन।
- अल्पसंख्यक पर बहुसंख्यकों के द्वारा अत्याचार न करना।
- समाज में नैतिक व्यवस्था का कार्य
- सार्वजनिक ज्ञान।
भारत में असमानता का स्वरूप
- ऐसा कहा जाता है कि असमानता भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की है यानी यह कुछ क्षेत्रों में आर्थिक है और यह क्षेत्रीय, जाति और धर्म पर आधारित है।
- समाजशास्त्रियों ने नौ श्रेणियों के लोगों को मान्यता दी है जिन्हें सामाजिक/राजनीतिक/आर्थिक रूप से बहिष्कृत कहा जाता है जिसमें दलित, आदिवासी, महिला और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं।
- धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अध्ययन, जो भारत की आबादी का लगभग 20% है, यह दर्शाता है कि जिस भेदभाव का वे सामना करते हैं, उसकी उत्पत्ति उसी सोच में हुई है जिसके कारण अगस्त 1947 का विभाजन हुआ।
- इसने औपचारिक रूप से “राज्यों का एक संघ” के रूप में वर्णित नए गणराज्य की इकाइयों के एकीकरण किया और यह संविधान के निर्माताओं की एक प्रमुख चिंता थी।
भावी कदम
- इकाइयों के एकीकरण पर सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुसार, “प्रेरणा और प्रोत्साहन नीचे से नहीं बल्कि ऊपर से आया और जब तक प्रत्यारोपित विकास की जड़ें मिट्टी में नहीं फैलती, तब तक पतन और अराजकता का खतरा होगा”।
- साथ ही, संविधान का अनुच्छेद 51ए (e) किसी भी श्रेणी में नागरिकों के बीच अंतर नहीं करता है और इसे एक सर्वव्यापी कर्तव्य बनाता है।
- मौलिक कर्तव्य का दायरा सार्वभौमिक है और इसलिए इसे शीर्ष के बजाय नागरिकता की सीढ़ी के आधार से देखा जाना चाहिए।
- हालांकि, इसे बढ़ावा देना शीर्ष नेतृत्व का दायित्व है।
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सारांश: बंधुत्व की अवधारणा और विचारों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए और बंधुत्व के सिद्धांतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है क्योंकि यह समाज में असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इस तरह अपने वास्तविक अर्थों में राष्ट्रीय एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है। |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 से संबंधित:
अर्थव्यवस्था:
व्यापार रणनीति:
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन, विकास, और रोजगार से संबंधित मुद्दे।
मुख्य परीक्षा: मौजूदा चुनौतियां जिन्हें भारत की नई विदेश व्यापार नीति के सन्दर्भ ने हल किया जाना चाहिए।
संदर्भ
भारत की नई व्यापार नीति
पृष्टभूमि
- मौजूदा व्यापार नीति को 2015 में पेश किया गया था और इसकी पांच साल की अवधि समाप्त होने के बाद, कोविड महामारी के के दौरान राष्ट्रीय तालाबंदी के ठीक एक सप्ताह बाद बढ़ाया गया था।
- सरकार नई विदेश व्यापार नीति जारी करेगी।
चुनौतियाँ जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है
- विशेषज्ञों का विचार है कि महामारी के बाद मौजूदा व्यापार नीति का बहुत लंबा विस्तार अवांछनीय है और अब एक वित्तीय वर्ष के मध्य में एक नई नीति की शुरूआत आदर्श नहीं है।
- इसके अलावा, निर्यात को विकास के प्रमुख इंजनों में से एक कहा जाता है जो कोविड रिकवरी को शक्ति प्रदान कर रहा है। इस संदर्भ में जनवरी 2021 में WTO-अनुपालन निर्यात प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी जिसके द्वारा निर्यातकों के घरेलू कर में कमी हुई थी।
- 2021-22 में माल निर्यात के रिकॉर्ड 422 बिलियन डॉलर को छूने के साथ, इस तरह की योजना में कोई भी विचलन या विच्छेदन विकास को प्रभावित करेगा।
- सरकार को उम्मीद है कि चालू वर्ष में माल का निर्यात 450 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा, लेकिन जुलाई और अगस्त की अवधि में विकास एकल अंकों तक गिर गया है।
- निर्यात में गिरावट के साथ-साथ मार्च से आयात लगातार 60 अरब डॉलर से अधिक रहा है।
