14 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’ के संबंध में भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच एक समझौते को मंजूरी: 
  2. केन्द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के अधिकृत निकायों के बीच युवाओं के लिए कार्य के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित समझौते को मंजूरी दी:
  3. श्रीलंका के कोलंबो में बिम्सटेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केन्द्र की स्थापना के लिए भारत द्वारा मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) को मंजूरी दी: 
  4. सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए ‘अग्निपथ’ योजना को मंजूरी: 
  5. कैबिनेट ने नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट धोलेरा, अहमदाबाद के विकास की मंजूरी दी:
  6. ड्रोन नियम, 2021 के तहत गुरुग्राम स्थित आईओ-टेक-वर्ल्ड को पहला टाइप सर्टिफिकेट प्रदान किया:
  7. सीसीआई ने एयर इंडिया द्वारा एयर एशिया इंडिया में संपूर्ण हिस्‍सेदारी प्राप्‍त करने को मंजूरी दी:
  8. सुगम्य केन डिवाइस:

1. ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’ के संबंध में भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच एक समझौते को मंजूरी: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय: भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय संघठनो की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा:  ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’। 

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने पैलेस डेस नेशन्स, जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओजी) में उपयोग किए जाने वाले ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’ के संबंध में भारत सरकार और संयुक्‍त राष्‍ट्र के बीच एक समझौते पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

उद्देश्य:

  • ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’ के विकास की परियोजना की परिकल्पना 2020 में भारत सरकार द्वारा अपनी 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र को दान के रूप में की गई थी। 
  • इस ऐप का विकास, इसकी तैनाती और इसके रखरखाव की अनुमानित लागत दो मिलियन अमेरिकी डॉलर है।

विवरण:  

  • संयुक्त राष्ट्र (यूएन) 1945 में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसके सदस्य की संख्या वर्तमान में 193 है। भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है।
  • जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओजी) ऐतिहासिक पैलेस डेस नेशन्स में स्थित है।
  • इस परियोजना में यूएनएलजी के पैलेस डेस नेशन्स परिसर में दिशा सूचक सुविधा के लिए एक सॉफ्टवेयर-आधारित ‘वे फाइंडिंग एप्लीकेशन’ का विकास, उसकी तैनाती और उसका रखरखाव शामिल है।
  • यह एप्लिकेशन यूएनओजी की पांच इमारतों में फैली 21 मंजिलों के भीतर उपयोगकर्ताओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक अपना रास्ता खोजने में समर्थ बनाएगी। इस ऐप का विकास  भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) के एक स्वायत्त दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) को सौंपा गया है।
  • यह परियोजना भारत सरकार की ओर से संयुक्त राष्ट्र को महत्वपूर्ण देन होगी।
  • यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी क्षमताओं को रेखांकित करेगी, बल्कि संयुक्त राष्ट्र स्तर के मंच पर देश की प्रतिष्ठा को भी बढ़ाएगी।
  • यह ऐप संयुक्त राष्ट्र में भारत की उपस्थिति को महसूस कराएगा और  यहां आने वाले लोगों के मोबाइल में एक ‘मेड इन इंडिया’ ऐप – के रूप में भारत को सॉफ्ट पावर को भी प्रदर्शित करेगा।

2. केन्द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के अधिकृत निकायों के बीच युवाओं के लिए कार्य के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित समझौते को मंजूरी दी 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय: भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय संघठनो उनकी नीतियां और राजनीति का प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)।

मुख्य परीक्षा:     

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्‍य देशों के अधिकृत निकायों के बीच युवाओं के लिए कार्य के क्षेत्र में सहयोग के संबंध में शंघाई सहयोग संगठन के सदस्‍य देशों के बीच हस्‍ताक्षरित समझौते से अवगत कराया गया।

उद्देश्य:

  • इस समझौते का उद्देश्य शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के युवाओं के बीच आपसी विश्वास, मैत्रीपूर्ण संबंध एवं सहयोग को मजबूत करना और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को सुदृढ़ करने के एक तत्व के रूप में युवा सहयोग के विकास को सुनिश्चित  करते हुए, अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर युवा सहयोग की स्थितियों में और अधिक सुधार करना है।

