|
A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: सामाजिक मुद्दे:
स्वास्थ्य:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
महिलाएँ, विवाह और श्रम बाज़ार भागीदारी:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:
सामाजिक मुद्दे:
विषय: महिला एवं महिला संगठन की भूमिका
मुख्य परीक्षा: महिला श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट के कारण और संभावित उपाय।
भूमिका :
- 2023 के अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार की विजेता क्लाउडिया गोल्डिन ने महिलाओं के श्रम बाजार के परिणामों में अभूतपूर्व अंतर्दृष्टि प्रदान की।
- उन्होंने श्रम बाजार में ऐतिहासिक और समकालीन लैंगिक असमानताओं का अन्वेषण किया।
महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) पर डेटा:
- 2022 में महिलाओं के लिए वैश्विक LFPR 47.3% था, जो अपेक्षाकृत कम भागीदारी का संकेत देता है।
- भारत में 1990 से 2022 के बीच महिला LFPR में 28% से 24% की गिरावट देखी गई।
- श्रम बाज़ार भागीदारी में स्थायी लैंगिक असमानताएँ दुनिया भर में मौजूद हैं।
निम्न महिला LFPR के कारण:
- LFPR पर विवाह का प्रभाव:
- सीमित शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों में वृद्धि और सामाजिक अस्वीकृति जैसे कारकों के कारण विवाह से अक्सर LFPR में कमी आती है।
- विवाह घरेलू दायित्वों और सांस्कृतिक बाधाओं को बढ़ाता है जो महिलाओं की कार्यबल भागीदारी को प्रभावित करता है।
- महिलाओं के LFPR को प्रभावित करने वाले अनेक कारक:
- धर्म, जाति, भौगोलिक स्थिति, घरेलू संपत्ति और सामाजिक मानदंडों सहित व्यक्तिगत और सामाजिक कारक महिलाओं के श्रम बाजार में प्रवेश को प्रभावित करते हैं।
- विवाहित महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियाँ:
- विवाह के बाद श्रम बाजार में फिर से प्रवेश करने की इच्छुक महिलाएं अपने घर के नजदीक लचीले अवसरों को पसंद करती हैं।
- लिंग-असममित पेशेवर लागत कैरियर विकल्पों, आय, विवाह की उम्र और प्रजनन संबंधी निर्णयों में असमानताओं में योगदान करती है।
- विभिन्न सामाजिक आर्थिक स्तरों पर प्रभाव:
- ऊपरी स्तर की महिलाएँ पारंपरिक भूमिकाओं के अनुरूप रहती हैं, जबकि निचले स्तर की महिलाएँ गरीबी से उपजी आर्थिक आवश्यकता के कारण कार्यबल में भाग लेती हैं।
- आयु और शिक्षा का प्रभाव:
- 25-29 आयु वर्ग में महिला LFPR में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
- कम साक्षरता कौशल वाली महिलाएं शादी के बाद श्रम बल में भाग लेने के लिए अधिक इच्छुक होती हैं।
समाधान:
- डे-केयर सेवाओं की कमी को संबोधित करना:
- अपर्याप्त डे-केयर सेवाएँ महिला LFPR के लिए बाधा के रूप में कार्य करती हैं।
- औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों सहित विभिन्न सामाजिक-आर्थिक स्तरों की महिलाओं के लिए डे-केयर सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाना।
- सरकारी पहल:
- कामकाजी माताओं के बच्चों के लिए राष्ट्रीय क्रेच (शिशुगृह) योजना सरकारी प्रयासों का एक उदाहरण है।
- श्रम शक्ति में विवाहित महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में ऐसी योजनाएं लागू करना।
- कार्यस्थल अनुकूलन:
- ऐसे कार्य वातावरण बनाना जो महिलाओं की ज़रूरतों और कल्याण को प्राथमिकता दें।
- भारत में महिला श्रम बल की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित परिवहन विकल्प प्रदान करना और अंशकालिक नौकरी के अवसरों का विस्तार करना।
|
सारांश:
|
अस्वस्थ शहरी भारत:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
स्वास्थ्य:
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
मुख्य परीक्षा: वर्तमान शहरीकरण के कारण स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं और संभावित समाधान।
प्रसंग:
- भारत की शहरी आबादी 2035 तक 675 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसे दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी बना देगी।