- इसके अतिरिक्त, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों में धीमी वैश्विक वृद्धि और मंदी का डर भी नई नीति के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि खरीदार डिलीवरी को टालना चाहते हैं।
सिफारिश
- नई नीति को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए कि यह निर्यात उद्योग को गति प्रदान करे और उद्योग की प्रमुख चिंताओं को भी दूर करे जिसमें बढ़ती ब्याज दरों के खिलाफ एक बफर बनाना शामिल हो।
- राजस्व में उछाल को ध्यान में रखते हुए, नई नीति में फार्मा, रसायन ,लोहा और इस्पात जैसे महत्वपूर्ण विकास क्षेत्रों को शुल्क छूट योजना से बाहर करने के मौजूदा रुख कोबदलना होगा।
- जैसा कि भारत ने अभी इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क से दूरी बनाने का फैसला किया है इसलिए सरकार को खाड़ी सहयोग परिषद और अन्य संभावित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की अपनी बातचीत में तेजी लानी चाहिए, चाहे उनकी अर्थव्यवस्था का आकार कुछ भी हो।
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सारांश: जैसा कि सरकार द्वारा लगभग सात वर्षों के बाद नई विदेश व्यापार नीति जारी करने की उम्मीद है ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति में ऐसे उपाय शामिल होने चाहिए जो निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करें ताकि बढ़ते आयात को कम किया जा सके। |
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली (Hybrid propulsion system):
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:
विषय: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
प्रारंभिक परीक्षा: हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली।
संदर्भ:
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( Indian Space Research Organisation (ISRO)) ने हाल ही में एक हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है ।
प्रमुख विवरण:
- इसरो ने एक हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया हैं,जिसमें ठोस ईंधन और तरल ऑक्सीकारक का उपयोग किया गया है ।
- इस जमीन आधारित परीक्षण में उड़ान समतुल्य 30 kN हाइब्रिड मोटर में HTPB-आधारित (हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन-hydroxyl-terminated polybutadiene) एल्युमिनाइज्ड सॉलिड फ्यूल और लिक्विड ऑक्सीजन ( liquid oxygen (LOX)) को ऑक्सीडाइज़र के रूप में इस्तेमाल किया गया।
- इस हाइब्रिड मोटर का परीक्षण विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) द्वारा तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) के सहयोग से किया गया।
- यह हाइब्रिड मोटर संभावित रूप से आगामी लॉन्च किये जाने वाले वाहनों के लिए एक नई प्रणोदन प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगी ।
- इस मोटर में हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन (HTPB) को ईंधन के रूप में और तरल ऑक्सीजन (LOX) को ऑक्सीडाइज़र के रूप में इस्तेमाल किया है।
- सॉलिड-सॉलिड (ठोस -ठोस) या लिक्विड-लिक्विड (तरल-तरल) संयोजनों (combinations) के विपरीत इसमें एक हाइब्रिड मोटर सॉलिड फ्यूल और लिक्विड ऑक्सीडाइज़र का उपयोग किया गया है।
- HTPB और LOX दोनों हरित (gree) हों तो क्रायोजेनिक LOX को नियंत्रित करना सुरक्षित होता है।
- पारंपरिक सॉलिड (ठोस) मोटर्स के विपरीत, हाइब्रिड तकनीक के जरिए मोटर पर रीस्टार्टिंग (restarting) और थ्रॉटलिंग (throttling) की जा सकती है।
- इसे अधिक कुशल,”हरित” और नियंत्रण के लिए सुरक्षित माना जाता है।
2. सिकुड़ती मुद्रास्फीति (Shrinkflation):
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
भारतीय अर्थव्यवस्था:
प्रारंभिक परीक्षा: मुद्रास्फीति।
श्रिंकफ्लेशन/सिकुड़ती मुद्रास्फीति क्या है?