विवरण:  

  • शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों द्वारा 17.09.2021 को युवाओं के कार्य क्षेत्र में सहयोग से संबंधित इस समझौते को अपनाए जाने के परिणामस्वरूप, इस पर माननीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री, भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। 
  • एससीओ सचिवालय में कामकाज की आधिकारिक भाषा रूसी और चीनी है।
  • सहयोग के क्षेत्रों में शामिल हैं;
  • राज्य की युवा नीति को लागू करने वाले युवाओं एवं सार्वजनिक युवा संगठनों (संघों) के साथ सहयोग को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय युवा सहयोग को बढ़ावा देने वाली पहल का समर्थन करना।
  • सहयोग के क्षेत्रों में युवाओं के साथ काम करने वाले पेशेवर कर्मचारियों का प्रशिक्षण; वैज्ञानिक, संदर्भ एवं पद्धति संबंधी सामग्रियों का आदान-प्रदान, राज्य के निकायों, राज्य की युवा नीति के कार्यान्वयन में शामिल तथा युवा पहल का समर्थन करने वाले सार्वजनिक संगठनों, अन्य संगठनों और संघों के कार्य अनुभव का आदान-प्रदान भी शामिल है।
  • युवाओं से संबंधित विभिन्न नीतिगत मुद्दों और युवा सहयोग से जुड़े संयुक्त अनुसंधान एवं गतिविधियों को कार्यान्वित करना; प्रकाशित वैज्ञानिक तथ्यों का आदान-प्रदान, विनाशकारी संरचनाओं में युवाओं की भागीदारी को रोकने के सामयिक मुद्दों पर शोध कार्य; युवाओं के रोजगार एवं कल्याण में वृद्धि करने के लिए उन्हें उद्यमिता एवं रचनात्मक परियोजनाओं में शामिल करने के उद्देश्य से संयुक्त आर्थिक एवं मानवीय पहल को बढ़ावा देना; एससीओ युवा परिषद की गतिविधियों का समर्थन करना भी उपरोक्त सहयोग का हिस्सा है।

3. श्रीलंका के कोलंबो में बिम्सटेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केन्द्र की स्थापना के लिए भारत द्वारा मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) को मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना। 

प्रारंभिक परीक्षा: बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक),टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर फैसिलिटी (टीटीएफ)।  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर फैसिलिटी (टीटीएफ) की स्थापना के लिए भारत द्वारा एक मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) को मंजूरी दे दी है। 

उद्देश्य:

  • बिम्सटेक टीटीएफ का मुख्य उद्देश्य प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण, अनुभवों को साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में समन्वय एवं सहयोग को मजबूत करना है।
  • श्रीलंका के कोलंबो में 30 मार्च, 2022 को आयोजित पांचवें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक के सदस्य देशों द्वारा इस बारे में हस्ताक्षर किए गए थे।

विवरण:  

  • यह टीटीएफ अन्य बातों के अलावा, बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच निम्नलिखित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करेगा। 
  • ये प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं:
  • जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित अनुप्रयोग, कृषि प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल प्रौद्योगिकी में स्वचालन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित प्रौद्योगिकी में स्वचालन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, समुद्र विज्ञान, परमाणु प्रौद्योगिकी से संबंधित अनुप्रयोग, ई-अपशिष्ट एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन से संबंधित प्रौद्योगिकियां।
  • इस टीटीएफ का एक शासी बोर्ड होगा और इसकी गतिविधियों का समग्र नियंत्रण शासी बोर्ड के तहत होगा।
  • शासी बोर्ड में प्रत्येक सदस्य देश की ओर से एक नामांकित व्यक्ति शामिल होगा।

बिम्सटेक टीटीएफ से निम्नलिखित परिणाम अपेक्षित हैं:

  • बिम्सटेक देशों में उपलब्ध प्रौद्योगिकियों का डाटाबैंक,
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रबंधन, मानकों, प्रमाणन, माप विज्ञान (मेट्रोलॉजी), परीक्षण और अंशांकन (कैलिब्रेशन) की सुविधाओं से संबंधित क्षेत्रों में अच्छी परिपाटियों से जुड़ी सूचना का भंडार,
  • क्षमता निर्माण, विकास कार्यों से जुड़े अनुभवों एवं अच्छी परिपाटियों को साझा करना,
  • बिम्सटेक देशों के बीच प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण और उनका उपयोग।

4. सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए ‘अग्निपथ’ योजना को मंजूरी: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

प्रारंभिक परीक्षा: ‘अग्निपथ’ योजना।  

मुख्य परीक्षा: ‘अग्निपथ’ योजना के तहत राष्ट्र, समाज और राष्ट्र के युवाओं के लिए एक अल्पकालिक सैन्य सेवा के लाभ बहुत अधिक हैं।  इसका आलोचनात्मक मूल्याङ्कन कीजिए ।  

प्रसंग: 

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेना भर्ती योजना को मंजूरी दी। 

उद्देश्य:

  • इस योजना को ‘अग्निपथ’ और इस योजना के तहत चुने गए युवाओं को अग्निवीर कहा जाएगा। 
  • अग्निपथ के तहत देशभक्त युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सशस्त्र बलों में सेवा का मौका दिया जायगा।

विवरण:  

  • अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों के युवा प्रोफाइल को सक्षम करने के लिए डिजाइन की गई है। 
  • यह उन युवाओं को अवसर प्रदान करेगा जो समाज से युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करके वर्दी धारण करने के प्रति इच्छुक हो सकते हैं,एवं समकालीन तकनीकी प्रवृत्तियों के अनुरूप हैं और समाज में कुशल, अनुशासित और प्रेरित जनशक्ति की पूर्ति करते हैं।
  • यह परिकल्पना की गई है कि इस योजना के कार्यान्वयन से भारतीय सशस्त्र बलों की औसत आयु लगभग 4-5 वर्ष कम हो जाएगी।
  • आत्म-अनुशासन, परिश्रम और गहरी समझ के साथ अत्यधिक प्रेरित युवाओं के संचार से राष्ट्रीय को अत्यधिक लाभ होता है जो पर्याप्त रूप से कुशल होंगे और अन्य क्षेत्रों में योगदान करने में सक्षम होंगे।
  • राष्ट्र, समाज और राष्ट्र के युवाओं के लिए एक अल्पकालिक सैन्य सेवा के लाभ बहुत अधिक हैं।
  • इसमें देशभक्ति की भावना, टीम वर्क, शारीरिक फिटनेस में वृद्धि, देश के प्रति निष्ठा और बाहरी खतरों, आंतरिक खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के समय राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता शामिल है।
  • यह तीनों सेनाओं की मानव संसाधन नीति में एक नए युग की शुरुआत करने के लिए सरकार द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख रक्षा नीति सुधार है।

अग्निवीरों को मिलने वाले लाभ:

  • अग्निवीरों को तीन सेनाओं में लागू जोखिम और कठिनाई भत्ते के अतिरिक्त मासिक पैकेज दिया जाएगा। 
  • चार साल की कार्यावधि के पूरा होने पर,अग्निवीरों को एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज का भुगतान किया जाएगा, जिसमें उनका योगदान शामिल होगा जिसमें उस पर अर्जित ब्याज और सरकार की संचित राशि के बराबर योगदान देगी ।
  • ‘सेवा निधि’ को आयकर से छूट दी जाएगी।
  • ग्रेच्युटी और पेंशन संबंधी लाभों का कोई अधिकार नहीं होगा।
  • अग्निवीरों को भारतीय सशस्त्र बलों में उनकी कार्यावधि के दौरान 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।
  • राष्ट्र की सेवा की इस अवधि के दौरान, अग्निवीरों को विभिन्न सैन्य कौशल,अनुभव, अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व गुण, साहस और देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जायगा ।
  • चार साल के इस कार्यकाल के बाद, अग्निवीरों को नागरिक समाज में शामिल किया जाएगा जहां वे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अत्यधिक योगदान दे सकते हैं।
  • प्रत्येक अग्निवीर द्वारा प्राप्त कौशल को उनके अद्वितीय बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए एक प्रमाणपत्र में मान्यता दी जाएगी।
  • इसके अलावा, लगभग 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि अग्निवीर को वित्तीय दबाव के बिना अपने भविष्य   को आगे बढ़ाने में मदद करेगी ।

