13 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम: 
  2. आरआईएल-बीजीईपीआईएल विवाद: 
  3. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन 2021, एनईएसडीए 2021 का दूसरा संस्करण जारी:

1. चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम: 

सामान्य अध्ययन: 2

कल्याणकारी पहल:

विषय: सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एवं उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम।

मुख्य परीक्षा:   चावल-फोर्टिफिकेशन योजना में शामिल लाभ एवं जोखिमों पर चर्चा कीजिए।  

प्रसंग: 

  • चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम के तहत सरकार मार्च 2023 तक 291 आकांक्षी और भारी मांग वाले जिलों को कवर करने की योजना बना रही है। 

उद्देश्य:

  • ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से अप्रैल 2022 में शुरू हुए फोर्टिफाइड चावल के वितरण’ के दूसरे चरण के तहत  90 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल का उत्पादन पहले ही किया जा चुका है। 
  • इस कार्यक्रम के दूसरा चरण में मार्च, 2023 तक सभी आकांक्षी और भारी मांग वाले कुल 291 जिलों को कवर किया जाएगा।
  • इसमें चरण- I प्लस टीपीडीएस (लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली) और ओडब्ल्यूएस (अन्य कल्याणकारी योजनाएं) भी शामिल हैं।
  • फोर्टिफाइड चावल बौनापन, गलगंड, आईआईएच (थायरोटॉक्सिकोसिस) और मस्तिष्क क्षति को रोकने में सहायता करता है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक लागत प्रभावी व टिकाऊ विकल्प है।

विवरण:  

  • चरण- I के तहत मार्च, 2022 तक पूरे भारत में आईसीडीएस (एकीकृत बाल विकास सेवाएं) व प्रधानमंत्री पोषण को कवर किया गया और लगभग 17 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल वितरित किया गया ।
  • हालांकि, पीडीएस के तहत 90 से अधिक जिलों (16 राज्यों में) ने फार्टिफाइड चावल की खरीद शुरू कर दी है और अब तक लगभग 2.58 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है।
  • इस कार्यक्रम के परिणामों और प्रभाव का आकलन करने के लिए नीति आयोग के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) द्वारा चावल फोर्टिफिकेशन का स्वतंत्र समवर्ती मूल्यांकन किया जाएगा।
  • राज्यों में संचालन समिति कार्यक्रम की निगरानी करेगी।
  • इसके त्वरित कार्यान्वयन के प्रयासों के तहत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग राज्य सरकार/केंद्रशासित प्रदेश, संबंधित मंत्रालयों/विभागों, विकास भागीदारों, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों जैसे सभी प्रासंगिक हितधारकों के साथ इकोसिस्टम से संबंधित सभी गतिविधियों का समन्वय कर रहा है।
  • एफसीआई और राज्य एजेंसियां फोर्टीफाइड चावल की खरीदारी कर रही हैं।
  • इसके तहत अब तक लगभग 126.25 लाख मीट्रिक टन फोर्टीफाइड चावल की खरीद की जा चुकी है।
  • फोर्टिफाइड चावल की पूरी लागत (लगभग 2700 करोड़ रुपये प्रति वर्ष) खाद्य सब्सिडी के तहत केवल भारत सरकार द्वारा  जून, 2024 तक यानी इसके पूर्ण कार्यान्वयन तक वहन की जाएगी।
  • योजना को लेकर पहले चरण ने जिलों के लिए एक इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया है।
  • इसके अलावा इसके तीसरे चरण में मार्च 2024 तक दूसरे चरण के तहत आने वाले इन जिलों के साथ बाकी जिलों को भी कवर किया जाएगा।
  • केवल 0.01 फीसदी जनसंख्या, विशेष रूप से थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित लोगों को फोर्टिफाइड चावल के सेवन से स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
  • फोर्टिफाइड चावल क्रेटिनिज्म, गोइटर, आईआईएच (थायरोटॉक्सिकोसिस), मस्तिष्क क्षति को रोकने, भ्रूण व नवजात स्वास्थ्य और जनसंख्या की उत्पादन क्षमता के सुधार में सहायता करता है।
  • इन बातों को देखते हुए चावल-फोर्टिफिकेशन योजना के लाभ इसमें शामिल जोखिमों से कहीं अधिक हैं।
  • वैश्विक स्तर पर 200 करोड़ से अधिक लोगों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है, 160 करोड़ लोगों को एनीमिया (खून की कमी) है, 50 फीसदी से अधिक लोगों में आयरन की कमी है, हर साल 2,60,100 गर्भधारण न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स (एनटीडी) से प्रभावित होना और कई सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, ये सब मृत्यु, रुग्णता और निम्न मानव विकास के महत्वपूर्ण कारण हैं।
  • इससे पहले “सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चावल का फोर्टिफिकेशन और उसका वितरण” केंद्र प्रायोजित पायलट योजना 2019-20 से लेकर अगले 3 साल की अवधि के लिए लागू की गई थी।
  • इस पायलट योजना के तहत ग्यारह (11) राज्यों ने अपने चिन्हित जिलों (हर राज्य में 1 जिला) में फोर्टिफाइड चावल का सफलतापूर्वक वितरण किया। इस पायलट योजना की अवधि 31 मार्च, 2022 को समाप्त हो गई।
  • पोषण सुरक्षा प्रदान करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस), एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस), प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण- पीएम पोषण [पहले मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम)] और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में भारत सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं (ओडब्ल्यूएस) के माध्यम से 2024 तक चरणबद्ध तरीके से फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति के लिए अपनी मंजूरी दी है।