- सिकुड़ती मुद्रास्फीति तब होती है जब किसी उत्पाद की कीमत में बिना किसी बदलाव के उसकी मात्रा में कमी कर दी जाती है।
- (सिकुड़ती मुद्रास्फीति किसी उत्पाद के स्टिकर मूल्य को सामान रखते हुए उसके आकार को कम करने की प्रथा है।)
- उच्च उत्पादन लागत को प्रतिसंतुलित करने के लिए उत्पादों का आकार घटाने/डाउनसाइज़िंग किया जाता है लेकिन खुदरा कीमतों को समान रखा जाता है।
- निवेश सामग्री की लागत में वृद्धि और तीव्र प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप सिकुड़ती मुद्रास्फीति/श्रिंकफ्लेशन होती है।
महंगाई का असर:
- मुद्रास्फीति का उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन पर कई प्रकार के प्रभाव पड़ते है जैसे किराया, भोजन, गैस और अन्य व्यय।
- चूंकि कंटेनर और बर्तन का आकार बेहद मामूली मात्रा में कम किया जाता है, अतः सिकुड़ती मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि वे जो ब्रांड खरीदते हैं वे मुद्रास्फीति से अप्रभावित हैं।
- उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों पर स्विच करने से रोकने के लिए, इसकी कीमत बनाए रखते हुए सामग्री में सुधार या हटाने से मात्रा में परिवर्तन के अलावा अन्य तरीकों से भी श्रिंकफ्लेशन हो सकती है।
- उदाहरण के लिए, कैडबरी डेयरी मिल्क ने फ़ॉइल का उपयोग करना बंद कर दिया, जिसका उपयोग वह चॉकलेट की गुणवत्ता और स्वाद के लिए करता था ताकि खर्च को कम किया जा सके।
- हालांकि उत्पादों को कम करने से निर्माताओं की लागत कम हो जाती है, लेकिन यह निर्माताओं द्वारा उपभोक्ताओं के साथ किया गया एक अनुचित व्यवहार है।
- श्रिंकफ्लेशन से ग्राहक को निराशा हो सकती है और निर्माता के ब्रांड के प्रति उपभोक्ता की रूचि में कमी आ सकती है।
- जब वस्तुओं की टोकरी को उत्पाद के आकार पर विचार किए बिना मापा जाता है तो कीमत पर भ्रम पैदा हो जाता है।
- सिकुड़न को दूर करने के लिए समग्र मुद्रास्फीति को कम किया जाना चाहिए।
- यह मांग और आपूर्ति के प्रबंधन और अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कठोरता को दूर करने के लिए व्यापक आर्थिक नीतियों से संभव हो सकता है।
- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ( Central Consumer Protection Authority) उपभोक्ताओं को माल की गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और कीमत में बदलाव के बारे में सूचित करने के लिए दिशानिर्देश तय करेगा।
- भारत में, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सूचना के अधिकार ( Right to Information) को उपभोक्ता अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है।
- मुद्रास्फीति पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Inflation
महत्वपूर्ण तथ्य:
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. न्यायपालिका में कार्यवाही के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)
- वर्तमान में, भारत में कोई भी उच्च न्यायालय अपनी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं करता है।
- भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन वी रमना की सेवानिवृत्ति के दिन, सर्वोच्च न्यायलय ने अपनी कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया था।
- यूएसए सर्वोच्च न्यायलय ने अपनी कार्यवाही के प्रसारण की याचिकाओं को खारिज कर दिया है, लेकिन ऑडियो रिकॉर्डिंग और मौखिक तर्कों की टेप जारी करने की अनुमति दी है।
उपर्युक्त कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 2 और 3
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 3
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2018 में अपने एक फैसले में, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण न्याय प्राप्त करने के अधिकार का भाग माना था।
- वर्तमान में, देश में छह उच्च न्यायालय अर्थात् गुजरात, उड़ीसा, कर्नाटक, झारखंड, पटना और मध्य प्रदेश, यू टूयब (YouTube) पर अपने स्वयं के चैनलों के माध्यम से अपनी कार्यवाही को लाइव-स्ट्रीम करते हैं।
- कथन 2 सही है: 26 अगस्त को, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन वी रमना की सेवानिवृत्ति के दिन, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया था।
- कथन 3 सही है: जबकि यूएस सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यवाही के प्रसारण के लिए याचिकाओं को खारिज कर दिया है, उसने वर्ष 1955 से ऑडियो रिकॉर्डिंग और मौखिक तर्कों की टेप को जारी करने की अनुमति दी है।
प्रश्न 2. भारत में मृत्युदंड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)
- दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के अनुसार एक न्यायाधीश को दोषसिद्धि के बाद सजा के सवाल पर आरोपी को सुनने और फिर कानून के अनुसार उसे सजा दी जा सकती।
- 1980 में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य’ मामले में फैसला सुनाया कि दोषसिद्धि के बाद, सजा पर अलग सुनवाई होगी, जहां एक न्यायाधीश को आश्वस्त किया जाएगा कि मौत की सजा क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
- ‘दत्ताराय बनाम महाराष्ट्र राज्य’ में, सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को इस आधार पर उम्रकैद में बदल दिया कि सजा पर पर्याप्त सुनवाई नहीं हुई थी।