लाभ:

  • सशस्त्र बलों की भर्ती नीति में परिवर्तनकारी सुधार।
  • युवाओं को देश की सेवा करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान करने का अनूठा अवसर।
  • सशस्त्र बलों का प्रोफाइल युवा और ऊर्जावान।
  • अग्निवीरों के लिए आकर्षक वित्तीय पैकेज।
  • अग्निवीरों के लिए सर्वोत्तम संस्थानों में प्रशिक्षण लेने और उनके कौशल और योग्यता को बढ़ाने का अवसर।
  • सभ्य समाज में सैन्य लोकाचार के साथ अनुशासित और कुशल युवाओं की उपलब्धता।

नियम एवं शर्तें:

  • अग्निपथ योजना के तहत, अग्निवीरों को चार साल की अवधि के लिए संबंधित सेवा अधिनियमों के तहत बलों में चुना जाएगा। सशस्त्र बलों में एक अलग रैंक बनाएंगे, जो किसी भी मौजूदा रैंक से अलग होगी। 
  • सशस्त्र बलों द्वारा समय-समय पर घोषित की गई संगठनात्मक आवश्यकता और नीतियों के आधार पर चार साल की सेवा पूरी होने पर, अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में स्थायी नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
  • इन आवेदनों पर उनकी चार साल की कार्यावधि के दौरान प्रदर्शन सहित अन्य मानदंडों के आधार पर केंद्रीकृत तरीके से विचार किया जाएगा और प्रत्येक विशिष्ट बैच के 25 प्रतिशत को सशस्त्र बलों के नियमित कैडर में नामांकित किया जाएगा।
  • सभी तीन सेनाओं के लिए एक ऑनलाइन केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से नामांकन किया जाएगा, जिसमें विशेष रैलियों और मान्यताप्राप्त तकनीकी संस्थानों जैसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय कौशल योग्यता संरचना से कैंपस साक्षात्कार शामिल हैं।
  • नामांकन ‘ऑल इंडिया ऑल क्लास’ के आधार पर होगा और पात्र आयु 17.5 से 21 वर्ष के बीच होगी।
  • विभिन्न श्रेणियों में नामांकन के लिए अग्निवीरों की शैक्षिक योग्यता यथावत रहेगी। {उदाहरण के लिए: जनरल ड्यूटी (जीडी) सैनिक में प्रवेश के लिए, शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10 है}।

 5. कैबिनेट ने नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट धोलेरा, अहमदाबाद के विकास की मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

प्रारंभिक परीक्षा:  ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट।  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 1305 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से गुजरात के धोलेरा में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के पहले चरण के विकास के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसे 48 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है।

उद्देश्य:

  • धोलेरा हवाई अड्डे को धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (डीएसआईआर) से यात्री और कार्गो यातायात मिलेगा और औद्योगिक क्षेत्र की सेवा के लिइसे कार्गो का एक प्रमुख केन्‍द्र बनने की उम्मीद है। 
  • यह हवाई अड्डा नजदीकी क्षेत्र की जरूरतें भी पूरा करेगा और अहमदाबाद के दूसरे हवाई अड्डे के रूप में काम करेगा।

विवरण:  