- हालाँकि शहरों ने भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान दिया है, लेकिन वे स्वास्थ्य, पर्यावरण और समानता लक्ष्यों को पूरा करने में पीछे रह गए हैं।
शहरी भारत और अनेक स्वास्थ्य जोखिम:
- भारत में शहरी निवासियों को कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है:
- विश्व स्तर पर वायु और ध्वनि प्रदूषण का उच्चतम स्तर।
- सीमित हरे स्थान और फुटपाथों और पार्कों तक अपर्याप्त पहुंच, सक्रिय जीवनशैली में बाधा बन रही है।
- पुरानी परिवहन प्रणालियाँ जो वायु प्रदूषण में योगदान करती हैं।
- पौष्टिक भोजन तक पहुंच में कमी और जहरीले रसायनों और भारी धातुओं के संपर्क में आना।
- ये कारक हृदय रोग और मधुमेह जैसी कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा देते हैं।
- इन स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है।
डबल या ट्रिपल-ड्यूटी एक्शन:
- भारत में स्वच्छ ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता में प्रमुख निवेश जारी हैं, जो जलवायु और समानता लक्ष्यों को पूरा करते हुए स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के अवसर प्रदान करते हैं।
- स्वास्थ्य लाभ को अधिकतम करने के लिए भोजन, गतिशीलता और हरित बुनियादी ढांचे में एक साथ सुधार आवश्यक है।
- छोटे बदलाव, जैसे सुरक्षित पैदल चलने और बाइक चलाने के लिए लेन बनाना, न केवल शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देते हैं बल्कि वायु प्रदूषण के प्रभाव को भी कम करते हैं।
- शारीरिक व्यायाम मोटापे और मधुमेह के खतरे से निपटने में मदद करता है, हृदय रोग से बचाव के रूप में कार्य करता है।
- अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और खराब रखरखाव वाले फुटपाथ पैदल चलने और बाइक चलाने में बाधा डालते हैं, जिससे यह खतरनाक और अव्यवहारिक हो जाता है।
- सक्रिय परिवहन में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ की संभावना है।
समग्र शहरी नीति की ओर:
- परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के आर्थिक और स्वास्थ्य प्रभाव मॉडल ज्यादातर वायु प्रदूषण में कमी पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
- इलेक्ट्रिक कारों (electric cars) को पैदल पथ और साइकिल लेन जैसे सक्रिय परिवहन विकल्पों के साथ जोड़ने से आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ती है।
- स्वस्थ आहार को प्रोत्साहित करने, पेय पदार्थों में चीनी और नमक को सीमित करने से मोटापा, टाइप 2 मधुमेह (T2D), और हृदय रोग के जोखिमों को कम किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य और उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।
- शहरी नीतियों में जनसंख्या स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय शहरी नियोजन में अक्सर उन पर बाद में विचार किया जाता है, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में।
- अस्वास्थ्यकर आहार, कम शारीरिक गतिविधि और वायु प्रदूषण भारतीय शहरों में स्वास्थ्य के लिए बड़े खतरे हैं, जो नशीली दवाओं, तंबाकू, शराब और दुर्घटनाओं के संयुक्त जोखिमों से भी अधिक हैं। भारतीय शहरों में हृदय रोग, मोटापा और T2D से निपटने के लिए एक ठोस प्रयास की आवश्यकता है।
|
सारांश:
|
सफेद फास्फोरस के उपयोग की वैधता:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते।
मुख्य परीक्षा: युद्ध के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन और नागरिक जीवन को खतरा और इससे संबंधित सम्मेलन।
प्रारंभिक परीक्षा: कुछ पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन (CCW) और रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC)
भूमिका:
- ह्यूमन राइट्स वॉच ने हाल ही में इज़राइल रक्षा बलों (IDF) पर गाजा में सफेद फास्फोरस हथियारों का उपयोग करने का आरोप लगाया, जिससे नागरिकों पर इसके प्रभाव के बारे में चिंता बढ़ गई।