उपर्युक्त कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 235 में एक न्यायाधीश को सजा के प्रश्न पर दोषसिद्धि के बाद अभियुक्त को सुनने और फिर कानून के अनुसार उसे सजा सुनाने की आवश्यकता होती है।
- कथन 2 सही है: 1980 में, सर्वोच्च न्यायालय ने ‘बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य’ में मृत्युदंड की संवैधानिकता को इस शर्त पर बरकरार रखा कि यह सजा “दुर्लभ से दुर्लभ” मामलों में दी जाएगी।
- महत्वपूर्ण रूप से, व्यवस्था ने इस बात पर भी जोर दिया कि सजा के लिए एक अलग सुनवाई होगी, जहां एक न्यायाधीश को आश्वस्त किया जाएगा कि मौत की सजा क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
- कथन 3 सही है: ‘दत्ताराय बनाम महाराष्ट्र राज्य’ में, सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने मौत की सजा को इस आधार पर उम्रकैद में बदल दिया कि सजा पर पर्याप्त सुनवाई नहीं हुई थी।
प्रश्न 3. ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’, ‘ऑपरेशन डबल बुल’ और ‘ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म’ निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं? (स्तर-मध्यम)
(a) विदेशों से भारतीयों की निकासी
(b) नक्सल विरोधी अभियान
(c) ईडी द्वारा की गई छापेमारी
(d) वन्यजीवों का संरक्षण
उत्तर: b
व्याख्या:
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में ऑपरेशन ऑक्टोपस, ऑपरेशन डबल बुल, ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म और ऑपरेशन चक्रबंधा शुरू किया था।
प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)
- 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से, संगठन के मिशन और कार्य को इसके संस्थापक चार्टर में निहित उद्देश्यों और सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसे 1963, 1965 और 1973 में तीन बार संशोधित किया गया है।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर में देशों की संप्रभु समानता से लेकर अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल के उपयोग के निषेध जैसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख सिद्धांतों को संहिताबद्ध किया जाता है।
- इस पर 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में इंटरनेशनल ओर्गनइजेशन पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के समापन पर हस्ताक्षर किए गए और यह 24 अक्टूबर 1945 को अस्तित्व में आया।
उपर्युक्त कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 और 3 सही है: संयुक्त राष्ट्र का चार्टर संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक दस्तावेज है। इस पर 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में इंटरनेशनल ओर्गनइजेशन पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के समापन पर हस्ताक्षर किए गए और यह 24 अक्टूबर 1945 को अस्तित्व में आया।
- 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से, संगठन के मिशन और कार्य को इसके संस्थापक चार्टर में निहित उद्देश्यों और सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसे 1963, 1965 और 1973 में तीन बार संशोधित (amended three times) किया गया है।
- कथन 2 सही है:संयुक्त राष्ट्र चार्टर में देशों की संप्रभु समानता से लेकर अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बल के उपयोग के निषेध जैसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख सिद्धांतों को संहिताबद्ध किया जाता है।
- संयुक्त राष्ट्र अपने अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय चरित्र और चार्टर में निहित शक्तियों के कारण विभिन्न प्रकार के मुद्दों पर कार्रवाई कर सकता है, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय संधि माना जाता है।
- जैसे की संयुक्त राष्ट्र चार्टर अंतरराष्ट्रीय कानून है,जिससे संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश बंधे हैं।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में ‘ताप-अपघटन और प्लाज्मा गैसीकरण’ शब्दों का उल्लेख किया गया है? (CSE- प्रारंभिक परीक्षा -2019)(स्तर – मध्यम)
(a) दुर्लभ भू-तत्वों का निष्कर्षण।
(b) प्राकृतिक गैस निष्कर्षण प्रौद्योगिकी ।
(c) हाइड्रोजन ईंधन-आधारित ऑटोमोबाइल।
(d) अपशिष्ट से ऊर्जा प्रौद्योगिकी ।
उत्तर: d
व्याख्या:
- पायरोलिसिस बायोमास को एक मध्यवर्ती तरल उत्पाद में परिवर्तित करने के लिए उपलब्ध तकनीकों में से एक है जिसे ड्रॉप-इन हाइड्रोकार्बन जैव ईंधन, ऑक्सीजन युक्त ईंधन योजक और पेट्रोकेमिकल प्रतिस्थापन के लिए परिष्कृत किया जा सकता है।
- पायरोलिसिस ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक यौगिकों का रासायनिक अपघटन है।
- प्लाज्मा गैसीकरण एक उच्च तापमान वाली तापीय प्रक्रिया है,जिसमें प्लाज्मा का उपयोग कार्बनिक पदार्थों को सिनगैस (synthesis gas-संश्लेषण गैस) में बदलने के लिए किया जाता है,जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड से बना होता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न 1. सिकुड़ती मुद्रास्फीति क्या है? यह समष्टि आर्थिक लेखांकन (macroeconomic accounting) के लिए एक नई चुनौती कैसे पैदाकरती है? (10 अंक; 150 शब्द) (जीएस-3; अर्थव्यवस्था)
प्रश्न 2. “हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का भविष्य हैं” स्पष्ट कीजिए। (10 अंक; 150 शब्द) (जीएस-3; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)