2. आरआईएल-बीजीईपीआईएल विवाद: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय या वैश्विक समूह एवं भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना। 

प्रारंभिक परीक्षा: आरआईएल-बीजीईपीआईएल विवाद। 

प्रसंग: 

  • मीडिया के कुछ हिस्से ने इस पर खबर की है कि आरआईएल-बीजीईपीआईएल विवाद में भारत सरकार की अपील को खारिज कर दिया गया है। 

विवरण:  

  • यह मामला पन्ना-मुक्ता और ताप्ती क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां सरकार ने 22 दिसंबर, 1994 को ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और एनरॉन (अब बीजीईपीआईएल- बीजी एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन इंडिया लिमिटेड) के साथ दो उत्पादन साझाकरण अनुबंध (पीएससी) किए गए थे। 
  • इसके बाद इन पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जिसे 2010 में मध्यस्थता के लिए भेजा गया था। अब तक मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने आठ सारभूत आंशिक निर्णय सुनाए हैं।
  • 2016 में न्यायाधिकरण के दिए गए अंतिम आंशिक निर्णय में 69 में से 66 मुद्दों का निर्णय भारत सरकार के पक्ष में आया था।
  • इस निर्णय के अनुरूप भारत सरकार ने ठेकेदारों को 3.85 बिलियन अमेरीकी डॉलर (ब्याज को छोड़कर) की धनराशि का भुगतान करने के लिए एक मांग पत्र जारी किया।
  • इस निर्णय के अनुरूप ठेकेदार भुगतान करने में विफल रहा। इसे देखते हुए, सरकार ने अंतिम आंशिक निर्णय- 2016 के कार्यान्वयन के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया है।
  • इस बीच, 2016 में आरआईएल और बीजीपीआईएल ने ब्रिटिश वाणिज्यिक न्यायालय में 2016 के अंतिम आंशिक निर्णय को चुनौती दी थी।
  • इन चुनौतियों को नौ व्यापक शीर्षकों के तहत वर्गीकृत किया गया था। अप्रैल, 2018 में ब्रिटिश न्यायालय ने नौ में से आठ चुनौतियों को खारिज करते हुए भारत के पक्ष में एक निर्णय दिया था।
  • वहीं, नौवीं चुनौती के बारे में अदालत ने इसे पुनर्विचार के लिए न्यायाधिकरण के पास वापस भेजे जाने का निर्देश दिया।
  • इसके बाद न्यायाधिकरण ने इस चुनौती पर आंशिक रूप से ठेकेदारों के पक्ष में अपना आदेश दिया।
  • 402 मिलियन अमेरीकी डॉलर के दावों में से न्यायाधिकरण ने 143 मिलियन अमेरीकी डॉलर की लागत की अनुमति दी और ठेकेदारों को 259 मिलियन अमेरीकी डॉलर की लागत को खारिज कर दिया।
  • इस बीच, भारत सरकार और ठेकेदार, दोनों ने ब्रिटिश वाणिज्यिक न्यायालय में 2018 के निर्णय को चुनौती दी।
  • मार्च 2020 में न्यायालय ने 2018 के निर्णय के इस हिस्से को न्यायाधिकरण के पास वापस भेज दिया।
  • इसके बाद न्यायाधिकरण ने इस मामले की फिर से सुनवाई की और जनवरी 2021 में ठेकेदारों के पक्ष में 111 मिलियन अमेरीकी डॉलर की अतिरिक्त धनराशि प्रदान की।
  • इस निर्णय को सरकार ने ब्रिटिश वाणिज्यिक न्यायालय में चुनौती दी। 9 जून, 2022 को दिया गया मौजूदा निर्णय इसी चुनौती से संबंधित है।
  • ब्रिटिश वाणिज्यिक न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए भारत सरकार को इस न्यायालय की अनुमति लेने का अधिकार है।
  • इसके अलावा, ठेकेदार के पक्ष में 111 मिलियन अमेरीकी डॉलर और 143 मिलियन अमेरीकी डॉलर के दो आंशिक निर्णयों के बावजूद 2016 के अंतिम आंशिक निर्णय के तहत मध्यस्थ न्यायाधिकरण द्वारा ब्याज सहित 3.85 बिलियन अमेरीकी डॉलर धनराशि का बड़ा निर्णय सरकार के पक्ष में है।
  • अब दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर निष्पादन याचिका के माध्यम से इसका अनुसरण किया जा रहा है।
  • यह उल्लेख करना उचित है कि 9 जून, 2022 के ब्रिटिश न्यायालय के हालिया निर्णय और आदेश (111 मिलियन अमेरिकी डॉलर) में भी ठेकेदार के 148 मिलियन अमेरीकी डॉलर के दावे को खारिज कर दिया गया है।