- 2008-2009 के गाजा युद्ध में IDF पर सफेद फास्फोरस युक्त सब-म्युनिशन सामग्री का उपयोग करने के आरोप लगे थे। प्रारंभ में, इज़राइली सरकार ने इससे इनकार किया लेकिन बाद में 2009 में इसके उपयोग को स्वीकार किया और दावा किया कि इसका प्रयोग निर्जन क्षेत्रों में सिग्नलिंग और मार्किंग के लिए किया गया था।
आग लगाने वाला हथियार:
- सफेद फास्फोरस को एक आग लगाने वाला हथियार माना जाता है, जिसे मुख्य रूप से वस्तुओं में आग लगाने या लौ, गर्मी या लक्ष्य पर पहुंचाए गए पदार्थ की रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से जलाकर घायल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस युद्ध सामग्री का उद्देश्य रोशनी करना और स्मोक स्क्रीन निर्मित करना है, जिसमें आग लगाने वाले प्रभाव गौण या अनैच्छिक होते हैं।
कुछ पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन (CCW):
- कुछ पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन (Chemical Weapons Convention (CWC)) नागरिकों की सुरक्षा के उद्देश्य से सफेद फास्फोरस सहित आग लगाने वाले हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है।
- CCW के तहत प्रोटोकॉल III विशेष रूप से आग लगाने वाले हथियारों और उनके विनियमन को संबोधित करता है।
रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC):
- रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC) व्यापक रूप से रासायनिक हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन सफेद फास्फोरस, जब रासायनिक युद्ध के लिए नहीं बल्कि आग लगाने वाले हथियार के रूप में उपयोग किया जाता है, तो इसे CWC द्वारा कवर नहीं किया जाता है।
भावी कदम:
- सफेद फास्फोरस और इसी तरह के बहुउद्देश्यीय हथियारों के उपयोग के संबंध में स्पष्ट नियम बनाने के लिए CCW के प्रोटोकॉल III को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई है।
- यह कानूनी खामियों के दुरुपयोग को रोकने और प्रवर्तन की सुविधा के लिए राज्यों के लिए एक बाध्यकारी समझौता स्थापित करेगा।
- युद्ध में सफेद फास्फोरस के उपयोग के कानूनी परिणाम नागरिकों और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, संधियों और प्रोटोकॉल को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हैं।
- इन कानूनी सिद्धांतों के उल्लंघन से वैश्विक निंदा की जा सकती है, इन आरोपों की जांच की जा सकती है और युद्ध अपराधों के लिए संभावित मुकदमा चलाया जा सकता है, जो नियमों में स्पष्टता की आवश्यकता पर बल देता है।
|
सारांश:
|
प्रीलिम्स तथ्य:
1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक सौर स्टॉकटेक रिपोर्ट:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विषय: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी।
प्रारंभिक परीक्षाः अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन।
प्रसंग:
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance (ISA)), जिसमें 116 सदस्य देश शामिल हैं, का लक्ष्य सौर प्रौद्योगिकी को वैश्विक रूप से अपनाने में तेजी लाना है।
- आईएसए संयुक्त राष्ट्र कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ (‘Global Stocktake) से प्रेरित होकर अपनी पहली ‘ग्लोबल सोलर स्टॉकटेक रिपोर्ट’ जारी करने की तैयारी कर रहा है।
वैश्विक स्टॉकटेक पृष्ठभूमि:
- संयुक्त राष्ट्र पार्टियों का सम्मेलन जीवाश्म ईंधन से संक्रमण/परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने में देशों के कार्यों का आकलन करने के लिए ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ आयोजित करता है।
- यह वर्ष 2015 पेरिस समझौते (Paris Agreement) का पालन करता है और हर पांच साल में निर्धारित किया जाता है।
आईएसए का ‘सोलर स्टॉकटेक’:
- आईएसए नवंबर के मध्य में ‘सोलर स्टॉकटेक’ रिपोर्ट जारी करेगा।
- यह सौर प्रौद्योगिकी अपनाने में देशों द्वारा की गई प्रगति का मूल्यांकन करेगा।