  • यह परियोजना धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड (डीआईएसीएल) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है, जो एक संयुक्त उद्यम कंपनी है जिसमें भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), गुजरात सरकार (जीओजी) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) शामिल हैं जिनकी शेयर पूंजी की हिस्‍सेदारी का अनुपात 51:33:16  है। 
  • धोलेरा में न्यू ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा अहमदाबाद, हवाई अड्डे से 80 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित है।
  • हवाई का संचालन 2025-26  एक शुरू होने की उम्मीद  है और प्रारंभ में प्रति वर्ष 3 लाख यात्रियों के इस हवाई अड्डे का इस्‍तेमाल करने का अनुमान है जिसके 20 वर्षों की अवधि में 23 लाख तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • वर्ष 2025-26 से हर वर्ष 20,000 टन माल यातायात का भी अनुमान है जो 20 वर्षों की अवधि में बढ़कर 2,73,000 टन हो जाएगा।

 6. ड्रोन नियम, 2021 के तहत गुरुग्राम स्थित आईओ-टेक-वर्ल्ड को पहला टाइप सर्टिफिकेट प्रदान किया: 

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था: 

विषय: एमएसएमई सेक्टर के विकास में तेजी लाने में इसकी भूमिका। 

प्रारंभिक परीक्षा: टाइप सर्टिफिकेट (टीसी)। 

मुख्य परीक्षा: केंद्र सरकार ने ड्रोन सुधार एवं इसे बढ़ावा देने के लिए क्या क्या उपाय किए हैं विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए ?  

प्रसंग: 

  • केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आईओ-टेक-वर्ल्ड एविगेशन प्राइवेट लिमिटेड को ड्रोन नियम, 2021 के तहत पहला टाइप सर्टिफिकेट (टीसी) प्रदान किया।

उद्देश्य:

  • गुरुग्राम स्थित कंपनी की स्थापना अप्रैल 2017 में हुई थी और यह भारत में किसान ड्रोन के अग्रणी निर्माताओं में से एक है।  
  • ड्रोन नियम, 2021 के तहत, ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद केवल 34 दिनों में पहला टाइप सर्टिफिकेट (टीसी) प्रदान किया जाता है।
  • ड्रोन प्रमाणन योजना को 26 जनवरी, 2022 को अधिसूचित किया गया, जिससे ड्रोन निर्माताओं को टाइप सर्टिफिकेट प्राप्त करना आसान हो गया है।
  • ड्रोन प्रमाणन योजना से भारत में निर्मित होने वाले विश्वस्तरीय ड्रोन के लिए एक इको-सिस्टम तैयार होने की संभावना है।

विवरण:  

  • आईओ-टेक-वर्ल्ड ने 11 मई, 2022 को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर अपना ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद 34 दिनों में टाइप सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।
  • ड्रोन नियम, 2021, भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) या प्रमाणन निकायों (सीबी) को 60 दिनों और डीजीसीए को टाइप सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन, (यानी कुल 75 दिन) की अनुमति देता है, बशर्ते सभी आवश्यक दस्तावेज और परीक्षण रिपोर्ट विनिर्देशों के अनुसार हों।
  • ड्रोन नियम, 2021 को 25 अगस्त, 2021 को अधिसूचित किया गया था और ड्रोन के लिए टाइप सर्टिफिकेट (टीसी) प्राप्त करने के लिए ‘मानव रहित विमान प्रणालियों (सीएसयूएएस) के लिए प्रमाणन योजना’ को 26 जनवरी, 2022 को अधिसूचित किया गया था।
  • क्यूसीआई द्वारा अनुमोदित तीन विश्व-प्रसिद्ध प्रमाणन निकाय (सीबी) हैं – टीक्यू  सर्ट, यूएल इंडिया और ब्यूरो वैरिटस।
  • ड्रोन निर्माता अपने ड्रोन प्रोटोटाइप के परीक्षण के लिए किसी भी प्रमाणन निकाय से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • जनवरी 2022 की ड्रोन प्रमाणन योजना को भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा ड्रोन स्टार्टअप, उद्योग, शिक्षाविदों और रक्षा विशेषज्ञों के परामर्श से विकसित किया गया था।
  • ड्रोन प्रमाणन योजना के तहत भारत में निर्मित और दुनिया भर में बेचे जाने वाले विश्वस्तरीय ड्रोन के लिए एक इको-सिस्टम तैयार करने की संभावना है।
  • 14 ड्रोन प्रोटोटाइप हैं जो वर्तमान में प्रमाणन परीक्षणों से गुजर रहे हैं। अगले तीन वर्षों में टाइप प्रमाणित प्रोटोटाइप की संख्या 100 से अधिक हो सकती है।
  • भारत ने 2030 तक ड्रोन हब बनने का लक्ष्य रखा है और रिकॉर्ड 34 दिनों में टाइप सर्टिफिकेट जारी करना उस दिशा में एक कदम है।

