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विषयसूची:

  1. WHO-GCTM (WHO Global Centre for Traditional Medicine/डब्ल्यूएचओ-पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र)
  2. री-सैट और वेदाज के इस्तेमाल से कृषि-निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

1.WHO-GCTM:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश। 

प्रारंभिक परीक्षा: WHO-GCTM से सम्बंधित तथ्य। 

प्रसंग: 

  • राज्यसभा में आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक प्रश्न के लिखित जवाब में WHO-GCTM (डब्ल्यूएचओ-पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र) के संबंध में जानकारी दी और WHO-GCTM के वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरने की संभावना व्यक्त की।   

विवरण:  

WHO-GCTM भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्व स्वास्थ्य संगठन मुख्यालय (जिनेवा) का एक आउटपोस्ट केंद्र है। यह WHO सदस्य देशों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में सहायता करेगा। WHO-GCTM वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा जो पारंपरिक औषधियों से संबंधित दवाओं और अनुसंधान के विकास को बढ़ावा देगा तथा पारंपरिक दवाओं के बारे में साक्ष्य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा जागरूकता को मजबूत बनाएगा।

WHO-GCTM की गतिविधियां/कार्यक्षेत्र इस प्रकार हैं-

  1. विकास और स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा को आकार देने, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और मानकों को स्थापित करने, देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने और पारंपरिक चिकित्सा के स्वास्थ्य रुझानों की निगरानी और आकलन के लिए एक संरक्षक के रूप में कार्य करना।
  2. अनुसंधान पद्धति मानकों को स्थापित करना तथा पारंपरिक चिकित्सा में नैदानिक अभ्यास और प्रोटोकॉल के लिए मानकों को विकसित करना।
  3. पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता, पहुंच तथा तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करना।
  4. प्रासंगिक तकनीकी क्षेत्रों में मानदंड, मानक और दिशानिर्देश विकसित करना, डेटा एकत्र करने के लिए उपकरण और तरीके विकसित करना, विश्लेषण करना और प्रभाव का आकलन करना।
  5. WHO के भीतर साझेदारी और सहयोग का निर्माण करना तथा विशेष कार्यक्रमों (IARC, WHO अकादमी, TDR, स्वास्थ्य नीति अनुसंधान के लिए गठबंधन, PHC पर विशेष कार्यक्रम), उद्देश्यों के लिए प्रासंगिता के क्षेत्र में अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, WHO सहयोगी केंद्र नेटवर्क, अंतर्राष्ट्रीय संगठन तथा पेशेवर संघ और विशिष्ट क्षमता निर्माण समर्थन समूहों के साथ सहयोग करना।
  6. उद्देश्यों के लिए प्रासंगिता के क्षेत्र में विशिष्ट क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना और परिसर, आवासीय या वेब आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना तथा साझेदारी के माध्यम से WHO अकादमी और अन्य रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  7. पारंपरिक चिकित्सा से अनुमानित स्वास्थ्य प्रौद्योगिक मूल्यांकन और स्वास्थ्य अर्थशास्त्र के लिए दिशा-निर्देश विकसित करने में मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करना तथा इस पर देशों की विकसित रणनीतियों का समर्थन करना।

2.री-सैट और वेदाज के इस्तेमाल से कृषि-निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए:

सामान्य अध्ययन: 3

प्रौद्योगिकी:

विषय: देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास। 

मुख्य परीक्षा: कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के प्रयोग से किसानों की आय में वृद्धि के अवसर। 

प्रसंग: 

  • औपचारिक रूप से उपयोगकर्ताओं के लिए भू-प्रेक्षण उपग्रह-04 (री-सैट-1ए) के आंकड़ा उत्पादों और सेवाओं को जारी किया गया।   

विवरण:  

  • इस अवसर पर, सभी हितधारकों की साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों एवं संबंधित डेटाबेस का उपयोग करके ‘कृषि-निर्णय समर्थन प्रणाली’ (Agriculture-DSS) विकसित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और अंतरिक्ष विभाग के बीच कृषि क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय अंतरिक्ष विभाग के भू-प्रेक्षण उपग्रह-04 (री-सैट-1ए) और वेदाज का उपयोग करते हुए गति शक्ति की तर्ज पर कृषि-डीएसएस, एक निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित कर रहा है। यह इसरो के मोसडेक तथा भुवन (जियो-प्लेटफॉर्म) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रणालियों के साथ एकीकरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सभी हितधारकों की साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएगा।
  • कृषि के क्षेत्र में एक नया आयाम जुड़ रहा है और अंतरिक्ष विज्ञान के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत हो रही है। कृषि विभाग और अंतरिक्ष विभाग के बीच हुए समझौते से कृषि क्षेत्र की ताकत और बढ़ेगी। अगर यह ज्ञान किसानों तक पहुंचेगा तो उनके उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता बढ़ेगी। उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी और निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।
  • भारत और पूरी दुनिया में कृषि क्षेत्र का बहुत महत्व है। यह क्षेत्र रोजी-रोटी के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और बड़ी आबादी को रोजगार देने का काम कर रहा है। पहले ज्ञान और निजी निवेश की कमी के कारण इस क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा। इस क्षेत्र में जितने बदलाव, ज्ञान और निवेश की जरूरत है, वह नहीं हुआ है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र की जितनी प्रगति होनी चाहिए, उतनी नहीं हो पाई है। 
  • एग्रीस्टैक पर भी कृषि विभाग काम कर रहा है। किसान की आय बढ़ाने और पूर्वानुमान लगाकर उसे नुकसान से बचाने के लिए काम किया जा रहा है।
  • फसल का आकलन, राज्यों को आवंटन, क्षेत्र को सूखा घोषित करने के लिए सर्वेक्षण, आपदा आकलन- तकनीक अपनाने से ये सभी कार्य आसान हो जाएंगे। यह तकनीक कृषि क्षेत्र के साथ-साथ देश के लिए भी बहुत फायदेमंद है। एग्रीस्टैक के पूरा होने के बाद कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
  • री-सैट-1ए डेटा कृषि, जैव संसाधन, पर्यावरण, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित करने में बेहद उपयोगी होगा।
  • जब री-सैट उपग्रहों की अगली पीढ़ी आएगी, तो इसकी आवृत्ति के साथ-साथ सटीकता भी अधिक होगी। 
  • यह पहल उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग के माध्यम से कृषि में क्रियाकलाप को बढ़ाने में मदद करेगी और एक नवाचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में डेटा की शक्ति और डिजिटल अवसरों को खोलेगी। 
    • री-सैट-1ए भारत का पहला रडार इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे 14 फरवरी, 2022 को लॉन्च किया गया था। री-सैट-1ए एक बारहमासी उपग्रह है और वनस्पति में गहराई तक प्रवेश कर सकता है। यह प्रकाश की स्थिति से भिन्न उच्च रेजोल्यूशन वाली भू-स्थानिक छवियां ले सकता है। 
  • यह समझौता ज्ञापन भारतीय कृषि के समावेशी, आत्मनिर्भर और सतत विकास के लिए डिजिटल आधार प्रदान करेगा।
  • री-सैट-1ए डेटा राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद द्वारा भूनिधि जियोपोर्टल के माध्यम से प्राप्त, संसाधित और प्रसारित किया जाता है।

 

13 December PIB :- Download PDF Here

लिंक किए गए लेख में 12 दिसंबर 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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