 3. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन 2021, एनईएसडीए 2021 का दूसरा संस्करण जारी: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू। 

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन 2021

प्रसंग: 

  • केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन 2021, एनईएसडीए 2021 का दूसरा संस्करण जारी किया। 

उद्देश्य:

  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी असेसमेंट 2021, एनईएसडीए 2021 का दूसरा संस्करण जारी किया। 
  • रिपोर्ट राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के मूल्यांकन को कवर करते हुए तैयार की गई है और नागरिकों को ऑनलाइन सेवाएं देने में केंद्रीय मंत्रालयों की प्रभावशीलता पर केंद्रित है।
  • यह रिपोर्ट सरकारों को अपनी ई-गवर्नेंस सेवा वितरण प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी देती है।

विवरण:  

  • जम्मू-कश्मीर ई-गवर्नेंस सेवाओं के वितरण में भारत के सभी केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे ऊपर है। 
  • केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में, जम्मू-कश्मीर का पहली बार एनईएसडीए 2021 में मूल्यांकन किया गया था और यह सभी केंद्रशासित प्रदेशों के बीच यह उच्चतम स्कोर पर था।
  • 31 अक्टूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद, जम्मू-कश्मीर सुशासन सूचकांक वाला देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश बन गया और इस साल जनवरी में केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के 20 जिले के लिए जिला सुशासन सूचकांक लॉन्च करने वाला भी पहला था।
  • जम्मू-कश्मीर में दो सचिवालयों का संचालन ई-ऑफिस की वजह से संभव था और इसने वार्षिक दरबार के संचालन के दौरान दो राजधानी शहरों – श्रीनगर और जम्मू के बीच 300 ट्रक से अधिक फाइलों की आवाजाही की जरूरत को समाप्त कर दिया है।
  • इससे प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये की बचत हुई और जम्मू और श्रीनगर में फाइलों को तैयार करने के लिए क्रमशः छह सप्ताह के आधिकारिक ब्रेक के बिना पूरे केंद्रशासित प्रदेश में निर्बाध कार्य की संस्कृति विकसित हुई।
  • 28 मंत्रालयों/विभागों ने पहले ही ई-ऑफिस वर्जन 7.0 को अपनाया है, साथ ही केंद्रीय पंजीकरण इकाइयों के डिजिटलीकरण के साथ-साथ कागज रहित सचिवालयों का निर्माण किया है, जहां रसीदें और फाइलें ऑनलाइन चलती हैं और पत्राचार ऑनलाइन होता है।
  • शेष 56 मंत्रालयों/विभागों के लिए इसे अपनाने का कार्यक्रम तैयार कर लिया गया है और फरवरी, 2023 तक सभी मंत्रालयों के पास ई-ऑफिस वर्जन 7.0 होगा।
  • डेस्क अधिकारी प्रणाली को प्रस्तुत करने और अपनाने के 4 स्तरों के साथ फाइलों की सीमित आवाजाही ने सुनिश्चित किया है कि अधिकारी अब गैर-निष्पादित फाइलों को छिपा नहीं सकते हैं।
  • महामारी और तालाबंदी में केंद्रीय सचिवालय का निर्बाध कामकाज ई-ऑफिस के कारण संभव हुआ।
  • उप सचिवों, संयुक्त सचिवों, अपर सचिवों और सचिवों की वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क तक पहुंच थी और वे इस अवधि के दौरान ई-फाइलों पर नीतिगत निर्णय ले सकते थे।