पृष्ठ्भूमि:

अन्य ड्रोन सुधार:

 

  • 1. केंद्र सरकार ने सुधार के निम्नलिखित उपाय किए हैं:
  • ए. उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021 को 25 अगस्त, 2021 को अधिसूचित किया गया है
  • बी. ड्रोन एयरस्पेस मैप 24 सितंबर, 2021 को प्रकाशित किया गया है, जिससे 400 फीट तक उड़ने वाले ड्रोन के लिए लगभग 90 प्रतिशत भारतीय हवाई क्षेत्र को ग्रीन जोन के रूप में खोल दिया गया है।
  • सी. ड्रोन के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना 30 सितंबर, 2021 को अधिसूचित की गई है।
  • डी.    यूएएस ट्रैफिक मैनेजमेंट (यूटीएम) पॉलिसी फ्रेमवर्क 24 अक्टूबर, 2021 को प्रकाशित किया गया है।
  • इ.    22 जनवरी, 2022 को केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा कृषि ड्रोन की खरीद के लिए मौद्रिक अनुदान कार्यक्रम की घोषणा की गई।
  • एफ.  ड्रोन नियम, 2021 के तहत सभी पांच आवेदन फॉर्म डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर 26 जनवरी, 2022 को ऑनलाइन किए गए हैं।
  • जी.  ड्रोन प्रमाणन योजना को 26 जनवरी, 2022 को अधिसूचित किया गया, जिससे ड्रोन निर्माताओं द्वारा टाइप प्रमाणपत्र प्राप्त करना आसान हो गया है।
  • एच.  1 फरवरी, 2022 को केंद्रीय बजट के हिस्से के रूप में ड्रोन स्टार्टअप्स को समर्थन देने और ड्रोन-ए-ए-सर्विस को बढ़ावा देने के लिए मिशन ‘ड्रोन शक्ति’ की घोषणा की गई है।
  • आई. विदेशी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध और ड्रोन घटकों के आयात को मुक्त करने के लिए 9 फरवरी, 2022 को ड्रोन आयात नीति अधिसूचित की गई है।
  • जे.  ड्रोन पायलट लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त करते हुए, 11 फरवरी, 2022 को ड्रोन (संशोधन) नियम, 2022 को अधिसूचित किया गया है।

2030 तक वैश्विक ड्रोन हब:

  • ड्रोन अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में जबरदस्त लाभ प्रदान करते हैं। 
    • इनमें शामिल हैं- कृषि, खनन, बुनियादी ढांचा, निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया, परिवहन, भू-स्थानिक मानचित्रण, रक्षा और कानून प्रवर्तन।
  • ड्रोन अपनी पहुंच, बहुमुखी इस्तेमाल और उपयोग में आसानी के कारण विशेष रूप से भारत के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण निर्माता हो सकते हैं।
  • नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी, मितव्ययी इंजीनियरिंग, सहायक नीतियों, मौद्रिक प्रोत्साहन और एक विशाल घरेलू मांग के आधार के रूप में अपनी पारंपरिक ताकत को देखते हुए, भारत में 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनने की क्षमता है।

7. सीसीआई ने एयर इंडिया द्वारा एयर एशिया इंडिया में संपूर्ण हिस्‍सेदारी प्राप्‍त करने को मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय:  विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी संस्थान हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई)। 

प्रसंग: 

  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एयर इंडिया द्वारा एयर एशिया इंडिया में संपूर्ण हिस्‍सेदारी प्राप्‍त करने को मंजूरी दे दी है।