- वर्ष 2020 में सौर ऊर्जा में लगभग 300 बिलियन डॉलर का उल्लेखनीय निवेश हुआ, जो वर्ष 2022 में बढ़कर लगभग 380 बिलियन डॉलर हो गया।
- चीन वर्तमान में सौर विनिर्माण के क्षेत्र में पर हावी है; इस स्टॉकटेक का उद्देश्य विविध विनिर्माण स्थानों का पता लगाना है।
आईएसए के प्रमुख फोकस क्षेत्र:
- भारत और फ्रांस के नेतृत्व में आईएसए, अफ्रीका में सौर प्रतिष्ठानों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करता है और उसने वैश्विक सौर सुविधा की स्थापना की है।
- वैश्विक सौर सुविधा में तीन फंड शामिल हैं: एक भुगतान गारंटी फंड, परियोजना जोखिमों के प्रबंधन के लिए एक बीमा फंड और तकनीकी सहायता के लिए एक निवेश फंड।
वैश्विक सौर फोटोवोल्टिक स्थापित संयंत्र:
- वैश्विक सौर फोटोवोल्टिक प्रतिष्ठान/स्थापित संयंत्रों की संख्या वर्ष 2022 में 191 गीगावाट के साथ बढ़कर वर्ष 2022 तक 1,133 गीगावाट (gigawatts (GW)) तक पहुंच गई हैं।
- चीन, एक गैर-आईएसए सदस्य, का योगदान लगभग 350 गीगावॉट है, इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका (111 गीगावॉट) और भारत (62 गीगावॉट) का स्थान आता हैं।
- आईएसए नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रतिबद्ध है और सौर ऊर्जा को सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच के लिए एक विश्वसनीय, भरोसेमंद और सुलभ समाधान मानता है।
2. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
विषय: राजव्यवस्था
प्रारंभिक परीक्षा: आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति।
प्रसंग:
जमरानी बांध परियोजना हेतु केन्द्रीय सहायता:
- आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA)) ने नैनीताल जिले में प्रस्तावित जमरानी बांध परियोजना के लिए उत्तराखंड को ₹1,557.18 करोड़ की केंद्रीय सहायता की मंजूरी दे दी है।
बहुउद्देशीय परियोजना और अनुमानित लागत:
- जमरानी बांध परियोजना एक बहुउद्देशीय पहल है जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹2,584.10 करोड़ है।
- इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल करना:
- सीसीईए ने जमरानी बांध परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) (PMKSY-AIBP) में शामिल करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
परियोजना विवरण:
- इस परियोजना में जमरानी गांव के निकट एक बांध का निर्माण शामिल है, जो नैनीताल क्षेत्र में स्थित राम गंगा की सहायक नदी गोला नदी के पार फैला हुआ है।
- बांध का मुख्य उद्देश्य आपस में जुड़ी नहर प्रणाली के माध्यम से पहले से मौजूद गोला बैराज तक पानी पहुंचाना है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. अंटार्कटिक बर्फ के नीचे प्राचीन परिदृश्य:
प्रसंग:
- अंटार्कटिका, जो अपने उजाड़ बर्फीले इलाके के लिए जाना जाता है, के बारे में हाल ही में किये गए अध्ययन से पता चला हैं की एक समय में इस स्थान पर नदियों और जंगलों के साथ जीवन की उपस्थिति थी।
- उपग्रह अवलोकनों और बर्फ को भेदने वाले राडार के उपयोग के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के नीचे छिपे एक विशाल प्राचीन इलाके को उजागर किया है।
अंटार्कटिका की खोई हुई दुनिया की खोज:
- हिंद महासागर की सीमा से लगे विल्क्स लैंड के पूर्वी अंटार्कटिक क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक विशाल और व्यापक परिदृश्य की पहचान की है।
- लगभग बेल्जियम के आकार के क्षेत्र को कवर करने वाला यह प्राचीन परिदृश्य, घाटियों और चोटियों को प्रदर्शित करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि हिमनद से घिरे होने से पहले नदियों ने उन्हें इस प्रकार का आकार दिया था।
- यह परिदृश्य कम से कम 14 मिलियन वर्ष पुराना है और संभवतः इससे भी पहले, यह अंटार्कटिका के गहरे जमने से भी पहले का है।
अतीत की तस्वीर:
- डरहम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीवर्ट जैमिसन ने इस छिपी हुई दुनिया को “अतीत का तस्वीर” (snapshot of the past) के रूप में वर्णित किया है, जिससे पता चलता है कि एक समय यह गर्म था।
- जलवायु की स्थिति आधुनिक पेटागोनिया से लेकर उष्णकटिबंधीय जलवायु के करीब तक हो सकती है।
- हालाँकि यह क्षेत्र संभवतः वन्य जीवन का समर्थन करता है, परन्तु अधूरे जीवाश्म रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता है कि इसमें कौन से जानवर रहते थे।
मोटी बर्फ के नीचे:
- प्राचीन परिदृश्य के ऊपर की बर्फ 2.2-3 किमी मोटी है, जिससे इसे मंगल की सतह की तुलना में कम समझा जाता है।
- इसके रहस्यों को खोलने में नीचे तलछट के मुख्य नमूने प्राप्त करने के लिए बर्फ के माध्यम से खुदाई शामिल हो सकती है, जो संभावित रूप से प्राचीन वनस्पतियों और जीवों को प्रकट कर सकती है।
- ग्रीनलैंड में इसी तरह के तरीकों ने 20 लाख साल पहले के साक्ष्य प्रदान किए हैं।
शोध के तरीके:
- अध्ययन ने बर्फ की सतह के उपग्रह अवलोकनों को नियोजित किया, जो कुछ क्षेत्रों में दबे हुए परिदृश्य की रूपरेखा का अनुसरण करते थे।
- साइट पर उड़ने वाले एक विमान से एकत्र किए गए बर्फ-भेदक रडार डेटा ने इस अनूठे परिदृश्य का अनावरण किया है।
- पिछले अध्ययनों से अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे विभिन्न प्राचीन परिदृश्यों का पता चला है, लेकिन यह खोज अपनी तरह की पहली खोज है।
- नदी गतिविधि, विवर्तनिकी और हिमस्खलन के कारण समय के साथ भूवैज्ञानिक परिदृश्य में बदलाव आया हैं।
2. चीनी अनुसंधान पोत शि यान:
- श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने कोलंबो बंदरगाह पर चीनी अनुसंधान पोत शी यान 6 के आगमन की पुष्टि की।
- श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि जहाज के आगमन के लिए मंजूरी दी जाएगी, जिससे पुनःपूर्ति की अनुमति मिलेगी।
- चीनी अनुसंधान पोत की निर्धारित यात्रा की रिपोर्टों ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों की चिंताओं को उजागर किया, इसके बाद इन्होने श्रीलंका के अधिकारियों के समक्ष इन चिंताओं को उठाया।
3. राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण:
प्रसंग:
- राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण ( National Financial Reporting Authority (NFRA)) ने अर्न्स्ट एंड यंग (EY), एस.आर. बाटलीबोई की एक सदस्य फर्म के खिलाफ महत्वपूर्ण जांच शुरू की है।
- एस.आर. बाटलीबोई अडानी समूह की पांच प्रमुख कंपनियों की ऑडिटिंग/लेखा परीक्षण करती है।
एनएफआरए की भूमिका और प्राधिकरण:
- एनएफआरए भारत की प्राथमिक नियामक संस्था है जो देश में वित्तीय रिपोर्टिंग और लेखांकन मानकों की देखरेख के लिए जिम्मेदार है।
- इसकी स्थापना वित्तीय रिपोर्टिंग में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए की गई थी, जो निवेशकों के विश्वास और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- एनएफआरए का अधिकार क्षेत्र लेखा परीक्षकों के आचरण और प्रदर्शन की निगरानी तक विस्तृत है, खासकर महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े मामलों में।
जांच की शुरुआत:
- कुछ सप्ताह पहले एनएफआरए ने एस.आर.बाटलीबोई में अपनी जांच शुरू की एवं लेखांकन मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण के सक्रिय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला था।
- इस जांच का फोकस केवल एस आर बटलीबोई पर नहीं है, बल्कि यह अडानी समूह की कंपनियों से जुड़ी एक व्यापक जांच का हिस्सा है।
अदानी समूह की लेखापरीक्षित कंपनियाँः
- एस.आर. बाटलीबोई तीन सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अदानी समूह की फर्मों जैसे अदानी पावर, अदानी ग्रीन एनर्जी और अदानी विल्मर के लिए ऑडिटिंग फर्म के रूप में कार्य करती है।
- इसके अतिरिक्त, यह समूह के भीतर हाल ही में अधिग्रहीत सीमेंट कंपनियों जैसे एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स की ऑडिटिंग/लेखा परीक्षण की देखरेख करता है।