  • डीआरडीओ में ई-ऑफिस को अपनाना एक मील का पत्थर का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कई फील्ड ऑफिस वाले विभाग फाइलों के तत्काल हस्तांतरण के लिए ई-ऑफिस का उपयोग कर सकते हैं।
  • इसी तरह, ई-ऑफिस ने समन्वित वित्त संभाग (आईएफडी) और व्यय विभाग को फाइलों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की है।
  • ई-ऑफिस वर्जन 7.0 ई-ऑफिस पर 6.0 से अधिक नई सुविधाओं के साथ एक महत्वपूर्ण प्रगति है ।
  • इसने आईएफडी और व्यय विभाग को फाइलों की निर्बाध आवाजाही को सक्षम किया है।
  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत की ई-गवर्नेंस नीतियों में सुधार किया गया है और नागरिक संतुष्टि के स्तर में वृद्धि हुई है और कई मायनों में, सरकार और नागरिकों को करीब लाने में प्रौद्योगिकी सफल रही है।
  • एनईएसडीए 2021 में राज्य पोर्टलों के मूल्यांकन में केरल सबसे आगे रहा और तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश द्वारा की गई प्रगति भी सराहनीय रही।
  • सर्विस पोर्टल में राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और मेघालय ने रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
  • सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने एकीकृत सेवा पोर्टलों के प्रचार और उनके राज्य पोर्टलों पर दी जा रही सेवाओं में भी सुधार हुआ है।
  • प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग वर्तमान में अपने डैशबोर्ड पर दैनिक आधार पर ई-ऑफिस को अपनाने की निगरानी करता है, कैबिनेट सचिव को अपने मासिक डीओ पत्रों में ई-ऑफिस कार्यान्वयन पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और मंत्रिपरिषद को सूचना प्रसारित करता है।
  • इसके अलावा डीएआरपीजी ने 90 प्रतिशत ई-ऑफिस डिजिटलाइजेशन करने वाले संस्थानों को मान्यता प्रमाणपत्र स्थापित किया था।
  • इन अथक प्रयासों के कारण ई-ऑफिस के तहत उदाहरणों और उपयोगकर्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हुई।
  • एनईएसडीए 2021 में, 2019 में 872 की तुलना में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 1400 सेवाओं का मूल्यांकन किया गया, जो 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
  • अध्ययन के दौरान किए गए राष्ट्रव्यापी नागरिक सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा था कि वे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा प्रदान की जाने वाली ई-सेवाओं से वे संतुष्ट हैं।
  • वित्त और स्थानीय शासन की ई-सेवाएं, उपयोगिता सेवा क्षेत्र नागरिकों द्वारा सबसे अधिक व्यापक रूप से उपयोग किए जाते थे।
  • एकल साइलो विभागीय पोर्टलों से एकीकृत/केंद्रीकृत पोर्टलों में स्थानांतरित होने वाली ई-सेवा वितरण की बढ़ती प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप उच्च नागरिक संतुष्टि हुई है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं। 

13th June 2022 : PIB विश्लेषण  :-Download PDF Here

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