विवरण:  

  • प्रस्तावित संयोजन में टीएसपीएल की अप्रत्यक्ष पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक एयर इंडिया लिमिटेड (एआईएल) द्वारा एयरएशिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड (एयर एशिया इंडिया) की संपूर्ण हिस्‍सा शेयर पूंजी को प्राप्‍त करने की परिकल्पना की गई है। 
  • एआईएल, अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड (एआईएक्सएल) के साथ, भारत में मुख्य रूप से (ए) घरेलू निर्धारित हवाई यात्री परिवहन सेवा, (बी) अंतरराष्ट्रीय निर्धारित हवाई यात्री परिवहन सेवा, (सी) हवाई कार्गो परिवहन सेवाएं और (डी) चार्टर उड़ान सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में लगी हुई है।
  • एयर एशिया इंडिया टीएसपीएल और एयर इंडिया इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (एएआईएल) के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जिसमें टीएसपीएल के पास वर्तमान में 83.67 प्रतिशत और एएआईएल की 16.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 
  • एयर एशिया इंडिया “एयर इंडिया” ब्रांड नाम के अंतर्गत काम करती है। 
  • यह निम्नलिखित सेवाएं: (ए) घरेलू निर्धारित हवाई यात्री परिवहन सेवाएं, (बी) एयर कार्गो परिवहन सेवाएं, और (सी) भारत में चार्टर उड़ान सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में लगी हुई है। 
  • एयरएशिया इंडिया अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर निर्धारित हवाई यात्री परिवहन सेवाएं प्रदान नहीं करता है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:  

8. सुगम्य केन डिवाइस:

  • सुगम्य केन डिवाइस एक ऐसा सहायक उपकरण है जिसमें सुगम्य छड़ी संवेदक (केन सेंसर) और  मोड़कर रखे जाने योग्य सफेद बेंत (केन) (फोल्डेबल व्हाइट केन) होती है जिससे किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति को आने-जाने (गतिशीलता) और दिशा-ज्ञान में बुद्धिमत्ता से सहायता मिलती है।
  • सुगम्य केन से चलने- फिरने में सहायता मिलती है और इसका सेंसर अपने डिटेक्शन ज़ोन के भीतर आने वाली बाधाओं का पता लगाता है। 
  • सुगम्य केन में कई वस्तुओं का पता लगाने के लिए अल्ट्रासोनिक सेंसर होते हैं, जो उपयोगकर्ता के रास्ते में निश्चित दिशा और दूरी की सीमा में आते हैं और एक वाइब्रेटर डिवाइस द्वारा निर्मित वाइब्रेटरी पैटर्न के रूप में संदेश देते हैं जिसे सेंसर के बाईं ओर चार्जिंग स्लॉट के नीचे दिए गए पावर ऑन/ऑफ स्लाइडिंग स्विच का उपयोग करके संचालित किया जा सकता है।  
  • सुगम्य केन उपकरण (डिवाइस) में पुनः चार्ज करने योग्य (रिचार्जेबल) लिथियम आयन बैटरी है जो इस डिवाइस का उपयोग करते समय उपयोगकर्ता के लिए पर्याप्त बैक अप प्रदान करती है। 
  • सुगम्य केन- सेंसर और सफेद बेंत का संयोजन है। सफेद बेंत पाइप के 04 टुकड़ों का सेट है और सेंसर इस पाइप के शीर्ष टुकड़े पर लगाया गया है। 
  • पाइप के सभी 04 टुकड़े एक दूसरे से इस तरह जुड़े हुए हैं कि इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है।  
  • सुगम्य बेंत (केन) का पूरा वजन – 348 ग्राम, बहुत हल्का वजन और आरामदायक।
  • सुगम्य बेंत को जब भी आवश्यक हो सफेद बेंत से अलग किया जा सकता है और एक साधारण पेंच वाले तंत्र का उपयोग करके फिर से जोड़ा जा सकता है।

14 June 2022 : PIB विश्लेषण  :-Download PDF Here

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