- इन घटनाक्रमों के जवाब में, अदानी समूह ने एक बयान जारी कर कहा है कि समूह अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को लागू कानूनों के अनुसार पूर्ण रूप से संचालित करता है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समिति का अध्यक्ष वित्त मंत्री होता है।
2. यह कृषि उपज की कीमतों के निर्धारण से संबंधित है।
3. यह 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- प्रधानमंत्री इस समिति के प्रमुख/अध्यक्ष होते हैं और यह कृषि उपज की कीमतों और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से संबंधित है।
प्रश्न 2. जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह बांध गंगा नदी पर स्थित है।
2. परियोजना का पेयजल, सिंचाई एवं विद्युत लाभ पूर्णतः उत्तराखंड को मिलेगा।
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: d
व्याख्या:
- यह बांध गंगा की सहायक नदी गोला नदी पर स्थित है। इस परियोजना की सिंचाई लाभ का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिलेगा। तथा पेयजल और विद्युत का लाभ पूरी तरह से उत्तराखंड को मिलेगा।
प्रश्न 3. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीएमकेएसवाई का लक्ष्य सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना है।
2. पीएमकेएसवाई त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) और एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP) को एकीकृत करता है।
3. यह योजना पूरी तरह से कृषि मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने गलत है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: a
व्याख्या:
- पीएमकेएसवाई का उद्देश्य सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्रों का विस्तार करना, एआईबीपी और आईडब्ल्यूएमपी का एकीकरण करना है,और इसे केवल कृषि मंत्रालय द्वारा ही नहीं, बल्कि कई मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
प्रश्न 4. राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन गलत है/हैं?
1. एनएफआरए का गठन 2018 में कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत किया गया था।
2. इसके कर्तव्यों में केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियों और मानकों की सिफारिश करना शामिल है।
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: d
व्याख्या:
- दोनों कथन सही हैं।
प्रश्न 5. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा समाधानों में 1,000 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाना है।
2. आईएसए मुख्य रूप से बड़ी औद्योगिक सौर परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
3. ISA की कल्पना 2015 में पेरिस में आयोजित 21वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP21) के मौके पर भारत और फ्रांस के संयुक्त प्रयास के रूप में की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 2 गलत है। आईएसए का ध्यान अपने सदस्य देशों में ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की तैनाती बढ़ाने पर है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. युद्ध में सफेद फास्फोरस के उपयोग की वैधता की जांच कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध] (Examine the legality of the usage of White Phosphorus in conflicts. (15 marks, 250 words) [GS-2, IR])
प्रश्न 2. श्रम बल भागीदारी में देखी गई लैंगिक असमानता का अर्थव्यवस्था और समाज पर प्रभाव की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-1, सामाजिक मुद्दे] (Discuss the gender disparity seen in labour force participation and its impact on the economy and society. (15 marks, 250 words) [GS-1, Social Issues])
(नोट: मुख्य परीक्षा के अंग्रेजी भाषा के प्रश्नों पर क्लिक कर के आप अपने उत्तर BYJU’S की वेव साइट पर अपलोड कर सकते हैं।)